Vatican Radio HIndi

Archive for March 22nd, 2018|Daily archive page

ईश्वर हमें एक माता और पिता के समान प्यार करते हैं, संत पापा फ्राँसिस

In Church on March 22, 2018 at 4:59 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्तपतिवार 22 मार्च 2018 (रेई) : पापस्वीकार संस्कार के लिए जाना गंदगी को दूर करने के लिए ड्राय क्लीनर मशीन के पास जाने की तरह नहीं, बल्कि ईश्वर के प्यार भरे आलिंगन को प्राप्त करना है।” यह बात संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्तपतिवार 22 मार्च को अपने प्रेरितिक निवास संत मार्था के प्रार्थनालय में पवित्र यूखारिस्त समारोह के दौरान प्रवचन में कही।

संत पापा ने उत्पत्ति ग्रंथ(7: 9-9) से लिये गये पहले पाठ में ईश्वर और अब्राहम के बीच स्थापित विधान पर चिंतन करते हुए कहा,“ईश्वर हमेशा अपने विधान की याद करते हैं।” प्रभु निष्ठावान हैं, वे हमें नहीं भूलते हैं। संत पापा ने कहा कि हम दुखभोग के पवित्र सप्ताह के बहुत करीब हैं और माता कलीसिया इस काल में ईश्वर के सच्चे प्रेम को याद दिलाती और इस पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।

पिता और माता की तरह ईश्वर का आंत्रिक प्रेम

संत पापा ने कहा, “वास्तव में प्रभु हमें हृदय से प्रेम करते हैं वे कभी भी हमें भूल नहीं सकते।”  संत पापा अपने देश अर्जेंटीना में मनाये गये माताओं के दिवस की याद करते हैं जब वे अपनी माँ के लिए एक फूल दिया करते थे उस फूल का नाम है “मुझे भूल न जाना” यह फूल दो रंगों का होता है नीला रंग जीवित माताओं के लिए दिया जाता है और बैगनी रंग का फूल मृतक माताओं को चढ़ाया जाता है।

माता के समान ईश्वर हमें नहीं भूलते, वे हमसे बेइन्तहा प्रेम करते हैं। पर हम उसके प्रेम का अनुभव नहीं कर पाते और गलत काम करते, गलत रास्ते पर चले जाते हैं। फिर भी वे हमें अपने प्रेम में वापस लौटाने का हर संभव प्रयास करते और मौका भी देते हैं। वे हमें सुरक्षा प्रदान करते हैं।

पापस्वीकार संस्कार ड्राय क्लीनर मशीन के पास जाने जैसा नहीं है

संत पापा ने कहा कि ईश्वर की निष्ठा हमें आनंद प्रदान करती है। पापास्वीकार संस्कार में ईश्वर हमारे पापों को याद नहीं करते बल्कि प्रेम के साथ हमें उपने पास लौटने की राह देखते हैं। पापस्वीकार संस्कार के लिए जाना गंदगी को दूर करने के लिए ड्राय क्लीनर मशीन के पास जाने की तरह नहीं है। इस संस्कार में हम ईश्वर के प्रेम को पाते हैं ईश्वर हमें आलिंगन करने के लिए तैयार रहते हैं और हमेशा हममें विश्वास करते हैं।

हमारी खुशी आशा में आनन्दित होने की है

संत पापा ने आज के सुसमाचार (योहन 8: 51-59) के संदर्भ में कहा कि कानून के पंडितों ने येसु को मार डालने के लिए पत्थरों को जमा किया। हम भी अपने वचनों से लोगों को मार डालते हैं। जी उठे येसु की सच्चाई को धुँधला बना देते हैं। इतना होते हुए भी येसु हमें नहीं छोड़ते, वे हमसे प्यार करते हैं। हमारी खुशी आशा में आनन्दित होने की है क्योंकि वे हमें माता और पिता बढ़कर प्रेम करते हैं।


(Margaret Sumita Minj)

Advertisements

प्रवासन के लिए वैश्विक समझौता में व्यक्ति को केंद्र में रखें, परमधर्मपीठ

In Church on March 22, 2018 at 4:57 pm

जेनेवा, बृहस्तपतिवार 22 मार्च 2018 (वीआर,रेई) :  परमधर्मपीठ की ओर से संयुक्त राष्ट्र के स्थायी पर्यवेक्षक ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राज्यों द्वारा निर्मित नवीनतम दस्तावेज पर टिप्पणी की, जिसे उन्होंने सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन के लिए वैश्विक समझौता तैयार किया है।

