Vatican Radio HIndi

Archive for April 18th, 2018|Daily archive page

बपतिस्मा संस्कार पर संत पापा की धर्मशिक्षा

In Church on April 18, 2018 at 3:39 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 18 अप्रैल 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को बपतिस्मा संस्कार पर अपनी धर्मशिक्षा देते हुए कहा, प्रिय भाई एवं बहनों, सुप्रभात।

हम पास्का की अवधि में बपतिस्मा संस्कार पर अपनी धर्मशिक्षा को जारी रखते हैं। बपतिस्मा की धर्मविधि द्वारा हमें बपतिस्मा के अर्थ की जानकारी प्राप्त होती है। इस धर्मविधि के दौरान उपयोग किये जाने वाले शब्दों और क्रिया कलापों पर गौर करना हमे इस संस्कार से मिलने वाली कृपा और इसमें निहित उत्तदायित्वों को समझने में सहायता करता है। हमें इसे अपने रोज दिन के जीवन में खोजने की जरुरत है। रविवारीय मिस्सा बलिदान के शुरु में पवित्र जल का छिडकाव हमें बपतिस्मा की याद दिलाती है साथ ही हम इसे पास्का जागरण के दौरान बपतिस्मा की प्रतिज्ञाओं को दुहराते हुए नवीकृत करते हैं। वास्तव में बपतिस्मा संस्कार की धर्मविधि में होने वाली आध्यात्मिक आयामों की क्रियाएं बपतिस्मा प्राप्त व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन में सुचारू रुप से चलती है। यह प्रक्रिया का प्रारंभ है जो व्यक्ति को कलीसिया में येसु ख्रीस्त के साथ संयुक्त रहने में मदद करता है। इस भांति ख्रीस्तीय जीवन की ओर हमारा अभिमुख होना हमें अपने बपतिस्मा के दौरान मिले कृपादानों को और अच्छी तरह से समझने में मदद करता है और इस तरह हम अपने जीवन की वर्तमान परिस्थिति में जीवन के उत्तरदायित्व का निर्वाहन उचित रुप में करते हैं।

संत पापा ने कहा कि धर्मविधि के प्रथम चरण में सर्वप्रथम दीक्षार्थी का नाम लेकर पूरे समुदाय का स्वागत किया जाता है क्योंकि नाम व्यक्ति के पहचान को इंगित करता है। उन्होंने कहा कि जब हम किसी को अपना परिचय देते तो हम उसे अपना नाम बतलाते हैं जिससे हमारे बीच अनजान की स्थिति दूर होती है। नाम के बिना हम अपने अधिकारों, कर्तव्यों और अपने आप में अज्ञात रहते हैं। ईश्वर हममें से प्रत्येक को नाम लेकर बुलाते हैं। वे हमें अपने जीवन काल में हरएक जन को विशेष और व्यक्तिगत रुप से अपना प्रेम दिखलाते हैं। बपतिस्मा संस्कार हमारे व्यक्तिगत बुलाहट को एक ख्रीस्तीय के रुप में जीने हेतु प्रज्जवलित करता है जो हमारे सम्पूर्ण जीवन में विकसित होता है। यह हमारी ओर से व्यक्तिगत प्रतिउत्तर की माँग करता है। वास्तव में ख्रीस्तीय जीवन बुलाहटों की एक श्रृखंला में समाविष्ट हमारा उत्तर है। ईश्वर हमारा नाम लेकर विभिन्न रुपों में हमें सदैव बुलाते हैं जिससे हम येसु ख्रीस्त के साथ अपने को संयुक्त कर सकें। संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि यही कारण है कि हमारा नाम हमारे लिए महत्वपूर्ण है। माता-पिता शिशु के जन्म से पहले ही नामों का चुनाव करते हैं।

उन्होंने कहा कि निश्चित रुप से ख्रीस्तीय जीवन का उपहार हमारे लिए ऊपर से आता है।(यो.3.3-8) हम विश्वास को खरीद नहीं सकते लेकिन हम इसके बारे में पूछ सकते हैं और इसे एक उपहार स्वरुप ग्रहण कर सकते हैं। वास्तव में, “बपतिस्मा विश्वास का एक संस्कार है जिसके द्वारा पवित्र आत्मा व्यक्तियों को अपनी कृपा से आलोकित करते जो उन्हें ख्रीस्त के सुसमाचार में विश्वास करने को मदद करता है।” दीक्षार्थियों का दीक्षांत और बपतिस्मा संस्कार हेतु माता-पिता की तैयारी, धर्मविधि के दौरान ईश वचन के श्रवण द्वारा उनमें विश्वास की एक सच्ची भावना को जागृत करती है।

यदि यह व्यस्कों का दीक्षांत है तो इस परिस्थिति में हम यह देखते हैं कि वे कलीसिया की ओर से अपने लिए एक उपहार की माँग करते हैं वहीं बालकों के बपतिस्मा में माता-पिता और दादा-दादी बच्चों के प्रतिनिधि होते हैं। उनसे वार्ता हमें इस बात को स्पष्ट करती है कि वे अपने बच्चों के लिए क्या मांग करते हैं और कलीसिया उन्हें स्वीकारती है। “विश्वास की यह निशानी, धर्मविधि के अनुष्ठाता और माता-पिता के द्वारा बच्चों के माथे में क्रूस के चिन्ह द्वारा अंकित की जाती है।” “दीक्षार्थी पर अंकित क्रूस का चिन्ह ख्रीस्त की मोहर को दिखलाता है। यह हमारा ध्यान इस ओर इंगित करता है कि येसु ख्रीस्त ने अपने क्रूस द्वारा हमारे लिए मुक्ति की कृपा लाई है।”

संत पापा ने कहा कि क्रूस हमारे लिए यह तथ्य को दर्शता है कि हमारी सोच, वचन, नजरें और कार्य क्रूस के चिन्ह से प्रभावित हैं अर्थात हम येसु ख्रीस्त के प्रेम से प्रज्वलित हैं। बच्चों में क्रूस का चिन्ह उनके मांथे में अंकित किया जाता है। व्यस्क दीक्षार्थियों को यह निशानी इन शब्दों से द्वारा दी जाती है, “क्रूस के चिन्ह को अपने कानों में धारण किये जिससे आप ईश वचनों को सुन सकें।” “इसे अपने आंखों में धारण करें जिससे आप ईश्वर के दिव्य मुखमंडल को देख सकें।”  “आप इसे मुख में ग्रहण करें जिससे आप उनके वचनों का प्रतिउत्तर दें सकें।” “इसे अपने हृदय में रखें क्योंकि वे विश्वास के कारण आप के दिल में निवास करते हैं।” “आप इसे अपने कंधों में धारण करें जिससे आप येसु ख्रीस्त के नम्र जुए को संभाल सकें।” संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तियों के रुप में हमारे मांथे में क्रूस का चिन्ह अंकित है जो पास्का की निशानी है। (प्रका. 14.1. 22.4) हम सुबह उठ कर क्रूस का चिन्ह बनाते हैं, भोजन के पहले, खतरे की घड़ी, बुराई से सुरक्षित रहने हेतु, रात को सोने जानने के पहले, जो हमें यह बतलाता है कि हम किन से जुड़े हुए हैं और हम क्या बनना चाहते हैं। हम गिरजा में प्रवेश करते हुए इसे अपने मांथे में अंकित करते हैं। संत पापा ने कहा कि हम अपने घरों में छोटे पात्र में पवित्र जल को रखें और जब हम घर बाहर निकले और घर में प्रवेश करें तो अपने को क्रूस के चिन्ह से अंकित करें क्योंकि यह हमें इस बात की याद दिलाती है कि हमने येसु में बपतिस्मा संस्कार ग्रहण किया है।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासी समुदाय का अभिवादन किया।

उन्होंने विशेष रुप से युवाओं, बुजुर्गों, बीमारों और नव विवाहितों की याद की। उन्होंने कहा कि हम पुनर्जीवित प्रभु येसु की ओर अपनी नजरें फेरे जो हमारे बीच में निवास करते हैं। वे हमारे जीवन के सच्चे मालिक हैं उनके सामीप्य में हम अपने जीवन में शांति और दिलासा प्राप्त करते हैं और उनकी शिक्षा हमें अपने रोज दिन के जीवन को पवित्रता में जीने हेतु प्रेरित करती है।

इतना कहने के बाद संत पापा ने सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के साथ हे हमारे पिता प्रार्थना का पाठ किया और सबों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

 


(Dilip Sanjay Ekka)

Advertisements

संत पापा ने विंसेन्ट लाम्बर्ट और इवान्स के लिए अपील की

In Church on April 18, 2018 at 3:35 pm

वाटिकन सिटी,बुधवार 18 अप्रैल 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने 18 अप्रैल को बुधवारीय आमसभा के पूर्व इग्लैंड के बीमार बच्चे अल्फी इवान के पिता थोमस से अपने प्रेरितिक आवास संत मार्था में मुलाकात की।

संत पापा ने संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में बुधवारीय आमदर्शन समारोह के दौरान उपस्थित तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को ध्यान फिर से फ्राँस के विंसेनट लाम्बर्ट, इंगलैंड के नन्हे अल्फी इवान की ओर ले जाते हुए उनके जीवन रक्षा की अपील को पुनः दोहराते हुए कहा कि “जीवन शुरु से लेकर अपने प्राकृतिक अंत तक के एकमात्र स्वामी केवल ईश्वर हैं और हमारा कर्तव्य बनता है कि हम हर संभव जीवन की रक्षा करें।”

संत पापा ने कहा,“ आइये, हम मौन होकर सभी व्यक्तियों के जीवन विशेष रूप से हमारे दोनों भाइयों के जीवन के सम्मान हेतु प्रार्थना करें।”

फ्राँस के विंसेनट लाम्बर्ट का मस्तिष्क गंभीर रुप क्षतिग्रस्त है और इंग्लैंड के शिशु अल्फ़ी इवांस जो एक अपर्याप्त प्रजनन रोग से ग्रसित है। ये दोनों रोगी जीवन समर्थन यंत्र पर हैं और उनके परिवारों को यह सुनिश्चित करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ना पड़ रहा है कि वे आवश्यक बुनियादी चिकित्सा देखभाल प्राप्त करते रहें।

गत रविवार 15 अप्रैल को भी स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ करने से पहले संत पापा ने कुछ बीमार लोगों की याद की एवं उनके लिए प्रार्थना करते हुए कहा, “हम फ्राँस के विंसेनट लाम्बर्ट, इंगलैंड के नन्हे अल्फीय एवान्स के लिए प्रार्थना करें जो लम्बे समय से गंभीर बीमारी की स्थिति में हैं तथा प्राथमिक आवश्यकताओं के लिए चिकित्सा पर निर्भर करते हैं। उनकी स्थिति अत्यन्त नाजूक, दर्द भरी एवं जटिल होती है। हम सभी रोगियों के लिए प्रार्थना करते हैं कि उनकी प्रतिष्ठा का सम्मान हो तथा उनकी स्थिति के अनुसार, परिवार वालों की सहमति एवं अन्य चिकित्सा कर्मियों के सहयोग से जीवन के प्रति सम्मान के साथ उनकी देखभाल की जाए।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा ने समग्र मानव विकास के अनुमोदन हेतु आर्थिक नेताओं से आग्रह किया

In Church on April 18, 2018 at 3:34 pm

वाटिकन सिटी,बुधवार 18 अप्रैल 2018 (रेई) : संत पापा ने वॉशिंगटन डीसी में शनिवार की विश्व बैंक की वसंत कालीन सभा को ध्यान देते हुए प्रतिभागियों से आग्रह किया कि उन नीतियों को आगे बढ़ायें जो आर्थिक समावेश और विश्व के सबसे गरीब लोगों के जीवन को बढ़ावा देने के लिए समर्थन करते हैं।

संत पापा फ्राँसिस ने आशा व्यक्त की कि आगामी विश्व बैंक की बैठक में प्रतिष्ठित अभिन्न विकास के सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे जो “मानव गरिमा का सम्मान करता है।”

संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में बुधवारीय आमदर्शन समारोह के दौरान संत पापा फ्राँसिस ने वाशिंगटन में शनिवार से होने वाले विश्व बैंक के वसंत कालीन बैठक का उल्लेख किया और प्रतिभागियों को “गरीबों के जीवन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वित्तीय समावेशन के प्रयास” को प्रोत्साहित किया।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा और विश्व बैंक समूह वसंत कालीन बैठक में वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर चर्चा के लिए केंद्रीय बैंकों के संचालकों, वित्त और विकास मंत्रियों, निजी क्षेत्र के अधिकारियों और अन्य विशेषज्ञों को इकट्ठा करती है।

इस साल की वसंत कालीन बैठकें वाशिंगटन, डीसी में 16 से 22 अप्रैल तक चलेंगी।


(Margaret Sumita Minj)

क्विलोन धर्मप्रांत के लिए नये धर्माध्यक्ष की नियुक्ति

In Church on April 18, 2018 at 3:32 pm

वाटिकन सिटी,बुधवार 18 अप्रैल 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 18 अप्रैल को भारत के क्विलोन धर्मप्रांतीय पुरोहित फादर पॉल अंतोनी मुल्लासेरी को धर्मप्रांत का नया धर्माध्यक्ष नियुक्त किया। वर्तमान में वे क्विलोन धर्मप्रांत के प्रतिधर्माध्यक्ष के रुप में अपनी सेवा प्रदान कर रहे हैं।

संत पापा फ्राँसिस ने क्विलोन धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष स्टानली रोमन के स्तीफापत्र को स्वीकार किया है।

नव नियुक्त धर्माध्यक्ष पॉल अंतोनी मुल्लासेरी का जन्म 15 जनवरी 1960 को क्विलोन धर्मप्रांत के कैथाकोडी में हुआ था। उन्होंने क्विलोन में संत रफाएल के लघु सेमिनरी में प्रवेश किया। ट्रीनिटी लिसेयुम में दर्शनशास्त्र और संत जोसेफ पोंटीफिकल सेमिनरी, आलवे में धर्मशास्त्र की पढ़ाई की। उन्होंने रोम के परमधर्मपीठीय उर्बान विश्वविद्यालय में कलीसिया के कानून सहिंता अनुच्छेद में एक डॉक्ट्रेट की अपाधि हासिल की। 22 दिसंबर 1984 को क्विलोन धर्मप्रांत के लिए उनका पुरोहिताभिषेक हुआ।

पुरोहिताभिषेक के बाद उन्होंने निम्नलिखित पदों पर अपनी सेवा दी:

1985-1986: कुंबलाम में संत माइकेल पल्ली के सहायक पल्ली पुरोहित;

1986-1987: वड़कुमठला में तीन राजाओं का पल्ली के पल्ली पुरोहित

1987-1988: संत जोसेफ पल्ली के पल्ली पुरोहित

1988-1990: बाईबिल और धर्मशिक्षा केन्द्र के उप निदेशक और क्विलोन के संत रफाएल माइनर सेमिनरी में प्रीफेक्ट

1990-1994: रोम में कलीसिया की कानून संहिता अनुच्छेद का अध्ययन

1995-2002: बालक येसु महागिरजाघर क्विलोन के पल्ली पुरोहित एवं 1995 के बाद से धर्मप्रांतीय कोर्ट के न्यायाधीश

1997-2006: धर्मप्रांत के कुलपति

2002-2004: तांगस्सेरी में होली क्रॉस पल्ली के पल्लीपुरोहित

2004-2006: संत रफाएल माइनर सेमिनरी क्विलोन के रेक्टर

2006-2012: प्रेरितिक देखभाल के लिए प्रतिधर्माध्यक्ष

2013-2017: क्विलोन के न्यायिक प्रतिधर्माध्यक्ष

2014-2017: क्विलोन में सेंट रफाएल सेमिनरी के आध्यात्मिक निदेशक

2017 के बाद से क्विलोन धर्मप्रांत के प्रतिधर्माध्यक्ष

 


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा ने इतालवी कारितास सम्मेलन को भेजा संदेश

In Church on April 18, 2018 at 3:30 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 18 अप्रैल 2018 (वीआर,रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने प्रतिभागियों को समाज के हासिये पर जीवन यापन करने वालों के लिए ‘करुणा के प्रेरित’ बनने का आग्रह किया।

संत पापा फ्राँसिस ने इटली के धर्मप्रांतीय कारितास दल के 40 वें राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए शुभकामनाएं दी और उन्हें सबसे गरीब और हाशिए पर जीने वाले लोगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बढ़ाने का आग्रह किया।

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलिन द्वारा भेजे गये पत्र में संत पापा ने इटालियन कारितास नेटवर्क को दो अध्यक्षों को याद किया जिन्होंने कलीसिया को एक विरासत के साथ समृद्ध किया गया जो आज भी “दान और दया के प्रामाणिक फल” प्रदान करते हैं।

अपने संदेश में संत पापा ने कहा कि अलबानो तेरमे में 16 से 19 अप्रैल तक चलने वाले सम्मेलन से वे आशा करते हैं कि सभी प्रतिभागी समाज के हासिये पर जीवन यापन करने वालों के लिए ‘करुणा के प्रेरित’ बनें।

अक्टूबर में धर्माध्यक्षों के आगामी धर्मसभा को ध्यान में रखते हुए, सम्मेलन में चर्चा का विषय है, ‘युवा, विश्वास और बुलाहटीय आत्मपरख’ ।


(Margaret Sumita Minj)

बूथ घपलेबाजी के कारण कार्डिनल टोप्पो वोट न दे सके

In Church on April 18, 2018 at 3:28 pm

राँची, बुधवार 18  अप्रैल 2018 (मैटर्स इंडिया) : झारखंड में काथलिक कलीसिया के प्रमुख कार्डिनल तेलेस्फोर पी टोप्पो, राज्य की राजधानी राँची में आयोजित नगर निगम चुनावों में अपने मत का इस्तेमाल किए बिना वापस लौटे।

द टेलीग्राफ अख़बार ने रिपोर्ट किया कि 16 अप्रैल को मतदाता सूची में गलतियाँ, इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों में गड़बड़ी, फर्जी मतदान और छिटपुट झड़प भी देखे गया।

वार्ड न.7 में रहने वाले कार्डिनल पी. टोप्पो ने कामिल बुल्के पथ के अपने निवास के करीब संत अलोसियुस हाई स्कूल में हमेशा अपना वोट डालते थे। जब वे बूथ परिसर में  अपना वोट डालने गये, तो उन्हें मतदाता सूची में उनका नाम नहीं मिला। “सीमा-निर्धारण के बाद लगता है, कार्डिनल का नाम अन्य बूथ मतदाता सूची में डाल दिया गया है, जिसकी वजह से उन्हें अपना नाम नहीं मिल सका और वहाँ उनका मार्गदर्शन करने वाला कोई भी नहीं था।” कार्डिनल पी. टोप्पो के सचिव आर.ए. टोप्पो ने कहा।

रांची नगर निगम के वार्डों के सीमा-निर्धारण में मतदाताओं और उनके नामित बूथों में फेरबदल किया गया था, इसके परिणाम स्वरूप मतदान में नकारात्मक असर पड़ा।

विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जो अब वार्ड न. 26 की बजाय वार्ड न. 25 के निवासी हैं, ने 30 मिनट तक की खोज के बाद हरमू में कल्याण विकास समिति भवन में अपना नया बूथ ढूंढ़ा था।

हेमंत ने कहा “मेरा पुराना बूथ हरमू में संत फ्रांसिस स्कूल में था और मुझे परिवर्तन के बारे में सूचित नहीं किया गया था। क्या ऐसा चुनाव किया जाता है? यह पूरी तरह से कुप्रबंधन है। ”

झामुमो नेता हेमंत ने कहा कि सीमा-निर्धारण के बाद, सरकार को ताजा मतदाता सूचियों को परिचालित किया जाना चाहिए और लोगों को अपने नए वार्डों और बूथों के बारे में जानने के लिए एक विशेष अभियान आयोजित किया जाना चाहिए।

राज्य चुनाव आयुक्त एन.एन. पांडे ने मतदान के दिन “सीमांकन असुविधाओं” को स्वीकार कर लिया और कहा कि पैनल को भविष्य में इसे रोकने के लिए एक तंत्र विकसित करना होगा। “चुनाव काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा। “34 शहरी स्थानीय केद्रों ने एक साथ मिलकर 65.15 प्रतिशत मत हासिल की।  2013 के बाद से दो प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।” पांडे ने कहा।


(Margaret Sumita Minj)

शांति बनाने और संघर्ष निवारण में महिलाओं की भूमिका, महाधर्माध्यक्ष औजा

In Church on April 18, 2018 at 3:27 pm

न्यूयॉर्क, बुधवार 18 अप्रैल 2018 (वीआर,रेई) : संयुक्त राष्ट्र में वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक ने कहा कि संघर्ष में यौन हिंसा को रोकने के लिए महिलाओं को सभी शांति निर्धारण कार्यों में सहभागी बनाना चाहिए।

महिलाओं की आवाज़ें संघर्ष की रोकथाम, शांति-निर्धारण और संघर्ष के बाद के सभी कार्यों में एकीकृत होनी चाहिए। यह ‘महिलाएँ, शांति और सुरक्षा’ विषय पर सुरक्षा परिषद की बहस के दौरान सोमवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक  महाधर्माध्यक्ष बेरनार्दितो औजा का संदेश था।

संघर्ष में यौन हिंसा के उन्मूलन पर चर्चा करते हुए महाधर्माध्यक्ष बेरनार्दितो ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और सुरक्षा में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को सुविधाजनक बनाने के लिए एक मजबूत ढांचा विकसित किया गया है।

लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि अक्सर, युद्ध में और संघर्ष के बाद आज भी, महिलाओं की यौन हिंसा से पीड़ित होना जारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंसा से बचे लोगों को समर्थन मिलनी चाहिए और सरकारों को इस तरह के अपराधों के अपराधियों पर मुकदमा चलाने का ठोस कदम उठाना चाहिए।

कार्रवाई के तीन क्षेत्रों की बात करते हुए, वाटिकन प्रतिनिधि ने कहा कि अधिक संसाधनों को संघर्ष की रोकथाम के लिए उपलब्ध करना चाहिए, साथ ही यह सुनिश्चित करना कि महिलाएँ इस प्रक्रिया में पूरी तरह से भाग लेने में सक्षम हैं।

दूसरी बात, उन्होंने कहा कि यौन हिंसा की रोकथाम और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा सभी शांति अभियानों और कार्यवाई का एक अभिन्न अंग होना चाहिए।

तीसरी बात कि संघर्ष की स्थिति में महिलाओं के खिलाफ हिंसा, जो अक्सर अराजक, कुख्यात और खतरनाक होते हैं, को रोकने के लिए कदम उठाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुदायों को, संघर्ष के बाद देशों में शिक्षा, सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए के सहारा और समर्थन देना चाहिए।

महाधर्माध्यक्ष औजा ने कहा कि काथलिक कलीसिया में महिलाओं और लड़कियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्रदान करने का एक लंबा इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने बेथलहम विश्वविद्यालय जैसे काथलिक-संचालित संस्थानों में अधिकांश छात्रों को जारी रखा है, जहां लगभग 80 प्रतिशत छात्राएँ फिलीस्तीनी युवतियाँ हैं

महाधर्माध्यक्ष ने निष्कर्ष में कहा कि महिलाओं के निवेश और कौशल बिना, न ही संघर्षों के कारणों की व्यापक समझ और न ही उन्हें समाप्त करने के लिए प्रभावी समाधान, कभी भी हासिल किया जा सकेगा। जाएगा।


(Margaret Sumita Minj)

एक ख्रीस्तीय हर किसी का भाई या बहन है, संत पापा

In Church on April 18, 2018 at 3:26 pm

वाटिकन सिटी,बुधवार 18 अप्रैल 2018 (रेई) : एक ख्रीस्तीय बपतिस्मा संस्कार ग्रहण कर विश्व व्यापी कलीसिया का एक सदस्य बन जाता है और येसु ख्रीस्त में सभी भाई और बहन बन जाते हैं। संत पापा फ्राँसिस ने ट्वीट प्रेषित कर ख्रीस्तीय बुलाहट पर प्रकाश डाला।

संदेश में उन्होंने लिखा, “हर किसी का भाई या बहन बनना एक ख्रीस्तीय की बुलाहट है। विशेषकर जो गरीब हैं या वे दुश्मन ही क्यों न हों।”

क्रूस पर टंगे येसु ने अपने दुशमनों को भी माफ कर दिया और उनके लिए प्रार्थना की।

येसु के बताये मार्ग पर चलने वाले स्तेफन को जब लोग पत्थर मार रहे थे तो उसने घुटने टेककर उनके लिए प्रार्थना की और कहा,“ प्रभु, यह पाप इन पर मत लगा” और यह कहकर उसने प्राण त्याग दिये।(प्रेरित-चरित 7, 59-60)


(Margaret Sumita Minj)

%d bloggers like this: