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हमारा “लक्ष्य” येसु के मित्रों के रूप में जीना है, संत पापा फ्राँसिस

In Church on May 14, 2018 at 3:07 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार 14 मई 2018 (रेई) : “येसु की मित्रता हमें संयोगवश नहीं अपितु “सौभाग्य” से प्राप्त हुई है और हमें येसु के मित्र के रुप में अपनी बुलाहट को जीना है।” यह बात संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार को वाटिकन में अपने प्रेरितिक निवास संत मार्था के प्रार्थनालय में प्रातःकलीन युखारीस्तीय समारोह के दौरान कही।

हमारा “लक्ष्य” येसु के मित्रों के रूप में जीना है

संत पापा ने कहा,“यह हमारा सौभाग्य है कि हमें उपहार के रुप में येसु से दोस्ती मिली है और इस मित्रता को बरकरार रखते हुए इसे जीना ही हमारी बुलाहट है। येसु के प्रेरितों को यह उपहार मिला था  आज हम ख्रीस्तीयों को भी यह उपहार मिला है। हमें येसु की मित्रता को खुले दिल से स्वीकार करना है। हमारा “लक्ष्य” येसु के मित्रों के रूप में जीना है। यह वह उपहार है जिसे येसु देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और इस उपहार के प्रति वे वफादार रहते हैं।

येसु विश्वासघात करने वालों के साथ भी अपनी दोस्ती से इंकार नहीं करते है

संत पापा ने कहा, हालांकि कई बार हम “हमारे पापों के कारण तथा अपनी सनकीपन के कारण येसु से दूर चले जाते हैं, लेकिन “येसु अपने मित्रों के प्रति वफादार हैं।”  आज के सुसमाचार पाठ (योहन 15, 9 -17)  में येसु हमें नौकर नहीं परंतु मित्र कहते हैं और अपनी दोस्ती को वे अंत तक निभाते हैं क्योंकि वे वफादार हैं। येसु ने यूदस को विश्वासघात करने से पहले, आखिरी शब्द “दोस्त” कहकर संबोधित किया। उसे कभी नहीं दुतकारा।

येशु हमारा मित्र है। यूदस ने येसु की मित्रत्रा को ठुकरा दिया और येसु से दूर चला गया। उसने अपनी नियति के लिए स्वतंत्र रूप से चुनाव किया। दुर्भाग्य से अपने गलत चुनाव के कारण वह येसु से दूर हो गया। वह मित्र के बदले दुश्मन और गद्दार बन गया।

येसु की मित्रता में रहना एक उपहार है

संत पापा ने आज के पहले पाठ (प्रेरितों 1.15-17.20-26) के संदर्भ में कहा कि “पुनरुत्थान का गवाह बनने” के लिए यूदस के स्थान में मतियस को चुना जाता है। मित्र अपने रहस्यों को साझा करता है। सुसमाचार में येसु कहते हैं,“मैंने तुम्हें मित्र कहा है क्योंकि मैंने पिता से जो कुछ सुना,वह सब तुम्हें बता दिया है। येसु की मित्रता हमें उपहार के रुप में मिली है। यह उपहार मतियस और यूदस को भी मिली थी।

प्रवचन के अंत में संत पापा ने येसु की मित्रता पर गंभीरता से विचार करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि येसु हमारी दोस्ती से कभी इन्कार नहीं करते, वे हमारा इन्तजार करते हैं और जब हम अपनी कमजोरी के कारण उससे दूर हो जाते हैं, तो भी वे हमारा इंतजार करते हैं क्योंकि वे अपने मित्रों के प्रति सदा वफादार  हैं। आइये हम प्रभु से सच्ची मित्रता निभाने और वफादार बने रहने के लिए कृपा मांगे।


(Margaret Sumita Minj)

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संत पापा फ्राँसिस का ट्वीट संदेश-13 और 14 मई 2018

In Church on May 14, 2018 at 3:06 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 14 मई 2018 (रेई) : 13 मई को फातिमा की माता मरियम के दिव्य दर्शन दिवस  और विश्व संचार दिवस’ पर संत पापा ने दो ट्वीट संदेश दिया।