महाधर्माध्यक्ष ईवान यूर्कोविच ने कहा, “शरणार्थी लोग संख्या नहीं हैं जिनको वितरित और आवंटित किया जाए, लेकिन वे व्यक्ति हैं जिनका एक एक नाम हैं उनकी अपनी एक कहानी है, उनकी भी उम्मीदें और आकांक्षाएँ हैं।” उन्होंने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों को अपने काम के केंद्र में हमेशा व्यक्ति की गरिमा को कायम रखने के लिए कहा जिन्हें सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन के लिए सरकारों के साथ बातचीत कर समझौता करने का काम सौंपा गया है।

प्रवासन के लिए वैश्विक समझौते का अभियान

महाधर्माध्यक्ष यूर्कोविच ने प्रवासन के लिए वैश्विक समझौता के कार्यक्रम अभियान के तीसरे भाग पर चर्चा की, जो प्रवासियों और शरणार्थियों को स्वीकार करने और एकीकृत करने में अधिक न्यायसंगत और जिम्मेदारी साझा करने के लिए नियम निर्धारित करता है।

परमधर्मपीठ प्रवासन के लिए वैश्विक समझौता की प्रक्रिया का समर्थक है, जो इस विश्वास पर आधारित है कि प्रवासन में शामिल लोगों के सम्मान के आधार पर वैश्विक प्रतिक्रिया की मांग की गई है।

उन्होंने कहा कि निधियों और संसाधनों का वितरण, निश्चित देशों के संरक्षण की जिम्मेदारी के रूप में सिर्फ अस्थिर क्षेत्रों के भौगोलिक निकटता के कारण सेवा नहीं करना चाहिए और न ही यह शरणार्थियों के आंदोलन के “रोकथाम” के लिए एक औचित्य होना चाहिए। लेकिन टिकाऊ समाधान प्राप्त करने के स्पष्ट उद्देश्य के साथ वास्तव में वास्तविक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और एकजुटता की अभिव्यक्ति  होनी चाहिए।

भेदभाव को समाप्त करने के प्रयासों के लिए प्रशंसा

अंत में महाधर्माध्यक्ष यूर्कोविच ने कहा कि परमधर्मपीठीय प्रतिनिधि उस संदर्भ का स्वागत करता है जो जाति, रंग, धर्म या पंथ के आधार पर भेदभाव को खत्म करने और मानव अधिकारों को बढ़ावा देने तथा उनकी रक्षा करने के व्यापक प्रयास करने के कार्यक्रम को चलाता है। दरअसल, यह महत्वपूर्ण है कि वैश्विक समझौता, मानव व्यक्ति पर दृढ़ता से केंद्रित हो, “आयु, लिंग और विविधता” से निपटने वाले उन विचारधाराओं से बचें।


(Margaret Sumita Minj)

महाधर्माध्यक्ष मोरास 24 मार्च को अंतर-ख्रीस्तीय संप्रदाय दौड़ को झंडा दिखाएंगे

In Church on March 22, 2018 at 4:56 pm

बेंगलुरु, बृहस्तपतिवार 22 मार्च 2018 (ऊकान) : बेंगलुरुमहाधरमप्रांत के प्रशासक, महाधर्माध्यक्ष बर्नार्ड मोरास एक विश्वास-आधारित खेल‘मुक्ति दौड़’ के दूसरे संस्करण को ध्वजांकित करेंगे,जो सभी संप्रदायों के ख्रीस्तीयों को एकजुट करने की अवधारणा की पहल है।

24 मार्च को बैंगलोर के फ्रेजर टाउन में संत फ्राँसिस जेवियर के महागिरजा प्रांगण में, प्रातः 6:30 बजे आयोजित होने वाले विभिन्न संप्रदायों के ख्रीस्तीय और के कलीसियाओं के प्रतिष्ठित लोग उपस्थित रहेंगे।

मुक्ति दौड़ (5 किलोमीटर की दौड़ और 3 किलोमाटर चलना) का आयोजन न्यू लाइफ स्पोर्ट्स एंड फिटनेस अकादमी द्वारा किया गया है और कर्नाटक के संयुक्त ख्रीस्तीय मानव अधिकार मंच के नेतृत्व में किया जा रहा है। आयोजन समिति के मुखिया एल्विस जोसेफ ने कहा, इस दौड़ में लगभग 1500 लोगों की भागीदारी होने की संभावना है।

