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संत पापा ने न्योकाटेक्यूमेनल वे के सदस्यों को मिशन हेतु भेजा

In Church on May 5, 2018 at 1:47 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 5 मई 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 5 मई को, रोम के “तोर वेरगाता” विश्वविद्यालय में न्योकाटेक्यूमेनल वे के सदस्यों से मुलाकात की जो उसकी स्थापना की 50वीं वर्षगाँठ मना रहे हैं।

संत पापा ने उन्हें सुसमाचार को जीने एवं उसका प्रचार करने हेतु बाहर जाने की सलाह दी।

उन्होंने जयन्ती वर्ष में ईश्वर को कृतज्ञता व्यक्त करने पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ईश्वर को उनके प्रेम एवं निष्ठा के लिए धन्यवाद देना उचित है। हम बहुधा उनके वरदानों के लिए उन्हें धन्यवाद देते हैं जो अच्छा है किन्तु उससे भी अधिक अच्छा है कि हम, वे जो हैं उसके लिए धन्यवाद दें क्योंकि वे प्रेम में निष्ठावान ईश्वर हैं, उनकी अच्छाई हम पर निर्भर नहीं करती। हम कुछ भी करते हैं किन्तु ईश्वर निष्ठापूर्वक हमें प्रेम करते रहते हैं। यही हमारे लिए भरोसा का स्रोत है, हमारे जीवन के लिए महान दिलासा का स्रोत। अतः हम साहसी बनें। जब समस्याओं के बादल घिरने लगे तब हम याद करें कि ईश्वर का प्रेम निष्ठावान है जो कभी अस्त नहीं होने वाले सूर्य की तरह सदा चमकता रहता है। उनकी अच्छाईयाँ हमारी बुराईयों से अधिक शक्तिशाली हैं तथा ईश्वर के प्रेम की मधुर स्मृति हमें हर परेशानी का सामना करने में मदद देगा।

संत पापा ने सुसमाचार प्रचार के मिशन की प्रेरिताई हेतु प्रोत्साहन देते हुए कहा कि यह आज कलीसिया की प्राथमिकता है क्योंकि मिशन का अर्थ है ईश्वर के निष्ठावान प्रेम का साक्ष्य देना। इसका अर्थ है यह घोषित करना कि प्रभु हमें प्यार करते हैं और वे हम प्रत्येक को प्रेम करने से कभी नहीं थकते। प्रेरिताई करने का अर्थ हमने जो पाया है उसे बांटना। यह येसु का आदेश है कि हम दुनिया के कोने-कोने में जाकर सभी लोगों को उनके शिष्य बनायें।

संत पापा ने कहा कि मिशन हमें जाने हेतु प्रेरित करता है किन्तु जीवन में रूकने का बड़ा प्रलोभन है, जोखिम नहीं उठाने एवं नियंत्रित परिस्थिति से संतुष्ट रहने का प्रलोभन। घर में अपने प्रिये जनों के पास रहना आसान है किन्तु यह येसु का रास्ता नहीं है। येसु अपने सभी शिष्यों को भेजते हैं, “जाओ” जो बाहर जाने का आदेश है। दुनिया के तीर्थयात्री बनकर अपने भाइयों को खोजने के लिए जो ईश्वर के प्रेम के आनन्द को अभी तक नहीं जानते हैं।

संत पापा ने बाहर जाने के लिए त्याग करने की आवश्यकता बतलाते हुए कहा कि हम अपने साथ घर के सारे समानों को लेकर नहीं जा सकते। येसु ने गरीब रहना स्वीकार किया उसी तरह सुसमाचार का प्रचार करने वाले को त्याग करने की आवश्यकता पड़ती है। संत पापा ने कहा कि वही कलीसिया प्रभु का प्रचार अच्छी तरह कर सकती है जो त्याग करती है। वही कलीसिया जो धन एवं सत्ता से मुक्त है, विजयवाद एवं याजकवाद से मुक्ति का साक्ष्य दे सकती है कि ख्रीस्त मनुष्यों को मुक्ति प्रदान करते हैं और जो उनके प्रेम से चीजों का त्याग करना सिखती है।
संत पापा ने मिशन हेतु एक साथ जाने की सलाह देते हुए कहा कि एक साथ चलना एक कला है जिससे हरेक को सावधान रहना चाहिए ताकि हम दूसरों के प्रयास पर दखल न दें बल्कि एक-दूसरे को साथ दें और सबका इंतजार कर सकें।

