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ख्रीस्त के क्रूस को देखें, उदासी से बाहर आयें, संत पापा

In Church on March 20, 2018 at 4:45 pm

 वाटिकन सिटी, मंगलवार, 20 मार्च 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में, मंगलवार 20 मार्च को ख्रीस्तयाग प्रवचन में संत पापा फ्राँसिस ने विश्वासियों को क्रूस की ओर देखने का निमंत्रण दिया, विशेषकर, कठिनाईयों की घड़ी में, जब व्यक्ति थक जाता है ताकि वह ईश्वर के विरूद्ध न बोले क्योंकि यह आत्मा को विषाक्त कर देता है।
संत पापा ने कहा, ̎कठिन समय में जब हृदय उदास हो जाता तथा जब व्यक्ति जीवन की यात्रा से थक जाता है तब क्रूस को देखें।̎

प्रवचन में संत पापा ने गणना ग्रंथ से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जो इस्राएलियों के उस अनुभव को प्रस्तुत करता है जिसको उन्होंने प्रतिज्ञात देश की ओर जाते समय मरूस्थल पार करते हुए अनुभव किया था और उन्हें विषैले सांपों का सामना करना पड़ा था। जब लोग भूखे थे तब ईश्वर ने उनके लिए मन्ना गिराया और जब वे प्यासे थे तब उन्होंने उनके लिए जल प्रदान किया था। प्रतिज्ञात देश पहुँचने के पूर्व कुछ लोगों ने संदेह किया क्योंकि मूसा ने जिन लोगों को प्रतिज्ञात देश को देखने भेजा था उन्होंने लौटकर बतलाया कि धरती फलों और पशुओं के लिए धनी है किन्तु वहाँ के निवासी ऊंचे एवं मजबूत हैं। उनकी बातों को सुनकर लोग मार डाले जाने के भय से भर गये तथा वहाँ जाने के खतरनाक कारणों को सोचने लगे। उन्होंने केवल अपनी शक्ति को देखी तथा प्रभु के सामर्थ्य को भूला दिया जिन्होंने उन्हें मिस्र की दासता से मुक्त किया था।

संत पापा ने कहा कि जब लोग यात्रा करने में असमर्थ थे उन्होंने मिस्र देश की याद की। उसी तरह लोग जब प्रभु का अनुसरण करते और उनके करीब रहने का प्रयास करते हुए हम कभी कभी अपनी स्थिति से ऊबकर, आगे बढ़ने में असमर्थ हो जाते हैं तब हम पीछे लौटना चाहते हैं। ऐसे समय में वे बीते जीवन के लिए खेद प्रकट करते हैं।

संत पापा ने कहा कि ये भ्रम है जिसको शैतान लाता है। वह उन चीजों को आकर्षक रूप में प्रस्तुत करता है जिनको हमने प्रभु की ओर आगे बढ़ते हुए छोड़ दिया है।

संत पापा ने इस बात को रेखांकित किया कि यह अनुभव सभी के लिए होता है जब हम प्रभु का अनुसरण करना चाहते हैं किन्तु थक जाते हैं किन्तु उससे भी बुरा है ईश्वर को नीचा दिखलाना। उसके विरूद्ध भुनभुनाना, हमारी आत्मा को विषाक्त कर देता है। कोई सोच सकता है कि ईश्वर मदद नहीं करते और वे अपने हृदय में उदास हो जाते हैं।

पहला पाठ बतलाता है कि सांप विष का प्रतीक है, प्रभु की राहों पर चलने की निरंतरता का अभाव।

प्रभु के आदेश पर मूसा ने एक कांसे का सांप बनाया तथा उसे एक डण्डे पर रख दिया। इस सांप ने उन सभी को चंगा किया जिन्होंने उनकी ओर देखा। संत पापा ने कहा कि कांसे का सांप ख्रीस्त का प्रतीक था।

उन्होंने कहा कि यही हमारी मुक्ति की कुँजी है जीवन यात्रा में हमारे धैर्य की चाभी, क्रूस की ओर नजर डालना ही मरूस्थल से बाहर निकलने का उपाय है। हम पूछ सकते हैं कि ख्रीस्त के कूस पर नजर डालकर हम क्या करें? संत पापा ने कहा कि उन्हें देखें, उनके घावों को महसूस करें उन्हीं घावों द्वारा हम चंगा किया गये हैं। संत पापा ने प्रश्न किया, ̎क्या आप विषाक्त महसूस करते हैं, क्या आप उदास हैं तथा जीवन में आगे बढ़ नहीं पा रहे हैं। क्या यह कठिनाइयों से घिर गया है हम येसु की ओर देखें।

संत पापा ने सभी चुनौतियों में कुरूप क्रूस की ओर देखने की सलाह दी क्योंकि वही सच्चा है। क्रूस को कलाकारों ने सुन्दर रूप दिया है कुछ को सोने और कीमती पत्थरों से जड़ा है जो केवल दुनियादारी नहीं किन्तु क्रूस की महिमा को प्रकट करता है। क्रूस का सही अर्थ है महिमा, पुनरूत्थान की महिमा।


(Usha Tirkey)

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कार्डिनल केइथ पैट्रिक के निधन पर संत पापा का शोक संदेश

In Church on March 20, 2018 at 4:44 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 20 मार्च 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार 20 मार्च को, कार्डिनल केइथ पैट्रिक ओ ब्रेइन के निधन पर गहन शोक व्यक्त करते हुए एक तार संदेश प्रेषित किया।

संत अंट्रूस एवं एडिनबर्ग के महाधर्माध्यक्ष लेओ डब्यू कुशले को एक तार संदेश प्रेषित कर संत पापा ने लिखा, ̎मैं ससम्मान सेवानिवृत कार्डिनल केईथ पैट्रिक ओब्रेईन के निधन की खबर सुन अत्यन्त दुखी हूँ तथा मैं आपको, उनके परिवार एवं उनके निधन पर शोकाकुल सभी लोगों को अपनी हार्दिक संवेदना प्रदान करता हूँ।̎

संत पापा ने स्वर्गीय कार्डिनल की आत्मा की अनन्त शांति हेतु प्रार्थना करते हुए लिखा कि मैं उनकी आत्मा को पिता ईश्वर के करुणावान प्रेम में समर्पित करता हूँ। उन्होंने संत अंट्रू एवं एडिनबर्ग महाधर्मप्रांत के लिए अपनी प्रार्थनाओं का आश्वासन देते हुए प्रभु येसु ख्रीस्त की शांति एवं सांत्वाना की कामना की तथा उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Usha Tirkey)

धर्माध्यक्षों का पहला कर्तव्य है प्रार्थना करना, संत पापा

In Church on March 20, 2018 at 4:42 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 20 मार्च 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार 19 मार्च को, तीन धर्माध्यक्षों का धर्माध्यक्षीय अभिषेक सम्पन्न किया।

धर्माध्यक्षीय अभिषेक समारोह के दौरान अपने प्रवचन में उन्होंने कलीसिया के धर्माध्यक्षों के कर्तव्यों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, ̎ प्रभु येसु ख्रीस्त जो पिता द्वारा मानव की मुक्ति के लिए भेजे गये थे, उन्होंने बारह प्रेरितों को दुनिया में भेजा ताकि वे पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होकर लोगों के बीच सुसमाचार का प्रचार कर सकें तथा उन्हें एक ही चरवाहे के झुण्ड में एकत्रित कर सकें, उन्हें पवित्र करें और मुक्ति के मार्ग पर आगे ले चलें।

इस प्रेरितिक मिशन को पीढ़ी दर पीढ़ी चिरास्थायी बनाने के लिए, बारहों ने अन्य लोगों को चुना तथा उनपर हाथ रखकर ख्रीस्त द्वारा प्राप्त पवित्र आत्मा को हस्तंतरित करते हुए उन्हें संस्कारों के अनुष्ठान की जिम्मेदारी सौंपी। इस प्रकार कलीसिया की जीवित परम्परा में धर्माध्यक्षों के निरंतर उतराधिकार द्वारा प्रथम मिशन को सुरक्षित रखा गया है और मुक्तिदाता का कार्य जारी है एवं समय के अनुसार बढ़ रहा है। एक धर्माध्यक्ष अपने पुरोहितों के बीच महापुरोहित ख्रीस्त के समान होता है।