यह दौड़ पूर्व राज्य एथलीट और खेल प्रबंधक एल्विस जोसेफ की दिमाग की उपज रही है, जिन्होंने सभी कलीसियाओं और संप्रदायों के नेताओं को साथ लेकर पहली ख्रीस्तीय दौड़ की शुरुआत की।

एक विश्वास-प्रेरित खेल और स्वस्थ जीवन शैली में सहयोग और संलग्न करने की पहल है यह प्रतिस्पर्धा का रोमांच पैदा करने के अलावा, सामुदायिक और सहभागिता की भावना को सामने लाता है जो भागीदारी से आता है।

एल्विस का दृढ़ विश्वास है कि “ख्रीस्तीय विश्वासियों के लिए ईश्वर के वचन के माध्यम से विश्वास और आज्ञाकारिता में अभ्यास की निरंतरता के साथ जीवन के सभी क्षेत्रों में अपनी उच्चतम क्षमता प्राप्त करने के लिए जागरुक की आवश्यकता है” ‘मुक्ति दौड़’ का उद्देश्य अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और “दौड़ प्रतियोगिता में सहभागिता” पर केंद्रित है।


(Margaret Sumita Minj)

भारतीय धर्माध्यक्षों द्वार अप्रैल को ‘दलित इतिहास माह’ के रूप में मनाने हेतु आमंत्रण

In Church on March 22, 2018 at 4:54 pm

  नई दिल्ली, बृहस्तपतिवार 22 मार्च 2018 (एशियान्यूज) : भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षों ने विश्वासियों से अप्रैल को ‘दलित इतिहास माह’ के रूप में मनाने हेतु अपील की है।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अनुसूचित जाति एवं पिछड़ी जातियों के कार्यालय द्वारा प्रेषित पत्र में कहा गया है कि “मुक्ति के लिए कट्टरपंथी संघर्ष और दलित सशक्तिकरण के लिए अपनी ज़िंदगी का बलिदान करने वाले सबसे महत्वपूर्ण योगदानकर्ताओं को मनाने के लिए अप्रैल सबसे महत्वपूर्ण अवधि” है।

अनुसूचित जाति एवं पिछड़ी जातियों के कार्यालय के सचिव फादर देवसहायराज “प्रेरणा के इस अनमोल समय पर दलित नेताओं की स्पष्ट और रोजमर्रा के योगदान की याद करने हेतु हर किसी से आग्रह करते हैं।”

इसके लिए, कार्यालय ने उन जीवित या मृत दलितों की छोटी आत्मकथाएं भेजने का सुझाव दिया, जिन्होंने ‘अछूतों’ की स्थिति में सुधार करने के लिए काम किया है।

कार्यालय को उस व्यक्तियों के परिचय और उनके पुरस्कार के बारे में परिचय, उसके द्वारा किए गए संघर्षों और अभियानों के बारे में जानकारी और एक पासपोर्ट आकार के फोटो की आवश्यकता है। समय सीमा 25 मार्च है।

यह व्यक्तिगत रुप से किया जा सकता है या इ-मेल के जरिये भी किया जा सकता है : cbciscst@gamil.com, dalitsinlimbo@gamil.com. भारत में दलित या अछूत, सदियों से हाशिए पर रखे गए हैं और देश की जातिय श्रेणी के तहत चार सामाजिक वर्गों के बाहर उन्हें रखा गया है।

इस कठोर व्यवस्था के कारण, दलित केवल मानव कचरे को इकट्ठा करने जैसे सबसे अधिक गंदा और अपमानजनक काम को सोच सकता था। भारत के संविधान ने जाति विभाजन को खत्म करने के बाद भी, दलित विरोधी भेदभाव समाज में निहित है।


(Margaret Sumita Minj)

झारखंड अदालत ने हत्या के मामले में पहली सजा सुनायी

In Church on March 22, 2018 at 4:53 pm

रामगढ़, बृहस्तपतिवार 22 मार्च 2018 (मैटर्स इंडिया) : झारखंड में एक विशेष फास्ट ट्रैक अदालत ने 21 मार्च को एक मांस व्यापारी की हत्या में संलग्न 11 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

