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रेजिना चेली में कैदियों को संत पापा का संदेश

In Church on March 30, 2018 at 11:25 am

रोम, शुक्रवार, 30 मार्च 2018 (रेई)˸ “मेरे गाँव तथा मेरी भूमि में जब प्रभु के पुनरूत्थान की घंटी सुनाई पड़ती है, माताएं एवं दादियाँ बच्चों को लेकर उनके आँसू पोंछते हैं ताकि वे जी उठे ख्रीस्त में आशा को देख सकें।” यह बात संत पापा फ्राँसिस ने रेजिना चेली कैदखाने में पुण्य बृहस्पतिवार को कैदियों से मुलाकात करते हुए कही।

उन्होंने कहा, “अपनी नजरों को नवीकृत करने से न थकें। अपनी आत्मा में पड़ने वाले मोतियाबिन्द को घटाने का प्रयास हर दिन करें। अपनी नजरों को ठीक करें। यह एक अच्छी पहल है।”

संत पापा ने सकारात्मक विचार में बढ़ने का प्रोत्साहन देते हुए कहा कि हम जानते है कि जब बोतल में अंगुरी आधी होती है और हम खाली भाग को देखते हैं तो हमें बुरा लगता है किन्तु यदि हम भरे हुए भाग को देखते हैं तो लगता है कि पीने के लिए अब भी बाकी है।

संत पापा ने कहा कि हमारी दृष्टि आशा को खोल देती है। यह कैदखाना आशा से रहित नहीं हो सकता। यहाँ जो भी आते हैं उन्हें सीखना एवं बढ़ना चाहिए तथा आशा बोना चाहिए। आशा के लिए खुले नहीं होने से बढ़कर कोई सजा नहीं है। आशा के लिए खुला नहीं होने की सजा एक ख्रीस्तीय दण्ड नहीं है और यह एक मानवीय दण्ड भी नहीं है। जीवन में कठिनाइयाँ हैं, बुराईयाँ हैं, उदासी है लोग सिर्फ अपने लिए सोचते हैं, हम अपने माता-पिता, पत्नी, पति एवं बच्चों की याद करते हैं यह दुखद है किन्तु हमें अपने आपको निराश होने नहीं देना चाहिए। संत पापा ने कहा कि हम यहाँ इसलिए हैं ताकि अपने आप को नवीकृत कर सकें और यही आशा है। हम आशा बोयें। उन्होंने कैदियों से कहा कि उनका काम है कि वे समाज में पुनः प्रवेश करने के लिए आशा बोने में मदद करें जो सभी से लिए उत्तम होगा। हर सजा को आशा की क्षितिज के लिए खुला होना चाहिए। यही कारण है कि मृत्यु दण्ड न तो ख्रीस्तीय है और मानवीय।

संत पापा ने सभी कैदियों के लिए पुनरूत्थान के जल, नई दृष्टि एवं नई आशा की कामना की। उन्होंने अपनी प्रेरितिक यात्रा की सफलता हेतु की गयी तैयारियों के लिए उन्हें धन्यवाद दिया तथा अपने सामीप्य एवं प्रार्थना का आश्वासन देते हुए उन से प्रार्थना का आग्रह किया।


(Usha Tirkey)

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