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प्रवासन के लिए वैश्विक समझौता में व्यक्ति को केंद्र में रखें, परमधर्मपीठ

In Church on March 22, 2018 at 4:57 pm

जेनेवा, बृहस्तपतिवार 22 मार्च 2018 (वीआर,रेई) :  परमधर्मपीठ की ओर से संयुक्त राष्ट्र के स्थायी पर्यवेक्षक ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राज्यों द्वारा निर्मित नवीनतम दस्तावेज पर टिप्पणी की, जिसे उन्होंने सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन के लिए वैश्विक समझौता तैयार किया है।

महाधर्माध्यक्ष ईवान यूर्कोविच ने कहा, “शरणार्थी लोग संख्या नहीं हैं जिनको वितरित और आवंटित किया जाए, लेकिन वे व्यक्ति हैं जिनका एक एक नाम हैं उनकी अपनी एक कहानी है, उनकी भी उम्मीदें और आकांक्षाएँ हैं।” उन्होंने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों को अपने काम के केंद्र में हमेशा व्यक्ति की गरिमा को कायम रखने के लिए कहा जिन्हें सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन के लिए सरकारों के साथ बातचीत कर समझौता करने का काम सौंपा गया है।

प्रवासन के लिए वैश्विक समझौते का अभियान

महाधर्माध्यक्ष यूर्कोविच ने प्रवासन के लिए वैश्विक समझौता के कार्यक्रम अभियान के तीसरे भाग पर चर्चा की, जो प्रवासियों और शरणार्थियों को स्वीकार करने और एकीकृत करने में अधिक न्यायसंगत और जिम्मेदारी साझा करने के लिए नियम निर्धारित करता है।

परमधर्मपीठ प्रवासन के लिए वैश्विक समझौता की प्रक्रिया का समर्थक है, जो इस विश्वास पर आधारित है कि प्रवासन में शामिल लोगों के सम्मान के आधार पर वैश्विक प्रतिक्रिया की मांग की गई है।

उन्होंने कहा कि निधियों और संसाधनों का वितरण, निश्चित देशों के संरक्षण की जिम्मेदारी के रूप में सिर्फ अस्थिर क्षेत्रों के भौगोलिक निकटता के कारण सेवा नहीं करना चाहिए और न ही यह शरणार्थियों के आंदोलन के “रोकथाम” के लिए एक औचित्य होना चाहिए। लेकिन टिकाऊ समाधान प्राप्त करने के स्पष्ट उद्देश्य के साथ वास्तव में वास्तविक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और एकजुटता की अभिव्यक्ति  होनी चाहिए।

भेदभाव को समाप्त करने के प्रयासों के लिए प्रशंसा

अंत में महाधर्माध्यक्ष यूर्कोविच ने कहा कि परमधर्मपीठीय प्रतिनिधि उस संदर्भ का स्वागत करता है जो जाति, रंग, धर्म या पंथ के आधार पर भेदभाव को खत्म करने और मानव अधिकारों को बढ़ावा देने तथा उनकी रक्षा करने के व्यापक प्रयास करने के कार्यक्रम को चलाता है। दरअसल, यह महत्वपूर्ण है कि वैश्विक समझौता, मानव व्यक्ति पर दृढ़ता से केंद्रित हो, “आयु, लिंग और विविधता” से निपटने वाले उन विचारधाराओं से बचें।


(Margaret Sumita Minj)

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