संत पापा ने कहा, “लोगों की संस्कृति एवं परम्परा से प्रेम करें। सिद्धांतों से नहीं किन्तु ठोस परिस्थिति से शुरू करें। इस प्रकार पवित्र आत्मा अपने समय एवं तरीकों के अनुसार सुसमाचार के प्रचार को सुनिश्चितता प्रदान करेगा। कलीसिया विभिन्न प्रकार के लोगों, उनके वरदानों एवं विशिष्ठताओं द्वारा अपने स्वरूप में विकसित होगी।
संत पापा ने सभी सदस्यों को सलाह दी कि वे प्रभु के प्रेमी निष्ठा पर विश्वास करते हुए उन पर कभी भरोसा न खोयें।

 


(Usha Tirkey)

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जर्मन धर्माध्यक्षों से संत पापा: सर्वसम्मति से व्यवस्था की खोज करें

In Church on May 5, 2018 at 1:45 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 5 मई 2018 (वाटिकन न्यूज़): गैरकाथलिक दम्पतियों के पवित्र परमप्रसाद ग्रहण करने के संबंध में प्रेरितिक प्रस्तवना पर विचार-विमर्श करने हेतु जर्मनी के धर्माध्यक्षों का एक दल वाटिकन की एक सभा में भाग ले रहा है।

बृहस्पतिवार को वाटिकन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई सभा में धर्माध्यक्षों ने प्रेरितिक दिशानिर्देश पर चर्चा की जिसकी घोषणा फरवरी में की गयी थी। जर्मनी के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने उस समय उन दिशानिर्देशों को मंजूरी दे दी थी जो संभावित रूप से गैर-काथलिक ईसाइयों को पवित्र कम्युनियन प्राप्त करने के लिए अनुमति प्रदान करेगी जो काथलिकों से विवाह किये हैं।

वाटिकन प्रेस कार्यालय द्वारा जारी एक वक्तव्य में कहा गया है कि संत पापा के साथ सभा एक सौहार्द और भाईचारापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई।
वक्तव्य में कहा गया है कि जर्मनी के कुछ धर्माध्यक्षों द्वारा प्रस्ताविक दिशानिर्देश का विरोध किये जाने के कारण वे संत पापा फ्राँसिस द्वारा  रोम बुलाये गये थे। सात धर्माध्यक्षों ने विश्वास एवं धर्म सिद्धांत के लिए बनी परमधर्मपीठीय धर्मसंघ, ख्रीस्तीय एकता हेतु गठित परमधर्मपीठीय परिषद तथा स्पष्टीकरण के लिए विधान ग्रंथों हेतु बनी परमधर्मपीठीय समिति से अपील की थी।
बातचीत के दौरान विश्वास के सिद्धांत हेतु परमधर्मपीठीय सचिव महाधर्माध्यक्ष लुईस फ्राँसिसको लादारिया फेरर ने बतलाया कि संत पापा ने जर्मन धर्माध्यक्षों को अंतरधार्मिक वार्ता के प्रति उनके समर्पण के लिए उनकी सराहना की तथा संभवतः सर्वसम्मति से व्यवस्था की खोज करने का आग्रह किया।
वक्तव्य में कहा गया है कि सभा के दौरान कई विन्दुओं पर विचार किया गया।

विश्वास के सिद्धांत के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के कार्यालय में बृहस्पतिवार को हुई सभा में निम्नलिखित धर्माध्यक्ष उपस्थित थे, म्यूनिक के महाधर्माध्यक्ष एवं जर्मनी के काथलिक धर्मा कार्डिनल रेईनहार्ड मार्क्स, कार्डिनल रैनर मरिया वोएल्की, धर्माध्यक्ष फेलिक्स गेन्न, धर्मा, धर्माध्यक्ष रूडोल्फ वोडरहोलजर, धर्माध्यक्ष गेरहर्ड फेईज तथा फादर हान्स लांगेनडोरफर।

 


(Usha Tirkey)

एक अच्छा चरवाहा सतर्क और अपने झुंड के साथ रहता है, संत पापा फ्राँसिस

In Church on May 5, 2018 at 1:44 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 5 मई 2018 (वीआर,रेई) : एक भले चरवाहे के रुप में धर्माध्यक्ष अपने लोगों के समीप रहता, उनकी देखभाल करता और उनके विश्वास को मजबूत करता है। ये बात संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 4 मई को अपने प्रेरितिक निवास संत मार्था को प्रार्थनालय में पवित्र युखारिस्त के दौरान अपने प्रवचन में कही।

ईश्वर के लोगों में विचलन

संत पापा फ्राँसिस ने प्रेरित चरित से लिये गये पहले पाठ पर चिंतन किया जहाँ पेत्रुस और अन्य प्रेरित अंताखिया में ख्रीस्तीयों के बीच शांति की स्थापना के लिए पौलुस, बारनाबास और दो प्रेरितों को भेजा। अंताखिया की कलीसिया के प्रभारी जो खुद को विश्वास के सच्चे रूढ़िवादी धर्मविदों के रूप में मानते थे, वास्तव में विश्वासियों को विचलित कर रहे थे जबकि, प्रेरितों को यानी आज के धर्माध्यक्षों को अपने लोगों के विश्वास को मजबूत करना है।

धर्माध्यक्ष- जागृत, सावधान और सहभागी

संत पापा ने कहा, एक धर्माध्यक्ष हमेशा सजग रहता है, आने वाली हर कठिनाई से सावधान रहता है। वह एक रक्षक है और आने वाले भेड़िये से भेड़ों की रक्षा करना जानता है।”

संत पापा ने सच्चे चरवाहे और मजदूर में अंतर दिखाते हुए कहा कि मजदूर तो सिर्फ मजदूरी पाने के लिए काम करता है अगर भेड़िया आकर एक भेड़ को खा भी ले तो उसे उसकी कोई परवाह नहीं। सच्चा गड़ेरिया सजग रहता है वह एक एक भेड़ की चिंता और उनकी रखवाली करता है। उनके साथ रहता है उनके विश्वास को मजबूत करता है और जब एक भेड़ भटक जाती है तो उसे ढूँढ़ लाता है। वह एक को भी भटकने और खोने नहीं देता है।

धर्माध्यक्ष-अपने लोगों के करीब

संत पापा ने कहा कि धर्माध्यक्ष एसा चरवाहा है जो अपनी एक-एक भेड़ को नाम से जानता है। वह उनके करीब रहता है। साथ ही उनके विश्वासी भी महसूस कर सकते हैं कि कौन उनकी देखभाल सही रुप में करते हैं और कौन नहीं करते हैं। एक धर्माध्यक्ष जो अपने को बहुत व्यस्त दिखाता है अपने लोगों से मिलने के लिए उसके पास समय नहीं है, या एक व्यापारी की तरह जो अपने मिशन के साथ असंगत चीजों में व्यस्त रहता है, जो सूटकेस हाथ में लिए यात्रा में अपना समय बिताता है या जो गिटार हाथ में लिए हुए नजर आता है, इत्यादि।

संत पापा ने ‘करीबी’ शब्द पर जोर देते हुए कहा कि विश्वासी सचमुच में एक भले चरवाहे को पहचानते हैं। भला चरवाहा अपने लोगों के करीब रहता उनके दुख-सुख में सहभागी होता और उनके लिए अपने प्राण देने को भी तैयार रहता है।

संत पापा ने एक भले चरवाहे के रुप में मोग्रोवेहो के संत तुरिबियुस का उदाहरण देते हुए कहा कि स्पानी संत की एक छोटे से आदिवासी गाँव में अपने ही ख्रीस्तीयों के बीच मृत्यु हुई। लोगों ने उनके लिए ‘चिरिमिया’ संगीत बजाया जिससे कि वे शांति के साथ इस दुनिया से विदा ले सकें।

प्रवचन के अंत में संत पापा ने कलीसिया में अच्छे धर्माध्यक्षों के लिए प्रार्थना करने की प्रेरणा दी जो अपने लोगों के लिए प्रार्थना करें, उनके साथ रहें और उन्हें विश्वास में मजबूत करें।


