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संत पापा फ्राँसिस के प्रशासन काल के 5 साल

In Church on March 13, 2018 at 4:11 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 13 मार्च 2018 (रेई)˸ काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरू संत पापा फ्राँसिस की प्रशासन अवधि के 5 साल पूरे हुए। लोगों ने उनके प्रशासन काल को आनन्द, करुणा एवं प्रेरिताई का प्रशासन कहा।

वाटिनक राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन ने वाटिकन न्यूज़ को दिये एक साक्षात्कार में पाँच सालों की इस अवधि पर गौर करते हुए कहा, ̎ यह कई सुखद एवं दुःखद घटनाओं की एक श्रृंखला है। सच्चाई यह है कि संत पापा का चुनाव तथा उनका मिशन कलीसिया एवं मानवता के लिए एक वरदान है जिनकी आध्यात्मिक एवं कलीसियाई महत्वों पर गौर किया जाना, विश्वास के प्रकाश में उनका अध्ययन किया जाना एवं उनपर महत्व दिया जाना चाहिए।̎

उन्होंने कहा कि उनका यह वर्षगाँठ हमें उनकी धर्मशिक्षा एवं कार्यों की विशेषताओं पर चिंतन करने हेतु प्रेरित करता है। कार्डिनल ने संत पापा के प्रेरित पत्रों की याद की जिनमें प्रमुख हैं, एवजेली गौदियुम, अमोरिस लेतित्सिया, लौदातो सी। इन सभी में प्रशंसा के भाव हैं जो आत्मा के आनन्द से प्रस्फूटित होते हैं।

उन्होंने कहा कि संत पापा फ्राँसिस के कार्यकाल को खासतौर पर आनन्द की संज्ञा इस लिए दी जा सकती है क्योंकि उन्होंने प्रभु द्वारा प्रेम किये जाने के एहसास को प्रकट किया है। उनके कार्यकाल को करुणा से भी चिन्हित किया जा सकता है। हम उनकी शिक्षा में पाते हैं कि ईश्वर का प्रेम उनकी सृष्टि के माध्यम से प्रकट होता है। संत पापा ने प्रेरिताई हेतु प्रोत्साहन देते हुए इस बात पर जोर दिया है कि हम आनन्द के सुसमाचार का प्रचार करें। येसु की मुक्ति की घोषणा करें जो उन लोगों के लिए आनन्द का स्रोत है जो उसे ग्रहण करते एवं उसका प्रचार करते हैं।

संत पापा के कार्यकाल की तीसरी विशेषता है सुसमाचार प्रचार अर्थात् समस्त सृष्टि को सुसमाचार सुनाने हेतु बाहर जाना।

कार्डिनल परोलिन से पूछे जाने पर कि कभी-कभी संत पापा के विचारों का विरोध भी किया जाता है इसका क्या कारण है, उन्होंने उत्तर दिया कि संत पापा फ्राँसिस ने आरम्भ से ही कलीसिया से बाहर निकलने पर जोर दिया है जो उन लोगों के लिए विरोध का कारण बन गया है जो कलीसिया के प्रति विश्वास्त बने रहना चाहते हैं। उन्होंने इस बात पर भी गौर किया कि आलोचना एक सामान्य चीज है जिसका सामना हर परमाध्यक्ष को करना पड़ा है।

ज्ञात हो कि संत पापा फ्राँसिस 13 मार्च 2013 को संत पापा बैनेडिक्ट सोलहवें के पदत्याग के बाद काथलिक कलीसिया के परमाध्यक्ष चुने गये थे।


(Usha Tirkey)

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एक सच्चा ख्रीस्तीय जोखिम उठाता, वह प्रभु में आनन्द की खोज करता

In Church on March 13, 2018 at 4:09 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 13 मार्च 2018 (रेई)˸ एक सच्चा ख्रीस्तीय जोखिम उठाता है, वह सीमा के परे जाता तथा पहली बार मिलने वाली कृपा को प्राप्त कर रूक नहीं जाता, क्योंकि वह प्रभु के साथ रहने के आनन्द की खोज करता है। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 12 मार्च को वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय मे ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

प्रवचन में संत पापा ने संत योहन रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जहाँ एक पदाधिकारी गलीलिया में येसु से मुलाकात कर, उनसे अपने बीमार बच्चे को चंगा करने का आग्रह करता है।

संत पापा ने कहा कि येसु यहाँ धीरज खोते हुए प्रतीत होते हैं क्योंकि लोगों के लिए केवल उनके चमत्कार महत्वपूर्ण थे। येसु ने लोगों से कहा,  ̎आप लोग चिन्ह और चमत्कार देखे बिना विश्वास नहीं करेंगे।̎ आप लोगों का विश्वास कहाँ है? संत पापा ने कहा, एक चमत्कार अथवा आश्चर्यपूर्ण कार्य देखकर यह कहना कि आप महान हैं आप ईश्वर हैं, जी हाँ, यह विश्वास की अभिव्यक्ति है किन्तु पर्याप्त नहीं क्योंकि यहाँ यह स्पष्ट है कि उनमें विश्वास तो है किन्तु यह आरम्भ मात्र है, जिसे बढ़ना चाहिए। संत पापा ने प्रश्न किया, क्या हममें ईश्वर को पाने की चाह है? क्योंकि इसी चाह में विश्वास है, ईश्वर को पाने, उनसे मुलाकात करने एवं उनके साथ हर्षित होने की चाह।

संत पापा ने पहले पाठ की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा, “वह कौन सा महान चमत्कार है जिसको प्रभु ने सम्पन्न किया?” पहला पाठ जो नबी इसायस के ग्रंथ से लिया गया है इसकी व्याख्या करता है, “मैं एक नये आकाश एवं नई पृथ्वी की सृष्टि करता हूँ। मैंने उसकी सृष्टि की है ताकि तुम सदा के लिए आनन्द मना सको।”  संत पापा ने कहा कि प्रभु हमें अपने साथ रहने के आनन्द की अभिलाषा हेतु प्रेरित करते हैं। जब प्रभु हमारे जीवन से होकर गुजरते हैं और हममें चमत्कार करते हैं तब हम उसे महसूस करते हैं, उसके बाद यह वहीं समाप्त नहीं हो जाता बल्कि यहाँ हमारे लिए निमंत्रण है कि हम आगे बढ़ें, यात्रा को जारी रखें, ईश्वर के चेहरे की खोज करें। स्तोत्र कहता है, ̎ उनके आनन्द की खोज करें।̎

संत पापा ने कहा कि इस प्रकार चमत्कार प्रारम्भ मात्र है। उन्होंने कहा कि उन ख्रीस्तीयों के बारे येसु क्या सोचेंगे जो पहली बार कृपा पाने के बाद रूक जाते हैं, जो यात्रा जारी नहीं रखते। उन्होंने ऐसे लोगों की तुलना उन लोगों से की जो भोजनालय जाते और पूर्ण भोजन परोसे जाने के पहले ही अल्प भोजन लेकर घर लौट जाते हैं। उन्हें मालूम ही नहीं रहता कि बाद में परोसा जाने वाला भोजन अधिक स्वादिष्ट है।

संत पापा ने कहा कि कई ख्रीस्तीय हैं जो रूक चुके हैं जो यात्रा में आगे नहीं बढ़ते। वे अपने दैनिक जीवन की चिंताओं में व्यस्त रहते हैं, जो अपने आप में ठीक है किन्तु वे नहीं बढ़ते। संत पापा ने ऐसे ख्रीस्तीयों को पार्क (गाड़ी रखने की जगह) किये गये ख्रीस्तीयों की संज्ञा दी। उन्होंने उन्हें पिंजरे में बंद कहा जो प्रभु के निमंत्रण की सुन्दरता की कल्पना में उड़ना नहीं जानते।

संत पापा ने विश्वासियों को चिंतन हेतु प्रेरित करते हुए कहा, “मैं सचमुच क्या चाहता हूँ? क्या मैं वाकई में ईश्वर को पाना चाहता हूँ, उनके साथ रहने की चाह रखता हूँ? अथवा क्या मैं भयभीत हूँ? क्या मैं आरम्भ में प्राप्त कृपा से संतुष्ट हूँ अथवा क्या मैं उनके साथ भोज में प्रवेश करना चाहता हूँ।”

संत पापा ने प्रोत्साहन दिया कि हम प्रभु को पाने की चाह को बनाये रखें, आगे बढ़ना तथा जोखिम उठाना सीखें, क्योंकि एक सच्चा ख्रीस्तीय जोखिम उठाता है वह अपने आराम के क्षेत्र से बाहर निकलता है।


(Usha Tirkey)

पोप बेनेडिक्ट XVI ने पोप फ्रांसिस के प्रशासन की निरंतरता को रेखांकित किया

In Church on March 13, 2018 at 4:07 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 13 मार्च 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ वाटिकन ने “द थेओलोजी ऑफ पोप फ्राँसिस” (संत पापा फ्राँसिस का ईशशास्त्र) शीर्षक की किताब को 12 मार्च को प्रकाशित किया।

