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आनन्द मनाओ और ईश्वर की मुक्ति को ग्रहण करने के लिए अपना हृदय खोलो

In Church on March 12, 2018 at 4:15 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार, 12 मार्च 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 11 मार्च को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, ̎अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।̎

चालीसा काल के इस चौथे रविवार को जिसे लेतारे रविवार अर्थात् आनन्द मनाने का रविवार कहा जाता है क्योंकि यूखरिस्त की धर्मविधि में प्रवेश करने का भजन, हमें आनन्द मनाने का निमंत्रण देता है। ̎येरूसालेम आनन्द मना।̎ […] इस प्रकार यह आनन्द मनाने का निमंत्रण है। ̎तुम जो उदास थे हर्षित होओ और आनन्द मनाओ।̎ इसी भजन से ख्रीस्तयाग आरम्भ होता है।

संत पापा ने प्रश्न किया, ̎ इस आनन्द का कारण क्या है? ̎ उन्होंने स्वयं उत्तर देते हुए कहा, ̎ इसका कारण है मानव के प्रति ईश्वर का महान प्रेम जैसा कि आज के सुसमाचार पाठ में बतलाया गया है। ईश्वर ने संसार को इतना प्यार किया कि उसने उसके लिए अपने एकलौते पुत्र को अर्पित कर दिया। जिससे जो उस में विश्वास करता है, उसका सर्वनाश न हो बल्कि अनन्त जीवन प्राप्त करे।̎ (यो. 3,16) ये शब्द येसु द्वारा उस समय बोले गये थे जब उन्होंने निकोदिमुस से वार्तालाप की थी। सराँश में, हम कह सकते हैं कि ख्रीस्तीय घोषणा के केंद्र में ईश्वर हैं। वे बगल नहीं हैं किन्तु मानव के इतिहास में प्रवेश करते और हमारे जीवन में अपने आप को पूरी तरह एक कर देते हैं, अपनी कृपा से इसे संचालित करने हेतु इसमें प्रवेश करते और इसे बचाते हैं।

संत पापा ने कहा, ̎हम उनकी घोषणा को सुनने के लिए बुलाये जाते हैं तथा अपने आप को पूर्ण समझने, ईश्वर के बिना अपना काम करने, उनसे एवं उनके शब्दों से पूर्ण स्वतंत्रता का दावा करने के प्रलोभन का बहिष्कार करने के लिए निमंत्रित हैं। जब हम अपने आप को पहचानने का प्रयास करते हैं कि हमारे जीवन का मकसद क्या है तब इसके लिए साहस की आवश्यकता होती है। हम जब महसूस करते हैं कि हम अपनी दुर्बलताओं एवं सीमाओं को पहचानने कि लिए बुलाये गये हैं तब हम भविष्य की चिंता एवं परेशानियों में पड़ जाते हैं, हमें बीमारी और मृत्यु का भय होता है। इससे मालूम होता है कि लोग क्यों बाहर निकलने का रास्ता ढूँढ़ते हुए, नशीली पदार्थों, अंधविश्वास अथवा जादू-टोना जैसे खतरनाक रास्ते अपनाते हैं। अपनी कमजोरियों एवं दुर्बलताओं से अवगत होना अच्छा है, हमें उन्हें जानना चाहिए किन्तु उनके कारण निराश नहीं होना बल्कि उन्हें ईश्वर को समर्पित कर देना चाहिए जिससे कि वे हमें चंगाई प्रदान करें, अपने हाथों से आगे ले चलें और हमें अकेला कभी न छोड़ें। ईश्वर हमारे साथ हैं, यही कारण है जिसके लिए हम आज आनन्द मनाते हैं। येरूसालेम आनन्द मना क्योंकि ईश्वर हमारे साथ हैं।

संत पापा ने कहा कि हमारे लिए पिता ईश्वर में सच्ची और महान आशा हैं जो करुणा के धनी हैं जिन्होंने हमें बचाने के लिए अपना पुत्र प्रदान किया है और यही हमारा आनन्द है। हमारे पास कई तरह की उदासी है किन्तु यदि हम सच्चे ख्रीस्तीय हैं तो हमारे पास आशा है जो आनन्द को बढ़ता एवं सुरक्षा प्रदान करता है। जब हम अपनी कमजोरियों, पापों एवं दुर्बलताओं को देखते हैं तो हमें निरूत्साहित नहीं होना चाहिए क्योंकि ईश्वर हमारे करीब हैं। येसु हमें चंगा करने के लिए क्रूस पर हैं। यही ईश्वर का प्रेम है। हम क्रूस पर नजर डालें और अपने आपसे कहें, ईश्वर मुझे प्यार करते हैं।̎ यह सच है कि कमजोरियां, पाप और दुर्बलताएँ हैं किन्तु ईश्वर उन सबसे बढ़कर हैं। हम इसे न भूलें कि ईश्वर हमारी कमजोरियों, पापों एवं बेईमानी से बढ़कर हैं अतः हम प्रभु का हाथ पकड़ें, क्रूस की ओर नजर डालें और आगे बढ़ें।

