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बपतिस्मा संस्कार, बुराई पर विजयी होने की शक्ति देता

In Church on April 25, 2018 at 3:47 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 25 अप्रैल 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को बपतिस्मा संस्कार पर अपनी धर्मशिक्षा देते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

हम ईश वचनों के दिव्य आलोक में बपतिस्मा संस्कार पर अपनी धर्मशिक्षा को जारी रखते हैं। ये सुसमाचार के वचन हैं जो दीक्षार्थियों को प्रकाशित करते और उन्हें अपने विश्वास में सबल होने हेतु मदद करते हैं। बपतिस्मा विशेष रूप में हमारे लिए “विश्वास का संस्कार है”, क्योंकि यह हमारे विश्वास के कारण अन्य संस्कारों के लिए एक द्वार बनता है। विश्वास, अपने आप को येसु ख्रीस्त के हाथों में सुपुर्द करना है जो हमारे लिए पुनरूत्थान और अनंत जीवन, दुनिया की ज्योति हैं जैसे कि आज भी दीक्षांत की धर्मविधि हेतु दी जाने वाली धर्मशिक्षा में हमें बतलाई जाती है। येसु ख्रीस्त की शिक्षा, उनके कार्यों और वचनों को सुन कर दीक्षार्थीगण अपने जीवन में समारी स्त्री की अनुभूति से अपने को रुबरू होता हुए पाते हैं जोकि जीवन जल के लिए प्यासी है। वे अपने को जन्मांध व्यक्ति के अनुभवों में सम्मिलित होता हुए पाते हैं जो जीवन को देखने की चाह रखता है। वे लाजरूस की भांति अपनी मृत्यु की कब्र से बार निकलते हैं। संत पापा फाँसिस ने कहा कि सुसमाचार अपने में उस शक्ति से भर है जो उन लोगों के जीवन में परिवर्तन लाता है जो विश्वास के साथ इसे धारण करते हैं। यह विश्वास उन्हें बुराई से बाहर निकलने में मदद करता है और वे अपने जीवन में नई ऊर्जा का अनुभव करते हुए खुशी से ईश्वर की सेवा करने में सामर्थ होते हैं।

बपतिस्मा के दौरान हम अपने में अकेले नहीं होते हैं वरन सारी कलीसिया हमारे साथ रहती और हमारे लिए प्रार्थना करती है जैसे कि धर्मविधि के दौरान दीक्षार्थियों में पवित्र तेल मलन के पूर्व  संतों की स्तुति बिन्ती की जाती है। ये सारी चीजें प्राचीन काल से चली आ रहीं वे सारी निशानियाँ हैं जो बपतिस्मा के द्वारा येसु ख्रीस्त में नये जीवन की शुरूआत करने वालों को यह आश्वासन देती है कि कलीसिया उनके लिये सदैव प्रार्थना करती है जिससे वे बुराइयों से बचे रहें। कलीसिया उनके साथ रहती और उन्हें पापों के जंजाल से दूर रखते हुए ईश्वरीय कृपा के राज्य में सहभागी होने हेतु मदद करती है। यही कारण है कि पुरोहित व्यस्क दीक्षार्थियों के दीक्षांत के दौरान उन्हें शैतान के प्रंपचों का परित्याग करने का घोषणा कराता है जिसमें उन सभी बातों का परित्याग करने की घोषणा की जाती है जो उन्हें येसु ख्रीस्त से अलग करते और उनके साथ संयुक्त होने में बाधक बनते हैं। इसके साथ ईश्वर से यह भी निवेदन किया जाता है कि वे अपने बच्चों को आदि पाप के बंधन से मुक्त करें और उन्हें पवित्र आत्मा का निवास स्थल बनायें। संत पापा ने कहा कि जिस तरह सुसमाचार हमें साक्ष्य देता है कि येसु ख्रीस्त ने स्वयं शैतान से युद्ध किया और उस पर विजय प्राप्त करते हुए ईश्वर के राज्य के आने की घोषणा की। (मत्ती. 12.28) शैतान पर येसु ख्रीस्त की विजय हमारे बीच ईश्वर के राज्य को स्थापित करता है जहाँ हम अपने में ईश्वर के संग मिलन की खुशी का अनुभव करते हैं।

