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‘आधुनिक युग की दासता’ मंच को संत पापा फ्राँसिस का वीडियो संदेश

In Church on May 7, 2018 at 3:48 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 7 मई 2018 (रेई):  अर्जेंटीना के बोनस आर्यस में 5से 8 मई 2018 तक चल रहे आधुनिक युग की दासता पर चल रहे मंच को संत पापा फ्राँसिस ने एक वीडियो संदेश भेजा। बोनस आर्यस के ओर्थोडोक्स महाधर्मप्रांत इस कार्यक्रम की मेजबानी कर रहे हैं और कैलिफोर्निया, बर्कली के अथनागोरस संस्थान के कुलपति आर्थिक सहायता दे रहे हैं। यह मंच आधुनिक युग की दासता के मुद्दे को हल करने और समस्या के समाधान का प्रस्ताव देने के लिए विद्वानों, नीति निर्माताओं, शांतिकर्मियों और धर्मविदों जैसे जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों से विशेषज्ञों को एक साथ लाता है। यह मंच ऑत्थोडोक्स कलीसिया के नेता प्राधिधर्माध्यक्ष बार्थोलोमेयो  और कैंटरबरी के महाधर्माध्यक्ष जस्टिन वेल्बी द्वारा शुरू किए गए काम को जारी रखा है। दोनों कलीसियाओं के नेताओं ने 2017 में इस्तांबुल, तुर्की में इस तरह के सम्मेलन को  शुरु किया था।

संत पापा फ्राँसिस ने अपना संदेश प्रतिभागियों के सामने आने वाली समस्या के पैमाने के एक उदाहरण के साथ शुरू किया। संत पापा ने आज की दुनिया में दासता और मानव तस्करी के कुछ रूपों जैसे, ऋण और यौन शोषण के माध्यम से श्रमिकों के शोषण को सूचीबद्ध कर प्रतिभागियों को एक चौंकाने वाली छवि प्रस्तुत की।

“हाल के कुछ आंकड़ों के अनुसार, 40 मिलियन से अधिक लोग, विशेष रूप से महिलाएं और बच्चे दासता का सामना करते हैं। हम यह सोच सकते हैं कि यदि वे एक ही शहर में रहते हैं, तो यह हमारी पृथ्वी पर सबसे घनी आबादी वाला शहर होता और बोनस आर्यस के शहरी क्षेत्र की आबादी चार गुना अधिक हो जाता।”

मानवता के खिलाफ अपराध

संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि मानवता के खिलाफ अपराध के रूप में आधुनिक युग की दासता के अभ्यास “उदासीनता की जंजीर” तोड़ने की जरुरत है।

मूल कारण

संत पापा ने इस बात पर भी जोर दिया कि दासता की समस्या को हल करने की कुंजी मूल कारणों को संबोधित करने और उन देशों की स्थितियों में सुधार करना है जहां दासता आम है।

“यदि कुछ राज्यों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा मनुष्यों के शोषण को दंडित करने के लिए विशेष रूप से कठोर नीति अपनाना पर्याप्त नहीं है। बाद में कारणों को संबोधित नहीं किया जाता है, तो समस्यायें गहरी जड़ जमा लेंगी।

जब देश अत्यंत गरीबी का सामना करते हैं, हिंसा और भ्रष्टाचार का सामना करते हैं, वहाँ न तो अर्थव्यवस्था, न ही विधायी ढांचे और न ही मूल आधारभूत संरचनाएं प्रभावी होती हैं; वे सुरक्षा, संपत्ति या आवश्यक अधिकारों की गारंटी देने में विफल रहते हैं। इस तरह, इन अपराधों के अपराधियों के लिए कुल दंड के साथ काम करना जारी रखना आसान है।”

संत पापा ने मंच के प्रतिभागियों को याद दिलाया कि आधुनिक युग की दासता को समाप्त करने का काम एक लम्बी प्रक्रिया है इसके लिए बहुत ही साहस, धैर्य और दृढ़ता की आवश्यकता है।


(Margaret Sumita Minj)

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संत पापा फ्राँसिस के ट्वीट संदेश