संत पापा ने माता मरियम की याद करते हुए कहा, ̎ मरिया दया की माता, हमारे हृदय में ईश्वर के प्रेम का गहरा एहसास डाल दे। जब हम अकेलापन महसूस करें तब हमारे पास रहे। जब हम जीवन की कठिनाइयों से हार जाने के प्रलोभन में पड़ें तब अपने पुत्र येसु के प्रेम को अनुभव कर पाने में सहायता दे ताकि चालीसे काल की हमारी यात्रा क्षमाशीलता, स्वागत एवं उदारता के अनुभव की यात्रा बन जाए।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपन प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने देश – विदेश से एकत्रित सभी तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा, ̎ मैं आप सभी का अभिवादन करता हूँ जो रोम, इटली तथा विश्व के विभिन्न हिस्सों से तीर्थयात्रा पर आये हैं, खासकर,अग्रोपोली, पादुवा, त्रोइना, फोज्जा और कलतानिस्सेत्ता के विश्वासी एवं पादुवा के संत अंतोनी पल्ली के युवा।

संत पापा ने रोम में ब्राजीलियाई समुदाय, तिवोली के क्रेसिमनदी के विश्वासी एवं उनके धर्माध्यक्ष तथा अविलियानो एवं सारोन्नो के युवाओं का भी अभिवादन किया।

संत पापा ने विश्व के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों का विशेषरूप से अभिवादन किया जिन्होंने ̎ वाटिकन हैकाथॉन ̎ में भाग लिया था, जिसका आयोजन संचार विभाग की ओर से किया गया था। संत पापा ने उन्हें सम्बोधित कर कहा, ̎ प्रिय युवाओं, ईश्वर प्रदत्त बुद्धि का प्रयोग सच्चाई एवं जरूरतमंद लोगों के लिए करना अच्छा है।̎

अंत में संत पापा ने प्रार्थना का आग्रह करते हुए सभी को शुभ रविवार की मंगल कामनाएँ अर्पित की।


(Usha Tirkey)

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कंधमाल हिंसा से बचे लोगों ने न्याय के लिए दबाव डाला

In Church on March 12, 2018 at 4:13 pm

कन्जमेंदी (ओडिशा), सोमवार  12 मार्च 2018 (मैटर्स इंडिया) :  सन् 2007 और 2008 में हुए कंधमाल में कट्टरवादी हिंसा से बचे हुए लोगों ने 10 मार्च को ओडिशा के कंजमेंदी जिले में एक जिला स्तर की सभा आयोजित की। सभा में भाग लेने वाली रिनी डिंगल ने बताया कि सभा में कई लोगों ने साझा किया कि 2016 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक उन्हें अभी तक सरकारी मुआवजा और कानूनी न्याय प्राप्त नहीं हुआ है।

यह जानकर उन्होंने खेद प्रकट किया कि हिंसा से बचे हुए बहुत से लोगों ने अपने प्रियजनों, घरों और सामानों को खो दिया है, उन्हें सरकार की सूची में शामिल नहीं किया गया है।

स्थानीय नेता बिप्रा चरण नायक ने कहा कि हमने सरकार को फिर से गणना करने और पर्याप्त मुआवजा प्रदान करने हेतु अपील की है। उन्होंने कहा कि इस सभा का उद्देश्य प्रभावित लोगों के न्याय के लिए दबाव डालना था।

ब्लॉक के कुछ प्रतिनिधियों ने कहा, “हमारे गांवों में, लूटपाट हत्या और घरों के नष्ट होने के मामले हैं, परंतु हमारे नाम सरकार की सूची में नहीं हैं।”

कुछ अन्य नेताओं ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने 315 अदालतों के मामलों को फिर से खोलने का आदेश दिया है, लेकिन हमारे कानूनी सहायता प्रणाली में पिछली विफलताओं के कारण हमें सफलता के बारे में संदेह है।”

