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छः अप्रैल को सन्त पापा फ्राँसिस ने किया ट्वीट

In Church on April 6, 2018 at 1:12 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने एक ट्वीट सन्देश प्रकाशित कर स्मरण दिलाया है कि ईश्वर का वचन हमें कठिनाइयों का सामना करने का साहस प्रदान करता है।

शुक्रवार छः अप्रैल को अपने ट्वीट सन्देश में सन्त पापा ने लिखा, “प्रभु ईश्वर का वचन अन्धकार में प्रकाश है तथा कठिनाइयों के समक्ष भी भय न खाने हेतु हमारी मदद करता है।”


(Juliet Genevive Christopher)

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स्पेन के धर्मसमाजियों को सन्त पापा फ्राँसिस का सन्देश

In Church on April 6, 2018 at 12:53 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो):  स्पेन के काथलिक धर्मसमाजी और धर्मसंघी महिलाओं एवं पुरुषों के नाम एक विडियो सन्देश जारी कर सन्त पापा फ्राँसिस ने “चुनावी प्रचार” या “विज्ञापन अभियान” के विरुद्ध चेतावनी देते हुए कहा है कि “ईश्वर की बुलाहट मार्केट की नीतियों के माध्यम से काम नहीं करती”।

स्पेन के मैडरिड शहर में स्पानी राष्ट्रीय ईशशास्त्रीय संस्था के तत्वाधान में आयोजित सम्मेलन में भाग लेने इन दिनों काथलिक धर्मबहनें एवं पुरोहित एकत्र हुए हैं। आठ अप्रैल को समाप्त होनेवाले इस सम्मेलन में इस विषय पर चिन्तन किया जा रहा है कि समर्पित जीवन को पहचानने हेतु युवा व्यक्तियों को किस प्रकार मार्गदर्शन दिया जाये।

ईशशास्त्रीय संस्था के अध्यक्ष फादर कारलोज़ मार्तीनेज़ ओलिवेराज़ को प्रेषित सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस युवाओं में उनके मूल को भुला देने की प्रवृत्ति के प्रति सचेत करते हैं। उन्होंने इस तथ्य की ओर भी ध्यान आकर्षित कराया है कि स्पेन में समर्पित जीवन के प्रति बुलाहटों में कमी को दृष्टिगत रख उक्त सम्मेलन का आयोजन किया गया था। तथापि, सन्त पापा कहते हैं कि “हम केवल शिकायत करने तक ही अपने आप को सीमित नहीं कर सकते और न ही अतीत के वैभव के लिये खेद व्यक्त कर सकते हैं क्योंकि ईश्वर हमें भविष्य की ओर दृष्टि लगाने तथा उसके अनुकूल कार्य करने के लिये आमंत्रित करते हैं।

सम्मेलन का उद्देश्य युवा व्यक्तियों एवं बुलाहटों विषय पर आगामी धर्माध्यक्षीय धर्मसभा के लिये  चिन्तन करना है। सन्त पापा ने धर्मसंघियों एवं धर्मसमाजियों से आग्रह किया कि वे साहसपूर्वक युवाओं के लिये उन द्वारों को खोलें जिनमें प्रवेश कर वे अपनी ख्रीस्तीय जड़ों को पहचान सकें तथा समर्पित जीवन के प्रति आकर्षित हो सकें। इसके लिये सन्त पापा ने कहा कि युवाओं एवं बुजुर्गों के बीच अन्तर-पीढ़ी सम्वाद को पुनर्स्थापित किया जाना नितान्त आवश्यक है।

उन्होंने कहा “सतत् प्रार्थना तथा साक्ष्य द्वारा युवाओं की चिन्ताओं एवं उनकी आकाक्षाओं पर ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है।”


(Juliet Genevive Christopher)

पवित्रता पर सन्त पापा फ्राँसिस का प्रेरितिक उदबोधन सोमवार को होगा प्रस्तावित

In Church on April 6, 2018 at 12:48 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो):  वाटिकन स्थित परमधर्मपीठीय प्रेस कार्यालय ने गुरुवार को एक वकतव्य जारी कर बताया कि पवित्रता विषय पर सन्त पापा फ्राँसिस का प्रेरितिक उदबोधन “गाओदेते एत एक्ज़ुलताते” अर्थात् खुश हो और हर्ष मनाओ की प्रस्तावना सोमवार 09 अप्रैल को की जायेगी।

इससे पूर्व सन्त पापा फ्राँसिस दो अन्य प्रेरितिक उदबोधनों की प्रकाशना कर चुके हैं, 2013 में एवान्जेली गाओदियुम तथा 2016 में आमोरिस लेतित्सिया किये गये थे।

नवीन प्रेरितिक उदबोधन की प्रस्तावना हेतु आयोजित प्रेस सम्मेलन में रोम धर्मप्रान्त के प्रतिधर्माध्यक्ष आन्जेलो दे दोनातिस, इताली पत्रकार ज्यान्नी वालेन्ते तथा काथलिक एक्शन इटली नामक संस्था की पूर्वाध्यक्ष पाओला बिन्यार्दी पत्रकारों को सम्बोधित करेंगी।


(Juliet Genevive Christopher)

कोरिया के जेजू विद्रोह की स्मृति में सन्त पापा फ्राँसिस ने भेजा सन्देश

In Church on April 6, 2018 at 12:45 pm

सेओल, शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018 (ऊका समाचार.कॉम):  सन्त पापा फ्राँसिस ने जेजू विद्रोह की 70 वीं बरसी मनाने वाले कोरिया के लोगों के नाम एक सन्देश प्रेषित किया है। इस विद्रोह में 10,000 से अधिक नागरिक हत्या के शिकार हुए थे।

कोरियाई काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा प्रकाशित सन्त पापा के सन्देश में, सन्त पापा फ्राँसिस की ओर से, वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलीन ने लिखा, “सन्त पापा की आशा है कि यह अवसर कोरिया के लोगों के बीच चंगाई एवं पुनर्मिलन का सुअवसर सिद्ध होगा।”

“कोरिया के प्रिय लोगों को शांति की रानी मरियम की मध्यस्थता के सिपुर्द करते हुए, मैं अपनी प्रार्थनाओं का आश्वासन देता हूँ जिससे सभी आशा में सुदृढ़ बने रहे।”

कोरियाई प्रायद्वीप के विभाजन के बाद, 3 अप्रैल को जेजू के दक्षिणी द्वीप पर साम्यवादियों द्वारा विद्रोह हुआ था। सन् 1948 में भड़के इस विद्रोह में, मुख्य रूप से, सुरक्षा बलों ने नागरिकों पर बर्बर अत्याचार किया। जापानी उपनिवेश शासन से मुक्ति के बाद यह विद्रोह कोरिया के वैचारिक विभाजन का हिस्सा बना जो सन् 1948 से 1954 तक जारी रहा।

विगत वर्ष सरकार समर्थित एक समिति ने पाया कि उक्त विद्रोह में 10,244 लोग मारे गये थे जबकि विद्रोह के समय केवल साढ़े तीन हज़ार लोगों के हताहत होने की सूचना दी गई थी। सन् 1990 तक यह स्वीकार नहीं किया गया था कि सुरक्षा बल ही नरसंहार में लगे थे।

कोरियाई काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के एक अधिकारी ने कहा, “सन्त पापा द्वारा इस अवसर पर सन्देश भेजा जाना अद्वितीय बात है क्योंकि स्थानीय कलीसिया भी इस प्रश्न पर ध्यान केन्द्रित कर रही है।”

कोरियाई काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की न्याय एवं शांति सम्बन्धी समिति ने पहली अप्रैल से 07 अप्रैल तक, 03 अप्रैल के जेजू विद्रोह के स्मरणार्थ, विशिष्ट कार्यक्रमों का आयोजन किया है।

सेओल के मेओंगडॉन्ग स्थित महागिरजाघर में इस उपलक्ष्य में सम्मेलन के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष हिगीनुस ही-जोंग ने ख्रीस्तयाग अर्पित किया जिसमें हज़ारों श्रद्धालु उपस्थित हुए।


(Juliet Genevive Christopher)

मार्टिन लूथर किंग जूनियर के निधन की 50 वीं बरसी पर उन्हें याद किया वाटिकन ने

In Church on April 6, 2018 at 12:43 pm


वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो):  मार्टिन लूथर किंग जूनियर के निधन की 50 वीं बरसी पर उन्हें याद करते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ में वाटिकन के प्रतिनिधि ने कहा कि सन्त पापा फ्राँसिस एवं डॉ. किंग दोनों अहिंसा के महत्व एवं विश्वव्यापी एकात्मता की आवश्यकता में विश्वास रखते हैं।

बुधवार चार अप्रैल को डॉ. मार्टिन लूथर किंग के निधन की 50 वीं बरसी थी। अमरीका में अश्वेतों के नागरिक अधिकारों तथा नस्लगत हिंसा के विरुद्ध संघर्षरत बैपटिस्ट ख्रीस्तीय सम्प्रदाय के अश्वेत नेता डॉ. मार्टिन लूथर किंग की हत्या सन् 1968 ई. में मेमफिस, टेन्नेसी में कर दी गई थी। उनकी हत्या उस समय कर दी गई थी जब वे लॉरेन नामक मोटल की बालकनी में अपने मित्रों के साथ बातचीत कर रहे थे।

वाटिकन रेडियो से बातचीत में जिनिवा में संयुक्त राष्ट्र संघ में वाटिकन के प्रतिनिधि तथा परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष इवान यूरकोविट्स ने डॉ. किंग तथा सन्त फ्राँसिस के विचारों में समानता को याद करते हुए कहा कि दोनों ने ही अहिंसा एवं विश्वव्यापी एकात्मता पर बल दिया है।

महाधर्माध्यक्ष इवान यूरकोविट्स ने कहा “केवल अहिंसा के द्वारा ही प्रत्येक मानव विकास को उपलब्ध किया जा सकता है। हिंसा नई समस्याएं एवं नये विभाजनों को जन्म देती है।”

एकात्मता की आवश्यकता पर बल देकर उन्होंने कहा कि कलीसिया का विश्वास है तथा डॉ. किंग का विश्वास था कि “हम सब एक ही मानव परिवार के सदस्य हैं और इसीलिये हमें हर विभाजन को अभिभूत करना चाहिये, विशेष रूप से, नस्लगत एवं सामाजिक विभाजनों को।”

ग़ौरतलब है कि सन् 1968 में मार्टिन लूथर किंग जूनियर की हत्या के बाद  सन्त पापा पौल षष्टम ने भी इस बर्बर हत्या के लिये दुख व्यक्त करते हुए उन्हें “जातियों एवं नस्लों के एकीकरण के ख्रीस्तीय नबी” की संज्ञा प्रदान की थी।

इसी प्रकार सन्त पापा फ्राँसिस ने 24 सितम्बर 2015 को अमरीकी काँग्रेस को सम्बोधित करते हुए कहा थी कि डॉ. मार्टिन लूथर किंग का स्वप्न समस्त विश्व के ख्रीस्तीयों को निरन्तर प्रेरणा प्रदान कर रहा है।


(Juliet Genevive Christopher)

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