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ईश्वर और अपने पड़ोसी से प्यार करें

In Church on April 28, 2018 at 11:53 am

वाटिकन सिटी, शनिवार 28 अप्रैल 2018 ( रेई ) : ख्रीस्तीय किसी सिद्धांत पर नहीं पर ईश्वर के पुत्र प्रभु येसु ख्रीस्त के पद चिन्हों और उनकी शिक्षा पर चलते हैं। काथलिक कलीसिया के परमाध्यक्ष संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 28 अप्रैल को ट्वीट प्रेषितकर सभी ख्रीस्तीयों को येसु मसीह के पदचिन्हों पर चलने की प्रेरणा दी।

संदेश में उन्होंने लिखा,“ प्रभु येसु हमारे लिए अपना प्राण देकर अपने प्यार को प्रकट किया हैं, ताकि हम भी ईश्वर और अपने पड़ोसी से प्यार कर सकें।”

संत योहन के सुसमाचार में हम पाते हैं जहाँ येसु अपने शिष्यों को नई आज्ञा देते हुए कहते हैं,“ मैं तुम लोगों को एक नई आज्ञा देता हूँ-तुम एक दूसरे को प्यार करो जिस प्रकार मैंने तुम लोगों को प्यार किया, उसी प्रकार तुम भी एक दूसरे को प्यार करो। (अध्याय 13,पद 34)


(Margaret Sumita Minj)

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कोरियाई काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा शिखर सम्मेलन का स्वागत

In Church on April 28, 2018 at 11:52 am

कोरिया, शनिवार, 28 अप्रैल 2018 (एशियान्यूज़) ˸ कोरिया के दो नेताओं ने अपने देश के 80 मिलियन लोगों तथा समस्त विश्व के सामने समारोह पूर्वक घोषित किया कि कोरियाई प्रायद्वीप में फिर कभी युद्ध नहीं होगा। ‘अब एक नया इतिहास शुरू हो रहा है, शांति का युग।’ उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया में दाखिल होने के बाद गेस्ट बुक में ये शब्द लिखे।”

27 अप्रैल 2018 को उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच शिखर वार्ता हुई। इसमें उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और दक्षिण कोरिया के नेता मून जे इन ने हिस्सा लिया। दोनों देशों ने कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने का संकल्प लिया।.ीं होगा और शांति का एक नया युग  उठायें ैं जो उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा है एवं जिन्हें चिकित्सा :।

दोपहर की बातचीत के अंत में, दोनों नेताओं ने “पानमुनजोम घोषणा” पर हस्ताक्षर किए। इसके अनुसार, दोनों कोरियाई प्रायद्वीप परमाणुकरण और सैन्य तनाव को कम करने हेतु सहयोग करने के लिए चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ बहुपक्षीय वार्ता शुरू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

इस तरह अब दोनों देश “शत्रुतापूर्ण कृत्यों” को समाप्त कर देंगे, पश्चिमी सागर में कासोंग शहर की सीमा पर संयुक्त संचार कार्यालय “शांति का क्षेत्र” स्थापित किया जाएगा तथा वे “मानवतावादी समस्याओं को हल करने के लिए रेड क्रॉस के साथ बातचीत के लिए खुलेंगे।”

शुक्रवार को किम एवं मून ने कई घंटों तक साथ में व्यतीत किया तथा करीब 30 मिनट तक व्यक्तिगत बातचीत की। उन्होंने कोरियाई युद्ध में बिछुड़े परिवरों को पुनः एक साथ लाने तथा आर्थिक सहयोग शुरू करने पर सहमति जतायी।

कोरिया के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने शिखर सम्मेलन का स्वागत किया है। एक वक्तव्य में धर्माध्यक्षों ने शिखर सम्मेलन के पहले कहा था कि यह एक मूल्यवान समय है जिसे ईश्वर ने कोरिया के लोगों को उनकी प्रार्थनाओं के उत्तर में प्रदान किया है। कई महिनों से दक्षिण कोरिया की कलीसिया हर शाम शांति हेतु प्रार्थना कर रही थी। धर्माध्यक्षों ने कहा कि यह इस धरती पर एक चमत्कार है।

पिछला साल शिखर सम्मेलन असम्भव प्रतीत हो रहा था जब अमरीका एवं उत्तर कोरिया ने एक दूसरे पर परमाणु खतरे की धमकी दे रहे थे।


(Usha Tirkey)

