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येसु के क्रूस में अनन्त जीवन की आशा

In Church on March 30, 2018 at 12:01 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 30 मार्च 2018 (रेई)˸ पुण्य शुक्रवार वह महान दिन है जब हम येसु के दुःखभोग एवं मृत्यु पर चिंतन करते हैं। इस दिन हम क्रूसित येसु की ओर निहारते हैं जिन्होंने हमारी मुक्ति के लिए अपना बलिदान कर दिया।

संत पापा ने पुण्य शुक्रवार को एक ट्वीट प्रेषित कर, सभी विश्वासियों को क्रूसित येसु की ओर देखने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने लिखा, “क्रूसित येसु को निहारें, अनन्त जीवन के लिए हमारी आशा उन्हीं से उत्पन्न होती है।”

पुण्य शुक्रवार को येसु ख्रीस्त के दुःखभोग पर चिंतन क्रूस रास्ता तय कर की जाती है। रोम में क्रूस रास्ता करने की एक विशेष परम्परा रही है जिसके तहत ऐतिहासिक स्मारक कोलोसेयुम में क्रूस रास्ता की प्रार्थना सम्पन्न की जाती है जो शाम 9.15 बजे संत पापा के नेतृत्व में सम्पन्न की जाएगी।


(Usha Tirkey)

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रेजिना चेली में कैदियों को संत पापा का संदेश

In Church on March 30, 2018 at 11:25 am

रोम, शुक्रवार, 30 मार्च 2018 (रेई)˸ “मेरे गाँव तथा मेरी भूमि में जब प्रभु के पुनरूत्थान की घंटी सुनाई पड़ती है, माताएं एवं दादियाँ बच्चों को लेकर उनके आँसू पोंछते हैं ताकि वे जी उठे ख्रीस्त में आशा को देख सकें।” यह बात संत पापा फ्राँसिस ने रेजिना चेली कैदखाने में पुण्य बृहस्पतिवार को कैदियों से मुलाकात करते हुए कही।

उन्होंने कहा, “अपनी नजरों को नवीकृत करने से न थकें। अपनी आत्मा में पड़ने वाले मोतियाबिन्द को घटाने का प्रयास हर दिन करें। अपनी नजरों को ठीक करें। यह एक अच्छी पहल है।”

संत पापा ने सकारात्मक विचार में बढ़ने का प्रोत्साहन देते हुए कहा कि हम जानते है कि जब बोतल में अंगुरी आधी होती है और हम खाली भाग को देखते हैं तो हमें बुरा लगता है किन्तु यदि हम भरे हुए भाग को देखते हैं तो लगता है कि पीने के लिए अब भी बाकी है।

संत पापा ने कहा कि हमारी दृष्टि आशा को खोल देती है। यह कैदखाना आशा से रहित नहीं हो सकता। यहाँ जो भी आते हैं उन्हें सीखना एवं बढ़ना चाहिए तथा आशा बोना चाहिए। आशा के लिए खुले नहीं होने से बढ़कर कोई सजा नहीं है। आशा के लिए खुला नहीं होने की सजा एक ख्रीस्तीय दण्ड नहीं है और यह एक मानवीय दण्ड भी नहीं है। जीवन में कठिनाइयाँ हैं, बुराईयाँ हैं, उदासी है लोग सिर्फ अपने लिए सोचते हैं, हम अपने माता-पिता, पत्नी, पति एवं बच्चों की याद करते हैं यह दुखद है किन्तु हमें अपने आपको निराश होने नहीं देना चाहिए। संत पापा ने कहा कि हम यहाँ इसलिए हैं ताकि अपने आप को नवीकृत कर सकें और यही आशा है। हम आशा बोयें। उन्होंने कैदियों से कहा कि उनका काम है कि वे समाज में पुनः प्रवेश करने के लिए आशा बोने में मदद करें जो सभी से लिए उत्तम होगा। हर सजा को आशा की क्षितिज के लिए खुला होना चाहिए। यही कारण है कि मृत्यु दण्ड न तो ख्रीस्तीय है और मानवीय।

संत पापा ने सभी कैदियों के लिए पुनरूत्थान के जल, नई दृष्टि एवं नई आशा की कामना की। उन्होंने अपनी प्रेरितिक यात्रा की सफलता हेतु की गयी तैयारियों के लिए उन्हें धन्यवाद दिया तथा अपने सामीप्य एवं प्रार्थना का आश्वासन देते हुए उन से प्रार्थना का आग्रह किया।


(Usha Tirkey)

रेजिना चेली कैदखाने में संत पापा का प्रवचन

In Church on March 30, 2018 at 11:23 am

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 30 मार्च 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने पुण्य बृहस्पतिवार को रोम स्थित रेजिना चेली कैदखाने में कैदियों के साथ प्रभु के अंतिम भोज की धर्मविधि सम्पन्न की।

उन्होंने प्रवचन में कहा, “येसु ने कहा, मैंने तुम्हें उदाहरण दिया है जिससे जैसा मैंने तुम्हारे साथ किया है वैसे तुम भी किया करो।” (यो. 13: 15).

संत पापा ने कहा, “उस समय पैर केवल दासों द्वारा धोया जाता था। यह दासों का काम था। लोग सड़क पर चलते थे जहाँ डामर लगाया हुआ नहीं था और न ही पत्थर बिछाया गया था। उस समय रास्ते धूल से भरे होते थे और लोगों के पैर धूल धूसरित हो जाते थे। घर के द्वार पर दासों को रखा जाता था जो लोगों के पैरों की सफाई करते थे। इस प्रकार यह दासों की नौकरी थी किन्तु यह एक सेवा थी जो दासों के द्वारा प्रदान की जाती थी। येसु ने इस सेवा को करना चाहा तकि हमें एक दूसरे की सेवा करने का उदाहरण दे सकें।

एक बार, जब वे रास्ते पर थे, दो शिष्य जो अपने व्यवसाय की तलाश कर रहे थे येसु के दायें और बायें महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करने की इच्छा जाहिर की। येसु ने उन्हें स्नेह से देखा और कहा, “तुम नहीं जानते कि तुम क्या मांग रहे हो।” राष्ट्र के नेता अपनी सेवा का आदेश देते हैं और वे इससे खुश होते हैं। हम उस समय के राजाओं पर गौर करें, उन सम्राठों की याद करें जिन्होंने दासों का प्रयोग किया। वे जो आदेश देते थे उन्हें किसी भी हालत में उसे पूरा करना पड़ता था। येसु ने “तुम्हारे नेता तुम्हारे सेवक बनें,” कहकर उस युग के इतिहासिक एवं संस्कृतिक आदतों को पलट दिया। आज भी जो व्यक्ति एक अच्छा नेता बनना चाहता है उसे सेवा करना चाहिए।

संत पापा ने कहा कि यदि उन राजाओं, सम्राठों एवं नेताओं ने येसु की शिक्षा को समझा लिया होता एवं निर्दयी होकर लोगों को मार डालने के बजाय येसु के उदाहरणों को अपनाया होता तो युद्ध नहीं होते। सेवा के मनोभाव को यद्यपि कई लोग स्वीकार नहीं करते हैं, जैसे धनी लोग, दूसरों को घृणा की नजर से देखने वाले लोग एवं दूसरों की बुराई चाहने वाले लोग किन्तु हम ऐसे ही लोगों की सेवा करने के लिए बुलाये गये हैं। कई लोग पीड़ित हैं, समाज द्वारा बहिष्कृत हैं उन लोगों के पास येसु जाकर कहते हैं, तुम मेरे लिए मूल्यवान हो।

संत पापा ने कहा, “येसु सेवा करने आये और वे आज भी सेवा करते हैं उसका चिन्ह है रेजिना चेली कैदखाना। 12 प्रेरितों के समान उन्होंने आपके पैर धोने के लिए आप में से बारह को चुना है। येसु हम सभी के लिए जोखिम उठाते हैं। येसु पिलातुस नहीं येसु ही पुकारे जाते हैं। वे उनके हाथ नहीं पाँव धोते हैं। वे जानते हैं कि किस तरह जोखिम उठाना है वे कांटों के बीच झुककर, घायल होने के खतरे के बीच खोये हुए भेड़ को बचाते हैं।”

