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संत पापा फ्राँसिस का नाम दिवस संत जोर्ज की याद में

In Church on April 23, 2018 at 3:20 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 23 अप्रैल 2018 (रेई) : आज 23 अप्रैल को काथलिक कलीसिया संत जोर्ज की याद करती है। पौराणिक कथा के अनुसार, उन्होंने शैतान के प्रतीक ड्रैगन को मार डाला था। आज जोर्ज मारियो बेरगोलियो याने संत पापा फ्राँसिस अपना नाम दिवस मनाते हैं। इस समय विश्व के विभिन्न भागों से उनके लिए शुभकामनायें भेजी जा रही हैं और प्रार्थनायें चढ़ाई जा रही हैं।

वाटिकन प्रेस विज्ञति अनुसार संत पापा फ्राँसिस अपने नाम दिवस को सबसे गरीब और रोम के बेघर लोगों के साथ मनाना चाहते हैं। इसलिए, आज संत पापा की उदारता कार्य संबंधी कार्यालय, उन लोगों के लिए 3,000 आइस क्रीम वितरित करेगा जिन्हें कारितास द्वारा रात बिताने के केंद्रों और रोजाना कैंटीन में खाने का प्रबंध किया जाता है। साथ ही रोम के अन्य केद्रों में उनका स्वागत किया जाता है।

ड्रैगन के खिलाफ संत जॉर्ज की लड़ाई

कप्पादोसिया में जन्मे, डायोक्लेटियन की सेना के अधिकारी संत जोर्ज, रोमन सम्राट द्वारा छेड़े गए ईसाई विरोधी अत्याचार के दौरान अपने विश्वास को नहीं छोड़ने के लिए, अत्याचारी यातनाओं के बीच 303 में शहीद हो गये। प्रसिद्ध पौराणिक कथा में उन्होने  क्रूस के संरक्षण में ड्रैगन को मारा जो लोगों को भस्म करता था। विश्वास का प्रतीक क्रूस बुराई पर विजय प्राप्त करता है।

अपने प्रवचन में,संत  पापा फ्रांसिस ने अक्सर जोर दिया है कि बुराई अमूर्त नहीं है। यह एक व्यक्ति है जिसका नाम शैतान है। 11 अप्रैल 2014 को संत मार्था प्रार्थनालय में पवित्र मिस्सा में संत पापा ने कहा : “येसु का जीवन एक संघर्ष था। वे शैतान को हराने के लिए, इस दुनिया के राजकुमार को हराने और इस दुनिया को बुराई से उबरने के लिए आये थे। ” जीवन एक संघर्ष है हर ख्रीस्तीय को इसका सामना करना चाहिए, और जो लोग येसु का अनुसरण करना चाहते हैं उन्हें “इस सत्य को पहचानना” चाहिए।

अच्छाई द्वारा बुराई पर विजय

संत जोर्ज ने  बुराई पर अच्छाई की प्रतीकात्मक जीत में ड्रैगन को हरा दिया। 8 फरवरी 2017 के आमदर्शन समारोह में संत पापा फ्राँसिस ने कहा: “हम बुराई से बुराई को कभी खतम नहीं कर सकते। हमें अच्छाई से बुराई को और  क्षमा देकर कर अपराधों को दूर करना चाहिए। ” “इस तरह हम शांति में रहते हैं”, उन्होंने आगे कहा, “यह कलीसिया है। यह वही है जो ख्रीस्तीय आशा पैदा करती है जब यह प्यार की मजबूत एवं नरम विशेषताओं को ग्रहण करती है। “चूंकि प्यार, ” मजबूत और नरम दोनों है। इसलिए यह खूबसूरत है।”


(Margaret Sumita Minj)

विश्व पुस्तक दिवस पर संत पापा का संदेश

In Church on April 23, 2018 at 3:18 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 23 अप्रैल 2018 (रेई) : आज, सोमवार, 23 अप्रैल, विश्व पुस्तक और प्रकाशनाधिकार दिवस है। इस अवसर पर संत पापा फ्राँसिस ने पुस्तकों के प्रकाशन और अध्ययन सेंटर के अध्यक्ष को व्यक्तिगत शुभकामनाएं भेजा।

विश्व पुस्तक दिवस 2018 के अवसर पर वाटिकन राज्य के सचिवालय के माध्यम से भेजे गये पुस्तकों के प्रकाशन और अध्ययन सेंटर के अध्यक्ष रोमानो मोंट्रोनी ने संत पापा फ्राँसिस के पत्र पर टिप्पणी करते हुए कहा, “संत पापा से संदेश प्राप्त करना हमें बहुत खुशी देती है। उनका यह संकेत हमारे लिए का बहुत महत्व है।”

उन्होंने कहा,“इटली के सांस्कृतिक विकास में, पढ़ने के महत्व को समझने के लिए हमें बहुत बड़े गवाहों की आवश्यकता है जिनके पास मानव और संस्थागत विश्वसनीयता है और संत पापा फ्राँसिस इनमें से एक हैं। पढ़ने के मूल्य की सराहना भरे शब्द किसी भी प्रचार या पहल से ज्यादा आक्रामक हैं।”

संत पापा की शुभकामना : एक भाईचारे समाज के लिए एक साधन के रूप में पढ़ना

अपने संदेश में संत पापा उम्मीद करते हैं कि “इस परिस्थिति में पुस्तक या आम तौर पर पढ़ने के महत्व को प्रोत्साहन देकर दुनिया के निर्माण हेतु एक उचित और भाई चारे समाज की स्थापना के प्रति जागरूक किया जा सकता है।”

इस दिवस का इतिहास

23 अप्रैल को पूरे विश्व के लोगों के द्वारा हर वर्ष मनाया जाने वाला विश्व पुस्तक दिवस एक वार्षिक कार्यक्रम है। पढ़ना, प्रकाशन और प्रकाशनाधिकार को पूरी दुनिया में लोगों के बीच बढ़ावा देने के लिये यूनेस्को द्वारा सालाना आयोजित ये बहुत ही महत्वपूर्णं कार्यक्रम है।

पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वार्षिक आधार पर विश्व पुस्तक दिवस को मनाने के पीछे बहुत सी कहानियाँ हैं। मीगुएल डी सरवेंटस नाम से सबसे प्रसिद्ध लेखक को श्रद्धांजलि देने के लिये स्पेन के विभिन्न किताब बेचने वालों के द्वारा वर्ष 1923 में पहली बार 23 अप्रैल की तारीख अर्थात् विश्व पुस्तक दिवस और किताबों के बीच संबंध स्थापित हुआ था। ये दिन मीगुएल डी सरवेंटस की पुण्यतिथि है।

विश्व पुस्तक दिवस और प्रकाशनाधिकार दिवस को मनाने के लिये यूनेस्को द्वारा 1995 में पहली बार विश्व पुस्तक दिवस की सटीक तारीख की स्थापना हुई थी। यूनेस्को के द्वारा इसे 23 अप्रैल को मनाने का फैसला किया गया था क्योंकि, ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, विलियम शेक्सपियर, व्लादिमीर नबोकोव, मैमुएल सेजिया वैलेजो का जन्म और मृत्यु वर्षगाँठ, मीगुअल डी सरवेंटस (22 अप्रैल को मृत्यु और 23 अप्रैल को दफनाए गये), जोसेफ प्ला, इंका गारसीलासो डी ला वेगा का मृत्यु वर्षगाँठ और मैनुअल वैलेजो, मॉरिस द्रुओन और हॉलडोर लैक्सनेस का जन्म वर्षगाँठ होता है।


(Margaret Sumita Minj)

संत पेत्रुस महागिरजाघर में संत पापा ने किया पुरोहिताभिषेक

In Church on April 23, 2018 at 3:17 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 23 अप्रैल 2018 (वीआर,रेई) :  संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 22 अप्रैल को संत पेत्रुस महागिरजाघर में पवित्र युखरिस्त समारोह के दौरान 16 नये पुरोहितों का अभिषेक किया जिसमें 11 पुरोहित रोम धर्मप्रांत के लिए हैं। नव अभिषिक्त पुरोहितों में पांच रोमियों और तीन भारतीयों के अलावा, क्रोएशिया, वियतनाम, म्यांमार, कोलंबिया, एल साल्वाडोर, मेडागास्कर, रोमानिया और पेरू से हैं।

22 अप्रैल को कलीसिया धर्म बुलाहट हेतु विश्व प्रार्थना दिवस मनाती है। धर्मबुलाहट के लिए प्रार्थना का विश्व दिवस प्रत्येक वर्ष पास्का के चौथे रविवार को मनाया जाता है, जिसे भला चरवाहा रविवार भी कहा जाता है। पूजन विधि पंचाग के तीन वर्षीय चक्रों में से प्रत्येक में, पास्का के चौथे रविवार में येसु की छवि पर भले चरवाहे के रूप में ध्यान केंद्रित करने वाली एक सुसमाचार शामिल है।

संत पापा फ्राँसिस ने अपने प्रवचन में, नये पुरोहितों से कहा कि वे “दयालु बनने से कभी न थकें। अपने पापों के बारे में सोचें, आपके सभी पापों को येसु मसीह ने माफ कर दिया है। अतः आप भी दयावान बनें।”

पोप फ्रांसिस ने नए पुरोहितों को खुद या अन्य लोगों या अन्य स्वार्थी हितों की तलाश करने की बजाय ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि उन्हें केवल ईश्वर की सेवा और ईश्वर के लोगों की भलाई के लिए काम करना चाहिए।”

संयुक्त राज्य के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के वेबसाइट ने नोट किया, ” बुलाहट के लिए प्रार्थना के विश्व दिवस का उद्देश्य सार्वजनिक रूप से ईश्वर के निर्देश को पूरा करना है, ‘फसल के मालिक से उसकी फसल में मजदूरों को भेजने के लिए प्रार्थना करें’। कलीसिया सभी तरह के बुलाहटों की पूरी तरह से सराहना करती है, लेकिन इस रविवार को “याजकों और डीकनों के अभिषेक के लिए धार्मिक समाज के सभी रूपों (धर्मबहनों, धर्मसमाजियों, मठवासियों) के बुलाहट पर ध्यान केंद्रित करता है ।


(Margaret Sumita Minj)

दयालु बनें, नव अभिषिक्त पुरोहितों से संत पापा

In Church on April 23, 2018 at 3:15 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 23 अप्रैल 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर में, रविवार 22 अप्रैल को, बुलाहट के लिए प्रार्थना दिवस पर संत पापा फ्राँसिस ने 16 पुरोहितों का अभिषेक सम्पन्न किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रवचन में दयालु बनने की प्रेरणा दी।
उन्होंने प्रवचन में कहा, “प्रिय भाइयो एवं बहनो, ये हमारे बेटे हैं जो पुरोहिताई के लिए बुलाये गये हैं। आइये, हम ध्यान पूर्वक चिंतन करें कि कलीसिया में उन्हें किस प्रकार का मिशन पूरा करना पड़ेगा। जैसा कि हम जानते हैं कि नये व्यवस्थान में एकमात्र महापुरोहित हैं प्रभु येसु किन्तु उनमें ईश्वर की सारी पवित्र प्रजा याजकीय प्रजा बन जाती है, फिर भी, अपने शिष्यों के बीच में से येसु कुछ लोगों को खास तौर से चुनना चाहते हैं ताकि कलीसिया में उनके नाम पर सार्वजनिक रूप से याजकीय कार्य को सम्पन्न करने के द्वारा वे गुरू, याजक एवं चरवाहा के मिशन को आगे ले जा सकें।
वास्तव में, इसी के लिए वे पिता द्वारा भेजे गये थे, जिन्होंने प्रेरितों को भेजा और उनके बाद धर्माध्यक्ष एवं उनके उतराधिकारी दुनिया में भेजे जाते हैं। इस प्रकार पुरोहित उन्हें सहकर्मी की तरह सहयोग देते हैं जो पुरोहितीय मिशन में उनके साथ एक होकर कार्य करते और जो ईश प्रजा की सेवा हेतु बुलाये गये हैं।
संत पापा ने पुरोहित उम्मीदवारों की ओर इंगित करते हुए कहा कि काफी मनन-चिंतन एवं प्रार्थना के बाद अब हम हमारे भाइयो का पुरोहित अभिषेक सम्पन्न करने जा रहे हैं क्योंकि गुरू, पुरोहित एवं चरवाहे के रूप में ख्रीस्त की सेवा के द्वारा वे ख्रीस्त के शरीर के निर्माण में सहयोग देंगे, जो कलीसिया, ईश प्रजा तथा पवित्र आत्मा का मंदिर है।
वास्तव में, वे सर्वोच्च एवं अनन्त पुरोहित ख्रीस्त का प्रतिनिधित्व करेंगे और नये व्यवस्थान के सच्चे पुरोहित के रूप में अभिषिक्त किये जायेंगे।  इस नाम के द्वारा जो उन्हें अपने धर्माध्यक्षों से जोड़े रखेगा, वे सुसमाचार की व्याख्या करने, ईश प्रजा की देखभाल एवं संस्कारों का अनुष्ठान करने, खासकर, मिस्सा बलिदान अर्पित करने के लिए के लिए समर्पित होंगे।
संत पापा ने कहा, “प्रिय पुत्रो एवं भाइयो, आप जो पुरोहित अभिषेक किये जाने वाले हैं, ध्यान रहे कि पवित्र संस्कारों का अनुष्ठान करने के मिशन द्वारा आप, एकमात्र गुरू, ख्रीस्त के मिशन के सहभागी बनेंगे। आप सभी लोगों के लिए ईश्वर के वचन को बांटें जिसको स्वयं आपने उनके पुत्र के रूप में आनन्द से ग्रहण किया है। प्रभु के वचनों को पढ़ें और उस पर चिंतन करें, जो पढ़ते हैं उस पर विश्वास करें एवं विश्वास में आपने जो सीखा है उसकी शिक्षा दूसरों को दें तथा जो शिक्षा आप देते हैं उसे खुद जीयें।”
उन्होंने कहा कि उनका सिद्धांत ईश प्रजा को पोषित करे तथा उनके जीवन की खुशबू ख्रीस्तीय विश्वासियों को आनन्द एवं समर्थन प्रदान करे। वे जिन वचनों एवं उदाहरणों से ईश्वर के परिवार का निर्माण करते हैं वह कलीसिया है। वे ख्रीस्त के पवित्रीकरण के कार्यों को जारी रखें। उनके मिशन द्वारा विश्वासियों का आध्यात्मिक बलिदान पूर्ण हो तथा समस्त कलीसिया के नाम पर, पवित्र रहस्यों के अनुष्ठान में वेदी पर रक्त रहित बलिदान अर्पित किया जाए।
उन्होंने कहा, “अतः आप जो करते हैं उसे अच्छी तरह जानें। जो मनाते हैं उसका अनुपालन करें क्योंकि प्रभु की मृत्यु एवं उनके पुनरूत्थान के रहस्यों में भाग लेकर, वे ख्रीस्त की मृत्यु में सहभागी होते तथा उनके साथ नया जीवन प्राप्त करते हैं।”
संत पापा ने उन्हें संस्कारों का अनुष्ठान करने की सलाह देते हुए कहा कि बपतिस्मा के द्वारा वे नये सदस्यों को ईश प्रजा में शामिल करें, मेल-मिलाप के संस्कारों के अनुष्ठान द्वारा ख्रीस्त एवं कलीसिया के नाम पर वे पापों को क्षमा करें। संत पापा ने इन कार्यों में उन्हें दया करने पर बल देते हुए कहा कि वे दयालु बनने से कभी न थकें। अपने पापों एवं दुर्बलताओं की याद करें जिन्हें येसु ने माफ कर दिया है। पवित्र तेल द्वारा रोगियों को चंगा करें। दिन के समय पवित्र धर्मविधियों का अनुष्ठान करें तथा आराधना एवं निवेदन की प्रार्थनाओं द्वारा ईश प्रजा एवं समस्त मानव जाति की आवाज बनें।
याद रखें कि आप मनुष्यों के बीच से तथा उनके लिए ईश्वर की कृपा का माध्यम बनने के लिए चुने गये हैं, आप ख्रीस्त के सच्चे आनन्द एवं निष्ठा में याजकीय कार्यों को पूरा करें।
अंततः संत पापा ने प्रोत्साहन दिया कि वे शीर्ष एवं महापुरोहित ख्रीस्त के मिशन, में भाग लें, धर्माध्यक्षों के साथ पुत्रों की तरह अपने आपको विश्वासियों को एक परिवार में एकत्रित करने के लिए समर्पित करें। लोगों को पवित्र आत्मा में ख्रीस्त द्वारा पिता की ओर अग्रसर करें। अपनी नजरों के सामने भले चरवाहे का आदर्श रखें जो सेवा कराने नहीं किन्तु सेवा करने तथा खोजने एवं खोये हुओं को उन्हें बचाने आये।
ख्रीस्तयाग के उपरांत संत पापा ने विश्वासियों के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरित आशीर्वाद दिया।


(Usha Tirkey)

पुनर्जीवित प्रभु के शिष्यों के रूप में हमारी पहचान की खोज

In Church on April 23, 2018 at 3:13 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 23 अप्रैल 2018 (वीआर,रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 22 अप्रैल को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ करने के पहले हजारों की संख्या में उपस्थित देश विदेश से आये विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को संबोधित कर कहा, “आज की धर्मविधि हमें पुनर्जिवित प्रभु के शिष्य के रुप में अपनी पहचान की खोज करने में मदद करती है।”

पास्का के चौथे रविवार के लिए प्रेरित चरित से लिए गये पहले पाठ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा कि संत पेत्रुस ने सबके सामने घोषित किया कि “येसु के नाम पर” उसने इस अपंग व्यक्ति को चंगा किया, क्योंकि येसु के सिवा “किसी और के द्वारा कोई मुक्ति नहीं है।”

संत पापा ने कहा कि उस चंगे हुए व्यक्ति में हम अपने को और  हमारे समुदाय को देखते हैं। हम सब अपनी आध्यत्मिक कमजोरियों से निजात पा सकते हैं, “जब हम पुनर्जीवित प्रभु में अपने आप को समर्पित करें।”

संत पापा ने पूछा, चंगा करने बाले येसु कौन हैं? इसका जवाब आज को सुसमाचार पाठ में हम पाते हैं। येसु कहते हैं,“भला चरवाहा में हूँ। भला चरवाहा अपनी भेड़ों के लिए अपने प्राण निछावर कर देता है।” निश्चित रुप से येसु ने हमारे लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया। वे हमारे सर्वोच भले चरवाहे हैं।

सुसमाचार का दूसरा भाग, हमें उस रिश्ते दिखाता है जो हमारे और प्रभु के बीच होना चाहिए। येसु कहते है, “मैं भला चरवाहा हूँ,” मैं अपनों को जानता हूँ, और वे भी मुझे जानते हैं, जैसे पिता मुझे जानता है और मैं पिता को जानता हूँ। संत पापा ने कहा, “यह केवल बौद्धिक ज्ञान नहीं है, बल्कि एक व्यक्तिगत संबंध, पिता और पुत्र के बीच प्यार को प्रतिबिंब करता है। येसु हमारे दिल की गहराइयों में हमें गहराई से जानते है और बदले में हम येसु को जानने के लिए बुलाए जाते हैं।

संत पापा फ्राँसिस ने कहा, “येसु के साथ मुलाकात करने की प्रवृति हमें उनका अनुसरण करने की इच्छा बढ़ाता है और मसीह द्वारा दिखाये नए मार्गों में साथ चलने के लिए स्वयं को संदर्भित करता है।” साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हमारा समुदाय येसु का अनुसरण के प्रति ठंढा है तो हम “सोच और जीवन के नए तरीकों” में आ जाएंगे, जो सुसमाचार के अनुरूप नहीं हैं।

इतना इतना कहने के बाद संत पापा ने विश्वासी समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया और सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

संत पापा के साथ नव अभिषिक्त पुरोहितों ने भी संत पापा के साथ प्रांगण में एकत्रित विश्वसियों का अभिवादन किया।


(Margaret Sumita Minj)

निकारागुआ में संघर्ष समाप्त करने हेतु संत पापा की अपील

In Church on April 23, 2018 at 3:12 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 23 अप्रैल 2018 (वीआर,रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने निकारागुआ की स्थिति के लिए अपनी चिंता व्यक्त की, जहां सुरक्षा बलों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों को तोड़ने का प्रयास किया था, जिसमें कम से कम 25 लोग मारे गए।

रविवार 22 अप्रैल को संत पापा फ्राँसिस ने संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में हजारों तीर्थयात्रियों और विश्वासियों के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ करने के पश्चात कहा कि वे अपनी प्रार्थना में निकारागुआ के लोगों के साथ हैं और निकारागुआ के धर्माध्यक्षों की आवाज में अपनी आवाज मिलाते हैं जिन्होंने हिंसा को खत्म करने की मांग की है।

निकारागुआ के राष्ट्रपति डेनियल ओटेर्गा और सरकार द्वारा पेंशन प्रणाली में प्रस्तावित बदलाव के खिलाफ लोग हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं। इन बदलावों के तहत सरकार कुछ पेंशनों पर 5 प्रतिशत टैक्स लगा रही है, जिसके चलते यहां के नागरिकों में जबर्दस्त गुस्सा है। निकारागुआ में सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के दौरान फेसबुक पर लाइव रिपोर्टिंग कर एक पत्रकार की गोली लगने से मौत हो गई। इसके साथ ही निकारगुआ में सरकार विरोधी प्रदर्शन के दौरान अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शन के चलते सरकार ने कई इलाकों में सेना तैनात कर दी है।

संत पापा फ्राँसिस ने हिंसा के अंत के लिए अपील करते हुए कहा कि जिम्मेदारी की भावना के साथ स्थिति को शांतिपूर्वक हल किया जा सकता है। धर्माध्यक्षीय सम्मेलन का कहना है कि एकतरफा निर्णय हमेशा सामाजिक अस्थिरता को लाता है। निर्णय पर पुनःविचारकर सुधारना हमेशा मानवता का संकेत है।


(Margaret Sumita Minj)

विश्व पुस्तक दिवस पर संत पापा का ट्वीट संदेश

In Church on April 23, 2018 at 3:11 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 23 अप्रैल 2018 (रेई) : सोमवार 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस पर संत पापा फ्राँसिस ने ट्वीट प्रेषित कर बाईबिल अर्थात ईश्वर के वचन को पढ़ने और आत्मसात करने की प्रेरणा दी।

संदेश में उन्होंने लिखा,“ईश्वर का वचन वह दीपक है जिसके माध्यम से हम भविष्य की ओर देखते हैं: इसकी रोशनी हमें समय के संकेतों को पढ़ने में मदद देती है।”


(Margaret Sumita Minj)

साम्यवाद से लड़ने वाले स्वर्गीय कार्डिनल का चेक रिपब्लिक में स्वागत

In Church on April 23, 2018 at 3:10 pm

प्राग, सोमवार 23 अप्रैल 2018 (वीआर,रेई) : चेक गणराज्य ने स्वर्गीय कार्डिनल जोसेफ बेरन के अवशेषों का स्वागत किया है, जिसे पूर्व कम्युनिस्ट सरकार ने अपने विरोधक के रूप में देखा था और उन्हें वाटिकन में निर्वासन के लिए मजबूर कर दिया था। 49 वर्ष पहले कार्डिनल की मृत्यु हुई थी वे हमेशा अपनी मातृभूमि में दफनाया जाना चाहते थे।

चेक गणराज्य सैनिक ने वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर से कार्डिनल जोसेफ बेरन के अवशेष रखे ताबूत को सावधानी से लिया और कब्लेय हवाई अड्डे से राजधानी प्राग पहुँचाया। वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर में दफनाया जाना उनका अहोभाग्य था आम तौर पर स्थान रोम के धर्माध्यक्षों के लिए आरक्षित है। अब वे अंततः अपने घर लौट गये है।

अवशेष हस्तांतरण करते समय सरकार और चर्च के नेताओं ने एक ऐसे शक्स को याद किया जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाज़ियों के डच प्रताड़ना शिविर में जिंदा बचने के बाद 1946 में महाधर्माध्यक्ष बने। उस समय के चेकोस्लोवाकिया में सन् 1948 में कम्युनिस्ट कूप के बाद, महाधर्माध्यक्ष  बेरन ने सार्वजनिक रूप से नए शासन का विरोध किया।

उन्हें घर गिरफ्तार कर रखा गया। शासन अधिकारी उन्हें और उसके विश्वासियों के बीच संबंधों को काटना चाहते थे।

इस शासन ने हजारों काथलिक पुरोहितों, धर्मबहनों और सक्रिय काथलिकों को जेल में डाल दिया। कम्युनिस्टों ने उनकी  संपत्ति जब्त की और गिरजाघरों और मठों को नष्ट कर दिया क्योंकि उन्होंने पुरोहितों और ख्रीस्तीयों को अपने कट्टर दुश्मन के रूप में देखा।

1965 में, संत पापा पॉल छठे  ने महाधर्माध्यक्ष बेरान को कार्डिनल नियुक्त किया। कम्युनिस्ट सरकार ने उन्हें घर लौटने के विकल्प के बिना रोम के लिए जाने दिया।

प्राग महाधर्मप्रांत के प्रवक्ता स्तानिसलाव जेमन ने कहा कि कार्डिनल बेरान 80 वर्ष की आयु में 1969 को दुनिया से विदा हो गये पर उनकी हार्दिक तमन्ना थी कि उन्हें अपने द्श में ही दफनाया जाए।

उन्होंने रेडियो प्राग से कहा, “कार्डिनल जोसेफ बेरन की आखिरी इच्छा के कारण, जो प्राग में दफनाया जाना चाहते थे, वर्तमान कार्डिनल, डोमिनिक दुका ने कार्डिनल बेरन की इच्छा पूरी की।” सोमवार को प्राग के संत विंसेंट महागिरजाघर में उन्हें दफनाया जाएगा।


(Margaret Sumita Minj)

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