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बोलोग्ना और चेसेना धर्मप्रांत के विश्वासियों को संत पापा का संदेश

In Church on April 21, 2018 at 1:55 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 21 अप्रैल 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 21 अप्रैल को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में इटली के बोलोग्ना और चेसेना धर्मप्रांत से आये हुए करीब तेरह हजार तीर्थयात्रियों और विश्वासियों से मुलाकात की।

संत पापा ने उन्हें इन शब्दों से स्वागत किया,“ मैं आप सभी का सस्नेह अभिवादन करता हूँ। आपकी उपस्थिति के लिए धन्यवाद! संत पेत्रुस के कब्र के दर्शन हेतु इस तीर्थयात्रा से आप पिछले वर्ष 1 अक्टूबर को मेरी आपके धर्मप्रांतों की यात्रा की याद दिलाते हैं। मैं आपका बहुत आभारी हूँ।”

अपनी यात्रा की याद करते हुए संत पापा ने बोलोग्ना के महाधर्माध्यक्ष मत्तेयो जुप्पी और चेसेना के धर्माध्यक्ष दौलास रेगातियेरी तथा सभी पुरोहितों, धर्मसंघियों और लोकधर्मियों को पुनः धन्यवाद दिया जिन्होंने 1 अक्टूबर को सफल बनाने के लिए अपना योगदान दिया था। संत पापा ने वहां उपस्थित नागर अधिकारियों, पुरोहितों, धर्मसंघियों और विश्वसियों के साथ धर्मप्रांत के बीमार और बुजुर्गों का भी स्वागत किया जो आध्यात्मिक रुप से इस तीर्थयात्रा में सहभागी हो रहे हैं।

संत पापा ने कहा,“गत वर्ष चेसेना में हमने संत पापा पियुस छठे का 300वां जन्मदिन का समारोह मनाया साथ ही संत पापा पियुस सातवें को भी याद किया। आपके धर्मप्रांत से रोम के ये दोनों धर्माध्यक्षों ने आपको सुसमाचार प्रचार के लिए आपको प्रेरित किया है। सुसमाचार प्रचार के लिए अनेक पुरोहितों और धर्मसंघियों ने अपने आप को समर्पित किया है। आप भी उदारतापूर्वक इस कार्य को जारी रखने के लिए बुलाये गये हैं। ख्रीस्तीय अपने दैनिक जीवन में प्रेम और भाईचारे को अपने उदार कार्यों द्वारा प्रदर्शित कर समाज के खमीर बनते हैं।

संत पापा ने बोलोग्ना धर्मप्रांतीय युखारिस्तीय कांग्रेस के समापन पर पवित्र मिस्सा समारोह में भाग लेने वाले विश्वासियों के उत्साह की याद करते हुए कहा, “येसु की पवित्र बलि वेदी के चारों ओर एकत्रित ख्रीस्तीय समुदाय के विश्वास की यात्रा पर एक अचूक छाप छोड़ी है। आप जैसे ख्रीस्तीय समुदाय के लिए मैंने हाल ही के प्रेरितिक उद्बोधन ‘ गाउदेते एत एक्सुलताते’ में कहा है कि ईश्वर के वचन को साझा करने और पवित्र युखरिस्तीय समारोह में भाग ने से हम ख्रीस्त में भाई और बहन बन जाते हैं और धीरे-धीरे हमें एक पवित्र और मिशनरी समुदाय में बदल जाते हैं” (संख्या 142)। वास्तव में युखारिस्त हमें एक साथ लाता और कलीसिया बनाता है। येसु ख्रीस्त द्वारा स्थापित कलीसिया में हम लोगों से यहाँ तक कि अजनबियों से भी एकजुटता का प्रदर्शन करते हैं।

संत पापा ने कहा, “युखारिस्त का अर्थ है धन्यवाद। युखारस्त हमें धन्यवाद देने की आवश्कता को महसूस कराता है। यह हमें समझता है कि “देने की अपेक्षा देना अधिक सुखद है।” (प्रेरित 20:35)। यह हमें देने की प्राथमिकता में शिक्षित करता है। यह हमें सही मूल्यों को सिखाती है सांसारिक वास्तविकताओं को पहले नहीं, बल्कि आध्यत्मिक चीजों की खोज करना सिखाती है। नश्वर भोजन के लिए नहीं बल्कि उस भोजन के लिए परिश्रम करना है जो अनंत जीवन तक बना रहता है।” (योहन 6:27)

अंत में संत पापा ने हर बपतिस्मा प्राप्त ख्रीस्तीय को अपने समुदायों में पवित्रता के लिए आह्वान करते हुए प्रोत्साहित किया और कहा कि उपर की चीजों की तलाश में कभी न थकें। अपने दैनिक जीवन में साधारण कार्यों को करते हुए पवित्रता के मार्ग में आगे बढ़ें। और अपने धर्मप्रांत में नये उत्साह और आवेग के साथ सुसमाचार का प्रचार करें। इस पवित्र कार्य को करने में माता मरिया का साथ हमेशा रहात है। माता मराया के संरक्षण में सिपुर्द करते हुए संत पापा ने उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Margaret Sumita Minj)

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संत पापा ने गुरूकुल छात्रों को प्रेम में बढ़ने की सलाह दी

In Church on April 21, 2018 at 1:53 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 21 अप्रैल 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 21 अप्रैल को, वाटिकन के सामान्य लोकसभा परिषद भवन में, रोम स्थित अंग्रेजी कॉलेज सेमिनरी के अध्यापकों एवं विद्यार्थियों से मुलाकात की।

उनसे मुलाकात कर खुशी जाहिर करते हुए संत पापा ने उन्हें जीवन के दो आधार स्तम्भों, ईश्वर के प्रति प्रेम एवं पड़ोसियों के प्रति प्रेम में बढ़ने की सलाह दी।

ईश्वर के प्रेम में बढ़ने का प्रोत्साहन देते हुए उन्होंने कहा, “यह देखना सुखद है कि युवा प्रभु के लिए दृढ़ एवं आजीवन समर्पण हेतु तैयारी कर रहे हैं किन्तु यह आज की “अस्थायी संस्कृति” के कारण मेरी तुलना में आपके लिए अधिक कठिन है। इस चुनौती से बाहर आने तथा सच्ची प्रतिज्ञा करने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि सेमिनरी की इस अवधि में आप अपने आध्यात्मिक जीवन को पुष्ट करें, अपने आंतरिक द्वार को बंद करना सीखें। इस तरह ईश्वर एवं कलीसिया के प्रति आपकी सेवा सुदृढ़ हो जायेगी और आप उस शांति एवं खुशी को प्राप्त करेंगे जिसको केवल येसु दे सकते हैं।”

संत पापा ने कहा कि इस तरह वे संत फिलिप नेरी के आदर्शों पर चलकर ख्रीस्त का प्रसन्नचित साक्ष्य दे पायेंगे।

संत पापा ने पड़ोसियों के प्रति प्रेम में बढ़ने की सलाह देते हुए कहा, “जैसा कि आप जानते हैं कि हम ख्रीस्त का साक्ष्य अपने लिए नहीं किन्तु सेवा के द्वारा दूसरों के लिए देते हैं। यह सेवा हम न केवल भावुकतावश देते वरन्, उस प्रभु का आज्ञापालन करते हैं जिन्होंने घुटनों पर झुककर अपने चेलों के पैर धोये।” (यो. 13:34) हमारी मिशनरी शिष्यता एकाकी के लिए नहीं है बल्कि दूसरे पुरोहितों, धर्मसमाजियों एवं लोकधर्मी स्त्री एवं पुरूषों के साथ सहयोग करने के लिए है। पड़ोंसियों के प्रति प्रेम आसान नहीं है यही कारण है कि हमारे मिशन को प्रभावशाली बनाने के लिए हमें प्रभु में सुदृढ़ होने की आवश्यकता है जो प्रेम करते एवं हमें पुष्ट करते हैं। इसी आंतरिक शक्ति से हम भलाई करने में धीर बने रह सकते हैं। यही आंतरिक शक्ति, प्रेम के प्रति निष्ठा, आपके कॉलेज के शहीदों के जीवन की विशेषता है और यह हमारे लिए भी आवश्यक है जो येसु का अनुसरण करते हैं जिन्होंने हमारी आयोग्यता के बावजूद अपनी सेवा करने हमें बुलाया है और जो अपना सामर्थ्य कमजोर लोगों के बीच प्रकट करते हैं।”

संत पापा ने ईश्वर एवं पड़ोसियों के प्रति प्रेम में बढ़ने का रास्ता बतलाते हुए कहा, “ईश्वर के प्रति प्रेम एवं पड़ोसियों के प्रेम में बढ़ने का एक रास्ता है समुदाय में रहना।” उन्होंने कहा कि हमारे ख्रीस्तीय जीवन में कई बाधाएँ हैं किन्तु हम प्रेम, प्रार्थना एवं आमोद-प्रमोद के द्वारा उन सभी बाधाओं से बाहर आ सकते हैं। संत पापा ने उन्हें कैंटरबरी के संत थॉमस के आदर्शों को अपनाते हुए अपनी कमजोरियों से भयभीत नहीं होने एवं दूसरों की सहायता करने की सलाह दी।

संत पापा ने उन्हें सलाह दी कि वे आपसी मित्रता को पुष्ट करें एवं अच्छे संबंध स्थापित करें जो उन्हें भावी मिशन हेतु सहायता प्रदान करेगा।


(Usha Tirkey)

क्यूबा के युवाओं को संत पापा का वीडियो संदेश

In Church on April 21, 2018 at 1:51 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 21 अप्रैल 2018 (रेई)˸ “मैं आपको निमंत्रण देता हूँ कि आप निरंतर आगे बढ़ें, आगे देखें, अपनी मातृभूमि से स्नेह रखें, येसु से प्रेम करें एवं माता मरियम आपलोगों का मार्गदर्शन करे।” यह बात सत पापा फ्राँसिस ने क्यूबा के युवाओं को सम्बोधित करते हुए एक विडीयो संदेश में कही।

क्यूबा के हवाना में युवा प्रेरिताई हेतु गठित राष्ट्रीय आयोग के सदस्यों की सभा 20 अप्रैल को आयोजित की गयी थी।

संत पापा ने वीडियो संदेश में कहा, “प्रिय युवाओ, मैं आपको प्रोत्साहन देता हूँ कि आप येसु के साथ प्रेम करें तथा क्यूबा की कलीसिया की सेवा में आज की परिस्थिति के बीच प्रभु की पुकार से न डरें एवं अपने को ठोस रूप से समर्पित करें।”

उन्होंने युवाओं को प्रोत्साहन देते हुए कहा कि वे अपनी मातृभूमि से प्रेम करें। उदार बनें तथा प्रभु के लिए अपना हृदय खोलें।

आगामी विश्व युवा दिवस की याद करते हुए संत पापा ने कहा कि पनामा में विश्व युवा दिवस तथा नवम्बर 2018 में संतियागो में आयोजित राष्ट्रीय युवा दिवस, आज और आने वाले कल की क्यूबा की कलीसिया के निर्माण हेतु अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा, “यह जानें कि आप अकेले नहीं हैं तथा हम तभी निर्माण कर सकते हैं जब हम ठोस रूप से एक समुदाय का निर्माण करते हैं जहाँ के हम निवासी हैं।” संत पापा ने कहा कि स्थानीय कलीसियाई समुदाय जहाँ हम अपना जीवन समर्पित करते तथा अपनी बुलाहट को पुष्ट कर सकते हैं।

संत पापा ने क्यूबा के युवाओं को कुँवारी मरियम को समर्पित किया एवं साहस पूर्वक आगे बढ़ने का प्रोत्साहन दिया।

एक पैर से एवरेस्ट पर चढ़कर सिद्ध किया कि कुछ भी संभव नहीं

In Church on April 21, 2018 at 1:50 pm

लुकला, शनिवार, 21 अप्रैल 2018 (एशियान्यूज)˸ 22 साल के एक फिलीस्तीनी शरणार्थी, जाराह अलहावामदेह ने 15 साल की उम्र में कैंसर के कारण अपना एक पैर खो दिया किन्तु यह उसे एक सफल पर्वातारोही बनने से नहीं रोक सका। उसका मुख्य उद्देश्य है अम्मान के शरणार्थी शिविर के स्कूल की रक्षा करना जहाँ वह बढ़ा।

शरणार्थी शिविर जहाँ वह बड़ा हुआ तथा स्कूल जहाँ उसने दस सालों तक पढ़ाई कर यह सिद्ध किया कि “कुछ भी असंभव नहीं है” इसी ने उसे माऊण्ड एवरेस्त में चढ़ने हेतु प्रेरित किया।

जाराह, जॉर्डन के अम्मान के निकट अल जोफेह शरणार्थी शिविर में रहता है और जिसे 15 साल की उम्र में दाहिने पैर पर कैंसर की बीमारी हो गयी थी।

उन्होंने यूएनआरडब्लूए के फंडराईसिंग पेज पर लिखा कि कैंसर ने “मुझे दो साल बाद पर्वत चढ़ने से नहीं रोक सका और मैं 2015 में कैंसर पीड़ितों के लिए आशा के संदेश के साथ किलिमानजारो पर्वत चढ़ा, मैं उन्हें यह दिखलाना चाहता था कि कुछ भी असंभव नहीं है।

2 अप्रैल को शुरू हुई अपनी नवीनतम चढ़ाई का उद्देश्य यूएनआरडब्ल्यूए और उनके शरणार्थी शिविर के लिए जागरूकता और धन जुटाना, जो एजेंसी के वित्तीय संकट के कारण बंद हो सकता है।

एशियान्यूज को दिये एक साक्षात्कार में जाराह ने बतलाया कि वे माण्ट एवरेस्ट चढ़ने की योजना तीन सालों से बना रहे थे। उन्होंने बतलाया कि यात्रा के दौरान उन्हें खराब मौसम एवं दो बार आँधियों का सामना करना पड़ा। अंतिम तीन दिनों में उन्हें सांस लेने में बहुत तकलीफ हुई, तापमान शून्य से 30 डिग्री कम थी। जाराह ने बतलाया कि जब वे चढ़ना आरम्भ किये तो उनकी संख्या 11 थी किन्तु दो ही सफलता पूर्वक पर्वत की चोटी तक पहुँच पाये, जिनमें से वे एक हैं।

उसने बतलाया कि यात्रा के दौरान मुश्किलताओं के बावजूद वे कभी निरूत्साहित नहीं हुए क्योंकि वे स्कूल के विद्यार्थियों एवं शिविर के लोगों की लगातार याद कर रहे थे और उन्हें लग रहा था कि सफलता पाना उनकी बड़ी जिम्मेदारी थी।

जाराह ने बतलाया कि वे जॉर्डन के अम्मान स्थित अल जोफर शिविर में पले बढ़े जो फिलिस्तीनियों के लिए बना एक शरणार्थी शिविर है। इस शिविर में ही उसका पूरा परिवार रह रहा था। आरम्भ में उन्हें फिलिस्तीन स्थित अपने घर लौटने की आशा थी किन्तु शिविर में ही पढ़ना शुरू किया।


(Usha Tirkey)

परमधर्मपीठ द्वारा अमेज़ोनिया के जनजातियों के अधिकारों के सुरक्षा की मांग

In Church on April 21, 2018 at 1:46 pm

न्यूयॉर्क, शनिवार 21 अप्रैल 2018 (रेई) : संयुक्त राष्ट्र के लिए प्रेरितिक राजदूत, महाधर्माध्यक्ष बेरनार्दितो औजा ने अमेज़ोनिया के जनजातियों के मानवाधिकारों और गरिमा की रक्षा और प्रचार पर एक कार्यक्रम की मेजबानी की।

न्यूयॉर्क में गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र के लिए प्रेरितिक राजदूत और परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक, महाधर्माध्यक्ष बेरनार्दितो औजा ने कहा कि जनजातियों को हमेशा उनके विकास और भाग्य के सभी मामलों में नि: शुल्क, और पूर्व सूचित सहमति के साथ प्रतिष्ठित भागीदारों के रूप में माना जाएगा। “व्यावहारिक रूप से, इसका मतलब है जनजातियों के सामूहिक अधिकार को अपनी भूमि और संसाधनों में कायम रखना।”

“अमेज़ॅन में मानवाधिकारों का उल्लंघन: उन्हें कम करने के लिए नेटवर्क” विषय पर एक विशेष कार्यक्रम की मेजबानी करते हुए महाधर्माध्यक्ष बेरनार्दितो ने अपने शुरुआती भाषण में उक्त टिप्पणी की। महाधर्माध्यक्ष औजा ने, विशेष रूप से लैटिन अमेरिका के जनजातियों लिए संत पापा फ्राँसिस की चिंताओं पर आवाज उठाई, जिनकी भूमि संस्कृति, अधिकार और गरिमा को दूसरों के संकीर्ण आर्थिक हितों के लिए अनदेखा किया जा रहा है यहां तक कि हस्तक्षेप किया जा रहा है। यह विशेष रूप से विशाल अमेज़ोनियन क्षेत्र, दुनिया का सबसे बड़ा उष्णकटिबंध जंगल, 2.8 मिलियन विभिन्न सांस्कृतिक संपदा वाले जनजातियों का घर है।

ब्राज़ील

महाधर्माध्यक्ष बेरनार्दितो औजा ने कहा कि 2013 में ब्राजील की अपनी यात्रा के दौरान, संत पापा ने अमेज़ॅन में कलीसिया की मौजूदगी की सराहना की, जो कि हर संभव कठिनाईयों को दूर करने में प्रयासरत है। उन्होंने विशेष रूप से कलीसिया के कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष रूप से पल्लियों, स्थानीय शिक्षकों और पुरोहितों के प्रशिक्षण के माध्यम से “कलीसिया के ‘अमेज़ॅनियन चेहरे को मजबूत करने के लिए कहा।  यही कारण है कि संत पापा ने रोम में आयोजित होने वाले अमेज़ॅन क्षेत्र के लिए अक्टूबर 201 9 में धर्माध्यक्षों का एक धर्मसभा का आयोजन किया है।

पेरू

महाधर्माध्यक्ष बेरनार्दितो औजा ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि संत पापा फ्राँसिस ‘1 9 जनवरी पेरू के अमेज़ॅन एंडीज़ पुवेर्तो मालडोनाडो में बड़े व्यापारिक संस्थाओं द्वारा जनजातियों की भूमि और उनके संसाधनों के अत्यधिक शोषण की निंदा की और कुछ आंदोलनों की भी निंदा की जिन्होंने जंगल को संरक्षित करने के नाम पर, स्थानीय लोगों को उत्पीड़ित करते हैं।

इस के सामने, महाधर्माध्यक्ष औजा ने दो उपायों को पेश किया। सबसे पहले, किसी को “ऐतिहासिक प्रतिमान को तोड़ने की जरूरत है जो अमेज़ोनिया को अपने पड़ोसियों के लिए चिंता के बिना अन्य देशों के लिए आपूर्ति के एक अविश्वसनीय स्रोत के रूप में देखता है।”

दूसरा, दुनिया को यह समझना चाहिए कि वहां के स्थायी लोग और समुदाय स्वयं अपनी भूमि और संस्कृतियों के अभिभावक हैं।

उन्होंने आग्रह किया कि जनजातियों को उनकी आवाजों की गारंटी दी जाएगी और उन्हें अपनी पहचान और अपने स्वयं के विकास और भाग्य के एजेंट बनने का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक स्थान दिया जाएगा।


(Margaret Sumita Minj)

ईश्वर से हम अपने हृदय परिवर्तन के लिए याचना करें, संत पापा फ्राँसिस

In Church on April 21, 2018 at 1:44 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 21 अप्रैल 2018 (रेई) : स्वार्थी और अहंकारी मनुष्य सिर्फ अपने बारे और अपनी भलाई के बारे सोचता है। उसके जीवन में ईश्वर और दूसरों के लिए कोई जगह नहीं होती। संत पापा ने ट्वीट प्रेषित कर इस मानवीय कमजोरी से उपर उठने के लिए सभी लोगों को प्रेरित किया।

संदेश में उन्होंने लिखा,“जब हम आत्म-निष्ठा से भरे होते हैं तो हम ईश्वर के लिए कोई जगह नहीं छोड़ते हैं। आइए, हम ईश्वर से अपने हृदय परिवर्तन याचना करें।”


(Margaret Sumita Minj)

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