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शैतान से दूर रहें वह झूठा है

In Church on May 8, 2018 at 3:45 pm


वाटिकन सिटी, मंगलवार, 8 मई 2018 (रेई)˸ शैतान के करीब न जाए अथवा उनसे बात न करें वह हार चुका है। उसे मरने के लिए बांध दिया गया है किन्तु वह दूसरों को मार सकता है क्योंकि वह झूठ का पिता है, वह लोगों को बहकाता है एवं बंधे हुए पागल कुत्ते की तरह काटता है यदि उसे सहलाया जाए। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में मंगलवार 8 मई को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

संत पापा ने प्रवचन में संत योहन रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ (यो. 16.5-11) पर चिंतन किया जहाँ येसु शिष्यों को बतलाते हैं कि “इस संसार का नायक (शैतान) दोषी ठहराया जा चुका है।”

शैतान के बहकावे से सावधान रहे

संत पापा ने कहा, “हम कह सकते हैं कि वह अधमरा है वह पराजित हो चुका है। हमें उस पर आसानी से विश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि शैतान प्रलोभन देने वाला है और जानता है कि हमें फंसाने के लिए किन शब्दों का प्रयोग करना चाहिए और वह हमें किस तरह बहका सकता है।”

उन्होंने कहा कि उसमें हमें प्रलोभन देने की क्षमता है। यही कारण है कि हमारे लिए यह समझना कठिन होता है कि वह एक झांसिया है क्योंकि वह अपने को शक्तिशाली रूप में प्रस्तुत करता एवं कई चीजों को देने करने की प्रतीक्षा करता है जो बाहर से आकर्षक दिखाई पड़ता है किन्तु अंदर क्या है मालूम नहीं। वह हमारी जिज्ञासा में अपने अभिमान का प्रस्ताव रख सकता है।

उसका प्रकाश चमकदार है किन्तु बुझ जाता है

संत पापा ने शिकारियों का उदाहरण देते हुए कहा कि शिकारी उस मगरमच्छ के करीब नहीं जाते जो मरने पर है क्योंकि वह अपने झटके के प्रहार से अब भी मार सकता है। शैतान जो अत्याधिक खतरनाक है उसी तरह अपनी पूरी शक्ति से अपने को प्रस्तुत करता है किन्तु हम सावधान रहें क्योंकि उसके हर प्रस्ताव झूठे हैं। वह झूठ का पिता है। वह अच्छी तरह बोल सकता है ठगने के लिए गा सकता है और एक विजेता की तरह घूमता फिरता है किन्तु वह पराजित हो चुका है। उसका प्रकाश एक पटाखे की तरह है जो थोड़ी देर में बुझ जाता है जबकि प्रभु का प्रकाश हमेशा बना रहता है।

प्रार्थना, जागना एवं उपवास करना

संत पापा ने कहा कि शैतान हमें फंसा सकता है वह हमारे अभिमान, जिज्ञासा एवं हमारी आवश्यकता में हमारा स्पर्श करता है जिसके कारण हम प्रलोभन में पड़ जाते हैं इसलिए यह एक खतरनाक हार है। संत पापा ने सलाह दी कि हम शैतान से सावधान रहें। येसु की सलाह मानते हुए जागते रहें, प्रार्थना एवं उपवास करते रहें।

शैतान के पास न जाएं वह बंधा हुआ पागल कुत्ता के समान है

संत पापा ने कहा कि शैतान के पास इसलिए भी नहीं जाना चाहिए क्योंकि जैसा कि कलीसिया के धर्माचार्य बतलाते हैं वह बंधा हुआ नाराज पागल कुत्ता के समान है जो किसी को भी काट सकता है।

शैतान के साथ बात नहीं करनी चाहिए

संत पापा ने यह भी कहा कि हमें शैतान से वार्तालाप नहीं करनी चाहिए जैसा कि हेवा ने किया और वह पाप में गिर गयी। येसु ने निर्जन प्रदेश में शैतान की बात मानने से इंकार किया था तथा उसका जवाब ईशवचन से दिया था। उसने शैतान को चोट दिया। संत पापा ने कहा कि हमें शैतान से बात नहीं करनी चाहिए क्योंकि वह चतुर है और हमें अपने जाल में फंसा सकता है।

ईश्वर की माता के पास शरण खोजना

संत पापा ने कहा कि हमें शैतान से बचने के लिए प्रार्थना और त्याग का सहारा लेना  चाहिए तथा बच्चों की तरह माता मरियम की शरण में आना चाहिए। जब बच्चे डर जाते हैं तब वे अपनी माँ के पास आते हैं उसी हम तरह माता मरियम के पास आयें, वे हमारी रक्षा करेंगी और हमें शैतान के विरूद्ध लड़ने तथा उनसे विजय प्राप्त करने में मदद करेंगी।


(Usha Tirkey)

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संत पापा की जेनेवा यात्रा का कार्यक्रम

In Church on May 8, 2018 at 3:44 pm


वाटिकन सिटी, मंगलवार, 8 मई 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ कलीसियाओं के विश्व परिषद (डव्यू सी सी) की स्थापना की 70वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में, संत पापा फ्राँसिस की ख्रीस्तीय एकतावर्धक तीर्थयात्रा के कार्यक्रम को वाटिकन ने प्रकाशित कर दिया है।

प्रकाशित कार्यक्रम के अनुसार, वे बृहस्पतिवार 21 जून को स्वीटजरलैंड के जेनेवा स्थित ख्रीस्तीय एकता केंद्र का दौरा करेंगे जहाँ वे विभिन्न ख्रीस्तीय समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे तथा शहर के सम्मेलन केंद्र में ख्रीस्तयाग भी अर्पित करेंगे।

2004 में संत पापा जॉन पौल द्वितीय की स्वीटजरलैंड की छः दिवसीय प्रेरितिक यात्रा के बाद यह पहली बार है जब संत पापा फ्राँसिस जेनेवा की यात्रा करेंगे।

संत पापा फ्राँसिस इस यात्रा में कलीसियाओं की विश्व परिषद के सदस्यों के साथ प्रार्थना एवं संवाद करेंगे जो 110 विभिन्न देशों के हैं और जो 500 मिलियन ख्रीस्तीयों (ऑर्थोडॉक्स, अंगलिकन, बपतिस्ट, लुथेरन एवं मेथोडिस्ट) का प्रतिनिधित्व करते हैं। संत पापा फ्राँसिस कलीसियाओं की विश्व परिषद के सदस्य नहीं है किन्तु वे इस समिति के प्रेक्षक हैं तथा उनकी सभाओं को अकसर अपना संदेश भेजते हैं जिनका मुख्य उद्देश्य है विभिन्न कलीसियओं के बीच एकता को प्रोत्साहन देना।

21 जून को जेनेवा के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर संत पापा फ्राँसिस के स्वागत समारोह के उपरांत, स्वीटजरलैंड के राष्ट्रपति एलेन बेरसेट के साथ उनकी एक व्यक्तिगत मुलाकात होगी।

इस बाद संत पापा कलीसियाओं की विश्व परिषद केंद्र की ओर बढ़ेंगे जहाँ वे ख्रीस्तीय एकता प्रार्थना सभा में भाग लेंगे और सभा को सम्बोधित करेंगे। यात्रा के अंत में संत पापा शहर के हवाई अड्डा के निकट पालेक्सपो सम्मेलन केंद्र में ख्रीस्तयाग अर्पित करने के बाद संध्या 8.00 बजे रोम वापस लौटेंगे।


(Usha Tirkey)

रोजरी की माता मरियम से प्रार्थना

In Church on May 8, 2018 at 3:41 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 8 मई 2018 (रेई) ˸ संत पापा फ्राँसिस ने 8 मई को एक ट्वीट प्रेषित कर माता मरियम की मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना करने का प्रोत्साहन दिया। उन्होंने लिखा, “रोजरी की माता मरियम, हमारे लिए प्रार्थना करे ताकि येसु हम पापियों पर दया करें।”

धन्य संत पापा पौल षष्ठम ने 29 अप्रैल 1965 को मई महीने में रोजरी माला विन्ती कर माता मरियम की भक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा था, “क्योंकि यही वह महीना है जब ख्रीस्तीय, अपने गिरजाघरों एवं परिवारों में माता मरियम को अधिक भक्ति एवं स्नेह के साथ आदर और सम्मान दिखाते हैं। यही वह महीना है जिसमें माता मरियम के माध्यम से ईश्वर का महान करुणावान वरदान हमें प्राप्त होता है।”

रोजरी का अर्थ है गुलाबों का मुकुट। माता मरिया ने कई लोगों को दर्शन देकर प्रकट किया है कि जब कभी हम प्रणाम मरिया की विन्ती करते हैं हम उन्हें एक सुन्दर गुलाब अर्पित करते हैं और जब रोजरी का पूरा भेद करते हैं तो उन्हें एक मुकुट भेंट करते हैं। जिस तरह गुलाब फूलों की रानी है उसी तरह रोजरी माला विन्ती भी भक्ति का सबसे उत्तम माध्यम है। इसे एक पूर्ण प्रार्थना मानी जाती है क्योंकि इसमें हमारी मुक्ति का इतिहास है। रोजरी के द्वारा हम आनन्द, दुःख एवं महिमा के रहस्यों तथा येसु की महिमा एवं मरियम के सम्मान पर चिंतन करते हैं।


(Usha Tirkey)

संत पापा करेंगे नोमादेलफिया की यात्रा

In Church on May 8, 2018 at 3:40 pm


रोम, मंगलवार, 8 मई 2018 (वाटिकन न्यूज)˸ संत पापा फ्राँसिस बृहस्पतिवार 10 मई को रोम स्थित नोमादेलफिया समुदाय का दौरा करेंगे जिसकी स्थापना डॉन ज़ेलो सालदिनी ने सन् 1947 ई. में की थी।

नोमादेलफिया के वेबसाईट में प्रकाशित किया गया है कि “10 मई 2018 को नोमादेलफिया समुदाय संत पापा फ्राँसिस का आलिंगन करेगा।” कहा गया है कि यह काथलिक स्वयंसेवकों का संगठन है जो सुसमाचारी भ्रातृत्व पर आधारित है। समुदाय की इच्छा है यह दिखाना कि सामाजिक रूप से दूसरों को पूरी तरह अपना जीवन समर्पित कर सुसमाचार को जीना संभव है। इस प्रकार न्याय एवं भाईचारा के मूल्यों को साकार किया जा सकता है।

नोमादेलफिया समुदाय के अध्यक्ष फ्रांचेस्को मात्तेरात्सो ने वाटिकन न्यूज़ से कहा कि नोमादेलफिया के सदस्य संत पापा से उम्मीद कर रहे हैं कि वे उन्हें विश्वास में मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि वे संत पापा का आलिंगन चाहते हैं जो काथलिक कलीसिया में पूर्ण एकता का चिन्ह है।

नोमादेलफिया के मनोभाव का सार बतलाते हुए उन्होंने कहा कि यह इसके नाम में निहित है जिसका अर्थ है “भ्रातृत्व का नियम” अतः नोमादेलफिया का मनोभाव है यह जानना कि ईश्वर पिता हैं और हम सब भाई-बहन हैं। उनके अनुसार यह भाईचारा एक रास्ता है जिसे विश्व को अपनाना चाहिए ताकि लोगों के लिए एक बेहतर जीवन जी सकें।

नोमादेलफिया संगठन में परिवार भी शामिल हैं। यह पूछे जाने पर कि इस तरह के परिवारों की अन्य परिवारों की तुलना में क्या विशेषता है अध्यक्ष ने कहा कि इसमें चार या पाँच परिवार मिलकर एक दल का निर्माण करते हैं। उनका परिवार एक साथ रहता है जहाँ वे सामान्य जीवन जीते हुए एक साथ खाते और एक साथ कार्य करते हैं। उनके एक साथ रहने का केंद्र है यूखरिस्त। इस बृहद परिवार के अंदर एक प्रार्थनालय होता है। इस परिवार का मिशन है कमजोर सदस्यों की सहायता करना, खासकर, बच्चों एवं बुजूर्गों को मदद देना।

उन्होंने नोमादेलफिया संगठन के भावी उद्देश्यों के बारे बतलाते हुए कहा कि उन्हें तनजानिया के एक गरीब क्षेत्र में निमंत्रित दिया गया है जहाँ वे समय के चिन्ह को देखते हुए ईश्वर की इच्छा को पहचानने का प्रयास करेंगे।


(Usha Tirkey)

प्राचीन गोवा धार्मिक स्थलों को गोद लेने की योजना पर नाराजगी

In Church on May 8, 2018 at 3:38 pm

पाणाजी, मंगलवार, 8 मई 2018 (ऊकान)˸ गोवा की कलीसिया के नेता संघ सरकार की योजना से परेशान हैं, जो “विरासत को अपनाने” की नई पर्यटन परियोजना के तहत प्राचीन धार्मिक स्थलों के रखरखाव के लिए, निजी कंपनियों को देने की योजना बना रही है।

हिंदू भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा संचालित सरकार द्वारा पिछले सितंबर माह में शुरू की गई परियोजना, पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए भारत भर में विरासत स्थलों को निजी फर्मों को सौंपने की योजना बना रही है।

स्थानीय पत्रकारों ने बतलाया कि स्थानीय पुर्तगाली कॉलोनी गोवा में छह ऐतिहासिक स्थल हैं उनमें से एक है संत फ्रांसिस जेवियर का अवशेष रखा जाने वाला बोम जीसस महागिरजाघर, जिसे भी निजी क्षेत्र को सौंप देने की सूची में शामिल किया गया है जबकि इसके लिए राज्य सरकार से कोई परामर्श नहीं किया गया है।

राज्य अभिलेखागार मंत्री विजय सरदेसाई ने कहा कि राज्य सरकार, जो बीजेपी द्वारा संचालित है, उसे इस योजना के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी है।

16वीं शताब्दी पुराना गोवा का स्थान जो पुर्तगाली प्रमुख शहर था उसकी सम्पति राज्य की संम्पति है तथा कलीसिया उसकी देखभाल करती है।

योजना के बारे पत्रकारों से खबर सुन कलीसिया के नेता परेशान हैं। राखोल मेजर सेमिनरी के दर्शनशास्त्र के प्राध्यापक फादर विक्टर फेर्राओ ने कहा, “यह जानना मुझे कष्ट देता है कि हमारा धार्मिक स्मारक निजी सम्पति बनाये जाने के खतरे में है, उसके सार्वभौमिक स्वामित्व को अर्थपूर्ण ढंग से कम किया जा रहा है। मैं इस संभावना के बारे में सोच भी नहीं सकता कि पवित्र स्थानों में प्रवेश की कीमत तय की जाएगी।”

राज्य विधानसभा के काथलिक सदस्य एलेक्स रेजिनाल्डो लोरेन्को के मुताबिक, “यह कदम गिरजाघरों की पवित्रता को कम करेगा।”

आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता प्रदीप पदगांवकर ने ऊका समाचार को बतलाया कि यह पहल दिखलाता है कि बीजेपी सरकार हमारे स्मारकों की रक्षा नहीं कर सकती और वह उन्हें बाहरी लोगों को बेच देना चाहती है। वह हमारी जमीन, हमारी नदियों और हमारे अधिकारों की रक्षा करने के काबिल नहीं है।

पिछले माह, पर्यटन मंत्रालय ने परियोजना के तहत, नई दिल्ली के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक लाल किला और आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले में गांधीकोटा किला को सौंपने हेतु डालमिया भारत समूह के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।

हालांकि, पर्यटन विशेषज्ञ फ्रांसिस्को डी ब्रैगनका ने ऊका समाचार  को बताया कि सरकारों के लिए कॉर्पोरेट सहायता लेने हेतु यह अंतर्राष्ट्रीय अभ्यास है, किन्तु एजेंसी का चयन करने में “पर्याप्त सुरक्षा उपायों” को शामिल करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, “धार्मिक स्मारकों के संबंध में सावधानी बरतने और परामर्शात्मक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।”

गोवा में कई प्राचीन गिरजाघर हैं, लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, जो प्राचीन स्थलों को बनाए रखने के लिए अधिकृत है,उन्होंने कुछ को “मृत स्मारक” घोषित कर दिया है, जहां एक दशक पहले से स्थानीय काथलिकों के विरोध के बावजूद धार्मिक सेवाओं की अनुमति नहीं है।


(Usha Tirkey)

वाटिकन ने वेनेज़ुएला प्रवासियों के लिए एकात्मता का सेतु जारी किया

In Church on May 8, 2018 at 3:36 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 8 मई 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ विस्थापितों एवं शरणार्थियों के समर्थन हेतु संत पापा फ्राँसिस के आह्वान के प्रत्युत्तर में दक्षिण अमरीका के काथलिक धर्मगुरू, बेनेजुएला में गरीबी के कारण पलायन कर रहे लोगों के लिए “एकात्मता के सेतु” नामक एक परियोजन जारी किया है।

बेनेजुएला के विस्थापितों की मदद के लिए जारी दो वर्षीय प्रेरितिक योजना को, सोमवार को वाटिकन प्रेस पत्रसार में प्रस्तुत किया गया।

प्रेस ब्रीफिंग में कहा गया कि पलायन की समस्या पर बहुत कम बात कर, विश्व पर चोट किया गया है जिसके कारण बेनेजुएला में पिछले दो वर्षों में ही लगभग दस लाख लोग पलायन कर चुके हैं। जिनमें से हज़ारों लोग पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ द्वारा 1999 में तथाकथित समाजवादी क्रांति शुरू करने के बाद देश छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं।

वर्तमान नेता निकोलास मादूरो के समय संकट की स्थिति, गरीबी, कुपोषण तथा मुद्रास्फीति की दुनिया की उच्चतम दर से बढ़ोतरी के कारण बदतर होती जा रही है। सरकारी नीतियों के खिलाफ विरोध करने वाले नियमित रूप से गिरफ्तार किए जाते हैं। राजनीतिक शरण खोजने वाले भी बेतहाशा भोजन एवं दवाईयों की तलाश करने के लिए मजबूर हैं।

बेनेजुएला से पलायन करने वाले अधिकतर लोग दक्षिण अमरीका के अन्य देशों की ओर बढ़ रहे हैं, खासकर, कोलोम्बिया की ओर। उन देशों की सीमाओं पर पुलिस द्वारा प्रतिक्रिया व्यक्त की जा रही है। पुलिस उन लोगों को खदेड़ रहे हैं जिनके पास विस्थापितों के आवश्यक दस्तावेज नहीं है।

इन संकटों के बीच आठ दक्षिण अमरीकी देशों के कलीसियाई नेताओं ने एक साथ मिलकर शरणार्थियों की सहायता करने का निश्चय किया है। संत पापा के मार्गदर्शन में विस्थापितों एवं शरणार्थियों के लिए गठित परमधर्मपीठीय समिति के समर्थन द्वारा कोलोम्बिया, ब्राजील, एक्वाडोर, पेरू, चिली, बोलिविया, पाराग्वे तथा अर्जेंटीना आदि देशों के धर्माध्यक्षों ने नवागंतुकों के स्वागत हेतु कार्यक्रम की शुरूआत की है, जबकि स्थानीय मेजबान समुदायों के सबसे कमजोर सदस्यों की भी मदद करने का निश्चय किया गया है।

विस्थापितों एवं शरणार्थियों के लिए गठित परमधर्मपीठीय समिति के उपसचिव फादर माईकेल चरनी ने कहा कि यह परियोजना उस अनुभूति पर तैयार की गयी है कि बड़ी संख्या में लोग उसी मूल के हैं तथा स्थानीय एवं बाहरी दोनों ही प्रकार के लोगों की आवश्यकताएं एक समान हैं। यही कारण है कि इसे बेनेजुएलाई सेतु कहा गया है।

‘एकात्मता के सेतु’ योजना में मेजबान देशों में आवासहीन लोगों के लिए शरण, घर के निर्माण, नौकरी, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधा, कानूनी मदद, प्रेरितिक कार्यों में लगे लोगों के प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान हेतु सहायता प्रदान किया जाता है। फादर चरनी ने कहा कि इन व्यवहारिक प्रयासों द्वारा सरकार को जोरदार संदेश दिया जा रहा है जिन्होंने उन लोगों के लिए अपना द्वार बंद करना शुरू कर दिया है।

उन्होंने कहा कि इस योजना द्वारा वे बेनेजुएला के कमजोर लोगों को शोषण एवं मानव तस्करी से बचने में मदद देंगे। कलीसिया के इस कार्य का उद्देश्य है शरणार्थी एवं मेजबान देशों के बीच तनाव कम करना।

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