संत पापा ने कहा, “आज मैं जो एक पापी हूँ किन्तु येसु का प्रतिनिधित्व करता हूँ मैं उनका संदेशवाहक हूँ।” आज जब मैं आप प्रत्येक के सामने झुकता हूँ तो सोचता हूँ कि येसु इस व्यक्ति के माध्यम से लोगों के लिए जोखिम उठाते हैं, एक पापी को यह बतलाने के लिए कि वे उन्हें प्यार करते हैं। यही सेवा है, येसु द्वारा सिखलायी गयी सेवा। वे हमें कभी नहीं छोड़ते, वे हमें माफ करने से कभी नहीं थकते। वे हमें बहुत अधिक प्यार करते हैं।

संत पापा ने इन्हीं मनोभवों के साथ ख्रीस्तयाग समारोह में भाग लेने हेतु सभी कैदियों को निमंत्रण दिया तथा कहा कि यह समारोह एक प्रतीक है। अपना शरीर एवं रक्त अर्पित करने के पूर्व येसु ने हम प्रत्येक के लिए जोखिम उठाया, सेवा का खतरा मोला क्योंकि वे हमें बहुत अधिक प्यार करते हैं।


(Usha Tirkey)

ईश्वर अपने लोगों के करीब, क्रिज्मा मिस्सा में संत पापा

In Church on March 30, 2018 at 11:20 am

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 29 मार्च 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने 29 मार्च को पुण्य बृहस्पतिवार के दिन रोम धर्मप्रांत के सभी पुरोहितों, अन्य पुरोहितों एवं विश्वासियों के साथ संत पेत्रुस महागिरजाघर में समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित कर, पवित्र तेलों पर आशीष प्रदान की।

उन्होंने कहा, जब मैं आज की धर्मविधि को पढ़ रहा था तब मैं विधि-विवरण ग्रंथ के उस पाठ की याद कर रहा था जहाँ लिखा है, “क्योंकि ऐसा महान राष्ट्र कहाँ है जिसके देवता उसके इतने निकट हैं जितना हमारा प्रभु ईश्वर हमारे निकट होता है जब हम उसकी दुहाई देते हैं? ” (विधि. 4:7) संत पापा ने कहा, “ईश्वर का सामीप्य…प्रेरितिक सामीप्य।”

उन्होंने कहा, ” नबी इसायस के ग्रंथ से लिए गये पाठ में हम सेवक पर चिंतन करते हैं जो अभिषिक्त किये गये थे एवं अपने लोगों के बीच गरीबों, रोगियों एवं कैदियों के करीब प्रेषित थे। पवित्र आत्मा उन पर छाया हुआ था जो उन्हें यात्रा में सामर्थ्य एवं साहचर्य प्रदान करता था।”

स्रोत्र ग्रंथ के 88 पद में हम देखते हैं कि ईश्वर लोगो के कितने करीब रहते हैं। उन्होंने राजा दाऊद को जब वे छोटे थे हाथ पकड़कर चलना सिखाया, जब वे बढ़ रहे थे तो उन्हें पोषित किया तथा उनके प्रति अपनी निष्ठा को सदा बनाये रखा।

प्रकाशना ग्रंथ प्रभु को हमारे करीब बतलाता है। “हर आँख उन्हें देखेगी, जिन्होंने उन्हें छेदा वे भी उन्हें देखेंगे” इन शब्दों के द्वारा वे हमें यह एहसास दिलाते हैं कि पुनर्जीवित प्रभु के घाव हमेशा दिखाई देते हैं। प्रभु हमेशा हमारे पास आते हैं पीड़ितों के रूप में, पर चुनाव हमें करना है कि क्या हम उनके करीब जाएँ, विशेषकर, जब वे बच्चों के रूप में आते हैं।

संत पापा ने संत लूकस के सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन करते हुए कहा, “आज के सुसमाचार के केंद्र में हम देखते हैं कि प्रभु अपने लोगों की नजरों के सामने जो उन पर टिकी हुई थी नाजरेथ के सभागृह में पढ़ने के लिए उठ खड़े हुए। उन्हें नबी इसायस की पुस्तक दी गयी। पुस्तक खोलकर ईसा ने वह स्थान निकाला, जहां लिखा है, प्रभु का आत्मा मुझ पर छाया रहता है, क्योंकि उसने मेरा अभिषेक किया है। उसने मुझे भेजा है जिससे कि मैं दरिद्रों को सुसमाचार सुनाऊँ, बंदियों को मुक्ति का और अंधों को दृष्टिदान का संदेश दूँ। (इसा. 61:1) उन्होंने सुनने वालों को यह चुनौती दी, “धर्मग्रंथ का यह कथन आज तुम लोगों के सामने पूरा हो गया है।” (लूक. 4:21)

संत पापा ने कहा कि येसु ने एक अनुच्छेद ढ़ूँढ निकाला तथा उसे एक शास्त्री की निपुणता के साथ पढ़ सुनाया। वे एक शास्त्री अथवा सहिंता के पंडित बन सकते थे किन्तु उन्होंने एक सुसमाचार प्रचारक बनना चाहा, रास्ते पर उपदेश देने एवं अपने लोगों के लिए आनन्द के सुमाचार को सुनाने वाला। नबी इसायस के अनुसार एक ऐसा प्रचारक जिनके पाँव चिकने होते हैं।

यह ईश्वर का महान चुनाव है, उन्होंने अपने लोगों के करीब रहना चाहा। 30 साल के छिपे जीवन के बाद ही उन्होंने अपना उपदेश आरम्भ किया। यहाँ हम शरीरधारण की शिक्षा को पाते हैं, संस्कृतिकरण की शिक्षा, न केवल विदेशी संस्कृतियों में किन्तु हमारे ही पल्लियों में, युवाओं की नयी संस्कृतियों में।

संत पापा ने सामीप्य का अर्थ बतलाते हुए कहा, “सामीप्य किसी एक विशेष सदगुण से बढ़कर है। यह एक मनोभाव है जो व्यक्ति को पूरी तरह संलग्न करता, हमारे बात व्यवहार, अपने तथा दूसरों के प्रति हमारी तत्परता। जब लोग एक पुरोहित के बारे बात-चीत करते हुए कहते हैं कि वे हमारे करीब हैं इसका दो अर्थ है, पहला कि वे हमेशा उपस्थित हैं (अर्थात् वे अत्यधिक व्यस्तता नहीं दिखाते हैं) दूसरा कि उनके पास प्रत्येक के लिए शब्द है। वे हर किसी से बात कर सकते हैं, बच्चे, बूढ़े, गरीब एवं गैरख्रीस्तीय। पुरोहित जो करीब रहते हैं वे उपलब्ध होते हैं वे अपने लोगों के लिए समय देते हैं, सभी से बातचीत करते हैं। संत पापा ने उन्हें “गली का पुरोहित” नाम दिया।

येसु से गली का उपदेशक बनने सीखने वालों में एक थे फिलीप। प्रेरित चरित में हम पढ़ते हैं कि वे शहरों में घूम-घूम कर सुसमाचार का प्रचार करते थे।… इसलिए उन शहरों में आनन्द छा गया। (प्रे.च. 8:4.5-8) फिलीप एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें पवित्र आत्मा किसी भी समय अपने साथ ले लेते थे तथा उन्हें सुसमाचार प्रचार हेतु भेजते थे और वे जगह जगह घूम कर सुसमाचार सुनाते थे। वे एक ऐसे व्यक्ति थे जो विश्वास करने वालों को बपतिस्मा दिया करते थे, उदाहरण के लिए इथोपियाई खोजा का बपतिस्मा जिसको उन्होंने रास्ते के किनारे ही सम्पन्न किया। (प्रे.च. 8:5.36-40).

करीब रहना एक प्रचारक के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुसमाचार में यह एक मुख्य मनोभाव है (येसु इसका प्रयोग स्वर्ग राज्य के बारे बतलाने हेतु करते हैं।) हम निश्चित रूप से जानते हैं कि करीबी दया के लिए आवश्यक है जो भले समारीतानी की तरह हुए बिना दया नहीं कर सकती। यह दूरी को कम करने का रास्ता निकालती है। संत पापा ने करीबी को सच्चाई की भी कुँजी कहा। क्या दूरी सचमुच कम की जा सकती है यदि सच्चाई को साथ लिया जाए? संत पापा ने कहा, जी हाँ क्योंकि सच्चाई परिस्थिति एवं एक निश्चित दूरी की चीजों की परिभाषा मात्र नहीं है। यह इससे बढ़कर है। सच्चाई का अर्थ निष्ठा भी है। यह लोगों को उनके सच्चे नाम से पुकारने के लिए प्रेरित करता है जैसा कि प्रभु उनकी परिस्थितियों के पहले उनका नाम लेते हैं।

