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बपतिस्मा संस्कार, हमारा पुनर्जन्म

In Church on May 9, 2018 at 3:42 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 09 मई 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को बपतिस्मा संस्कार पर अपनी धर्मशिक्षा देते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

बपतिस्मा की धर्मविधि में आज हम पवित्र आत्मा के सहचर्य की चर्चा करेंगे जो कि बपतिस्मा की धर्मविधि का मुख्य भाग है जिसके द्वारा हम येसु ख्रीस्त के पास्का रहस्य में सहभागी होते हैं। यह हमें संत पौलुस द्वारा रोमी ख्रीस्तीय समुदाय को पूछे गये सावल की याद दिलाती है,“क्या आप लोग यह नहीं जानते कि ईसा मसीह का जो बपतिस्मा हम सब को मिला है, वह उनकी मृत्यु का बपतिस्मा हैॽ वे इसके उत्तर में स्वयं कहते  हैं, “हम उनकी मृत्यु का बपतिस्मा ग्रहण कर उनके साथ इसलिए दफनाये गये हैं कि जिस तरह मसीह पिता के सामर्थ्य से मृतकों में से जी उठे हैं, उसी तरह हम भी एक नया जीवन जीयें।” रोमि.6.3-4)

बपतिस्मा की धर्मविधि में हमें येसु ख्रीस्त के पास्का रहस्य की यादगारी मनाते हैं। इसके द्वारा हम अपने पुराने आचरण और पुराने स्वभाव का परित्याग करते हैं क्योंकि वह बहकाने वाली दुर्वासनाओं के कारण बिगड़ता है। (एफे.4.22) यह इसलिए कि जो मसीह के साथ एक हो गया है तो वह नयी सृष्टि बन गया है। पुरानी बातें समाप्त हो गयी हैं और सब कुछ नया हो गया है।(2 कुरि.5.17) येरुसलेम के संत सिरिल नव दीक्षार्थितों को अपनी धर्मशिक्षा में जल से बपतिस्मा लेने के रहस्य को समझाते हुए कहते हैं, “जल से बपतिस्मा ग्रहण करने के द्वारा हम न केवल मरते वरन हमारा नया जन्म होता है। बपतिस्मा का जल हमारी कब्र और हमारी माता बनती है।” संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि नये मानव का जन्म इस बात की माँग करता है कि वह पाप के कारण अपने कुरूप स्वभाव को मिट्टी में मिलने दे। कब्र और गर्भ का यह स्वरुप हमारे लिए बपतिस्मा की एक बड़ी निशानी को दिखलाती है जहाँ हम मृत्यु के उपरांत नये जीवन में प्रवेश करते हैं। संत पापा ने कहा कि मैं प्राचीन रोमन बपतिस्मा की धर्मविधि का जिक्र करना चाहता हूँ जिसे संत पापा सिक्सुत तृतीय लातीनी भाषा में व्यक्त करते हैं, “माता कलीसिया पवित्र जल के द्वारा अपनी संतानों को जन्म देती है। इस स्रोत के द्वारा कितनों का जन्म होता है जो स्वर्ग राज्य की आशा करते हैं।”

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि यदि हमारे माता-पिता ने हमें इस धरती पर जन्म दिया है तो कलीसिया ने हमें बपतिस्मा द्वारा अनंत जीवन हेतु पुनर्जन्म प्रदान किया है। हम येसु ख्रीस्त में पिता ईश्वर की संतान बन गये हैं। (रोम.8.15, गला.4.5-7) बपतिस्मा के जल और पवित्र आत्मा से पुनर्जन्म द्वारा स्वर्गीय पिता हम में से प्रत्येक जन को अपने प्रेममय वचनों से कहते हैं, “तुम मेरी प्रिय संतान हो।” (मत्ती. 3.17) पिता की यह वाणी विश्वासियों के हृदय में गुंजित होती है, यह हमारा परित्याग नहीं करती वरन यह हमारे जीवन में सदा बनी रहती है। पुनर्जीवित ईश्वर की संतान स्वरुप हम सदा ईश्वर के हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि बपतिस्मा की पुनरावृत्ति नहीं होती है क्योंकि इसके द्वारा हमारे जीवन में आध्यात्मिकता की एक अमिट मोहर डाली जाती है। “यह छाप हमारे जीवन में किसी भी पाप द्वारा नहीं मिटाई जा सकती है यद्यपि पाप बपतिस्मा के मुक्तिदायी फलों को उत्पन्न करने में बाधक सिद्ध होता है।”

