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प्रेम एवं साक्ष्य के द्वारा विश्वास का प्रसार होता है

In Church on May 3, 2018 at 3:34 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 3 मई 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित प्रेरितक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने विश्वास के हस्तांतरण पर प्रकाश डाला।

उन्होंने प्रवचन में कहा, “विश्वास के हस्तांतरण का अर्थ धर्मांतरण नहीं है।”

कोरिंथियों को लिखे संत पौलुस के पत्र से लिए गये पाठ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा कि विश्वास केवल ‘प्रेरितों के धर्मसार’ की घोषणा करना नहीं है किन्तु यह अपने आप प्रकट होता है।

संत पापा ने कहा, “विश्वास के हस्तांतरण का अर्थ जानकारी देना नहीं हैं बल्कि यह हृदय में येसु ख्रीस्त पर विश्वास जगाना है। कुछ किताबों से जानकारियाँ हासिल करना अथवा विचारों को प्राप्त करने से बढ़कर ख्रीस्तीय होने का अर्थ है विश्वास के प्रसार में सहयोग देना, कलीसिया की तरह जो एक माता है एवं विश्वास में अपने बच्चों को जन्म देती है।”

उन्होंने कहा कि विश्वास के हस्तांतरण का अर्थ किताब लेकर जानकारी प्राप्त करने के बाद बपतिस्मा ले लेना भी नहीं है बल्कि जो मिला है उसे बांटना है और यही ख्रीस्तीय चुनौती है, विश्वास के हस्तांतरण में फलप्रद बनना। कलीसिया के लिए भी यह चुनौती है कि वह किस तरह उपजाऊ माता बने एवं विश्वास में बच्चों को जन्म दे सके।

संत पापा ने कहा कि विश्वास का हस्तांतरण जो पीढ़ी दर पीढ़ी दादी और माँ के द्वारा होता है वह प्रेम की खुशबू है। यह केवल शब्दों से नहीं बल्कि स्नेह एवं कोमलता से बढ़ता है। स्नेह के साथ विश्वास का हस्तांतरण बढ़ने में मदद देता है।

संत पापा ने विश्वास के हस्तांतरण में पहला मनोभाव प्रेम बतलाया जबकि साक्ष्य को दूसरे स्थान पर रखा।

उन्होंने कहा, “विश्वास का हस्तांतरण धर्मांतरण नहीं है यह उससे बढ़कर है, यह लोगों को देखना नहीं है कि वे फूटबॉल टीम अथवा किसी क्लब या संस्कृति केंद्र के समर्थक हैं। धर्मांतरण विश्वास के लिए नहीं है। संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कलीसिया धर्म परिवर्तन से नहीं बढ़ती बल्कि आकर्षण से बढ़ती है विश्वास का प्रसार आकर्षण एवं साक्ष्य के द्वारा होता है।

हम जो विश्वास करते हैं उसका हर दिन के जीवन में साक्ष्य देना, हमें ईश्वर के सामने धर्मी बनाता है, वह हमारे आस-पास के लोगों में जिज्ञासा उत्पन्न करता।

“साक्ष्य दूसरों के हृदय में जिज्ञासा उत्पन्न करता और उस जिज्ञासा द्वारा वे पवित्र आत्मा को ग्रहण करते एवं अपने अंदर कार्य करने देते हैं। विश्वास का प्रसार साक्ष्य के द्वारा होता है साक्ष्य, हमें शहादत तक ले जाता है। जिज्ञासा वह बीज है जिसे पवित्र आत्मा लाता है और आगे ले चलता है। विश्वास का हस्तांतरण हमें न्यायसंगत ठहराता है और ऐसा करने के द्वारा हम दूसरों को सच्चा न्याय प्रदान करते हैं।


(Usha Tirkey)

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थाईलैंड के धर्माध्यक्षों ने संत पापा से मुलाकात की

In Church on May 3, 2018 at 3:32 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 3 मई 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ 3 मई को आशा की एक महान किरण दिखाई पड़ी जब थाईलैंड के काथलिक धर्माध्यक्षों से सन्त पापा फ्राँसिस से मुलाकात की।

कलीसिया के परमाध्यक्ष के साथ अपनी पंचवर्षीय पारम्परिक मुलाकात, “आद लीमिना” के लिये थाईलैंड के काथलिक धर्माध्यक्ष रोम पधारे हैं।

एशिया के इस देश में कुल 67 मिलियन आबादी में केवल 1 प्रतिशत संख्या ख्रीस्तीयों की है। यहाँ काथलिक कलीसिया शिक्षा के माध्यम से अपनी विशेष भूमिका अदा कर रही है जो 350 स्कूल का संचालन करती तथा जिनमें 150,000 विद्यार्थियों में से 90 प्रतिशत विद्यार्थी बौद्ध धर्म मानने वाले हैं।

थाईलैंड के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष मोनसिन्योर लुईस कामनीयर्न सान्तीसुखनीराम ने वाटिकन न्यूज़ को जानकारी देते हुए कहा कि देश में बौद्ध लोगों के साथ उनका संबंध अच्छा है। उन्होंने थाईलैंड की समस्या पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वहाँ मुख्य रूप से गरीबी, नशीली पदार्थों से संबंधित परेशानियाँ, सांसारिकता एवं परिवारों का टूटना आदि समस्याएँ हैं।

उन्होंने बतलाया कि वहाँ सांसारिकता का प्रभाव बहुत अधिक है। उनका कहना था कि न केवल यूरोप बल्कि एशिया की स्थिति भी सांसारिकता के प्रभाव से अछूता नहीं है। थाईलैंड के युवाओं के लिए धन सबसे महत्वपूर्ण है। नशीली पदार्थों की समस्या भी वहाँ एक बड़ी समस्या बनी हुई है जिसके कारण लोग हर रोज जेल जाते हैं।


(Usha Tirkey)

प्रेम का चिन्ह

In Church on May 3, 2018 at 3:29 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 3 मई 2018 (रेई)˸ प्रेम की चाह सबको होती है। जब हम किसी के प्रति अपना प्रेम प्रकट करना चाहते हैं तो हम उसे किसी चिन्ह अथवा कार्य के माध्यम से प्रकट करते हैं। येसु ने हम प्रत्येक से प्रेम किया और उस प्रेम को प्रकट करने के लिए उन्होंने क्रूस को चुना।

संत पापा फ्राँसिस 3 मई को एक ट्वीट प्रेषित कर कहा, “क्रूस में येसु ने अपने महान प्रेम एवं करुणा के सामार्थ्य को प्रकट किया।”


(Usha Tirkey)

आर्मीनियाई धर्मगुरू ने देश में मेल-मिलाप की अपील की

In Church on May 3, 2018 at 3:28 pm

येरेवान, बृहस्पतिवार, 3 मई 2018 (एशियान्यूज़)˸ आर्मीनियाई कलीसिया के शीर्ष (कथोलिकोस) कारेकिन द्वितीय ने 2 मई को जारी एक अपील में आर्मीनिया के अधिकारियों एवं विपक्ष को वैधता के ढांचे के भीतर कार्य करने का आह्वान किया है और बातचीत के माध्यम से देश में राजनीतिक संकट को हल करने के तरीकों की तलाश की अपील की है। ।

अपील के जवाब में, विपक्षी नेता निकोल पश्नीन्यान ने सभी आर्मीनियाई लोगों से प्रदर्शन को रोकने के लिए कहा है, क्योंकि उन्हें संसद से आश्वासन मिला है कि 8 मई को उन्हें प्रधानमंत्री चुना जा सकता है।

उन्होंने गणराज्य प्राँगण में एकत्र हुए हजारों प्रदर्शनकारियों के सामने कहा – सभी संसदीय समूहों ने घोषणा की है कि वे मेरी उम्मीदवारी का समर्थन करेंगे।