संत पापा ने कहा कि हमें निराकार सच्चाइयों की देवमूर्तियां बनाने के प्रलोभन से बचना चाहिए। वे आराम की देवमूर्तियाँ हो सकते हैं जो हमेशा आसान जिंदगी को प्रस्तुत करते हैं, यश एवं सत्ता का प्रलोभन देते हैं तथा उनकी परख करना आसान नहीं होता क्योंकि सच्चाई की देवमूर्ती अनुकरण करती है। यह सुसमाचार के शब्दों को धारण करती किन्तु उनके द्वारा हृदय का स्पर्श करने से रोकती है। यह और भी बदतर तब हो जाती है जब यह लोगों को वचन एवं येसु के संस्कारों की रोग हरने वाली निकटता से दूर कर देती है।

ऐसे समय में हम पुरोहितों की माता, मरियम के पास आयें। हम उन्हें “सामीप्य की माता” पुकार सकते हैं। एक सच्ची माता के रूप में वे हमारे बगल में चलती हैं हमारी कठिनाइयों में हमारा साथ देतीं एवं ईश्वर के प्रेम से सदा घिरी रहती हैं। इस तरह कोई भी बहिष्कृत महसूस नहीं करता।

हमारी माता न केवल उस समय हमारे करीब रहतीं जब वे सेवा हेतु बाहर निकलती हैं बल्कि उनका सामीप्य उनकी अभिव्यक्ति में भी प्रकट होता है। काना में एक उपयुक्त समय में वे जिस आवाज से चेलों के साथ बात करती हैं, “वे जैसा कहें वैसा ही करो।”  उनका ये लहजा सभी कलीसियाई भाषाओं में ममता का आदर्श है। उन्होंने जिन शब्दों का उच्चारण किया उनको करने के लिए न केवल कृपा मांगी बल्कि उन स्थलों पर भी दृढ़ता पूर्वक खड़ी रही जहाँ महत्वपूर्ण बातें मन गढ़ंत हो गयी थीं, खासकर, प्रत्येक हृदय, परिवार एवं संस्कृति की महत्वपूर्ण बातें। इस बात की परख केवल इसी से की जा सकती है कि अंगुरी जो समाप्त हो चुकी थी और प्रभु जो अंगुरी प्रदान करना चाहते थे।

संत पापा ने पुरोहितों को परामर्श देते हुए कहा, “मैं आपको सलाह देता हूँ कि आप पुरोहितिक सामीप्य के तीन शब्दों पर चिंतन करें, येसु तुम्हें जो कहते हैं वही करो, सुनने की आवश्यकता, हजारों तरह से किन्तु वही ममतामय आवाज में। ये शब्द हैं, आध्यात्मिक साहचर्य, पापस्वीकार एवं उपदेश।

सामीप्य एक आध्यात्मिक परिवर्तन है। संत पापा ने आध्यात्मिक परिवर्तन की तुलना प्रभु के साथ समारीतानी महिला से करते हुए कहा, “प्रभु ने उसे सबसे पहले आत्मा एवं सच्चाई में पूजा करना सिखलाया। फिर धीरे से, उसे अपने पापों को स्वीकार करने में मदद दिया और अंत में उसमें मिशनरी भावना उत्पन्न की जिसके द्वारा वह उसका प्रचार करने हेतु अपना गाँव गयी। इस तरह प्रभु हमारे लिए आध्यात्मिक परिवर्तन का आदर्श प्रस्तुत करते हैं। वे समारीतानी महिला के पापों को आराधना के प्रार्थना अथवा उसके मिशनरी बुलाहट द्वारा फीका किये बिना बाहर प्रकाश में लाना जानते थे।

पाप स्वीकार में सामीप्य। संत पापा ने इसको समझाने के लिए व्यभिचार में पकड़ी गयी महिला का उदाहरण दिया। संत पापा ने कहा कि यह स्पष्ट है कि यहां हर बात में सामीप्य है क्योंकि येसु की सच्चाई में हमेशा आमने-सामने बात किया जा सकता है। दूसरों की नजर में नजर मिलाना जैसा कि येसु ने व्यभिचार में पकड़ी गयी और येसु के सामने घुटनों पर पड़ी महिला के साथ किया। उस महिला को जिसको पत्थरों से मार डाला जा रहा था येसु ने कहा, मैं भी तुम्हें दण्ड नहीं दूँगा।” (यो. 8:11).

