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कलीसिया का चेहरा जो सीमान्तों तक जाता है

In Church on May 12, 2018 at 2:44 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 12 मई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार, 12 मई को वाटिकन स्थित क्लेमेनटीन सभागार में चिरकोलो सन पियेत्रो के 300 सदस्यों से मुलाकात की।

चिरकोलो सन पियेत्रो की स्थापना रोम में सन् 1869 ई. में कार्डिनल इयाकोबिक के मार्गदर्शन में युवाओं के द्वारा की गयी थी। यह उन लोगों के उत्साह पर स्थापित है जो उच्च वर्ग तथा रोम के कुलीन परिवारों के थे और जो संत पिता के प्रति अपनी निष्ठा को प्रकट करना तथा इतिहास में संत पापाओं के कठिन दौर में याजकीय विरोधी आक्रमण से उनकी रक्षा करना चाहते थे।

संत पापा ने उन्हें सम्बोधित कर उनकी सेवाओं के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “मैं शहर में सबसे वंचित लोगों की प्रतिदिन की सेवा के लिए आपकी सराहना करना चाहता हूँ। कई सालों से चिरकोलो सन पियेत्रो गरीबों की सहायता करने और उनका साथ देने हेतु एक सुन्दर सच्चाई बन गया है, रोम की कलीसियाई दाखबारी में एक समृद्ध, फलप्रद एवं उदार जीवन की शाखा के रूप में।

संत पापा ने कहा, आप कलीसिया के चेहरे हैं जो सीमांतों तक जाता है वह कभी स्थिर नहीं रहता बल्कि जो सुनने, बांटे जाने, सामीप्य एवं एकात्मकता के भूखे और प्यासे अपने भाई बहनों से मुलाकात करने के लिए आगे बढ़ता है। संत पापा ने उन्हें प्रोत्साहन दिया कि वे इस रास्ते पर आगे बढ़ना जारी रखें।

उन्होंने उन्हें घायलों एवं पीड़ितों की सहायता करने का प्रोत्साहन देते हुए कहा, “अपने कार्यों में अपने भाइयों के घायल शरीर से लज्जित न हों किन्तु पीड़ित और जरूरतमंद हर व्यक्ति में ख्रीस्त के चेहरे को देखें। ख्रीस्तीय उदारता के साहसी मिशनरी बनें तथा ख्रीस्त की करुणा एवं अच्छाई का साक्ष्य देने से कभी न थकें। सभी कमजोर एवं निराश लोगों के लिए सांत्वना के माध्यम बनें।

संत पापा ने उनका ध्यान संतों की ओर आकृष्ट करते हुए कहा कि उनके बीच अनेक संत हैं जिनसे वे प्रेरणा ले सकते हैं, उनकी पवित्रता के चिन्ह द्वारा जिन्हें प्रभु हमारे लिए उन दीन लोगों के माध्यम से प्रकट करते हैं जो ख्रीस्त के जीवित साक्षी हैं खासकर, विश्वास एवं उदारता के जीवन द्वारा।

संत पापा ने कहा कि उनकी प्रेरिताई पवित्रता की बुलाहट के उत्तर हेतु एक अवसर एवं एक उपकरण है जिसे प्रभु हम प्रत्येक को प्रदान करते हैं। उदारता के कामों द्वारा वे उस कृपा को प्रवाहित होने देते हैं जिसको हमने बपतिस्मा में प्राप्त किया है ताकि हम पवित्रता की यात्रा में अधिक फल उत्पन्न कर सकें जो हमारे जीवन में पवित्र आत्मा के कार्य का परिणाम है।

संत पापा ने चिरकोलो सन पियेत्रो के सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया कि उन्होंने शहर के गरीबों के लिए रोम के धर्माध्यक्ष के प्रति अपनी सहभागिता दिखलायी है। उन्होंने कामना की कि उनकी उदारता, प्रार्थना द्वारा पोषित होता रहें एवं ईशवचन जो एक प्रकाश है उनकी यात्रा को आलोकित करता रहे।