(Margaret Sumita Minj)

‘ड्यूटी पर या बाहर, एक स्विस गार्ड हमेशा स्विस गार्ड होता है!’: संत पापा फ्राँसिस

In Church on May 5, 2018 at 1:42 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 5 मई 2018 (रेई) : जैसा कि 6 मई रविवार को 33 नए स्विस गार्ड संत पापा के प्रति अपनी निष्ठा की प्रतिज्ञा करने के लिए तैयार हैं, संत पापा फ्रांसिस ने उन्हें शुक्रवार मई को संत पॉल छठे सभागार  में उनसे मुलाकात की और उन्हें याद दिलाया कि ” ड्यूटी पर या बाहर, स्विस गार्ड हमेशा स्विस गार्ड होता है!”

6 मई को प्रेरितिक भवन के प्रांगन में, स्विस गार्ड की भर्ती एवं पारंपरिक शपथ ग्रहण की तैयारी में आये  33 नव नियुक्तों और उनके परिवार के सदस्यों तथा स्विस अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल का संत पापा फ्राँसिस ने स्वागत किया। संत पापा ने आशा व्यक्त की कि वाटिकन में रहकर ये सैनिक अपने विश्वास को मजबूत कर पायेंगे और कलीसियाई समुदाय को अपना मानने की भावना में बढ़ पायेंगे।।

संत पापा ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए विशेष सैन्य दल का धन्यवाद दिया जो “अनुशासन, कलीसियाई भावना, विवेकाधिकार और दृढ़ता एवं शांत व्यावसायिकता” के साथ हर दिन अपनी सेवा देते हैं।”संत पापा ने रोम के धर्माध्यक्ष के प्रति उनकी दृढ़ निष्ठा को उजागर किया और याद दिलाया कि 6 मई को शपथ ग्रहण समारोह 147 स्विस सैनिकों की याद दिलाता है जो 1527 में रोम में संत पापा क्लेमेंट सातवें  की रक्षा में मारे गए थे।

” उनका बलिदान हमेंशा इस बात को ध्यान में रखने हेतु निमंत्रण और सैन्य-दल के विशिष्ट गुणों का एहसास दिलाती है कि वे सदा काथलिक विश्वास में जीते रहें, येसु के साथ दोस्ती में और कलीसिया के प्रेम में दृढ़ बने रहें, प्रसन्न रहें और छोटे-बड़े दैनिक कार्यों में, नम्रता, साहस, धैर्य, उदारता और एकजुटता दिखाएं।”

संत पापा ने कहा कि आप वाटिकन में सेवा करते समय इन गुणों को अभ्यास करने के लिए बुलाए गये है। इसलिए जब आप अपनी वर्दी में हैं या नहीं, तो भी:”एक स्विस गार्ड हमेशा स्विस गार्ड होता है, सभी समय, ड्यूटी पर और बाहर!”

विदित हो कि सैन्य-दल में भर्ती होने के लिए, उम्मीद्वार को स्विटजरलैंड का होना चाहिए, काथलिक, अविवाहित, 19 से 30 साल के बीच का और कम से कम 1.74 मीटर लंबा होना चाहिए!


(Margaret Sumita Minj)

पड़ोसी पर की गई हिंसा से ईश्वर नाराज होते हैं,संत पापा फ्राँसिस

In Church on May 5, 2018 at 1:40 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 5 मई 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 5 मई को ट्वीट प्रेषितकर सभी ख्रीस्तीयों को ईश्वर और अपने पड़ोसी के प्रति अपने उत्तरदायित्व को याद कराया।

संदेश में उन्होंने लिखा,“हमारे पड़ोसी पर हिंसा का हरएक कृत्य, अपमान या चोट, हमारे सृस्टिकर्ता पिता ईश्वर को नाराज करता है।”

संत पापा ने शुक्रवार 4 मई के संदेश में सुसमाचार को जीने का तरीका बाते हुए लिखा,“जो लोग मानसिक और शारीरिक पीड़ा में हैं, उनके लिए उदारता के साथ खुशीपूर्वक काम करना, सुसमाचार को जीने का सबसे प्रामाणित तरीका है।”


(Margaret Sumita Minj)

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