संत पापा ने कहा, ̎ निश्चय ही, धर्माध्यक्ष के मिशन में ख्रीस्त मुक्ति के सुसमाचार की घोषणा करना जारी रखते तथा विश्वास के संस्कारों द्वारा विश्वासियों को पवित्र करते हैं। धर्माध्यक्ष में ख्रीस्त ही भ्रातृत्व को विकसित करते हैं। धर्माध्यक्ष की प्रज्ञा एवं विवेक द्वारा ख्रीस्त ही लोगों को पृथ्वी की तीर्थयात्रा से अनन्त आनन्द प्राप्त करने हेतु पिता की ओर ले चलते हैं।

संत पापा ने विश्वासियों से अनुरोध किया कि वे इन नये धर्माध्यक्षों का स्वागत करें जिनका अभिषेक धर्माध्यक्षों ने उनपर हाथ रखकर पवित्र आत्मा का आह्वान करते हुए किया है।

संत पापा ने नव-अभिषिक्त धर्माध्यक्षों को सम्बोधित कर कहा कि वे जो प्रभु द्वारा चुने गये हैं, वे लोगों के बीच में से, लोगों के लिए चुने गये हैं। वे ईश्वर के संबंधित वस्तुओं के लिए नियुक्त किये गये हैं न कि पेशा, सामाजिक प्रतिष्ठा अथवा राजनीतिक जीवन जैसे अन्य चीजों के लिए। वास्तव में, धर्माध्यक्ष सेवा का नाम है न कि सम्मान का। जूँकि धर्माध्यक्ष प्रशासन से अधिक सेवा के लिए उत्तरदायी हैं, प्रभु के आदेश अनुसार, जो सबसे बड़ा है वह सबका सेवक बने, और जो शासन करता है वह सेवक के समान हो, वे राजकुमार बनने के प्रलोभन से बचकर रहें।

संत पापा ने कहा कि वे हर अवसर में ईशवचन की घोषणा करें, चाहे वह समयानुकूल हो अथवा प्रतिकूल। धर्मशिक्षा एवं उदाता के साथ विश्वासियों को चेतायें, सावधान करें एवं उनका आह्वान करें। अपने लोगों के लिए प्रार्थना तथा बलिदान अर्पित करते हुए ख्रीस्त की कृपा के माध्यम बनें। धर्माध्यक्ष का पहला कर्तव्य है प्रार्थना करना। हेलेनिस्ट की विधवाओं ने जब प्रेरितों से शिकायत की कि उनकी उपेक्षा की जा रही है तो उन्होंने एक साथ प्रार्थना करते हुए पवित्र आत्मा के सामर्थ्य से उपयाजकों का चुनाव किया।

संत पापा ने धर्माध्यक्षों से कहा कि वे कलीसिया में ख्रीस्त के रहस्यों के विश्वस्त संरक्षक एवं अनुष्ठाता बनें जो अपने परिवार (कलीसिया) के शीर्ष, पिता द्वारा सौंपा गया है। वे भले चरवाहे का अनुसरण करें जो अपनी भेड़ों को जानते हैं और उन्हें अपना जीवन तक निछावर करने से नहीं हिचके।

संत पापा ने उन्हें सभी विश्वासियों को पिता एवं भाई के स्नेह से प्यार करने की सलाह दी जिन्हें ईश्वर ने उन्हें सौंपा है। सबसे पहले उन्हें पुरोहितों, उपयाजकों एवं अपने सहयोगियों को प्यार करने एवं उनके नजदीक रहने का परामर्श दिया। उन्होंने धर्माध्यक्षों को गरीबों, असहाय एवं जरूरतमंद लोगों के भी करीब रहने की सलाह दी।

इतना ही नहीं संत पापा ने अपने आस-पास कलीसिया के बाहर के लोगों का भी ध्यान रखने का आग्रह किया क्योंकि वे भी प्रभु द्वारा उन्हें सौंपे गये हैं। उन्होंने कहा, ̎ याद रखें कि काथलिक कलीसिया उदारता द्वारा एकता के सूत्र में बधी है।̎ संत पापा ने उन्हें धर्माध्यक्षों के साथ सहयोग करने हेतु प्रेरित किया।