अधिकांश प्रतिनिधियों ने व्यक्त किया, “नष्ट किए गए घरों के लिए घोषित मुआवजे पर्याप्त नहीं हैं।”

2008 में करीब चार महीने तक कंधमाल की हिंसा ने 100 से ज्यादा लोगों की जानें ले ली थी और 50,000 से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस ने ‘एकजुटता के वैश्वीकरण’ के लिए पुकार लगायी

In Church on March 12, 2018 at 4:11 pm

रोम, सोमवार 12 मार्च 2018 ( वीआर,रेई) : संत पापा फ्राँसिस रविवार पूर्वाहन को रोम स्थित संत इजीदियो समुदाय के मुख्यालय का दौरा किया जहाँ संत इजीदियों समुदाय के सदस्य अपनी संस्था की स्थापना की 50वीं वर्षगाँठ मनाने के लिए देश विदेशों एकतत्रित हुए थे।

संत पापा ने ‘सांता मरिया इन त्रासतेवेरे गिरजाघर’ में संस्था के संस्थापक अंद्रेया और अन्य सदस्यों से मुलाकात की। संत पापा ने उन्हें अपने मिशन को जारी रखने हेतु बढ़ावा दिया। इजीदियो समुदाय गरीब बच्चों, अनाथों, बीमारों, बुजुर्गों, आवासहीनों, प्रवासियों शरणार्थियों की मदद करती और विभिन्न समुदायों के बीच शांति और अंतरधार्मिक वार्ता में विशेष योगदान देती है। यह वर्तमान में मध्य अफ्रीकी गणराज्य में शांति लाने हेतु मध्यस्थ बनी हुई है।

संत पापा ने सांता मरिया इन त्रासतेवेरे गिरजाघर’ में प्रार्थना सभा के दौरान संत इजीदियो समुदाय के सदस्यों और स्वयं सेवकों को उनके मिशन के लिए धन्यवाद दिया। संत पापा ने कहा कि यह गिरजाघर में पवित्र मिस्सा समारोह के अलावा कई बेघर लोगों को शरण देता है और क्रिसमस में गरीब लोगों को यहाँ भोजन परोसा जाता है।

गरीब,प्रार्थना,शांति

संत पापा ने कहा कि इजीदियो समुदाय गरीबों के लिए, शांति के लिए और प्रार्थना, इन तीन बिन्दुओं पर केंद्रित है। उन्होंने समुदाय के सदस्यों को वर्तमान में जिम्मेदारी की भावना के साथ भविष्य को सकारात्मक देखने के लिए शुक्रिया अदा किया कि उन्होंने “वैश्वीकरण के विशाल आयाम को वर्तमान समय का भय बताया : ऐसा भय जो अक्सर अजनबी पर केंद्रित होते हैं,  वे जो दूसरों से अलग है, गरीब … जैसे कि वे दुश्मन हैं।”

मानवीय गलियारे

संत पापा फ्राँसिस ने इजीदियो समुदाय के सदस्यों को शामति के लिए प्रार्थना और शांति स्थापना हेतु उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने सीरिया के लोगों की दुर्दशा को उजागर किया, जिनमें से कुछ परिवार सुरक्षित रूप से यूरोप लाए गए हैं संत पापा ने ‘मानवतावादी गलियारों’ के लिए धन्यवाद दिया जिसे समुदाय ने अन्य विश्वास-आधारित संगठनों के सहयोग से संगठित किया है।

एकता का वैश्वीकरण

इस तथ्य पर ध्यान देते हुए कि विश्व का एकमात्र टिकाऊ भविष्य जहां लोग शांति के साथ एक साथ रह सकते हैं, संत पापा ने संत समुदाय को ‘एकजुटता और एकात्मक्ता के वैश्वीकरण’ को बढ़ावा देने तथा खुले वाद-विवाद और वार्ता को समर्थन देते हुए पुलों के निर्माण में सहायता जारी रखने को लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने समुदाय द्वारा चलाये जा रहे शांति के स्कूल की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज विश्व के अनेक देशों में युद्ध चल रहे हैं ऐसे युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में भी बड़े साहस के साथ संत इजीदियो समुदाय वहाँ के बच्चों के लिए ‘शांति का स्कूल’ खोला है, समाज से परित्यक्त बुजुर्गों की देखभाल करते हैं।  आप युद्घ और भूख के कारण अपना देश छोड़े वालों के लिए मानवीय गलियारों को खोलना जारी रखें।


(Margaret Sumita Minj)