“बपतिस्मा कोई जादुई मंत्र नहीं है”, संत पापा ने कहा, वरन यह हमारे लिए पवित्र आत्मा का उपहार है जो उन लोगों को “बुरी आत्माओं से लड़ाने के योग्य बनता है” जो यह विश्वास करते हैं कि “पिता ने अपने पुत्र को दुनिया में भेजा जिससे वे शैतान की शक्ति का विनाश करें और मानव को मृत्यु के अंधकार से निकाल कर ज्योति के अनंत राज्य में ले चलें।” उन्होंने कहा कि हम अपने अनुभव के द्वारा इस बात को जानते हैं कि ख्रीस्तीय जीवन सदैव परीक्षाओं से घिरा हुआ है जो हमें ईश्वर की योजनाओं और उनके साथ हमारे संबंध को तोड़ते हुए हमें दुनिया की मोह-माया के जालों में फँसा देता है।

संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि प्रार्थना के अलावे, “दीक्षार्थियों की छाती में दीक्षांत के तेल का विलेपन किया जाता है जिसके द्वारा वे पाप और शैतान का परित्याग करने की शक्ति प्राप्त करते हुए नये जीवन में प्रवेश करते हैं।” तेल का हमारे शरीर में प्रवेश करना हमारी कोशिकाओं के लिए लाभप्रद होता है, प्राचीन समय में कुश्ती लड़ने वाले अपने शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करने और आसानी से अपने विपक्षी की पकड़ में आने से बचने हेतु तेल का विलेपन करते थे। इस निशानी के परिपेक्ष में प्रथम सदी के ख्रीस्तियों ने दीक्षार्थियों के शरीर में बपतिस्मा के दौरान तेल मलन की धर्मविधि को अपनाया जो हमारे लिए मुक्ति की बात को निरुपित करती है।

संत पापा ने कहा,“बुराई से बचना, धोखा घड़ियों से दूर रहना, एक थकान भरे युद्ध के उपरांत अपनी शक्ति को पुनः प्राप्त करना हमारे लिए कठिन लगता है इसके बावजूद हमें यह जानना चाहिए कि हम ख्रीस्तियों का सम्पूर्ण जीवन एक युद्ध है। लेकिन हमें इस बात से भी वाकिफ होने की जरुरत है कि हम अकेले नहीं हैं बल्कि माता कलीसिया हमारे साथ है जो सदैव हमारे लिए प्रार्थना करती है जिससे हम बपतिस्मा द्वारा मिलने वाली कृपाओं में मजबूत बनते हुए शैतान के जंजालों से बचे रहें। यह इसलिए कि हमारे मुक्तिदाता येसु ख्रीस्त मृतकों में से जी उठे हैं। पुनर्जीवित प्रभु येसु की शक्ति से हम शैतान पर विजयी प्राप्त करते हैं (यो.12.31) संत पापा ने कहा कि हम संत पौलुस के शब्दों को अपने में दोहरा सकते हैं, “जो मुझे बल प्रदान करते हैं मैं उनकी सहायता से सब कुछ कर सकता हूँ। (फिलि. 4.13)

इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासी समुदाय का अभिवादन किया।

उन्होंने विशेष रुप से युवाओं, बुजुर्गों, बीमारों और नव विवाहितों की याद की। उन्होंने कहा कि आज हम सुसमाचार लेखक संत मारकुस का त्योहार मनाते हैं। हम उनकी मध्यस्था द्वारा विनय करें जिससे हमें अपने विश्वास के मार्ग में अडिग बने रहें और अपने जीवन के द्वारा येसु ख्रीस्त के सुसमाचार का साक्ष्य दे सकें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के साथ हे हमारे पिता प्रार्थना का पाठ किया और सबों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

 


(Dilip Sanjay Ekka)

संत पापा फ्राँसिस ने इंटर-कोरियाई शिखर सम्मेलन के लिए प्रार्थना की अपील की

In Church on April 25, 2018 at 3:46 pm


वाटिकन सिटी, बुधवार 25 अप्रैल 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 25 अप्रैल को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में बुधवारीय आमदर्शन समारोह के दौरान वहाँ उपस्थित विश्वासियों और तीर्थयात्रियों से इंटर-कोरियाई शिखर सम्मेलन के लिए प्रार्थना की अपील की।

सत पापा ने कहा,“अगले शुक्रवार, 27 अप्रैल को पानमुन्योम में अंतर-कोरियाई शिखर सम्मेलन होगा, जिसमें दोनों कोरियाई नेता, श्री मून जे-इन और श्री किम जोंग यून भाग लेंगे। कोरियाई प्रायद्वीप और पूरी दुनिया में शांति की गारंटी के लिए, यह बैठक एक पारदर्शी वार्तालाप और सुलह और भाईचारे का एक ठोस मार्ग शुरू करने का एक अनुकूल अवसर होगा।”

शांति की इच्छा करने वाले कोरिया के लोगों के प्रति संत पापा फ्राँसिस ने कहा,“कोरियाई लोगों के लिए, जो शांति चाहते हैं, मैं अपनी व्यक्तिगत प्रार्थना और पूरी कलीसिया की निकटता को आश्वस्त करता हूँ। परमधर्मपीठ लोगों के बीच बैठक और दोस्ती के नाम पर बेहतर भविष्य बनाने के लिए सभी उपयोगी और ईमानदार पहलुओं का समर्थन करता और प्रोत्साहित करता है।

संत पापा ने राजनीतिक नेताओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा,“ जिन लोगों को प्रत्यक्ष राजनीतिक जिम्मेदारियां हैं, उन्हें मैं शांति के “कारीगर” बनकर आशा के साथ आगे बढ़ने और सभी की भलाई के लिए शुरु किये गये मार्ग में विश्वास के साथ साहसपूर्वक जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ।”

संत पापा ने वहाँ उपस्थित विश्वासियों से कहा कि ईश्वर हम सभी का पिता है। शांति के ईश्वर से आइये, हम उत्तर और दक्षिण कोरिया के सभी लोगों के लिए प्रार्थना करें। इसके बाद संत पापा ने ‘हे पिता हमारे’ प्रार्थना की अगुवाई की।


(Margaret Sumita Minj)

चिली के यौन पीड़ितों से संत पापा की मुलाकात के बारे निदेशक, ग्रेग बर्क का वक्तव्य

In Church on April 25, 2018 at 3:43 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 25 अप्रैल 2018 (रेई) : चिली के यौन पीड़ितों से संत पापा की मुलाकात के बारे में पत्रकारों के सवालों के जवाब में, वाटिकन प्रेस कार्यालय के निदेशक ग्रेग बर्क ने घोषणा की कि “अगले सप्ताह के अंत में संत पापा फ्राँसिस चिली में पुरोहितों द्वारा किए गए यौनहिंसा के तीन पीड़ितों जुआन कार्लोस क्रूज़, जेम्स हैमिल्टन और जोस एंड्रेस मुरिलो से अपने निवास भवन संत मार्था में मुलाकात करेंगे।

निदेशक ग्रेग बर्क ने कहा कि संत पापा उन्हें निमंत्रण को स्वीकार करने के लिए धन्यवाद देते हैं साथ ही वे उनसे व्यक्तिगत रुप से मुलाकात कर उनके दर्द को साझा करना चाहते हैं उनसे इस शर्मिंदगी भरे कृत्य के लिए माफी मांगना चाहते हैं साथ ही, उनके सभी सुझावों को सुनना चाहते हैं जिससे कि इन ग़लत तथ्यों को फिर से न दोहराया जाए। संत पापा हर एक से व्यक्तिगत रूप में मिलेंगे और प्रत्येक को बोलने के लिए यथासंभव समय देंगे।