अंततः संत पापा ने धर्माध्यक्षों को जागते रहने की सलाह दी, ̎पूरे झुण्ड की देखभाल प्रेम से करने की जिसके लिए पवित्र आत्मा ने कलीसिया का शासन करने हाथों सौंपा है। पिता ईश्वर एवं येसु ख्रीस्त के नाम पर अपने रेवड़ की चिंता करने हेतु वे स्वामी, पुरोहित एवं मेषपाल नियुक्त किये गये हैं। वे पवित्र आत्मा के नाम पर कलीसिया को जीवन दें एवं दुर्बलों को सहायता प्रदान करे।

नव-अभिषिक्त धर्माध्यक्ष हैं- पोलैंड के वादीमार स्तानिसलाउस, माल्टा के अलफ्रेड जुरेब, कनाडा के होसे अविलीन बेट्टेनकॉर्ट।


(Usha Tirkey)

सिनॉड के पूर्व आयोजित सभा में संत पापा द्वारा युवाओं के सवालों का उत्तर

In Church on March 20, 2018 at 4:40 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 20 मार्च 2018 (वाटिकन न्यूज)˸ संत पापा फ्राँसिस ने युवाओं के लिए होने वाले सिनॉड की तैयारी में आयोजित सभा में उपस्थित युवाओं के पाँच महत्वपूर्ण सवालों का उत्तर दिया।

सोमवार को संत पापा ने विश्व के युवाओं की विभिन्न समस्याओं पर पूछे गये सवालों के उत्तर दिये।

मानव तस्करी के शिकार लोगों की मदद युवा कैसे कर सकते हैं?

संत पापा इस सवाल से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने सवाल का उत्तर देते हुए मानव तस्करी की शिकार एक महिला की याद की जिसने अपने तस्करों के चंगुल से मुक्त होने के लिए खतरनाक जोखिम उठाया था। संत पापा ने इस शोषण एवं अत्याचार को ̎आधुनिक दासता ̎ की संज्ञा दी। संत पापा ने महिलाओं के शोषण की कड़ी निंदा की खासकर, उन्होंने उन ख्रीस्तीयों की आलोचना की जो वेश्याओं के लिए भुगतान करते हैं। उन्होंने उसे मानवता के विरूद्ध अपराध कहा। उन्होंने युवाओं को निमंत्रण दिया कि वे महिलाओं की प्रतिष्ठा के लिए संघर्ष करें। संत पापा ने उन सभी काथलिकों की ओर से क्षमा की याचना की जो इस तरह के अपराध से जुड़े हैं।

जीवन में चुनाव करने के लिए, एक युवा, मार्गदर्शन हेतु किनके पास जाएँ?

संत पापा ने एक फ्राँसीसी युवा के सवाल का उत्तर देते हुए कहा कि वे प्रज्ञापूर्ण व्यक्तियों से सलाह लें, चाहे वे युवा हों अथवा बुजूर्ग। एक बुद्धिमान व्यक्ति वही है जो किसी चीज से भय नहीं रखता किन्तु सुनना जानता है तथा जिन्हें ईश्वर द्वारा सही समय पर सही चीज बोलने का वरदान मिला है। संत पापा ने चेतावनी दी कि जब युवा आत्मजाँच के रास्ते को खो देते हैं वे अपने आपको बंद कर देने के खतरे में पड़ जाते हैं। यह अपने अंदर कैंसर को ढोने के समान है जो उन्हें दबा सकता एवं उनकी स्वतंत्रता नष्ट कर सकता है।

युवाओं को किस तरह अपने पड़ोसियों के प्रति खुला एवं पारदर्शी होने के लिए सिखाया जा सकता है?

