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परमधर्मपीठीय मिशन कार्यों को आध्यात्मिक एवं वित्तीय सहायता प्रदान करने का आह्वान

In Church on May 31, 2018 at 1:40 pm

वाटिकन सिटी, गुरुवार, 31 मई 2018 (रेई,वाटिकन रेडियो): परमधर्मपीठीय मिशनरी कार्यों सम्बन्धी धर्मसमाज द्वारा समस्त विश्व में जारी कार्यों को आध्यात्मिक एवं वित्तीय सहायता देने की सन्त पापा फ्राँसिस ने अपील की है। 28 मई को उक्त धर्मसमाज की आम सभा के उदघाटन के अवसर पर एक विडियो सन्देश में सन्त पापा ने विश्व के काथलिकों का आह्वान किया है कि वे प्रार्थनाओं द्वारा तथा वित्तीय अनुदान एकत्र कर परमधर्मपीठीय मिशनरी कार्यों को समर्थन प्रदान करें।

सोमवार को जारी इस विडियो सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि पवित्रआत्मा सुसमाचार प्रचार के मुख्य अभिकर्त्ता हैं। उन्होंने कहा, “प्रार्थना प्रथम मिशनरी कार्य है जिसका सम्पादन प्रत्येक ख्रीस्तीय को करना चाहिये।

उन्होंने कहा कि “आध्यात्मिक समर्थन मिशन कार्यों की सहायता का सर्वोत्तम प्रभावशाली तरीका है हालांकि इसे मापा नहीं जा सकता। पवित्रआत्मा सुसमाचार उदघोषणा के प्रमुख अभिकर्त्ता हैं और उनके साथ सहयोग हेतु हम सब बुलाये गये हैं।”

इस बात की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए कि परमधर्मपीठीय मिशनरी कार्यों सम्बन्धी धर्मसमाज स्थानीय कलीसियाओं की मदद करता है सन्त पापा ने कहा, “कलीसिया के परमाध्यक्ष के नाम पर इस धर्मसमाज के पुरोहित एवं कार्यकर्त्ता राहत सामग्रियों के वितरण में सहायता प्रदान करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि विश्व की कलीसियाओं के पास सुसमाचार प्रचार, संस्कारों के प्रतिपादन, पुरोहितों, गुरुकुल छात्रों, प्रेरितिक कार्यों तथा धर्मशिक्षा प्रदान करने हेतु न्यूनतम आवश्यक साधन एवं सुविधाएँ उपलब्ध हों।”

सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि स्थानीय कलीसियाओं की सेवा कर काथलिक धर्मानुयायी विश्वव्यापी कलीसिया के कल्याणकारी कार्यों में सहभागी बनते हैं ताकि प्रभु येसु ख्रीस्त का शांति सन्देश पृथ्वी के ओर छोर तक पहुँच सके।

19 वीं शताब्दी में स्थापित परमधर्मपीठीय मिशनरी धर्मसमाज विश्व के 120 राष्ट्रों में सेवारत है।


(Juliet Genevive Christopher)

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31 मई को सन्त पापा फ्राँसिस ने किया ट्वीट

In Church on May 31, 2018 at 1:37 pm


वाटिकन सिटी, गुरुवार, 31 मई 2018 (रेई,वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने 31 मई को प्रभु येसु ख्रीस्त की पवित्र देह महापर्व के उपलक्ष्य में येसु द्वारा शिष्यों के साथ अन्तिम बार भोजन के अवसर पर स्थापित पवित्र यूखारिस्तीय संस्कार पर चिन्तन किया।

गुरुवार 31 मई को अपने ट्वीट सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने लिखा, “पवित्र यूखारिस्त में येसु के शब्दों और कर्मों का सुस्वाद, उनकी मृत्यु और मृतकों में से पुनरुत्थान का सुस्वाद तथा उनकी आत्मा की सुगन्ध समाहित है।”


(Juliet Genevive Christopher)

विश्वव्यापी आप्रवास संकट पर काथलिकों का प्रत्युत्तर

In Church on May 31, 2018 at 1:34 pm


वाशिंगटन, गुरुवार, 31 मई 2018 (सी.एन.आ.):  विश्व में छः करोड़ साठ लाख लोग युद्ध एवं हिंसा के परिणामस्वरूप अपने घरों का पलायन करने के लिये बाध्य हुए हैं।

बुधवार 30 मई को वाशिंगटन स्थित सामरिक और अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन केंद्र ने “ग्लोबल माइग्रेशन संकट का सामना करना” शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी कर इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित कराया कि विकासशील राष्ट्र सर्वाधिक आप्रवासियों, विस्थापितों एवं शरणार्थियों को शरण प्रदान करते हैं।

काथलिक राहत सेवा सम्बन्धी कल्याकारी संस्था के अनुसार अफ्रीका में अपने घरों के पलायन हेतु बाध्य हुए 94 प्रतिशत लोग अफ्रीकी देशों में ही शरण पा रहे हैं जिससे मेज़बान देशों पर अत्यधिक भार पड़ रहा है। यह भी कहा गया कि 85 प्रतिशत शरणार्थी कम अथवा मध्यम आय वाले देशों में शरण पा रहे हैं।

काथलिक राहत सेवा की उपाध्यक्षा एमीली वाय ने कहा कि “विस्थापितों की सहायता करते समय यह सुनिश्चित्त करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है कि हम मेज़बान देशों के लोगों की ज़रूरतों को ना भूले।”

उक्त रिपोर्ट के अनुसार 2016 में सर्वाधिक शरणार्थियों ने तुर्की, पाकिस्तान, लेबनान, ईरान और यूगाण्डा में शरण ली। इसके अतिरिक्त, संयुक्त राष्ट्र संघ की शरणार्थी एजेन्सी के अनुसार यूगाण्डा ने 2017 में दक्षिणी सूडान के दस लाख से अधिक शरणार्थियों को शरण प्रदान की।

एमीली वाय ने कहा “यूगांडा में, काथलिक राहत सेवा मेज़बान देश के लोगों तथा साथ ही शरणार्थी समुदायों को आश्रय, स्वच्छ पानी और आजीविका देकर लगभग 100,000 लोगों का समर्थन दे रही है।”

रिपोर्ट में कहा गया कि 2016 में विश्व के छः करोड़ साठ लाख लोग हिंसक संघर्षों, प्राकृतिक प्रकोपों, अथवा मानवाधिकारों के अतिक्रमण के परिणाणस्वरूप अपने घरों का परित्याग करने के लिये बाध्य हुए थे।

रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दर्शाते हुए अमरीकी काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के शरणार्थी एवं आप्रवास सम्बन्धी कार्यालय ने एक विज्ञप्ति प्रकाशित कर अन्तरराष्ट्रीय समुदाय का आह्वान किया है कि इस संकट का दूरगामी समाधान ढूँढ़ा जाये जो केवल आप्रवास एवं विस्थापन के मूल कारणों को सम्बोधित कर किया जा सकता है। कहा गया कि काथलिक धर्मानुयायी सन्त पापा फ्राँसिस का आदर्श ग्रहण कर उन समुदायों को समर्थन दे सकते हैं जो आप्रवासियों एवं शरणार्थियों की सेवा में संलग्न हैं।


(Juliet Genevive Christopher)

कानून के बावजूद अफ़गानी महिलाएँ हिंसा और अन्याय की शिकार

In Church on May 31, 2018 at 1:31 pm


अफ़गानिस्तान, गुरुवार, 31 मई 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): अफ़गानिस्तान में कार्यरत संयुक्त राष्ट्र संघीय सहायता मिशन ने एक रिपोर्ट जारी कर कहा है कि कानून के बावजूद अफ़गानी महिलाएँ हिंसा और अन्याय का शिकार बनती हैं।

मंगलवार को प्रकाशित उक्त रिपोर्ट में कहा गया कि अफ़गानिस्तान में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के उन्मूलन सम्बन्धित कानून 2009 में पारित किया गया था किन्तु इसके बावजूद अफ़गानी महिलाएँ अन्याय का शिकार बनती है।

रिपोर्ट में कहा गया कि परिवार की प्रतिष्ठा के नाम पर अफ़गानी महिलाओं पर अत्याचार किये जाते तथा कभी कभी उनकी हत्या भी कर दी जाती है। अगस्त 2015 तथा दिसम्बर 2017 के दौरान महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के 237 प्रकरण दर्ज किये गये थे तथा 280 महिलाओं को परिवार के भीतर ही मार डाला गया था।