कारेकिन द्वितीय की अपील इचमजद्दीन के कुलपति द्वारा जारी की गई थी।

आर्मीनियाई कलीसिया के कथोलिकोस कारेकिन द्वितीय ने लिखा, “देश की स्थिति अत्यन्त तनाव पूर्ण एवं चिंताजनक है। हम लोगों को निमंत्रण देते हैं कि वे आगे के हर प्रकार के टकराव की संभवना को दूर करते हुए आपसी समझदारी में समाधान एवं समझौता की खोज करें।”

उन्होंने कहा कि इस स्थिति को दूर करने के प्रयासों को जारी रखने के लिए हम वार्ता शुरू करने हेतु सभी संसदीय दलों को आमंत्रित करते हैं। हमारी अपील उत्तेजना बढ़ाने और नफरत के प्रसार की अनुमति के बिना, एकजुटता और समझदारी के लिए है।

1 मई को, आर्मीनियाई संसद, प्रधानमंत्री पद के लिए पश्नीन्यान का चुनाव करने में नाकाम रही। उनकी एकमात्र उम्मीदवारी थी, जिसको रिपब्लिकन पार्टी ने वोट दिया था, जिसमें 55 प्रतिनिधियों ने उनके खिलाफ और केवल 45 ने उनके पक्ष में मतदान किया था।

सरूक्यान के सदस्यों के साथ अन्य विपक्ष दलों ने उनका समर्थन नहीं किया। ई आई के नेतृत्व वाली विपक्ष दल ने 2 मई से हड़ताल की घोषणा की जिसको पाशिन्यान ने तत्काल सम्बोधित कर कहा, यह नागरिकों का शांतिपूर्ण अवज्ञ है। उन्होंने ज्वार्तनोतस हवाई अड्डा तथा शहर की ओर जाने वाली सड़कों को बंद करने का अह्वान किया।

बंद तुरन्त प्रभावशाली हो गया। परिवहन मंत्रालय ने स्वीकार किया कि वे यात्रियों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकते। रेल सेवा कर्मी वार्डेन अलओजान ने प्रेस कार्यालय से कहा कि सभी रेल सेवायें रोक दी गयीं हैं। शहर में कार के द्वारा यात्रा करना भी असम्भव है और यहाँ तक कि भूमिगत मार्ग भी अवरूद्ध कर दिये गये हैं।

राजधानी के सभी क्षेत्रों और शहर की सड़कों पर, विरोध एक विशाल रूप ले लिया है, लेकिन डर है कि कहीं यह एक दुखद संघर्ष में न बदल जाए।


(Usha Tirkey)

यौन शोषण के शिकार लोगों के प्रति काथलिकों की एकात्मता

In Church on May 3, 2018 at 3:26 pm

मुम्बई, बृहस्पतिवार, 3 मई 2018 (मैटर्स इंडिया) ˸ मुम्बई के काथलिकों ने 1 मई को छः विभिन्न स्थलों में एकत्र होकर यौन शोषण के शिकार लोगों के प्रति एकात्मता व्यक्त की।

मुम्बई महाधर्मप्रांत के न्याय एवं शांति आयोग द्वारा आयोजित “क्योंकि हम चिंता करते हैं” शीर्षक कार्यक्रम में करीब 1,000 लोगों ने भाग लिया।

उन छः स्थलों में प्रार्थना सभा का संचालन किया गया, साथ ही साथ, धर्मगुरूओं एवं आयोग के सदस्यों द्वारा संदेश दिये गये।

एक ज्ञापन सौंपने के लिए हस्ताक्षर भी किये गये जिसे महिलाओं और बाल विकास हेतु संघीय मंत्री मेनका गांधी को प्रस्तुत किया जाएगा।

बोरिवली के संत फ्रांसिस ऑफ असीसी हाई स्कूल में समारोह में भाग लेने वाले एंड्रयू फर्नांडीस ने कहा “इस कार्यक्रम का आयोजन देश में तनावपूर्ण राजनीतिक स्थिति और सभी बढ़ते बलात्कार के मामलों के बीच शांति के संदेश को फैलाने के लिए किया गया था।, “यह विशेष रूप से अन्याय से पीड़ितों के लिए हमारा समर्थन दिखाना था।”