संत पापा ने कहा, “यह नियम के विरूद्ध जाना नहीं हैं। हम इसमें यह भी जोड़ सकते हैं जाओ फिर पाप नहीं करना।” परिभाषा के रूप में सत्य के वैधानिक स्वर के साथ नहीं बल्कि उन लोगों की आवाज जिसमें यह महसूस किया जा सके कि उन्हें ईश्वरीय दया के मापदंडों का निर्धारण करना है। इसके विपरीत, इन शब्दों को सत्य के रूप में निष्ठा में उच्चरित किये जाने की आवश्यकता है। एक पापी को आगे देखने, न कि पीछे मुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। “फिर पाप नहीं करना” कहने का सही लहजा पाप मोचक में देखा जा सकता है जो उसका उच्चारण करता तथा उसका उच्चारण वह सत्तर गुणा सात बार तक करना चाहता है।

सामीप्य उपदेश देना है। इस पर चिंतन करते हुए हम उन लोगों की याद करें जो दूर में रहते हैं तथा संत पेत्रुस के प्रथम उपदेश को सुनते हैं जो पेंतेकोस्त की घटना का एक भाग है। पेत्रुस घोषणा करते हैं तथा इस तरह उपदेश देते हैं कि यह उनके हृदय को स्पर्श करता है। उनकी घोषणा लोगों को यह कहने हेतु प्रेरित करता है “हमें क्या करना चाहिए।?” (प्रे.च. 2:37)

एक सवाल हमें हमेशा पूछना और उसका उत्तर मरियम तथा कलीसिया के लहजे में दिया जाना चाहिए। संत पापा ने कहा कि उपदेश, एक पुरोहित का अपने लोगों के करीब होने एवं उनसे सम्पर्क रखने की जाँच का एक स्पर्श बिन्दु है। उपदेश से पता चलता है कि हम प्रार्थना में ईश्वर के कितने करीब हैं तथा अपने लोगों के दैनिक जीवन में उनसे हमारा सम्पर्क कितना है।

यदि हम ईश्वर से दूर एवं अपने लोगों के करीब महसूस करते हैं तब हमें कौन हमारी उन विचारधाराओं से चंगाई प्रदान करेगा जो हमारे उत्साह को ठंढ़ा कर देता है। दीन- हीन लोग हमें येसु की ओर दूसरे तरह से देखने में मदद देते हैं क्योंकि उनकी नजरों में येसु आकर्षक लगते, उनके भले उदाहरणों में नैतिक अधिकार है, उनकी शिक्षा हमारे जीवन के लिए मददगार है।

यदि हम लोगों से दूर महसूस करते हैं तो प्रभु के पास आयें, सुसमाचार मे उनके वचनों को पढ़ें, तब वे हमें लोगों की ओर देखने के अपने तरीके को बतलायेंगे। उनकी नजर हर व्यक्ति के लिए कितना मूल्यवान है जिनके लिए उन्होंने क्रूस पर अपना खून बहाया। ईश्वर के साथ सामीप्य में वचन आपमें शरीरधारण करेगा तथा हर पुरोहित लोगों के करीब होगा। ईश प्रजा के निकट होने के द्वारा, उनका पीड़ित शरीर आपके हृदय में बोलेगा और उसके द्वारा ईश्वर से बोलने हेतु प्रेरित होंगे। इस तरह आप एक मध्यस्थ पुरोहित बन जायेंगे।

संत पापा ने कहा कि एक पुरोहित जो अपने लोगों के करीब होता है वह उनके बीच, उनके नजदीक तथा एक भले चरवाहे की कोमलता के साथ चलता है। वह कभी-कभी उनके आगे चलता, कभी-कभी उनके बीच एवं कभी-कभी उनके पीछे भी चलता है। इस तरह के पुरोहितों की लोग न केवल प्रशंसा करते किन्तु वे यह अनुभव करते हैं कि उनमें कुछ खास है। वे उसमें येसु की उपस्थिति महसूस करते। यही कारण है कि हमारे सामीप्य की परख केवल अधिक चीजों को करने से नहीं होती है।