रविवार 13 मई को काथलिक कलीसिया ने फतिमा की माता मरियम के दिव्य दर्शन के 101 वर्ष का समारोह मनाया। इस अवसर पर संत पापा फ्राँसिस ने सभी विश्वसियों को माता मरियम के संरक्षण में अपने परिवार देश और पूरी दुनिया को रखने को कहा जिससे उनकी कृपा दृष्टि हम पर बनी रहे।

संत पापा ने ट्वीट संदेश में लिखा,“फातिमा की माता मरियम, आप, हमारी तरफ, हमारे परिवारों, हमारे देश और दुनिया की तरफ अपनी कृपा दृष्टि बनायें रखें।”

माना जाता है कि 101 वर्ष पूर्व इसी दिन माता मरियम पुर्तगाल के फातिमा नामक गांव में तीन चरवाहे बच्चों लूसी,जसिंता और फ्राँचेस्को के सामने प्रकट हुई थी। इस दौरान माता मरियम ने इन्ही बच्चों को ६ बार विभिन समय पर दर्शन दिए और उनसे वादा किया कि धरती पर शान्ति तभी संभव होगी जब उनकी विनती सुनी जायेगी और उनका कहा माना जायेगा।

रविवार,13 मई को ही माता कलीसिया ने ‘विश्व संचार दिवस’ भी मनाया। यह दिवस विश्व के अधिकांश देशों में पेंतेकोस्त महापर्व के अगले रविवार को मनाया जाता है। इस विशेष समारोह के दिन संत पापा ने कमजोर और आवाजहीन लोगों की सेवा में संचार माध्यम का विशेष उपयोग करने को कहा।

संत पापा ने ट्वीट में लिखा,“मैं संचार पेशेवरों को सभी लोगों की सेवा में खासतौर पर आवाजहीन और कमजोर लोगों की सेवा में शांति की पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए आमंत्रित करता हूँ।”

“विश्व संचार दिवस” की स्थापना संत पापा पॉल छठे ने सुसमाचार प्रचार के लिए सामाजिक संचार के आधुनिक माध्यमों के प्रयोग और उनकी चुनौतियों पर चिंतन करने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए 1967 में स्थापित किया।

संत पापा फ्राँसिस ने ‘विश्व संचार दिवस’ को मनाने के लिए पहले ही संत योहन के सुसमाचार ‘सत्य तुम्हें आज़ाद कर देगा’ (8 :32) के आधार पर इस वर्ष के विषय “नकली खबर और शांति के लिए पत्रकारिता” पर अपना संदेश दिया था।

अपने संदेश में, संत पापा फ्राँसिस ने फर्जी समाचारों के माध्यम से विघटन के “गंभीर परिणामों” की चेतावनी दी, जिसे “लालच” और “शक्ति की प्यास” से प्रेरित किया जाता है और यह “रचनात्मक संवाद” के लिए आवश्यक “स्वस्थ वार्तालाप” की अनुपस्थिति के कारण उभरता है। आज की तेजी से विकसित संचार की दुनिया में, संत पापा ने उन लोगों से कहा कि जो “शांति की पत्रकारिता को बढ़ावा” देते हैं और दूसरों को सच्चाई का साथ देने में मदद करते हैं जो हानिकारक या भावनात्मक नहीं है।

संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 14 मई के ट्वीट में सभी ख्रीस्तीयों से पवित्र आत्मा को स्वीकारने और उनके निर्देशन में ख्रीस्तीय जीवन जाने की प्रेरणा दी। संदेश में उन्होंने लिखा,“स्वयं को पवित्र आत्मा द्वारा निर्देशित करने और उसे जहां चाहें वहां हमें ले जाने की अनुमति देने से बड़ी कोई स्वतंत्रता नहीं है।”


(Margaret Sumita Minj)

इंडोनेशिया में हमलों के पीड़ितों के लिए संत पापा द्वारा प्रार्थना की अपील

In Church on May 14, 2018 at 3:04 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार 14 मई 2018 (वीआर,रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 13 मई को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में हजारों की संख्या में उपस्थित विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ करने का उपरांत इंडोनेशिया में हमलों के पीड़ितों के लिए प्रार्थना की और इस तरह की हिंसा के अंत के लिए प्रार्थनाओं की मांग की।

पोप फ्रांसिस ने इंडोनेशिया के प्रिय लोगों को विशेष रूप से सुराबिया शहर के ख्रीस्तीयों को आश्वासन दिया कि वे रविवार को हुए घातक हमलों के पीड़ितों के प्रति अपना सामीप्य प्रदान करते हैं। संत पापा पीडितों और उनके परिजनों के लिए प्रार्थना की।

इंडोनेशिया के दूसरे सबसे बड़े शहर सुराबाया के तीन गिरजाघरों में हुए आत्मघाती हमले में 13 लोगों की मौत हो गई है और 40 से ज्यादा लोग घायल हो गये हैं। साल 2005 के बाद इंडोनेशिया में हुआ अब तक का सबसे बड़ा हमला है।

संत पापा ने कहा,“आइये हम एक साथ शांतिदाता ईश्वर से प्रार्थना करें जिससे कि वे अस तरह हिंसक कृत्यों को समाप्त कर दे। सभी के दिलों में, नफरत और हिंसा के स्थान पर सुलह और बंधुता की भावनाओं के लिए जगह मिले।”

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ कुछ क्षण मौन प्रार्थना की। उसके बाद उन्होंने प्रणाम मरिया प्रार्थना की अगुवाई की।

बीबीसी के अनुसार पुलिस का कहना है कि ये धमाके स्थानीय समयानुसार रविवार को सुबह के साढ़े सात बजे कुछ ही मिनटों के दरमियान हुए।

कथित चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है. पुलिस प्रमुख टीटो कार्नावियन ने बताया है कि इन आत्मघाती बम हमले के पीछे एक ही परिवार के सदस्यों का हाथ है। उन्होंने बताया, “एक गिरजाघर में मां ने अपने दो बच्चों के साथ खुद को धमाके से उड़ा लिया जबकि पिता और अन्य तीन बच्चों ने दूसरी जगहों पर हमला किया।”

हाल के दिनों में इंडोनेशिया में इस्लामी चरमपंथ फिर से उभरता हुआ दिख रहा है।

देश के राष्ट्रपति जोको विडीडो ने घटनास्थल का दौरा किया जिसके बाद उन्होंने हमले को “निर्मम” बताया। उन्होंने पुलिस को “मामले की जांच करने और हमलावरों के नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने” का आदेश दिया है।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्रांसिस यौन दुराचार के संदर्भ में चिली धर्माध्यक्षों के साथ मुलाकात करेंगे

In Church on May 14, 2018 at 3:03 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 14 मई 2018 (वीआर,रेई) : संत पापा फ्रांसिस वाटिकन में चिली के धर्माध्यक्षों के साथ मुलाकात करेंगे, जिन्होंने याजकों द्वारा यौन दुर्व्यवहार घोटाले की बारीकी से जांच पड़ताल करने के लिए सभा का आयोजन किया है।

वाटिकन प्रेस कार्यालय ने शनिवार को एक बयान जारी किया कि संत पापा फ्राँसिस चिली के धर्माध्यक्षों के 15 से 17 मई तक हो रहे सभा में उपस्थित रहेंगे, ताकि चिली में याजकों द्वारा यौन शोषण के पीड़ितों के खिलाफ चूक, साथ ही कुछ मामलों को छिपाने के कारणों और परिणामों का गहराई से जांच हो सके।

संत पापा फ्राँसिस माल्टा के महाधर्माध्यक्ष चार्ल्स स्किकलुना की अध्यक्षता में चिली के यौन दुर्व्यवहार घोटाले की 2 सदस्यीय तथ्य-खोज मिशन के बाद अपने व्यक्तिगत निष्कर्षों को साझा करेंगे और हाल के सप्ताहों में संत पापा को प्राप्त होने वाले कई लिखित और मौखिक साक्ष्य को भी साझा करेंगे।

पर्याप्त स्थायी परिवर्तन

संत पापा फ्राँसिस धर्माध्यक्षों की मंडली के प्रीफेक्ट कार्डिनल मार्क ओउलेट के साथ मिलकर, चिली के 33 धर्माध्यक्षों सहित दो सेवानिवृत्त धर्माध्यक्षों की बैठकों का सभापतित्व करेंगे। वाटिकन प्रेस कार्यालय ने कहा, “इस लंबी धर्मसभा  प्रक्रिया’ का उद्देश्य ईश्वर की उपस्थिति में, इन विनाशकारी घावों के लिए हम में से प्रत्येक की ज़िम्मेदारी, तथा पर्याप्त और स्थायी परिवर्तनों का एक साथ अध्ययन करना और समझना है जिससे इन ग़लत कृत्यों को दोहराए जाने से रोका जा सके। ”