ससम्मान सेवा निवृत संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें ने 11 श्रृखलाओं की इस किताब के प्रकाशन पर कृतज्ञता व्यक्त करते हुए वाटिकन संचार सचिवालय के अध्यक्ष मोनसिन्योर दारियो बिगनो को एक पत्र लिखा।

वाटिकन संचार सचिवालय के अध्यक्ष मोनसिन्योंर दारियो एदवार्दो विगनो ने इताली भाषा में लिखे इस किताब को, वाटिकन संचार के प्रमुख कार्यालय स्थित साला मारकोनी में, एक प्रेस सम्मेलन में प्रस्तुत करते हुए, इसपर ससम्मान सेवानिवृत संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें की सकारात्मक प्रतिक्रिया पर गौर किया।

उन्होंने संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें के पत्र पर टिप्पणी करते हुए कहा, “संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें हमेशा की तरह दो परमधर्माध्यक्षों की आध्यात्मिक एकता पर अपना एक महत्वपूर्ण योगदान देना चाहते थे।”

उन्होंने कहा, ̎संत पापा फ्राँसिस की धर्मशिक्षा पर गौर करते हुए संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें लिखते हैं कि उनकी (संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें) धर्मशिक्षा एवं संत पापा फ्राँसिस की धर्मशिक्षा में, दो परमाध्यक्षों के बीच आंतरिक एकता परिलक्षित होती है।’̎

“द थेओलोजी ऑफ पोप फ्राँसिस “11 श्रृंखलाओं की किताब है जिसे 11 विभिन्न लेखकों ने तैयार किया है।

संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें ने अपने पत्र में लिखा, “मैं इस पहल की सराहना करता हूँ। यह उस मूर्खतापूर्ण पूर्वाग्रह का खंडन करता है जो संत पापा फ्राँसिस को विशेष ईशशास्त्रीय एवं दर्शनशास्त्रीय प्रशिक्षण से रहित मात्र एक व्यहारिक व्यक्ति के रूप में देखता है, जबकि मैं ईशशास्त्र का मात्र सिद्धांतवादी होता, जिन्हें आज के ख्रीस्तीयों के ठोस जीवन की थोड़ी सी समझ होती।”

संत पापा बेनेडिक्ट ने पत्र में लिखा है कि ये श्रृंखलाएँ अच्छी तरह प्रकट करती हैं कि संत पापा एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें दर्शनशास्त्र एवं ईशशास्त्र का गहरा ज्ञान है तथा जो शैली और स्वभाव में कई विविधताओं के बावजूद दो परमाध्यक्षों के बीच आंतरिक निरंतरता को देखने में मदद देता है।

“द थेओलोजी ऑफ पोप फ्राँसिस” किताब का प्रकाशन लिब्रेरिया एदित्रिचे वॉतिकाना द्वारा हुआ।


(Usha Tirkey)

मध्यपूर्व के ख्रीस्तीयों की मदद हेतु पुण्य शुक्रवार को दान संग्रह

In Church on March 13, 2018 at 4:02 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 13 मार्च 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ पूर्वी कलीसियाओं के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के अध्यक्ष कार्डिनल लेओनार्दो सांदरी ने काथलिकों से अपील की है कि वे सीरिया एवं ईराक में हिंसा के कारण पलायन कर रहे लोगों की मदद हेतु उदारता पूर्वक दान दें।

सोमवार को पवित्र भूमि के लिए पुण्य शुक्रवार के दिन, दान संग्रह की घोषणा की गयी जिसमें अपील किया गया है कि उस पवित्र भूमि की सहायता हेतु दान दिये जाएं जहाँ येसु ने जीवन व्यतीत किया था।

काथलिक कलीसिया विश्वभर में चालीसा के दौरान परम्परागत रूप से, विशेष दान संग्रह करती है जिसके द्वारा पवित्र भूमि के ऐतिहासिक स्थलों की देखरेख की जाती है, तीर्थयात्रियों की सहायता तथा उन क्षेत्रों में जरूरतमंद ख्रीस्तीय परिवारों की मदद की जाती है।

जानकारी के अनुसार इस दान संग्रह के अधिकांश भाग फ्राँसिसकन पुरोहितों को सौंपी जाती है जो मध्यपूर्व के पवित्र स्थलों की देखरेख हेतु समर्पित हैं। दान के कुछ हिस्से पूर्वी कलीसिया के स्थानीय पुरोहितों के प्रशिक्षण एवं सहयोग में भी खर्च किये जाते हैं।