संत पापा इस दुखद समय पर चिली की कलीसिया के लिए प्रार्थना की अपील करते हैं और उम्मीद करते हैं कि ये मुलाकात शांत और विश्वास के माहौल में हो और शक्ति के दुरुप्योग से बचने के लिए विशेष रूप से कलीसिया में यौन संबंधों से बचने का उपाय करने हेतु यह मौलिक कदम बने।


(Margaret Sumita Minj)

वेनेज़ुएला के धर्माध्यक्षों ने राजनीतिक नेताओं से अपील की

In Church on April 25, 2018 at 3:42 pm


वेनेजुएला, बुधवार 25 अप्रैल 2018 (वीआर,रेई) : वेनेजुएला के धर्माध्यक्षों ने देश के लोगों को प्रभावित करने वाली गंभीर मानवतावादी समस्याओं को दूर करने के लिए राज्य के नेताओं से अपील की और वे इस समय गैर-निर्णायक रूप में राष्ट्रपति के फिर से चुनाव को गैर-कानूनी मानते हैं।

वेनेजुएला के धर्माध्यक्षों ने महत्वपूर्ण बयान प्रकाशित किया है जिसमें उन्होंने पीड़ित लोगों के गंभीर समस्याओं की एक श्रृंखला सूचीबद्ध की है और इन समस्याओं के मुकाबले “सरकारी अधिकारियों की आश्चर्यजनक उदासीनता” के लिए अपनी चिंता व्यक्त की है।

उन्होंने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपनी पुन: चुनाव पर पुनर्विचार करने और लोगों की गंभीर मानवीय समस्याओं से तत्काल निपटने हेतु अपील की है।

वेनेजुएला के नागरिकों के रूप में एवं मसीह के प्रेम संचालित धर्माध्यक्षों ने सोमवार को जारी बयान की शुरुआत इस प्रकार से की,” हम हमारी इच्छाओं को साझा करने के लिए काथलिकों और अच्छी ईच्छा वाले सभी पुरुषों और महिलाओं के पास जाते हैं।”

“हम इस बात के लिए चिंतित हैं कि इस साल जनवरी में हमने अपने प्रेरितिक पत्र में जिन बुराईयों के बारे में संकेत किया था उन बुराईयों से देश बुरी तरह प्रभावित हुआ है।: अति स्फिति की वजह से सभी के जीवन की गुणवत्ता के अपघटन के साथ जनसंख्या की सामान्य गरीबी स्तर में वृद्धि हुई है। बयान में कहा गया है कि पूरे देश में बिजली, पानी और गैस सेवाओं की सामान्य कमी जीवन को और अधिक कठिन बनाया है।

भूख, बेरोजगारी, स्वास्थ्य देखभाल की कमी

बयान में उन्होंने यह भी कहा है कि राष्ट्रपति मदुरो द्वारा खाद्यान्न की कमी को दूर करने हेतु बनायी गई बहुत सी योजनाएं काम नहीं कर रही हैं तथा “भूखमरी और बेरोजगारी की समस्या ओर भी विकराल रुप ले लिया है।”

प्रवासी

धर्माध्यक्ष इस तथ्य को उजागर करते हैं कि समाज के सभी स्तरों से अधिक से अधिक वेनेज़ुएला वासी बड़ी संख्या प्रवास कर रहे हैं। इससे पारिवारिक संबंध टूट रहे हैं।  परिवार के वयस्क अपने बुजुर्गों और बच्चों को घरों में छोड़कर दूसरे स्थान काम की खोज जा रहे हैं।

धर्माध्यक्षों ने उन देशों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है जिन्होंने वेनेज़ुएलावासियों का स्वागत किया और उन्हें स्वीकार किया। कलीसिया के संगठनों के प्रति आभार प्रकट करते हैं जिन्होंने प्रवासियों को सहायता दी है।

राष्ट्रपति चुनावों में वैधता की कमी है

धर्माध्यक्षों ने मानवीय समस्याओं का सामना करते हुए इस समय राष्ट्रपति चुनाव को “वैधता की कमी” कहा है। चुनाव 20 मई को निर्धारित किया गया है।

धर्माध्यक्ष इस अवधारणा पर विस्तार से कहते हैं कि निर्वाचन अभियान को स्वतंत्र, भरोसेमंद और पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया की कल्पना नहीं की जा सकती है।”इसलिए साल के आखिरी तिमाही में मतदान (वोट) स्थगित करना जरूरी है।”

राष्ट्र के नेताओं से अपील

धर्माध्यक्ष कई मुद्दों के लिए ज़िम्मेदारी लेने और लोगों की बातों को सुनने और बिना देरी के उनके साथ जुड़ने के लिए राष्ट्र के शासकों और नेताओं से अपनी तत्काल अपील दोहराते हैं।

उनका सुझाव है कि अति स्फिति को नियंत्रित करने और राजनीतिक समाधानों की खोज को सुविधाजनक बनाने के प्रयास में निजी क्षेत्रों की सहायता और यहां तक कि पड़ोसी देशों से भी मांग की जा सकती है।

वेनेज़ुएला के धर्माध्यक्षों ने “विश्वास की शक्ति और आशा की शक्ति” के माध्यम से पुनर्जीवित प्रभु में विश्वास करते हुए साहस के साथ अपने उत्तरदायित्व को लेने को कहा इस जानकारी के साथ कि आखिरी शब्द अकेलापन, पीड़ा या निराशा नहीं है, बल्कि ईश्वर है।


(Margaret Sumita Minj)

मिशनरी महाधर्माध्यक्ष की अंतिम बिदाई में हजारों ने शोक प्रकट किया

In Church on April 25, 2018 at 3:40 pm

भोपाल, बुधवार 25 अप्रैल 2018 (उकान) :  सोमवार 23 अप्रैल को पश्चिमी महाराष्ट्र राज्य के नागपुर शहर के संत फ्राँसिस डी सेल्स महागिरजाघर में नागपुर के महाधर्माध्यक्ष अब्राहम विरुथकुलंगारा के अंतिम संस्कार में कम से कम 5,000 लोगों ने भाग लिया और उन्हें भावभीनी बिदाई दी।

महाधर्माध्यक्ष अब्राहम विरुथकुलंगारा का निधन 19 अप्रैल को नई दिल्ली में दिल का दौरा पड़ने से हुआ। 74 वर्षीय महाधर्माध्यक्ष 30 अन्य धर्माध्यक्षों के साथ एक सभा में भाग लेने हेतु दिल्ली स्थित सीबीसीआई के मुख्यालय में थे।

दो कार्डिनलों और हिंदी भाषी धर्मप्रांतों के पचास से अधिक धर्माध्यक्षों ने महाधर्माध्यक्ष विरुथकुलंगारा के अंतिम संस्कार में भाग लिया। वे 34 साल की उम्र में 1977 में धर्माध्यक्ष के रूप में नियुक्त हुए थे।

नागपुर महाधर्मप्रांत के प्रवक्ता फादर लीजो जोसेफ ने कहा कि आदिवासियों के बीच अपने काम के लिए महाधर्माध्यक्ष विरुथकुलंगारा बहुत लोकप्रिय और सम्मानित थे। वे कई वर्षों तक धर्माध्यक्षीय युवा आयोग के अध्यक्ष भी थे।

सिरो-मलंकारा कलीसिया के प्रमुख कार्डिनल बेसिलियोस मार क्लीमिस ने मुख्य अधिष्ठाता के रुप में अंतिम संस्कार धर्मविधि का अनुष्ठान किया। उन्होंने कहा कि महाधर्माध्यक्ष विरुथकुलंगारा “भारत की कलीसिया के लिए एक अनमोल उपहार” थे। “वे साधारण लोगों के साथ रहने के लिए गांवों का दौरा किया करते थे। वे लोगों के साथ रहना पसंद करते थे। वे उन लोगों के सुख और दुख को साझा करते थे।

सिरो-मालाबार कलीसिया के प्रमुख कार्डिनल जॉर्ज अलेंचेरी ने अपने प्रवचन में कहा कि महाधर्माध्यक्ष विरुथकुलंगारा ने “धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में सभी लोगों का दिल जीता है।”

मध्यप्रदेश के खांडवा धर्मप्रांत से बहुत से विश्वसियों ने अंतिम संस्कार में भाग लिया जहाँ महाधर्माध्यक्ष ने एक पुरोहित और धर्माध्यक्ष के रुप में अपनी सेवा दी। अपनी सादगी के लिए वे जाने जाते थे।

हिंदू मेडिकल डॉक्टर मुनीश मिश्रा ने कहा, “जरूरतमंदों के लिए उनका विशेष प्यार था और जाति, पंथ या रंग की परवाह किये बिना वे गरीबों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते थे।”

खांडवा धर्मप्रांत के 71 वर्षीय पुरोहित जोय पर्पली ने कहा कि कि महाधर्माध्यक्ष विरुथकुलंगारा ने बरेला आदिवासी समुदाय के बीच काम किया। उन्होंने आदिवासियों और वंचित लोगों के बीच “काम करने के लिए एक विशेष प्यार” विकसित किया।


(Margaret Sumita Minj)

 

विश्व टीकाकरण सप्ताह: टीके जीवन को बचाती हैं

In Church on April 25, 2018 at 3:38 pm

वाटिकन रेडियो, बुधवार,25 अप्रैल 2018 (वीआर,रेई) : मंगलवार 24 अप्रैल से विश्व टीकाकरण सप्ताह शुरू हुआ और 30 अप्रैल तक चलेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने टीकाकरण की प्रभावशीलता के साथ आशावादी आंकड़े प्रदान किया है, साथ ही ऐसे मामले जहां प्रगति अभी भी की जानी चाहिए।

मई 2012 में, 194 देशों ने विश्व स्वास्थ्य असेंबली में ग्लोबल वैक्सीन एक्शन प्लान का समर्थन किया। डब्ल्यूएचओ के रिपोर्ट अनुसार 2020 तक खसरा, रूबेला और जच्चा बच्चा टेटनस जैसी बीमारियों को खत्म करने का उनका लक्ष्य अनुसूची के पीछे है।

डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि टीकाकरण द्वारा हर साल 2 से 3 मिलियन मौतों को रोका जाता है। दूसरी तरफ, दुनिया भर में टीकाकरण कवरेज की वृद्धि के साथ लगभग 1.5 प्रतिषत मौतों को रोका जा सकता है।

टीकाकरण न केवल मृत्यु को रोकता है, वे बीमारी को भी रोक सकते हैं, इन बीमारियों में शामिल हैं: डिप्थीरिया, खसरा, मम्प्स, रूबेला, निमोनिया, खांसी खांसी, पोलियो, टेटनस, हेपेटाइटिस बी, और दस्त।

2016 में, दुनिया की शिशु आबादी का 86% (116.5 मिलियन शिशु) ने 30 साल पहले डिप्थीरिया-टेटनस-पेटसुसिस टीका 34% प्राप्त किया था। प्रत्येक 7 का 1 बच्चा टीका से वंचित है। लगभग 1 9 .5 मिलियन बच्चे है, जिनमें से आधे 6 देशों नाइजीरिया, भारत, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, इथियोपिया और कांगो में रहते हैं।

त्वरित तथ्य

देशों में संघर्ष और हिंसा की वजह से टीकाकरण कवरेज घट रहा है। पलाऊ, माल्टा, कांगो, अज़रबैजान, इथियोपिया, पूर्वी तिमोर, बारबाडोस, कोस्टा रिका और भारत में टीकाकरण कवरेज बढ़ रहा है।

यमन में कोलेरा के अनुमानित 1 मिलियन मामले हैं-जो इसे इतिहास में सबसे खराब कोलेरा महामारी को अंकित करते हैं।

डिप्थीरिया, जो लगभग मिटा दिया गया था पर रोहिंग्या शरणार्थियों के बीच डिप्थीरिया के प्रकोप फैल रहा है- इनमें से 75% मामलों में बच्चे शामिल हैं।

पोलियो लगभग पूरी तरह से मिटा दिया गया है। पिछले साल 2 देशों में केवल 22 मामले दर्ज किए गए थे।

2026 तक अनुमानित 1 बिलियन अफ्रीका वासियों को पीले बुखार के खिलाफ टीका लगाया जाएगा।

15 देशों के अलावा अन्य सभी देशों में माता और नवजात टेटनस को खत्म कर दिया गया है। पिछले वर्ष 2017 में तीन देश फिलीपींस, इथियोपिया और हैती में इसे समाप्त किया गया।


(Margaret Sumita Minj)

सच्चे ख्रीस्तीय अपने को दूसरों के सामने खोलने से डरते नहीं, संत पापा फ्राँसिस

In Church on April 25, 2018 at 3:36 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 25 अप्रैल 2018 (रेई) : आज काथलिक कलीसिया सुसमाचार लेखक संत मारकुस का त्योहार मनाती है। सुसमाचार के द्वारा ईश्वर हमें सच्चाई में विश्वास करने और भाईचारे की जीवन जीने के लिए बुलाया है। ट्वीट प्रेषित कर संत पापा ने कलीसिया को सच्चे ख्रीस्तीयों की जीवन जीने की प्रेरणा दी।

संदेश में उन्होंने लिखा, “सच्चे ख्रीस्तीय अपने को दूसरों के सामने खोलने से डरते नहीं हैं ताकि वे अपने रहने की जगहों को बिरादरी के स्थानों में बदलकर दूसरों के साथ साझा कर सकें।”


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस के साथ कार्डिनल परिषद की बैठक

In Church on April 25, 2018 at 3:35 pm


वाटिकन सिटी, बुधवार 25 अप्रैल 2018 (रेई) : बुधवार 25 अप्रैल को वाटिकन प्रेस कार्यालय के निदेशक, ग्रेग बर्क ने वाटिकन में संत पापा के सलाहकार कार्डिनल परिषद की 24 वीं सत्र के तीसरे और आखिरी दिन बैठक के बारे पत्रकारों को संक्षिप्त टिप्पणी की।

उन्होंने कहा कि संत पापा के सलाहकार कार्डिनल परिषद के काम का एक बड़ा हिस्सा परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय के एक नए प्रेरितिक संविधान के मसौदे को समर्पित किया गया है, जिसे अंतिम अनुमोदन के लिए संत पापा को सौंप दिया जाएगा।

नए संविधान हेतु निम्न विषयों का उल्लेख है संत पापा और स्थानीय कलीसियाओं के लिए कूरिया सेवा, उनकी गतिविधियों के प्रेरितिक चरित्र, राज्य के सचिवालय के तीसरे खंड की स्थापना और कार्य, तथा परमाध्यक्षीय कार्यालय की गतिविधियों के लिए मार्गदर्शक सिद्धांतों के रूप में सुसमाचार और मिशनरी भावना की घोषणा।

नाबालिगों का संरक्षण

कार्डिनल शॉन ओ. मालली ने कार्डिनलों को कलीसिया में नाबालिगों और कमजोर वयस्कों की रक्षा के लिए किए गए प्रयासों को प्रस्तुत किया। उन्होंने उत्तरजीवी सलाहकार पैनल और नाबालिगों के संरक्षण के लिए परमध्मपीठीय आयोग के बीच हाल की बैठक का भी संदर्भ दिया और दुर्व्यवहार पीड़ितों के अनुभवों को सुनने और उनके कहानियों को शुरुआती बिंदु के रूप में सुनने के महत्व पर बल दिया।

सत्र के अंतिम दिन सभा सुबह और दोपहर तक आयोजित कीजाती है।  परिषद की अगली बैठक 11 से 13 जून तक होगी।


(Margaret Sumita Minj)

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