हम येसु को मानवता के रूप में प्रस्तुत करत हैं अथवा मात्र एक विचार के रूप में।

अंत में, संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना की कि सामीप्य की हमारी माता हमें एक-दूसरे के करीब रहने में मदद करे तथा जब हमें लोगों को यह बतलाने की आवश्यकता पड़े, “सब कुछ वैसा ही करते जाओ जैसा येसु कहें” तब हम एक लहजे में कह सकें, ताकि विभिन्न प्रकार के हमारे विचारों में उनकी ममता की झलक मिले। क्योंकि वही एक हैं जिन्होंने अपने हाँ से येसु को सदा के लिए हमारे करीब लाया।

 


(Usha Tirkey)

संत पापा द्वारा ख्रीस्तीय, मुस्लमान एवं बौद्ध लोगों के पैर धोवन

In Church on March 30, 2018 at 11:17 am

रोम, बृहस्पतिवार, 29 मार्च 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ संत पापा फ्राँसिस गुरूवार 29 मार्च की संध्या पुण्य बृहस्पतिवार की धर्मविधि रोम स्थित रेजिना चेली कैदखाने में सम्पन्न करेंगे जहाँ वे कैदखाने के अधिकारियों द्वारा चुने गये बारह कैदियों के पैर धोयेंगे।

पैर धोने हेतु चुने गये बारह लोग, इटली, फिलीपींस, मोरोक्को, मोलदाविया, कोलोम्बिया, नाईजीरिया एवं सीयेरा लेओने के हैं। उनमें से आठ काथलिक हैं तथा दो मुस्लिम, एक बौद्ध एवं एक ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के हैं।

2013 में संत पापा चुने जाने के तुरन्त बाद संत पापा फ्राँसिस ने युवा कैदखाना केंद्र का दौरा किया था जहाँ उन्होंने पहली बार कुछ महिलाओं एवं गैरख्रीस्तीयों के पैर धोये थे।

रेजिना चेली पहुँचकर करीब 4.00 बजे संत पापा सबस पहले वहाँ के बीमार कैदियों से मुलाकात करेंगे। उसके बाद वे कोएना दोमिनी में पुण्य बृहस्पतिवार धर्मविधि सम्पन्न करेंगे। वे उन्हें एक उपहार भी भेंट करेंगे।

वाटिकन लौटने के पूर्व वे जेल के आठवें विभाग का दौरा करेंगे।

 

(Usha Tirkey)

संत पापा ने रोम के यहूदियों को पास्का पर्व की शुभकामनाएँ दी

In Church on March 30, 2018 at 11:16 am

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 29 मार्च 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने रोम के मुख्य रब्बी रिकारदो दी सेन्यी को एक संदेश भेज कर, रोम के यहूदी समुदाय को पास्का पर्व की हार्दिक एवं भाईचारा पूर्ण शुभकामनाएं अर्पित की।

पेसाक या पास्का यहूदियों का आठ दिवसीय त्योहार है जो इस्राइलियों के मिस्र देश से मुक्ति किये जाने की घटना का स्मरण दिलाता है जैसा कि पुराने व्यवस्थान में वर्णित है।

संत पापा ने संदेश में लिखा, “सर्वशक्तिमान ईश्वर यहूदी लोगों को आशीष प्रदान करे एवं उनकी यात्रा मे उनका साथ दे। सर्वोच्च ईश्वर मित्रता में बढ़ने तथा शांति एवं सौहार्द का साक्ष्य देने में बढ़ने दे।”

संत पापा ने अपने संदेश के अंत में प्रार्थना का आग्रह करते हुए, खुश पास्का की शुभकामनाएँ अर्पित की।

संत पापा ने अपना यह संदेश रोम के प्रमुख रब्बी रिकार्दो दी सेन्यी के पास्का पर्व की शुभकामना के उत्तर में प्रेषित किया।

शुभकामनाएँ की अदला बदली खास इसलिए है क्योंकि इस वर्ष ख्रीस्तीयों का पास्का पर्व एवं यहूदियों का पास्का पर्व एक साथ हो रहा है।


(Usha Tirkey)

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