कार्डिनल कार्ल लेहमन की मृत्यु पर धार्मिक और राजनीतिक नेताओं ने शोक व्यक्त किया

In Church on March 12, 2018 at 4:10 pm

जर्मनी, सोमवार 12 मार्च 2018 ( वीआर,रेई) : विश्वव्यापी काथलिक कलीसिया और जर्मनी की कलीसिया, कार्डिनल कार्ल लेहमन की मौत से शोकित है। 81 वर्षीय कार्डिनल लेहमन की मृत्यु रविवार11 मार्च को हुई।

कार्डिनल कार्ल लेहमन की मृत्यु पर धार्मिक और राजनीतिक नेताओं ने शोक व्यक्त किया। जर्मन चांसलर एंजेला मार्केल ने कार्डिनल लेहमन के बारे में कहा कि वे कार्डिनल की मृत्यु से अत्यंत दुखी हैं। कार्डिनल लेहमन काथलिक कलीसिया की बड़ी हस्तियों में से एक थे। जर्मन टेलीविजन ने कार्डिनल कार्ल लेहमैन के निधन होने की खबर दी। मेर्केल ने कहा कि वे कार्डिनल के साथ किये अच्छे वार्तालाप और बैठकों की याद करते हुए उनके प्रति आभार प्रकट करती हैं। चांसलर ने उन्हें एक “असाधारण प्रतिभाशाली मध्यस्थ” कहा। उन्होंने न केवल जर्मन काथलिकों और रोम के बीच वार्ता में बल्कि “काथलिक कलीसिया, अन्य ख्रीस्तीय सम्प्रदाय और अन्य धर्मों के विश्वासियों के बीच मध्यस्थ का काम किया था।”

जर्मनी काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल रेनहार्ड मार्क्स ने एक बयान में कहा कि सम्मेलन के पूर्वाध्यक्ष कार्डिनल कार्ल लेहमन का रविवार को मैनचेस स्थित अपने घर में निधन हुआ। कार्डिनल लेहमन को पिछले सितंबर में एक स्ट्रोक हुआ था और हाल के दिनों में वे गंभीर रुप से बीमार थे। पूरे देश के काथलिक ने उनके लिए प्रार्थना की थी। उन्होंने कहा कि “जर्मनी की कलीसिया एक महान व्यक्ति के सामने विनम्रतापूर्वक झुकती है” जिसने “दुनिया भर में काथलिक कलीसिया को प्रभावित किया था।”

कार्डिनल लेहमन का जन्म 16 मई 1936 को जर्मनी के सिंगमारिजेन शहर में हुआ था। वे ईशशास्त्र के प्रोफेसर थे। 1983 में उनकी धर्माध्यक्षीय अभिषेक हुआ और वे मेनज़ के धर्माध्यक्ष नियुक्त किये गये। उन्होंने कहा, “धर्माध्यक्ष का पद लोगों द्वारा सम्मान पाने के लिए नहीं है, लेकिन यह एक मिशन है। धर्माध्यक्ष यहां अधिकार जमाने के लिए नहीं, बल्कि सेवा करने के लिए हैं।”

सन् 2001 में संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने उन्हें कार्डिनल बनाया।

जर्मन धर्माध्यक्ष सम्मेलन के अध्यक्ष के रूप में, उन्होंने देश के 23 लाख से अधिक काथलिकों का 20 वर्षों तक नेतृत्व किया।

21 मार्च को उनका अंतिम संस्कार मेनज़ महागिरजाघर में किया जाएगा।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस ने मार्सेलिया प्रांत (फ्रांस) के सांसदों और राजनेताओं को संबोधित किया

In Church on March 12, 2018 at 4:07 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 12 मार्च 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 12 मार्च को वाटिकन के संत क्लेमेंटीन सभागार में फ्रांस के मार्सेलिया प्रांत से आये हुए करीब 300 सांसदों और राजनेताओं से मुलाकात की।

संत पापा ने मार्सेलिया प्रांत के धर्माध्यक्षों और मोन्सिन्योर जोर्ज पोंतियेर की अगुवाई में काथलिक कलीसिया के केंद्र रोम की तीर्थयात्रा में आने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।

