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अभेनिरे से संत पापा: ‘सुसमाचार आपकी संपादकीय रेखा है’

In Church on May 1, 2018 at 3:35 pm


वाटिकन सिटी, मंगलवार, 1 मई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार 1 मई को वाटिकन स्थित क्लेमेंटीन सभागार में अभेनिरे समाचार पत्र के 400 सौ कर्मचारियों एवं उनके परिवार वालों के साथ मुलाकात की जो समाचार पत्र की 50वीं वर्षगाँठ मना रहे हैं।

संत पापा ने अभेनिरे की स्थापना के समय संत पापा पौल षष्ठम द्वारा कहे गये शब्दों का हवाला देते हुए पत्रकारों से कहा, काथलिक समाचार पत्रों को “सोचने की शिक्षा” देना चाहिए न कि वह सूचना प्रस्तुत करना जो लेने में आसान हो। इसे अंतिम से शुरू किया जाना चाहिए ताकि सच्चाई को व्यंग चित्र तक ही सीमित न कर दिया जाए।

संत पापा ने संदेश में बढ़ाई संत योसेफ के पर्व की याद करते हुए उनके कार्य को सच्चाई, सुन्दरता एवं सार्वजनिक भलाई का प्रसार करने वाला बतलाया।

संत पापा पौल षष्ठम ने चेतावनी दी थी कि काथलिक समाचार पत्र ऐसी चीजों को प्रस्तुत न करे जिसका उद्देश्य प्रभावित करना अथवा ग्राहक बढ़ाना हो बल्कि हमें उनके हित का ध्यान रखना चाहिए जो उन्हें पढ़ते हैं। हमें उन्हें चिंतन करने और न्याय करने सिखाना चाहिए। काथलिक पत्रकारों को कठोरता से दूर रहना चाहिए जो व्यक्ति का दम घोटता अथवा उसे कैद कर लेता। वह पवित्र आत्मा को पिंजरे में बंद नहीं करता किन्तु उसे उड़ने देता है, उसे अपनी आत्मा में स्वास लेने देता है, वह उसे सच्चाई के स्थान पर दिखावा, सुन्दरता को अशिष्टता अथवा सामाजिक मित्रता को संघर्ष में बदलने नहीं देता है। वह जीवन एवं अच्छाई के हर अंकुर को बल प्रदान करता है।

संत पापा ने पत्रकारों से कहा कि वे मूल्यों को आवाज दें जो लोगों के इतिहास, संस्कृति एवं आध्यात्मिकता में व्यक्त होता है तथा सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक जगत में अपना योगदान देता है। उन्होंने उन्हें कलीसिया की सामाजिक धर्मसिद्धांत का निष्ठापूर्वक व्याख्या करने एवं उसका साक्ष्य देने की सलाह दी।

संत पापा ने कहा कि काथलिक पत्रकारों को याद दिलाया कि वे पाठकों की संख्या बढ़ाने के लिए लुभावनी चीजों को प्रकाशित करने के लिए नहीं बल्कि सुनाने के द्वारा उनकी भलाई करने एवं पाठकों को सोचने और अवलोकन करने की शिक्षा देने के लिए बुलाये गये हैं। उन्हें अपने पाठकों को सच्चाई की खोज करने जिसकी शुरूआत सुसमाचार के नियमित पाठ द्वारा होती है, मदद करने का अथक प्रयास करना चाहिए।

संत पापा ने आशा व्यक्त की कि वे कलीसिया को उन सच्चाइयों को देखने में मदद करें जो बाहर से अथवा ऊपर से दिखाई नहीं पड़ता किन्तु उसके साथ मिल जाता है एवं उसके साथ रह जाता है। उन्होंने कहा कि वे अपनी सेवा द्वारा सभी लोगों में आशा उत्पन्न करें और उसे बढ़ायें।


(Usha Tirkey)

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दिविनो आमोरे में संत पापा की तीर्थयात्रा

In Church on May 1, 2018 at 3:33 pm

रोम, मंगलवार, 1 मई 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ काथलिक कलीसिया 1 मई को मजदूर संत जोसेफ का त्योहार मनाती है जबकि पूरा मई महीना माता मरियम के लिए समर्पित है। इसी के उपलक्ष्य में संत पापा फ्राँसिस आज संध्या 5.00 बजे रोम स्थित मरियम तीर्थ दिव्य प्रेम (दिविनो आमोरे) की तीर्थयात्रा कर वहाँ रोजरी माला प्रार्थना अर्पित करेंगे।

संत पापा ने रविवार को स्वर्ग की रानी प्रार्थना के दौरान विश्वासियों से कहा था कि वे सीरिया एवं पूरे विश्व में शांति हेतु रोजरी माला विन्ती अर्पित करेंगे।

कातानिया स्थित संत लूका के प्रोफेसर अंतोनियो ग्रासो ने मई महीने में तथा दिविनो अमोरे तीर्थ पर माता मरियम की भक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा, “परम्परा के अनुसार सन् 1740 के बसंत ऋतु में जब एक तीर्थयात्री रोम जा रहा था तब वह कस्तेल दी लेवा के ग्रामीण इलाके में खो गया एवं पागल कुत्तों के एक झुँड ने उसे घेर लिया। इस विकट स्थिति में जब उसने ऊपर देखा तो उसे निकट के एक गढ़ के मीनार में लगे माता मरियम एवं उनकी गोद में बालक येसु की तस्वीर दिखाई दी। उसने माता मरियम से प्रार्थना की कि वह ईश्वर से प्रार्थना कर उसे उन कुत्तों से रक्षा करे, जिसके बाद अचानक सारे कुत्ते गायब हो गये। यह खबर फैल गयी और उसी दिन से उस मीनार की यह तस्वीर तीर्थयात्रा का केंद्र बन गयी। पाँच साल बाद 9 अप्रैल 1745 को उस तस्वीर को एक नये गिरजाघर में स्थापित किया गया।

उन्होंने बतलाया कि दिविनो अमोरे की माता मरियम की इस तस्वीर को 24 जनवरी 1944 में रोम लाया गया तथा लुचिना के संत लोरेंत्सो गिरजाघर में स्थापित किया गया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 4 जून को मन्नत मानी गयी थी कि यदि वे रोम को विनाश से बचायेंगी तो उनके सम्मान में एक नये तीर्थ की स्थापना की जायेगी। 11 जून को जब स्वतंत्रता मिल गयी तो संत पापा पीयुस 12वें ने संत इग्नासियुस गिरजाघर में धन्यवादी मिस्सा अर्पित किया जिसमें उन्होंने दिविनो अमोरे की माता मरियम को ‘शहर की रक्षिका’ घोषित किया। युद्ध के बाद ईश सेवक फादर य़ूम्बेरतो तेरेंत्सी के द्वारा कास्तेल दी लेवा में पुनः तीर्थस्थल का निर्माण किया गया। कई उतार चढ़ाव के बाद 8 जनवरी 1996 को प्रतिज्ञा के अनुसार नये तीर्थस्थल के निर्माण हेतु नींव डाला गया, जिसका उद्घाटन 2000 ख्रीस्त जयन्ती वर्ष में किया गया। यह तीर्थ स्थल सभी रोम वासियों के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थल है जहाँ हर साल पास्का के बाद पहले शनिवार से अक्टूबर के अंतिम शनिवार तक तीर्थयात्रा की जाती है। इसकी शुरूआत मध्यरात्रि को रोम के चिरकूस माक्सिमुस के निकट पोरता कपेना के प्राँगण से की जाती है तथा 14 किलो मीटर की पैदल यात्राकर लोग तीर्थस्थल पहुँचते हैं और ख्रीस्तयाग में भाग लेते हैं।


(Usha Tirkey)

रोजगार मानव प्रतिष्ठा का एक आधारभूत आयाम

In Church on May 1, 2018 at 3:31 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 1 मई 2018 (रेई)˸ कलीसिया 1 मई को मजदूर संत जोसेफ का पर्व मनाती है तथा याद करती है कि काम या रोजगार मानव प्रतिष्ठा का एक आधारभूत आयाम है।

संत पापा ने 1 मई के ट्वीट संदेश में कहा, “हम मजदूर संत जोसेफ का पर्व मनाते हैं। हम कभी न भूलें कि रोजगार मानव प्रतिष्ठा का एक आधारभूत आयाम है।”

एक व्यक्ति के लिए रोजगार न केवल जीविका का साधन है बल्कि वास्तविक मानव प्रतिष्ठा की अभिव्यक्ति भी है। काम से जीविका, सम्मान, पहचान और मित्रता प्राप्त होता एवं पूर्णता की भावना का एहसास होता है। यह केवल वस्तु नहीं है किन्तु जीवन का अहम अंग भी है। भौतिक कल्याण के लिए अपरिहार्य, काम व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास के लिए एक रास्ता है।

