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सन्तों की घोषणा पर मतदान हेतु कार्डिनल परिषद की होगी बैठक

In Church on May 4, 2018 at 1:36 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 4 मई 2018 (रेई,वाटिकन रेडियो):  सन्त पापा फ्राँसिस ने कतिपय सन्तों की घोषणा हेतु कार्डिनल परिषद की बैठक की घोषणा की है। शनिवार 19 मई को कार्डिनल परिषद की बैठक का ऐलान किया गया है।

19 मई को प्रातः कालीन प्रार्थना के उपरान्त सन्त पापा कार्डिनल परिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में वाटिकन तथा रोम में निवास करनेवाले समस्त कार्डिनलों को आमंत्रित किया गया है।

कार्डिनल परिषद की बैठक के दौरान छः धन्य घोषित आत्माओं को सन्त घोषित किये जाने पर चिन्तन किया जायेगा। इनमें सन्त 1963 से 1978 तक सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया के परमाध्यक्ष रहे सन्त पापा पौल षष्टम एवं लातीनी अमरीका स्थित सान साल्वाडोर के शहीद महाधर्माध्यक्ष ऑस्कर रोमेरो भी शामिल हैं। सन् 1980 में महाधर्माध्यक्ष रोमेरो की हत्या उस समय कर दी गई थी जब वे ख्रीस्तयाग अर्पित कर रहे थे।

अन्य धन्य आत्माएँ जिनकी सन्त घोषणा पर बातचीत की जायेगी वे हैं:

– पवित्र संस्कार की आराधना करनेवाली धर्मबहनों के धर्मसंघ के संस्थापक धर्म प्रान्तीय पुरोहित फ्राँन्चेस्को स्पिनेल्ली जो थे

– धर्मप्रान्तीय पुरोहित विन्चेन्सो रोमेओ

– येसु ख्रीस्त की अकिंचन दासियाँ नामक धर्मसंघ की संस्थापिका कुँवारी कैथरीन कास्पेर

– क्रूसेड के मिशनरी नामक धर्मसंघ की संस्थापिका नीई नज़ारिया इग्नासिया मार्क मेसा।


(Juliet Genevive Christopher)

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भारत के सातवें राज्य ने किया धर्मान्तरण विरोधी कानून लागू

In Church on May 4, 2018 at 1:34 pm

भोपाल, शुक्रवार, 4 मई 2018 (ऊका समाचार): उत्तराखण्ड भारत का सातवाँ राज्य है जिसने धर्मान्तरण विरोधी कानून लागू कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली उत्तराखंड राज्य सरकार ने 20 मार्च को विधेयक पारित किया था जिसपर राज्यपाल कृष्ण कांत पॉल ने 18 अप्रैल को हस्ताक्षर कर दिये।

राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी दर्शन सिंह रावत ने 2 मई को ऊकान्यूज़ डॉट कॉम को बताया कि बिल अब राजपत्र में प्रकाशित होने की प्रक्रिया में है जिसके बाद यह प्रभावी हो जायेगा।

नया कानून किसी नाबालिग अथवा महिला या फिर दलित लोगों एवं आदिवासी समूहों से संबंधित व्यक्ति के बलात धर्मान्तरण के लिये दो साल के कारावास की अवधि निर्धारित करता है।

जिन राज्यों में धर्मान्तरण विरोधी कानून लागू है वहाँ धर्मान्तरण विधि से एक महीने पहले राज्य के अधिकारियों को सूचित करना अनिवार्य है। धोखाधड़ी से, बलपूर्वक अथवा लालच देकर धर्मान्तरण भी अपराध निर्धारित किया गया है जिसके लिये जेल हो सकती है या फिर ज़ुर्माना भरना पड़ सकता है।

उत्तराखण्ड  भारत का सातवाँ राज्य है जिसने धर्मान्तरण विरोधी कानून लागू किया है। उड़ीसा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश एवं झारखण्ड में पहले से ही धर्मान्तरण विरोधी कानून लागू है।

नए कानून में यह भी कहा गया है कि एक धर्म के व्यक्ति द्वारा दूसरे धर्म की महिला के साथ केवल धर्मान्तरण के एकमात्र उद्देश्य से किया गया औपचारिक विवाह पारिवारिक अदालत द्वारा शून्य और रद्द किया जा सकता है।

उत्तराखण्ड स्थित बरेली के काथलिक धर्माध्यक्ष इग्नेशियस डिसूज़ा ने ऊका समाचार से कहा कि कलीसियाई अधिकारी नये कानून से वाकिफ़ हैं तथापि उनका विश्वास है कि यह उनके मिशन में बाधा नहीं बनेगा।

उन्होंने कहा, “हम दशकों से लोगों के बीच कल्याणकारी कार्यों एवं प्रचार मिशन में संलग्न हैं और हमारे समक्ष कभी भी कोई गंभीर समस्या नहीं आई है”। उन्होंने कहा, “नया कानून बलात अथवा लालच देकर धर्मान्तरण के खिलाफ़ है किन्तु काथलिक कलीसिया में इस प्रकार का कोई धर्मान्तरण न तो हुआ है और न कभी होगा। हमारा लक्ष्य केवल प्रभु येसु मसीह के शांति सन्देश का प्रचार करना है ताकि लोग बेहतर जीवन यापन कर सकें, धर्मान्तरण में हमारी कोई अभिरुचि नहीं है।”

इसी बीच, मेरठ के काथलिक धर्माध्यक्ष फ्राँसिस कालिस्ट ने कहा कि नये कानून पर वे इस समय  कुछ नहीं कह सकते इसलिये कि किस प्रकार कानून लागू किया जायेगा इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

सन् 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिलने के दो दशक बाद धर्मान्तरण विरोधी कानून अस्तित्व में आया था किन्तु तब से अब तक किसी भी ख्रीस्तीय धर्मानुयायी को अपराधी करारा नहीं गया है। हालांकि, विगत दशक में कई चरमपंथी हिन्दू दलों ने ख्रीस्तीयों पर धर्मान्तरण का आरोप लगाकर पुलिस में शिकायत दर्ज़ की है।

उत्तराखण्ड की एक करोड़ की कुल आबादी में अधिकाँश जनता हिन्दू धर्मानुयायी है। ख्रीस्तीय केवल एक प्रतिशत तथा मुसलमान 14 प्रतिशत हैं।


(Juliet Genevive Christopher)

वाटिकन संग्रहालय की डायरी में द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास का विवरण

In Church on May 4, 2018 at 1:32 pm


वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 4 मई 2018 (रेई,वाटिकन रेडियो):  वाटिकन संग्रहालय के पूर्व निर्देशक बारथोलोमेओ नोगारा की डायरियों से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वाटिकन की जीवन यापन शैली प्रकाश में आ रही है। नोगारा की डायरियों में सन् 1920 ई. से लेकर 1954 तक का विवरण लिखा है।

कोमो के निवासी प्राध्यापक बारथोलोमेओ नोगारा सन् 1920 में तत्कालीन सन्त पापा बेनेडिक्ट 15 वें द्वारा वाटिकन संग्रहालय के निर्देशक नियुक्त किये गये थे। सन् 1954 ई. तक वे संग्रहालय के निर्देशक रहे थे जिस दौरान उन्होंने वाटिकन की गतिविधियों पर अपनी डायरियों में पूर्ण विवरण लिखा था। नोगारा की ये डायरियाँ 02 मई को उनके पोते द्वारा वाटिकन के अधिकारियों के सिपुर्द कर दी गई थी।

ये डायरियाँ कुल मिलाकर 41 हैं जिनके कुछेक अंशों को वाटिकन के समाचार पत्र लोस्सरवातोरे रोमाने ने प्रकाशित भी कर दिया है। प्रकाशित अंशों के अनुसार नोगारा तथा वाटिकन संग्रहालय के कई अधिकारियों ने मिलकर नाज़ियों द्वारा उत्पीड़ित एवं निर्वासित यहूदियों को शरण प्रदान की थी। इनमें प्रमुख थीं जर्मन महिला हेरमिन स्पायर जिन्हें 1933 ई. में यहूदी होने के कारण जर्मनी में नौकरी से निकाल दिया गया था। हेरमिन ने वाटिकन संग्रहालय में शरण ली थी और वे पहली महिला थी जिन्हें बाद में वाटिकन संग्रहालय में ही नौकरी प्रदान की गई थी।

यहूदियों को शरण प्रदान करने के अतिरिक्त, डायरियों से पता चला है कि संग्रहालय ने इटली के विपक्षी दलों के सदस्यों को भी शरण प्रदान की थी। साथ ही उन कलाकृतियों का भी विवरण मिला है जिनकी रक्षा वाटिकन संग्रहालय में की गई थी।

इसके अलावा, सन्त पापा पियुस ग्यारवें के साथ वार्तालाप के भी विवरण लिखे हैं जिन्होंने वर्षा के कई दिन वाटिकन संग्रहालय में रहकर गुज़ारे थे। साथ ही वाटिकन संग्रहालय को लन्दन, पेरिस, अथवा बर्लिन के संग्रहालयों के स्तर तक लाने हेतु किये गये प्रोफेसर नोगारा के प्रयासों का भी विवरण शामिल है।


(Juliet Genevive Christopher)

म्यानमार के धर्माध्यक्षों ने कच्छिन राज्य में किया न्याय एवं शांति का आह्वान

In Church on May 4, 2018 at 1:30 pm


म्यानमार, शुक्रवार, 4 मई 2018 (रेई,वाटिकन रेडियो): म्यांमार के उत्तरी कच्छिन राज्य में  सरकारी सुरक्षा बलों और कच्छिन स्वतंत्रता सेनानियों के बीच विद्रोहों की तेज वृद्धि के बाद म्यानमार के काथलिक धर्माध्यक्षों ने क्षेत्र में न्याय और शांति का आह्वान किया है।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस सप्ताह एक रिपोर्ट में बताया कि सरकारी सेना ने चीन की सीमा के निकटवर्ती गाँवों पर हवाई बम विस्फोट और गोलाबारी की है। म्यांमार में मानव अधिकार सम्बन्धी संयुक्त राष्ट्र के विशेष आयुक्त ने मंगलवार को कहा, “नागरिक “मारे जा रहे हैं और घायल हो रहे हैं तथा सैकड़ों परिवार अपनी प्राण रक्षा के लिये भागने पर बाध्य हैं।”

उत्तरी मीतकीईना धर्मप्रान्त के धर्माध्यक्ष फ्राँसिस दाओ तांग सन्त पापा फ्राँसिस के साथ अपनी पंचवर्षीय पारम्परिक मुलाकात हेतु इस समय रोम में हैं। उन्होंने वाटिकन न्यूज़ से बातचीत में बताया कि कलीसिया संघर्ष के बीच शांति और पुनर्मिलन का प्रयास कर रही है।

म्यानमार में बहुसंख्यक बर्मी बौद्ध तथा देश के कई अलग-अलग जातीय अल्पसंख्यकों के बीच संघर्ष जारी है।

धर्माध्यक्ष तांग ने कहा कि सेना विगत एक वर्ष से अम्बर खनन क्षेत्रों को छोड़ने का आदेश दे रही है किन्तु अब उसने सीमा क्षेत्र पर हमला करना शुरू कर दिया है।

उन्होंने कहा, “शनैः शनैः”, सेना क्षेत्र में प्रवेश कर रही है और नागरिकों को आदेश दे रही है, इनमें स्थानीय लोगों के साथ-साथ क्षेत्र के खनिक भी शामिल हैं। अनेक गाँवों पर हमला किया गया, अनेक भागने में सफल हो गये किन्तु कई लोग विगत तीन सप्ताहों से घने जंगलों में फंसे हैं।

धर्माध्यक्ष ने कहा कि कलीसिया के अधिकारी लोगों के साथ बातचीत का प्रयास कर रहे हैं तथा उन तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं किन्तु अब तक वे सफल नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया कि गम्भीर स्थिति के मद्देनज़र बर्मा के असंख्य युवाओं ने विरोध प्रदर्शनों का आह्वान किया है ताकि जंगलों में फंसे लोगों को मुक्त किया जा सके जो भोजन, स्वास्थ्य सेवा एवं आवागमन की स्वतंत्रता के बिना बहुत कष्ट उठा रहे हैं।


(Juliet Genevive Christopher)

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