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संत पापा करेंगे दिविनो अमोरे मरियम तीर्थ में प्रार्थना

In Church on April 10, 2018 at 3:47 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 10 अप्रैल 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस मई माह में रोम के एक प्रसिद्ध मरियम तीर्थ दिविनो अमोरे (दिव्य प्रेम) का दौरा करेंगे।

वाटिकन प्रवक्ता एवं वाटिकन प्रेस कार्यालय के निदेशक ग्रेग बर्क ने 10 अप्रैल को एक विज्ञाप्ति जारी कर कहा, “संत पापा फ्राँसिस माता मरियम को समर्पित महीना का उद्घाटन करने के लिए 1 मई को, संध्या 5.00 बजे पवित्र रोजरी माला विन्ती करने दिविनो आमोरे जायेंगे।”

उन्होंने जानकारी दी कि “शनिवार 5 मई को पूर्वाहन 11.00 बजे संत पापा तोर वेरगाता में नेओकाटेकुमेनात वे के सदस्यों से, रोम में उनके संगठन की 50वीं सालगिराह पर मुलाकात करेंगे।


(Usha Tirkey)

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संत पापा ने करुणा के मिशनरियों के साथ ख्रीस्तयाग अर्पित किया

In Church on April 10, 2018 at 3:44 pm

करुणा के मिशनरियों के साथ ख्रीस्तयाग अर्पित करते संत पापा – REUTERS

10/04/2018 16:28

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 10 अप्रैल 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार 10 अप्रैल को करुणा के मिशनरियों के साथ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

उन्होंने प्रवचन में प्रेरित चरित से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जहाँ शिष्यों द्वारा येसु के पुनरूत्थान का साक्ष्य बड़े उत्साह के साथ देने का जिक्र है।

संत पापा ने कहा, “सब कुछ का आरम्भ येसु के पुनरूत्थान के बाद हुआ, यहीं से शिष्यों के साक्ष्य की शुरूआत हुई। इसके द्वारा विश्वास एवं नये जीवन में समुदाय के सदस्य बने।” आज का पाठ दो अविभाज्य पहलुओं को प्रस्तुत करता है, व्यक्तिगत रूप से दुबारा जन्म लेना एवं सामुदायिक जीवन।

संत पापा ने करुणा के मिशनरियों को सम्बोधित कर कहा, “मैं आपके मिशन की याद करता हूँ जिसको आप करुणा की जयन्ती के समय से ही करते आ रहे हैं। एक ऐसा मिशन है जो दोनों ही दिशाओं में आगे बढ़ता है। यह ऊपर से आता है तथा समुदाय की सेवा में समर्पित होता है ताकि प्रेम की आज्ञा को आनन्द एवं मेल-मिलाप के साथ जीया जा सकें।”

संत पापा ने प्रवचन में दो मुख्य संकेतों पर चिंतन किया, पवित्र आत्मा से उत्पन्न होना तथा समुदाय की सेवा।

उन्होंने कहा कि सुसमाचार हमें स्मरण दिलाता है कि जो लोग ख्रीस्त के पुनरूत्थान का साक्ष्य देने के लिए बुलाये गये हैं उन्हें “पवित्र आत्मा से उत्पन्न होना है,” अन्यथा, हम निकोदेमुस की तरह हो जायेंगे जो इस्राएल का शिक्षक होने के बावजूद, येसु के शब्दों को नहीं समझ सका, जब उन्होंने कहा कि ईश्वर के राज्य को देखने के लिए हमें दुबारा जन्म लेना अर्थात् जल एवं पवित्र आत्मा से जन्म लेना आवश्यक है। (पद. 3-5)

