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डॉन बेल्लो के लिये निर्धनों को समझना ही यथार्थ समृद्धि थी, सन्त पापा फ्राँसिस

In Church on April 20, 2018 at 2:30 pm


मोलफेत्ता, शुक्रवार, 20 अप्रैल 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा है कि निर्धनों के प्रति समझदारी ही डॉन टोनिनो बेल्लो के लिये यथार्थ समृद्धि थी।

शुक्रवार, 20 अप्रैल को सन्त पापा फ्राँसिस ने दक्षिणी इटली के आलेसान्नो एवं बारी स्थित मोलफेत्ता की प्रेरितिक यात्रा की। इस तीर्थयात्रा का उद्देश्य पाक्स क्रिस्टी अर्थात् ख्रीस्त की शांति नामक विश्वव्यापी अभियान के समर्थक स्व. धर्माध्यक्ष डॉन टोनिनो बेल्लो के निधन की 25 वीं पुण्य तिथि पर उनके प्रति भाव भीनी श्रद्धान्जलि अर्पित करना था। धर्माध्यक्ष टोनिनो का जन्म सन् 1935 ई. में आलेसान्नो में हुआ था तथा आलेसान्नो एवं मोलफेत्ता में ही वे अपनी प्रेरिताई करते रहे थे।

शुक्रवार को सन्त पापा फ्राँसिस ने आल्लेसानो स्थित धर्माध्यक्ष बेल्लो की समाधि पर श्रद्धार्पण किया और फिर मोलफेत्ता के महागिरजाघर में उन्होंने काथलिक विश्वासियों के लिये ख्रीस्तयाग अर्पित किया। इस अवसर पर प्रवचन करते हुए सन्त पापा फ्राँसिस ने निर्धनों के पक्ष में सम्पादित डॉन टोनिनो बेल्लो के कार्यों को याद किया।

उन्होंने कहा, “डॉन टोनिनो के लिये निर्धनों को समझना ही यथार्थ समृद्धि थी और इसमें कोई दो राय नहीं कि निर्धन लोग ही कलीसिया का धन वैभव है। ख्रीस्तीय सुसमाचार सरल मार्ग नहीं सुझाता क्योंकि जो कोई भी येसु से प्रेम करता है वह दीन हीनों से भी प्यार करता है और उनकी मदद को सदैव तत्पर रहता है।”

उन्होंने कहा, डॉन टोनिनो हमसे आग्रह करते हैं कि हम निर्धनों के प्रति एकात्मता केवल दिखावे के लिये नहीं करें अपितु उनके समीप रहकर उनकी सहायता को आगे आयें जैसा कि प्रभु येसु ने किया था जो हमारे लिये धनाढ्य होकर भी निर्धन बन गये थे। सन्त पौल लिखते हैं, “मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि आप उसके प्रति प्रेम प्रदर्शित करने का निर्णय लें।”

डॉन टोनिनो के आदर्शों पर चल शांति के कार्यों में संलग्न होने का आह्वान करते हुए सन्त पापा ने कहा कि डॉन टोनिनो येसु के अनुसरण को अपनी आवश्यकता मानते थे और इसीलिये निर्धनों एवं दीन हीनों के अनुरोधों ने उन्हें कभी परेशान नहीं किया बल्कि उपेक्षाभाव और उदासीनता से वे परेशान हो जाया करते थे। धन की कमी से वे कभी नहीं डरे किन्तु रोज़गार का अभाव उन्हें खलता था और यह समस्या आज भी बनी हुई है।


(Juliet Genevive Christopher)

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