विश्व ख्रीस्तीय मंच को ख्रीस्तीय एकता हेतु गठित परमधर्मपीठीय सम्मेलन के सचिव का संदेश

In Church on April 28, 2018 at 11:51 am

बगोटा, शनिवार 28 अप्रैल 2018 (रेई) : कोलंबिया में विश्व ख्रीस्तीय मंच के प्रतिभागियों को ख्रीस्तीय एकता हेतु गठित परमधर्मपीठीय सम्मेलन के सचिव धर्माध्यक्ष ब्राएन फार्रेल ने अपने संबोधन में ख्रीस्तीय एकता को बढ़ावा देने के लिए 6 इच्छाओं को व्यक्त किया।

‘एक साझा विश्वास’

कोलंबिया के बागोटा में 24 से 27 अप्रैल तक हुए तीसरे विश्व ख्रीस्तीय मंच के पांच दिवसीय सम्मेलन में धर्माध्यक्ष ब्राएन फार्रेल ने कहा, “हमें एक-दूसरे को वास्तव में जानने के लिए संपर्क और संवाद की ज़रूरत है जिससे कि हम एक-दूसरे पर भरोसा कर सकें, एक दूसरे से सीखें और साथ मिलकर काम करें और एसा करने से आपसी मतभेद और आपसी संघर्ष भी कम होगा।”

ख्रीस्तीयता की नई अभिव्यक्ति

धर्माध्यक्ष ब्राएन फार्रेल ने अपनी 6 इच्छाओं को व्यक्त किया जिसमें पहला है कि परंपरागत कलीसियायें ख्रीस्तीय धर्म के नए अभिव्यक्तियों जैसे पेंटेकोस्टल और करिश्माई कलीसिया का सम्मान करते हैं और उन्हें गंभीरता से लेते हैं। इन नए विश्वासों का अनुभव परंपरा से आ रहे “कानूनों और परंपराओं” साथ ही “नैतिक मानकों के बारे हमारे साहस की कमी” को चुनौती देता है।

ख्रीस्तीय धर्म के इन नए अभिव्यक्तियों को संबोधित करते हुए धर्माध्यक्ष फार्रेल ने उन्हें “पवित्रशास्त्र और इसके प्रभाव” के आलोचनात्मक समझ से बचने हेतु “अपने ईशशास्त्र के आधार को गहन” करने के लिए आमंत्रित किया।

धर्म परिवर्तन

धर्माध्यक्ष फार्रेल ने कहा कि बपतिस्मा संस्कार द्वारा हम ख्रीस्तीय समुदाय के सदस्य बनते हैं। हमारी एकता के आधार येसु ख्रीस्त में बपतिस्मा है। बपतिस्मा के माध्यम से, “पानी और त्रित्वमय ईश्वर में विश्वास के सूत्र द्वारा ख्रीस्तीय समुदाय के साथ सामंजस्य में प्रवेश करते हैं।” अतः उन्होंने ख्रीस्तीय समुदाय को सभी प्रकार के धर्मांतरण से बचने के लिए आमंत्रित किया।

ख्रीस्तीय एकता का समय

धर्माध्यक्ष फार्रेल ने आशा व्यक्त की कि वे ख्रीस्तीय समुदाय जो ” ख्रीस्तीय एकता वर्धक आंदोलन के प्रति शंकालु हैं, वे यह पहचान सकते हैं कि ख्रीस्तीय समुदाय का आधार सुसमाचार है और यह पवित्र आत्मा से प्रेरित है।” उन्होंने आग्रह किया कि कलीसिया की संरचनाओं पर आधारित चर्चाओं को सुसमाचार में विश्वास को साझा करने में बदल दिया जाए।

सामान्य अनुभव

अंत में उन्होंने यह इच्छा व्यक्त की कि उन सभी बाधाओं को दूर किया जाए जिससे कि बाइबल अध्ययन, प्रार्थना और मिशन को सामान्य और सामूहिक रूप से किया जा सके।

हम ईश्वरीय कृपा को साझा करते हैं

धर्माध्यक्ष फार्रेल ने अपने संबोधन को समाप्त करते हुए कहा कि विश्व ख्रीस्तीय मंच यदि सभी ख्रीस्तीय समुदाय मतभेदों को जोर देने के बजाय दोस्ती और एकजुटता के नए युग की शर्तों को बनाता है तभी हम राष्ट्रों के लिए सुसमाचार प्रचार हेतु ईश्वर के आदेश को पूरा कर सकते हैं।”