अंत में संत पापा ने उनके परिवारों एवं मिशन को रोम की संरक्षिका माता मरियम को सिपूर्द किया तथा संत पेत्रुस एवं संत पौलुस की मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना की कि वे उनकी प्रेरिताई को सहायता प्रदान करें।


(Usha Tirkey)

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संत पापा फ्राँसिस ने बेल्जियम के “लॉजिया” एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को संबोधित किया

In Church on May 12, 2018 at 2:42 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 12 मई 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 12 मई को वाटिकन के  कार्डिनल भवन मंडल में बेल्जियम के “लॉजिया” एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की जो इन दिनों रोम की तीर्थयात्रा पर आये हुए हैं।

बेल्जियम एसोसिएशन “लॉजिया” फ्लैंडर्स में शुरु किया गया एक काथलिक प्रबोध मंडल है जो सार्वजनिक बहस के केंद्र में अर्थव्यवस्था, टिकाऊ विकास, राजनीति, धर्म, यूरोप, कला, विज्ञान, संस्कृति, खेल, शिक्षा और प्रशिक्षण, न्याय और खेल आदि विषयों पर फ्लेमिश मीडिया में ख्रीस्तीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए वचनबद्ध है। इस एसोसिएशन में 150 फ्लेमिश विशेषज्ञ भाग लेते हैं।

संत पापा ने उनका स्वागत करते हुए लॉजिया एसोसिएशन की कार्यविधि की प्रस्तुति के लिए धन्यवाद दिया और एसोसिएशन के सभी सदस्यों को उनके भले कार्यों को जारी रखने हेतु शुभकामनायें दी।

संत पापा ने कहा,“मैं ईश्वर को धन्यवद देता हूँ जिसने आपको सुसमाचार के मूल श्रोत में वापस जाने और मूल ताजगी को पुनः प्राप्त करने की कृपा दी है, जससे बेल्जियम के फ्लेमिश क्षेत्र में “लॉजिया एसोसिएशन” की स्थापना हुई। इसका उद्देश्य एक धर्मनिर्पेक्ष समाज में “एक प्रमाणिक विश्वास….मूल्यों को हस्तांतरित करते हुए एक बेहतर दुनिया का नर्माण करना है, अर्थात आने वाली पीढ़ी के लिए एक बेहतर दुनिया बनाना है।

इस प्रकार, सार्वजनिक क्षेत्र और मीडिया में आपकी उपस्थिति के माध्यम से, आप प्रमाणित करते हैं कि मसीह के नियमों पर चलने और सुसमाचार का अभ्यास करने से कभी मानवता का नुकसान नहीं होता है बल्कि हमारी प्रतिभा और हमारे कौशल विकासित होते हैं। सभी के लिए, समाज के निर्माण की सेवा में, जो कि अधिक ईश्वर के मुताबिक और मानवकेंद्रित है, मैं सार्वजनिक बहस में भागीदारी के माध्यम से आपको इस विषय को प्रगाढ़ करने के लिए प्रोत्साहित करता हूं कि सुसमाचार हमारे प्रभु और हमारे गुरु येसु मसीह के स्कूल में मानवीकरण का एक तरीका है। जो दूसरों पर उंगलियाँ नहीं उठाते या निंदा नहीं करते हैं परंतु नम्रता और सम्मान(1पेत्रुस 3:16) के साथ बिना थके दूसरों की भलाई करते हैं। (गला 6: 9)

अपनी कई पहलों के माध्यम से, आप विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ कलीसिया की इच्छा के प्रति गवाही दे सकते हैं, जो कलासिया के सामाजिक सिद्धांत और ख्रीस्तीय परंपरा पर भरोसा करते हुए मानव व्यक्ति की गरिमा और उनकी भलाई के लिए काम करते हैं।(इवांजेलि गौदियुम, 241) आप अपने शब्दों और कर्मों से येसु मसीह में विश्वास को प्रकट करते हैं यह कभी भी अपने आप में बंद रखा नहीं जा सकता है क्योंकि यह ईश्वर का एक उपहार है जो हमें पाप, उदासी, खालीपन और अलगाव से मुक्त करता है और खुशी के स्रोत, परिपूर्ण आनंद से जोड़ता है।(सीएफ, योहन 15:11)

ऐसा करने हेतु, अपनी प्रार्थनाओं और पवित्र संस्कारों में आपकी भागीदारी के साथ, लगातार प्रार्थना करने से न डरें। आपमें पवित्र आत्मा की सहायता से “पवित्रता की भावना, जो एकांत और सेवा दोनों को प्रभावित करती है, सुसमाचार प्रचार के रूप में अंतरंगता और प्रतिबद्धता, दोनों में प्रेम की अभिव्यक्ति हो।”( प्रेरितिक उदबोधन गौदेते एत एक्सुलताते, 31) इस परिप्रेक्ष्य में, मैं आपकी मासिक बैठकों के माध्यम से, संप्रदाय के मतभेदों को दर्शाते हुए जीवन की गवाही के साथ,  समाज के बीच वार्तालाप और संवाद की संस्कृति में बढ़ने तथा भाईचारे के बंधन को विकसित करने के लिए भी आमंत्रित करता हूँ, जिसमें पवित्र आत्मा शिक्षक और प्रोजेक्ट लीडर है। ईश्वर की कृपा के आवेग के तहत, आप नम्रता और दृढ़ता के साथ से पीढ़ियों के बीच, पुरुषों के बीच और विभिन्न सामाजिक और पेशेवर क्षेत्रों के बीच पुलों का निर्माण करें और छोटे लोगों का विशेष गरीबों और परित्यक्त लोगों का सहारा बनें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने माता मरियम के संरक्षण में रखते हुए उन्हें और लॉगिया एसोसिएशन के सभी सदस्यों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Margaret Sumita Minj)

ओस्सालवातोरे रोमानो के सेवानिवृत निदेशक के निधन पर संत पापा का शोक संदेश

In Church on May 12, 2018 at 2:40 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 12 मई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने इताली काथलिक अक्शन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वाटिकन समाचार पत्र ओस्सालवातोरे रोमानो के सेवानिवृत निदेशक प्रोफेसर मारियो अग्नेस के निधन पर गहन शोक व्यक्त किया। वे 86 वर्ष के थे।

संत पापा ने 11 मई को प्रोफेसर मारियो अग्नेस के परिवार वालों को एक तार संदेश प्रेषित कर कहा, “प्रोफेसर मारियो अग्नेस के निधन की खबर सुन, जो इताली काथलिक अक्शन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वाटिकन समाचार पत्र ओस्सालवातोरे रोमानो के सेवानिवृत निदेशक थे, मैं पूरे परिवार को अपना हार्दिक संवेदना प्रकट करता हूँ। मैं कृतज्ञता के साथ, खासकर, काथलिक लोकधर्मी संगठन के प्रति उनके सर्मपण तथा सबसे बढ़कर परमधर्मपीठ के समाचार पत्र के निदेशक के रूप में उनकी उदार एवं लम्बे समय की सेवा के लिए उन्हें याद करता हूँ।”

संत पापा ने प्रार्थना की कि पुनर्जीवित प्रभु स्वर्गीय प्रोफेसर को अपने अनन्त धाम में प्रवेश पाने दे तथा उन्होंने उन सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया जो उनके निधन पर शोकित हैं।


(Usha Tirkey)

जीवनभर के लिए येसु को स्वीकारें, संत पापा फ्राँसिस

In Church on May 12, 2018 at 2:38 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 12 मई 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने सभी ख्रीस्तीयों को जीवनभर के लिए येसु को ‘हाँ’ कहने की प्रेरणा दी।

संत पापा ने शनिवार 12 मई के ट्वीट में लिखा,“ येसु के प्रति आपका जवाब कुछ समय के लिए नपी तुली और अपनी सुविधा के अनुसार नहीं लेकिन जीवनभर के लिए “हां” होनी चाहिए।”


(Margaret Sumita Minj)