झारखंड राज्य की राजधानी रांची से 45 किलोमीटर की दूरी पर रामगढ़ की अदालत ने 12वें अपराधी को किशोर होने के नाते छोड़ दिया।

29 जून, 2017 को अपने वाहन में मांस ले जा रहे अलीमुद्दीन अंसारी उर्फ असगर अली की हत्या का आरोप इन 12 लोगों पर लगाया गया था।

इससे पहले 16 मार्च को रामगढ़ के अपर जिला अदालत -2 के न्यायाधीश ओम प्रकाश ने सभी अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता के विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया, जिसमें 302 (हत्या) शामिल हैं।

‘द हिंदू’ अखबार ने रिपोर्ट में बताया कि यह देश में इस तरह की हत्या के मामले में पहली सजा है।

अपर सरकारी अभियोजक सुशील कुमार शुक्ला ने कहा, ” उन्हें उम्रकैद की सजा के अलावा अदालत ने प्रत्येक आरोपी पर 2,000 का जुर्माना भी लगाया है।”

अदालत ने पीड़ित के परिवार के लिए पर्याप्त मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए कार्यवाही शुरू करने हेतु जिला सेवाओं के कानूनी अधिकारियों को भी निर्देश दिया है।

पीड़ित की पत्नी, मरियम खातुन, ने न्याय का स्वागत किया और कहा,”मेरे पति की मृत्यु एक अपूर्णीय हानि के रूप में आई। अभियुक्तों का इससे कम सजा मिलनी भी नहीं चाहिए।”

प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने सतर्कता समूह द्वारा इस तरह के हमलों के खिलाफ चेतावनी देने के कुछ घंटों बाद ही यह हत्या की गई। अपनी चेतावनी में उन्होंने कहा कि “गायों को बचाने के नाम पर लोगों की हत्या अस्वीकार्य है।”

विदित हो कि 29 जून, 2017 को चितरपुर इलाके से रामगढ़, अपनी गाड़ी में मांस ले रहे 55 वर्षीय अलीमुद्दीन अंसारी को गौ रक्षा समिति (गाय चौकस संगठन) के कथित अनुयायियों ने हमला किया। गौ रक्षा समूह ने रामगढ़ पुलिस स्टेशन के इलाके के बजारटांड इलाके में गैस एजेंसी के पास उसे पकड़ लिया और सार्वजनिक रूप से उसे मारने से पहले उसके बाहन को आग लगा दी। इस घटना का एक वीडियो बाद में सोशल मीडिया और निजी समाचार चैनलों पर वायरल हो गया।

जून 2017 में एक रायटर की रिपोर्ट में, एक डेटा पत्रकारिता वेबसाइट का हवाला देते हुए कहा गया कि 2010 के बाद से गाय संबंधित हिंसा में 28 भारतीयों की हत्या की गई जिसमें 24 मुसलमान मारे गए और 124 घायल हुए।


(Margaret Sumita Minj)

नाइजीरिया में दापची के स्कूल में अपहरण की गई कुछ लड़कियों की रिहाई, यूनिसेफ

In Church on March 22, 2018 at 4:51 pm

दापची, बृहस्तपतिवार 22 मार्च 2018 (रेई) : नाइजीरिया में यूनिसेफ के प्रतिनिधि मोहम्मद मलिक ने वाटिकन प्रेस को सूचित किया कि बुधवार 21 मार्च सुबह अगवा की गई 100 लड़कियों में से 76 लड़कियां लौट आई हैं, जिन्हें 19 फरवरी को नाइजीरिया के दापची में एक बोर्डिंग स्कूल से इन लड़कियों को अगवा किया गया था। दापची कस्बे से अगवा की गई ज़्यादातर लड़कियां घर वापस लौट आई हैं। चरमपंथी सुबह ही एक वाहन में सभी लड़कियों के लेकर आए और उन्हें छोड़ कर चले गए।

सरकार ने कहा है कि उस इलाके में सैनिक कार्रवाई रोक दी गई है ताकि जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हालांकि सरकारी बयान में ये नहीं बताया गया है कि कितनी लड़कियों की मौत हो चुकी है।