इस सवाल के उत्तर में संत पापा ने कहा कि शिक्षा तीन आधारभूत भाषाओं को सिखला सकती है- सिर, हृदय एवं हाथ की भाषा। सिर की भाषा का अर्थ है अच्छी तरह विचार करना एवं ठोस चीजों को सीखना। हृदय की भाषा का अर्थ है भावनाओं एवं एहसासों को समझना। हाथ की भाषा का अर्थ है ईश्वर प्रदत्त वरदानों का प्रयोग नये चीजों के निर्माण में करना। संत पापा ने तीनों चीजों को एक साथ प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने आज की डीजिटल दुनिया में ̎एकाकी स्वाभाव ̎ की आलोचना की जबकि तकनीकी को दोष देने के बजाय उसके सही प्रयोग पर जोर दिया ताकि स्वतंत्रता लायी जा सके।

वर्तमान संस्कृति की जटिलताओं के उत्तर में एक युवा किस तरह पुरोहिताई की तैयारी कर सकता है, उदाहरण के लिए टैटू?

संत पापा ने इस सवाल का उत्तर देते हुए कहा कि वे पुरोहित को ख्रीस्त के एक साक्षी के रूप में देखें। उन्होंने कहा कि याजकवाद कलीसिया की एक बीमारी है क्योंकि यह पुरोहित की मूल भूमिका को शासक के प्रबंधकीय भूमिका के साथ मिला देता है। संत पापा ने पुरोहित एवं समुदाय के बीच संबंध पर भी प्रकाश डालते हुए कहा यह गपशप के द्वारा नष्ट हो जाता है। टैटू के सवाल पर उन्होंने याद किया कि कई संस्कृतियों ने इसका प्रयोग अपनी पहचान अलग बनाने के लिए किया था। अतः उन्होंने टैटू से नहीं डरने की सलाह दी किन्तु साथ ही उसके अतिशयोक्ति से भी बचने का परामर्श दिया।

समाज में प्रधानता की संस्कृति एवं अपने मिशन को पूरा करने में आध्यात्मिक जीवन को एक युवा महिला धर्मसमाजी किस तरह संतुलित रख सकती है?

संत पापा ने इस आखरी सवाल का उत्तर देते हुए कहा कि धर्मसमाजी जीवन में पूर्ण प्रशिक्षण चार स्तम्भों पर निर्मित किया जाना चाहिए, ̎बौद्धिक, सामुदायिक, प्रेरितिक एवं आध्यात्मिक प्रशिक्षण।̎ केवल आध्यात्मिक प्रशिक्षण प्राप्त करना, व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर बना देगा।̎ उन्होंने कहा कि कई बार युवा धर्मसमाजियों को दुनिया से बचाने का प्रयास किया जाता है जबकि यह सही सुरक्षा नहीं है। यह एक विकृत प्रशिक्षण है। जिन्होंने पर्याप्त प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया है वे ही हैं जिनका अंत बुराई से होता है। संत पापा ने कहा कि भावनात्मक परिपक्वता में बढ़ने देना ही उनकी रक्षा का एकमात्र रास्ता है।


(Usha Tirkey)

मानव तस्करी की शिकार अधिकांश महिलाएं देहात से

In Church on March 20, 2018 at 4:39 pm

न्यूयॉर्क, मंगलवार, 20 मार्च 2018 (एशियान्यूज)˸ फ्राँसिसकन मिशनरी सिस्टर्स ऑफ मेरी (एफएमएम) की धर्मबहन आएन जीसस मेरी लुइस के अनुसार, भारत के देहात क्षेत्र ही मानव तस्करी के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं।

उन्होंने यह बात अमरीका में 1 से 13 मार्च तक आयोजित एक समिनार में कही जिसका शीर्षक था,  ̎देहात की महिलाओं एवं लड़कियों की तस्करी को रोकना ˸ उन्हें मानव अधिकार की प्रतिष्ठा से जोड़ना।̎

सिस्टर आएन ने कहा कि लोग यह नाटक करना बंद करें कि ये लड़कियाँ शून्य स्थान से आती हैं। ये लड़कियाँ भी कहीं से आती हैं और हम जानते हैं कि वे कहाँ से आते हैं।