शांति पत्रकारिता आज की दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, कार्डिनल ग्रेसियस

In Church on May 12, 2018 at 2:37 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 12 मई 2018 (वीआर,रेई) : मुम्बई महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष और भारतीय धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस के साथ वाटिकन समाचार संवाददाता रोबिन गोम्स ने संपर्क कर “विश्व संचार दिवस” के लिए संत पापा द्वारा दिये गये विषय “नकली खबर और शांति के लिए पत्रकारिता” विश्व में विशेष कर भारत में इसके महत्व के बारे में साक्षात्कार किया।

काथलिक कलीसिया रविवार13 मई को ‘विश्व संचार दिवस’ मना रही है। यह दिवस विश्व के अधिकांश देशों में पेंतेकोस्त महापर्व के अगले रविवार को मनाया जाता है और उसी दिन कलीसिया येसु मसीह के स्वर्गआरोहण का महोत्सव भी मनाती है।

“विश्व संचार दिवस” की स्थापना संत पापा पॉल छठे ने सुसमाचार प्रचार के लिए सामाजिक संचार के आधुनिक माध्यमों के प्रयोग और उनकी चुनौतियों पर चिंतन करने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए 1967 में स्थापित किया।

संत पापा फ्राँसिस ने ‘विश्व संचार दिवस’ को मनाने के लिए बहुत पहले ही  संत योहन के सुसमाचार ‘सत्य तुम्हें आज़ाद कर देगा’ (8 :32) के आधार पर इस वर्ष के विषय “नकली खबर और शांति के लिए पत्रकारिता” पर अपना संदेश दिया है।

अपने संदेश में, संत पापा फ्राँसिस ने फर्जी समाचारों के माध्यम से विघटन के “गंभीर परिणामों” की चेतावनी दी, जिसे “लालच” और “शक्ति की प्यास” से प्रेरित किया जाता है और यह “रचनात्मक संवाद” के लिए आवश्यक “स्वस्थ वार्तालाप” की अनुपस्थिति के कारण उभरता है। आज की तेजी से विकसित संचार की दुनिया में, संत पापा ने उन लोगों से कहा कि जो “शांति की पत्रकारिता को बढ़ावा” देते हैं और दूसरों को सच्चाई का साथ देने में मदद करते हैं जो हानिकारक या भावनात्मक नहीं है।

कार्डिनल ग्रेसियस ने विश्व संवाद दिवस के लिए संत पापा फ्राँसिस द्वारा चुने गये विषय पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने हमारे लिए मीडिया द्वारा “सत्य का संवाद करने” की सुविधा दी है, और जैसा कि संत पापा कहते हैं, “बुराई की शक्तियों” ने “संचार को सत्य नहीं झूठ बोलने के लिए” इसका उपयोग करना शुरू कर दिया है, जो नकली खबर है।

कार्डिनल ने कहा, यह बहुत खतरनाक है, क्योंकि झूठ के आधार पर बेईमानी, क्रोध, पूर्वाग्रह या नफरत को बढ़ावा दिया जाता है। नकली समाचार का मुकाबला करना कलीसिया के लिए एक चुनौती है और इसके मीडिया कार्यालयों को इसे गंभीरता से लेना है।

कार्डिनल ग्रेसियस ने कहा कि झूठी खबरें भारत सरकार के लिए भी एक चुनौती है। नकली समाचार और सच्चाई के बीच अंतर करने की जरूरत है। नकली खबरों से प्रभावित न होकर इसका मुकाबला करने के लिए मीडिया को खबरों की जड़ तक पहुँच कर सच्चाई का साथ देना चाहिए। यह एक “जबरदस्त” चुनौती है जिसे मीडिया में विशेषता प्राप्त लोगों और कलीसिया को सलाह देने की आवश्यकता है।

कार्डिनल ग्रेसियस ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा कि नकली खबर भारत के लिए विशेष रूप से खतरनाक है, जिसकी समृद्धि धर्म, भाषा और संस्कृतियों की विविधता में है और जहां सद्भावना बहुत महत्वपूर्ण हैऔर जो भी सद्भावना से खुश नहीं है वह विभाजन लाने की कोशिश करता है। नकली खबरों के पौधे सत्य के दुश्मन हैं, देश के दुश्मन और बुराई की ताकतें हैं, जिन्हें हर संभव तरीके से इसका सामना करने की आवश्यकता है।


(Margaret Sumita Minj)

स्कूल अच्छी माताओं, विशेषज्ञों एवं शोधकर्ता को उत्पन्न करता है, कार्डिनल रंजित

In Church on May 12, 2018 at 2:33 pm

कोलोम्बो, शनिवार, 12 मई 2018 (एशियान्यूज)˸ कोलोम्बो के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल मालकोम रंजित ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अच्छे समाज के निर्माण हेतु अपने को तैयार करें।

उन्होंने कोलोम्बो के तुदेल्ला स्थित काथलिक स्कूल, निर्मला मरिया बालिका महाविद्यालय की स्थापना की 75वीं वर्षगाँठ पर, वहाँ के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को सम्बोधित किया।

कार्डिनल ने विद्यार्थियों को संत बनने में मदद देने के लिए शिक्षकों को धन्यवाद दिया तथा विद्यार्थियों से कहा कि वे स्कूल से संत बनना सीखते हैं।

निर्मला मरिया बालिका महाविद्यालय की स्थापना 1943 में पवित्र परिवार संगठन की धर्मबहनों द्वारा की गयी थी जो आज भी उन्हीं के द्वारा संचालित है।

संगठन की प्रांतीय अधिकारिणी सिस्टर जेसमिन फेर्नांडिस ने एशियान्यूज़ से कहा, “धर्मबहनों के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व के लिए धन्यवाद, जिनके द्वारा हम एक बृहद योजना बनाने में कामयाब हुए हैं जो समाज को महिलाओं की शिक्षा, उन्हें अच्छी माता एवं जिम्मेदार नागरिक प्रदान करती है।”

आज की चुनौती न केवल शैक्षणिक परिणाम प्राप्त करना है बल्कि समाज में विभिन्न जिम्मेदारियों को निभाना भी है जहाँ मूल्यों का कद्र नहीं है।

निर्मला मरिया विद्यालय से शिक्षा प्राप्त विद्यार्थियों में से 16 पवित्र परिवार की धर्मबहनें हैं, एक लोकधर्मी समर्पित महिला है, 13 दूसरे धर्मसमाज की धर्मबहनें हैं, साथ ही कई विशेषज्ञ, शोधकर्ता, डॉक्टर, इंजिनियर, सूचनाविभाग, मैनेजर एवं उच्च न्यायालय में न्यायधीश जैसे पदों पर समाज में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं।

कार्डिनल ने अपने संदेश में कहा कि “हर व्यक्ति विशिष्ठ है सभी एक-दूसरे से अलग हैं। इस विविधता में ही सुन्दरता है। हर व्यक्ति धन्य है वह ईश्वर द्वारा सृष्ट एवं एक महान बुलाहट के लिए बुलाया गया है।”

उन्होंने कहा, “पवित्र बाईबिल इस बुलाहट का वर्णन प्रेम एवं हर व्यक्ति की सेवा, ईश्वर की इच्छा के अनुसार जीने के रूप में करता है जो हमें आनन्द प्रदान करता तथा ईश्वर को महिमान्वित करता है। यही हमारी जिम्मेदारी है जिसकी शिक्षा बाईबिल हमें देती है।”

विद्यार्थियों को सम्बोधित कर कार्डिनल ने कहा कि वे प्रत्येक व्यक्ति महत्वपूर्ण हैं। सभी बहुमूल्य है एवं ईश्वर से विभिन्न प्रकार की क्षमताएं प्राप्त किये हैं। वे उसे पहचानें, उसका विकास करें तथा अच्छे समाज के निर्माण में उनका प्रयोग करें और हमारे ईश्वर को महिमा प्रदान करें।


(Usha Tirkey)

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