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बपतिस्मा संस्कार पर संत पापा की धर्मशिक्षा

In Church on April 11, 2018 at 3:18 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 04 अप्रैल 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को बपतिस्मा संस्कार पर अपनी धर्मशिक्षा देते हुए कहा, प्रिय भाई एवं बहनों, सुप्रभात।

पास्का अवधि के पचास दिन हमें अपने ख्रीस्तीय जीवन पर चिंतन करने हेतु एक अवसर प्रदान करता है क्योंकि इस अवधि में हम जीवन के स्वभाविक प्रवाह को देखते हैं जो येसु ख्रीस्त द्वारा हमारे लिए आता है। संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि हम वास्तव में ख्रीस्तियों के रुप में अपने जीवन में येसु ख्रीस्त को एक निवास स्थान देते हैं। अतः हम अपने इस आत्मज्ञान की शुरूआत कहाँ से करें, क्या हम इसकी शुरूआत संस्कारों से कर सकते हैं जिसके द्वारा ख्रीस्तीय जीवन की ज्योति हममें प्रज्जवलित हुई हैॽ उन्होंने कहा, “यह बपतिस्मा संस्कार है। यह ख्रीस्त का पास्का है जो हमें नवीन बनाता जहाँ हम बपतिस्मा संस्कार के द्वारा उनके प्रतिरुप बन जाते हैं। बपतिस्मा प्राप्त, येसु ख्रीस्त के वे लोग हैं जिनके जीवन का मालिक स्वयं येसु ख्रीस्त हैं। बपतिस्मा संस्कार ख्रीस्तीय जीवन का मूलभूत आधार है। यह संस्कारों में प्रथम है जो हमारे लिए प्रवेश द्वार बनता है जिसके द्वारा येसु ख्रीस्त हमारे व्यक्तिगत जीवन में प्रवेश करते और हम उनके जीवन रहस्यों में तल्लीन हो जाते हैं।

संत पापा ने कहा कि इब्रानी भाषा में “बपतिस्मा” का अर्थ “डूबोना” है। इस विधि के अनुरूप जल से विश्वासियों का स्नान देना, जो अलग-अलग विश्वास के आधार पर शुद्धिकरण को व्यक्त करता है जिसके द्वारा हम एक पुराने जीवन का परित्याग कर नये जीवन की शुरूआत करते हैं। लेकिन हम ख्रीस्तियों के लिए पानी में शरीर का डूबोना येसु ख्रीस्त में हमारी आत्मा को डूबोना है जिसके फलस्वरूप हम अपने पापों से मुक्त किये जाते और दिव्य ज्योति से जगमगाने लगते हैं। पवित्र आत्मा की कृपा द्वारा बपतिस्मा संस्कार के द्वारा हम येसु ख्रीस्त की मृत्यु और पुनरुत्थान में सम्मिलित होते हुए अपने पापों के कारण मर जाते जो हमें ईश्वर से अलग करता तथा येसु ख्रीस्त में एक नया जीवन प्राप्त करते हैं। मक्तिदाता येसु ख्रीस्त में आदम की संतान स्वरुप हम सभी नये जीवन की शुरुआत करने हेतु बुलाये जाते हैं।

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि हम पुनर्जीवित येसु ख्रीस्त द्वारा अपने चेलों को कही गई अंतिम वाक्य की याद करें, “तुम लोग जा कर सब राष्ट्रों को शिष्य बनाओ और उन्हें पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम पर बपतिस्मा दो।” (मत्ती. 28.19) इस तरह येसु ख्रीस्त में विश्वास के साथ बपतिस्मा ग्रहण करने वाले पवित्र आत्मा के कृपादानों से विभूषित किये जाते हैं।

वास्तव में, यह कोई भी बपतिस्मा का जल नहीं वरन पवित्र आत्मा के वारदानों से परिपूर्ण जल “जीवन का स्रोत” बनता है। संत पापा ने कहा कि हम येसु के द्वारा निकोदेमुस को कही गई बातों की याद करें जहाँ वे उसे दिव्य जीवन में जन्म लेने की बात कहते हैं, “जब तक कोई जल और पवित्र आत्मा से जन्म न ले, तब तक वह ईश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता है। जो देह से उत्पन्न होता है, वह देह है और जो आत्मा से उत्पन्न होता है वह आत्मा है।”(यो.3.5-6) यही कारण है कि बपतिस्मा संस्कार को हम “पुनर्जन्म” की संज्ञा देते हैं। इस भांति हम यह विश्वास करते हैं कि ईश्वर ने हमें “अपनी करूणा में, जल के द्वारा जो पवित्र आत्मा में नवजीवन प्रदान करता है” हम सबों को बचा लिया है। (तीतु.3.5)