कार्डिनल लेओनार्दो सांदरी ने अपने पत्र में चालीसा काल को ‘एकात्मता की यात्रा’ कहा जब हम रूक कर, भले समारीतानी की तरह हमारे भाई-बहनों का साथ देने हेतु चिंतन करने के लिए प्रेरित किये जाते हैं जो कई कठिनाईयों के कारण खड़े होने एवं अपनी यात्रा जारी रखने में असमर्थ हैं।

कार्डिनल ने काथलिक स्कूलों की महत्पूर्ण भूमिका की याद की जो ख्रीस्तीयों एवं मुसलमानों के लिए मुलाकात स्थल हैं तथा अस्पताल एवं पल्ली केंद्र युद्ध से भाग रहे पीड़ितों और शरणार्थियों का स्वागत एवं मदद कर रहे हैं।

पुण्य शुक्रवार को संग्रह किये जाने वाले दान परम्परागत रूप से फिलीस्तीन, इस्राएल, जॉर्डन, साईप्रस, लेबनान, मिस्र, इथोपिया, एरिथ्रेया, तुर्की, ईरान एवं ईराक के लोगों की मदद हेतु भेजे जाते हैं।

पत्र में कार्डिनल सांदरी ने ख्रीस्तीयों से मदद की विशेष अपील की, खासकर, परिवारों तथा युवाओं की मदद के लिए जो सीरिया एवं इराक से युद्ध के कारण पलायन कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि कई लोग अपनी मातृभूमि लौटना चाहते हैं जहाँ उनके घर, स्कूल, अस्पताल और गिरजाघर ध्वस्त कर दिये गये हैं। उन्होंने आग्रह करते हुए कहा, “आइये हम उन्हें न छोड़ दें।”


(Usha Tirkey)

मार्टिन लुथर किंग की बेटी से संत पापा की मुलाकात

In Church on March 13, 2018 at 4:00 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 13 मार्च 2018 (पीटीआई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 12 मार्च को वाटिकन में मार्टिन लुथर किंग की सबसे छोटी बेटी बेरनिचे किंग से मुलाकात की।

मुलाकत में बेरनिचे किंग ने संत पापा को छः श्रृंखलाओं की नागरिक अधिकार के नेता के प्रकाशित पत्र भेंट किये, जिसका शीर्षक है, “सामाजिक सुसमाचार के समर्थक, सितंबर 1948 – मार्च 1963.”

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह एक व्यक्तिगत मुलाकात थी जो सौहार्दपूर्ण रही। उन्होंने अनुवादक के सहारे एक-दूसरे से बातें कीं।

बेरनिचे किंग ने एक ट्वीट कर बतवाया कि यह मुलाकात ‘जीवन बदल देने वाली’ थी।

उन्होंने मुलाकात के उपरांत एक टेलिविजन से कहा, ̎ संत पापा फ्राँसिस पूरे विश्व के लिए एक नेता तथा नैतिक आवाज हैं।̎

उन्होंने बतलाया कि संत पापा ने उनके पिताजी के उन शब्दों को याद किया जो उनके हृदय में गूँजती हैं, शांति, अहिंसा, हर मानव व्यक्ति की प्रतिष्ठा का सम्मान, व्यक्ति की केन्द्रीयता के शब्द जो आज निश्चय ही महत्वपूर्ण हैं।

54 वर्षीय किंग, मार्टिन एवं कोरेत्ता स्कोत्त किंग की सबसे छोटी बेटी हैं। वे जब पाँच साल की थीं तभी उनके पिताजी की हत्या हो गयी थी।

बेरनिचे किंग अहिंसा और शांति की पहल पर शामिल महिलाओं को सम्मान दिलाये जाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने हेतु इटली में थीं।


(Usha Tirkey)

आध्यात्मिक जीवन की ज्वाला को प्रज्वलित रखने का रहस्य

In Church on March 13, 2018 at 3:57 pm

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वाटिकन सिटी, मंगलवार, 13 मार्च 2018 (रेई)˸ चालीसा काल एक ऐसा समय है जब हम अपने आध्यात्मिक जीवन पर अधिक ध्यान देते हुए उसे बलिष्ठ बनाने का प्रयास करते हैं।

संत पापा ने एक ट्वीट प्रेषित कर हमारे आध्यात्मिक जीवन की ज्वाला को प्रज्वलित रखने का रहस्य प्रकट किया। उन्होंने संदेश मे लिखा, “जब हम अपने जीवन में येसु को प्रवेश करने देते हैं तब हम हमारे आध्यात्मिक जीवन की ज्वाला को प्रज्वलित रखने के रहस्य की खोज करते हैं।”


(Usha Tirkey)

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