मानवाधिकार सम्बन्धी संयुक्त राष्ट्र संघीय उच्च्युक्त ज़ैद अल हुसैन ने कहा, “मध्यस्थता का उपयोग मार-पीट अथवा हत्या के मामलों में महिलाओं को न्याय नहीं दिला पाता है तथा उनके मूलभूत मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है।

उक्त रिपोर्ट के अनुसार कई महिलाओं ने बताया कि उनपर दबाव डाला जाता है कि वे अपनी शिकायत वापस ले लें और मध्यस्थता के लिये सहमत हो जायें मानों उनके विरुद्ध कोई अपराध नहीं हुआ हो।


(Juliet Genevive Christopher)

दृढ़ीकरण संस्कार में पवित्र आत्मा की मुहर

In Church on May 30, 2018 at 3:59 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 30  मई 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को दृढ़ीकरण संस्कार में पवित्र आत्मा की मुहर पर अपनी धर्मशिक्षा देते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

आज की धर्मशिक्षा में हम दृढ़ीकरण संस्कार की चर्चा जारी रखते हैं। आज मैं ख्रीस्तीयों के जीवन में इस संस्कार के आतंरिक प्रभाव पर प्रकाश डालना चाहूँगा। वास्तव में, इसका अर्थ बपतिस्मा संस्कार में प्रकाशित होता है जो पवित्र परमप्रसाद संस्कार में अपनी पराकाष्ठा को प्राप्त करती है।

संत पापा ने कहा कि बपतिस्मा संस्कार में मिली आध्यात्मिक कृपाओं में मजबूती और सुदृढ़ता को प्राप्त करने हेतु दृढ़ीकरण संस्कार हमें अपनी प्रतिज्ञाओं को नवीकृत करने के लिए निमंत्रण देता है, जिसे हमारे माता-पिता और दादा-दादी हमारे बपितस्मा के दिन हमारी ओर से करते हैं। दृढ़ीकरण संस्कार के दौरान दीक्षार्थिय़ों को स्वयं कलीसिया के विश्वास की घोषणा “मैं विश्वास करता हूँ” कहते हुए करना होता है। वे विशेषकर धर्माध्यक्ष के द्वारा पूछे जाने वाले सवालों का उत्तर देते हैं, “पवित्र आत्मा, जो जीवन के स्रोत्र हैं, उन्हें दृढ़ीकरण संस्कार के दिन अपने विशेष वरदानों से विभूषित करते हैं, जैसा कि उन्होंने पेतेकोस्त के दिन प्रेरितों को किया था।”

पवित्र आत्मा का हमारे बीच आना एक साथ हमारे हृदयों को प्रार्थना में, उनकी ओर उन्मुख करने की मांग करता है। समुदाय द्वारा शांतिमय प्रार्थना करने के उपरान्त धर्माध्यक्ष अपना हाथ दीक्षार्थियों के ऊपर रखते हुए ईश्वर से निवदेन करते हैं कि वे उनके ऊपर अपनी कृपा बरसाये। संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि केवल एक पवित्र आत्मा है (1कुरि.12.4) लेकिन हमारे ऊपर उतरने के द्वारा वे हमें अपनी विभिन्न कृपा रूपी धनों से भर देते हैं। “किसी को आत्मा द्वारा प्रज्ञा के शब्द मिलते हैं किसी को उसी आत्मा द्वारा ज्ञान के शब्द मिलते हैं, और किसी को उसी आत्मा द्वारा विश्वास मिलता है। वही आत्मा किसी को रोगियों को चंगा करने का, किसी को चमत्कार दिखाने का, किसी को भविष्यवाणी करने का, किसी को आत्मा की परख करने का, किसी को भाषाएँ बोलने का और किसी को भाषाओं की व्याख्या करने का वरदान देता है।” नबी इसायस के अनुसार पवित्र आत्मा हमें ईश्वर के प्रेरितिक कार्यों को पूरा करने हेतु अपने सात गुणों से विभूषित करते हैं।(इसा.11.2) संत पौलुस भी पवित्र आत्मा के इन वरदानों की चर्चा करते हैं, “प्रेम, आनंन्द, शांति, सहनशीलता, मिलनसारी, दयालुता, ईमानदारी, सौम्यता और संयम” (गला.5.22)। आत्मा द्वारा ईश्वर हममें इन वरदानों से भरता और कलीसिया को धनी बनाता है। वे अनेकता के रचियता हैं लेकिन इसके साथ ही हम उन्हें एकता के जनक स्वरूप पाते हैं।