संत पापा ने कहा कि धर्माध्यक्षों द्वारा किए गए प्रस्ताव काथलिक कलीसिया के राजनीतिक प्रतिबद्धता के सम्मान की गवाही देता है, यह विभिन्नता में मिलकर रहने के लिए अनुकूल परिस्थितियों को बनाने की इच्छा से प्रेरित होता है, अनिश्चितता की स्थितियों के लिए सबसे कमजोर लोगों को ध्यान देता है। अपने इलाकों में, कई अन्य स्थानों में, आपको समस्याओं और कई चुनौतियां का सामना करना पड़ता है जहाँ आप  मुश्किल क्षणों में, अपने महान सिद्धांतों के आधार पर काम करते हैं जब आप लंबे समय तक आम लोगों की भलाई के लिए काम करते हैं तब आपके मिशन में “राजनीतिक महानता दिखाई देती है” (लाउदातो सी, 178)। आपके क्षेत्रों का इतिहास भूमध्यीय आयाम द्वारा विविधता को चिह्नित करता है जहाँ मानवीय,  आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और यहां तक कि धार्मिक स्तर पर वास्तविक क्षमता  की समृद्धि को प्रकट करता है। सभी के अभिन्न विकास की खोज में, अधीनस्थ और एकजुटता के सिद्धांतों के आधार पर राजनीतिक वार्ता बहुत महत्वपूर्ण है (एवांजली गौदियुम 240)  इस परिप्रेक्ष्य में,स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे का मूल्य मुख्य स्तंभ हैं और ये आपकी जिम्मेदारियों के प्रयोग हेतु एक क्षितिज है। आपको समाज की समस्याओं का सामना करते हुए, मूल्यों और दिशानिर्देशों पर एक वास्तविक बहस के प्रवर्तक बनने की आवश्यकता है।  इस बहस में आप ख्रीस्तीय मुलाकात की संस्कृति के विकास को बढ़ावा देने के लिए तथा सभी धर्मों के विश्वासियों और भले लोगों के साथ भाग लेने के लिए बुलाये गये है।

इस मायने में, आप अपनी सेवा द्वारा विभिन्न सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और धार्मिक परिस्थितियों में और विभिन्न पीढ़ियों के लोगों के बीच पुलों का निर्माण करने का हर संभव प्रयास करें। मैं आपको शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच तथा दुनिया में खोज और व्यवसायों के बीच संबंधों के रचनाकार होने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ, जिससे कि आपका कार्यक्षेत्र हमेशा विभिन्न विशेषताओं से समृद्ध हो।

अंत में,  मैं आपको दूसरों के करीब रहने के लिए प्रेरित करता हूँ  खासकर सामाजिक असमानता का सामना करने वालों के करीब रहें। हमारे आम घर के संरक्षण में योगदान दें। मैं उन प्रवासियों और शरणार्थियों के बारे में भी सोच रहा हूं जो युद्ध, गरीबी, हिंसा के कारण अपने देशों से भाग गए हैं। आप अपने देश में उनका स्वागत करें और उन्हें संरक्षण दें और उनकी योग्यता अनुसार काम की तलाश में उनकी सहायता करें। (विश्व शांति दिवस, 1 जनवरी 2018 के लिए संदेश)। इस प्रकार वे न्याय संगत, मानवीय और भ्रातृत्व समाज के निर्माण में योगदान कर सकते हैं।

अंत में संत पापा ने उनके अच्छे कामों को जारी रखने की शुभकामनाएँ देते हुए उनके देश और परिजनों को आशा के श्रोत येसु ख्रीस्त के चरणों में सिपुर्द करते हुए आशीष की कामना की।


(Margaret Sumita Minj)

In Church on March 12, 2018 at 4:04 pm

कार्डिनल लेहमन के निधन पर संत पापा का शोक संदेश

16 मई 2016 अपनी 80वीं जन्मदिन पर पवित्र मिस्सा चढ़ाते हुए कार्डिनल कार्ल रेहमन – EPA

12/03/2018 15:58
वाटिकन सिटी, सोमवार 12 मार्च 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने जर्मनी के कार्डिनल कार्ल लेहमन के निधन पर गहन शोक व्यक्त करते हुए मेनज़ के धर्माध्यक्ष पीटर कोलग्राफ को तार संदेश प्रेषित कर अपना आध्यात्मिक सामीप्य प्रकट किया।

तार संदेश में संत पापा ने लिखा,“मैं कार्डिनल लेहमन के निधन की खबर से अत्यंत दुखी हूँ। मैं आपको और मेनज़ घर्मप्रांत के सभी विश्वासियों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूँ और स्वर्गीय कार्डिनल लेहमन की आत्मा की अनंत शांति के लिए प्रार्थना करता हूँ।”

