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साहस और धैर्य” ये प्रार्थना की ख़ासियत हैं,संत पापा फ्राँसिस

In Church on March 15, 2018 at 4:29 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्तपतिवार, 15 मार्च 2018 (रेई) : “साहस और धैर्य” ये प्रार्थना की ख़ासियत हैं, जिसे ईश्वर को “स्वतंत्रता के साथ, बच्चों के रूप में” अर्पित करना चाहिए। उक्त बात संत पापा फ्राँसिस संत मार्था प्रार्थनालय में पवित्र ख्रीस्तयाग मे दौरान प्रवचन में कही।

संत पापा ने निर्गमन ग्रंथ से लिए गये पहले पाठ पर चिंतन किया जहाँ अपने लोगों के धर्मत्यागने पर ईश्वर और मूसा के बीच बातचीत का वर्णन है।

नबी मूसा ने उन लोगों से क्रोद्धित होकर ईश्वर को विचलित करने की कोशिश की जिन्होंने “सोने की बछड़े की पूजा करने के लिए जीवित परमेश्वर की महिमा छोड़ दी।” मूसा ने ईश्वर के साथ वार्ता में यह भी याद दिलाया कि ईश्वर ने मिस्र में गुलामी से बचाने के लिए नेतृत्व किया। उन्होंने इब्राहीम और इसहाक की निष्ठा को याद दिलाई। ईश्वर के साथ आमने सामने बात करते हुए नबी मूसा द्वारा अपने लोगों के लिए प्रेम की झलक दिखाई देती है। मूसा सच्चाई को बताने से डरता नहीं है। वह ईश्वर को खुश करने के लिए “रिश्वतखोरी के खेल में प्रवेश नहीं करता।” वह अपनी अंतरात्मा की आवाज को सुनता है और नबी के इस बात से ईश्वर प्रसन्न है। संत पापा ने कहा जो ईश्वर व्यक्ति की आत्मा को देखता है। जब एक व्यक्ति प्रार्थना करता है और लगातार किसी के लिए प्रार्थना करता है तो वह ईश्वर भी द्रवित हो जाते हैं।

“कोई रिश्वत नहीं है मैं लोगों के साथ हूँ और मैं तुम्हारे साथ हूँ यह मध्यस्थ प्रार्थना है: एक प्रार्थना जो तर्क देती है, जिसने ईश्वर के सामने कहने का साहस रखा है, जो धैर्यशील है। इस मध्यस्थ प्रार्थना में धैर्य की आवश्यकता होती है। अगर हम किसी के लिए प्रार्थना करने का वादा करते हैं और हे पिता हमारे और प्रणाम मरियम की प्रार्थना करते हैं और निश्चिंत हो जाते हैं तो यह मध्यस्थ प्रार्थना नहीं है यदि आप मध्यस्थ प्रार्थना द्वारा दूसरों के लिए प्रार्थना करना चाहते हैं तो धैर्य के साथ अंत तक प्रार्थना करनी है।

प्रार्थना में धैर्यशीलता और साहस

दैनिक जीवन में, दुर्भाग्यवश, दुर्लभ मामलों में प्रबंधक कंपनी का बलिदान करने के लिए तैयार होते हैं ताकि वे अपना लाभ प्राप्त कर सकें। लेकिन मूसा “रिश्वत के तर्क” में प्रवेश नहीं करता, वह अपने लोगों के साथ है और लोगों के लिए लड़ता है पवित्र बाईबिल “धीरज के साथ आगे बढ़ने” और “स्थिरता” के उदाहरणों से भरा है, जैसे कनानी स्त्री, “जेरीको के द्वार पर बैठा अंधा आदमी।”

संत पापा ने कहा कि मध्यस्थ प्रार्थना के लिए दो चीजें जरुरी हैं साहस और धीरज। यदि मैं चाहूँ कि ईश्वर मेरी प्रार्थना सुने तो मुझे बार-बार प्रभु के पास उसके द्वार को खटखटाऊँगा। यदि मैं पूरे दिल से प्रार्थना करता हूँ तो मुझे बार बार ईश्वर के पास जाने का साहस और धीरज भी मिलेगा।

संत पापा ने कहा, “आइये हम प्रभु से बच्चों के सदृश और स्वतंत्रता के साथ प्रार्थना करने की कृपा मांगे। और हम मध्यस्थ प्रार्थना द्वारा बहुत सारे लोगों को प्रभु के सामने लायें तथा उनके लिए प्रभु से कृपा मांगे।“


(Margaret Sumita Minj)

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पाकिस्तानी धर्माध्यक्षों ने अपने देश की यात्रा हेतु संत पापा को आमंत्रित किया

In Church on March 15, 2018 at 4:28 pm

रोम, बृहस्तपतिवार, 15 मार्च 2018 ( वीआर,रेई) : पाकिस्तानी धर्माध्यक्ष बृहस्पतिवार को संत पापा फ्राँसिस से अद-लीमिना मुलाकात के दौरान अपने देश पाकिस्तान का दौरा करने हेतु आमंत्रित किया। पाकिस्तानी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के सदस्य अद-लीमिना दौरे पर रोम आये हुए हैं। वे हर 5 साल में ऐसा दौरा करते हैं।

बृहस्तपतिवार प्रातःकाल संत पापा अपने प्रेरितिक निवास संत मार्था के प्रार्थनालय में धर्माध्यक्षों के साथ पवित्र ख्रीस्याग अर्पित की और बाद में वे 11 बजे करांची महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष जोसेफ काउटोस, लाहौर के महाधर्माध्यक्ष सेबास्टीन फ्राँसिस शॉ, हैदराबाद धर्मप्रांत को धर्माध्यक्ष सिमोन शुकारदिन और फैसलाबाद धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष जोसेफ अर्शाद से मुलाकात की। पाकिस्तानी धर्माध्यक्ष अपने धर्मप्रांत की स्थिति का ब्योरा संत पापा फ्राँसिस को दिया और देश की वर्तमान स्थिति पर विचार किया।

महाधर्माध्यक्ष जोसेफ ने बुधवार को चरच इन नाड को बताया कि संत पापा के निमंत्रण पर पाकिस्तानी सरकार का समर्थन प्राप्त है। 2015 में, पूर्व प्रधान मंत्री नवाज शरीफ ने दो संघीय मंत्रियों को व्यक्तिगत रूप से संत पापा को आमंत्रण पत्र देने के लिए रोम भेजा था।

महाधर्माध्यक्ष जोसेफ ने कहा कि “संत पापा फ्राँसिस सभी मुसलमानों सहित सभी पाकिस्तानियों द्वारा सम्मानित है, वे उन्हें शांति के दूत मानते हैं और इस्लामिक समुदाय के प्रति उनके रवैये की सराहना करते हैं। मिस्र के कैरो विश्वविद्यालय, अल-अजहर के साथ अच्छे संबंध हैं।”

महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक ख्रीस्तीय समुदाय गिरजाघरों में हमले के कारण पीड़ित हैं। गत बर्ष 17 दिसम्बर को क्वेटा शहर के मेथोडिस्ट गिरजाघर में अंतिम बार हमला हुआ था। पवित्र स्थानों में रविवार और त्योहारों में पुलिस सुरक्षा दी जा रही है। “लगातार खतरा बना रहता है और हमें नहीं पता कि आतंकवादी कब और किस स्थान में फिर से हमला करेंगे।”

महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि ख्रीस्तीयों के लिए बड़ी चिंता का दूसरा विषय, देश के विवादास्पद ईश निन्दा कानूनों का दुरुपयोग है। उन्होंने बताया कि हाल ही में लाहौर के एक ख्रीस्तीय लड़के पतरस मसीह को पैगंबर मोहम्मद का अपमान करने के लिए गिरफ्तार किया गया है। दुख की बात तो यह है कि प्रायः निर्दोष लोगों को सबूत के बिना आरोप लगाते हैं और उनहें खुद को बचाने का कोई मौका नहीं दिया जाता है।


(Margaret Sumita Minj)

कार्डिनल टोप्पो ने युवाओं से फादर कामिल बुल्के का अनुसरण करने की अपील की

In Church on March 15, 2018 at 4:27 pm

राँची, बृहस्तपतिवार, 15 मार्च 2018 (मैटर्स इंडिया) : राँची के संत जेवियर्स कॉलेज के परिसर में 14 मार्च को हिन्दी के विद्वान पद्मभूषण येसु समाजी फादर कामिल बुल्के का पार्थिव अवशेष कलीसिया के नेताओं, येसु समाजियों, काथलिकों और फादर के प्रशंसकों बीच स्थापित किया गया।

राँची के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल तेलेस्फोर पी. टोप्पो ने स्थापना समारोह का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि छोटानागपुर वासियों के लम्बे समय का सपना आज पूरा हआ। वे अपने महान मिशनरी को अपनी कर्मभूमि में ला सके।

बेल्जियन मिशनरी के जीवन और कामों को सुनाते हुए कार्डिनल टोप्पो ने कहा कि भारत के सबसे प्रसिद्ध ख्रीस्तीय हिंदी विद्वान ने हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अपना जीवन समर्पित किया था। उन्होंने संत जेवियर कॉलेज और रांची के शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों से आग्रह किया कि वे फादर बुल्के के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए खुद को समर्पित करें।

कार्डिनल ने कहा कि फादर कामिल ने धार्मिकता, साहित्य प्रेम व अंतरधार्मिक साह्चर्य का संदेश दिया। उन्होंने स्वार्थ व विद्वेश के वातावरण में भाईचारे और निस्वार्थ सेवा का जीवन जीया। अन्य धर्मावलम्बी यदि आज ख्रीस्तीयता को बेहतर ढंग से समझते हैं तो यह बहुत हद तक फादर कामिल के अथक प्रयास व समर्पण का परिणाम है।

फादर बुल्के का 18 अगस्त 1982 को दिल्ली में 72 वर्ष की आयु में निधन हुआ। उन्हें पुरानी दिल्ली में कश्मीरी गेट के निकट निकोलसन कब्रिस्तान में दफनाया गया था, जहां उन्हें काफी हद तक नजरअंदाज किया गया था।

13 मार्च को दिल्ली से फादर बुल्के के अवशेष को फादर रंजीत तिग्गा विमान से राँची लाये। जहाँ हवाई अड्डे पर राँची प्रोविंस के प्रोविंशियल फादर जोसेफ मरियानुस कुजूर ने स्वीकार किया और मानरेसा हाउस में दर्शकों के लिए उनके पार्थिव अवशेष को रखा गया।

14 मार्च को स्थानीय समयानुसार 10 बजे मानरेसा हाउस से फादर बुल्के का पार्थिव अवशेष ढोल नगाड़े शहनाई की धुन पर उनके समाधि स्थल संत जेवियर्स कॉलेज लाया गया। वहाँ प्राचार्य फादर निकोलस टेटे, रेक्टर फादर हेनरी बारला और अन्य पुरोहितों ने इसे ग्रहण किया। कार्डिनल टोप्पो ने प्रार्थना की और फादर कामिल बुल्के के अवशेष को स्थापित किया गया। समाधि स्थल पर उनकी प्रतिमा भी स्थापित की गई।

फादर कामिल 1935 को एक जेसुइट सेमिनारियन के रुप में भारत आये और 1951 को उन्हें भारत की नागरिकता मिली। उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के हिंदी और संस्कृत विभागों की अध्यक्षता की।

रांची में मानरेसा हाउस फादर कामिल की गतिविधियों का केंद्र था। राँची प्रशासन ने मानरेसा हाउस के सामने के पुरुलिया रोड का नाम बदल कर कामिल बुल्के पथ कर दिया है।


(Margaret Sumita Minj)

भारतीय युवा ख्रीस्तीयों ने अफवाहों की परवाह नहीं की

In Church on March 15, 2018 at 4:25 pm

नई दिल्ली, बृहस्तपतिवार, 15 मार्च 2018 (ऊकान) : पूना के एक प्रमुख विद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन में, सेक्स और पैसा से जुड़े घोटालों के बावजूद भारत में ज्यादातर युवा ख्रीस्तीय अपनी कलीसिया  पर गर्व करते हैं। हालांकि, दक्षिणी भारत के लगभग आधे उत्तरदाताओं ने कहा, कि कलीसिया द्वारा किये गये ऐसे घोटालों की से वे “शर्मिंदा” थे।

26 राज्यों के 11 अलग-अलग भाषा बोलने वाले 5,300 युवा लोगों के सर्वेक्षण किए गए। सर्वेक्षण के अनुसार तीन भारतीय ख्रीस्तीय युवकों में से केवल एक ही युवक के जीवन का उद्देश्य ऊँचा है और जीवन का अर्थ पाने में जरुरी नहीं कि शिक्षा मददगार हो।

एक तिहाई से ज्यादा युवाओं के जीवन का उद्देश्य निम्न है जबकि एक तिहाई युवाओं के जीवन उद्देश्य औसत है।

जेसुइट धर्मसंघियों द्वारा संचालित ज्ञान-दीप विद्यापाठ सेमिनरी में दर्शनशास्त्र के छात्रों ने दो शोधकर्ताओं, जेसुइट फादर दिनेश ब्रागांज़ा और होली क्रॉस फादर शिजु जोसेफ की देखरेख में सामाजिक विज्ञान विभाग द्वारा यह अध्ययन किया गया।