निकोदेमुस ईश्वर के तर्क को नहीं समझ सका जो कृपा एवं दया का तर्क है ताकि जो छोटा है वह बड़ा बन सके, जो पिछला है वह पहला बन सके, जो अपनी बीमारी को पहचानता है उसे चंगाई मिल सके। इसका अर्थ है पिता, पुत्र एवं पवित्र आत्मा के लिए अपने जीवन की प्राथमिकता को सचमुच त्याग देना। संत पापा ने सचेत किया कि वे ईश्वर से प्राप्त असाधारण कृपा के लिए अपने को विशिष्ठ समझने से बचें बल्कि अपने को सामान्य, सरल एवं सौम्य व्यक्ति के रूप में संतलित रखते हुए पवित्र आत्मा से पोषित होते रहें, उनके सामर्थ्य के प्रति उदार बनें एवं अपने आप को मुक्त किये जाने दें क्योंकि “पवन जिधर चाहता, उधर बहता है हम उसकी आवाज सुनते हैं किन्तु यह नहीं जानते कि वह किधर से आता और किधर जाता है।” (यो. 3, 8).

दूसरा संकेत समुदाय की सेवा पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा, “एक पुरोहित के रूप में दुनिया के मरूस्थल से पार हो पाना मुक्ति का चिन्ह है, यही ख्रीस्त का क्रूस है, परिवर्तन का स्रोत तथा पूरे समुदाय एवं विश्व का नवीनीकरण।

संत पापा ने इस बात पर जोर दिया कि प्रभु जो मर गये एवं फिर जी उठे, यही वह शक्ति है जो कलीसिया में एवं कलीसिया के द्वारा समस्त मानवता में एकता का निर्माण करती है। येसु ने अपने दुखभोग के पहले कहा था, “जब मैं पृथ्वी से ऊपर उठाया जाऊँगा, तो सब मनुष्यों को अपनी ओर आकर्षित करूँगा। ” (यो. 12: 32).

यही एकता की शक्ति है जो येरूसालेम में आरम्भिक ख्रीस्तीय समुदाय में दिखाई पड़ता था जैसा कि प्रेरित चरित में बतलाया गया है, “विश्वासियों का समुदाय एक हृदय और एक प्राण था।” (4,32) यह एक ऐसी एकता थी जिसने सभी चीजों को साझा करने के लिए उन्हें प्रेरित किया और जिसके कारण उनके बीच कोई भी अभाव ग्रस्त नहीं था, किन्तु समुदाय की यह जीवन शैली बाहर के लोगों के लिए भी “संक्रामण” के समान थी। समुदाय में पुनर्जीवित ख्रीस्त की उपस्थिति ने आकर्षण की ऊजा उत्पन्न की जो कलीसिया के साक्ष्य एवं विभिन्न तरह से सुसमाचार के प्रचार के द्वारा सभी तक पहुँचने का प्रयास करने लगे, उनके बीच कोई बहिष्कृत नहीं था।

संत पापा ने करुणा के मिशनरियों को सम्बोधित कर कहा कि वे अपने इस मिशन को लोगों की सेवा के लिए उसी तरह अर्पित करें। कलीसिया एवं दुनिया दोनों की सेवा में करुणा की खास अवश्यकता है क्योंकि एकता हेतु ईश्वर की अभिलाषा, ख्रीस्त द्वारा बुराई पर अच्छाई की विजय द्वारा जीती गयी है जो आधुनिक उपकरणों का लाभ उठाता है। यह अपने आप में अच्छा है किन्तु उसका गलत प्रयोग किया जाता है एवं यह जोड़ने के बदले तोड़ता है। हम सभी जानते हैं कि एकता संघर्ष से बढ़कर है और हम यह भी जानते हैं कि करुणा के बिना इस सिद्धांत को ठोस जीवन एवं इतिहास में लागू नहीं किया जा सकता है।

संत पापा ने सभी मिशनरियों को प्रोत्साहन दिया कि वे करुणा के मिशन में पक्का होकर आनन्द के साथ जाएँ। सबसे पहले अपने आप को पवित्र आत्मा की कृपाओं से भरें एवं ईश्वर के प्रेम से सिंचित हों। येसु के उस चिन्ह को भी धारण करें जिसमें वे उठाये गये क्योंकि समुदाय, दुनिया में एकता का चिन्ह एवं माध्यम है।