प्राचीन रीति के अनुरूप जहाँ हम अपने को चेलों के साथ संयुक्त होता हुआ पाते हैं, बपतिस्मा संस्कार में मिलने वाले पवित्र आत्मा के वरदान हस्तारोपण की विधि द्वारा हमारे जीवन में पूरी होती है।(प्रेरि.8.15-17, 19.5-6, इब्रा.6.2) वर्तमान समय में हम इस सुगंधित तेल के विलेपन को “क्रिज्म” कहते हैं जो आज भी पूर्वी और पश्चिमी रीति की कलीसियाओं में प्रचलित है।

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि तेल हमारे जीवन में एक उपचारत्मक और उबटन का तत्व है जो हमारे घावों में प्रवेश करता और उत्तकों को चंगाई प्रदान करता है। तेल में निहित इन गुणों के कारण धर्मग्रंथ और धर्मविधि में इसे एक निशानी के रुप में उपयोग किया जाता है जो हमारे लिए पवित्र आत्मा के अद्भुत कार्यों को ठोस रुप में व्यक्त करता है। दृढ़ीकरण संस्कार में धर्माध्यक्ष दीक्षार्थियों के माथे में पवित्र तेल का विलेपन करते हुए कहते हैं,“पवित्र आत्मा की मुहर को ग्रहण कीजिए जो आप को एक उपहार स्वरूप दिया जा रहा है।” संत पापा ने कहा कि पवित्र आत्मा हमारे लिए मिलने वाला वह अदृश्य उपहार है जो दृश्यमान पवित्र तेल के विलेपन द्वारा हमारे मांथे में अंकित किया जाता है। येसु ख्रीस्त पुत्र के रुप में अपने पिता के प्रतिरुप को धारण करते हैं। ख्रीस्तीय भी अपने में एक मुहर को धारण करते जो इस बात को स्पष्ट करता है कि वे किससे संयुक्त हैं। संत पौलुस इसकी चर्चा करते हुए कहते हैं,“ईश्वर आप लोगों के साथ हम को मसीह में सुदृढ़ बनाये रखता है और उसी ने हमारा अभिषेक किया है। उसी ने हम पर अपनी मुहर लायी है और अग्रिम के रुप में हमारे हृदयों को पवित्र आत्मा प्रदान किया है।” (2कुरि.1.21-22. एफि.1.13)

संत पापा ने कहा कि सुगंधित तेल के द्वारा क्रूस का चिन्ह दीक्षार्थी के मांथे में अंकित किया जाना उसे एक अटूट आध्यात्मिक निशानी प्रदान करती है जो उसे अधिक गहराई से येसु ख्रीस्त से संयुक्त करती जो उन्हें अपने मानव समाज में अपनी “खुशबु” फैलाने हेतु कृपाओं से भर देते हैं। (2 कुरि.2.15)

संत पापा ने नव दीक्षार्थियों के लिए कहे गये संत आम्ब्रोस के शब्दों की ओर तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का ध्यान आकर्षित कराते हुए कहा, “आप इस बात को याद रखें कि आप पवित्र आत्मा की मुहर से अंकित किये गये हैं… आप इसे सदैव बनाये रखें। पिता ईश्वर ने आप को चुना है और अपने पुत्र येसु ख्रीस्त में सुदृढ़ करते हुए पवित्र आत्मा को एक उपहार स्वरुप आप को प्रदान किया है।” पवित्र आत्मा अवांछित उपहार हैं जिसे हमें कृतज्ञ हृदय से ग्रहण करने की जरूरत है जो हमें अनन्य कृपाओं से भर देते हैं। उन्होंने कहा कि इस वरदान को हमें सुरक्षित रखते हुए देख-रेख करने, इसके प्रति नम्र बने रहने और इसके तेजस्वी कार्य द्वारा अपने को मोम की भांति बनायें रखने की जरुरत है,जिससे हम विश्व में येसु ख्रीस्त के रुप को परिलक्षित कर सकें।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासी समुदाय का अभिवादन किया। संत पापा ने विशेष रुप से युवाओं, बुजुर्गों, बीमारों और नव विवाहितों की याद की। उन्होंने कहा कि कल हम माता मरिया को समर्पित मई महीने का समापन करेंगे। माता मरियम हमारे जीवन के आनंद भरे क्षणों के साथ-साथ जीवन की अति कठिन परिस्थितियों में भी हमारे साथ रहें और हमारे परिवारों की रक्षा करें जिससे हमारे परिवार प्रार्थना और आपसी समझ का स्थल बना रहें। इतना कहने के बाद संत पापा ने विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के साथ हे हमारे पिता प्रार्थना का पाठ किया और सबों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।