संत पापा ने कहा कि बपतिस्मा इस तरह पुनर्जन्म की एक प्रभावशाली निशानी है जिसके द्वारा हम नये जीवन में चलने हेतु बुलाये जाते हैं। संत पौलुस रोमियों के नाम अपने प्रेरितिक पत्र में कहते हैं, “क्या आप लोग यह नहीं जानते कि ईसा मसीह का जो बपतिस्मा हम सब को मिला है, वह उनकी मृत्यु का बपतिस्मा हैॽ हम उनकी मृत्यु का बपतिस्मा ग्रहण कर उनके साथ इसलिए दफनाये गये हैं कि जिस तरह मसीह पिता के सामर्थ्य से मृतकों में से जीव उठे हैं. उसी तरह हम भी एक नया जीवन जीयें।”(रोमि. 6.3-4)

बपतिस्मा में येसु ख्रीस्त के साथ तल्लीन होना हमें कलीसिया के शरीर का अंग बनाता है जो स्वयं येसु ख्रीस्त का शरीर है और इस भांति हम विश्व में उनके प्रेरितक कार्य के सहभागी होते हैं। जीवन का झरना जो बपतिस्मा संस्कार के द्वारा हमारे जीवन में प्रवाहित होता है येसु के इन शब्दों में हमारे लिए व्यक्त किया गया है, “मैं दाखलता और तुम डालियाँ हो, जो मुझ में रहता और मैं जिस में रहता हूँ वह अधिक फल देता है।” (यो.15.5) यह जीवन पवित्र आत्मा में बपतिस्मा प्राप्त करने वालों के लिए प्रवाहित होता और उन्हें येसु ख्रीस्त में एक शरीर बनता है। (1कुरि.12.13)

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि बपतिस्मा हमें येसु ख्रीस्त को अपने जीवन में और अपने को उनके जीवन सम्मिलित करते हुए जीवनयापन करते हैं, इस तरह हम अपनी परिस्थिति के अनुसार कलीसिया के साथ सहयोग करते हुए विश्व को परिवर्तित करने में हाथ बंटाते हैं। बपतिस्मा संस्कार को एक बार ग्रहण करना हमारे सम्पूर्ण जीवन को प्रकाशित करता है और हम अपने अनंत निवास स्वर्ग राज्य, येरुसलेम की ओर अग्रसर होते हैं। बपतिस्मा संस्कार हमारे विश्वास की यात्रा के बारे में कहता है जिसे हम दीक्षार्थी के रुप में देखते जो व्यस्क बपतिस्मा की मांग करता है, लेकिन हम बच्चों के बपतिस्मा को भी पाते हैं जो प्राचीन समय से प्रचलित है जहाँ माता-पिता के विश्वास के कारण बच्चों को बपतिस्मा दिया जाता है। बपतिस्मा हम सभों के लिए ईश्वर की ओर से मिलने वाला मुफ्त वरदान है लेकिन जैसा एक बीज के साथ होता है, यह उपहार हमारे विश्वास रुपी भूमि में जन्मता और फलता-फूलता है। संत पापा ने कहा कि बपतिस्मा की प्रतिज्ञाएं जिन्हें हम हर साल पास्का जागरण में दुहराते हैं हमारे प्रति दिन के जीवन में नवीकृत हो जिससे हम इसके द्वारा सही अर्थ में एक दूसरा ख्रीस्त बन सकें।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासी समुदाय का अभिवादन किया।

उन्होंने विशेष रुप से युवाओं, बुजुर्गों, बीमारों और नव विवाहितों की याद की। पास्का की घोषणा आप के दिलों में प्रज्जवलित होती रहे जिससे आप येसु ख्रीस्त की कृपा को अपने जीवन में  अनुभव करें और उनकी शिक्षा से जुड़े रहें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के साथ हे हमारे पिता प्रार्थना का पाठ किया और सबों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।


(Dilip Sanjay Ekka)

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अप्रैल और मई महीनों में संत पापा की धर्मविधि समारोहों की सूची

In Church on April 11, 2018 at 3:17 pm

वाटिकन सिटी,बुधवार 11 अप्रैल 2018 (रेई) :  वाटिकन प्रेस कार्यालय ने आगामी अप्रैल एवं मई महीनों में संत पापा फ्राँसिस के धर्मविधि अनुष्ठानों की जानकारी को प्रकाशित कर दिया है।

संत पापा फ्राँसिस की धर्मविधि अनुष्ठानों की व्यवस्था करने वाली समिति के संचालक मोनसिन्योर ग्वीदो मरिनी ने 11 अप्रैल को एक विज्ञाप्ति जारी कर संत पापा के कार्यक्रम की सूची प्रस्तुत की जिसके अनुसार, अप्रैल और मई महीने में संत पापा के कार्यक्रम इस प्रकार होंगे –

20 अप्रैल,शुक्रवार, मोलफेत्ता और अलेस्सानो का प्रेरितिक दौरा।

22 अप्रैल, पास्का का चौथा रविवार, संत पेत्रुस महागिरजाघर में, प्रातः 9.15 बजे पुरोहिताभिषेक ख्रीस्तयाग समारोह

01 मई, सोमवार, मई रोजरी के महीने की शुरुआत हेतु 5 बजे संध्या दिवीनो अमोरे तीर्थालय का दौरा

19 मई, शनिवार, 10 बजे कार्डिनल भवन मंडल में संत पापा संत प्रकरण हेतु प्रस्तावित नामों पर विचार करेंगे।

20 मई, पेंतेकोस्त रविवार, संत पेत्रुस महागिरजाघर में, प्रातः 10,00 बजे ख्रीस्तयाग समारोह का अनुष्ठान।


(Margaret Sumita Minj)

वैशाख उत्सव पर अंतरधार्मिक वार्ता हेतु गठित परमधर्मपीठीय सम्मेलन का संदेश

In Church on April 11, 2018 at 3:15 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 11 अप्रैल 2018 (रेई) : वैशाख उत्सव पर अंतरधार्मिक वार्ता हेतु गठित परमधर्मपीठीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल जॉन लूईस तौरान ने परमधर्मपीठ की ओर से सभी बौद्ध धर्मावलम्बियों को हार्दिक शुभकामनायें दी। यह उत्सव उनके परिवारों और पूरे विश्व में खुशी और शांति लाये।

कार्डिनल जॉन लूईस तौरान ने कहा हम इस वर्ष वर्तमान की आवश्यकता को देखते हुए भ्रष्टाचार रहित संस्कृति को बढावा देने पर विचार करना चाहते हैं। निजी लाभ के लिए पदों की शक्तियों के दुरुपयोग से जुड़े भ्रष्टाचार सार्वजनिक या निजी दोनों ही क्षेत्रों में इतना व्यापक बन गया है कि संयुक्त राष्ट्र ने 9 दिसंबर को इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस घोषित किया है। जैसा कि भ्रष्टाचार की घटना अधिक व्यापक हो जाती है, दुनिया भर में सरकारें, गैर-सरकारी संगठनें, मीडिया और नागरिक इस घिनौने अपराध से निपटने के लिए एक साथ मिल रहे हैं। धार्मिक नेताओं के रूप में, हमें भी वैधता और पारदर्शिता के साथ भ्रष्टाचार रहित संस्कृति को बढ़ावा देने में योगदान देना चाहिए।

संत पापा फ्राँसिस ने भी अपने फरवरी महीने की प्रार्थना में भ्रष्टाचार को अस्वीकार करने के लिए कहा था। “भ्रष्टाचार के पाप की निंदा करते हुए उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि दुनिया भर में भ्रष्टाचार राजनीतिज्ञों, व्यापारिक अधिकारियों और याजकों के बीच भी पाया जाता है। अंततः जो भ्रष्टाचार के लिए कीमत का भुगतान करते हैं, वे गरीब हैं।

येसु अपने अपने शिष्यों को स्मरण दिलाते हुए कहते हैं “जो तुम लोगों में बड़ा बनना चाहता है वह तुम्हारा सेवक बने।” (मत्ती 20:26), संत पापा जोर देकर कहते हैं,” केवल एक ही मार्ग है जो भ्रष्टाचार से हमें निकाल सकता है …. वह है सेवा। क्योंकि भ्रष्टाचार गर्व और अहंकार से आता है और सेवा नम्रता है। दूसरों की मदद करने वाला नम्र व्यक्ति है।