सूचना मंत्री अल्हाजी लाई मोहम्मद ने अपने बयान में कहा कि लड़कियों को ‘सरकार के कुछ दोस्तों की मदद से बिना शर्त’ छुड़वाया गया है।

उन्होंने कहा, “सरकार समझती है कि हिंसा से कुछ हल नहीं होगा क्योंकि इससे लड़कियों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी, इसलिए हिंसा से अलग विकल्पों को हमने सहारा लिया।”

यूनिसेफ, योबे राज्य में युवा मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि लड़कियों और उनके परिवारों को आवश्यक समर्थन मिल सके। पिछले कुछ महीनों में, लड़कियों को शारीरिक और यौन हिंसा का सामना करना पड़ा था। उन्हें सुरक्षित महसूस करने और स्कूल में वापस आने के लिए उनके परिवारों और समुदायों के समर्थन की आवश्यकता है।

यूनिसेफ नागर समाज संगठनों के साथ भी काम कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अगवा की गई हर लड़की की व्यक्तिगत देखभाल शारीरिक चिकित्सा के साथ-साथ मानसिक चिकित्सा मिले।

हमें उन लड़कियों के परिवारों के लिए खेद है जो घर वापस नहीं आयी। हम पुष्टि की प्रतीक्षा करते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि पांच लड़कियां मर चुकी हैं। यूनिसेफ उन परिवारों को हार्दिक संवेदना प्रकट करता है जिन्होंने अपनी बेटियों को खो दिया है।

यूनिसेफ ने सभी लापता लड़कियों की रिहाई का मांग को नवीनीकृत करता है। 2009 में विद्रोह की शुरूआत से  अबतक 2,295 से अधिक शिक्षकों को मार डाला गया है, 19,000 विस्थापित हो गए, और लगभग 1,400 स्कूलों को नष्ट कर दिया गया है।”


(Margaret Sumita Minj)

धरती एवं पानी की हिफाजत करना ही जीवन की रक्षा है,संत पापा फ्राँसिस

In Church on March 22, 2018 at 4:50 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्तपतिवार 22 मार्च 2018 (रेई) : विश्व के लोगों द्वारा हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। लोगों के बीच जल के महत्व, आवश्यकता और संरक्षण के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिये विश्व जल दिवस के रुप में मनाने की घोषणा की गयी थी और वर्ष 1993 से इस उत्सव को मनाना शुरु किया गया। इस अभियान में सम्मिलित होते हुए संत पापा फ्राँसिस ने भी ट्वीट प्रेषित कर जल के संरक्षण हेतु लोगों को प्रेरित किया।

संदेश में उन्होंने लिखा,“पृथ्वी की सुरक्षा और पानी की हिफाजत करना ही जीवन की रक्षा है।”

संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 21 मार्च, विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस पर डाउन सिंड्रोम से ग्रसित विशिष्ट लोगों को कुछ अतिरिक्त प्यार दिखाने और उनके अधिकार का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए अपने ट्वीट संदेश में लिखा,“किसी को भी दर किनार नहीं किया जा सकता है क्योंकि हम सब कमजोर हैं। हममें से हरेक मूल्यवान है जिसे ईश्वर अपने तरीके से विकसित करने का अवसर देता है।”

डाउन सिंड्रोम बच्चों की एक गंभीर समस्या है, जिससे उनका शारीरिक विकास आम बच्चों की तरह नहीं हो पाता। उनका दिमाग भी सामान्य बच्चों की तरह काम नहीं करता। कई बार उनके व्यक्तित्व में कुछ विकृतियां दिखाई देती हैं, लेकिन प्यार और अच्छी देखभाल से ऐसे बच्चों को सामान्य जीवन दिया जा सकता है। डाउन सिंड्रोम एक आनुवंशिक समस्या है, जो क्रोमोजोम की वजह से होती है। साधारण शब्दों में कहा जाए तो सामान्यत: गर्भावस्था में भ्रूण को 46 क्रोमोजोम मिलते हैं, जिनमें 23 माता व 23 पिता के होते हैं। लेकिन डाउन सिंड्रोम पीडित बच्चे में 21वें क्रोमोजोम की एक प्रति ज्यादा होती है, यानी उसमें 47 क्रोमोजोम पाए जाते हैं, जिससे उसका मानसिक व शारीरिक विकास धीमा हो जाता है और कई समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।


(Margaret Sumita Minj)

%d bloggers like this: