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विचारधारा के गुलाम न बनें, पवित्र आत्मा को केंद्र में रखें

In Church on April 24, 2018 at 4:03 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 24 अप्रैल 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने पवित्र आत्मा के कार्यों पर चिंतन किया जिसका विरोध किया जाता है।

संत पापा ने प्रवचन में मनुष्यों के विभिन्न मनोभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा, “मानव इतिहास में पवित्र आत्मा का प्रतिरोध तथा नवीनता एवं परिवर्तन का विरोध हमेशा किया गया है।

विचारधारा के गुलाम

संत योहन रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा कि यहाँ संहिता के पंडितों के मनोभाव को दर्शाया गया है कि वे कितने कठोर थे। वे केवल अपने तक सीमित थे तथा पवित्र आत्मा के कार्यों एवं नवीनता के प्रति उदासीन थे। संत पापा ने समय के चिन्ह को नहीं परख पाने एवं अपने शब्दों और विचारधाराओं के गुलाम बने रहने को खेदजनक कहा।

संत पापा ने कहा कि वे अपने बंद दुनिया से बाहर नहीं निकल सकते हैं, वे अपने विचारों के गुलाम हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें संहिता प्राप्त हुई थी जो उनके लिए जीवन थी किन्तु उन्होंने उसे विचारधारा में बदल दिया। इस तरह वे उससे पूरी तरह घिर गये हैं एवं उससे बाहर नहीं निकल सकते है।

ईश्वर के पुत्र पुत्रियों की स्वतंत्रता

दूसरी ओर, ईश्वर के पुत्र पुत्रियों के विचार बिलकुल भिन्न होते हैं। यद्यपि आरम्भ में वे मौन रहते हैं किन्तु वे स्वतंत्र होते तथा पवित्र आत्मा को केंद्र में रखते हैं।

प्रथम शिष्यों का उदाहरण देते हुए संत पापा ने कहा कि वे नवीनता एवं ईश वचन के प्रति विनम्र थे। संत पापा ने गौर किया कि पवित्र आत्मा के प्रति विनम्र बनने का अर्थ है क्रांति लाना, परिवर्तन लाना तथा केंद्र में कानून को नहीं बल्कि पवित्र आत्मा को जगह देना।

कलीसिया एक क्रियाशील समुदाय है जो अपने आप से बाहर निकलती है। यह चुने हुए लोगों का बंद दल नहीं बल्कि मिशनरी है। यह पवित्र आत्मा के प्रति उदार है।

पथ प्रदर्शन हेतु प्रार्थना एवं आत्मजाँच

बंद करना एवं खोलना दो विपरीत पक्ष हैं जो दर्शाते हैं कि पवित्र आत्मा के सामने व्यक्ति किस तरह प्रतिक्रिया व्यक्त करता है। आरम्भिक शिष्यों को मालूम था कि प्रार्थना एवं आत्मपरख के सामने उनके रास्ते को कोई भी बाधा रोक नहीं कर सकती थी।

संत पापा ने कहा कि पवित्र आत्मा का विरोध हमेशा से होता आया है और होता रहेगा। उन्होंने प्रार्थना की कि प्रभु हमें कृपा प्रदान करें ताकि हम बुराई से आने वाली चीजों से बच सकें जो हमारी स्वतंत्रता छीन लेती है। हम नई चीजों के लिए अपने को खोलना सीखें जो ईश्वर की ओर से पवित्र आत्मा द्वारा आती है एवं प्रभु हमें समय के चिन्ह को पहचानने की कृपा और निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करे।


(Usha Tirkey)

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