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सुसमाचार प्रचार, पवित्र आत्मा का कार्य, संत पापा

In Church on April 19, 2018 at 3:58 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 19 अप्रैल 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में बृहस्पतिवार 19 अप्रैल को, ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने पवित्र आत्मा के कार्यों पर प्रकाश डाला जो ख्रीस्तीयों को सुसमाचार प्रचार हेतु प्रेरित करते हैं।

प्रवचन में संत पापा ने याद दिलाया कि हर ख्रीस्तीय का एक कर्तव्य एवं मिशन है, सुसमाचार प्रचार करना। उठना, करीब आना एवं वास्तविक परिस्थिति में आरम्भ करना, ये तीन कुँजियाँ हैं जो सुसमाचार प्रचार को आगे ले चलती हैं।

अत्याचार की हवा ईश वचन बोती है

संत पापा ने कहा कि “अत्याचार की हवा” जिसको आरम्भिक ख्रीस्तीयों ने अनुभव किया था, उन्हें येरूसालेम से बाहर यूदा एवं समारिया के दूसरे हिस्सों में ले गयी, ठीक उसी तरह जिस तरह पौधे के बीजों को हवा बिखेरती एवं दूसरी जगहों पर बो देती है। कलीसिया में भी यही हुआ वे वचन के बीज के साथ कई जगहों पर चले गये तथा उसे वहाँ बोया। अत्याचार की हवा से शिष्यों ने सुसमाचार का प्रचार किया, प्रभु इसी तरह सुसमाचार का प्रचार करते हैं और हम से भी यही मांग करते हैं।

उठो और जाओ

संत पापा ने कहा सुसमाचार का प्रचार करना धर्मांतरण नहीं है। सच्चा सुसमाचार प्रचार पवित्र आत्मा का कार्य है। यह आत्मा ही है जो रहस्यात्मक तरीके से हमारा मार्गदर्शन करता है कि हम कहाँ जायें तथा येसु के नाम पर किन्हें सुसमाचार सुनायें। ईश्वर के दूत ने फिलिप से कहा “उठिए, येरूसालेम से गाजा जाने वाले मार्ग पर दक्षिण की ओर जाइये।”

ईश्वर के दूत द्वारा फिलिप को कहे गये शब्दों की व्याख्या करते हुए संत पापा ने कहा, आराम कुर्सी पर सुसमाचार प्रचार नहीं होता। यह हमेशा चलयमान है। संत पापा ने उन सभी मिशनरियों की याद की जिन्होंने सुदूर क्षेत्रों में सुसमाचार का प्रचार करने के लिए अपना सब कुछ छोड़ दिया।

वास्तविक परिस्थिति का सामना करने के लिए उसके करीब आना

संत पापा ने कहा कि सुसमाचार प्रचार हेतु सिद्धातों से आरम्भ करने की अपेक्षा उस परिस्थिति में घुसने की आवश्यकता है। इसका उदाहरण संत पापा ने फिलिप के सुसमाचार प्रचार को दिया जिसने इथोपियाई खोजे को सुसमाचार सुनाया।

उन्होंने कहा, “सुसमाचार प्रचार सैद्धांतिक नहीं है बल्कि व्यक्ति पर निर्भर करता है। इसका शुरूआती विन्दु परिस्थिति है न कि सिद्धांत। फिलिप ने येसु का प्रचार किया तथा आत्मा ने उन्हें बपतिस्मा देने हेतु प्रेरित किया। अतः हमें उस दूरी तक जाना चाहिए जहाँ तक काम करना पड़े, यही सुसमाचार प्रचार है।”


(Usha Tirkey)

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बेनेडिक्टाईन कॉनफेडेरेशन के सदस्यों से संत पापा की मुलाकात

In Church on April 19, 2018 at 3:56 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 19 अप्रैल 2018 (रेई)˸ “इस युग में जब लोग इतने व्यस्त हैं कि उनके पास ईश्वर की आवाज को सुनने का समय ही नहीं है, आपका मठ नख़लिस्तान के समान बन गया है जहाँ हर युग, हर पृष्ठभूमि, हर संस्कृति एवं धर्म के स्त्री एवं पुरूष एकांत की सुन्दरता को खोजते तथा अपने आपको सृष्टि के साथ सामंजस्य स्थापित करने की कोशिश करते हैं एवं ईश्वर को अपने जीवन अर्पित करते हैं।” यह बात संत पापा फ्राँसिस ने 19 अप्रैल को वाटिकन स्थित क्लेमेंटीन सभागार में बेनेडिक्टाईन कॉनफेडेरेशन के 400 सदस्यों से मुलाकात करते हुए कही, जो धर्मसमाज की स्थापना की 125वीं वर्षगाँठ मना रहे हैं।

इस अवसर पर संत पापा ने बेनेडिक्टाई कॉफेडेरेशन द्वारा कलीसिया को दिये गये सभी योगदानों के लिए धन्यवाद दिया तथा संत पापा लेओ 13वें की याद की जिन्होंने सन् 1893 में रोम में अध्ययन एवं प्रार्थना हेतु एक केंद्र की स्थापना, विभिन्न बेनेडिक्टाईन धर्मसमाजों को एक साथ लाने के मकसद से किया था।

संत पापा ने कहा, “हम ईश्वर को इस प्रेरणा के लिए धन्यवाद देते हैं क्योंकि जिसने विश्व के सभी बेनेडिक्टाई धर्मसमाजों के सदस्यों को प्रेरित किया कि वे संत पेत्रुस के उत्ताधिकारी के साथ एवं आपस में, एकता की गहरी भावना के साथ जी सकें।”

बेनेडिक्टाई आध्यात्मिकता में नवीनीकरण हुआ जिसका आदर्शवाक्य है “ओरा एत लवोरा एत लेजे” (प्रार्थना, कार्य, अध्ययन)।

उन्होंने कहा, “चिंतन पूर्ण जीवन में ईश्वर बहुधा अनापेक्षित तरीके से अपनी उपस्थिति का एहसास कराते हैं। ईश्वर के वचनों पर चिंतन द्वारा हम उनकी आवाज को सुनने के लिए बुलाये जाते हैं ताकि हम आज्ञापालन को लगातार एवं आनन्द पूर्वक जी सकें। प्रार्थना हमारे हृदय में ईश्वर के अनोखे वरदानों को स्वीकार करने के लिए हमें सदा तत्पर बनाये रखता है। वह उस भावना को नवीकृत करने देता है जो हमें अपने दैनिक कार्यों द्वारा ईश्वर की प्रज्ञा के वरदानों को समुदाय में एवं जो लोग ईश्वर की खोज हेतु मठ आते हैं अथवा स्कूल एवं कॉलेजों में अध्ययन करते हैं उनके बीच बांटने हेतु आगे ले चलता है।

संत पापा ने उन्हें संत बेनेडिक्ट की याद दिलाते हुए कहा कि वे प्रार्थना में अपने आपको पूर्ण रूप से खाली करें ताकि हमेशा जागरूक रहते हुए, उन्हें सुन कर, विनम्रता पूर्वक उनका अनुसरण करने के लिए सदा तत्पर रह सकें। उन्होंने उन्हें व्यक्तिगत तथा समुदाय में पुनर्जीवित ख्रीस्त के साथ मुलाकात करने की सलाह दी।

संत पापा ने उनके कारिज्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बेनेडिक्टाई संघ का एक कारिज्म है स्वागत करना जो नवीन सुसमाचार प्रचार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उन्हें उन लोगों में ख्रीस्त का स्वागत करने का अवसर प्रदान करता है जो ईश्वर की खोज में उनके पास आते तथा आध्यात्मिक वरदान प्राप्त करते हैं।

संत पापा ने संघ द्वारा ख्रीस्तीय एकता एवं अंतरधार्मिक वार्ता के कार्यों की सराहना करते हुए कलीसिया के लिए इसके प्रति उनके समर्पण को बनाये रखने का प्रोत्साहन दिया। उन्होंने शिक्षा एवं प्रशिक्षण के माध्यम से रोम तथा विश्व के विभिन्न हिस्सों में अपनी सेवा देने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।

संत पापा को उम्मीद है कि बेनेडिक्टाई कॉनफेडेरेशन की जयन्ती, ईश्वर तथा उनकी प्रज्ञा की खोज करने का एक सुन्दर अवसर प्रदान करेगा।


(Usha Tirkey)

आज से तेरह साल पहले संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें बने कलीसिया के परमाध्यक्ष

In Church on April 19, 2018 at 3:54 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 19 मई 2018 (वाटिकन न्यूज)˸ ससम्मान सेवा निवृत संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें की काथलिक कलीसिया के परमाध्यक्ष के रूप में चुनाव के 13 साल पूरे हुए।

संत पापा जॉन पौल द्वितीय के निधन के बाद 19 अप्रैल 2005 को वे नये परमाध्यक्ष चुने गये थे। उनका बपतिस्मा नाम जोसेफ रतज़िगर है जिसके स्थान पर उन्होंने अपना नाम बेनेडिक्ट सोलहवें रखा।

19 अप्रैल 2005 को संत पेत्रुस महागिरजाघर का प्राँगण विश्वासियों से भरा था जिन्हें इंतजार था कि संत पापा जॉन पौल द्वितीय जिन्होंने 26 साल, 5 महीना एवं 17 दिन तक कलीसिया का नेतृत्व किया, अब उनके बाद इस कलीसिया के नेतृत्व का बागडोर कौन संभालेगा।

शाम करीब 5.56 मिनट पर सिस्टीन चैपल से सफेद धुआँ दिखाई पड़ा जहाँ कार्डिनल मंडल, संत पेत्रुस के उत्ताराधिकारी का चुनाव दो दिनों से कॉनक्लेव में भाग लेकर कर रहे थे।

कार्डिनल जोसेफ रतज़िंगर उस समय विश्वास के सिद्धांत हेतु गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के अध्यक्ष थे। कलीसिया के परमाध्यक्ष चुने जाने के बाद उन्होंने 27 अप्रैल 2005 को अपने प्रथम आमदर्शन समारोह के दौरान, संत पापा बेनेडिक्ट पंद्रवें के साहस की सराहना करते हुए उनके नाम को अपनाने का कारण, युद्ध के समय शांति के प्रति उनका समर्पण बतलाया। साथ ही साथ, उन्होंने यूरोप के संरक्षक नोर्चा के संत बेनेडिक्ट के नाम पर अपना नाम बेनेडिक्ट सोलहवें रखने की बात कही।

अपने पहले भाषण में उन्होंने अपने आपको, “प्रभु की दाखबारी में काम करने वाला एक साधारण एवं दीन मजदूर बतलाया था।” उन्होंने कहा था कि उन्हें प्रभु पर पूर्ण भरोसा है कि वे इस आयोग्य मध्यस्थ द्वारा अपना कार्य करेंगे। अंत में उन्होंने विश्वासियों से प्रार्थना की अपील की थी।


(Usha Tirkey)

‘डिजिटल युग में नयी नीति एवं नई जीवन शैली’ पर सम्मेलन

In Church on April 19, 2018 at 3:53 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 19 अप्रैल 2018 (एशियान्यूज़)˸ संत पापा जॉन पौल द्वितीय द्वारा स्थापित “चेंतेसिमुस अन्नुस प्रो पोंतिफिचे फाऊँडेशन” अपनी स्थापना का 25वाँ वर्षगाँठ,  24 से 26 मई तक “डिजिटल युग में नयी नीतियों एवं जीवन शैली” विषय पर वाटिकन में सम्मेलन के साथ मनायेगा।

सम्मेलन में तीन विषयों पर प्रकाश डाला जाएगा, पहला, नौकरी की अनिश्चितताएँ झेलता परिवार एवं डिजिटल संस्कृति की क्रांति, दूसरा,एक स्थायी खाद्य श्रृंखला की ओर˸ फेंकने की संस्कृति के खिलाफ उत्तरदायित्व एवं तीसरा, मानवीय कार्य, समावेशी रोजगार।

सम्मेलन का समापन कुस्तुनतुनिया के ग्रीक ऑर्थोडोक्स धर्मगुरू बारथोलोमियो के सम्बोधन से होगा जो “सार्वजनिक हित के लिए एक आम ख्रीस्तीय एजेंदा” पर विचार पेश करेंगे। सम्मेलन के अंत में संत पापा फ्राँसिस के साथ एक व्यक्तिगत मुलाकात का कार्यक्रम भी शामिल है।

डबलिन के महाधर्माध्यक्ष डियारमुड मार्टिन ने कहा, “निष्पक्षता के साथ विकास को बढ़ाने और बनाए रखने की चुनौती सिर्फ नैतिकतावाद के लिए एक चुनौती नहीं है। यह आर्थशास्त्रियों एवं नीति निर्माताओं का कर्तव्य है कि वे इसका विकास करें एवं आर्थिक विकास के नये नमूनों का परिक्षण करें जो निष्पक्षता का निर्माण करेगा।”

उन्होंने कहा कि आधुनिक मॉडल की दूसरी विशेषता है भ्रष्टाचार का स्तर जो विश्व स्तर पर आर्थिक कार्यों को अनुमति देता है। भ्रष्टाचार से संघर्ष करने के लिए नैतिक रूप से उसकी निंदा किये जाने तथा उसके लिए जिम्मेदार लोगों को दबाने हेतु कानूनी उपाय अपनाये जाने की आवश्यकता है। एक आर्थशास्त्री को चाहिए कि वह पारदर्शिता के नमूने को अपनाए जो भ्रष्टाचार के अवसर को कम कर देगा।


(Usha Tirkey)

नागपुर के महाधर्माध्यक्ष अब्राहम का निधन

In Church on April 19, 2018 at 3:47 pm

दिल्ली, बृहस्पतिवार, 19 अप्रैल 2018 (मैट्रस इंडिया)˸ नागपुर के महाधर्माध्यक्ष अब्राहम विरूथाकुलांगारा का निधन 19 अप्रैल को नई दिल्ली में दिल का दौरा पड़ने से हुआ।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेनहस ने निधन की जानकारी देते हुए कहा, “गहरे दुःख एवं उदासी के साथ मुझे यह जानकारी देना पड़ रहा है कि महाधर्माध्यक्ष अब्राहम विरूथाकुलांगारा आज सुबह नई दिल्ली में दिल का दौरा पड़ने के कारण गुजर गये। आइये, हम ईश्वर से प्रार्थना करें, कि ईश्वर उन्हें अपनी तथा इस धरती पर अपनी प्रजा के लिए उनके समर्पित सेवा का बड़ा इनाम प्रदान करें।”

74 वर्षीय महाधर्माध्यक्ष 30 अन्य धर्माध्यक्षों के साथ एक सभा में भाग लेने हेतु दिल्ली स्थित सी बी सी आई के मुख्यालय में थे। उनका दफन 23 अप्रैल को नागपुर में किया जाएगा।

महाधर्माध्यक्ष अब्राहम विरूथाकुलांगारा ने एक धर्माध्यक्ष के रूप में 42 साल तक अपनी सेवाएँ दीं। वे मिशन में उत्साह के लिए जाने जाते थे जिन्होंने केरल को छोड़ भारत के एक ऐसे क्षेत्र में कार्य करने का चुनाव किया जहाँ सुविधाओं का अभाव है।

पिछला साल 13 जुलाई को उन्होंने अपने धर्माध्यक्षीय अभिषेक की सालगिराह पर पुरोहितों, धर्मबहनों एवं लोकधर्मियों से कहा था, “मैं सुसमाचार का प्रचार उन लोगों के लिए करना चाहता हूँ जिन्होंने ख्रीस्त के बारे नहीं सुना है।”

महाधर्माध्यक्ष अब्राहम का जन्म 5 जून 1943 को केरल में हुआ था।


(Usha Tirkey)

दया हृदय का द्वार खोलता है

In Church on April 19, 2018 at 3:45 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 19 अप्रैल 2018 (रेई)˸ सत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार 19 अप्रैल को एक ट्वीट प्रेषित कर करुणा की विशेषता पर प्रकाश डाला। उन्होंने संदेश में लिखा, “करुणा हृदय का द्वार खोलता है क्योंकि यह हमें एक ही पिता की संतान होने का एहसास देता है।”


(Usha Tirkey)

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