बौद्ध के रूप में, आप भ्रष्टाचार को मन की एक हानिकारक स्थिति के रूप में देखते हैं जो दुख का कारण बनता है और समाज को अस्वस्थ बनाने में योगदान देता है। आप तीन प्रमुख विषाक्त पदार्थों की पहचान करते हैं – लालच, घृणा, और भ्रम या अज्ञान – सामाजिक संकट के स्रोतों के रूप में व्यक्ति और समाज की भलाई के लिए इन्हें समाप्त किया जाना चाहिए। बौद्ध शिक्षाएं और अभ्यास भ्रष्टाचार को न केवल अस्वीकार करते हैं, बल्कि उन अस्वस्थ मन, इरादों, आदतों और उन लोगों के कार्यों को बदलने का प्रयास करते हैं जो भ्रष्ट हैं।

हमारा मानना है कि भ्रष्टाचार को मौन रहकर उत्तर नहीं दिया जा सकता है और वे अच्छे इरादे वाले विचार अपर्याप्त साबित होंगे जब तक कि वे लागू नहीं किए जाते हैं और ये भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए कार्यान्वयन आवश्यक है। हम बौद्ध और ख्रीस्तीय, अपने नैतिक शिक्षाओं में निहित हैं, हमें भ्रष्टाचार को रोकने के लिए अपने अंतर्निहित कारणों को समाप्त करके और भ्रष्टाचार को जड़ से निकालने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। इस प्रयास में, हमारा मुख्य योगदान हमारे अनुयायियों को नैतिक सत्यनिष्ठा में बढ़ने, निष्पक्षता और जिम्मेदारी की भावना को प्रोत्साहित करना होगा।

हम अपने परिवारों तथा सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संस्थानों में ईमानदारी व सत्यनिष्ठा का जीवन जीकर  भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से प्रतिबद्ध हों।

इन्हीं भावनाओं के साथ आपको पुनः वैशाख की आनंदमय मंगल कामनायें।

विदित हो कि बुद्ध पूर्णिमा वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इसे ‘बुद्ध जयंती’ के नाम से भी जाना जाता है। यह बौद्ध धर्म में आस्था रखने वालों का एक प्रमुख त्यौहार है। पूर्णिमा के दिन ही गौतम बुद्ध का स्वर्गारोहण समारोह भी मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान बुद्ध को ‘बुद्धत्व’ की प्राप्ति हुई थी। आज बौद्ध धर्म को मानने वाले इस दिन को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं।


(Margaret Sumita Minj)

संयुक्त राष्ट्र: परमधर्मपीठ द्वारा युद्ध में स्वचालित रोबोटों के उपयोग की निंदा

In Church on April 11, 2018 at 3:13 pm


जिनेवा, बुधवार 11 अप्रैल 2018 (रेई) : “स्वत: घातक हथियार युद्ध को और भी अमानवीय बनाते हैं, क्योंकि वे नैतिक विकल्पों में असमर्थ हैं।” यह बात महाधर्माध्यक्ष यूर्कोविच ने कही।”

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष इवान यूर्कोविच ने “लेथल स्वायत्त हथियार सिस्टम्स” पर सरकारी विशेषज्ञों के सामने अपने विचार रखते हुए कहा कि स्वत: घातक हथियारों, तथाकथित “किलर रोबोट” का इस्तेमाल – जो इंसान द्वारा दूर से नियंत्रित नहीं होता है, लेकिन पूर्व-निर्धारित एल्गोरिदम के आधार पर कार्य करता है – युद्ध को “और भी अमानवीय” बना देगा क्योंकि “कोई भी तकनीक स्वीकार्य होने के लिए व्यक्ति की सही अवधारणा के साथ सुसंगत होना चाहिए, यह कानून और नीति का पहला आधार है।”

नैतिक दुविधाओं के सामने अप्रभावी मशीनें

महाधर्माध्यक्ष यूर्कोविच ने कहा,”हर सशस्त्र हस्तक्षेप का सावधानीपूर्वक मुल्यांकन किया जाना चाहिए और हर बार इसे वैधता और इच्छित उद्देश्यों के अनुरूप सत्यापित करना आवश्यक है, जो कि नैतिक और कानूनी रूप से भी वैध होना चाहिए।” मशीनों को सौंपे जाने वाले ये कार्य तेजी से जटिल होते जा रहे हैं जो नैतिक दुविधाओं के सामने अप्रभावी हैं।”

व्यक्ति में भरोसा का अभाव

परमधर्मपीठ के प्रतिनिधि ने युद्ध के रोबोटीकरण और “अमानवीकरण” विषय पर एक कानूनी सहमति और नैतिक आधार बनाने के लिए, “मानवविज्ञान विरोधी सिद्धांत” के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए चर्चा करने को कहा। एक स्वत: हथियार एक नैतिक रूप से जिम्मेदार नहीं हो सकता है और इसके लिए प्रोग्रामिंग द्वारा निर्धारित नैतिक विकल्पों का चुनाव करने में असमर्थ है, उदाहरण के लिए, सैन्य सफलताओं को प्राप्त करने के लिए नागरिकों को मारने का निर्णय लेना।

विशेष रूप से, महाधर्माध्यक्ष यूर्कोविच ने रेखांकित किया कि मशीनों के साथ युद्ध को सौंपने का विचार मानव में विश्वास के अभाव को दिखाता है। “अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और शांति, वार्ता और सहयोग की संस्कृति के माध्यम से प्राप्त होती है, न कि हथियारों के माध्यम से।”


(Margaret Sumita Minj)

स्कूल बस दुर्घटना के शिकार बच्चों के प्रति भारतीय धर्माध्यक्षों की संवेदना

In Church on April 11, 2018 at 3:11 pm

नुरपुर, बुधवार 11 अप्रैल 2018 ( वीआर, रेई) : उत्तर भारत के हिमाचल प्रदेश जिला में एक स्कूल बस के गहरी खाई में गिर जाने से करीब 30 बच्चों की मौत हो गई।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षों ने हिमालय की तलहटी में स्कूल बस दुर्घटना के शिकार बच्चों के लिए अपना शोक प्रकट किया, जिसमें कम से कम 30 लोग मारे गए थे, ज्यादातर बच्चे थे।

यह घटना हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से करीब 325 किलो मीटर कांगड़ा जिले के नूरपूर में हुई। सोमवार को राम सिंह पठानिया मेमोरियल स्कूल की बस मलकवाल के पास करीब 60 मीटर गहरी खाई में गिर गई थी। बस में 40 विद्यार्थी सवार थे।

पुलिस की सूचनानुसार प्रारंभिक रिपोर्टों में बताया गया कि जब बस चालक ने घाटी के किनारे वाहन का नियंत्रण खो दिया और बस नीचे गहरी खाई पर गिरी।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षों की संवेदना

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीबीसीआई) ने इस त्रासदी पर अपनी संवेदना व्यक्त की है। सीबीसीआई के महासचिव धर्माध्यक्ष थेओदोर मस्करेन्हास ने वाटिकन न्यूज़ से बात की।

धर्माध्यक्षों की ओर से उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए “बहुत दुःख का दिन है।” उन्होंने कहा कि ज्यादातर बच्चे 10 वर्ष से कम उम्र के थे, उन्हें बड़ा करने की तमन्ना उनके माता पिता को थी।

धर्माध्यक्ष ने सभी परिवारों को संवेदना और निकटता व्यक्त की और प्रार्थना की कि ईश्वर इन बच्चों को अपनी बाहों में ले लें।”

धर्माध्यक्ष मस्करेंहास ने खेद प्रकट करते हुए कहा कि भारत में लगातार सड़क दुर्घटनाओं से कई लोगों की ज़िंदगी खतम हो जाती हैं। बहुधा सड़क सुरक्षा नियमों की उपेक्षा की जाती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि बच्चों को सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार कुछ करेगी।

धर्माध्यक्ष ने भारत में स्वास्थ्य सेवा की खराब स्थिति पर भी खेद प्रकट किया, क्योंकि हिमाचल प्रदेश में अपर्याप्त अस्पतालों के कारण कई घायल बच्चों को पास के राज्य पंजाब में ले जाना पड़ा।

प्रधान मंत्री का दुःख

सोमवार को, भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस त्रासदी पर अपना दुःख व्यक्त किया। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा था “हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में बस दुर्घटना के चलते अनेकों की मौत से मुझे बहुत दुःख हो रहा है। मेरी प्रार्थना और संवेदना उन लोगों के साथ है जिन्होंने दुर्घटना में अपने करीबी और प्रियजनों को खो दिया है।”

उन्होंने दुर्घटना में मारे गये लोगों के रिश्तेदारों के लिए 2 लाख रुपये और दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल लोगों के लिए 50,000 रुपये अनुग्रह की भी घोषणा की।