(Margaret Sumita Minj)

गुमला में आदिवासियों द्वारा रैली का आयोजन

In Church on April 28, 2018 at 11:50 am

नई दिल्ली, शनिवार, 28 अप्रैल 2018 (ऊकान)˸ झारखंड राज्य के गुमला शहर में हजारों आदिवासियों ने एक रैली में भाग लेकर अपने पारंपरिक धर्मों की मान्यता की मांग की।

24 अप्रैल को लगभग 10,000 लोगों की रैली ने हिंदू भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा संचालित राज्य की सरकार पर दबाव डाला, जो आदिवासियों को हिंदु मानता है और सरना धर्मों को आधिकारिक दर्जा देने से इंकार करता है।

आदिवासियों के लिए काम कर रहे कलीसिया के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि रैली विभिन्न समूहों और धर्मों के आदिवासी लोगों को एक साथ लाने में सफल रही।

गुमला धर्मप्रांत के विकर जेनेरल फादर सिप्रियन कुल्लू ने कहा कि सरकार एक राजनीतिक खेल के तहत सरना धर्म मानने वालों को हिन्दूओं की गिनती में रखती है।

उन्होंने रेली के बारे ऊका समाचार से कहा, “यह निश्चय ही एक सकारात्मक कदम है क्योंकि इस क्षेत्र में यह पहली बार था कि सभी धर्मों के आदिवासी एक मंच पर आए हैं और अपने अधिकारों की मांग की।”

फादर ने कहा कि सत्ताधारी सरकार और हिंदू समूह, राज्य के आदिवासी लोगों को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए विभाजित रखने और उनके अधिकारों की मांग पर जोर देने के प्रयासों को कमजोर करने के लिए काम कर रहे हैं।

उनके अनुसार “विशाल रैली की सफलता ने साबित कर दिया है कि लोगों ने ‘फूट डालो और शासन करो की नीति’ की राजनीति के पीछे के एजेंडे को समझ लिया है।

आधिकारिक तौर पर, आदिवासियों की संख्या झारखंड के 33 मिलियन लोगों का केवल 26 प्रतिशत है।

कलीसियाई नेता बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मध्य-पूर्वी राज्यों में सरना धर्मों की मान्यता के लिए मांग का समर्थन कर रहे हैं।

नेताओं ने कहा कि सदियों पुरानी धर्म की आधिकारिक मान्यता आदिवासी लोगों को अपने पारंपरिक प्रथाओं को स्थापित करने और उनकी मूल पहचान बहाल करने में मदद करेगी। लेकिन हिन्दू समुदाय भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के अपने लक्ष्य में जनजातीय लोगों के पहचान को ध्वस्त करने का काम कर रहा है।

सरकार ने आदिवासी भूमि अधिकारों की रक्षा करने वाले कानून में बदलाव लाने की कोशिश की थी किन्तु कलीसियाई समूहों द्वारा समर्थित बड़े पैमाने पर विरोध ने सरकार को इसे वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया।

सरकार ने कहा था कि भूमि अधिग्रहण आदिवासियों के लिए नौकरियां और विकास लाएगा किन्तु कलीसिया ने उसका विरोध किया क्योंकि आलोचकों का कहना था कि कानूनी संशोधन का उद्देश्य बड़ी कंपनियों के लिए जमीन उपलब्ध कराना था।

नई दिल्ली में इंडियन सोशल इंस्टीट्यूट में जनजातीय अध्ययन विभाग के प्रमुख फादर विन्सेंट एकका ने कहा कि सरकारी नीतियों का उद्देश्य है आदिवासी लोगों की पहचान और संसाधनों को खत्म करना।

फादर ने कहा, “सरकार जनजातीय पहचान और अस्तित्व को खत्म करना चाहती है, लेकिन सरकार चलाने वाले लोग यह भी जानते हैं कि उन्हें अगले साल चुनाव का सामना करना पड़ेगा। वोट जीतने के लिए धर्म और जातीयता का उपयोग करना उनकी रणनीति है।”

झारखंड में 1.4 मिलियन ईसाई लगभग पूरी तरह से आदिवासी समुदाय से आते हैं लेकिन 8.5 मिलियन आदिवासी भी राज्य की आधिकारिक गिनती में अल्पसंख्यक हैं।