फ्राँसिसकन धर्मबहन ने मानव तस्करी से संघर्ष करने हेतु वर्षों तक गैरसरकारी संगठनों में काम किया है। उनके प्रयास ने उन्हें भारत सरकार ने 2016 में ̎ उत्तम समाज कार्यकर्ता ̎ के रूप में पहचान प्रदान की है।

उन्होंने कहा, ̎यौन शोषण एक बड़ा व्यापार है। इसे अन्य पेशों की तरह ही मांग एवं आपूर्ति के व्यापार सिद्धांत द्वारा चलाया जाता है। जिसमें ग्रहकों के लिए यौन उपलब्ध कराया जाता है।

सिस्टर आएन मध्यप्रदेश में कार्यरत हैं जो आदिवासी बहुत क्षेत्र है और जो इस प्रकार के शोषण का सामना करने के लिए कमजोर हैं। उन्होंने कहा कि वे गरीब एवं अनपढ़ हैं उनके लिए स्वास्थ्य सुविधा का आभाव है और वे शहरों से काफी दूर रहते हैं जहाँ उन्हें गैरसरकारी संगठनों एवं सार्वजनिक लाभों का अवसर भी प्राप्त नहीं हो पाता है। तस्कर इन सभी बातों से अवगत हैं। वे जानते हैं कि बच्चों के माता-पिता आसानी से ठगे जा सकते हैं और कभी-कभी को वे इतने लाचार होते हैं कि खुद ही अपने बच्चों को बेच देते हैं।

समस्या के मद्देनजर धर्मबहन ने यौन शोषण हेतु उसकी आपूर्ति पर रोक लगाने हेतु प्रयास किये जाने पर जोर दिया।

उन्होंने सेमिनार के प्रतिभागियों से कहा कि उन परिवारों को साथ दिये जाने और उनके लिए अवसर प्रदान किये जाने की आवश्यकता है। उन्हें यह महसूस करने की आवश्यकता है कि समाज उनकी चिंता करता है।


(Usha Tirkey)

पास्का पर्व में सुरक्षा मजबूत करने हेतु काथलिक काम कर रहे हैं पुलिस बल के साथ

In Church on March 20, 2018 at 4:37 pm

लाहौर, मंगलवार, 20 मार्च 2018 (एशियान्यूज)˸ पास्का के अवसर पर काथलिक समुदाय में किसी तरह के आक्रमण को रोकने एवं सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने के लिए, पाकिस्तान की कलीसिया के स्वयंसेवक पाकिस्तानी पुलिस के साथ काम कर रहे हैं।

लाहौर के सेक्रेड हार्ट महागिरजाघर के प्रचारक सरफ्राज विक्टर ने एशियान्यूज से कहा कि विश्वासियों को सावधान रहने की आवश्यकता है। अपने आपको सुरक्षा बल के समान समझना है, अपनी तथा दूसरों की रक्षा करना है, पुलिस के साथ मित्रवत एवं उनके साथ मिलकर काम करना है।

यह घोषणा कुछ ही दिनों पूर्व हुई थी जब महागिरजाघर सुरक्षा दल ने शहर के गिरजाघरों की सुरक्षा पर विचार करने हेतु पंजाब पुलिस से मुलाकात की था। 14 मार्च को लाहौर में हुए आत्मघाती हमले द्वारा 11 लोगों की मौत हो गयी थी जिनमें 6 पुलिस भी थे।

काथलिकों पर हमला का यही एकमात्र घटना नहीं है, गत साल अधिकारियों ने 19 वर्षीय युवती नोरीन लेगहारी को गिरफ्तार किया था जो पास्का के समय लाहौर के एक गिरजाघर में आत्मघाती बम द्वारा हमला करने की तैयारी कर रहा था।

27 मार्च 2016 को पास्का रविवार के दिन लाहौर के एक पार्क में हुए हमले में 78 लोगों की मौत हो गयी थी तथा 340 से अधिक लोग घायल हो गये थे।

सेक्रेड हार्ट महागिरजाघर में 25 स्वयंसेवकों के एक दल का नेतृत्व कर रहे विलियम अरिफ खान ने कहा कि इस वर्ष सुरक्षा के असाधारण उपाय अपनाये जायेंगे।


(Usha Tirkey)

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