फादर ब्रागांजा ने बताया कि आने वाले अक्टूबर में होने वाली धर्माध्यक्षों की महासभा का विषय “युवा लोग, विश्वास और बुलाहट की आत्म-परख” से प्रेरित होकर विद्यार्थियों ने सर्वेक्षण किया।

दर्शनशास्त्र के 94 छात्रों ने पूरे भारत के 2,933 युवाओं का साक्षात्कार किया था और 2,335 युवाओं ने ऑनलाइन सर्वेक्षण में हिस्सा लिया। जिसमें अधिकांश उत्तरदाता (93 प्रतिशत) काथलिक थे।

अध्ययन से पता चला कि युवाओं के बीच उद्देश्य की भावना में सुधार लाने में शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।”लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि, उच्च शिक्षा के बावजूद , एक चौथाई उत्तरदाताओं के जीवन का उद्देश्य निम्न था। लगभग 78 प्रतिशत बेरोजगार युवाओं के जीवन का उद्देश्य निम्न या औसत था। अतः कलीसिया को इस पर गंभीरता से विचार करनी चाहिए।”

अध्ययन के निदेशकों ने कहा कि  80% युवाओं का मानना हैं कि कलीसिया के अधिकारी उनपर विश्वास करते हैं और निर्णय भी उनके साथ परामर्श लेकर ही लिया गया। “यह धारणा … युवा लोगों की सबसे बड़ी भविष्यवाणी थी,  कि वे कलीसिया के सदस्य होने का गर्व करते हैं।”

उन्होंने यह भी पाया कि कलीसिया आज यौन और वित्तीय घोटालों तथा लोकधर्मियों के विश्वास में कमी की बड़ी समस्याओं का सामना कर रही है।

हैदराबाद के काथलिक युवा नेता अभिलाश रेड्डी ने कहा कि केवल कुछ लोग घोटालों के लिए जिम्मेदार हैं और युवा लोग जानते हैं कि पूरी कलीसिया को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।

“जो भी हो, मैं कलीसिया पर गर्व करता हूँ और करता रहूँगा।” भारतीय काथलिक युवा आंदोलन के उपाध्यक्ष रेड्डी ने कहा।

कोलकाता की युवा नेता मेरी मार्ग्रेट ने कहा, मेरी ही तरह अनेक युवा लोग कलीसिया में हो रहे घोटालों को “काथलिक विश्वास में परीक्षा” के रुप में लेते हैं।


(Margaret Sumita Minj)

अब मैं संत पापा द्वारा भेजे उपहार रोज़री से प्रार्थना कर सकती हूँ, आसिया बीबी

In Church on March 15, 2018 at 4:24 pm

पाकिस्तान, बृहस्तपतिवार, 15 मार्च 2018 (रेई) : “एक चमत्कार” “यह नौ साल में पहली बार है कि उन्होंने मुझे अपने सेल में एक धार्मिक वस्तु रखने की अनुमति दी है।” यह बात पाकिस्तान के मुल्तान की जेल में ईश निंदा के अपराध में मौत की सजा सुनायी गई ख्रीस्तीय महिला आशिया बीबी ने संत पापा फ्राँसिस द्वारा उपहार भेजे गये रोजरी को अपने पास रखने की अनुमति पाने पर कही।

आशिया बीबी ने 12 मार्च को अपने पति आशिक और बेटी ईशाम से मुलाकात की जो ईटली की यात्रा कर लौटे थे। रोम में उन्होंने संत पापा से व्यक्तिगत मुलाकात की थी। इसी अवसर पर उनके हाथों संत पापा ने आसिया बीबी के लिए एक रोजरी उपहार में भेजा था और उनके लिए प्रार्थना का आश्वासन भी दिया था। उनकी बेटी ने भी संत पापा को अपनी माता का प्यार का आलिंगन पहुँचाया था।

आशिया ने कहा, “मैं कृतज्ञता के साथ इस उपहार को स्वीकार करती हूँ – यह माला मेरे लिए महान सांत्वना का होगा, मुझे यह जानकर खुशी होती है कि संत पापा मेरे लिए प्रार्थना करते हैं और इन कठिन परिस्थितियों में मेरी चिंता करते हैं।”

आसिया ने “चर्च इन नीड” संगठन को उनकी मदद और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया जिसके कारण उनकी बेटी और पति रोम जाकर संत पापा से मुलाकात कर पाये। प्रार्थना की वजह से आज वे जिंदा हैं। आसिया ने अपने साथ उन लोगों के नाम पर भी धन्यवाद दिया जो ईश निंदा के अपराध में बेकसूर होकर भी सजा काट रहे हैं।


(Margaret Sumita Minj)

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