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Archive for April 7th, 2018|Daily archive page

ईश राज्य के विस्तार हेतु युवाओं से संत पापा का आग्रह

In Church on April 7, 2018 at 1:18 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 7 अप्रैल 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने युवाओं को चुनौती दी कि वे येसु को सुनें तथा अपने आपमें बदलाव लायें ताकि प्रेम के ईश्वर के राज्य की स्थापना कर सकें।

शनिवार को वाटिकन स्थित पौल षष्ठम सभागार में उतरी इटली के ब्रेशिया धर्मप्रांत के 3000 युवाओं से मुलाकात करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने उन्हें अपना संदेश दिया।

उन्होंने कहा, “येसु का स्वप्न, जैसा कि सुसमाचार में कहा गया है ईश्वर का राज्य है। ईश्वर के राज्य का अर्थ है ईश्वर से प्रेम एवं एक-दूसरे से प्रेम, जिसके द्वारा एक वृहद परिवार में हम एक-दूसरे के भाई और बहन बनते तथा ईश्वर को पिता मानते हैं जो अपने सभी बच्चों को प्यार करते तथा उस समय अत्यधिक आनन्दित होते हैं जब एक खोया हुआ पुत्र वापस लौट जाता है।”

संत पापा ने युवाओं को सम्बोधित कर कहा कि वे उनके उस सवाल से अत्याधिक प्रभावित हुए जिसमें उन्होंने पूछा है कि “क्या धर्माध्यक्ष सचमुच विश्वास करते हैं कि युवा कलीसिया में बदलाव लाने में सहयोग कर सकते हैं?” उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि आगामी सिनॉड, जिसमें युवा, विश्वास एवं बुलाहटीय आत्मजाँच पर आधारित होगा, यह युवाओं को सुनने के द्वारा तैयार किया गया है।”

संत पापा ने कहा, “जब मैं कहता हूँ “सच्चा श्रवण”, इसका अर्थ है बदलाव लाने, एक साथ चलने, अपनी तमन्नाओं को बांटने की तत्परता।”

उन्होंने युवाओं से एक प्रश्न किया कि क्या वे येसु को सुनने एवं अपने आप में बदलाव लाने के लिए तैयार हैं।

संत पापा ने युवाओं को बदलाव लाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा, येसु स्पष्ट रूप से कहते हैं, “यदि कोई मेरा अनुसरण करना चाहता है तो वह आत्मत्याग करें।” येसु क्यों इन शब्दों का प्रयोग करते हैं जो अच्छा नहीं लगता, इसे किस तरह समझा जा सकता है? “आत्मत्याग करना,” का अर्थ यह बिलकुल नहीं है कि उन चीजों से नफरत करना जिनको स्वयं ईश्वर ने हमें प्रदान किया है, जीवन, अभिलाषा, शरीर, संबंध आदि, जी नहीं, बल्कि ईश्वर इन सारी चीजों को हमारी भलाई के लिए हमें देना चाहते हैं। फिर भी वे पूछते हैं कि यदि कोई उनका अनुसरण करने के लिए अपने आप का त्याग करना चाहता है, क्योंकि हम सभी में एक पुराना व्यक्तित्व है, जो ईश्वर के तर्क का अनुसरण नहीं चलता जो प्रेम का तर्क है बल्कि इसके विपरीत अहम की भावना के अनुसार चलता है, जो स्वार्थ, अपनी रूचि, दिखावटी एवं छिपने के तर्क के अनुसार है।

येसु हमें इस दासता से मुक्त करने के लिए क्रूस पर मर गये, जो कि बाह्य नहीं किन्तु आंतरिक है। पाप हमें आंतरिक रूप से मार डालता है। केवल येसु ही हैं जो हमें इस बुराई से बचा सकते हैं किन्तु इसके लिए हमारे सहयोग की आवश्यकता है, हमें यह कहना है, “येसु मुझे क्षमा कर, मुझे आपके समान नम्र एवं प्रेमी हृदय प्रदान कर।

संत पापा ने कहा कि इस प्रकार की प्रार्थना को येसु गंभीरता से लेते एवं जो लोग उन पर विश्वास करते हैं वे चमत्कार देखते हैं। संत पापा ने युवाओं को बाईबिल का पाठ करने एवं यूखरिस्त में भाग लेने की सलाह दी जिसके द्वारा वे आनन्द का अनुभव कर सकते हैं उन्होंने कहा कि ऐसा करने के द्वारा वे पीड़ा, बामारी एवं एकाकी के क्षण में येसु की उपस्थिति का एहसास करेंगे। उन्हें घमंड, उपधारणा एवं दूसरों का न्याय किये बिना धारा के विपरीत जाने हेतु साहस प्राप्त होगा। यह एक वरदान हैं जो हमें अपने आपमें शून्यता एवं उनके द्वारा भरे जाने का अनुभव प्रदान करेगा।

संत पापा ने असीसी के संत फ्राँसिस एवं संत दमियन का उदाहरण दिया जो युवा के रूप में स्वाप्नों से भरे थे किन्तु ये ईश्वर के नहीं बल्कि दुनिया के स्वप्न थे। येसु ने उन्हें प्रेरित किया और वे अपने पुराने व्यक्तित्व को त्यागकर विनम्रता, गरीबी, सरलता, दयालुता, सृष्टि के प्रति स्नेह आदि गुणों को अपनाते हुए येसु को स्वीकार किया।

संत पापा ने युवाओं को उनके मुलाकात के लिए धन्यवाद देते हुए उनके लिए माता मरियम से प्रार्थना की तथा अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Usha Tirkey)

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प्रादो पुरोहितों से संत पापा, गरीबों को सुसमाचार सुनाया जाना आवश्यक

In Church on April 7, 2018 at 1:16 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 7 अप्रैल 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार, 7 अप्रैल को वाटिकन के लोकसभा परिषद भवन में प्रादो के पुरोहितों की संस्था के 30 सदस्यों से मुलाकात की जो तीर्थयात्रा हेतु रोम आये हैं।

प्रादो के पुरोहितों की संस्था की स्थापना फादर अंतोइने केवरियर ने सबसे गरीब लोगों की सेवा के लिए की है।

संत पापा ने मुलाकात में प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा, “यह मुलाकात मुझे आपके धन्य संस्थापक द्वारा की गयी यात्रा के लिए ईश्वर को शुक्रिया अदा करने का अवसर प्रदान करता है, जो अपने समय के सबसे गरीब लोगों की जरूरतों से प्रभावित थे तथा जिन्होंने उनके करीब रहने का निश्चय किया था ताकि वे ख्रीस्त को जान सकें और प्यार कर सकें। तब से यह पौधा विकसित होता रहा और अब पुरोहितों, धर्मबहनों एवं समर्पित लोकधर्मी महिलाओं के रूप में एक सुन्दर परिवार बनकर विभिन्न देशों में फैल गया है। आप येसु के उसी प्रेम से प्रेरित होकर एवं सुसमाचार प्रचार के उत्साह से भरे रहें जो गरीबों के बीच गरीब बने।

संत पापा ने कहा कि हमारे इस युग में भौतिक एवं आध्यात्मिक गरीबी है एवं कई लोग हैं जो पीड़ित एवं घायल हैं तथा लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई बार वे कलीसिया से दूर, सुसमाचार से मिलने वाले आनन्द एवं सांत्वना वंचित रहते हैं।

संत पापा ने पुरोहितों को सम्बोधित कर कहा कि माता कलीसिया फादर केवरियर के अनुयायियों के मिशन से प्रसन्न है तथा उनके योगदान को महसूस करती है। उन्होंने कहा कि उनकी वह विशिष्ठता जो उन्हें व्यक्तिगत रूप से प्रभावित करती है, वह है मिशनरी नवीनीकरण जिसके लिए पूरी कलीसिया बुलायी जाती है क्योंकि इसमें सुसमाचार प्रचार एवं मानवीय प्रोत्साहन के बीच गहरा संबंध है, जिसको हर सुसमाचार प्रचार के कार्य में व्यक्त एवं विकसित होने की आवश्यकता है।

संत पापा ने संस्थापक फादर केवरियर की याद दिलाते हुए पुरोहितों को निमंत्रण दिया कि वे उनका अनुकरण करें, उनके जीवन पर चिंतन करें एवं उनकी मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना करें। गरीबों के प्रति गहरी सहानुभूति का जो अनुभव उन्होंने किया था, उन्हें समझा तथा उनके दुखों को बांटा था, साथ ही साथ ख्रीस्त के कपड़ों को उतारे जाने पर चिंतन किया था, उनके प्रेरितिक उत्साह के स्रोत थे। संत पापा ने कहा कि यही उत्साह उनकी मिशनरी गतिविधियों को प्रेरित करे।

संत पापा ने उनके लिए कामना की कि पवित्र आत्मा उनका पथ प्रदर्शन करे तथा चुनौतियों एवं कठिनाइयों की घड़ी में उन्हें सांत्वना प्रदान करे। उन्होंने धन्य अंतोइने केवरियर की मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना करते हुए उन्हें धन्य कुँवारी मरियम के चरणों में सिपूर्त किया तथा उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Usha Tirkey)

‘कम्युनिते दे इम्मानुएल’ के सदस्यों को संत पापा का संदेश

In Church on April 7, 2018 at 1:15 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 7 अप्रैल 2018 (रेई) :  संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार पूर्वाहन को वाटिकन के संत क्लेमेंटीन सभागार में ‘कम्युनिते दे इम्मानुएल’ संगठन के 300 सदस्यों से मुलाकात की, जो रोम की तीर्थयात्रा पर आये हुए हैं।

संत पापा ने उनका सहर्ष स्वागत किया तथा पूरी काथलिक कलीसिया के प्रति उनकी सहानुभूति और सहयोग तथा उनकी मिशनरी प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद दिया और भविष्य में भी इसे जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया।

संत पापा ने कहा कि ‘इम्मानुएल समुदाय’ को गत वर्ष 15 अगस्त को पुरोहितों के संगठन के रुप में मान्यता मिली, क्योंकि इस समुदाय में पुरोहितों की संख्या बहुत बढ़ गई और अपने प्रेरितिक कार्यों द्वारा ख्रीस्तीय धर्मप्रचार को बढ़ावा मिला है। संत पापा उमीद करते हैं कि 40 वर्षों से अधिक पुरोहितों के संगठन  ‘इम्मानुएल समुदाय’ के अनुभव को देखते हुए उनको दी गई मान्यता उन्हें पवित्र जीवन और लोक धर्मियों के करीब रहते हुए तथा अन्य धर्मप्रांतीय पुरोहितों को सहारा देते हुए जीवन में तालमेल बैठाने में सहायक सिद्ध होगा। संत पापा उन्हें पल्ली पुरोहित के साथ, पल्ली के प्रेरितिक कार्यों में तथा पल्ली की कलीसिया के साथ एकजुट होकर सुसमाचार प्रचार में लगे रहने हेतु आमंत्रित किया। (एवांजेली गौदियुम, 29)

संत पापा ने इस संगठन ‘इम्मानुएल अर्थात ‘ईश्वर हमारे साथ’ समुदाय’ के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस समुदाय की शुरुआत सुसमाचार को खुशी पूर्वक जीने और प्रचार करने के लिए की गई थी। संत पापा उनसे अपील करते हुए कहते हैं, “आप हर परिस्थिति में और हर व्यक्ति में ईश्वर की उपस्थिति को पहचानें। आप पवित्र आत्मा की आवाज को सुनते हुए प्रभु येसु में अपने आध्यात्मिक जीवन को मजबूत बनायें वे ही हमारे कमजोर क्षणों में हमें मदद करते और हर प्रकार की परीक्षाओं से बाहर निकलने की शक्ति प्रदान करते हैं। कठिनाईसों के बावजूद आप सुसमाचार प्रचार और मिशनरी कार्यों को करते हुए आनंद का अनुभव करें। कलीसिया को आप पर भरोसा है पवित्र आत्मा की प्रेरणा से आप अपने वचनों, कर्मों और जीवन साक्ष्य द्वारा सुसमाचार का प्रचार करें।”

संत पापा ने उन्हें पवित्र आत्मा द्वारा संचालित जीवन जीने के लिए प्रेरित किया क्योंकि  पवित्र आत्मा के द्वारा निर्देशित होने की इजाजत देने के अलावा कोई बड़ी स्वतंत्रता नहीं है। वह हमें उजागर करता और अपनी इच्छानुसार कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।

संत पापा ने अंत में माता मरिया के सिपुर्द करते हुए पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन में अपने कार्यों की जारी रखने हेतु शुभ कामनायें दी और अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया। संत पापा ने अपने लिए प्रार्थना की मांग करते हुए उनसे विदा ली।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा ने लातिनी अमरीका में विकास हेतु अध्ययन केंद्र के संस्थापक से मुलाकात की

In Church on April 7, 2018 at 1:13 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 7 अप्रैल 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार को लातिनी अमरीका में विकास हेतु अध्ययन केंद्र के संस्थापक हेनरियाने दी कापोनाय से मुलाकात की।

उनका अभिवादन करते हुए संत पापा ने उनके कार्यों की सराहना की तथा कहा कि उनका कार्य शांति की सेवा, मानव अधिकारों की रक्षा, पृथ्वी की सुरक्षा एवं अधिक मानवीय एवं भाईचारा पूर्ण समाज के निर्माण में समर्थन के प्रति प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि कापोनाय की “अथक रचनात्मकता” ने मुलाकातों के रूप में फल उत्पन्न किया है जिसे “मानवता में संवाद” कहा जा सकता है।”

ये मुलाकातें मानवता में राजनीतिक को पुनः केंद्रित करतीं तथा एक ऐसे नागरिकता का निर्माण करती हैं जो “आमघर की देखभाल” करते हैं।

संत पापा ने कहा कि “सादगी, परोपकार, और भाईचारा में एक साथ रहने की एक कला को प्रेरित करना तथा सम्मान एवं मुलाकात की संस्कृति में शिक्षित करना अच्छा है, जो मानवता के आदर्श के मुताबिक भविष्य को आगे बढ़ाने में सक्षम है।”

अंततः संत पापा ने अपनी आशा व्यक्त की कि मानव इतिहास, विकास, मुक्ति, और प्यार का पुष्प बनेगा।

उन्होंने कहा कि यही उनके प्रेरितिक विश्व पत्र लौदातो सी एवं अमाजोन में धर्माध्यक्षों की धर्मसभा का उद्देश्य है।


(Usha Tirkey)

वेटिकन संग्रहालय द्वारा नई सुबह पर्यटन की पहल

In Church on April 7, 2018 at 1:11 pm

वाटिकन सिटी,शनिवार 7 अप्रैल 2018 (वीआर,रेई) :  वाटिकन संग्रहालय की ओर से “गुड मॉर्निंग वाटिकन संग्रहालय” आगंतुकों के लिए एक नई पहल है, जो दुनिया के सबसे प्रसिद्ध कला संग्रहों में से एक का विशेष भोर के समय का दौरा है।

इस दौरे में संत पेत्रुस महागिरजाघर के गुंबद की लुभावनी दृश्य के साथ, सुबह की सैर और नाश्ते का भी प्रबंध है।

हर साल, करीब 60 लाख लोग वाटिकन संग्रहालयों का दौरा करते हैं। इस संग्रहालय की निर्देशिका, बारबरा जट्टा हैं, वे संग्रहालय की पहली महिला निर्देशिका हैं।

यह नई पहल आगंतुकों को 6 बजे संग्रहालयों में प्रवेश करने का अवसर प्रदान करता है और विभिन्न प्रदर्शनी कक्षों को खोलने की एक खास परंपरा से अवगत कराता है।

आगंतुक कर्मचारियों के साथ अंधेरे में इमारत में प्रवेश करते हैं, वे कर्मचारियों को दरवाजे खोलते हुए और रफाएल के कमरे, मानचित्र गैलरी और सिस्टिन चैपल जैसे कलात्मक खजाने को उजागर करने के लिए स्विच ऑन करते हुए देखते हैं।

यह विशेष निर्देशित दौरा ‘कॉर्टिले देला पियना’ एक आधुनिक विश्व मूर्तिकला वाले आंगन में नास्ते के साथ समाप्त होता है जहाँ 1ली शताब्दी का विशाल कांस्य पाइन शंकु है, जो रोमन कोंसुल अग्रिप्पा के स्नान गृह के पास पाया गया था।


(Margaret Sumita Minj)

विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर संत पापा का ट्वीट संदेश

In Church on April 7, 2018 at 1:10 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 7 अप्रैल 2018 (रेई) : दुनिया भर के लोगों के स्वास्थ्य के स्तर को सुधारने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन हर साल 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाता है। इस दिन लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया जाता है तथा सरकारों को स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण तथा उनके सही तरह से क्रियान्वन के लिए प्रेरित किया जाता है। इस दिन संत पापा फ्राँसिस ने ट्वीट प्रेषित कर सभी लोगों को बीमारों की सेवा और देखभाल करने की प्रेरणा दी।

संदेश में उन्होंने लिखा, “भले समारी की तरह आइये, हम भी बीमार और कष्ट सह रहे लोगों की सेवा-सुश्रुषा करें।”

भला समारी रास्ते में पड़े घायल यात्री को देखते ही उसपर दया आ गई। उसने जाति, धर्म, उँच-नीच की परवाह किये बिना उसकी सेवा-सुश्रुषा की।(लूकस 10, 29-37)

विदित हो विश्व स्वास्थ्य संगठन हर साल इस स्वास्थ्य दिवस पर एक विषय निर्धारित करता है। इस साल स्वास्थ्य दिवस का विषय वैश्विक स्वास्थ्य आवृत्त क्षेत्र (यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज) रखा है। इसके तहत विश्व भर के लोगों को उनके स्वास्थ्य के प्रति सचेत रखने का उद्देश्य है। इसके अलावा दुनिया भर के लोगों को बिना किसी आर्थिक समस्या का सामने किए स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैय्या कराना इस साल का प्रमुख उद्देश्य है।

स्वास्थ्य दिवस – दुनिया भर के लोगों को निरोग बनाने के उद्देश्यों वाली वैश्विक संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना 7 अप्रैल 1948 को हुई थी। इसी दिन WHO की पहली स्वास्थ्य सभा भी हुई थी। इसके दो साल बाद से यानी कि 7 अप्रैल 1950 से हर साल इसी दिन विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई थी।


(Margaret Sumita Minj)

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