(Usha Tirkey)

करुणा के मिशनरियों से संत पापा, आपके कार्य कलीसिया के लिए मूल्यवान

In Church on April 10, 2018 at 3:41 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 10 अप्रैल 2018 (रेई)˸ वाटिकन में करुणा के 550 मिशनरियों से मुलाकात करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने उन्हें यह कहते हुए उनके मिशन को सुदृढ़ किया कि वे कलीसिया की बड़ी आवश्यकता की पूर्ति कर रहे हैं तथा उन्हें चेतावनी दी कि ख्रीस्तीय का रास्ता कठिन है।

करुणा के मिशनरी रोम में प्रार्थना एवं मनन-चिंतन के लिए एकत्रिक हैं जिसका आयोजन नवीन सुसमाचार हेतु गठित परमधमर्मपीठीय समिति द्वारा आयोजित किया गया है।

मंगलवार को उनके साथ मुलाकात करते हुए संत पापा ने कहा कि वे कलीसिया की बड़ी सेवा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आरम्भ में उनका यह उद्देश्य केवल करुणा की जयन्ती तक सीमित था किन्तु उनकी सेवा द्वारा हुए परिवर्तन के कई साक्ष्यों के कारण उन्होंने उनकी सेवा को आगे बढ़ाने का निश्चय किया है।

संत पापा ने करुणा के मिशनरियों से कहा कि जो संदेश वे ख्रीस्त के नाम पर देते हैं वह ईश्वर के साथ शांति स्थापित करने का है। ईश्वर की क्षमा एवं दया के संदेश को लोगों के द्वारा दुनिया में फैलाया जाना है। यही वह मिशन है जिसको येसु ने पुनरूत्थान के बाद अपने शिष्यों को दिया था। इस मिशन को पूरा करने वालों का जीवन इस संदेश के अनुरूप होना चाहिए। वे करुणा के सहयोगी बनें अर्थात् करुणावान प्रेम को जीयें जिसको उन्होंने पहले प्राप्त किया है।

संत पापा ने प्रेरित संत पौलुस के अनुभवों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने अपने को ईशनिंदक एवं अत्याचारी स्वीकार किया जिन्होंने प्रभु से दया प्राप्त की थी किन्तु मन परिवर्तन के बाद, अपने अतीत के कारण वे ईश्वर के मेल-मिलाप के अग्रदूत बन गये और घोषणा की कि उन्होंने किसी को कोई ठोकर नहीं दिया है अतः कोई भी उनके मिशन को बदनाम नहीं कर सकता। संत पापा ने कहा कि ईश्वर के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए हमेशा यह स्वीकार करने की आवश्यकता है कि ईश्वर ने मुझपर दया की है।

संत पापा ने मिशनरियों को प्रोत्साहन दिया कि वे यह याद रखें कि पहला कदम ईश्वर लेते हैं। इस प्रकार जब एक पश्चातापी पाप स्वीकार संस्कार के लिए जाता है उन्हें याद रखना चाहिए कि ईश्वर की कृपा हमेशा क्रियाशील है। हमारा पुरोहितीय हृदय उस व्यक्ति में ईश्वर के चमत्कार को देख सके जिसने ईश्वर से मुलाकात की है एवं अपनी प्रचुर कृपा का अनुभव कराया है।

संत पापा ने कहा कि पुरोहित का कार्य ईश्वर की कृपा में सहयोग देना है जो कि क्रियाशील है एवं व्यर्थ नहीं जाता किन्तु उन्हें बल प्रदान करता है एवं पूर्णता की ओर आगे बढ़ने में सहायता देता है। ऊड़ाव पुत्र के पिता के समान एक पाप मोचक को पश्चातापी की आंखों में नजर डालना चाहिए उन्हें सुनना एवं उनका स्वागत खुली बाहों से करना चाहिए ताकि वे पिता के प्रेम का एहसास कर सकें जो क्षमा कर देते हैं, उन्हें उत्सव का वस्त्र एवं अंगुठी पहनाते हैं जो उन्हें परिवार के सदस्य स्वीकार करने का चिन्ह है।

