Vatican Radio HIndi

Archive for April 12th, 2018|Daily archive page

सच्चाई के मार्ग को कभी न त्यागें, संत पापा

In Church on April 12, 2018 at 3:23 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 12 अप्रैल 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में बृहस्पतिवार 12 अप्रैल को, ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा ने गौर किया कि प्रथम शताब्दी की अपेक्षा ख्रीस्तीय आज अधिक सताये जा रहे हैं, येसु पर विश्वास के कारण उन्हें जेल जाना पड़ रहा है और कई लोगों को मृत्यु के घाट उतारा जा रहा है।

उन्होंने प्रवचन में कहा, “ख्रीस्तीय साक्ष्य परेशान कर सकता है किन्तु सच्चाई का सौदा कभी नहीं करता, जैसा कि कई ख्रीस्तीय साक्ष्य देने के कारण, आज प्रथम शताब्दी से कहीं अधिक मौत और अत्याचार के शिकार हो रहे हैं।” उन्होंने कहा कि जो ख्रीस्तीय सच्चाई के साथ समझौता कर लेते हैं वे कमजोर हैं। अतः हमें येसु के साथ हमारे प्रथम मुलाकात की याद बनाये रखने हेतु कृपा मांगने की आवश्यकता है जो हमारे जीवन में परिवर्तन लाता है।

पास्का अवकाश के उपरांत पुनः आरम्भ किये अपने दैनिक मिस्सा प्रवचन में, संत पापा ने आज्ञापालन, साक्ष्य एवं ठोस आदि पास्का की तीन विशेषताओं पर प्रकाश डाला।

पास्का का आनन्द

संत पापा ने कहा कि 50 दिनों के पास्का का समय, ख्रीस्त के जी उठने के कारण शिष्यों के लिए “आनन्द का समय” था। यह एक सच्चा आनन्द था। वे इस बात को समझ गये कि उन्होंने क्यों प्रभु को देखा था किन्तु उनमें अब भी संदेह, डर एवं घबराहट की भावना थी कि किस तरह चीजें आगे बढ़ेंगी। वे सब कुछ नहीं समझ पाये थे किन्तु पवित्र आत्मा उतरने के बाद आनन्द, साहस में बदल गया। “पवित्र आत्मा ने उन्हें सब कुछ समझा दिया।”

ईश्वर की इच्छा पूरी करने में आज्ञापालन

शिष्यों को उपदेश देने और येसु की घोषणा करने से मना किया गया था किन्तु एक स्वर्गदूत द्वारा बंदीगृह से मुक्त किये जाने पर वे पुनः मंदिर लौट आये और वहाँ शिक्षा देने लगे। प्रेरित चरित से लिया गया पाठ बतलाता है कि उन्हें फिर महासभा के सामने पेश किया गया जहाँ महायाजक ने याद दिलाया कि उन्हें येसु का नाम लेकर प्रचार नहीं करने का कड़ा आदेश दिया गया था। इस पर पेत्रुस ने उत्तर दिया, मनुष्यों की अपेक्षा ईश्वर की आज्ञा का पालन कहीं अधिक उचित है।

संत पापा ने “आज्ञापालन” शब्द को रेखांकित किया क्योंकि आज्ञापालन का जीवन शिष्यों की विशेषता थी जिन्होंने पवित्र आत्मा को ग्रहण किया था। येसु जो अंत तक आज्ञाकारी बने रहे उनके मार्ग का अनुसरण करने हेतु आज्ञा पालन। आज्ञापालन ईश्वर की इच्छा पूरी करने से आता है। यह एक ऐसा रास्ता है जिसको येसु ने हमारे लिए खोल दिया है इसलिए ख्रीस्तीय ईश्वर की आज्ञाओं का पालन करते हैं।

पहली संसारिक वस्तु है धन

संत पापा ने कहा कि महायाजक जो वास्तव में आदेश देना चाहते थे उन्होंने सब कुछ पर नियंत्रण कर लिया था। धन पहला है जिसका मालिक शैतान है अतः येसु कहते हैं कि तुम दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकते।

अत्याचार के शिकार ख्रीस्तीय

शिष्यों की दूसरी विशेषता है साक्ष्य देना। संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तीय साक्ष्य चुनौतीपूर्ण होता है अतः हम दुनिया के साथ समझौता करने की कोशिश करते हैं किन्तु ख्रीस्तीय साक्ष्य समझौता का रास्ता नहीं जानता, वह धीरज को जानता है जो उन लोगों का साथ देता है जो हमारे विचार, विश्वास, सहिष्णुता एवं साथ को भले ही नहीं समझते किन्तु सच्चाई को कभी नहीं बेचते।

संत पापा ने कहा कि आज्ञापालन एवं साक्ष्य दोनों ही बहुत चुनौतीपूर्ण हैं। शुरू से लेकर आज तक अत्याचार जारी है। हम अफ्रीका एवं मध्यपूर्व में अत्याचार के शिकार लोगों की याद करें जहां पहले से कहीं अधिक सतावट हो रहा है।

ठोस ˸ कमजोर ख्रीस्तीय नहीं

शिष्यों की तीसरी विशेषता है कि वे ठोस चीजों को बतलाते हैं। जैसा कि शिष्यों ने येसु को देखा एवं उनका स्पर्श किया, सुसमाचार का प्रचार करने के लिए हम भी येसु का स्पर्श करें।

संत पापा ने कहा कि पाप, समझौता एवं भय द्वारा हम येसु के साथ पहली मुलाकात को अक्सर भूल जाते हैं। हम याद करते हैं किन्तु वह कमजोर और सताही होता है। अतः हम पवित्र आत्मा से दृढ़ता की कृपा की याचना करें। येसु मेरे जीवन से, मेरे हृदय से गुजरते हैं, पवित्र आत्मा ने मेरे जीवन में प्रवेश किया है किन्तु मैं उनके साथ पहली मुलाकात को भूल जाता हूँ।

पास्का के आनन्द की याचना का समय

संत पापा ने विश्वासियों को प्रोत्साहन दिया कि वे पवित्र आत्मा से पास्का के आनन्द की याचना करें जो आज्ञापलन, साक्ष्य एवं दृढ़ता से आता है।


(Usha Tirkey)

Advertisements

संत पापा ने गलतियों के लिए क्षमा की याचना की

In Church on April 12, 2018 at 3:18 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 12 अप्रैल 2018 (वाटिकन न्यूज)˸ संत पापा फ्राँसिस ने चिली के धर्माध्यक्षों को लिखे एक महत्वपूर्ण पत्र में, धर्माध्यक्षों का आह्वान किया है कि वे याजकों के यौन दुराचार मामलों के मूल्यांकन एवं उन्हें समझने में हुई गलतियों और पापों के कारण खुले घावों की चंगाई में अपना सहयोग दें।

संत पापा ने पत्र में कहा है कि यौन दुराचार के शिकार लोगों को सुनने के लिए भेजे गये दो खास प्रतिनिधियों के रिपोर्ट को सावधानी पूर्वक पढ़ने के बाद वे इस पत्र को लिखने के लिए प्रेरित हुए।

माल्टा के महाधर्माध्यक्ष चार्ल्स शिक्लूना तथा फादर जोरदी बेरतोमेयो फारनोस को उन लोगों का साक्ष्य सुनने चिली भेजा गया था जो याजकों द्वारा यौन दुराचार के शिकार हुए हैं। इस मामले की जाँच हेतु धर्माध्यक्ष जॉन बार्रोस को जिम्मेदारी दिये जाने पर संत पापा फ्राँसिस को सार्वजनिक रूप से आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

अपने पत्र में संत पापा ने इस बात की पुष्टि दी है कि संयुक्त साक्ष्य में कई लोगों ने बिना किसी मिलावट के स्पष्ट रूप से आपबीती बतलायी है जो उनके लिए दुःख एवं लज्जा का कारण है।

क्षमा याचना

संत पापा ने अपनी जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए कहा है कि “मैंने परिस्थिति का मूल्यांकन करने एवं उसे समझने में गंभीर गलती की है, खासकर, सच्ची एवं संतुलित जानकारी के अभाव के कारण। उन्होंने उन सभी से क्षमा याचना की है जिनको उन्होंने ठोकर दिया तथा कहा है कि उनसे क्षमा मांगने हेतु वे उन लोगों से मुलाकात करेंगे जिनसे साक्षात्कार किया गया है।

धर्माध्यक्षों को रोम में निमंत्रण

गंभीर परिस्थितियों के मद्देनजर संत पापा ने धर्माध्यक्षों के सहयोग की याचना की है ताकि चिली में कलंक पर सुधार करते हुए, जितना हो सके न्याय की स्थापना करते हुए कलीसियाई समुदाय को पुनः स्थापित किया जा सके।

संत पापा ने अपने पत्र में कहा है कि वे चिली के धर्माध्यक्षों को विचार-विमर्श हेतु रोम बुलाना चाहते हैं। अपने पूरे पत्र में संत पापा ने प्रार्थना की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि वे धर्माध्यक्षों के साथ उस दृढ़ विश्वास को बांटना चाहते हैं कि वर्तमान समस्याएँ भी उनके लिए एक अवसर है कि हम कलीसिया में विश्वास को पुनःस्थापित कर सकें, विश्वास जो हमारी गलतियों एवं पापों के कारण तोड़ दिया गया है तथा उन घावों को चंगा करने जिनसे समस्त चिली समाज में लगातार रक्तस्राव हो रहा है।


(Usha Tirkey)

अल्जीरिया में विमान हादसा के शिकार लोगों के प्रति संत पापा की संवेदना

In Church on April 12, 2018 at 3:16 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 12 अप्रैल 18 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने अल्जीरिया में हुए सैनिक विमान हादसा के शिकार लोगों के प्रति गहन संवेदना व्यक्त की।

बीबीसी के अनुसार बुधवार 11 अप्रैल को राजधानी अल्जीयर्स के पास बौफ़ारिक मिलिट्री एयरपोर्ट से प्लेन के उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद एक भीषण विमान हादसा हुआ जिसमें 257 लोग मारे गए हैं।

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन ने संत पापा की ओर से अल्जीरिया के महाधर्माध्यक्ष पौल देसफारगेस एस. आई. को एक संदेश प्रेषित कर कहा, “संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार सुबह को बड़े दुःख के साथ अल्जीरिया में विमान दुर्घटना की खबर सुनी। वे उन परिवारों के दर्द के साथ तथा हादसा से प्रभावित एवं पूरी अल्जीरिया के साथ प्रार्थना में सहभागी हैं।”

कार्डिनल ने लिखा कि संत पापा मृत्यु के शिकार लोगों के लिए प्रार्थना करते हैं कि ईश्वर उनकी आत्मा को अनन्त शांति प्रदान करे, घायलों को सांत्वाना दे एवं उन लोगों की सहायता करे जो राहत कार्य में लगे हैं।

संत पापा ने समस्त अल्जीरिया वासियों एवं वहाँ की स्थानीय कलीसिया के प्रति अपना आध्यात्मिक सामीप्य प्रदान करते हुए, उनपर पवित्र आत्मा की प्रचुर कृपा एवं सर्वोच्च ईश्वर की सांत्वना की याचना की।

चार साल पहले अल्जीरिया में सेना के लोगों और उनके परिवारवालों को ले जा रहा एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसमें 77 लोगों की मौत हुई थी।


(Usha Tirkey)

प्रार्थना के बिना पवित्रता सम्भव नहीं

In Church on April 12, 2018 at 3:14 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 12 अप्रैल 18 (रेई)˸ संत पापा ने कहा कि प्रार्थना के बिना पवित्रता सम्भव नहीं है।

12 अप्रैल को एक ट्वीट प्रेषित कर, संत पापा ने प्रार्थना की आवश्यकता पर ध्यान आकृष्ट किया।

उन्होंने ट्वीट संदेश में लिखा, “संत गण प्रार्थना की भावना तथा ईश्वर के साथ संयुक्त होने की आवश्यकता के द्वारा विशिष्ठ हैं। प्रार्थना के बिना पवित्रता नहीं है।”


(Usha Tirkey)

शांति निर्माण एवं मानव प्रतिष्ठा को प्रोत्साहन में धर्मसंघियों की भूमिका

In Church on April 12, 2018 at 3:12 pm

रोम, बृहस्पतिवार, 12 अप्रैल 18 (रेई)˸ वाटिकन के लिए अमरीका के राजदूत ने बुधवार को एक सेमिनार का आयोजन किया, जहाँ युद्ध क्षेत्रों में सेवारत महिला धर्मसंघियों ने अपना अनुभव साझा किया।

रोम में आयोजित इस सेमिनार में महिला धर्मसमाजियों के कार्यों पर प्रकाश डाला गया जो युद्ध के कारण अत्यन्त जोखिम भरे एवं दुर्गम क्षेत्रों में अपनी सेवाएँ दे रही हैं। इस आयोजन को धर्मसंघ की सर्वोच्चाधिकारियों के विश्वसंघ, दक्षिणी सूडान के प्रति एकात्मता तथा वाटिकन के लिए अमरीका के राजदूत के संयुक्त पहल पर आयोजित किया गया था।

यूआईएसजी के मुख्यालय में आयोजित सेमिनार में इताली धर्मबहन मरिया एलेना बेरिनी को अमरीकी सरकार द्वारा 2018 के लिए अंतरराष्ट्रीय साहसी महिला के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

वाटिकन विदेश सचिव महाधर्माध्यक्ष पौल गल्लाघर ने भी सेमिनार को सम्बोधित किया जिसमें उन्होंने मानव तस्करी से जूझने में महिला धर्मसमाजियों की भूमिका पर प्रकाश डाला।

दक्षिणी सूडान के प्रति एकात्मता के कार्यकारी अधिकारी सिस्टर यूदिथ पेरेईरा ने युद्ध क्षेत्रों में सेवारत धर्मबहनों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि दक्षिणी सूडान के लोग धर्मबहनों के अति सामीप्य का अनुभव करते हैं क्योंकि उनपर भी हमला किया गया है, कुछ लोगों के साथ बलत्कार किया गया है और कुछ लोगों को मार डाला गया है अथवा उन्हें लूट लिया गया है अतः लोग उनसे बहुत अधिक नजदीकी महसूस करते हैं।

महिला धर्मसमाजियों की भूमिका

सिस्टर यूदिथ ने कहा कि महिला धर्मसमाजी कई वयस्क एवं युवाओं के लिए मातृत्व की भूमिका अदा करते हैं जिन्होंने देश में संघर्ष के अलावा कुछ नहीं देखा है। उन्होंने कहा, “हम उन्हें शिक्षण संस्थान प्रदान करते हैं जहाँ वे सब कुछ को सही ढंग से पा सकें, जी सकें, बढ़ सकें एवं बदलाव ला सकें।”

शांति के निर्माण और मानव गरिमा को बढ़ावा देना

सिस्टर यूदिथ ने इस बात पर भी जोर दिया कि महिला धर्मसमाजी न केवल संघर्ष पूर्ण क्षेत्रों में कार्यरत हैं किन्तु हर क्षेत्र में शांति निर्माण एवं मानव प्रतिष्ठा को प्रोत्साहन देती हैं।

कदखाने की अपनी प्रेरिताई का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने गौर किया कि किस तरह धर्मबहनों की उपस्थिति कैदियों की प्रतिष्ठा की रक्षा करती है, साथ ही साथ, गार्ड एवं पुलिस लोगों के लिए भी यह अपनी मानवता को पहचानने का अवसर देती है।


(Usha Tirkey)

%d bloggers like this: