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फोकोलारे आंदोलन के सदस्यों से मुलाकात करते संत पापा

In Church on May 10, 2018 at 3:29 pm

लोप्पियानो, बृहस्पतिवार, 10 मई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने नोमादेलफिया एवं लोप्पियानो की एक दिवसीय प्रेरितिक यात्रा पर बृहस्पतिवार को लोप्पियानो में फोकोलारे आंदोलन के सदस्यों से मुलाकात की तथा उनके सवालों का उत्तर दिया।

संत पापा ने कहा, मैं आप लोगों के बीच यहाँ छोटे शहर लोप्पियानो में अत्यन्त खुश हूँ जो दुनियाभर में जाना जाता है क्योंकि इसका जन्म सुसमाचार द्वारा हुआ है एवं यह सुसमाचार के द्वारा पोषित किया जाना चाहता है। यही कारण है कि येसु के अनेक शिष्य यहाँ तक कि दूसरे धर्मों के लोग भी इससे प्रेरित हैं। लोप्पियानो में सभी अपने घर के समान महसूस करते हैं।
संत पापा ने अपनी यात्रा का कारण बतलाते हुए कहा मैं यहाँ आना एवं इसका दर्शन करना चाहता था क्योंकि इसने प्रभु सेवक कियारा लुबिक को प्रेरित किया था जो द्वितीय वाटिकन महासभा के निर्देश के अनुसार आज की कलीसिया के मिशन के आदर्श हैं।
संत पापा ने इस मुलाकात में लोगों के कई सवालों का उत्तर दिया।

ईश्वर की नई आज्ञा को जीना ख्रीस्तीय जीवन का आरम्भिक बिन्दु है जहाँ हमें पहुँचना है आज के इस बदलते परिवेश में हम उसे किस तरह जी सकते हैं?
इसके उत्तर में संत पापा ने ख्रीस्तीय समुदाय को सम्बोधित इब्रानियों को लिखे पत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि उन बीते दिनों की याद करें जब आप ज्योति मिलने के तुरन्त बाद दुःखों के घोर संघर्ष का सामना करते हुए दृढ़ बने रहे, क्योंकि आप जानते थे कि इससे कहीं अधिक उत्तम एवं चिरस्थायी सम्पति आपके पास विद्यामान है। इसलिए आपलोग अपना भरोसा न छोड़ें क्योंकि आपका पुरस्कार महान है। आप लोगों को धैर्य की आवश्यकता है जिससे ईश्वर की इच्छा पूरी करने के बाद आपको वह मिल जाए जिसकी प्रतिज्ञा ईश्वर कर चुके हैं।”(ईब्रा.10: 32-36).
संत पापा ने कहा कि यहाँ हम ख्रीस्तीय समुदाय की यात्रा के दो महत्वपूर्ण शब्दों को पाते हैं भरोसा एवं धैर्य।
उन्होंने कहा कि भरोसा ख्रीस्तीय जीवन का आधार है ताकि हमारा हृदय ईश्वर की ओर लगा रहे और उनके प्रेम पर विश्वास कर सके, क्योंकि उनका प्रेम हर प्रकार के भय, प्रलोभन, गुप्त जीवन एवं अडम्बर को दूर कर देता है। संत पापा ने कहा कि उन्हें पवित्र आत्मा से खुलेपन की मांग करने की आवश्यकता है ताकि वे ईश्वर के महान कार्यों का साक्ष्य देने में सम्मान एवं कोमलता के साथ हमेशा एक बने रह सकें तथा कलाह एवं कुड़कुड़ाहट को बोने की हर प्रकार की बुराइयों को दूर करते हुए, प्रेम एवं सच्चाई में साहसी एवं ईमानदार शिष्य की तरह जी सकें।
संत पापा ने उन्हें भरोसा में दृढ़ रहने की सलाह देते हुए प्रार्थना करने पर बल दिया तथा अब्राहम एवं मूसा का उदाहरण दिया जिन्हें ईश्वर के सामने बात करने का साहस था।
धैय शब्द पर प्रकाश डालते हुए संत पापा ने कहा कि प्रेरित संत पौलुस ईश्वर एवं ख्रीस्तमय जीवन का चुनाव करने में धैर्य एवं दृढ़ता का परिचय देते हैं। उन्होंने कहा हमें अपने चुनाव में दृढ़ रहना है यहाँ तक कि उसके लिए कठिनाई और विरोध का ही सामना करना क्यों न पड़े, यह जानते हुए कि धीरज एवं दृढ़ता द्वारा आशा उत्पन्न होती है और आशा हमें कभी निराश नहीं करती। (रोम. 5: 3-5) संत पापा ने कहा कि संत पौलुस के लिए धीरज का आधार ईश्वर का प्रेम था जो पवित्र आत्मा के वरदानों के साथ हमारे हृदयों में डाला गया है एक ऐसा प्रेम जो हमें शक्ति प्रदान करता है ताकि हम दृढ़ता, शांति, सकारात्मक मनोभाव और कल्पना के साथ जी सकें, साथ ही साथ, कठिनाई के क्षणों को भी सहर्ष झेल सकें। यह मनोभाव ईश्वर की कृपा द्वारा आता है।

लोप्पियानो में शिक्षण केंद्रों, खासकर, सोफिया विश्वविद्यालय की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए संत पापा ने कहा कि “ये महान विरासत हैं जहाँ उन सभी मूल्यों की शिक्षा दी जा सकती है। मैं सलाह देता हूँ कि उनमें नई प्रेरणा जागृत की जाए, बृहद क्षितिज के लिए खोला जाए तथा सीमाओं के लिए प्रस्तुत किया जाए। यह महत्वपूर्ण है कि प्रशिक्षण योजना जो ठोस रूप से, खासकर, बच्चों, युवाओं, परिवारों एवं विभिन्न कार्यों से जुड़े लोगों को प्रभावित करता है। सभी चीजों का आधार एवं कुँजी प्रशिक्षणात्मक समझौता है जिसका महत्वपूर्ण तरीका है वार्ता।
संत पापा ने कहा कि हमें अपने आप को प्रशिक्षित करने के लिए तीन भाषाओं का प्रयोग अत्यन्त महत्वपूर्ण है, मन, दिल एवं हाथ। हमें अच्छी तरह सोचने, महसूस करने एवं काम करने के लिए सीखने की जरूरत है। फादर पास्क्वाले फोरेसी जिन्होंने लोप्पियानो के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाई है, लिखते हैं, “काम केवल जीने का एक जरिया नहीं है बल्कि हमारे मानव व्यक्ति होने में अंतर्निहित है अतः जीवन को समझने के लिए वास्तविकता को जानने का एक माध्यम भी है। यह सच्चाई एवं प्रभावशाली मानव विकास का एक साधन है।”

 


(Usha Tirkey)

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नोमादेलफिया समुदाय को संत पापा का प्रोत्साहन

In Church on May 10, 2018 at 3:27 pm

इटली, बृहस्पतिवार, 10 मई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने नोमादेलफिया समुदाय को सम्बोधित कर कहा, नोमादेलफिया के प्यारे भाइयो एवं बहनो, मैं यहाँ आपके बीच डॉन ज़ेलो सालतिनी की यादगारी में आया हूँ तथा उनके द्वारा स्थापित आपके समुदाय को प्रोत्साहन देना चाहता हूँ।

नोमादेलफिया एक नबी की सच्चाई है जिसका उद्देश्य एक नई सभ्यता को उजागर करना है, अच्छा एवं सुन्दर जीवन के रूप में सुसमाचार को क्रियान्वित करना। आपके संस्थापक ने अपने आपको उस प्रेरितिक उत्साह के लिए समर्पित किया ताकि सुसमाचार के बीज के लिए भूमि तैयार की जा सके और नये जीवन का फल उत्पन्न किया जा सके जो एमिलिया की ऊपजाऊ भूमि में डाली गयी है। वे सही समय जानते थे कि कब  हल चलाया जाना तथा बीज बोने के लिए जमीन तैयार किया जाना है। वे येसु के उस वाक्य से प्रेरित थे, ”हल की मूठ पकड़ने के बाद जो मुड़ कर पीछे देखता है, वह ईश्वर के राज्य के योग्य नहीं”। (लूक. 9,62) इसके लिए उन्हें कई कठिनाईयों का सामना भी करना पड़ा किन्तु उन्होंने सुसमाचार से बल प्राप्त किया।

संत पापा ने भ्रातृत्व की जीवन शैली पर गौर करते हुए कहा कि भ्रातृत्व का नियम जो उनके जीवन की विशेषता है वह डॉन जेलो का सापना एवं लक्ष्य था जो आरम्भिक ख्रीस्तीय समुदाय के आदर्श से प्रेरित है। संत पापा ने उन्हें प्रोत्साहन देते हुए कहा कि वे इस जीवन शैली को पवित्र आत्मा एवं सुसमाचार की शक्ति पर भरोसा रखते हुए स्पष्ट ख्रीस्तीय साक्ष्य द्वारा जारी रखें।
संत पापा ने कहा कि डॉन जेलो ने अनाथ एवं पीड़ित बच्चों के दुःखों को देखकर समझ लिया कि वे मात्र प्रेम की भाषा को ही समझ सकते है अतः उन्होंने एक ऐसे समाज की स्थापना की जहाँ एकाकीपन के लिए कोई जगह न हो बल्कि सहयोग की भावना विभिन्न परिवारों के लिए शक्ति का स्रोत बने और जहाँ वे विश्वास में एक-दूसरे को भाई बहन के रूप में पा सकें। इस तरह नोमादेलफिया प्रभु के विशेष बुलावे का प्रत्युत्तर है।

संत पापा ने समुदाय को बुजूर्गों की देखभाल करने का प्रोत्साहन देते हुए कहा कि नोमादेलफिया की एक महान दीनता एवं चिन्ह है बुजूर्गों की ओर स्नेहपूर्ण ध्यान देना। उन्होंने कहा कि वे जहाँ कहीं भी उदारता के लिए बुलाये जाते हैं, भ्रातृ प्रेम के इस आदर्श को ठोस चिन्हों एवं कामों द्वारा बनाये रखें, खासकर, डॉन जेलो के मनोभाव को बनाये रखें। उन्होंने कहा कि वे दुनिया जो ख्रीस्त की शिक्षा के विरूद्ध जाना चाहती है उसके प्रति विरोध की भावना न रखें बल्कि सुसमाचार से प्रेरित होकर जीवन के प्रसन्नचित एवं सौम्य साक्ष्य द्वारा उसका प्रत्युत्तर दें।
संत पापा ने उनके स्वागत के लिए धन्यवाद देते हुए उनके अर्थपूर्ण एवं स्नेहिल मुलाकात के लिए धन्यवाद दिया। अंत में उनके साथ पिता हमारे की प्रार्थना की तथा उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया एवं उनपर पवित्र आत्मा का उंजियाला एवं सामर्थ्य की कामना की।
संत पापा ने नोमादेलफिया समुदाय को उनके उपहार के लिए धन्यवाद दिया।

(Usha Tirkey)

नोमादेलफिया एवं लोप्पियानो में संत पापा की प्रेरितिक यात्रा

In Church on May 10, 2018 at 3:24 pm

रोम, बृहस्पतिवार, 10 मई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस इटली में अपनी 22वीं एक दिवसीय प्रेरितिक यात्रा पर, बृहस्पतिवार को हेलीकोप्टर द्वारा नोमादेलफिया के लिए रवाना हुए तथा आधा घंटा की यात्रा कर करीब 8.00 बजे नोमादेलफिया पहुँचे जो एक काथलिक समुदाय है जिसकी स्थापना ग्रोसेटो में स्वर्गीय फादर ज़ेलो सालतिनी द्वारा सन् 1947 में की गयी थी।

संत पापा ने अपनी इस यात्रा में इटली के तोस्काना प्रांत के नोमादेलफिया एवं लोप्पियानो शहरों का दौरा किया जो दो काथलिक आंदोलनों से जुड़े हैं।

नोमादेलफिया

नोमादेलफिया, परिवारों एवं अविवाहित लोगों का एक काथलिक समुदाय है जो प्रेरित- चरित में वर्णित प्रथम ख्रीस्तीय समुदाय से प्रेरणा प्राप्त कर, भ्रातृत्व की जीवनशैली को अपनाता है। नोमादेलफिया समुदाय में सभी सम्पतियों को साक्षा किया जाता है और किसी के पास निजी सम्पति नहीं रखी जाती है। यह उन परिवारों का समूह है जो परित्यक्त बच्चों को गोद लेते हैं।

नोमादेलफिया पहुँचने के तुरन्त बाद संत पापा ने फादर ज़ेलो सालतिनी की कब्र पर प्रार्थना की। उसके बाद वे समुदाय के एक परिवार में गये जहाँ उन्होंने समुदाय के सदस्यों एवं युवाओं से मुलाकात की तथा उन्हें अपना संदेश दिया।

संत पापा की इस यात्रा में करीब 4000 लोग एकत्रित थे।

इसके पूर्व संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने 21 मई 1989 को इसकी यात्रा की थी।

लोप्पियानो

नोमाडेलफिया से विदा होकर संत पापा फ्राँसिस, तोस्काना के निकट लोप्पियाना गये जहाँ फोकोलारे आंदोलन का प्रथम अंतरराष्ट्रीय केंद्र की स्थापना 1964 में की गयी थी।

फोकोलारे एक अंतरराष्ट्रीय आंदोलन है जो इटली में एकता तथा सभी लोगों के बीच आपसी भाईचारा को प्रोत्साहन देता है। आज यह आंदोलन कुल 194 देशों में फैला है।

यह पहली बार है जब संत पापा ने लोप्पियानो का दौरा किया जहाँ करीब 7000 लोगों ने उनका स्वागत किया। लोप्पियानो में संत पापा ने फोकोलारे कॉम्पलेक्स स्थित मरिया थेयोटोकोस (ईश माता मरियम) तीर्थालय में प्रार्थना की।

उसके बाद उन्होंने लोगों के कई सवालों का उत्तर दिया। फोकोलारे आंदोलन के प्रतिनिधियों से मुलाकात करने के उपरांत संत पापा रोम वापस लौटेंगे।


(Usha Tirkey)

संत पापा ने सिसली के युवाओं से माफिया का विरोध करने की अपील की

In Church on May 10, 2018 at 3:21 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 10 मई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने सिसिलियन शहर एग्रीजेंतो की यात्रा कर युवाओं से, माफिया का विरोध करने के संत पापा जॉन पॉल द्वितीय के 25 साल पहले के आह्वान को याद किया।

उन्होंने बुधवार को अग्रीजेंतो के महाधर्माध्यक्ष को एक तार संदेश प्रेषित कर कहा, संत पापा फ्राँसिस, संत पापा जॉन पौल द्वितीय की अग्रीजेंतो शहर के दौरे की 25वीं वर्षगाँठ की याद करते हैं जहाँ उन्होंने माफिया से संबंधित अपराधिक गतिविधियों का विरोध किया था तथा माफिया से जुड़े लोगों से अपील की थी कि वे मन-परिवर्तन करें।
अपने संदेश में संत पापा ने याद किया कि संत पापा जॉन पौल द्वितीय की यह नबी के समान अपील 9 मई 1993 को ख्रीस्तयाग के अंत में की गयी थी। संत पापा ने कहा कि वे भी इस महत्वपूर्ण वर्षगाँठ के अवसर पर आज के युवाओं से अपील करते हैं कि वे सुनियोजित अपराधों का विरोध करें।

माफिया विरोधी कार्यकर्ता पेप्पिनो इमपेस्तातो के शहादत की 40वीं सालगिराह पर माफिया विरोधी संगठन एवं सामान्य लोग, जब उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं संत पापा फ्राँसिस ने सिसली की कलीसिया को प्रोत्साहन दिया कि वे धन्य फादर पिनो, पुलिसी (जो 1993 में पालेरमो में माफिया द्वारा मार डाले गये थे क्योंकि उन्होंने माफिया के कार्यों की निंदा की थी एवं सुनियोजित अपराध से बचाने में लोगों की मदद की थी।) के बतलाये हुए मार्ग पर चलते रहें। उन्होंने कहा कि हर दिन के जीवन में नरमी और साहस पूर्वक बुराई से संघर्ष किया जाना चाहिए, जैसा कि सुसमाचार में बतलाया गया है, खासकर, युवाओं को इसकी शिक्षा दी जानी चाहिए।

 


(Usha Tirkey)

स्वर्गारोहन महापर्व की विशेषता

In Church on May 10, 2018 at 3:19 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 10 मई 2018 (रेई)˸ जी उठने के चालीस दिनों बाद येसु  ख्रीस्त स्वर्ग चले गये। आज कलीसिया प्रभु के स्वर्गारोहन का महापर्व मनाती है।

एक ट्वीट प्रेषित कर संत पापा फ्राँसिस ने स्वर्गारोहन महापर्व की विशेषता से अवगत कराया। उन्होंने कहा, “पुनर्जीवित ख्रीस्त के स्वर्ग चढ़ने में, वह प्रतीज्ञा है कि हम भी ईश्वर के साथ जीवन की पूर्णता के सहभागी बनेंगे।”


(Usha Tirkey)

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