(Dilip Sanjay Ekka)

संत पापा के लिए दो कोरियाई एक साथ प्रदर्शन किया

In Church on May 30, 2018 at 3:58 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 30 मई 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने ताइक्वोंडो संघ के कुछ कोरियाई एथलीटों को उनके सुन्दर प्रदर्शन प्रशंसा करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया।

वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में बुधवारीय आम दर्शन समारोह के दौरान संत पापा फ्राँसिस द्वारा धर्मशिक्षा देने के बाद ताइक्वोंडो संघ के कोरियाई एथलीटों ने बहुत ही सुन्दर प्रदर्शन किया। उनका प्रदर्शन छोटा परंतु अर्थपूर्ण था। उत्तर और दक्षिण कोरिया के एथलीट काले और सफेद कपड़े पहने हुए थे। प्रदर्शन के बाद एक बच्ची ने शांति का प्रतीक एक कबूतर को उड़ाया। संत पापा और वहाँ उपस्थित सभी लोगों ने जोरदार तालियों से उन्हें बधाई दी।  अंत में, सभी एथलीटों ने एक  महत्वपूर्ण बैनर का अनावरण किया जिसमें लिखा था : “शांति जीत से अधिक कीमती है।” संत पापा फ्रांसिस ने उनके जोश और प्रदर्शन के लिए बधाई दी।

संत पापा ने कहा,“मैं आपके प्रदर्शन के लिए कोरियाई एथलीटों का धन्यवाद करता हूँ। दोनों कोरियाई एथलिटों का एक साथ प्रदर्शन करना : यह शांति के लिए इच्छा की एक अभिव्यक्ति है! यह सभी मानवता के लिए शांति का संदेश है! आप सभी को धन्यवाद!


(Margaret Sumita Minj)

संत मत्ती के बुलाहट का कैनवास संत पापा फ्राँसिस को उपहार में मिला

In Church on May 30, 2018 at 3:56 pm


वाटिकन सिटी, बुधवार 30 मई 2018 (रेई) : इटली ने बोटेगा टिफ़र्नेट द्वारा बनाई गई संत मत्ती की बुलाहट की तस्वीर की एक प्रति संत पापा फ्राँसिस को उपहार दिया।

वाटिकन प्रेस कार्यालय द्वारा प्राप्त विज्ञप्ति अनुसार “कारावाजो, आत्मा और रक्त” फिल्म के लिए बोटेगा टिफ़र्नेट द्वारा बनाई गई संत मत्ती की बुलाहट के एक कैनवास की एक प्रति वाटिकन मीडिया और स्काय के प्रमुखों के प्रतिनिधिमंडल के साथ, बोटेगा टिफ़र्नेट के संस्थापक स्तेफनो लाजारी ने संत पापा फ्राँसिस को उपहार दिया। इस कैनवास में संत पापा द्वारा चुने गये आदर्श वाक्य “मिसेरान्दो अत्क्वे एलिजेन्दो” अर्थात “करुणा और चुनाव” भी लिखा गया है। इसे संत पापा के निवास स्थान संत मार्था में प्रदर्शित किया जाएगा।

संत पापा फ्राँसिस माईकेल आंजेलो मरीसी की कारावाजो कला को बहुत पसंद करते और सराहना करते हैं। जव वे कार्डिनल थे तभी से रोम स्थित संत लुईजी देई फ्राँचेसी गिरजाघर की दीवार पर संत मत्ती की बुलाहट के कैनवास पर मनन करने जाया करते थे। संत पापा को दिये गये कैनवास को, कारावाजो की उसी तकनीक और रंगों का उपयोग करके पेरुज्जा के चिता देल कास्तेलो के बोतेगा टिफ़र्नेट द्वारा चित्रित किया गया था।