उन्होंने लिखा, “एक धर्मशास्त्री और धर्माध्यक्ष के रुप में, साथ ही जर्मनी के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष के रुप में एक लम्बे कार्यकाल में उन्होंने कलीसिया और समाज के जीवन को आकार देने में मदद की। वे समय की चुनौतियों और सवालों का उत्तर देने के लिए खुले थे। उन्होंने मसीह के संदेश अनुसार लोगों के संदेह को दूर किया। भला चरवाहा प्रभु येसु अपने सेवक को स्वर्ग राज्य में अनंत शांति का उपहार दें। कार्डिनल के निधन पर शोकित हर एक को और आपको अपनी प्रार्थना का आश्वासन देते हुए प्रेरितिक आशीर्वाद देता हूँ।”


(Margaret Sumita Minj)

In Church on March 12, 2018 at 4:02 pm

कंधमाल हिंसा से बचे लोगों ने न्याय के लिए दबाव डाला

कंधमाल हिंसा में जेल में लिये गये आदिवासियों की रिहाई के लिए गुहार करती हुई उनकी पत्नियाँ – RV

12/03/2018 15:23साझा करें:
कन्जमेंदी (ओडिशा), सोमवार 12 मार्च 2018 (मैटर्स इंडिया) : सन् 2007 और 2008 में हुए कंधमाल में कट्टरवादी हिंसा से बचे हुए लोगों ने 10 मार्च को ओडिशा के कंजमेंदी जिले में एक जिला स्तर की सभा आयोजित की। सभा में भाग लेने वाली रिनी डिंगल ने बताया कि सभा में कई लोगों ने साझा किया कि 2016 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक उन्हें अभी तक सरकारी मुआवजा और कानूनी न्याय प्राप्त नहीं हुआ है।

यह जानकर उन्होंने खेद प्रकट किया कि हिंसा से बचे हुए बहुत से लोगों ने अपने प्रियजनों, घरों और सामानों को खो दिया है, उन्हें सरकार की सूची में शामिल नहीं किया गया है।

स्थानीय नेता बिप्रा चरण नायक ने कहा कि हमने सरकार को फिर से गणना करने और पर्याप्त मुआवजा प्रदान करने हेतु अपील की है। उन्होंने कहा कि इस सभा का उद्देश्य प्रभावित लोगों के न्याय के लिए दबाव डालना था।

ब्लॉक के कुछ प्रतिनिधियों ने कहा, “हमारे गांवों में, लूटपाट हत्या और घरों के नष्ट होने के मामले हैं, परंतु हमारे नाम सरकार की सूची में नहीं हैं।”

कुछ अन्य नेताओं ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने 315 अदालतों के मामलों को फिर से खोलने का आदेश दिया है, लेकिन हमारे कानूनी सहायता प्रणाली में पिछली विफलताओं के कारण हमें सफलता के बारे में संदेह है।”

अधिकांश प्रतिनिधियों ने व्यक्त किया, “नष्ट किए गए घरों के लिए घोषित मुआवजे पर्याप्त नहीं हैं।”

2008 में करीब चार महीने तक कंधमाल की हिंसा ने 100 से ज्यादा लोगों की जानें ले ली थी और 50,000 से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे।

(Margaret Sumita Minj)
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संत पापा का ट्वीट संदेश, ईश्वर के अनुग्रह को स्वीकार करना

In Church on March 12, 2018 at 3:57 pm

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वाटिकन सिटी, सोमवार 12 मार्च 2018 ( रेई) : काथलिक कलीसिया चालिसा के चौथे रविवार अर्थात आनंद के रविवार में मनुष्य जाति के लिए ईश्वर के अनंत प्रेम का अनुभव करते हुए आनंद मनाती है। ईश्वर हमें कमजोरियों और बुराईयों में अकेला नहीं छोड़ते लेकिन सहारा देते हुए जीवन की नवीनता को ओर ले जाते हैं। इसी मुद्दे पर संत पापा ने ट्वीट प्रेषित कर सभी ख्रीस्तीयों को अपने आप से प्रश्न करने की प्रेरणा दी।

संदेश में उन्होंने लिखा,“यदि ईश्वर नई शुरुआत करने के लिए हमें अवसर न दें तो हमारा क्या होगा?”

अपने विचारों को जारी रखते हुए संत पापा ने सोमवार 12 मार्च के ट्वीट में लिखा,“ येसु के साथ मुलाकात करने का अर्थ है अपने दैनिक जीवन में ईश्वर के अनुग्रह को स्वीकार करना।”


(Margaret Sumita Minj)

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