हादसे में 27 लोगों की जान गई है जिनमें 23 बच्चे, बस ड्राइवर, दो अध्यापक और एक अन्य महिला शामिल हैं। मरने वालों में खागड़ा गांव के 16 बच्चे थे।

सात बच्चों का पठानकोट के अस्पताल में और चार बच्चों का नूरपुर के अस्पताल में इलाज चल रहा है।


(Margaret Sumita Minj)

मैक्सिकन धर्माध्यक्षों ने अमेरिकी सरकार को याद दिलाया कि सीमा युद्ध क्षेत्र नहीं है

In Church on April 11, 2018 at 3:10 pm

वाटिकन रेडियो, बुधवार 11 अप्रैल 2018 ( वीआर, रेई) : इतिहास में पहली बार मैक्सिको के काथलिक धर्माध्यक्षों ने संयुक्त राज्य अमेरिका और मेक्सिको के नेताओं और सभी नागरिकों को सभी प्रवासियों की गरिमा के सम्मान के लिए निर्देश जारी किया है।

मैक्सिको का कहना है कि वह अमेरिका/मेक्सिको सीमा पर राष्ट्रीय रक्षक सैनिक भेजने के राष्ट्रपति ट्रम्प के फैसले के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ सहयोग के सभी तंत्रों की समीक्षा करेंगे। एक संक्षिप्त बयान में मैक्सिकन सरकार ने कहा कि राष्ट्रपति एनरिक पेना नीत्तो ने रविवार को मंत्रिमंडल की बैठक में मंत्रालय को निर्देश दिया था कि वे समीक्षा को पूरा करें।

मैक्सिकन काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा अमेरिका/ मैक्सिको सीमा संकट की निंदा करते हुए जारी पत्र के बारे वाटिकन रेडियो के जेम्स ब्लेर ने रिपोर्ट किया है। उन्होंने कहा कि पत्र में कानून के पालन में मानवीय भावना को ध्यान में रखते हुए कार्यवाही करने को कहा गया है।

मैक्सिकन काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा जारी पत्र इस तरह शुरू होता है: “अपनी गरिमा और अधिकारों के लिए घायल हुए हर प्रवासी के साथ, येसु मसीह को फिर से क्रूस पर चढ़ाया गया है!” प्रवासियों से निपटने के लिए बनाये गये नए कानूनों पर बहस जरुरी है: “मनुष्य की अतुलनीय गरिमा ही कानून का सही स्रोत है। प्रवासियों का क्रंदन हमारा क्रंदन है और  उनकी पीड़ा हमारी पीड़ा है।”

मैक्सिकन काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन पहले की और वर्तमान मैक्सिकन सरकारों को पर्याप्त विकास के अवसर न बनाने हेतु दोषी ठहराते हुए इस बात पर भी जोर देती है कि “प्रवासी लोग अपराधी नहीं हैं, लेकिन  कमजोर और असुरक्षित लोग हैं उन्हें भी व्यक्तिगत और सामुदायिक विकास के पूर्ण अधिकार हैं। मैक्सिको और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच की सीमा युद्ध क्षेत्र नहीं है!”


(Margaret Sumita Minj)

पवित्रता ही कलीसिया का सबसे आकर्षक चेहरा है, संत पापा फ्राँसिस

In Church on April 11, 2018 at 3:08 pm

वाटिकन सिटी,बुधवार 11 अप्रैल 2018 (रेई) : सन्त पापा फ्राँसिस ने पवित्रता विषय पर प्रेरितिक उदबोधन “गाउदेते एत एक्ज़ुलताते” अर्थात् ‘खुश हो और हर्ष मनाओ’ से संदेश लेते हुए दो ट्वीट प्रषित किया।

संदेश में उन्होंने लिखा,”‘खुश’ या ‘धन्य’ शब्द ‘पवित्र’ के लिए एक पर्याय बन गया है, क्योंकि ईश्वर पर विश्वास करने वाले अपने आप के अर्पित करते हुए, सच्ची खुशी प्राप्त करते हैं।”

कलीसिया में रहकर पवित्र जीवन और सच्ची खुशी का इज़हार करने वाले ही अपने साक्ष्य द्वारा दूसरों को आकर्षित करते हैं। अतः संत पापा ने अपने दूसरे संदेश में लिखा,“पवित्रता ही कलीसिया का सबसे आकर्षक चेहरा है।”


(Margaret Sumita Minj)

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