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“एक दुर्लभ जीवन” एसोसिएशन को संत पापा फ्राँसिस का अभिवादन

In Church on April 30, 2018 at 3:30 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 30 अप्रैल 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 30 अप्रैल को वाटिकन के संत कलेंमेंटीन सभागार में “एक दुर्लभ जीवन” एसोसिएशन के करीब 60 सदस्यों से मुलाकात की। संत पापा ने एसोसिएशन के अध्यक्ष  डेविड के पिता को इसकी शुरुआत करने के उद्देश्यों और अपना अनुभव बांटने के लिए तथा आशा के संकेत के रुप में रोम आने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।

उन्होंने कहा कि दुर्लभ बीमारियों पर अनुसंधान और एकजुटता पर कार्य करने वाले संघों से मिलकर उन्हें हमेशा खुशी होती है। बेशक, उन्हें भी पीड़ा और कठिनाइयों को देखकर दुःख होता है। वे उन परिवारों की प्रशंसा करते हैं जो इस वास्तविकता का सामना मिलकर करते हैं और इसे सुधारने के लिए प्रयासरत हैं।

संत पापा ने कहा,“आप, जोर्ज और रोसीटा, आपके बेटे डेविड के लिए और दुर्लभ बीमारी से पीड़ित लोगों और उनके परिवारों के लिए कुछ करने की तीव्र इच्छा है। आपने एसोसिएशन को जो नाम दिया है: “एक दुर्लभ जीवन”, बहुत कुछ कहता है, क्योंकि यह डेविड की वास्तविकता के साथ आपकी नकारात्मक नहीं बल्कि सकारात्मकता को व्यक्त करता है। यह नाम कहता है कि आप सकारात्मक रुप में जीवन को देखते हैं। हर मानव जीवन अद्वितीय है और यदि यह दुर्लभ या बहुत दुर्लभ रोग ग्रस्त है, तो भी यह जीवन है।”

यह सकारात्मक रूप में प्यार का “चमत्कार” है। यह प्यार ही है जो नकारात्मक स्थिति में भी अच्छा देखना जानता है।  यह जानता है कि रात के अंधेरे में छोटी लौ को कैसे रखा जाए।

संत पापा ने कहा,“प्यार एक और चमत्कार करता है, यह रोज़मर्रा की जिंदगी में बीमार या कठिन परिस्थिति से पीड़ित होने पर भी दूसरों के लिए खुला रहता है और अपनी तकलीफ साझा करने में सक्षम होता है।

संत पापा ने ईश्वर को धन्यवाद दिया कि ‘जीवन और आशा’ का दौड़ जिसे “एक दुर्लभ जीवन” एसोसिएशन के सदस्यों ने अपने घर से शुरुआत की है, दस दिनों में 700 किलोमीटर का रास्ता तय करके रोम पहुँचे हैं। संत पापा ने उन सभी को बधाई दी जिन्होंने इस “दुर्लभ जीवन की दौड़” में भाग लिया और उन सभी लोगों को भी जिन्होंने इनका सहयोग दिया। संत पापा ने उनके लिए और एसोसिएशन के सभी सदस्यों के लिए अपनी प्रार्थना की आश्वासन दिया।

वदित हो “एक दुर्लभ जीवन” एसोसिएशन एक गैर-लाभकारी संगठन है जो वैज्ञानिक अनुसंधान के समर्थन में उपयोगिता और सामाजिक एकजुटता के साथ दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए स्वास्थ्य संरक्षण, एलन-हेरडॉन-डुडली सिंड्रोम एएचडीएस पर विशेष ध्यान देता है।


(Margaret Sumita Minj)

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प्रभावी दुनिया में जिज्ञासा के लिए सतर्क रहें, संत पापा फ्राँसिस

In Church on April 30, 2018 at 3:29 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार 30 अप्रैल 2018 (रेई) : बच्चे उत्सुक हैं और प्रभावी दुनिया में उन्हें इतनी बुरी चीजें मिलती हैं। इसलिए युवाओं को जिज्ञासा के कैदी नहीं बनने के लिए मदद की जरूरत है। यह बात संत पापा ने सोमवार को अपने प्रेरितिक आवास संत मार्था के प्रार्थनालय में अपने प्रवचन में कही।

संत पापा ने दैनिक पाठ के आधार पर संत योहन के सुसमाचार (योहन 14, 21-26) पर चिंतन करते हुए येसु और शिष्यों के बीच के वार्ता को “जिज्ञासा और निश्चितता के बीच संवाद” के रूप में परिभाषित किया।

“क्यों की खोज करने वाले उम्र”  में जिज्ञासा अच्छी है

अपने प्रवचन में संत पापा ने अच्छी और बुरी जिज्ञासा के बीच के अंतर स्पस्ट किया। उन्होंने कहा,”हमारा जीवन जिज्ञासा से भरा है”। अच्छी जिज्ञासा के उदाहरण के रुप में उन्होंने  बच्चों को इंगित कर कहा कि”क्यों की खोज वाली उम्र” में बच्चे बड़ों से बहुत सारे प्रश्न पूछते हैं। वे जो चीजें देखते हैं और जिन्हें वे समझ नहीं पाते हैं। उसके बारे जानने की कोशिश करते हैं। यह “चिंतनशील जिज्ञासा” है, वे एक स्पष्टीकरण की तलाश में हैं। यह एक अच्छी जिज्ञासा है, क्योंकि यह विकसित करने और “अधिक स्वायत्तता” प्रदान करता है क्योंकि “बच्चे देखते हैं, सोचते हैं, और नहीं समझते हैं तो उसे पूछते हैं।

प्रभावी दुनिया में चापलूसी से सावधान

संत पापा ने कहा कि हमें चापलूसी से सावधान रहनी चाहिए। “चापलूसी” एक अच्छी जिज्ञासा नहीं है। बुरी जिज्ञासा में “दूसरों के जीवन की बदबू” शामिल है। लोग दूसरों के उन चीजों को जानने की कोशिष करते हैं या उन चीजों को समझने की कोशिष करते हैं जिन्हें जानने का अधिकार उन्हें नहीं है और अंततः खुद उस गंदगी में शरीक हो जाते हैं। इस तरह की बुरी जिज्ञासा “हमारे जीवन में हमेशा रहेगी। यह एक प्रलोभन है इससे हमें सावधान रहना है।

संत पापा ने फोन का उदाहरण देते हुए कहा कि मोबाइल को देखकर बच्चो में जिज्ञासा बढ़ती है वे बहुत सी खराब चीजों को पाते हैं। उस जिज्ञासा में कोई अनुशासन नहीं है। हमें बच्चों को इस दुनिया में रहने में मदद करनी चाहिए, क्योंकि जानने की इच्छा, उत्सुक होने की इच्छा नहीं है और यह जिज्ञासा उन्हें कैदी बना देती है।

पवित्र आत्मा निश्चितता देता है

संत पापा ने कहा कि सुसमाचार में प्रेरितों की जिज्ञासा अच्छी थी, वे जानना चाहते थे कि उनका क्या होगा। येसु ने निश्चितता से जवाब दिया कि पवित्र आत्मा आएगा और वह सब कुछ सिखाएगा और उन सभी को याद दिलाएगा जिसे येसु ने चेलों को सिखाया था। संत पापा ने कहा,“पवित्र आत्मा हमें जीवन में निश्चितता देगी। पवित्र आत्मा की निश्चितता बंडल में नहीं आती है। हम जीवन में  जिस क्षण पवित्र आत्मा से पूछते हैं, उस के लिए अपना दिल खोलते हैं और वह हमें उस क्षण के लिए उस पल के जवाब में निश्चितता देता है। पवित्र आत्मा ख्रीस्तीयों का साथी है।

प्रवचन के अंत में संत पापा ने ईश्वर से दो कृपा मांगने के लिए प्रेरित किया सबसे पहले, जिज्ञासा को स्वीकार करने में खुद को शुद्ध करने के लिए और यह जानने के लिए कि मुझे इसे देखने की ज़रूरत नहीं है, मुझे इसे देखना नहीं है , मुझे यह पूछने की ज़रूरत नहीं है….और दूसरी कृपा: दिल को पवित्र आत्मा के लिए खोलना। क्योंकि पवित्र आत्मा हमें निश्चित रूप से येसु के सिखाई शिक्षा के बारे में एक साथी के रूप में, निश्चितता देता है और हमें सबकुछ याद दिलाता है।


(Margaret Sumita Minj)

आप सदा मसीह के साथ हैं,संत पापा फ्राँसिस

In Church on April 30, 2018 at 3:27 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 30 अप्रैल 2018 (रेई) : प्रार्थना हमें ईश्वर से जोड़ती और खुद से बाहर निकलने और दूसरों की देखभाल करने तथा शांति के लिए काम करने के लिए प्रेरित करती है। संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 30 अप्रैल को ट्वीट संदेश में मसीह से जुड़े रहने की प्रेरणा दी।

संदेश में उन्होंने लिखा,“जब आप प्रार्थना करते हैं,अपने सबसे कमजोर भाइयों और बहनों का ख्याल रखते हैं और शांति के लिए काम करते हैं तो आप सदा मसीह के साथ हैं।”

संत पापा ने रविवार 29 अप्रैल रासायनिक युद्ध के सभी पीड़ितों के लिए यादगार दिवस को सभी तरह के हथियारों का बहिष्कार करने का आह्वान किया। संदेश में उन्होंने लिखा, “क्या हम वास्तव में शांति चाहते हैं? तो आइये, हम सभी हथियारों पर प्रतिबंध लगा दें ताकि हमें युद्ध के डर में जीना न पड़े।”


(Margaret Sumita Minj)

स्वर्ग की रानी प्रार्थना, संत पापा ने बतलाया ख्रीस्तीय जीवन का रहस्य,

In Church on April 30, 2018 at 3:26 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 30 अप्रैल 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 29 अप्रैल को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया, स्वर्ग की रानी प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

ईश वचन, पास्का के इस पाँचवें रविवार को भी पुनर्जीवित प्रभु का मार्ग दिखलाना एवं उनके समुदाय में लाना जारी रखता है। पिछले रविवार को विश्वासियों एवं येसु भले चरवाहे के बीच संबंध को प्रकाशित किया गया था। आज सुसमाचार एक ऐसा अवसर देता है जिसमें येसु अपने आप को एक सच्ची दाखलता के रूप में प्रस्तुत करते एवं निमंत्रण देते हैं कि हम उनके साथ संयुक्त रहें ताकि प्रचुर फल उत्पन्न कर सकें। (यो. 15: 1-8) दाखलता एक पौधा है जो डालियों से बना है तथा डालियाँ तभी अधिक फल ला सकती हैं जब वे धड़ से जुड़ी हों। यह संबंध ख्रीस्तीय जीवन का रहस्य है। सुसमाचार लेखक योहन इसे ‘रहना’ क्रिया से प्रकट करते हैं जिसको आज के पाठ में सात बार दुहराया गया है, “तुम मुझमें रहो।”

संत पापा ने कहा, “यह प्रभु के साथ रहने का मामला है उनसे साहस पाने का ताकि हम अपने आप से बाहर आ सकें, अपने आराम, अपने घेरे एवं सुरक्षित स्थल को पार कर सकें और दूसरों की आवश्यकताओं को देख सकें तथा दुनिया को अपना ख्रीस्तीय साक्ष्य दे सकें।”

संत पापा ने बतलाया कि अपने आप से बाहर आने तथा दूसरों की आवश्यकताओं को समझने का साहस पुनर्जीवित ख्रीस्त में विश्वास द्वारा उत्पन्न होता है एवं उस निश्चितता द्वारा कि उनकी आत्मा हमारे इतिहास के साथ चलती है। वास्तव में, सबसे  परिपक्व फल पड़ोसियों के प्रति उदारता से उत्पन्न होता है, आत्मत्याग में भाई बहनों से प्रेम एवं ख्रीस्त के साथ संयुक्ति द्वारा जैसा कि येसु ने हमें प्रेम किया है। विश्वासियों की उदारता किसी रणनीति का परिणाम नहीं है। यह बाह्य अनुरोध अथवा सामाजिक या वैचारिक मांग भी नहीं है किन्तु येसु से मुलाकात करने एवं उनके साथ रहने के द्वारा उत्पन्न होता। वे हमारे लिए जीवन हैं जिनसे हमें पोषण प्राप्त होता है जो एक ऐसा जीवन है जिसके द्वारा हम समाज में अलग तरह से जीने एवं समय व्यतीत करने के लिए सक्षम हो जाते हैं। संत पापा ने कहा, “जब कोई व्यक्ति प्रभु से संयुक्त होता है जैसा कि दाखलता एवं डालियाँ आपस में एक-दूसरे से संयुक्त होते हैं तब वह दया, न्याय और शांति के एक नये जीवन का फल उत्पन्न करता है। संतों ने यही किया, उन्होंने ख्रीस्तीय जीवन को पूर्णता से जिया तथा उदारता का साक्ष्य दिया क्योंकि वे प्रभु के जीवन की सच्ची डालियाँ थीं।”

संत पापा ने हर स्तर पर संत बनने की संभावना बतलाते हुए कहा कि संत बनने के लिए धर्माध्यक्ष, पुरोहित एवं धर्मसमाजी होने की आवश्यकता नहीं है बल्कि प्रेम के साथ जीने एवं अपने दैनिक जीवन में उसका साक्ष्य देने के द्वारा हम सभी संत बनने के लिए बुलाये जाते हैं। हम पुनर्जीवित ख्रीस्त से जो कृपा प्राप्त करते हैं उसके द्वारा हम पवित्र किये जाते हैं। जब हम अपने काम एवं आराम, पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन, राजनीतिक, संस्कृतिक एवं आर्थिक जिम्मेदारियों को तथा हर छोटे-बड़े कार्यों को ख्रीस्त के साथ रहते हुए, प्रेम तथा सेवा के मनोभाव से पूरा करते हैं तो यह बपतिस्मा एवं सुसमाचारी पवित्रता को जीने का अवसर है।

संत पापा ने प्रार्थना की कि संतों की महारानी तथा अपने दिव्य पुत्र के साथ पूर्ण एकता में रहने वाली माता मरियम हमारी सहायता करे। हमें येसु के साथ रहना सिखलाये जैसा कि दाखलता के साथ डालियाँ जुड़ी होती हैं हम भी उनके प्रेम से कभी अलग न हों। वास्तव में, उनके बिना हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं क्योंकि हमारा जीवन ख्रीस्त में है जो कलीसिया एवं विश्व में विद्यामान रहते हैं।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

स्वर्ग की रानी प्रार्थना के उपरांत उन्होंने सूचना देते हुए कहा, “कल क्राकॉव में, एक लोकधर्मी अन्ना स्यानोवोस्का की धन्य घोषणा हुई। उन्होंने अपना जीवन रोगियों को चंगा करने में व्यतीत किया जिनमें उन्होंने पीड़ित येसु को देखा। आइये, हम रोगियों की इस प्रेरित के साक्ष्य के लिए ईश्वर को धन्यवाद दें एवं उनके उदाहरणों को अपनाने का प्रयास करें।

संत पापा ने कोरिया के लिए प्रार्थना का आश्वासन देते हुए कहा, “मैं प्रार्थनाओं के साथ पिछले शुक्रवार के अंतर-कोरियाई शिखर सम्मेलन में सहभागी होता हूँ जो परमाणु हथियारों से मुक्त प्रायद्वीप के लिए ईमानदार वार्ता का मार्ग प्राप्त करने के लिए दोनों पक्षों के नेताओं द्वारा उठाई गई साहसी प्रतिबद्धता है। मैं प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि भविष्य में शांति एवं भाईचारा पूर्ण मित्रता की आशा कभी निराश न करे तथा आपसी सहयोग द्वारा, कोरिया के प्यारे लोगों एवं पूरे विश्व के लिए अच्छा फल उत्पन्न करता रहे।”

संत पापा ने नाईजेरिया में ख्रीस्तीयों पर हुए हिंसक हमले की याद कर कहा कि पिछले सप्ताह, नाईजीरिया के ख्रीस्तीय समुदाय को फिर से हमला का सामना करना पड़ा जिसमें दो पुरोहित समेत कई लोकधर्मी मारे गये। हम इन भाई बहनों को ईश्वर की दया में समर्पित करें ताकि वे अपने समुदायों में शांति एवं सौहार्द का अनुभव कर सकें।

इसके उपरांत संत पापा ने विश्व के विभिन्न हिस्सों से आये तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा, “मैं सस्नेह आज यहाँ उपस्थित तीर्थयात्रियों का अभिवादन करता हूँ जो विभिन्न दलों के हैं, मैं खासकर, उन दलों का अभिवादन करता हूँ जो ब्रागा, भारत एवं पाकिस्तान से आये हैं। पाविया, क्रेमा एवं विन्याले के विश्वासों एवं दृढ़ीकरण संस्कार ग्रहण करने वाले युवाओं का अभिवादन करता हूँ।”

संत पापा ने असीसी के धर्मबंधुओं एवं काटेक्यूमिनेट के राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागियों का भी अभिवादन किया।

तत्पश्चात् संत पापा ने रोम के मरियम तीर्थ दीवीनो अमोरे में 1 मई को माता मरियम को समर्पित महीना के उद्घाटन की जानकारी देते हुए, रोजरी माला विन्ती द्वारा माता मरियम की भक्ति करने का प्रोत्साहन दिया एवं कहा, हम रोजरी माला विन्ती करेंगे खासकर, सीरिया एवं विश्व में शांति के लिए। मैं आप सभी को पूरे मई महीने में आध्यात्मिक रूप से एक होने तथा शांति के लिए प्रार्थना करने का निमंत्रण देता हूँ।

अंत में उन्होंने सभी से प्रार्थना का आग्रह करते हुए शुभ रविवार की मंगलकामनाएँ अर्पित की।


(Usha Tirkey)

संत पापा और कोरियाई धर्माध्यक्षों द्वारा “दो कोरियाई” शिखर सम्मेलन के सकारात्मक नतीजे का स्वागत

In Church on April 30, 2018 at 3:25 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 30 अप्रैल 2018 (वीआर,रेई) : रविवार को संत पापा फ्राँसिस ने संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ करने के उपरांत कहा कि वे इस हफ्ते ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन के दौरान उत्तरी और दक्षिण कोरिया के नेताओं द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वे पड़ोसी देशों के बीच निरंतर सहयोग और दोस्ती के लिए एवं कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु हथियारों को खत्म करने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। भविष्य में युद्ध मुक्त करने के लिए शुक्रवार को उत्तरी कोरियाई नेता किम जोंग यून की प्रतिज्ञा के बाद संत पापा ने उक्त बात कही।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के प्रवक्ता के मुताबिक उत्तरी कोरियाई नेता किम जोंग यून ने निजी तौर पर दक्षिण कोरिया को बताया कि यदि वे अन्य चीजों के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका एक गैर-आक्रामक समझौता प्रदान करता है तो वह परमाणु हथियार छोड़ देगा। राष्ट्रपति के प्रवक्ता यून योंग-चान ने कहा कि किम कह चुके हैं कि वह मई में परमाणु परीक्षण स्थल को बंद कर देंगे.

यून ने आगे कहा कि उत्तर कोरिया के नेता ने यह भी कहा है कि “वह उत्तर कोरिया और अमरीका के विशेषज्ञों को यह देखने के लिए आमंत्रित करेंगे ताकि इस प्रक्रिया के बारे में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को पारदर्शिता के साथ पता चल सके।”

उनकी सार्वजनिक घोषणा में, किम और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जेई-इन सड़क और रेलवे संधियों सहित सीमा पार संचार पर काम फिर से शुरू करने पर सहमत हुए। रविवार को दक्षिण कोरिया परिवहन मंत्रालय ने कहा कि उसने निर्माण योजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी है जिसे पहले तैयार किया गया था और फिर संबंधों में कटूता आने की वजह से निलंबित कर दिया गया था।

एक सरकारी मंत्री ने रविवार को कहा कि सियोल रेड क्रॉस के लिए कोरियाई युद्ध द्वारा विभाजित उत्तर और दक्षिण कोरियाई बुजुर्ग लोगों को दोबारा मिलाने के लिए जल्द से जल्द वार्ता शुरू करने के लिए दबाव डालेगा। मंत्री ने कहा, परिवार के पुनर्मिलन की व्यवस्था करने में समय लगता है परंतु इस मामले को प्राथमिकता दी जाएगी।

इस बीच, कोरिया के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने शिखर सम्मेलन के नतीजे का स्वागत किया है। एक बयान में, महाधर्माध्यक्ष किम हे-जंग ने कहा कि ईश्वर काथलिकों की प्रार्थनाओं का उत्तर दे रहे हैं और कलीसिया और सहायता एजेंसी अंतर्राष्ट्रीय कारितास कोरिया द्वारा सुलह प्रक्रिया को पुरस्कृत कर रहे हैं।


(Margaret Sumita Minj)

माली में जिहादियों द्वारा 40 की हत्या का संदेह

In Church on April 30, 2018 at 3:24 pm

नीजेर(माली), सोमवार 30 अप्रैल 2018 (वीआर, रेई) : संदिग्ध जिहादियों ने नीजेर और माली की पूर्वोत्तर सीमा पर दो दिनों में तुरेगों जाति के 40 लोगों की हत्या कर दी है।

तुरेग जनजाति के एक नेता ने दावा किया कि जिहादी समूहों ने प्रतिशोध में सामूहिक हत्या की क्योंकि तुरेग जनजाति के लोग देश की सेना को मजबूत बना रहे हैं।

नेता ने बताया कि जिहादियों ने शुक्रवार को 30 लोगों को मार डाला।  एक दिन बाद एक और हमले में बंदूकधारियों ने मेनका जिले में 12 लोगों को मारा, जहां तथाकथित इस्लामी राज्य के सहारन सहयोगियों को अड्डा है।

ये आतंकवादी समूह जातीय समूहों के बीच तनाव का विवाद करके शोषण कर रहे हैं- जैसे तुरेग और फुल्लानी गड़ेरिये, जो रेगिस्तान में बहुमूल्य जल श्रोतों के लिए झगड़ा करते हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी कि माली में असुरक्षा तेजी से बढ़ रही है’ और जिहादी समूहों ने अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा पैदा किया है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में व्यापक खाद्य असुरक्षा और चरम गरीबी से सुरक्षा अनिश्चित स्थिति को और भी बढ़ा रहा है।

सन्  2013 में, फ्रांस ने माली से जिहादियों को बाहर निकालने में मदद करने के लिए अपने सैनिक भेजे थे।

 


(Margaret Sumita Minj)

फिलीपींस में एक काथलिक पुरोहित की हत्या

In Church on April 30, 2018 at 3:22 pm

मनिला, सोमवार 30 अप्रैल 2018 (मैटर्सइंडिया) : उत्तरी फिलीपींस के एक पल्ली में रविवारीय मिस्सा के बाद विश्वासियों से बातें करते वक्त जवान काथलिक पुरोहित की गोली मार कर हत्या कर दी गई।

कागायन प्रांतीय पुलिस प्रमुख वरिष्ठ अधीक्षक वॉरेन टोलिटो ने एक रिपोर्ट में पीड़ित को टुओ शहर में बरंगय नारुआंगान के पल्ली पुरोहित फादर मार्क अंतोनी यूगा वेंचुरा के रूप में पहचान लिया, जो देश की राजधानी मनीला के उत्तर में 485 किमी में स्थित है।

प्रारंभिक जांच से पता चला कि 37 वर्षीय फादर वेंचुरा 8 बजे मिस्सा के बाद बच्चों और कैरोल के सदस्यों के साथ बातें कर रहे थे उसी दौरान हेलमेट पहने एक आदमी ने फादर को दो बार गोली मार दी और मोटरसाइकिल के चालक के साथ संदिग्ध, बगगा शहर जाने वाले राजमार्ग की ओर भाग गया।

फादर वेंचुरा को वहीं पर मृत घोषित किया गया। पुलिस ने कहा कि फादर को मारने की उद्देश्य अभी तक निर्धारित नहीं किया गया है।

फिलीपींस के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीबीसीपी) ने इस हत्या की निंदा की।

सीबीसीपी के अध्यक्ष दावाओ के महाधर्माध्यक्ष रोमुलो वल्लेस ने एक बयान में कहा, “हम इस बुरे कृत्य की निंदा करते हैं!” धर्माध्यक्ष पुजुगाराओ महाधर्मप्रांत के पुरोहित की क्रूर हत्या के सदमें में हैं।

उन्होंने कहा, “हम फादर वेंचुरा की अनंत शाति के लिए, फादर के शोकित परिवार के लिए और तुग्वेगाराओ के लोकधर्मियों के लिए प्रार्थना करते हैं। हम महाधर्माध्यक्ष सरजो उटलेग, उनके पुरोहितों और महाधर्मप्रांत के धर्मसंघियों के लिए भी प्रार्थना करते हैं, जो इस वर्ष फिलीपींस में पूरी कलीसिया के साथ पुरोहितों और समर्पित लोगों का वर्ष मना रहे हैं।”

सीबीसीपी की समाचार सेवा ने कहा कि लगभग 7 वर्षों से फादर वेंचुरा, “अपने खनन विरोधी वकालत के लिए और प्रांत में आदिवासियों की मदद के लिए जाने जाते थे।” उन्होंने गतारान और बरंगे मबुनो स्थित संत इसिड्रो लैब्राडोर मिशन स्टेशन में अपनी सेवा प्रदान की थी। वे अपारी के लिसेम में संत थॉमस एक्विनास मेजर सेमिनरी के रेक्टर भी थे।


(Margaret Sumita Minj)

पुनरुत्पादक चिकित्सा पर चौथा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागियों से संत पापा की मुलाकात

In Church on April 28, 2018 at 11:58 am

वाटिकन सिटी, शनिवार, 28 अप्रैल 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 28 अप्रैल को वाटिकन स्थित पौल षष्ठम सभागार में पुनरुत्पादक चिकित्सा पर चौथा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के 700 प्रतिभागियों से मुलाकात की।

सम्मेलन का आयोजन संस्कृति हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति के तत्वधान में वाटिकन में किया गया था।

संत पापा ने प्रतिभागियों को सम्बोधित कर कहा, “मैं अलग-अलग संस्कृतियों, समाजों और धर्मों के लोगों को बीमारों की देखभाल करने हेतु चिंतन एवं प्रतिबद्धता के लिए  एक साथ देखकर खुश हूँ, मानव व्यक्ति के प्रति सहानुभूति हमें सचमुच एक साथ लाता है। मानव की पीड़ा हमें चुनौती देती है कि हम व्यक्तियों एवं संस्थाओं के बीच पारस्परिक विचार-विमर्श के नये माध्यमों की खोज करें तथा आपस के घेरे को तोड़कर एवं एक साथ काम करने के द्वारा रोगियों की देखभाल सुनिश्चित करें।”

संत पापा ने इस परियोजना को अपना योगदान देने वाले सभी समितियों के प्रति अपना आभार प्रकट किया।

उन्होंने सम्मेलन के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस सम्मेलन का कार्य संक्षेप में चार क्रियाओं में विभक्त है, रोकथाम, मरम्मत, देखभाल एवं भविष्य के लिए तैयार करना।

संत पापा ने रोकथाम की क्रिया पर अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जो जीवन शैली हम अपनाते एवं जिस संस्कृति को बढ़ावा देते हैं उसमें यदि हम ध्यान दें तो कई बड़ी बुराईयों पर रोक लगाया जा सकता है।

रोकथाम का अर्थ है मानव प्राणी एवं पर्यावरण जहां हम निवास करते हैं उसके प्रति दूरदृष्टि रखना। इसका मतलब है संतुलन की संस्कृति को लक्ष्य बनाना जिसके महत्वपूर्ण साधन हैं, शिक्षा, शारीरिक कार्य, मिताहार तथा पर्यावरण की रक्षा, स्वास्थ्य कोड के प्रति सम्मान, समय पर एवं सटीक निदान, तथा कई अन्य उपाय स्वास्थ्य की कम जोखिमों के साथ बेहतर रूप से जीने में मदद कर सकते हैं।

संत पापा ने कहा कि यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब हम बच्चों एवं युवों के बारे सोचते हैं जो आधुनिक संस्कृतियों में परिवर्तन से जुड़ी बीमारियों के कारण लगातार खतरे में हैं। हमें धुम्रपान, नशीली पदार्थों के सेवन एवं हवा, पानी एवं मिट्टी में मिश्रित विषाक्त पदार्थों के दुष्प्रभाव पर चिंतन करने की आवश्यकता है। ट्यूमर एवं कई अन्य बीमारियों को बचपन में निवारक उपाय अपना कर दूर किया जा सकता है, फिर भी इसके लिए लगातार वैश्विक पहल की आवश्यकता है जिसके लिए सभी को प्रतिबद्ध होना चाहिए। निवारण की संस्कृति को हर तरफ प्रोत्साहन देने हेतु स्वास्थ्य देखभाल में पहला कदम होना चाहिए।

संत पापा ने कहा कि प्रकृति एवं मानव स्वास्थ्य को बेहतर रूप से समझने के लिए विज्ञान एक प्रभावशाली उपकरण है। इसने कई नई संभवनाओं को खोल दिया है तथा परिष्कृत प्रौद्योगिकियों को प्रदान किया है जो न केवल जीवित अंगों की भीतरी संरचना की जाँच करने में मदद करते हैं बल्कि हमारे डीएनए में संशोधन लाने की संभावना भी प्रदान करते हैं। जिसके लिए मानवता एवं पर्यावरण जहाँ हम रहते हैं उसके प्रति नैतिक जिम्मेदारी पर अधिक ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है। कलीसिया पीड़ित भाई बहनों की देखभाल हेतु हर प्रकार के अनुसंधान की सराहना करती है किन्तु वह उस मौलिक सिद्धांत के प्रति सचेत है कि हर प्रकार की तकनीकी सम्भवनाएं नैतिक रूप से स्वीकार्य नहीं हैं क्योंकि अन्य सभी मानवीय क्रियाओं की तरह अंतःकरण की सीमाओं का सम्मान किया जाना आवश्यक है। संत पापा पौल षष्ठम का हवाला देते हुए संत पापा ने कहा कि विकास का सच्चा माध्यम वह है जो हर मानव एवं सम्पूर्ण व्यक्ति की अच्छाई की ओर अग्रसर करता है।

संत पापा ने कहा कि यदि हम भविष्य के लिए तैयारी करना चाहते हैं एवं हर व्यक्ति के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं तो हमें संवेदनशीलता में बढ़ने की आवश्यकता है। मानव परिवार के हर व्यक्ति पर ध्यान देने की जरूरत है, खासकर, जो सामाजिक एवं मानसिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं जो उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा सिद्ध हो सकता है एवं जिन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाता है।

संत पापा ने सम्मेलन के प्रतिभागियों को सलाह दी कि वे एक खुला अंतर- अनुशासनात्मक दृष्टिकोण अपनाएँ जो कई विशेषज्ञों और संस्थानों को संलग्न करे, जिससे ज्ञान का पारस्परिक विनिमय हो सके। उन्होंने दूसरी सलाह दी कि वे पीड़ित भाई बहनों के लिए ठोस कदम उठायें।


(Usha Tirkey)

कानूनी लड़ाई के बीच में बीमार ब्रिटिश बच्चे की मृत्यु

In Church on April 28, 2018 at 11:57 am

लंदन, शनिवार 28 अप्रैल 2018 (अनसा) : ब्रिटिश बीमार बच्चा अल्फी इवांस जिसके माता-पिता ने उसके इलाज पर कानूनी लड़ाई हेतु संत पापा फ्राँसिस से समर्थन प्राप्त किया था,की मृत्यु आज शनिवार प्रातः को हुई। अल्फी इवांस 23 महीने का था।

बच्चे के माता पिता केट जेम्स और थोमस इवांस ने सोसल मीडिया से कहा कि अल्फी की मौत से वे बहुत दुखी हैं। डॉक्टरों द्वारा जीवन समर्थन हटा दिये जाने के पाँच दिन बाद उनके प्यारे अल्फी इस दुनिया से विदा लिये।

लिवरपूल शहर में अल्फी की देखभाल करने वाले डॉक्टरों ने कहा आगे का उपचार व्यर्थ था और उसे शांति पूर्वक मरने अनुमति दी जानी चाहिए। लेकिन उसके माता-पिता ने न्यायाधीशों को मनाने के लिए महीनों तक  कानूनी लड़ाई लड़ी कि उन्हें वाटिकन के बच्चों के अस्पताल में ले जाने की अनुमति मिले जहाँ उसे जीवन समर्थन पर रखा जा सके। इस अभियान में मातापिता को संत पापा और ख्रीस्तीय समुदायों का समर्थन प्राप्त था और इस मामले पर अंतर्राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने में मदद मिली।

सोमवार को अदालत ने डॉक्टरों के पक्ष में फैसला लिया और सोमवार को अस्पताल ने अल्फी के जीवन समर्थन को वापस ले लिया।


(Margaret Sumita Minj)

विश्व ख्रीस्तीय मंच से संत पापा फ्राँसिस : ‘मैं आपके साथ सम्मिलित हूँ’

In Church on April 28, 2018 at 11:55 am

वाटिकन सिटी, शनिवार 28 अप्रैल 2018 ( रेई ) :  :संत पापा फ्राँसिस ने कोलंबिया में हो रहे विश्व ख्रीस्तीय मंच में भाग लेने हेतु आये विभिन्न ख्रीस्तीय समुदायों के प्रतिनिधियों के नाम संदेश में कहा कि वे उनके साथ हैं।

संत पापा फ्राँसिस ने कोलंबिया के बोगोटा में विश्व ख्रीस्तीय मंच की सभा के प्रतिभागियों का अभिवादन किया। ख्रीस्तीय एकता हेतु गठित परमधर्मपीठीय सम्मेलन की ओर से सभा में भाग ले रहे  फादर जॉन उस्मा गोमेज ने संत पापा के संदेश का 25 अप्रैल को पढ़ सुनाया. 24 से 27 अप्रैल तक पांच दिवसीय सभा की विषय वस्तु है, “पारस्परिक प्रेम जारी रखें” (इब्रानियों 13: 1)

संत पापा ने कहा कि वे प्रतिभागियों के साथ हैं। वे घटना को विभिन्न ख्रीस्तीय समुदायों के प्रतिनिधियों को एकता के बारे में येसु की प्रार्थना को पूरा करने के लिए भाइयों और बहनों के साथ मिलकर जुड़ने की संभावना के रूप में मान्यता प्राप्त अवसर के रूप में देखते हैं। संत पापा ने कहा कि वे प्रार्थना करते हैं कि उन्हें व्यक्तिगत तथा कलीसियाई “अनुभवों और विश्वासों”को स्वतंत्र और एक दूसरे का सम्मान करते हुए साझा करने और एकजुट होने का अवसर मिले।

उन्होंने कहा, “मानवता को इस एकजुटता की बहुत जरूरत है, जो आदर, सम्मान, पारस्परिक क्षमा और हर स्थिति में मानव गरिमा की वास्तविक रक्षा को प्रोत्साहित करता है।”


(Margaret Sumita Minj)

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