Vatican Radio HIndi

Archive for April 3rd, 2018|Daily archive page

संत पापा ने ख्रीस्तीयों से भ्रातृत्व एवं साझा करने की अपील की

In Church on April 3, 2018 at 7:13 am

वाटिकन सिटी, सोमवार, 2 अप्रैल 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में, पास्का पर्व के दूसरे दिन, सोमवार को संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया। स्वर्ग की रानी प्रार्थना के पूर्व उन्होंने उपस्थित विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, “अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।”

पास्का के बाद वाले सोमवार को, “स्वर्गदूत का सोमवार” कहा जाता है, जो एक सुन्दर परम्परा के तहत पुनरूत्थान पर बाइबिल के स्रोत से मेल खाता है। वास्तव में, सुसमाचार वर्णन करता है (मती.28: 1-10, मार.16: 1-7, लूक. 24: 1-12) कि जब महिलाएँ कब्र गयीं तो उन्होंने कब्र को खुला पाया, वे डर गयीं और अंदर प्रवेश नहीं कीं। जिस कब्र को एक विशाल पत्थर से बंद कर दिया गया था, वह अब खुला था और अंदर से एक आवाज आयी कि येसु वहाँ नहीं हैं बल्कि जी उठे हैं।”

संत पापा ने कहा, “इन शब्दों का उच्चारण पहली बार किया गया, “वे जी उठे हैं”। सुसमाचार लेखक हमें बतलाते हैं कि यह पहली घोषणा स्वर्गदूत द्वारा दी गयी जो ईश्वर के संदेशवाहक हैं। स्वर्गदूतों के वहाँ उपस्थित होने का अर्थ है- कि जिसतरह शब्द के शरीरधारण की घोषणा स्वर्गदूत गाब्रिएल द्वारा की गयी थी, उसी तरह पुनरूत्थान की पहली घोषणा के लिए भी मानव के शब्द काफी नहीं थे। अतः चौंकाने वाली एवं अत्यन्त अविश्वसनीय सच्चाई की घोषणा मानव से श्रेष्ठ प्राणी द्वारा की गयी जिसको करने का साहस शायद ही कोई व्यक्ति करता। इस प्रथम घोषणा के उपरांत प्रेरितों का समुदाय प्रचार करना आरम्भ किया, “प्रभु सचमुच जी उठे हैं तथा सिमोन को दिखाई दिये हैं।” (लूक. 24:34) किन्तु प्रथम घोषणा के लिए मानवीय बुद्धि से श्रेष्ठ की आवश्यकता पड़ी।

संत पापा ने कहा, “आज उत्सव का दिन है परिवार के साथ आनन्द मनाने का दिन। पास्का पर्व मनाने के बाद हम पुनः अपने प्रियजनों एवं मित्रों के साथ एकत्रित होना चाहते हैं क्योंकि भ्रातृत्व ख्रीस्त के पास्का का फल है जिन्होंने अपनी मृत्यु एवं पुनरूत्थान द्वारा पाप पर विजय पाया है जिसने मानव को, ईश्वर, अपने आप एवं अपने भाई-बहनों से अलग कर दिया था। येसु ने विभाजन की दीवार को तोड़ दिया तथा शांति को पुनः स्थापित किया और एक नए बिरादरी का निर्माण किया।”

संत पापा ने कहा कि हमारे समय में भाईचारा को खोजना अति आवश्यक है जैसा कि आरम्भिक ख्रीस्तीय समुदाय में था। एक सच्चे समुदाय का निर्माण, सार्वजनिक संसाधनों के प्रति प्रतिबद्धता एवं सामाजिक न्याय की स्थापना तब तक नहीं हो सकती जब तक कि भाईचारा एवं आपसी आदान-प्रदान न हो। बिना भाईचारा पूर्ण आदान-प्रदान के, एक सच्ची कलीसिया अथवा सच्चे समाज का निर्माण नहीं किया जा सकता। यह केवल लोगों का दल बन कर रह जाएगा जो उनके व्यक्तिगत फायदा के लिए होगा।

ख्रीस्त के पास्का ने विश्व में संवाद एवं संबंधों को नवीन रूप प्रदान किया है, एक ऐसा नयापन जो ख्रीस्ीख्रसीतीयों के लिए सकता।   स्थापित किया है  द्वारा पाप पर विजय पाये हेतीयों के लिए उत्तरदायित्व बन गया है। येसु ने कहा था, “यदि तुम एक दूसरे को प्यार करोगे, तो उसी से सब लोग जान जायेंगे कि तुम मेरे शिष्य हो।”  (यो.13:35) यही कारण है कि हम अपने आप में अथवा हमारे दलों में सीमित होकर नहीं रह सकते बल्कि हम सार्वजनिक हितों की देखभाल करने, अपने भाई-बहनों की चिंता करने के लिए बुलाये गये हैं, विशेषकर, सबसे कमजोर एवं हाशिये पर जीवन यापन करने वाले लोगों की। केवल भाईचारा ही स्थायी शांति की गारंटी दे सकता है, गरीबी का सामना कर सकता, तनाव एवं युद्ध को नष्ट कर सकता तथा भ्रष्टाचार एवं अपराध को मिटा सकता है।

संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना करते हुए कहा कि धन्य कुँवारी मरियम जिन्हें हम स्वर्ग की रानी कहकर पुकारते हैं, पास्का के इस काल में, अपनी प्रार्थना द्वारा हमारी सहयता करे ताकि पास्का के इस समय में भाईचारा एवं एकता का एहसास हमारी जीवन शैली एवं हमारी आत्मा का संबंध बन जाए।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

स्वर्ग की रानी प्रार्थना के उपरांत उन्होंने देश-विदेश से एकत्रित सभी तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों का अभिवादन किया।

उन्होंने कहा, “पास्का के इस महौल में आज के दिन को महत्वपूर्ण बनाने वाले, आप सभी परिवारों, पल्लियों, संगठनों एवं तीर्थयात्रियों का हार्दिक अभिवादन करता हूँ जो इटली एवं विश्व के विभिन्न हिस्सों से आये हैं।

मैं आप सभी को शुभकामनाएँ देता हूँ कि आप पास्का के इस अठवारे को शांति से व्यतीत करें जिसमें ख्रीस्त के पुनरूत्थान का आनन्द लम्बे समय तक बना रहे। जी उठे ख्रीस्त की शांति का साक्ष्य देने में हर अवसर का लाभ उठायें, खासकर, सबसे कमजोर एवं वंचित लोगों का ख्याल रखने के द्वारा।

संत पापा ने ऑटिज़म या स्वालीनता की बीमारी के प्रति जागरूकता लाने हेतु स्थापित विश्व दिवस पर अपनी प्रार्थना का आश्वासन देते हुए कहा, “मैं ऑटिज़म की बीमारी के प्रति जागरूकता लाने के लिए विश्व दिवस पर अपनी विशेष प्रार्थना का आश्वासन देता हूँ। जिसको आज मनाया जा रहा है।”

संत पापा ने शांति हेतु प्रार्थना करने की प्रेरणा देते हुए कहा, “हम समस्त विश्व में शांति की कृपा के लिए प्रार्थना करें, विशेषकर, उन लोगों के लिए जो संघर्ष के कारण पीड़ित हैं।” संत पापा ने उन लोगों के लिए अपनी अपील दुहरायी जो अपहरण के शिकार हैं अथवा स्वतंत्रता से वंचित हैं कि उन्हें रिहा कर दिया जाए तथा उन्हें घर वापस आने दिया जाए।

अंत में, उन्होंने सभी से प्रार्थना का आग्रह करते हुए मंगलमय पास्का सोमवार की शुभकामनाएँ अर्पित की।


(Usha Tirkey)

Advertisements

संत पापा जॉन पॉल द्वितीय की 13वीं पुण्यतिथि

In Church on April 3, 2018 at 7:11 am

वाटिकन सिटी,सोमवार,2 अप्रैल 2018 (रेई) : आज 2 अप्रैल संत पापा जॉन पॉल द्वितीय की तेरहवीं पुण्य तिथि है। 2 अप्रैल 2005 को 21 बजकर 37 मिनट पर संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने आखिरी सांस ली। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए दुनिया के विभिन्न देशों से करीब 7 मिलियन तीर्थयात्री संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में जमा हो गये थे।

मृत्यु की घोषणा

16 अक्टूबर, 1978 को निर्वाचित संत पापा को शुभकामना देने वाले लोगों के दर्द की कई छवियां आभार के साथ साथ उनके विश्वास को गहरा करती हैं। 2 अप्रैल की रात को, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में रोजरी करते हुए हजारों की संख्या में विश्वसियों को संत पापा के मौत की घोषणा राज्य सचिवालय के उपसचिव मोन्सिन्योर लेयोनार्डो सैंड्री ने की थी।

भीड़ की श्रद्धांजलि

संत पापा के मौत की खबर सुनकर अगले ही दिन वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर में संत पापा को श्रद्धांजलि देने के लिए पूरी दुनिया के लोगों की लंबी लाइनें लगी थी। 8 अप्रैल 2005 को अंतिम संस्कार और पवित्र मिस्सा समारोह की अध्यक्षता कार्डिनल मंडल के डीन कार्डिनल जोसेफ रात्सिंगर ने किया था। कुछ दिनों बाद वे परमाध्यक्ष चुने गए और बेनेडिक्ट XVI के नाम से जाने गये।

उनकी मृत्यु के 10 साल बाद, 27 अप्रैल, 2014 को संत पापा फ्राँसिस ने उन्हें संत घोषित किया।

 


(Margaret Sumita Minj)

आत्मकेंद्रित जागरूकता के विश्व दिवस के अवसर पर समग्र मानव विकास सेवा विभाग का एक संदेश

In Church on April 3, 2018 at 7:10 am

वाटिकन सिटी,सोमवार,2 अप्रैल 2018 (रेई) :  आत्मकेंद्रित अर्थात ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार जागरूकता के विश्व दिवस के अवसर पर समग्र मानव विकास हेतु गठित परमधर्मपीठ के अध्यक्ष कार्डिनल पीटर टर्कसन ने अपने संदेश में कहा,“ आत्मकेंद्रित जागरूकता का 11वां विश्व दिवस संयोग से इस वर्ष पास्का पर्व के बाद के सोमवार को पड़ा है जिसे पास्का सोमवार भी कहा जाता है। इस दिन येसु के पुनरुत्थान की पुनःघोषणा की जाती है “मसीह सचमुच जी उठे अल्लेलूइया।” इस दिन पास्का की खुशी और आशा को कलीसिया सभी लोगों तक विशेष रुप से आत्मकेंद्रित विकारों से ग्रसित भाई बहनों और उनके परिवारों के बीच बांटना चाहती है।

महामारी विज्ञान के अध्ययन के मुताबिक, पिछले 50 सालों से ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार वाले लोगों की संख्या में विश्व की वृद्धि हुई है; यह अनुमान लगाया गया है कि इन बीमारियों से प्रत्येक 160  बच्चों में एक बच्चा प्रभावित होता है और इस प्रवृत्ति के बढ़ने की संभावना है। इस प्रवृत्ति को पर्याप्त रूप से प्रतिक्रिया देने में सक्षम होने के लिए एक अधिक प्रतिबद्धता और नये जोश की आवश्यकता है।

कलीसिया, अपने कार्यों के साथ, आत्मकेंद्रित स्पेक्ट्रम विकार वाले लोगों के लिए चिंता करती है। हमारे समुदायों में आम तौर पर उनका स्वागत किया जाता है। “हमारा ख्रीस्तीय समुदाय”वह घर “है जहाँ  हर परिवार दर्द और थकान के भार में भी आपसी समझ और सम्मान महसूस कर सकता है।”

जैसा कि संत पापा फ्रांसिस ने पुष्टि करते हुए कहा, “समर्थन की ठोस कार्य में स्वीकृति, बैठक, एकता को बढ़ावा देने के लिए सभी की प्रतिबद्धता और उम्मीद के नए सिरे से प्रोत्साहन को आवश्यक है, इस प्रकार यह आत्मकेंद्रित स्पेक्ट्रम विकार को तोड़ने में योगदान देता है।”

मैं कार्डिनल टर्कसन ने कहा,“ऑप्टिज्म स्पेक्ट्रम विकार लोगों के परिवारों, विभिन्न संगठनों, पल्लियों और सामाजिक-स्वास्थ्य श्रमिकों, पुरोहितों, धर्मसंघियों, स्वयंसेवकों और जो सभी अलग-अलग तरीकों से देखभाल, सहायता और पूर्ण बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, उन सभी का धन्यवाद करता हूँ।

हम कोमलता की मां मरिया के हाथों, उन सभी ऑप्टिज्म स्पेक्ट्रम के विकारों से ग्रसित भाइयों और बहनों और उनके परिवारों को सौंप देते हैं, ताकि जीवनयात्रा के प्रत्येक चरण में, ईस्टर के प्रकाश से प्रबुद्ध होकर,  एकता और समर्थन के ठोस कार्य करने के लिए प्रेरित हो सकें। ।


(Margaret Sumita Minj)

लाहौर की सड़कों पर 45 ख्रीस्तीयों ने प्रवासियों के रुप में पास्का की रात बताई

In Church on April 3, 2018 at 7:08 am

लाहौर, सोमवार 2 अप्रैल 2018 (एशियान्यूज) : संखात्रा गाँव के ख्रीस्तीयों ने लाहौर को प्रेस क्लब के सामने पास्का की रात बिताई।

27 बच्चों सहित 45 लोग, 5 मार्च से शरणार्थियों के रूप में लाहौर की सड़कों के किनारे रह रहे हैं, क्योंकि सत्तारूढ़ दल के राजनेता के साथ भूमि विवाद के कारण घर जाने से डरते हैं। उनके अस्थायी शिविर में उनके बैनर में लिखा है: “हम ख्रीस्तीय हैं, हमें शांति से जीने दो।”

अधिकांश ख्रीस्तीय ईंट भट्टों में मजदूरी करते और अपनी जीविका चलाते हैं। पिछले महीने अशीर अफताब और दो गांववालो के हमले के बाद उनके खिलाफ प्रदर्शन में प्रेस क्लब आए थे। वे एक बाड़ से घिरे हुए अपने समुदाय केंद्र पर बिजली मीटर की स्थापना के खिलाफ थे।

पादरी आफताब ने एशियान्यूज को बताया,“हमारा ख्रीस्तीय गाँव भारत विभाजन के पहले ही 1947 में करीब 1745 वर्ग मीटर सरकारी जमान में बसा हुआ है।”

“एक स्थानीय मुस्लिम जमींदार बुद्धान खान ने नीलामी में जमीन खरीदने की कोशिश की, लेकिन बिक्री 1981 में रद्द कर दी गई। अब उसका बेटा, मुस्लिम लीग के कार्यकर्ता नवाज़ पार्टी, जमीन को हड़पने के लिए झूठी कागजात का प्रयोग कर रहा है।

“पिछले साल 500 लोगों की एक भीड़ ने हमारे मिट्टी के घरों को ध्वस्त कर दिया था लेकिन पंजाब की विधानसभा के एक ख्रीस्तीय सदस्य के हस्तक्षेप के कारण हम वापस आ गए।”

पादरी आफताब ने कहा कि अल्पसंख्यक के रूप में, ख्रीस्तीय भेदभावपूर्ण व्यवहार के शिकार हैं।

तीन बच्चों की माँ नोरीन बीबी ने कहा,”विभिन्न टीवी स्टेशनों ने हमारी स्थिति की सूचना दी है, लेकिन हम अभी भी हमारे धार्मिक और राजनीतिक नेताओं के साथ बातचीत के परिणामों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हम पुलिस की मार सह सकते हैं, लेकिन बुलेट नहीं।”

एक ख्रीस्तीय वकील और विपक्षी दल के सदस्य, शुनीला रूथ, प्रांतीय विधानसभा के अध्यक्ष के साथ स्थिति पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं।

उसने कहा, “गरीब परिवारों को अपने अधिकार मिलनी चाहिए,” “मैं अपने नेताओं के साथ पुलिस अधिकारियों से मिलूंगी।”


(Margaret Sumita Minj)

अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा पाकिस्तानी काथलिक की मौत

In Church on April 3, 2018 at 7:05 am

 लाहौर, सोमवार,2 अप्रैल 2018 (उकान) :  पाकिस्तान में ख्रीस्तीय धर्म की सबसे पवित्र अवधि, पवित्र सप्ताह में, 34 वर्षीय पाकिस्तानी काथोलिक को लाहौर के एक सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों और सुरक्षा गार्डों द्वारा कथित रूप से पीटे जाने के बाद काथलिकों में हताशा फैल गई।

सुनील सलीम, 26 मार्च को उनकी चोटों के कारण मौत हो गई थीं, जब उसने एक महिला चिकित्सक को अपनी गर्भवती बहन को मारने से मना किया था।

परिवार के सदस्यों पर हमला

मृतक के एक भाई अनील सलीम ने ऊकान्यूज से कहा, “लगभग 20 सुरक्षा गार्ड और 14 डॉक्टरों ने मेरे भाइयों और चचेरे भाईयों को मारपीट की, कुर्सियां और बेल्ट से मारा।” उन्होंने कहा कि सुनील की पसलियों और पैर टूट गए थे। “वह बेहोश हो गया और बाद में अस्पताल में ही मृत्यु हो गई।”

27 मार्च को पुलिस में एक शिकायत दर्ज की गई, जिसके अनुसार नौ महीने की गर्भवती बहन को एक महिला डॉक्टर ने थप्पड़ मारा था। स्थानीय पुलिस ने पांच डॉक्टरों और अस्पताल के कई सुरक्षा गार्ड के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है।

अंतिम संस्कार

पाकिस्तानी धर्माध्यक्षीय सामाजिक संचार आयोग के कार्यकारी सचिव फादर कैशर फिरोज ने 27 मार्च को सुनील का अंतिम संस्कार किया।

दुखित फादर फिरोज ने कहा, “इस तरह की त्रासदी की यह पहली घटना है … लोग इलाज के लिए अस्पताल जाते हैं और डॉक्टरों को उनकी जान बचानी चाहिए।”

अस्पताल ने परिवार के खिलाफ शिकायत की हैं

अस्पताल के प्रशासक ने भी ‘कानूनन’ स्थिति बनाने के लिए काथोलिक परिवार के खिलाफ पुलिस में एक आवेदन दायर किया है। स्थानीय मीडिया ‘डॉन’ ने बताया कि एक मेडिकल अधीक्षक ने कहा: “लड़ाई शुरू हुई जब अस्पताल के गार्ड ने एक मरीज के रिश्तेदार को मोबाइल फोन में वार्ड का एक वीडियो बनाने से रोका था।”

पंजाब के मुख्य मंत्री शाहबाज शरीफ ने सुनील के परिवार के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की और और घटना की जांच का आदेश दिया।

‘क्रिस्चियन ट्रू स्पीरिट’ नामक एक एनजीओ जो उत्पीड़न के शिकार लोगों को सहायता करती है, ने कहा कि वे छह महीने तक पीड़िता के परिवार को मुफ्त कानूनी सहायता और वित्तीय सहायता प्रदान करेंगे। सुनील के बच्चों में सबसे छोटी चार महीने की बेटी है।


(Margaret Sumita Minj)

पास्का सोमवार को संत पापा का ट्वीट संदेश

In Church on April 3, 2018 at 7:00 am

वाटिकन सिटी,सोमवार 2 अप्रैल 2018 (रेई) : विश्वव्यापी काथलिक कलीसिया जी उठे प्रभु येसु ख्रीस्त के अठवारे में जश्न मना रही है। पास्का पर्व के दूसरे दिन संत पापा फ्राँसिस ने ट्वीट प्रेषितकर विश्वासियों को जी उठे प्रभु पर अपना विश्वास पक्का बनाये रखने का आह्वान किया।

संदेश में उन्होंने लिखा,“जैसा कि हम मसीह की खाली कब्र के बारे मनन चिंतन करते हैं, तो आइए हम इस बात पर अपने विश्वास को और मजबूत करें कि उनके साथ रहने से हम कुछ भी नहीं खो सकते!”


(Margaret Sumita Minj)

क्लारेशियन पुरोहित को राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार मिला

In Church on April 3, 2018 at 6:58 am

बेंगलुरु, सोमवार, 2 फरवरी 2018 (मैटर्स इंडिया) : क्लारेशियन फादर विनीत जोर्ज सीएमएफ ने 26 मार्च को छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और त्रिपुरा के पूर्व गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेत पीवीएसएम के हाथों भारतीय इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में 2018 का राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार प्राप्त किया। फादर विनीत बेंगलुरु क्लारिशियन प्रोविंस के सदस्य हैं।

यह पुरस्कार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में श्रेष्ठ उत्कृष्टता एवं उच्च नेतृत्व के उत्कृष्ट प्रदर्शन और समाज सेवा के लिए प्रमाण पत्र प्रदान की जाती है।

पुरस्कार न्यायपीठ में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ जैसे अर्थशास्त्री, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, उद्योगपति, शिक्षाविद, शिल्पवैज्ञानिक, राजनेता और सेवानिवृत्त रक्षा अधिकारी शामिल थे। फादर विनीत इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के सबसे कम उम्र के प्राप्तकर्ताओं में से एक हैं।

इस पुरस्कार से मदर टेरेसा, जनरल के.वी. कृष्ण राव, उस्ताद अमजद अली खान, जीवीजी। कृष्णमूर्ति, न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती, डॉ नरेश त्रेहान, और एयर चीफ मार्शल एन.सी. सूरी को भी नवाजा गया था।

इससे पहले भी, फादर विनीत ने एक छात्र के रूप में और एक पेशेवर के रूप में दोनों तरह के पुरस्कारों को हासिल किया है।

अपनी स्नातकोत्तर उपाधि के दौरान, फादर विनीत को विश्वविद्यालय के प्रथम स्थान प्राप्त करने के कारण प्रतिष्ठित डॉ सुब्बीरामी रेड्डी स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। बाद में, पब्लिक रिलेशन्स प्रोफेशनल के रूप में अपने करियर के दौरान, उन्हें अपने प्रबंधकीय उत्कृष्टता की गवाही के रूप में इंडियन मैनेजमेंट एसोसिएशन के एक महानिदेशक के रूप में अपने महानिदेशक द्वारा शामिल किया गया था।

अपने केरियर की शुरुआत में ही फादर विनीत ने पुरोहित जीवन के बुलावे को स्वीकार करते हुए 2006 में क्लारिशियन धर्मसंघ में प्रवेश किया।

वर्तमान में वे बेंगलुरु के संत क्लारेट कॉलेज के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं, वे बिजनेस एथिक्स से लेकर सामरिक प्रबंधन के विविध विषयों पर लेक्चर देते हैं। वे सार्वजनिक संबंध और मानव संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता और अनुभव के लिए जाने जाते हैं। भिन्न विषयों पर उनके कई लेख विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। उनके लेख को अंतरराष्ट्रीय जनसंपर्क संघ, लंदन ने भी प्रशंसा की है।


(Margaret Sumita Minj)

%d bloggers like this: