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चेक एवं स्लोवाकिया के ऑर्थोडोक्स प्रतिनिधिमण्डल से सन्त पापा फ्राँसिस

In Church on May 11, 2018 at 10:51 am

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 11 मई 2018 (रेई,वाटिकन रेडियो): वाटिकन में शुक्रवार को सन्त पापा फ्राँसिस ने चेक एवं स्लोवाकिया गणतंत्रों की ऑरथोडोक्स कलीसिया के प्रतिनिधिमण्डल से मुलाकात कर काथलिकों एवं ऑरथोडोक्स कलीसिया के बीच किये जा रहे एकता के प्रयासों की सराहना की।

महामहिम प्राधिधर्माध्यक्ष रातीसलाव का अभिवादन करते हुए सन्त पापा ने ख्रीस्तीय एकतावर्द्धक प्रयासों में संलग्न परमधर्मपीठीय परिषद के अध्यक्ष कार्डिनल कोख द्वारा विगत वर्ष चेक एवं स्लावाकिया गणतंत्रों में सम्पन्न यात्रा का स्मरण किया। उन्होंने काथलिक एवं ऑरथोडोक्स कलीसिया के बीच भ्रातृत्वपूर्ण सम्बन्धों हेतु सम्पन्न बातचीत के लिये हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया।

सन्त पापा ने इस बात की ओर ध्यान आकर्षित कराया कि प्रेरितवर सन्त पौल ने प्रभु के ख़ातिर अपना जीवन अर्पित करने से पहले रोमियों को लिखा था, “हम ऐसी बातों में लगे रहे जिन से शांति को बढ़ावा मिलता है और जिनके द्वारा हम एक दूसरे का निर्माण कर सकें।”

उन्होंने कहा कि हम भी हमारे बीच विद्यमान भ्रातृत्वपूर्ण सम्बन्धों के लिये ईश्वर के प्रति धन्यवाद दें क्योंकि ये सम्बन्ध हमें शांति को बढ़ावा देने तथा एक दूसरे का निर्माण करने हेतु प्रोत्साहित करते हैं।

सन्त पापा ने कहा कि काथलिकों एवं ऑरथोडोक्स ख्रीस्तीयों के बीच सम्बन्ध का स्रोत हमारे महान सन्त सिरिल हैं जिनकी समाधि रोम के सन्त क्लेमेन्त गिरजाघर में सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि सन्त सिरिल और सन्त मैथोदियुस पूर्व तथा पश्चिम के बीच सुसमाचार प्रचार एवं संस्कृति के सेतु हैं जिनसे हम सब भ्रातृत्व भाव एवं सहभागिता की प्रेरणा ग्रहण करते हैं।

उन्होंने कहा, “इसीलिये सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय ने इन महान सन्तों को यूरोप के संरक्षक घोषित किया है। इन्हीं से हम सब मिलकर प्रार्थना करें ताकि प्रभु ख्रीस्त के अनुयायी होने के नाते पूर्ण एकता के प्रयास में लगकर मानव परिवार और विश्व में शांति के प्रवर्तक बन सकें।”


(Juliet Genevive Christopher)

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रोम धर्मप्रान्त के साथ सन्त पापा फ्राँसिस की मुलाकात 14 मई को

In Church on May 11, 2018 at 10:49 am

रोम, शुक्रवार, 11 मई 2018 (रेई,वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस सोमवार, 14 मई को रोम धर्मप्रान्त के विश्वासियों से मुलाकात करेंगे।

गुरुवार को एक विज्ञप्ति प्रकाशित कर रोम की प्रतिधर्माध्यक्षीय पीठ ने प्रकाशित किया कि 14 मई को सन्त पापा फ्राँसिस रोम स्थित सन्त जॉन लातेरान महागिरजाघर में सान्ध्य वन्दना कर रोम धर्मप्रान्त के पुरोहितों, धर्मबहनों एवं लोकधर्मी विश्वासियों से मुलाकात कर उन्हें अपना सन्देश प्रदान करेंगे।

रोम प्रतिधर्माध्यक्षीय पीठ की विज्ञप्ति में कहा गया कि सन्त पापा फ्राँसिस के साथ साक्षात्कार से चालीसाकाल में “आध्यात्मिक बीमारियाँ” शीर्षक से प्रारम्भ तीर्थयात्रा समाप्त होगी। सान्ध्य वन्दना से पहले रोम की विभिन्न पल्लियों में इस वर्ष आरम्भ प्रेरितिक कार्यों का सार सन्त पापा के समक्ष रखा जायेगा जिसके उपरान्त सन्त पापा रोम धर्मप्रान्त के विश्वासियों को अपना सन्देश देंगे। अन्त में सान्ध्य वन्दना के पाठ के साथ यह समारोह समाप्त हो जायेगा।

विज्ञप्ति में बताया गये कि इस समारोह में रोम के प्रतिधर्माध्यक्ष आन्जेलो दे दोनातिस की अध्यक्षता में रोम के सहयोगी धर्माध्यक्ष, रोम धर्मप्रान्त के पुरोहित, धर्मसमाजी एवं धर्मसंघी तथा लोकधर्मी विश्वासियों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।

विज्ञप्ति में यह भी बताया गया कि सन्त पापा फ्राँसिस के प्रेरितिक उदबोधन “एवान्जेली गाओदियुम” का अध्ययन कर धर्मप्रान्त की विभिन्न पल्लियों ने अपनी रिपोर्टें तैयार की हैं जो साक्षात्कार के अवसर पर सन्त पापा फ्राँसिस को अर्पित की जायेंगी। प्रतिधर्माध्यक्ष दोनातिस ने लिखा कि सन्त पापा फ्राँसिस के साथ साक्षात्कार कृपा का क्षण होगा जिसमें भाग लेने तथा जिसके लिये प्रार्थना हेतु वे सम्पूर्ण धर्मप्रान्त के विश्वासियों को आमंत्रित करते हैं।

अपने प्रेरितिक उदबोधन “एवान्जेली गाओदियुम” में सन्त पापा फ्राँसिस लिखते हैं कि बहिष्कार की अर्थव्यवस्था, स्वार्थ, आरामदायक व्यक्तिवाद, परस्पर होड़ और युद्ध, निराशावाद और सांसारिकता माया मोह, ये सब “आध्यात्मिक रोग” हैं।


(Juliet Genevive Christopher)

हमारे घरों में निर्मित होती है शांति, सन्त पापा फ्राँसिस

In Church on May 11, 2018 at 10:48 am

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 11 मई 2018 (रेई,वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार को एक ट्वीट सन्देश प्रकाशित कर कहा है कि शांति हमारे घरों में ही निर्मित होती है।

शुक्रवार, 11 मई के ट्वीट सन्देश में उन्होंने लिखा, “शांति हमारे घरों में, हमारी सड़कों पर, हमारे कार्य स्थलों पर निर्मित होती है: उन स्थलों में जहाँ हम सहभागिता और भागीदारी हेतु प्रशिक्षण पाते हैं।”


(Juliet Genevive Christopher)

कर्नाटक में सोशल मीडिया पर प्रकाशित पत्र नकली, कहना भारतीय धर्माध्यक्षों का

In Church on May 11, 2018 at 10:46 am


भोपाल, शुक्रवार, 11 मई 2018 (ऊका समाचार): भारत के काथलिक धर्माध्यक्षों ने कहा है कि कर्नाटक चुनावों से पूर्व सोशल मीडिया पर ख्रीस्तीयों के विरुद्ध प्रकाशित पत्र नकली है।

कर्नाटक राज्य में चुनावों से पूर्व इस दो पृष्ठीय नकली पत्र में भारत के कलीसियाई नेताओं पर कर्नाटक के हिन्दू समुदाय को विभाजित करने का आरोप लगाया गया है।

नौ मई को यह नकली पत्र सोशल मीडिया पर प्रकाशित किया गया जिसमें यह दावा किया गया है कि ख्रीस्तीय नेता, एक अलग अल्पसंख्यक समुदाय रूप में मान्यता मिलने हेतु लिंगायत समुदाय की मांगों का समर्थन करते हैं।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव धर्माध्यक्ष थेओदोर मैसकरेनस ने इस सन्दर्भ में एक विज्ञप्ति प्रकाशित कर कहा, “हम आपको आश्वस्त करते हैं कि सोशल मीडिया पर प्रकाशित पत्र एक नकली और कपट भरा पत्र है।”

धर्माध्यक्ष मैसकरेनस ने बताया गया कि कलीसियाई अधिकारी नकली पत्र को प्रकाशित करने के लिये ज़िम्मेदार लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने पर विचार विमर्श कर रहे हैं।

कर्नाटक का लिंगायत समुदाय हिनदू धर्म से उत्पन्न एक समुदाय है। राज्य की लगभग छः करोड़ साठ लाख की कुल आबादी में 17 प्रतिशत लोग लिंगायत समुदाय के सदस्य हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के 224 निर्वाचन क्षेत्रों में से लगभग 100 में इस हिन्दू समुदाय का प्रभाव  निर्णायक है। पारम्परिक रूप से यह समुदाय भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में मतदान करता आया है।

सोशल मीडिया पर ख्रीस्तीयों के विरुद्ध प्रकाशित नकली पत्र को बैंगलोर के महाधर्माध्यक्ष बर्नार्ड मोरस को सम्बोधित तथा भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल ऑसवर्ल्ड ग्रेशियस द्वारा लिखा बताया गया।

नकली पत्र में कार्डिनल ऑसवर्ल्ड ग्रेशियस को भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के सचिव बताया गया जबकि वे इस सम्मेलन के अध्यक्ष हैं।

धर्माध्यक्ष मैसकरेनस ने लिखा, “यह स्पष्ट है कि उन शरारतियों को भारत के कलीसियाई अधिकारियों के बारे में कुछ भी पता नहीं था।”

उन्होंने कहा, “कलीसिया का कोई भी अधिकारी विभाजन की रणनीति में शामिल नहीं होता है।”

धर्माध्यक्ष ने कहा, “नकली पत्र  में भाषा की ग़लतियाँ यह स्पष्ट संकेत देती है कि ऐसा पत्र कभी भी हमारे कार्यालय से नहीं आ सकता।”

12 मई को कर्नाटक राज्य में चुनाव होनेवाले हैं।


(Juliet Genevive Christopher)

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