In Church on May 7, 2018 at 3:47 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार 7 मई 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने पास्का के छठे रविवार 6 मई को ट्वीट प्रेषितकर पास्का के आनंद के संदेशवाहक बनने की प्रेरणा दी।

संदेश में उन्होंने लिखा,“पास्का की उद्घोषणा के सच्चे और आनंदमय संदेशवाहक और “आशा का दूत” बनना कितना ही मनोरम है।”

संत पापा ने सोमवार 7 मई के संदेश में लिखा,“ हे प्रभु, हमारे हृदय को परिवर्तन कीजिए तकि आपका प्रेम पूरी पृथ्वी पर फैल जाये।


(Margaret Sumita Minj)

येसु से प्रेम करना सीखें, संत पापा फ्राँसिस

In Church on May 7, 2018 at 3:45 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 7 मई 2018 (रेई): “मेरे प्रेम में बने रहो। येसु ने मरने से पहले अपने चेलों को यह सलाह दी थी और यही सलाह आज भी येसु हम में से प्रत्येक को दे रहे हैं।” यह बात संत पापा फ्राँसिस ने रविवार अपराहन को रोम स्थित दिव्य संस्कार पल्ली के गिरजाघर में युखारीस्तीय समारोह के दौरान अपने प्रवचन में कही।

संत पापा ने संत योहन के सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जहाँ येसु अपने दुखभोग की शुरुआत करने से पहले एवं गेतसेमनी बारी जाने के पहले अपने चेलों से प्रेम में बने रहने को कहा था।

प्यार वह नहीं है जो फिल्मों में दिखाया जाता है

संत पापा ने कहा,आइये हम प्रेम पर विचार करें। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रेम पर आधारित एक फिल्म देखी थी देखने में अच्छी था। दो प्रेमियों में दोस्ती हुई, फिर मंगनी हुई पर फिल्म की समाप्ति ठीक नहीं हुई। उनका प्रेम टूट गया। प्रेम वह नहीं जो फिल्मों में दिखाया जाता है या वायलिन बजाना, रोमांटिक शब्दों से प्रेम का इजहार कर प्रेम करना फिल्मों में होता है। दैनिक जीवन में प्रेम कार्यों में दिखता हैं। माता अपने बच्चों से प्रेम करती है वह उनके लिए दिनभर काम करती है। उनकी देखभाल करती है। प्रेम सिर्फ बातों से नहीं अपितु कामों से प्रदर्शित किया जाता है।

हमें प्रभु ने सबसे पहले प्रेम किया

संत पापा ने वहाँ उपस्थित प्रत्येक को अपने आप से प्रश्न करने को कहा,“ मैं दूसरों के लिए क्या करता हूँ?” आपकी गली के बीमार लोग आपसे कहते हैं,“ आप मेरे लिए क्या करते हैं?”  संत पापा ने कहा,“ प्रेम कार्य के द्वारा दिखता है।” परिवार में माता पिता बच्चों के लिए करते हैं। बच्चे अपने माता पिता और दादा-दादी के लिए करते हैं उनकी मदद करते हैं उनकी बातों को सुनते है। इस तरह अपने दैनिक जीवन में अपने कामों द्वारा हम अपने प्रेम को दिखाते हैं।

येसु से सच्चा प्रेम सीखना

संत पापा ने कहा,“आज के दूसरे पाठ में एक वाक्यांश है जो हमारी आंखें खोल सकता है: प्यार हमेशा पहले होता है। ईश्वर ने अपने पुत्र को हमारे पास भेजकर अपने प्रेम को प्रकट किया। यही प्रेम है।

अपने प्रवचन के अंत में संत पापा ने कहा, “प्यार का थर्मामीटर है भाषा : दूसरों के बारे में बुरी बात नहीं बोलना।”  इसके बारे संत पापा ने दूसरे अवसरों में भी कहा था। संत पापा ने दूसरों के बारे शिकायत न करने के लिए उपाय पूछे जाने पर कहा, “यह बहुत आसान है और यह हर किसी के हाथों में है। जब आप दूसरों के बारे में बुरी बात करना चाहते हैं, तो अपनी जीभ काट लें! आह, यह फूल जाएगा? लेकिन यकीन करें कि आप और बुरी बात नहीं करेंगे।”


