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विल्लानोवा विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों से संत पापा की मुलाकात

In Church on April 14, 2018 at 2:35 pm


वाटिकन सिटी, शनिवार, 14 अप्रैल 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 14 अप्रैल को वाटिकन स्थित क्लेमेनटीन सभागार में, फिलाडेलफिया के विल्लानोवा विश्वविद्यालय के अध्यक्ष एवं न्यासी से मुलाकात की।

विल्लानोवा विश्वविद्यालय की स्थापना सन् 1842 ई. में ऑर्डर ऑफ संत अगुस्तीन द्वारा हुई है। विश्वविद्यालय के अध्यक्ष एवं न्यासी इन दिनों रोम में एक सभा में भाग ले रहे हैं।

संत पापा ने उन्हें सम्बोधित कर कहा, “महान अगस्तीनियन परम्परा के उतराधिकारी होने के नाते दिव्य ज्ञान की खोज से प्रेरित, आपके विश्व विद्यालय की स्थापना, नई पीढ़ी के विद्यार्थियों के लिए काथलिक परम्परा को सुरक्षित रखने एवं उसकी समृद्धि को हस्तांतरिक करने के लिए की गयी है जो युवा अगस्टीन की भांति जीवन के सच्चे अर्थ और मूल्य की खोज करते हैं। इस दर्शन के प्रति निष्ठा में, विश्व विद्यालय एक अनुसंधान एवं अध्ययन करने वाले समुदाय के रूप में, आज हमारे विश्व में, युग परिवर्तन के कारण उठने वाली जटिल नैतिक एवं संस्कृतिक चुनौतियों का सामना करे।”

संत पापा ने आशा व्यक्त की कि विल्लानोवा विश्वविद्यालय अपने हर दृष्टिकोण एवं मिशन में बौद्धिक, आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों को प्रदान करने के प्रयास को बनाये रखेगा जो युवाओं को समाज के भविष्य निर्माण करने वाले विचार-विमर्शों में विवेक एवं उत्तरदायित्व पूर्वक भाग लेने में मदद देगा।

संत पापा ने उनकी जिम्मेदारियों की याद दिलाते हुए कहा, “शैक्षिक कार्य का एक अनिवार्य पहलू है मानव परिवार तथा गंभीर असमानता एवं अन्याय द्वारा चिन्हित विश्व का सामना करने के लिए, ठोस एकात्मता हेतु प्रतिबद्धता के लिए एक सार्वभौमिक एकता के “काथलिक” दर्शन का विकास करना। सच्चाई, न्याय तथा हर स्तर पर मानव प्रतिष्ठा की रक्षा करने हेतु विश्वविद्यालय स्वतः वार्ता एवं मुलाकात की कार्यशाला बनने के लिए बुलाये जाते हैं।”

संत पापा ने कहा कि काथलिक संस्थानों की जिम्मेदारी और बड़ी है जो मानव परिवार को ईश्वर में परिपूर्णता प्राप्त करने हेतु सच्चे एवं समग्र विकास के कलीसिया के मिशन में सहयोग देते हैं।

संत पापा ने संत अगुस्तीन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने ईश्वर में विश्राम पाने की मानव हृदय की लालसा को सबसे अधिक अनुभव किया था जो येसु ख्रीस्त में हमारे जीवन की गूढ़ सच्चाई एवं अंतिम लक्ष्य को प्रकट करते हैं।

उन्होंने शुभकामनाएं दीं कि वे इन दिनों के चिंतन, विचार-विमर्श और मुलाकात द्वारा, स्वतंत्र करने वाली सच्चाई की सेवा के विश्वविद्यालय के मिशन में समर्पण को सुदृढ़ कर सकें।

संत पापा ने विल्लानोवा विश्वविद्यालय परिवार के सभी लोगों के लिए संत अगुस्तीन एवं संत मोनिका की मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना करते हुए, पुनर्जीवित प्रभु के आनन्द एवं शांति की कामना की तथा उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

विल्लानोवा विश्वविद्यालय की स्थापना सन् 1842 ई. में ऑर्डर ऑफ संत अगुस्तीन द्वारा हुई है।


(Usha Tirkey)

पवित्रता के लिए निमंत्रण

In Church on April 14, 2018 at 2:33 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 14 अप्रैल 2018 (रेई)˸ संत महान होते हैं। वे ईश्वर से संयुक्त रहकर दुनिया में उनकी कृपा के माध्यम बनते हैं। काथलिक कलीसिया में अनेक संत हैं जिन्होंने अपने साधारण जीवन में ही पवित्रता की सीधी पर चढ़कर कलीसिया को बड़ा योगदान दिया है।

संत पापा फ्राँसिस ने 14 अप्रैल को एक ट्वीट प्रेषित कर हमारे दैनिक जीवन को पवित्रता के साथ जीने का उपाय बतलाया। उन्होंने संदेश में लिखा, “हम अपने जीवन को प्रेम के साथ जीने एवं जो कुछ करते हैं उन सब में साक्ष्य देने के द्वारा पवित्र बनने के लिए बुलाये गये हैं।”


(Usha Tirkey)

संत प्रकरण के लिए गठित धर्मसंघ के सदस्य की नियुक्ति

In Church on April 14, 2018 at 2:30 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 14 अप्रैल 2018 ( रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 14 अप्रैल को संत प्रकरण के लिए गठित धर्मसंघ के सदस्यों के रुप में काथलिक धर्मशिक्षा के धर्मसंध के अध्यक्ष कार्डिनल जुसेप्पे वेरसाल्दी, चिविता कस्तेलाना के धर्माध्यक्ष मोन्सिन्योर रोमानो रोस्सी, सेस्सा अरुनका के धर्माध्यक्ष ओराजियो फ्राँचेस्को पिज्जा और रोम के सहायक धरमाध्यक्ष दानिएले लिबानोरी को नियुक्त किया।

वर्तमान में संत प्रकरण के लिए गठित धर्मसंघ के अध्यक्ष कार्डिनल अंजेलो आमातो एसडीबी है। धर्मसंध के सदस्यों में 17 कार्डिनल, 8 महाधर्माध्यक्ष और 8 धर्माध्यक्ष हैं इन नये सदस्यों को मिलाकर कुल सदस्यों की संख्या 37 हो जाएगी।


(Margaret Sumita Minj)

 

मसीह हमें सच्ची आजादी देते हैं, संत पापा

In Church on April 14, 2018 at 2:28 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 14 अप्रैल 2018 ( वीआर,रेई) : हम ख्रीस्तीयों के लिए सच्ची आज़ादी का मतलब है कि हमारे जीवन में ईश्वर को स्थान देना और येसु का अनुसरण करने के लिए मन और दिल को पुरी तरह से खुला रखना। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार को अपने प्रेरितिक भवन संत मार्था के प्रार्थनालय में प्रातःकालीन युखारिस्तीय समारोह के दौरान अपने प्रवचन में कही।

संत पापा ने दैनिक पाठ के आधार पर फरीसी गमालिएल, प्रेरित संत पेत्रुस और योहन तथा येसु का उदाहरण देते हुए कहा कि सच्ची स्वतंत्रता का अर्थ है हमारे जीवन में ईश्वर के लिए स्थान बनाना और उसी का अनुसरण करना। येसु ख्रीस्त ने क्रूस पर मुक्तिदायी मृत्यु द्वारा हमें सच्ची आजादी दी। हम ख्रीस्तीय पास्का के इस काल में इसकी घोषणा करते हैं।

फरीसी गमालिएल

संत पापा ने कहा कि फरीसी गमालिएल नियम कानून का ज्ञाता था और उसने सदूकियों को येसु के चेलों पेत्रुस और योहन को स्वतंत्र करने के लिए मनाया। गमालिएल एक स्वतंत्र विचारों वाला व्यक्ति था। उसने अपने सहयोगियों को इस बात से आश्वस्त कराया कि ख्रीस्तीयों के इस आंदोलन को वे समय के भरोसे छोड़ दें।

संत पापा ने कहा कि गमालिएल ख्रीस्तीय नहीं था वह येसु को मसीह और मुक्तिदाता के रुप में नहीं पहचानता था पर वह स्वतंत्र विचारों वाला व्यक्ति था। वह ईश्वर के कार्यों में दखल देना नहीं चाहता था।

संत पापा ने कहा कि पिलातुस ने भी अच्छी तरह तर्क किया था और जान गया था कि येसु निर्दोष थे। लेकिन पिलातुस स्वतंत्र विचारों वाला नहीं था। पद और महत्वाकांक्षा ने उसे दास बना दिया और उसमें सच्चाई का सामना करने की हिम्मत नहीं थी।

प्रेरित पेत्रुस और योहन

संत पापा ने कहा कि संत पेत्रुस और योहन स्वतंत्रता के दूसरे उदाहरण हैं। उन्होंने रोगियों को चंगा किया और इसीलिए वे महासभा में सदूकियों के सामने लाये गये। बेकसूर होने पर भी उन्हें कोड़ों की मार पड़ी और उन्हें छोड़ दिया गया। वे खुश थे कि येसु के नाम के कारण वे अपमानित होने के योग्य समझे गये। येसु का अनुसरण करने में उन्हें जो खुशी मिली, वे उसे अपने तक ही सीमित नहीं रखे और उनकी खुशी में अधिक से अधिक लोग शरीक होने लगे। इस तरह उनकी संख्या बढ़ती चली गई।

सच्ची आजादी देने वाले येसु

संत पापा ने कहा कि मरुभूमि में येसु ने रोटियों का चमत्कार कर लोगों की भूख मिटाई तो उन्होंने येसु को अपना राजा बनाना चाहा। परंतु येसु उनकी मनसा जानकर दूर पहाड़ों पर चले गये। वे लोगों की वाहवाही से खुद को मुर्ख नहीं बनाये। वे स्वतंत्र थे और इसीलिए वे पिता ईश्वर की इच्छा पूरी कर पाये। येसु ने क्रूस मरण स्वीकार किया। “येसु स्वतंत्रता के सबसे बड़े उदाहरण है।”

संत पापा ने खुद से प्रश्न करने को कहा कि क्या हम सचमुच में स्वतंत्र हैं? या क्या हम अपनी आकांक्षाओं, धन-सम्पति, भोग-विलास के दास हैं? प्रवचन के अंत में संत पापा ने सच्ची आजादी देने वाले येसु का अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया।


(Margaret Sumita Minj)

जनसंख्या और विकास पर आयोग के 51वें सत्र की समाप्ति पर महाधर्माध्यक्ष औजा का वक्तव्य

In Church on April 14, 2018 at 2:26 pm

न्यूयॉर्क, शनिवार, 14 अप्रैल 2018 (रेई): न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक, वाटिकन के महाधर्माध्यक्ष बेरनारदीतो औज़ा ने विश्व के नेताओं से कहा कि परमधर्मपीठ इस वर्ष के विषय ‘स्थायी शहरों, मानव गतिशीलता और अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन’ का हार्दिक समर्थन करती है।

13 अप्रैल को जनसंख्या एवं विकास आयोग के 51वें सत्र की समाप्ति पर इस वर्ष के विषय ‘स्थायी शहरों, मानव गतिशीलता और अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन’ पर महाधर्माध्यक्ष औज़ा ने वाटिकन के मजबूत समर्थन को रेखांकित किया। संत पापा फ्राँसिस ने कहा है,“प्रवासियों के प्रति एकजुटता ठोस रूप से उनके आगमन से प्रस्थान और वापसी के लिए प्रस्थान तक होनी चाहिए। अच्छे हृदय वाले पुरुष और महिलाओं के सामने प्रावासन को लेकर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है कि वे अपनी क्षमता अनुसार उदारता, तत्परता, ज्ञान और दूरदर्शिता के साथ समकालीन प्रवासन की कई चुनौतियों का सामना करें। मानव अवस्था के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से जोरदार समर्थन प्रवासियों को वैश्विक शांति और एक स्थायी भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल एक ठोस परिणाम प्राप्त करने में विफल होने के कारण निराश है। पूरी प्रक्रिया में प्रतिनिधिमंडलों की रचनात्मक भागीदारी को देखते हुए, हमें उम्मीद थी कि एक मजबूत और ठोस परिणाम प्राप्त करना होगा जो प्रवासियों पर ग्लोबल कॉम्पैक्ट के पूर्वाग्रह बिना, प्रवासियों की स्थिति और उन शहरों में सुधार के लिए महत्वपूर्ण योगदान देगा। मौलिक मानवाधिकारों को उनके प्रवासिक स्थिति की परवाह किए बिना, सभी को अवश्य दिया जाना चाहिए और हमें खेद है कि यह आयोग इस संबंध में परिणाम देने में सक्षम नहीं था। हमारे दृष्टिकोण से, एक परिणाम प्राप्त करने में विफलता पूरे प्रक्रिया में प्रतिनिधिमंडलों द्वारा स्पष्ट रूप से रेडलाइन की निरंतर उपेक्षा का परिणाम था। इस आयोग की सफलता आम सहमति के मौलिक सिद्धांत पर लौटने और संप्रभु राज्यों की स्थिति के प्रति सम्मान करने में हैं, खासकर संवेदनशील मुद्दों के संबंध में।

महाधर्माध्यक्ष औज़ा ने एक बार फिर अध्यक्ष और परिणाम प्राप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता के लिए भाग लेने वाले प्रतिनिधियों का धन्यवाद देते हुए कहा,“यद्यपि हमने इस वर्ष हमारे लक्ष्य को हासिल नहीं किया पर हम इस आयोग के लिए प्रामाणिक सहमति की पूर्ति और भविष्य के सफल परिणामों के लिए वापसी की उम्मीद करते हैं।”


(Margaret Sumita Minj)

झारखंड की नई कोटा नीति में संदिग्ध राजनीति

In Church on April 14, 2018 at 2:24 pm

झारखंड, शनिवार, 14 अप्रैल 2018 (ऊकान)˸ भारत की झारखंड सरकार द्वारा आदिवासी और दलित लोगों के लिए नौकरी के कोटा को कमजोर करने की एक योजना को राजनीतिक रूप देने का प्रयास की जा रही है।

हिंदुत्ववादी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक पैनल ने कुछ जिलों में निम्न श्रेणी की सरकारी नौकरियों की उपलब्धता का विस्तार करने का प्रस्ताव रखा है।

ऐसी नौकरी लोगों को 10 साल की अवधि के लिए दी जाएगी, भले ही उनके पास आदिवासी या निम्न जाति की पृष्ठभूमि न हो।

हजारीबाग धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष माननीय आनन्द जोजो ने 10 अप्रैल को ऊका समाचार से कहा कि यह अन्य मतदाताओं को जीतते हुए, आदिवासियों और दलित समुदायों की उन्नति को रोकने का एक “सामरिक” कदम है।

सरकारी पैनल के सदस्य राज सिन्हा ने ऊका समाचार को बतलाया कि राज्य के अनेक लोग, आदिवासियों और दलितों के समान अथवा उनसे भी खराब स्थिति में जीते हैं, जिन्हें पूर्व में अछूतों के रूप में जाना जाता था।

झारखंड राज्य का निर्माण 18 साल पहले किया गया था जिसका मुख्य मकसद था  आदिवासियों को आगे बढ़ाना। कई नौकरियां उनके लिए और साथ ही दलितों के लिए आरक्षित थीं।

सरकार ने 2016 में राज्य के 24 जिलों में से 13 में आदिवासी समुदायों और दलितों के लिए सभी निम्न श्रेणी की नौकरियां आरक्षित कीं, जहां वे बहुमत का गठन करते हैं। आरक्षित नौकरियों में पुलिस कांस्टेबल, टाइपिस्ट, टेलिफोन ऑपरेटर और सड़क सफाई कर्मचारी शामिल हैं।

हालांकि ये प्रावधान पैनल के मसौदे की सिफारिशों के तहत बने रहने के लिए हैं, 11 अन्य जिलों में निचली श्रेणी की नौकरियां स्थानीय निवासियों के लिए पूरी तरह से आरक्षित रहेंगी।

सिन्हा ने कहा कि इन नौकरियों में अन्य जिलों के लोगों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 17 अप्रैल को मुख्यमंत्री रघुबर दास को सिफारिशों का एक अंतिम सेट पेश किया जाएगा।

राज्य की कुल जनसंख्या 33 मिलियन है जिसमें से 26 प्रतिशत या 9 मिलियन आदिवासी हैं जबकि दलितों की संख्या लगभग 11 प्रतिशत है तथा अन्य निचली जातियों की कुल आबादी 40 प्रतिशत है।

जमशेदपुर के धर्माध्यक्ष माननीय फेलिक्स टोप्पो ने कहा कि नौकरी में आरक्षण का इस्तेमाल, स्थानीय गरीब गैर-आदिवासियों एवं गैर-दलितों की वास्तिवक सहायता की अपेक्षा “राजनीतिक खेल योजना” के रूप में किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भाजपा आदिवासी ईसाई समुदायों और अन्य धर्मों के सदस्यों को विभाजित कर, खुद को हिंदूओं के लिए चैंपियन के रूप में प्रस्तुत करने में असफल रही है।

कलीसिया और आदिवासी समुदायों ने सफलता पूर्वक राज्य सरकार का विरोध किया है जो उनके भूमि के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास कर रही थी।

राज्य में 1.5 मिलियन ईसाई हैं, उनमें से आधी संख्या काथलिकों की है

लगभग सभी ईसाई आदिवासी या दलित पृष्ठभूमि से आते हैं और ख्रीस्तीय  मिशनरियों द्वारा दी जाने वाली शिक्षा के कारण प्रतियोगिता की परीक्षाओं में सफल होते हैं।

ख्रीस्तीयों पर अक्सर आदिवासियों एवं दलितों के बीच प्रलोभन या अनुचित दबाव का प्रयोग कर धर्मांतरण द्वारा राज्य कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया जाता है।


(Usha Tirkey)

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