2014 में बीजेपी शासन के तहत राज्य ने हिंदू कट्टरपंथियों की ईसाई विरोधी गतिविधियों को देखा है। कई दलित और जनजातीय नेताओं का आरोप है कि उनके समुदायों को हिंसा से धमकी दी जाती है ताकि उन्हें ईसाई बनने से मना किया जा सके।


(Usha Tirkey)

स्वर्ग उबाऊ नहीं है

In Church on April 27, 2018 at 2:30 pm

वाटिकन सिटी, 27 अप्रैल 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन संत मार्था के अपने निवास में शुक्रवार प्रातःकालीन मिस्सा बलिदान के दौरान अपने प्रवचन में कहा, “स्वर्ग उबाऊ नहीं है।”

उन्होंने प्रेरित चरित से लिये गये प्रथम पाठ के आधार पर संत पौलुस द्वारा अंताखिया के पेसिदिया में दिये गये प्रवचन पर अपना चिंतन प्रस्तुत करते हुए कहा कि येरुसलेम के यहूदियों ने येसु को नहीं पहचाना और उन्हें मृत्यु दंड दिया। लेकिन वे मृतकों में से जी उठे।

ईश्वर की प्रतिज्ञा को हृदय में संजोये रखें

संत पापा फ्रांसिस ने कहा, “येसु ख्रीस्त का पुरुत्थान हमारे लिए ईश्वर की प्रतिज्ञा का पूरा होना है।” ईश्वर की चुनी हुई प्रजा इस प्रतिज्ञा को अपने हृदय में धरण करते हुए जीवन में आगे बढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि हम अपने में इस बात को जानते हैं कि हम ईश्वर के द्वारा “चुने गयें” हैं और उनके प्रति हमारी निष्ठावान की कमी होने पर भी वे हमारे प्रति निष्ठावान बने रहते हैं।

हम भी अपने जीवन में आगे बढ़ते हैं। और यह पूछे जाने पर कि हम कहाँ जा रहें हैं हम कहते हैं कि स्वर्ग की ओर। लेकिन हमें कोई यह पूछता है कि “यह स्वर्ग क्या हैॽ” तो हम इसका सही उत्तर नहीं दे पाते हैं। स्वर्ग का दृश्य हमारे लिए बहुधा अस्पष्ट और सुदूर लगता है… और हम सोचते हैं, “लेकिन उस स्थान पर सदैव रहना क्या उबाऊ नहीं होगाॽ” नहीं, यह स्वर्ग नहीं हो सकता है। हम एक मिलन की ओर आगे बढ़ रहें हैं। स्वर्ग में हमारी मुलाकात येसु से होगी।”

येसु हमारे लिए प्रार्थना करते हैं

संत पापा ने कहा कि हम सदैव इस बात की याद करें, “मैं अपने जीवन में येसु से मुलाकात करने हेतु आगे बढ़ रहा हूँ।” यह मिलन मुझे अनंत खुशी के रुप में प्राप्त होगी। “लेकिन येसु इस समय क्या करते हैंॽ” संत पापा ने अंतिम व्यारी के समय येसु द्वारा प्रेत्रुस को किये गये प्रतिज्ञा की याद दिलाई, जिसे संत योहन लिखते हैं, येसु हमारे साथ चलते और हमारे लिए प्रार्थना करते हैं।

“हमें से प्रत्येक जन को कहना चाहिए, “येसु मेरे लिए प्रार्थना करते हैं, वे मेरे लिए एक स्थान तैयार करते हैं। वे निष्ठावान हैं। वे ऐसा करते हैं क्योंकि उन्होंने इसके लिए हमसे प्रतिज्ञा की है। स्वर्ग हमारे लिए वह मिलन स्थल होगा, जिसके लिए येसु हम से पहले, हममें से प्रत्येक जन के लिए स्थान तैयार करने को गये हैं। यह हमारे विश्वास को बढ़ाता है।”

येसु की मध्यस्थ प्रार्थना

संत पापा ने अपने प्रवचन के अंत में कहा कि येसु ख्रीस्त की पुरोहिताई मध्यस्थ प्रार्थना दुनिया के अंत तक हमारे साथ है- “हे प्रभु येसु हम सबों में चेतना जगृत कर जिससे हम तेरी प्रतिज्ञा के पथ पर चल सकें। तू हमें अपनी कृपा प्रदान कर जिससे हम स्वर्ग की ओर अपनी नजरें उठाये रहें, क्योंकि “तू हमारे लिए प्रार्थना करता रहता है।”

 


(Dilip Sanjay Ekka)

पूर्वधारणाओं से मुक्त युवाओं को सुनने का मोन्टफोर्ट मिशनरियों से सन्त पापा ने किया आग्रह

In Church on April 27, 2018 at 2:29 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने मोन्टफोर्ट मिशनरियों से आग्रह किया है कि वे पूर्वधारणाओं से मुक्त रहकर युवा लोगों की सुनें तथा अपने समुदायों को आतित्थपूर्ण बनायें।

सन्त लूईजी मरिया ग्रिन्योन दे मोन्टफोर्ट द्वारा लगभग 300 वर्षों पूर्व स्थापित सन्त गाब्रिएल के धर्मबन्धु नामक धर्मसमाज की 32 वीं आम सभा में भाग ले रहे धर्मसमाज के प्रतिनिधि इस समय रोम में हैं। शुक्रवार को उन्होंने सन्त पापा फ्राँसिस का साक्षात्कार कर उनका सन्देश सुना।

शुक्रवार को सन्त पापा ने सन्त गाब्रिएल धर्मसमाज के प्रतिनिधि और साथ ही इस धर्मसमाज से संलग्न प्रज्ञा की सुपुत्रियाँ धर्मसंघ एवं सन्त जोसफ को समर्पित कोट्टायम की धर्मबहनों का हार्दिक अभिवादन किया तथा उन्हें अपने संस्थापक लूईजी मरिया ग्रिन्योन दे मोन्टफोर्ट के पद चिन्हों पर चलने का परामर्श दिया।

सन्त पापा ने कहा कि सतत् प्रार्थना, मनन चिन्तन एवं अध्ययन द्वारा धर्मसमाज के संस्थापक मोन्टफोर्ट प्रेम एवं प्रज्ञा को पा सके तथा संसार के कोलाहल में भी विनम्रतापूर्वक प्रभु ईश्वर की आवाज़ सुन सके थे।

धर्मसमाज की 32 वीं आम सभा के प्रतिभागी पुरोहितों, धर्मबन्धुओं एवं धर्मबहनों का ध्यान आम सभा के विषय पर आकर्षित कराते हुए सन्त पापा ने कहा कि इसमें भ्रातृत्व जीवन एवं मोन्टफोर्ट मिशन के सामुदायिक आयाम पर बल दिया गया है।

सन्त पापा ने कहा यह विषय व्यक्तिवाद एवं वैश्वीकरण से चिन्हित विश्व में मिशनरियों को स्मरण दिलाता है कि वे अपने-अपने समुदायों में भ्रातृत्व को प्रोत्साहन दें और यह केवल प्रतिदिन प्रार्थना करने, विनम्रतापूर्वक पवित्रआत्मा को सुनने, अपने समुदाय के नियमों के प्रति सत्यनिष्ठ रहने तथा उदारता पर अमल करने से सम्भव हो सकेगा।

धर्मसामाजिक समुदायों में भर्ती होने के इच्छुक युवाओं के प्रति विशेष ध्यान देने का सन्त पापा ने पुरोहितों से आग्रह किया और कहा कि युवाओं को सुनना, उनका स्वागत करना तथा उनकी समस्याओं को सुलझाने का प्रयास करना मोन्टफोर्ट के मिशनरियों का खास मिशन है।


(Juliet Genevive Christopher)

मानवाधिकार संगठनों ने आसाराम को आजीवन कारावास की सज़ा का किया स्वागत

In Church on April 27, 2018 at 2:27 pm

भोपाल, शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018 (ऊका समाचार): एक भारतीय अदालत द्वारा नाबालिग लड़की से बलात्कार के लिए बाबा आसाराम को मिली उम्र क़ैद पर प्रतिक्रिया दर्शाते हुए भारत के मानवाधिकार कार्यकर्त्ताओं ने कहा है कि इससे न्यायपालिका में लोगों की आस्था को पुनर्जीवित करने में मदद मिल सकती है।

राजस्थान राज्य के जोधपुर शहर की एक विशेष अदालत ने 25 अप्रैल को 77 वर्षीय बाबा आसाराम को सजा सुनाई थी। आसाराम पर झोउपुर के पास मणई गांव स्थित अपने कथित आध्यात्मिक केंद्र में 16 वर्षीय लड़की से बलात्कार करने का आरोप है।

जोधपुर सेंट्रल जेल के अंदर फैसला सुनाया गया जहां आसाराम को कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है। आसाराम के कई अनुयायियों से हिंसक विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए गुजरात और मध्य प्रदेश के आस-पास के राज्यों में सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है।

राजस्थान में सेवारत अजमेर मिशन सिस्टर्स की वकील एवं समाजसेविका सि. कैरल गीता ने कहा, “यह फ़ैसला अनेक लड़कियों एवं उनके माता पिता के लिये प्रोत्साहन का स्रोत हो सकता है जो सामाजिक कलंक एवं अन्य चिन्ताओं के कारण बलात्कार जैसी घटनाओं की रिपोर्ट पुलिस में करने से डरते हैं।”

आसाराम बाबा पर एक नाबालिग लड़की के बलात्कार, लोगों को अनुचित रूप से बन्दी बनाने, आपराधिक धमकी देने, आपराधिक षड्यंत्र रचने और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था। बाबा ने सभी आरोपों से इनकार कर मामले को बर्खास्त करने की मांग की है।

2013 में आसाराम को इंदौर में गिरफ़्तार किया गया था। गिरफ़्तारी के बाद आसाराम के समर्थकों ने भारी हंगामा और विरोध प्रदर्शन किया था।


(Juliet Genevive Christopher)

उत्तर प्रदेश में ट्रेन और स्कूल वैन की टक्कर में 13 बच्चों की मौत

In Church on April 27, 2018 at 2:25 pm

नई दिल्ली, शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018 (ऊका समाचार): उत्तरप्रदेश के कुशीनगर में रेलगाड़ी और स्कूल वैन की टक्कर में कम से कम 13 बच्चों की मौत हो गई है और आठ लोग गंभीर रूप से घायल हो गये हैं।
घटनास्थल पर पहुँचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ड्राईवर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि दुर्घटना के वक्त स्कूल वैन का चालक कानों में इयर फोन लगाये हुए थे। उन्होंने दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई का प्रण किया है।

यह भयावह घटना, गुरुवार प्रातः लगभग साढ़े सात बजे, उस समय हुई जब 25 बच्चों को ले जा रही डिवाइन पब्लिक स्कूल की वैन दूधी बेहपुरवा रेलवे लाइन पार कर रही थी। उसी वक्त गोरखपुर सीवान पैसेंजर ट्रेन वहाँ से गुज़र रही थी।

आईएएनएस समाचार को भारतीय रेलवे के प्रवक्ता वेद प्रकाश ने बताया कि 13 बच्चों की मौत तत्काल हो गई थी जबकि कम से कम आठ घायलों को 30 किलो मीटर दूर पान्द्राऊना अस्तपाल ले जाया गया है।

भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द तथा प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने मृत बच्चों के परिजनों के प्रति गहरी संमवेदना व्यक्त की है।

राष्ट्रपति ने ट्वीट किया, “इस भयानक दुर्घटना के बारे में सुनकर मैं स्तब्ध हूँ … मेरे विचार तथा मेरी प्रार्थनाएँ शोकग्रस्त परिवारों और घायल लोगों के साथ हैं”।

मोदी ने घटना पर अपना गहरा दर्द व्यक्त कर रेलवे और उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले में उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

उत्तर पूर्वी रेलवे के एक अधिकारी के अनुसार, कम से कम 25 लोग, जिमनें अधिकांश 10 साल से कम उम्र के बच्चे, दुर्घटना के समय,  स्कूली वैन में मौजूद  थे।

रेलवे मंत्री पियुष गोयल ने स्कूली बच्चों की दर्दनाक मौत पर दुख व्यक्त करते हुए उनके परिवारों को दो लाख रुपये तथा गम्भीर रूप से घायल लोगों को एक लाख रुपया एवं प्रत्येक घायल को 50,000 रुपये मुआवज़ा देने की घोषणा की है।


(Juliet Genevive Christopher)

27 अप्रैल को सन्त पापा फ्राँसिस ने किया ट्वीट

In Church on April 27, 2018 at 2:22 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने एक ट्वीट सन्देश प्रकाशित कर ईश्वर की कृपा के लिये मन को उदार रखने का आह्वान किया है।

शुक्रवार, 27 अप्रैल को किये अपने एक ट्वीट में सन्त पापा फ्राँसिस ने लिखा, “जब हम ईश्वर की कृपा हेतु अपने मन के द्वारों को खुला रखते हैं तब असम्भव भी सम्भव हो जाता है।”


(Juliet Genevive Christopher)

प्रेम एवं सेवा के बिना कलीसिया आगे नहीं जा सकती, संत पापा

In Church on April 26, 2018 at 3:26 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 26 अप्रैल 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में बृहस्पतिवार 26 अप्रैल को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा ने प्रवचन में येसु की पिछली व्यारी की याद की जहाँ उन्होंने यूखरिस्त की स्थापना की थी तथा चेलों के पैर धोने के द्वारा सेवा करना सिखलाया था और बतलाया था कि सेवक अपने स्वामी से बड़ा नहीं होता।

संत पापा ने कहा, येसु, यूखरिस्त के द्वारा प्रेम करने तथा पैर धोने के द्वारा सेवा करने की शिक्षा देते हैं। वे बतलाते है कि सेवक अपने स्वामी से बड़ा नहीं होता और न भेजा हुआ उससे, जिसने उसे भेजा। उन्होंने कहा कि ये तीन चीजें कलीसिया के आधार हैं।

प्रवचन में संत पापा संत योहन रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जहाँ अंतिम व्यारी की घटना का जिक्र है। येसु एक लम्बे एवं सुन्दर भाषण तथा दो चिन्हों के साथ अपने शिष्यों से विदा लेते हैं। संत पापा ने कहा, “शिष्यों एवं भावी कलीसिया के लिए दो चिन्ह जिसे कलीसिया की स्थापना हुई, येसु अपने शरीर एवं लोहू से खिलाते और पिलाते हैं और यूखरिस्त की स्थापना करते तथा वे पैर धोते एवं सेवा का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। इन्हीं दो चिन्हों से दो आज्ञाओं का जन्म हुआ है जिनसे कलीसिया बढ़ती है यदि हम उनके प्रति निष्ठावान रहते हैं।

प्रेम की आज्ञा ˸ एक पड़ोसी को हम जैसा चाहते वैसा नहीं किन्तु ख्रीस्त के समान प्रेम करना है। एक ऐसा प्यार जिसकी कोई सीमा नहीं है। संत पापा ने कहा कि इसके बिना कलीसिया आगे नहीं जा सकती, वह सांस नहीं ले सकती और एक खाली बरतन के समान हो जाती है जो केवल ऊपर से दिखाई पड़ती और सबकुछ व्यर्थ हो जाता है। येसु हमें बतलाते हैं कि हम किस तरह अंत तक प्रेम करें।

दूसरी नई आज्ञा है, एक दूसरे की सेवा करो। येसु इस बात को स्पष्ट करते हैं कि एक सेवक अपने स्वामी से बड़ा नहीं हो सकता और न भेजा हुआ उस से, जिसने उसे भेजा। संत पापा ने कहा कि यह सरलता एवं सच्ची दीनता है।

इस बात के प्रति सचेत रहते हुए कि येसु हम सभी से महान हैं और हम उनके सेवक हैं हम येसु से बड़े नहीं हो सकते, हम उनका प्रयोग नहीं कर सकते हैं। मालिक वे हैं हम नहीं। वे ईश्वर के व्यवस्थान हैं वे हमें भोजन एवं जल प्रदान करते तथा आज्ञा देते हैं कि हम उनके समान एक-दूसरे को प्यार करें। वे हमारे पैर धोते तथा हमें बतलाते हैं कि हम भी ऐसा ही करें किन्तु वे हमें सचेत करते हैं कि हम एक सेवक हैं और हम उनसे बड़े नहीं हो सकते जिन्होंने हमें भेजा है। यदि हम इन चीजों पर ध्यान देते हुए आगे बढ़ेंगे तो कभी असफल नहीं होंगे।

संत पापा ने कहा कि संतों एवं शहीदों ने सेवक होने की मनोभावना से इनका पालन किया। येसु आगे कहते हैं मैंने जिन्हें चुना है और मैं जानता हूँ कि तुम में से एक मेरे साथ विश्वास घात करेगा।

संत पापा ने सलाह दी कि हम मौन रहकर अपने आप को प्रभु को देखने दें। हम इसके द्वारा बहुत तरह का अनुभव कर सकते हैं किन्तु येसु को देखने दें उसी नजर से जिस नजर से उन्होंने अंतिम व्यारी के समय अपने शिष्यों को देखा था।


(Usha Tirkey)

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