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा ने रोम स्थित तोर दी स्कियावी के पवित्र संस्कार पल्ली का दौरा किया

In Church on May 7, 2018 at 3:44 pm

रोम, सोमवार 7 मई 2018 ( वीआर,रेई) : संत पापा फ्राँसिस रविवार 6 मई रोम स्थित तोर दी स्कियावी के पवित्र संस्कार पल्ली का दौरा किया और वहाँ विकलांग लोगों के लिए बनाये गये घर “कासा देला जोया” “आनंदालय” का उद्घाटन किया।

संत पापा रविवार को निर्धारित समय अपराहन 4 बजे से करीब 40 मिनट पहले ही पवित्र संस्कार पल्ली पहुँचे। वहाँ संत पापा का स्वागत महाधर्माध्यक्ष अंजेलो दे दोनातिस, कार्डिनल जोस जोर्ज रोसा, कार्डिनल लुईस अंतोनियो ताग्ले पल्ली पुरोहित डोन मौरिजियो मिरिल्ली ने किया।

संत पापा ने पल्ली के प्रांगण में पल्ली के माता-पिता, युवाओं, बच्चों और धर्मशिक्षकों से मुलाकात की। वहाँ चार लोगों ने संत पापा से प्रश्न किया जिसका उत्तर संत पापा ने दिया।

सबसे पहले  प्रार्थनालय दल के प्रमुख मौरिजोयो ने पूछा,“ बच्चों के विश्वास की यात्रा में माता पिता के योगदान को किस तरह समझायें कि उन्हें बच्चों को अकेला न छोड़ें। परिवारों के अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए किस प्रकार प्रेरित किया जाए? ”

प्रेम की भाषा

संत पापा ने कहा परिवार में दादा दादी का बहुत महतपपूर्ण स्थान है उन्हें बेकार या अनुत्पादक समझकर बहुत से परिवार उन्हें अलग दरकिनार कर देते हैं। जबकि वे परिवार और समाज के खजाने हैं। वे बच्चों के साथ रहकर प्रेम को मजबूत करते हैं। उनके बीच आपसी संबंध मजबूत होता है। संत पापा ने कहा कि काम पर जाने वाले माता-पिता को भी अपने बत्तों के साथ रहने और उनके साथ खेलने के लिए समय निकालना होगा। यह बिटामिन का काम करता है बच्चे स्वस्थ और मजबूत रहते हैं। माता पिता अपने  विश्वास और मूल्यों को अपने बच्चों को देते हैं। अतः परिवार में बच्चों के सवालों का जवाब देना उनके साथ खेलना बहुत जरुरी है। परिवार में बच्चा जो सीखता है उसे वह बाहर रहकर नहीं सीख सकता।

साक्ष्य और स्थिरता

दूसरा प्रश्न सिमोना का था। उसने बुरी गवाही और असंगत व्यवहारों के कारण पल्ली का हिस्सा बनने में कठिनाई के बारे में कहा कि प्यार और स्वीकृति की कमी के कारण भी अक्सर युवा लोग अन्य रास्ते में चले जाते हैं। वे पापा पूछती हैं: ” क्या संत पापा वास्तव में हमसे प्यार करते हैं? क्या धर्माध्यक्ष, पुरोहित और धर्मशिक्षक वास्तव में हमें प्यार करते हैं? और यदि वे प्यार करते हैं, तो यह सभी लड़कों तक क्यों नहीं पहुंच सकता है और उन्हें दूर भेज सकता है, यानी, यह अपने करीब क्यों नहीं रख सकता है? ”

इसके उत्तर में संत पापा ने कहा कि सच्चे साक्ष्य की जरुरत है। सबसे पहले घर में और पल्ली में साक्ष्य की जरुरत है।  एक गुण है जो पुरोहितों, धर्मसंघियों, धर्माध्यक्षों और परमाध्यक्षों और सभी के पास होना चाहिए और वह है करीब रहने का गुण।  इसे मनोवैज्ञानिकों से पहले पिता ईश्वर ने कहा है। वे हमारे करीब रहना चाहते थै और इस लिए उन्होंने अपने बेटे को हमारे पास भेजा ताकि वे अपने पिता के प्रेम का साक्ष्य दे सके। यही काम हम पुरोहितों और धर्माध्यक्षों को करना है। अपने जीवन साक्ष्य और पल्ली में पल्लीवासियों के करीब रहकर हम अपने प्रेम को प्रकट कर सकते हैं।

आनंद का सुसमाचार

तीसरा प्रश्न 15 वर्षीय ब्यात्रीस का था। उसने कहा कि दो साल पहने उसने अपने पिता को खोया पर पल्ली में उसे दूसरा घर मिला। उसकी इच्छा है कि उसके साथी जो पल्ली से दूर रहना चाहते हैं वे भी पल्ली में प्रेम का अनुभव कर सकें।

संत पापा ने मजाक के लहजे में कहा कि आपके साथी सही हो सकते हैं क्योंकि बहुधा पुरोहित,धर्मबहनें उबाऊ होते हैं। वे इस तरह चलते फिरते हैं जैसे किसी की अंत्येष्टि में जा रहे हों। इस चेहरे को देखने कौन पल्ली आएगा। लेकिन सच्चाई यह है कि सुसमाचार का आनंद केवल अंतर बनाता है।

कलीसिया धर्मवाद से नहीं बल्कि गवाह के आकर्षण से बढ़ता है। हम एक क्लब या एक फुटबॉल टीम नहीं हैं, जो सदस्यों की तलाश में जाता है।  हम येसु के शिष्य हैं, जो सुसमाचार हमें बताता हैं उसे हम जीने की कोशिश करते हैं। और यह हमेशा खुशी देता है। और जब लोग इस खुशी देखते हैं तो कहते हैं, “वे इतने खुश क्यों हैं?” एसा ही कलीसिया के शुरुआती दिनों में हुआ। पवित्र आत्मा के आने के बाद, लोगों ने उन्हें देखा और कहा: “देखो, ये खुश हैं! और वे एक-दूसरे से कैसे प्यार करते हैं! वे झगड़ते नहीं हैं …”। क्योंकि ये लोग खुश थे उनकी खुशी दूसरों को आकर्षित करती थी। हम खुशी के बिना सुसमाचार नहीं जी सकते: यह सुसमाचार को जीने का एक शर्त है।

चौथा प्रश्न 12 वर्ष के मत्तीया का था। उसने अपनी बीमार माँ जिसका ऑप्रेशन जल्दी ही होने वाला है उनके लिए और पल्ली के सभी माता पिता के लिए संत पापा से  आशीष और प्रार्थना मांगी।

संत पापा ने बच्चों से पूछा कि क्या वे अपने माता पिता के लिए प्रार्थना करते हैं? उन्होंने कहा जैसा माता पिता आप सोगों के लिए प्रार्थना करते हैं आप भी उनके लिए दादा दादी के लिए रोज प्रार्थना करें। लम्बी प्रार्थना की जरुरत नहीं है आप ईश्वर से कहें कि वे माता पिता को अच्छा स्वास्थ्य दें। उनहें खुश रखें। उनकी रक्षा करें। संत पापा ने मत्तीया की माता और सभी माता पिता के लिए प्रार्थना का आश्वासन दिया।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा ने बीमार बच्ची को दृढ़करण का संस्कार दिया

In Church on May 7, 2018 at 3:43 pm

रोम, सोमवार 7 मई 2018 ( वीआर,रेई) : दिव्य संस्कार पल्ली की बारह वर्षीय बच्ची माया और उनकी माता पावला को संत पापा के हाथों दृढ़करण संस्कार ग्रहण करने का अवसर मिला।

संत पापा फ्राँसिस ने युखारीस्तीय समारोह के दौरान प्रवचन के तुरंत बाद एक बीमार बच्ची और उनकी माता को दृढ़करण संस्कार दिया। बच्ची माया माइटोकॉन्ड्रियल बीमारी से पीड़ित है। वह बोल और चल नहीं सकती। बच्ची बोलकर तो अपनी खुशी को प्रकट नहीं पाई पर उसके चेहरे के भाव से उनकी खुशी झलक रही थी।  अपनी बच्ची को दृढ़करण दिलाने की इच्छा पर संत पापा माया को दृढ़करण संस्कार से विभूषित किया।

संत पापा के हाथों से माया और उनकी माता का दृढ़करण संस्कार लेना पूरी पल्लीवासियों के लिए हृदयस्पर्शी क्षण था। संस्कार ग्रहण करने के बाद गिरजा के अंदर और बाहर प्रांगण में उपस्थित पूरे विश्वासी समुदाय ने ताली बजाकर माया की खुशी में शरीक हुए।

पवित्र मिस्सा समारोह के समाप्त होने के बाद संत पापा ने गिरजाघर के प्रांगन से ही पवित्र मिस्सा में भाग ले रहे पल्ली वासियों के पास गये और उन्हें आशीर्वाद दिया । संत पापा ने अपने लिए प्रार्थना करने और “प्यार में रहने” के निमंत्रण को नवीनीकृत किया।


(Margaret Sumita Minj)

ख्रीस्त के प्रेम में दृढ़ रहने के लिए पड़ोसियों से प्रेम करना आवश्यक

In Church on May 7, 2018 at 3:41 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 7 मई 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 6 मई को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया। स्वर्ग रानी प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिये भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

इस पास्का काल में, ईश वचन हमें जीवन का सुसंगत तरीका दिखाता है ताकि हम पुनर्जीवित ख्रीस्त के समुदाय बन सकें। इसमें, आज का सुसमाचार येसु के आदेश को प्रस्तुत करता है, “तुम मेरे प्रेम में दृढ़ बने रहो।”(यो.15:9)

संत पापा ने कहा, “येसु के प्रेम में दृढ़ बने रहना, ईश्वर के प्रेम की धारा में बहना, उनके साथ स्थायी संबंध स्थापित करना, ये ही शर्त हैं जिससे हम निश्चित रूप से जान सकते हैं कि राह पर हमारे प्रेम में उत्साह एवं साहस की कमी नहीं हुई है। हमें भी येसु के समान एवं उनके माध्यम से पिता द्वारा प्राप्त होने वाले प्रेम को ग्रहण करना तथा उनके प्रेम में दृढ़ बने रहना है। स्वार्थ एवं पाप हमें उनके प्रेम से अलग न करे। संत पापा ने कहा कि यह एक मांग है जो असंभव नहीं है।

सर्वप्रथम हमारे लिए इस बात के प्रति सचेत होना महत्वपूर्ण है कि ख्रीस्त का प्रेम कोई छिछला अनुभव नहीं है बल्कि हृदय का एक मौलिक मनोभाव है जो उनकी इच्छा के अनुसार जीने में प्रकट होता है। येसु यह स्पष्ट करते हैं, “यदि तुम मेरी आज्ञाओं का पालन करोगे तो मेरे प्रेम में दृढ़ रहोगे। मैंने भी अपने पिता की आज्ञाओं का पालन किया है और उनके प्रेम में दृढ़ बना रहता हूँ।”(पद.10)

संत पापा ने कहा कि प्रेम, हरेक दिन के जीवन में हमारे व्यवहार एवं कार्यों द्वारा प्रकट होना चाहिए, अन्यथा यह केवल भ्रम है, केवल शब्द है प्रेम नहीं। प्रेम को हर दिन ठोस रूप में व्यक्त होना चाहिए। येसु हमें अपनी आज्ञाओं का पालन करने का आदेश देते हैं जिनका सार इन शब्दों में प्रकट होता है, “जिस तरह मैंने तुम लोगों को प्यार किया है उसी तरह तुम एक-दूसरे को प्यार करो।” (पद.12)

हम किस तरह पुनर्जीवित ख्रीस्त द्वारा मिले प्रेम को अपने पड़ोसियों के बीच बांट सकते हैं?

येसु ने बरम्बार बतलाया है कि हमारा पड़ोसी कौन है जिसको हम प्यार कर सकते हैं केवल शब्दों से नहीं किन्तु कार्यों से। हमारे पड़ोसी वे हैं- जिनसे मेरी मुलाकात रास्ते पर होती है और जो अपने चेहरे एवं अपनी कहानी के साथ हमें आकर्षित करते हैं, जो हमें अपनी रूचि एवं निश्चितता से बाहर निकलने के लिए प्रेरित करते हैं, जो सुनने तथा उनके साथ कुछ दूर चलने की तत्परता की आशा हमसे करते हैं। परिवार अथवा समुदाय से शुरू करते हुए, चाहे कोई भी हो अथवा किसी भी परिस्थिति में हो हम सभी भाई बहनों के लिए अपना समय दें। इस तरह यदि हम येसु के प्रेम में दृढ़ बने रहेंगे तो यह प्रेम दूसरों तक पहुँचेगा एवं उन्हें आकर्षित करेगा और उन्हें मित्रता हेतु प्रेरित करेगा।

संत पापा ने निरंतर प्रेम करने की सलाह देते हुए कहा कि दूसरों के प्रति इस प्रेम को विशेष अवसरों के लिए सुरक्षित नहीं रखा जाना चाहिए बल्कि उसे हमारे जीवन का स्थायी अंश बनाना चाहिए। हम इसी के लिए बुलाये गये हैं, उदाहरण के लिए, बहुमूल्य खजाने की तरह बुजूर्गों की देखभाल करना तथा उनसे प्रेम करना यद्यपि वे आर्थिक समस्या एवं कठिनाईयाँ उत्पन्न करते हों। बीमार व्यक्ति, चाहे वह जीवन के अंतिम घड़ी में ही क्यों न हो, उसे हर संभव मदद दी जानी चाहिए। अजन्में शिशु का स्वागत हमेशा किया जाना चाहिए, इस प्रकार जीवन की रक्षा एवं उससे प्रेम, गर्व धारण से लेकर प्राकृतिक मृत्यु तक की जानी चाहिए। यही प्रेम है।

हम येसु ख्रीस्त में ईश्वर द्वारा प्रेम किये जाते हैं जो हमें एक-दूसरे को उसी तरह प्रेम करने का आदेश देते हैं जैसा कि उन्होंने किया है। किन्तु हम तब तक ऐसा नहीं कर सकते हैं जब तक कि हममें अपना ही हृदय हो। यूखरिस्त जिसमें हम हर रविवार को भाग लेने के लिए बुलाये जाते हैं, हममें ख्रीस्त के हृदय का निर्माण करता है ताकि हमारा सम्पूर्ण जीवन उनके सच्चे मनोभाव से संचालित हो सके।

संत पापा ने कुँवारी मरियम से प्रार्थना की कि वे हमें येसु के प्रेम में दृढ़ बने रहने तथा दूसरों के प्रति प्रेम में बढ़ने हेतु सहायता प्रदान करे, विशेषकर, कमजोर लोगों के प्रति जिससे कि हम अपने ख्रीस्तीय बुलाहट का प्रत्युत्तर पूरी तरह दे सकें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

स्वर्ग की रानी प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने जानकारी देते हुए कहा, “कल जर्मनी के अक्वीसग्राना में गरीब बालक येसु की धर्मबहनों की संस्थापिका क्यारा फे की धन्य घोषणा हुई जो उन्नीसवीं सदी के मध्य थीं। हम उनके द्वारा सुसमाचार के उत्साही साक्ष्य के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं, खासकर, वंचित युवाओं की शिक्षा के माध्यम से।

उसके बाद संत पापा ने मध्य अफीकी गणराज्य में हो रहे हिंसा की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा, मैं मध्य अफ्रीकी गणराज्य के लोगों के लिए प्रार्थना करने का निमंत्रण देता हूँ, वह देश, जहाँ मैं यात्रा कर चुका हूँ और उसे अपने हृदय में रखता हूँ, इन दिनों वहाँ गंभीर हिंसा हुई है जिसमें कई मारे गये हैं और अनेक घायल हुए हैं जिनमें एक पुरोहित भी है। माता मरियम की मध्यस्थता द्वारा प्रभु सभी को हिंसा एवं बदले की भावना को नहीं कहने तथा एक साथ शांति का निर्माण करने हेतु मदद करे।

इसके उपरांत संत पापा ने देश-विदेश से एकत्रित सभी तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा, “मैं आप सभी का अभिवादन करता हूँ, विशेषकर, जो ओविएदो (स्पेन) से आये हैं एवं वेरबोवे (स्लोवाकिया) के विद्यार्थी तथा बेर्न के वेदी सेवक।” संत पापा ने नये स्वीस गार्ड एवं उनके परिवार वालों तथा मित्रों का अभिवादन किया।

संत पापा ने मातेर संगठन के प्रतिनिधियों का अभिवादन किया तथा उन्हें प्रोत्साहन दिया कि वे हिंसा से पीड़ित बच्चों की मदद करने के प्रति अपने समर्पण को जारी रखें। संत पापा ने उपस्थित न्योकटेक्यूमेनाल के सदस्यों को सम्बोधित कर उनके सुसमाचार प्रचार के कार्यों के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने काज़ा चिरकोंदियाले दी लातिना जेल के कैदियों का अभिवादन किया।

अंत में उन्होंने प्रार्थना का आग्रह करते हुए सभी को शुभ रविवार की मंगलकामनाएं अर्पित की।


(Usha Tirkey)

काथलिक कलीसिया धूल तूफान के पीड़ितों के प्रति शोक व्यक्त करती है

In Church on May 7, 2018 at 3:40 pm


नई दिल्ली, सोमवार 7 मई 2018 ( वीआर,रेई) उत्तर प्रदेश और राजस्थान के उत्तरी राज्यों में गुरुवार को विशेष रूप से भयंकर धूल तूफान द्वारा जान माल की क्षति हुई। काथलिक कलीसिया धूल तूफान के पीड़ितों के प्रति शोक व्यक्त करती है।

यह बताया गया है कि 150 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवा दी है और सैकड़ों घायल हो गए हैं और इस आंधी तुफान में हजारों लोगों के घर तबाह हो गये हैं भारत के मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 20 वर्षों में सबसे ज्यादा नुकसान देखा गया है।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव धर्माध्यक्ष थेओदोर मस्करेनहास और कारितास इंडिया के कार्यकारी निदेशक फादर पॉल मुंजेली ने शनिवार को प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “काथलिक कलीसिया हमारे भाइयों और बहनों के मौत पर शोकित हैं, जिन्हें उत्तर भारत के बड़े हिस्सों में प्रकृति के क्रोध का शिकार होना पडा।”

उन्होंने लिखा, “हम घायलों और पीड़ा सह रहे लोगों के साथ हमारी सहानुभूति और एकजुटता व्यक्त करते हैं।” कारितास इंडिया राहत कार्य के लिए प्रस्थान कर चुकी है यह संस्था किसी भी धर्म और जाति को देखे बिना जहाँ तक  पहुंचना संभव है जरुरत मंदों की मदद कर रही है। कारितास इंडिया, अधिक सटीक परिचालनों के लिए, उत्तर प्रदेश के आगरा जिलों और राजस्थान के जयौर जिले में विशेष रूप से अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। सरकार और दूसरी संस्थायें भी राहत कार्य में एक दूसरे के साथ मिलकर कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर गंभीरता से सोचने और विचार करने के लिए यह भी एक अवसर है, जैसा कि संत पापा  फ्राँसिस ने अपने प्रेरितिक उदबोधन लाउदातो सी में लिखा है। प्राकृतिक आपदाओं के माध्यम से यह स्वयं को प्रकट कर रहा है।

उन्होंने काथलिकों और सभी भले लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी प्रार्थनाओं और ठोस रुप से आर्थिक मदद देकर भी पीड़ितों और संकट में फंसे लोगों का मदद करें।


(Margaret Sumita Minj)

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