खार स्थित संत विन्सेंट दी पौल गिरजाघर के पल्ली पुरोहित ऑस्टिन नॉरिस ने कहा कि कार्यक्रम महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के मामले में असफल संस्कृति के संबंध में आयोजित की गई थी।

फादर ने बतलाया कि उन्होंने विले पार्ले के प्रार्थना सभा में भाग लिया था जिसमें उन्होंने महिलाओं और बच्चों की रक्षा के लिए प्रतिज्ञा की। उन्होंने कहा कि हम समाज में गंभीर अपराधों की बढ़ती दर से चिंतित हैं।


(Usha Tirkey)

पास्टर अब्राहम तोपनो की हत्या, माओवादियों पर शक

In Church on May 3, 2018 at 3:24 pm

भोपाल, बृहस्पतिवार, 3 मई 2018 (ऊकान)˸ झारखंड के कुबासाल गाँव में 2 मई को एक पेंतेकोस्त कलीसिया के पास्टर अब्राहम तोपनो की हत्या बड़ी बेरहमी से कर दी गयी।

46 वर्षीय पास्टर की हत्या की जानकारी देते हुए उनकी पत्नी हालदा तोपनो ने ऊका समाचार को बतलाया कि वे अपनी गाड़ी से कुछ अतिथियों को छोड़ने के लिए पड़ोस के गाँव गये थे। घर लौटते समय संदिग्ध माओवादियों ने उनकी गाड़ी को रोक दिया और उन्हें मार डाला। उसका मानना है कि माओवादियों ने उन्हें निशाना इसलिए बनाया क्योंकि उन्हें शक था कि वे पुलिस को सूचना देते हैं।

पास्टर के भतीजे अमान ख्रीस्तोकित ने बतलाया कि हत्यारों ने पास्टर के चालक रंगा सिंह मुण्डा को छोड़ दिया। ख्रीस्तोकित ने चालक से मिली जानकारी अनुसार बतलाया कि करीब 25 से अधिक लोग जो मिलिटरी वेश में अपने साथ हथियार लिये हुए थे, निर्जन सड़क पर पास्टर का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही उन्होंने गाड़ी देखा, उसे रोक लिया तथा पास्टर को गाड़ी से बाहर निकाल लिया जबकि चालक की आँखों पर पट्टी बांध दी गयी।

ख्रीस्तोकित ने कहा कि पास्टर का किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी वे गाँव के सभी लोगों की सहायता किया करते थे।

उसने कहा कि उसका चाचा भारत की पेंतेकोस्त कलीसिया के पास्टर थे वे गाँव में सामाजिक एवं शैक्षणिक परियोजना चलाते थे तथा धर्म के नाम पर किसी तरह का भेदभाव नहीं रखते थे।

यद्यपि झारखण्ड उन राज्यों में से एक है जहां ईसाईयों को हिंदू चरमपंथी समूहों द्वारा परेशानियाँ होती हैं किन्तु सामान्यतः उन्हें माओवादी विद्रोहियों के द्वारा समस्याएँ कम होती हैं जिन्हें आम तौर पर ईसाई मिशनरों के लिए खतरा नहीं माना जाता है।

नक्सलवादी माने जाने वाले माओवाद की शुरूआत 1967 में पश्चिम बंगाल में हुई थी। नक्सलवाद पश्चिम बंगाल के नक्सलबारी गांव में, लेनिनवादी-माओवादी दर्शन से प्रेरित एक किसान आंदोलन की शाखा है।

आंदोलन की शुरूआत एक भूमि जब्त आंदोलन के रूप में हुआ और राष्ट्रीय स्तर पर “जबरन शक्ति” के लिए एक सशस्त्र संघर्ष रूप में विकसित हो गया। यह 1960 के दशक के अंत में अन्य राज्यों में भी फैल गया।

नक्सली अब भारत के 60 जिलों में फैल गये हैं, मुख्य रूप से, वे आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल राज्यों में काम करते हैं। छत्तीसगढ़ संघर्ष का केंद्र माना जाता है।


(Usha Tirkey)

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