अंत में संत पापा ने कहा कि “जीवन के स्रोत के साथ संयुक्त रहते हुए, करुणा के मिशनरी, उनके अनुभव की व्याख्या करने एवं साक्ष्य देने के लिए बुलाये जाते हैं ताकि हरेक जन समुदाय में बिना किसी भेदभाव के स्वीकार किया जाए जो कठिनाई में पड़े अथवा जरूरतमंद लोगों को शक्ति प्रदान करेगा।”


(Usha Tirkey)

भारत के दो धर्माध्यक्षों की नियुक्ति

In Church on April 10, 2018 at 3:40 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 10 अप्रैल 2018 (रेई)˸ भारत की सिरो मलांकरा कलीसिया के धर्माध्यक्षीय धर्मसभा द्वारा चयनित दो धर्माध्यक्षों को संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार 10 अप्रैल को अनुमोदन प्रदान किया।

धर्माध्यक्ष सामुएल मार इरेनियोस (काट्टूकाल्लिल) को पथानामथित्ता धर्मप्रांत के लिए धर्माध्यक्ष चुना गया है जो पहले त्रिवेंद्रम के सहायक धर्माध्यक्ष थे।

धर्माध्यक्ष यूहानोन मार थेयोदोसियुस (कोकुथुनदिल) को मुवात्तुपुजहा धर्मप्रांत का धर्माध्यक्ष नियुक्त किया गया है जो पहले महाधर्माध्यक्षीय कार्यालय में धर्माध्यक्ष के रूप में सेवा दे रहे थे।

पथानामथित्ता धर्मप्रांत के नवनियुक्त धर्माध्यक्ष सामुएल मार इरेनियोस का जन्म 13 मई 1952 को केरल के कादाम्मानित्ता में हुआ था। उनका पुरोहिताभिषेक 22 दिसम्बर 1978 को हुआ। उन्होंने कई पल्लियों में एक पल्ली पुरोहित के रूप में अपनी सेवायें दी हैं।

वे त्रिवेंद्रम में सिरो मलांकरा की अधिकारिक पत्रिका क्रिस्तावा काहालाम के प्रमुख सम्पादक थे। उन्होंने केरल के कई शिक्षण केंद्रों में भी शिक्षा देने का कार्य किया है। वे 2007 से 2010 तक त्रिवेंद्रम महाधर्मप्रांत के धर्माध्यक्षीय विकर भी रह चुके हैं।

25 जनवरी 2010 को वे त्रिवेंद्रम के सहायक धर्माध्यक्ष नियुक्त किये गये थे तथा 13 मार्च 2010 को धर्मध्यक्षीय अभिषेक प्राप्त किया था।

मुवात्तुपुजहा के नवनियुक्त धर्माध्यक्ष यूहानोन मार थेओदोसियुस का जन्म 8 अप्रैल 1959 को केरल के पुथुस्सेरी भागोन में हुआ था। उनका पुरोहिताभिषेक 22 दिसम्बर 1985 को हुआ था। उन्होंने रोम से कलीसिया के कानून (कैनन लॉ) में डॉक्टर की उपाधि प्राप्त की है।

उन्होंने पल्ली पुरोहित, त्रिवेंद्रम महाधर्मप्रांत के सचिव, लघुगुरूकुल के प्राचार्य, कलीसियाई अदालत के अध्यक्ष, भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के कार्यालय के सदस्य तथा गुरगाँव के विकर जेनेरल के रूप में अपनी सेवाएँ दी हैं।

5 अगस्त 2017 को वे धर्माध्यक्ष नियुक्त हुए थे तथा 21 सितम्बर 2017 को उनका धर्माध्यक्षीय अभिषेक हुआ था। वे यूरोप तथा ओशिनिया में रहने वाले सिरियाई मलांकारा विश्वासियों के प्रेरितिक विकर हैं।


(Usha Tirkey)

पवित्रता में कैसे बढ़ें?

In Church on April 10, 2018 at 3:38 pm

 

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 10 अप्रैल 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 9 अप्रैल के ट्वीट संदेश में विभिन्न लोगों को सम्बोधित कर पवित्रता में बढ़ने का प्रोत्साहन दिया।

उन्होंने माता-पिता एवं दादा-दादी को सम्बोधित कर कहा, “क्या आप माता–पिता अथवा दादा–दादी हैं? बच्चों को धीरज पूर्वक येसु का अनुसरण करने की शिक्षा देने के द्वारा पवित्र बनें।”

उन्होंने अधिकारियों को सम्बोधित कर कहा, “क्या आप अधिकारी के पद पर हैं? सार्वजनिक भलाई के लिए काम करने एवं स्वार्थ का त्याग करने के द्वारा पवित्र बनें।”

संत पापा ने 10 अप्रैल को विश्वासियों को सिद्धि के रास्ते पर आगे बढ़ने का प्रोत्साहन देते हुए ट्वीट संदेश में लिखा, “हृदय के गरीब बनना, दीनता एवं विनम्रता से पेश आना, दूसरों के दुःख में दुःखी होना, धार्मिकता के लिए भूखे एवं प्यासे रहना, करुणा की दृष्टि से देखना एवं कार्य करना, ही पवित्रता है।”

उन्होंने एक अन्य द्वीट में लिखा, “हृदय को उन सभी चीजों से मुक्त रखना जो उसे प्रेम से वंचित कर देते हैं, हमारे आस-पास शांति बोना, सुसमाचार के रास्ते को प्रतिदिन अपनाना, भले ही यह हमारे लिए समस्या का कारण बन जाए, यही पवित्रता है।”


(Usha Tirkey)

संत पापा क्रूस के संत पौल पल्ली का दौरा करेंगे

In Church on April 10, 2018 at 3:36 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 10 अप्रैल 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस आगामी रविवार 15 अप्रैल को कोरवियाले में क्रूस के संत पौल (सन पाओलो देल्ला क्रोचे) पल्ली का दौरा करेंगे।

10 अप्रैल को प्रकाशित एक जानकारी के अनुसार संत पापा फ्राँसिस 15 अप्रैल को संध्या 4.00 क्रूस के संत पौल पल्ली का दौरा कर विश्वासियों से मुलाकात करेंगे।

रोम स्थित क्रूस के संत पौल गिरजाघर के पल्ली पुरोहित डॉन रोबेरतो कास्सानो ने वाटिकन न्यूज़ से कहा कि राजधानी के उपनगर के लिए यह आशा का संदेश है जो अपने विश्वास में सुदृढ़ होना चाहता है।

उन्होंने कहा, “क्रूस के संत पौल पल्ली, बड़ी उत्सुकता से संत पापा फ्राँसिस का इंतजार कर रहा है तथा उन्हें उनके सांत्वनापूर्ण शब्दों की आशा है।

पल्ली पुरोहित ने कहा, “हमारे पास साधन नहीं हैं किन्तु 40 स्वयंसेवक हैं।” उन्होंने कहा कि वहाँ कई लोग गरीब हैं किन्तु यदि विकास की परियोजनाएं शुरू की जायेंगी तो कोरवियाले सचमुच सुन्दर बन सकता है।

फादर रोबेरतो ने बतलाया कि कोरवियाले संत पापा का इंतजार कर रहा है और उनके साथ उन्हें आशा एवं शक्ति का भी इंतजार है ताकि वे आशा में अपनी यात्रा जारी रख सकें।

 


(Usha Tirkey)

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