वाटिकन मीडिया के सहयोग से स्काई और मैग्निटुडो द्वारा निर्मित कला फिल्म ‘कैरावाजिओ, द सोल एंड द ब्लड’ की जनता और आलोचकों की बड़ी प्रशंसा मिली। वाटिकन संग्रहालयों एवं वेटिकन मीडिया दोनों के सहयोग से बनी फिल्म को दुनिया भर में मशहूर महान इतालवी कलाकारों “राफेल – द प्रिंस ऑफ द आर्ट्स” और “माइकल एंजेलो – इन्फिनिटी” को समर्पित किया गया। इस ‘कैरावाजिओ, द सोल एंड द ब्लड’ फिल्म को अक्टूबर से सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया जाएगा।

बोटेगा टिफ़र्नेट के संस्थापक स्टेफनो लाज़ारी ने कहा, “संत पापा को इस असाधारण चित्रकला को देने में सक्षम हो पाना उसके लिए बड़े सम्मान की बात थी साथ ही उपहार देकर उसे बड़ी संतुष्टि मिली। कारावाजो की कला का एक उत्कृष्ट कृति है जो दया और येसु मसीह के बुलावे को दर्शाता है। यही संदेश संत पापा फ्राँसिस कलीसिया और पुरी दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं।


(Margaret Sumita Minj)

मास्को के ऑर्थोडोक्स कलीसिया के प्रनिधिमंडल को संत पापा का संदेश

In Church on May 30, 2018 at 3:55 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 30 मई 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के संत पापा पॉल छठे भवन में मास्को के ऑर्थोडोक्स कलीसिया के प्रनिधिमंडल के साथ मुलाकात की।

संत पापा ने उनका सहृदय स्वागत करते हुए रोम की यात्रा और विशेष कर उनसे मुलाकात करने हेतु आने के लिए धन्यवाद दिया। संत पापा ने कहा,“ मुझे आपके साथ एकता के मार्ग में एक साथ चलने की खुशी है। यह वही मार्ग है जो हमें निश्चिता की ओर ले जाती है, क्योंकि विभाजन का मार्ग हमें युद्ध और विनाश की ओर लेती है। मैं आपके सामने इस बात को दोहराना चाहुँगा कि काथलिक कलीसिया कभी भी विभाजन से उत्पन्न होने वाले दृष्टिकोण की अनुमति नहीं देगी। मास्को (रुस) में केवल एक पितृसत्ता है और वह है आपका। मुझे दुख होता है जब रुस में कोई काथलिक लोकधर्मी,पुरोहित या धर्माध्यक्ष कलीसियाओं के एकीकरण में एकतावाद का बैनर लगाते हैं। मुझे ज्यादा खुशी तब मिलती है जब सभी आपस में मिलजुलकर विचार विमर्श करते और ख्रीस्तीय एकता के लिए काम करते हैं।

संत पापा ने प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल से मिलकर खुशी व्यक्त करते हुए कहा,“मैं प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल से मिलकर बहुत खुश हूँ। मुझे एक भाई मिला है और हम आध्यत्मिक रुप से साथ-साथ चलेंगे।”

संत पापा ने कहा कि अंत में मैं दो बातों को आपके सामने रखना चाहता हूँ :

पहला- आपके प्रति काथलिक कलीसिया का संबंध। काथलिक कलीसिया को ऑत्थोडोक्स कलीसिया के आंतरिक और राजनीतिक मामलों में कभी हस्तक्षेप नहीं करनी चाहिए। यह मेरा और परमधर्मपीठ का दृष्टिकोण है।

दूसरा-धर्मिकता। हमें एक दूसरे के लिए प्रार्थना करनी चाहिए पर व्यक्तिगत तरीके से। संत पापा ने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि वे प्राधिधर्माध्यक्ष द्वारा दिये संत सेराफिन के अवशेष को प्रतिदिन आदर से स्पर्श करते हैं और उनसे एकता के लिए प्रार्थना करते हैं।

संदेश के अंत में संत पापा ने उन्हें साथ-साथ चलने की शुभकामनाएँ दीं और उन्हें विदा किया।


(Margaret Sumita Minj)

दक्षिण कोरिया में नये प्रेरितिक राजदूत का आगमन

In Church on May 30, 2018 at 3:54 pm

बैंकॉक, बुधवार 30 मई 2018 (वीआर न्यूज) : दक्षिण कोरिया में नये प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष जुएरेब ने दक्षिण कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति और सुलह के लिए संत पापा फ्राँसिस के समर्थन और शुभकामनाओं को व्यक्त किया और देश के काथलिकों एवं याजकों और परमधर्मपीठ के साथ एकता को आगे बढ़ाने का वचन दिया।

दक्षिण कोरिया और मंगोलिया में परमधर्मपीठ के नये प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष अल्फ्रेड जुएरेब, दक्षिण कोरिया में अपने राजनयिक मिशन की शुरुआत हेतु 27 मई को सियोल पहुंचे।

कोरियाई धर्माध्यक्षों और कोरिया के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीबीसीके) के प्रतिनिधियों ने उन्हें इचियन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्वागत किया जहां उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।

कलीसिया के प्रति प्रतिबद्धता

उन्होंने कहा, “राजदूत की मुख्य भूमिका,स्थानीय कलीसिया के विश्वासियों और पुरोहितों की मदद करना है। मैं जितनी जल्दी हो सके कोरिया में धर्माध्यक्षों से मिलूंगा और उनकी बातें सुनुँगा।”

माल्टीज़ महाधर्माध्यक्ष ने कहा, “मैं परमधर्मपीठ और कोरियाई कलीसिया को और अधिक निकटता से एकीकृत करने के लिए भी काम करूंगा।”

उन्होंने कहा कि गुरुवार को वाटिकन में संत पापा फ्राँसिस के साथ एक विदाई युखारीस्तीय समारोह के दौरान, संत पापा कोरियाई धर्माध्यक्षों और विश्वासियों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद भेजते हैं।

कोरियाई शांति और सुलह

उन्होंने कहा कि संत पापा कोरियाई प्रायद्वीप की स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ हैं और इस बात की बहुत उम्मीद है कि पनमुंजम के ट्रूस गांव में 27 अप्रैल के शिखर सम्मेलन के साथ शुरू हुई शांति और सुलह वार्ता जारी रहेगी और सफल रहेगी ताकि आने वाली पीढ़ियों का एक शांतिपूर्ण और समृद्ध भविष्य हो सके।

रविवार के प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान 59 वर्षीय महाधर्माध्यक्ष ने कहा, “संत पापा ने मुझसे कहा कि ‘कृपया कोरियाई लोगों और धर्माध्यक्षों को आश्वस्त करें कि वे अपनी प्रार्थना जारी रखेंगे जिससे कि भविष्य की पीढ़ियों के पास स्थिरता और समृद्धि का आने वाला कल होगा।”

उन्होंने कहा, “दक्षिण कोरिया में संत पापा के प्रतिनिधि के रूप में, मैं कोरिया में अधिकारियों को उनके विचारों और शुभकामनाओं से वाकिफ कराता रहुँगा।”

सन् 2000 से वाटिकन में, महाधर्माध्यक्ष जुएरेब ने संत पापा जॉन पॉल द्वितीय, संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें और संत पापा फ्राँसिस की सेवा की है। 26 फरवरी को, संत पापा फ्राँसिस ने उन्हें दक्षिण कोरिया और मंगोलिया में प्रेरितिक राजदूत नियुक्त किया।


(Margaret Sumita Minj)

अंतरधार्मिक नेताओं ने म्यांमार में शांति हेतु पुनः प्रयास करने का वचन दिया

In Church on May 30, 2018 at 3:52 pm

बैंकॉक, बुधवार 30 मई 2018 (वीआर न्यूज) : यांगून के कार्डिनल चार्ल्स बो ने, संघर्षग्रस्त म्यांमार में शांति पहलों के प्रति अपनी वचनबद्धता की घोषणा करने के लिए अन्य धार्मिक नेताओं से जुड़ गये है। इस पहल का राज्य के काउंसिलर आंग सान सू की ने स्वागत किया है

म्यांमार के लोगों को एक खुले पत्र में, अंतर्राष्ट्रीय शांति और म्यांमार के धर्मों से उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के कार्डिनल बो और 17 अन्य सदस्यों ने वर्तमान में कई आंतरिक संघर्षों का सामना करने वाले देश में शांति और सुलह के प्रयासों के प्रति अपनी वचनबद्धता व्यक्त की।

25 मई को राजधानी नाइपाईदाव में आंग सान सू की को प्रस्तुत पत्र की शुरुआत इस प्रकार से की गई थी, “हमारे देश के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण पल है कि हम, म्यांमार और पूरे क्षेत्र के बौद्ध, ख्रीस्तीय, हिंदू और मुस्लिम नेतागण, शांति के लिए आशा के साथ आपके पास एकसाथ मिलकर आते हैं,”

पत्र म्यांमार के लोगों को विभाजित करने के लिए धर्म और जाति के दुरुपयोग को खारिज करता है, जो दुनिया की धार्मिक परंपराओं के मौलिक सिद्धांतों के खिलाफ जाता है और घृणा, भेदभाव और हिंसा लाता है।

देश के आंतरिक संघर्षों को समाप्त करने के उद्देश्य से एवं स्थानीय शांति के संबंध में पत्र में कहा गया है, “अंतर-सांप्रदायिक संघर्षों को हल करने और राष्ट्रीय सुलह को आगे बढ़ाने के लिए हमारे सामूहिक प्रयासों में, म्यांमार के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक नेताओं के रूप में, हम आपकी प्रार्थनाओं को पांगलांग 21 वीं शताब्दी शांति सम्मेलन में शांति के लिए लाने की इच्छा रखते हैं।”

पत्र में कहा गया है, “हम म्यांमार में लोकतांत्रिक संघीय प्रणाली के दृष्टिकोण के साथ राष्ट्रव्यापी युद्धविराम समझौते और टिकाऊ शांति को प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार और अन्य प्रासंगिक कलाकारों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” म्यांमार की सेना और कचिन विद्रोहियों के बीच लड़ाई में वृद्धि के संदर्भ में पत्र में कहा गया है, “हम बड़े दुख के साथ बढ़ते हुए संघर्ष एवं कचिन और शान राज्यों से बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापन को देख रहे हैं। हजारों नागरिकों का विस्थापन शांति और सुलह प्रक्रिया को कमजोर कर देता है।”

“हम म्यांमार में लोकतांत्रिक संघीय प्रणाली के दृष्टिकोण के साथ राष्ट्रव्यापी युद्धविराम समझौते और टिकाऊ शांति को प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार और अन्य प्रासंगिक नेताओं के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

इस पत्र में राखीन राज्य में संकट और जातीय सफाई के रूप में संयुक्त राष्ट्र द्वारा इंगित किए गए संकट को हल करने के प्रयासों को भी उजागर किया गया। म्यांमार की सेना द्वारा विद्रोह विरोधी अभियान से बचने के लिए सितंबर से 670,000 से अधिक रोहिंग्या बांग्लादेश के लिए राखीन से भाग गए हैं।

पत्र में कहा गया है कि “अच्छे और प्रशंसनीय प्रयासों को उन्नत किया जा रहा है, जिसमें शरणार्थियों की वापसी और संयुक्त राष्ट्र के लिए इस प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए बांग्लादेश और म्यांमार के बीच समझौते सहित, राखीन राज्य के सभी समुदायों के लिए शांति, विकास, शिक्षा और मानवाधिकारों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है।”

इस पत्र में म्यांमार के सीमित संसाधनों के लिए जातीय समूहों की लड़ाई के रूप में “वैश्विक साझाकरण योजनाओं की खोज” का भी मांग की गई है साथ ही संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के साथ वार्ता जारी रखने का सुझाव दिया। अंतरधार्मिक प्रतिनिधिमंडल की ओर से ओस्लो के धर्माध्यक्ष गुन्नार स्टालसेट्ट और मंडले में मायावती मिंगी मठ के महंत, आदरणीय आर्या वुन था भिवुन सा ने पत्र में हस्ताक्षर किया था।

आंग सान सु की ने बैठक के दौरान अंतरधार्मिक प्रतिनिधिमंडल के सहयोग और सुझावों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक नेता अपने समुदायों को एक साथ काम करने और समावेशी विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करके “सभी के लिए प्रगति” का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं और जो “पीछे रह गये हैं” उन्हें भी शामिल कर सकते हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने 22-25 मई से रंगून और नायपायदाव का दौरा किया।

कार्डिनल बो और कई अन्य अंतरधार्मिक नेताओं ने भी 27 मई को संघर्ष आक्रांत राखीन राज्य का दौरा किया, जहां उन्होंने रोहिंग्या, हिंदू और म्रो समुदायों से मुलाकात की साथ ही पारगमन और स्वागत केंद्रों का भी दौरा किया।

प्रतिनिधिमंडल ने विमान से रोहिंग्यों के सैकड़ों गांवों को देखा जिसे रोहिंग्या आतंकवादियों के खिलाफ म्यांमार सेना के दमन अभियान के दौरान नष्ट कर दिया गया था।


(Margaret Sumita Minj)

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