बपतिस्मा संस्कार के द्वारा बपतिस्मा प्राप्त येसु ख्रीस्त के साथ संयुक्त होते और उनके अनुरूप बनते हैं, “क्योंकि ईश्वर ने निश्चित किया कि जिन्हें उन्होंने पहले से अपना समझा, वे उनके पुत्र के प्रतिरूप बनाये जायेंगे, जिससे उनका पुत्र इस प्रकार बहुत-से भाइयों का पहलौठा हो।”(रोमि.8.29) पवित्र आत्मा की शक्ति से बपतिस्मा हमें न्याय दिलाता, हम शुद्ध और पवित्र किये जाते और येसु ख्रीस्त में एक शरीर बनाते हैं। यह बपतिस्मा के विलेपन द्वारा व्यक्त होता है,“जहाँ हम सभी बपतिस्मा प्राप्त राजकीय पुरोहित और ईश्वरीय समुदाय के सदस्य बन जाते हैं।” यही कारण है कि पुरोहित यह घोषित करते हुए सभी दीक्षार्थियों के माथे में पवित्र तेल का विलेपन करता है,“ईश्वर अपने पवित्र तेल के विलेपन से आप को पवित्र करते हैं जिससे आप येसु ख्रीस्त में पुरोहित, राजा और नबी के रुप में ईश्वरीय अनंत प्रजा के सदस्य बने रहें।”

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तीय बुलाहट येसु ख्रीस्त के साथ कलीसिया में संयुक्त रहते हुए उनके मुक्तिदायी कार्य में सहभागी होना है जिसके फलस्वरुप हम दुनिया में फल उत्पन्न करते हैं जो सदा बना रहता है। पवित्र आत्मा से प्रेरित वास्तव में पूरा विश्वासी समुदाय येसु ख्रीस्त के मुक्तिदायी कार्यो को “पुरोहित, राजकीय प्रजा और नबी” की भांति पूरा करते हैं। वे अपने प्रेरितिक उत्तदायित्वों को सेवा की भावना से प्रेरित होकर पूरा करते हैं। संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि येसु ख्रीस्त का राजकीय पुरोहिताई और नबीवत प्रजा होने का अर्थ हमारे लिए क्या हैॽ इसका अर्थ अपने को ईश्वर के हाथों में सुपूर्द करना है (रोमि., 12.1) जिससे हम अपने विश्वासमय जीवन और सेवा कार्यों के द्वारा उनका साक्ष्य दे सकें, हम अपने जीवन में येसु ख्रीस्त का अनुसरण करते हुए अपने जीवन को दूसरों की सेवा हेतु अर्पित कर सकें।(मत्ती. 20.25-28, यो.13. 13-17)

इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासी समुदाय का अभिवादन किया।

उन्होंने विशेष रुप से युवाओं, बुजुर्गों, बीमारों और नव विवाहितों की याद की। उन्होंने कहा कि हम मई के महीने में हैं जो कुंवारी माता मरियम को समर्पित है। हम प्रति दिन रोजरी माता विन्ती के द्वारा माता मरियम को अपनी भक्ति अर्पित करें जिससे ईश्वर की माता हमें अपने बेटे येसु ख्रीस्त के जीवन रहस्यों को समझने में मदद करें। इस भांति हम दूसरों के लिए ईश्वरीय प्रेम का उपहार बन सकेंगे।

इतना कहने के बाद संत पापा ने सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के साथ हे हमारे पिता प्रार्थना का पाठ किया और सबों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।


(Dilip Sanjay Ekka)

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संत पापा ने सीरिया में शांति के लिए अपील की

In Church on May 9, 2018 at 3:39 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 9 मई 2018 (रेई) : संत पापा ने संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में बुधवारीय आमदर्शन समारोह के दौरान अरबी भाषा बोलने वाले तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए सीरिया और देशवसियों के लिए प्रार्थना एवं शांति की अपील की।

संत पापा ने कहा,“यह मई महीना माता मरियम को समर्पित है, मैं आपको प्रतिदिन रोजरी माला का पाठ करते हुए ईश्वर की मां के प्रति अपनी भक्ति बढ़ाने के लिए प्रेरित करता हूँ,साथ ही विशेष रूप से सीरिया और पूरी दुनिया में शांति के लिए प्रार्थना करने के लिए आमंत्रित हूँ।”

विदित हो कि संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 8 अप्रैल दिव्य करुणा रविवार को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में हजारों की संख्या में देश-विदेश से आये तीर्थयात्रियों और विश्वासियों के साथ स्वर्ग की रानी की प्रार्थना का पाठ करने के पश्चात सीरिया वासियों के लिए विशेष प्रार्थना की अपील की थी।

संत पापा ने 23 फरवरी को सीरिया, दक्षिणी सूडान एवं कोंगो में शांति हेतु प्रार्थना एवं उपवास की घोषणा की थी।

सीरिया में हर दिन नई घटनाऐं हो रही हैं जिसके कारण वहाँ की स्थिति और ही जटिल और मुश्किलें बढ़ रही हैं।

इज़राइल के हवाई हमले ने ईरानी सेनानियों को मार डाला और तेहरान से प्रतिशोध के खतरे को प्रेरित किया। सीरियाई राज्य संचालित मीडिया ने दावा किया है कि इजरायल ने मंगलवार को राजधानी दमिश्क के पास एक सैन्य चौकी पर हमला किया था। मानवाधिकार समूह के वेधशाला ने कहा कि ईरान के किश्वेह में कुलीन क्रांतिकारी गार्डों ने मिसाइलों और रॉकेट लांचर को लक्षित किया था, जिसमें नौ लोग मारे गए थे।


(Margaret Sumita Minj)

महाधर्माध्यक्ष रास्तिस्लाव संत पापा फ्राँसिस से मुलाकात करेंगे

In Church on May 9, 2018 at 3:37 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 9 मई 2018 (रेई) : बुधवार 9 मई के वाटिकन प्रेस विज्ञप्ति अनुसार चेक प्रजातंत्र और स्लोवाकिया के महाधर्माध्यक्ष रास्तिस्लाव संत पापा फ्राँसिस से मुलाकात करेंगे

चेक प्रजातंत्र और स्लोवाकिया की ऑर्थोडोक्स कलीसिया के महाधर्माध्यक्ष रास्तिस्लाव 11 मई को संत पापा फ्राँसिस से मुलाकात करने वाटिकन आयेंगे। जनवरी 2014 में नियुक्त महाधर्माध्यक्ष रास्तिस्लाव संत पापा फ्राँसिस से पहली बार मुलाकात करेंगे।

9 से 12 मई तक रोम के दौरे में महाधर्माध्यक्ष रास्तिस्लाव ख्रीस्तीय एकता हेतु गठित परमधर्मपीठीय परिषद के अध्यक्ष कार्डिनल कोर्ट कोच से मुलाकात करेंगे।। महाधर्माध्यक्ष रास्तिस्लाव संत क्लेमेंट बेसिलिका में संत सिरिल की कब्र पर पवित्र युखारिस्त समारोह का अनुष्ठान करेंगे।

चेक प्रजातंत्र और स्लोवाकिया की ऑर्थोडोक्स कलीसिया बीजान्टिन परंपरा के 14 ऑर्थोडोक्स कलीसियाओं में से एक है, जो संत सिरिल और संत मेथोडियस द्वारा संचालित महान मोराविया के सुसमाचार प्रचार के दरमियान इसकी शुरुआत हुई है।


(Margaret Sumita Minj)

लोकधर्मी, परिवार और जीवन के लिए बने वाटिकन विभाग का नया संविधान

In Church on May 9, 2018 at 3:36 pm

संत पापा फ्राँसिस द्वारा लोकधर्मी, परिवार और जीवन की भूमिका को बढ़ावा देने के लिए स्थापित विभाग का नया संविधान मंगलवार 8 मई को प्रकाशित हुआ।

संत पापा फ्राँसिस ने 15 अगस्त, 2016 को मोतु प्रोप्रियो, ‘सेदुला मातेर’ में लोकधर्मी, परिवार और जीवन के लिए नया विभाग स्थापित किया और इसे 4 जून 2016 को एक प्रयोगात्मक आधार पर इस संविधान के तहत रखा गया था और 1सितंबर 2016 को प्रभावी हुआ।

नये विभाग को लोकधर्मियों हेतु गठित परमधर्मपीठीय परिषद और परिवार के लिए गठित परमधर्मपीठीय  परिषद की जिम्मेदारियों और कार्यों को दिया गया। इसके साथ ही दोनों परिषद अब निष्क्रिय हो गये। नये विभाग से जीवन के लिए परमधर्मपीठीय अकादमी और विवाह एवं परिवार विज्ञान संबंधी संत पापा जॉन पॉल द्वितीय के परमधर्मपीठीय धर्मशास्त्रीय संस्थान भी जुड़े हुऐ हैं।

पिछले संविधान की तरह, नए संविधान को प्रयोगात्मक आधार पर अनुमोदित किया गया है और 13 मई को प्रभावी होगा।

विभाग अब तीन वर्गों में विभाजित नहीं है

संविधान की पहली नवीनता यह है कि विभाग को तीन वर्गों में विभाजित नहीं किया गया है, हालांकि इसकी जिम्मेदारियां अधिक हैं। विभाग धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों, स्थानीय कलीसियाओं और अन्य कलीसियाई समूहों के साथ संबंध बनाए रखेगी, उनके बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देगी और संविधान में उल्लिखित मुद्दों से संबंधित मूल्यों और पहलों को बढ़ावा देने के लिए अपने सहयोग की पेशकश करेगी।”

कलीसिया में और दुनिया में लोक धर्मियों को बढ़ावा

यह विभाग कलीसिया और दुनिया में, संघों, आंदोलनों और समुदायों के सदस्यों के रूप में विवाहित या अविवाहित लोकधर्मियों की बुलाहट और मिशन को प्रोत्साहित करेगी।

युवा लोगों की भूमिका

नए संविधान ने कलीसिया से दुनिया की वर्तमान चुनौतियों के बीच युवाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने का आग्रह किया। “इस संबंध में,  विभाग का मुख्य काम विश्व युवा दिवस का आयोजन करना है।

लैंगिक मुद्दे

विभाग पुरुष और महिला के बीच संबंधों की विशिष्टता, पारस्परिकता, पूरकता और समान गरिमा पर अपने विचार विमर्श को और प्रगाढ़ करेगा। विभाग स्त्री ‘प्रतिभा’ का मूल्यांकन करके तथा “कलीसिया और समाज में महिलाओं की पहचान और मिशन पर उनके योगदान को बढ़ावा देगा।

परिवार की आध्यात्मिक देखभाल

विभाग परिवार की आध्यात्मिक देखभाल को बढ़ावा देगी, विवाह के संस्कार के आधार पर अपनी गरिमा और कल्याण की रक्षा करेगी, और कलीसिया और नागरिक समाज में अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को बढ़ावा देगी, ताकि परिवार हमेशा कलीसिया और सामाज में अपने कार्यों को पूरा कर सके। इस संबंध में विभाग अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, विशेष रूप से परिवारों की विश्व बैठक को बढ़ावा देगा।

वैवाहिक जीवन

प्रेरितिक उदबोधन “अमोरिस लाएटिटिया” का जिक्र करते हुए, नया संविधान “विवाहित जीवन में तथाकथित” अनियमित स्थितियों के संबंध में कलीसिया की प्रेरितिक देखभाल को भी व्यक्त करता है।

रक्षा जीवन

नए संविधान ने विकास के विभिन्न चरणों में व्यक्ति की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, जिम्मेदार प्रजनन के पक्ष में गर्भधारण से लेकर सामान्य मृत्यु तक मानव जीवन की सुरक्षा हेतु प्रोत्साहन दिया है।  “विभाग उन सभी संगठनों को बढ़ावा देगी और प्रोत्साहित करेगी जो महिलाओं और परिवारों को जीवन के उपहार का स्वागत करने और बढ़ावा देने में मदद करती हैं, खासतौर से कठिन गर्भावस्था के मामले में और गर्भपात के साधनों को रोकने के लिए। विभाग गर्भपात करने के लिए साधनों का सहारा ले चुकी महिलाओं की मदद करने के लिए कार्यक्रमों और पहलों का भी समर्थन करेगी।

नई विचारधाराएं

नये संविधान अनुसार विभाग बायोमेडिसिन की मुख्य समस्याओं और मानव जीवन से संबंधित कानून और मानव जाति के संबंध में विकसित विचारधाराओं पर अध्ययन और प्रशिक्षण देगी।


(Margaret Sumita Minj)

गोवा कलीसिया के अधिकारी महागिरजाघर को गोद देने हेतु सहमत हैं

In Church on May 9, 2018 at 3:34 pm

पाणाजी, बुधवार, 9 मई 2018 (ऊकान) ˸ भारत में प्रचीण विरासत स्थलों के रखरखाव में निजी कंपनियों को शामिल करने की सरकार की योजना के शुरुआती विरोध के बाद, गोवा कलीसिया के अधिकारी बोम जीसस के प्रसिद्ध महागिरजाघर के लिए इस योजना को स्वीकार करने पर सहमत हुए हैं।

अभिलेखागार मंत्री विजय सरदेसाई ने कहा कि 7 मई को कलीसिया और राज्य के अधिकारियों के बीच एक बैठक में मतभेदों को हल किया और कलीसिया अधिकारियों ने 16 वीं शताब्दी के पुर्तगाली महागिरजाघर के प्रबंधन हेतु एक निजी कम्पनी को देने के लिए सहमत हो गये।

बैठक में यह स्पस्ट किया गया कि यह योजना स्मारक को लेने का नहीं परंतु अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत इसका संरक्षण करना है। इस योजना को समझने के बाद ही कलीसिया के अधिकारियों ने समझौता किया।

पूर्व पुर्तगाली कॉलोनी में कलीसिया के अधिकारियों ने पहले अपनी निराशा व्यक्त की जब मीडिया ने संघीय सरकार की बनाई योजना को पिछले सितंबर में प्रकाशित किया था कि सरकार “विरासत को अपनाने” की नई पर्यटन परियोजना के तहत प्राचीन धार्मिक स्थलों के रखरखाव व प्रबंधन निजी कम्पनियों को सौंप देगी। स्थानीय पुर्तगाली कॉलोनी गोवा में छह ऐतिहासिक स्थल हैं उनमें से एक है संत फ्रांसिस जेवियर का अवशेष रखा जाने वाला बोम जीसस महागिरजाघर, जिसे भी निजी क्षेत्र को सौंप देने की सूची में शामिल किया गया है।

गोवा के महाधर्माध्यक्ष फिलिप नेरी फेराओ के सचिव फादर लोइला परेरा ने कहा, “कलीसिया के अधिकारियों ने योजना को सर्वसम्मति से स्वीकार किया है क्योंकि यह स्मारक के लिए फायदेमंद है।”

फादर परेरा ने कहा, “स्मारक को छुआ नहीं जाएगा। मुख्य स्मारक भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की हिरासत में होगा और आज के समान ही स्मारक पर कलीसिया का ही स्वामित्व रहेगा।”

प्राचीण गोवा में से महागिरजाघर के पल्ली पुरोहित फादर अल्फ्रेड वाज़ ने कहा कि स्मारक का रखरखाव समय पर हो इसे योजना सुनिश्चित करेगी। अब तक एएसआई स्मारक का रखरखाव करता आया है लेकिन लाल टेप और फंड में देरी रखरखाव में बाधा डालती है। निजी कंपनियां अपने ब्रांड नामों का निर्माण करने के लिए रखरखाव कर रही हैं और अंतर्राष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ कदम आगे रखेगी।” गिरजाघर के अंदर रखरखाव गिरजा के अधिकारियों की मंजूरी के साथ किया जाएगा। नए प्रबंधक आगंतुकों के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं लगाएंगे। पर कैंटीन और अन्य सुविधाओं के माध्यम से रुपये कमाये जा सकते है।


(Margaret Sumita Minj)

भारत के प्रत्यावर्तन योजना की सहायता के लिए उठाये कदम से रोहिंग्या भयभीत

In Church on May 9, 2018 at 3:33 pm

श्रीनगर, बुधवार 9 मई 2018 (उकान) : रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थी अपनी सुरक्षा के लिए परेशान हैं क्योंकि भारत उन्हें म्यांमार में वापस लाने के लिए अपने कदम को तेज करता है, बौद्ध बहुमत वाले राष्ट्र ने पिछले अगस्त से व्यापक हिंसा शुरू कर दी थी।

भारत बांग्लादेश से शरणार्थियों की वापसी की सुविधा प्रदान करने में अपनी सहायता को बढ़ाने की उम्मीद कर रहा है इसलिए भारत के विदेश मामलों की मंत्री सुषमा स्वराज 10 और 11 मई को म्यांमार का दौरा करेंगी।

यू.एन. सुरक्षा परिषद के एक प्रतिनिधिमंडल ने 1 मई को मंत्री सुषमा स्वराज से म्यांमार की यात्रा करने का आग्रह किया जिससे वे म्यांमार सरकार से हजारों शरणार्थियों की वापसी के लिए सुरक्षा की स्थिति में सुधार करने का आग्रह कर सके, जो सैन्य नेतृत्व वाली हिंसा के बाद उत्तरी राखीन राज्य से भाग कर बांग्लादेश में शरण लिये हुए हैं।

यू.एन. काउंसिल चाहती है कि म्यांमार और बांग्लादेश रोहिंग्यों के वापस लौटने की प्रक्रिया को तेज करे जिसे दोनों देश जनवरी में शुरू करने के लिए सहमत हुए थे।

लेकिन योजनाओं में देरी हुई क्योंकि म्यांमार ने पाया कि शरणार्थियों द्वारा दायर दस्तावेज दोनों देशों द्वारा की गई सहमति से मेल नहीं खाते थे।

हालांकि, भारत में रोहिंग्यों का कहना है कि वे भारत और बांग्लादेश में कुछ हिंदू समूहों द्वारा उनके निर्वासन की मांग को देखते हुए भयभीत हैं।

नई दिल्ली के मदनपुर के पास एक शरणार्थी शिविर में रहने वाले रोहिंग्या शाफीक-उर-रहमान ने कहा, “रोहिंग्यों को दुनिया की दी गई घोषणा और आश्वासन अर्थहीन है जब तक कि म्यांमार सरकार हमें अपने लोगों के रूप में नहीं मानती और समुदाय के खिलाफ आतंक को उजागर नहीं करती है।”

म्यामांर के सैन्य दमन और हिंसा से अपने प्राण बचाने के लिए रखाईन प्रांत से करीब 7 लाख रोहिंग्या बांग्लादेश की शरण लिये हुए हैं। म्यांमार सरकार उन्हें बांग्लादेश से आये प्रवासी मानती है, जहां उन्हें भेदभाव का भी सामना करना पड़ता है।


(Margaret Sumita Minj)

येसु मसीह को हमारे अंदर रहने की इजाजत दें, संत पापा

In Church on May 9, 2018 at 3:31 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 9 मई 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 9 मई को ट्वीट प्रेषित कर सभी ख्रीस्तीयों को येसु के साथ अपनी पहचान बनाने की प्रेरणा दी।

संदेश में उन्होंने लिखा, “हम इस हद तक ख्रीस्तीय हैं कि हम येसु मसीह को हमारे अंदर रहने की इजाजत देते हैं।”

संत पौलुस गलातियों के नाम पत्र अध्याय 2 पदसंख्या 20 में लिखते हैं,“मैं अब जीवित नहीं रहा बल्कि मसीह मुझमें जीवित हैं। अब मैं अपने शरीर में जो जीवन जीता हूँ उसका एकमात्र प्रेरणा-श्रोत है-ईश्वर के पुत्र में विश्वास जिसने मुझे प्यार किया और मेरे लिए अपने को अर्पित किया।”


(Margaret Sumita Minj)

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