रोजगार आत्मानुभूति देता तथा व्यक्ति एवं समाज के बीच एक सेतु है। समुदाय के रखरखाव और संवर्द्धन के लिए काम करने की आवश्यकता है। मानव को कुछ हासिल करने की अंतर्निहित आवश्यकता होती है जो समाज द्वारा मान्यता और पहचान दी जाती है। काम से संतोष एवं सुख प्राप्त होता है जिसके लिए मेहनत करने की जरूरत पड़ती है।

काम का एक अधिकार भी है। मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा, साथ ही आईएलओ को बनाए रखने वाले सिद्धांतों ने, कार्य करने का अधिकार, रोजगार के चुनाव की स्वतंत्रता, काम करने के अनुकूल स्थितियों के अधिकार और बेरोजगारी के खिलाफ सुरक्षा का अधिकार स्थापित किया है।


(Usha Tirkey)

यूनेस्को ने अफगानिस्तान के हमलों में 11 पत्रकारों की हत्या की निंदा की

In Church on May 1, 2018 at 3:30 pm


पेरिस, मंगलवार, 1 मई 2018 (रेई)˸ यूनेस्को की महानिदेशक, ऑड्रे अज़ौले ने अफगानिस्तान में हमलों की निंदा की जिसने 25 और 30 अप्रैल को कई नागरिकों के साथ विभिन्न घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के कुल ग्यारह पत्रकारों का जीवन ले लिया।

उन्होंने कहा, “मैंने अफगानिस्तान में हुए हालिया क्रूर हमलों की निंदा करती हूँ, जिसमें पत्रकारों, ख्रोस्त के अहमद शाह, महाराम दारानी, शाह मारई फीजी, एबाडोल्ला हनानजी, सबवन केकेकर, नोरोजली रजबी, गाजी रासोली, अली सलीमी, सलीम तालाश और काबुल में यार मोहम्मद तोखी तथा उनके साथ कई अन्य नागरिक, साथ-साथ कंधार में अब्दुल मानन अरघंद पर गोली मारी गयी।”

उन्होंने कहा कि इन जघन्य हमलों ने पत्रकारों की जिम्मेदारियों को पूरा करने में बड़े खतरों को उजागर किया है। ऐसे अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय में लाया जाना चाहिए। मेरी सहानुभूति पीड़ितों के परिवारों और अफगानिस्तान के लोगों के लिए है।

30 अप्रैल को काबुल में इन हमलों में सबसे घातक, दो विस्फोट हुए जिसमें बचाव कर्मियों और अन्य नागरिकों के साथ नौ पत्रकारों की मौत हो गई। कुछ घंटे बाद बीबीसी पत्रकार अहमद शाह को खोस्त में गोली मार दी गई थी।

काबुल समाचार के टेलीविजन प्रसारक और चीनी समाचार एजेंसी, सिन्हुआ के लिए काम करने वाले अब्दुल मानन अरघंद को 25 अप्रैल को कंधार में गोली मार दी गई थी।

यूनेस्को, वैश्विक जागरूकता बढ़ाने, क्षमता निर्माण और कार्यों की एक श्रृंखला के माध्यम से पत्रकारों की सुरक्षा को बढ़ावा देता है, विशेष रूप से, पत्रकारों की सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र योजना की पहल और प्रतिरक्षा जारी करने के द्वारा।


(Usha Tirkey)

धर्म एवं राजनीति को मिश्रित न करें, उपराष्ट्रपति

In Church on May 1, 2018 at 3:29 pm

तिरुवल्ला, मंगलवार, 1 मई 2018 (मैटर्स इंडिया)˸ भारत के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने 30 अप्रैल को लोगों से अपील की कि वे धर्म और राजनीति को एक साथ न मिलायें।

नायडू, मलंकरा मार थॉमा सीरियाई कलीसिया के ससम्मान सेवानिवृत महाधर्माध्यक्ष  फिलिपोस मार क्रिसोस्टॉम के 101 वें जन्मदिन पर आयोजित एक समारोह में बोल रहे थे।

इसी दिन महाधर्माध्यक्ष जोसेफ मार थॉमा के पुरोहित अभिषेक की हीरा जयन्ती भी मनायी गयी।

उप राष्ट्रपति ने याद दिलाया कि धार्मिक नेता आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हैं जबकि राजनेता स्पष्ट राजनीति प्रदान करने के लिए देश की महान विरासत से प्रेरणा लेते हैं। उन्होंने कहा, “मैं आशा करता हूँ कि धर्म और राजनीति ये दोनों मिश्रित न हों। धार्मिक नेता हर मानव को आध्यात्मिक मार्गदर्शन दे सकें एवं राजनीतिक नेता स्पष्ट राजनीति प्रदान करने के लिए देश की महान विरासत से प्रेरणा लें।” उन्होंने कहा कि तीर्थस्थल भक्ति के स्थान होते हैं जबकि राजनीतिक क्षेत्र सामाजिक एवं सामुदायिक शिक्षा के लिए संभावनाओं के स्थल होते हैं किन्तु यदि वे अपने रास्ते से भटक जाते एवं राजनीति में छींटे और अनचाहे विभाजक बयान जारी करते हैं, तब यह निष्क्रिय हो जाता है।

नायडू ने कहा कि उन्हें सौहार्द, समझदारी, सम्मान एवं साकारात्मक ऊर्जा के चिरस्थायी मूल स्रोत खोजने की आवश्यकता है जिसके कालातीत मूल्य के लिए भारत हमेशा खड़ा रहा।

फिलिपोस मार क्रिस्तोसतम के योगदान पर गौ करते हुए नायडू ने कहा कि उन्होंने

विनोद एवं प्रसन्नचित आचरण द्वारा आशीषों की बारिश की है।

उन्होंने कहा कि क्रिस्तोस्तम ने ख्रीस्तीयता के मूल को आत्मसात किया एवं अपने कार्यों और वचनों द्वारा उसे प्रकट किया।

उन्होंने कहा कि मार थोमा कलीसिया का भारत की स्वतंत्रता के इतिहास में गहरी जड़ है। यह देश की स्वतंत्रता एवं न्याय के लिए हमेशा खड़ी हुई और संकट काल का विरोध किया।


(Usha Tirkey)

इताली समाचार पत्र अभेनिरे के 50 साल पूरे हुए

In Church on May 1, 2018 at 3:27 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 1 मई 2018 (रेई)˸ इताली काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की दैनिक समाचार पत्र अभेनिरे की स्थापना दिसम्बर 1968 को दो अन्य समाचार पत्रों, बोलोन्या के ल अभिनिरे दी इतालिया एवं मिलान के ल इतालिया के विलय होने के बाद किया गया था। समाचार पत्र के वेबसाईट के अनुसार इसकी उत्पति एक व्यक्ति, चुनाव एवं घटना से जुड़ी है।

व्यक्ति

समाचार पत्र को धन्य संत पापा पौल षष्ठम ने का बहुत अधिक समर्थन प्राप्त था, खासकर, इटली के काथलिकों को आम सांस्कृतिक माध्यम प्रदान करने के प्रयास में।

चुनाव

अभेनिरे की स्थापना समाचार प्रसारण एवं समकालीन विश्व में सच्चाई पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए एक लोकप्रिय उपकरण के रूप में किया गया था। यह द्वितीय वाटिकन महासभा के जवाब में सुसमाचार और द्वितीय वाटिकन महासभा की बातों का प्रचार करने हेतु साधन के रूप में एक ठोस विकल्प था।

घटना

एक घटना जो इस दैनिक काथलिक पत्रिका की नींव को दर्शाती है वह इंटर मिरिफिका (सामाजिक संचार के माध्यम पर आज्ञाप्ति) का प्रकाशन है जो 4 दिसंबर, 1963 में अनुमोदित किया गया था।

अभेनिरे आज

संत पापा फ्राँसिस ने नवम्बर 2016 में करुणा के असाधारण जयन्ती वर्ष समाप्त होने के ठीक पहले अभेनिरे को एक साक्षात्कार दिया था। उन्होंने इताली पत्रकार स्तेफानिया फालास्का के 23 सवालों का उत्तर दिया था जिसमें उन्होंने दया, अंतरधार्मिक वार्ता एवं द्वितीय वाटिकन महासभा की विरासत आदि विषयों पर चर्चा की थी।

अभेनिरे इटली के उन थोड़े समाचार पत्रों में से एक है जिनका प्रसार ऑन लाईन समाचार स्रोत के बावजूद बढ़ रहा है।

समाचार पत्र में नियमित रूप से नैतिकता एवं संस्कृति की विशेषताओं के साथ साथ नौकरी और रोजगार अनुभाग को परिसंचरण में वृद्धि का महत्वपूर्ण कारक कहा जाता है।

कलीसियाई समाचार के अलावा, समाचार पत्र में, राजनीतिक, अंतर्राष्ट्रीय, आर्थिक और ऐतिहासिक मामलों के विविध विषयों को शामिल किया जाता है।


(Usha Tirkey)

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