“अच्छे पुरोहितों के माध्यम से कलीसिया के प्रति विश्वास बहाल करना मौलिक है, जो अपने जीवन द्वारा भले चरवाहे का साक्ष्य देते हैं और यौन शोषण के पीड़ितों के प्रति सहानुभूति रखना जानते हैं साथ ही इस दुर्व्यवहार की रोकथान के लिए एक दृढ़ और कठोर कदम उठाना जानते हैं।”

विज्ञप्ति में कहा गया कि संत पापा धर्माध्यक्षों से पवित्र आत्मा के प्रति उनकी विनम्रता के लिए धन्यवाद देते हुए, चिली के सभी विश्वासियों से अनुरोध किया है कि वे इन दिनों कलीसिया को नवीनीकृत करने के लिए प्रार्थना जारी रखें।


(Margaret Sumita Minj)

भारत के कई राज्यों में रविवार को तेज़ हवाओं का क़हर, 71 लोगों की मौत

In Church on May 14, 2018 at 3:00 pm

नई दिल्ली, सोमवार 14 मई 2018 (एशिया न्यूज) : भारत की राजधानी दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में रविवार शाम चली तेज़ हवाओं और बिजली गिरने के कारण कम से कम 71 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली और आसपास के इलाक़ों में रविवार शाम 109 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ़्तार से हवाएं चलीं।

हवाओं के असर से सैंकड़ों पेड़ और बिजली के खंबे उखड़ गए। इससे सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ था।

राजधानी दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश में मृतकों की संख्या कम से कम 134 और 400 से आधिक घायल हो गये हैं। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 80 लोगों के मारा जाने की खबर मिली है।

आंध्र प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तेज़ हवाओं और बिजली गिरने की वजह से अब तक 12 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। ये संख्या बढ़ भी सकती है।

रविवार को आए तूफ़ान से पहले मौसम विभाग ने एक अलर्ट जारी किया था। बारिश, धूल और रेत तूफान अब अपने दसवें दिन में था। लगभग 109 किमी/घंटा की हवाएं घरों की छतों, पेड़ों को उखाड़ फेंकने और काफी अन्य असुविधा का कारण बना। उड़ानें राजधानी से दूसरे हवाई अड्डों में बदल दी गईं। उत्तर प्रदेश के संभाल जिले के राजपुरा क्षेत्र में बिजली ने लगभग 100 घरों को जला दिया। जबकि सड़कों पर गिरने वाले 70 पेड़ों के कारण शहर यातायात में बड़ी कठिनाई हो रही है।

भारतीय मौसम विभाग ने रविवार को राजधानी दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तेज़ हवाएं चलने और बारिश होने की चेतावनी दी गई थी और लोगों से यातायात न करने और अपने घरों के भीतर या सुरक्षित स्थानों पर रहने के लिए कहा था।

पिछले कुछ दिनों में भारतीय धर्माध्यक्षों ने संदेश में पीड़ितों और घायलों की सहायता और एकजुटता के लिए ख्रीस्तीयों और भले लोगों से आग्रह किया है।

बीबीसी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंधी और तूफ़ान की वजह से लोगों की मौत पर दुख़ ज़ाहिर करते हुए ट्विटर पर लिखा, “देश के कुछ हिस्सों में तूफ़ान की वजह से हुई जनहानि से दुखी हूँ। प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदनाएं। मैं घायल लोगों के शीघ्र स्वास्थ्यलाभ की कामना करता हूँ। अधिकारियों से प्रभावित लोगों को हर संभव मदद मुहैया कराने के लिए कहा गया है।”


(Margaret Sumita Minj)

केन्या के धर्माध्यक्षों ने नेकुरु-सोलाई बांध त्रासदी के परिवारों को सांत्वना दी

In Church on May 14, 2018 at 2:59 pm

नैरोबी, सोमवार 14 मई 2018 (रेई) : न्याय और शांति आयोग के माध्यम से केन्या के धर्माध्यक्षों ने बाढ़ से प्रभावित परिवारों की मौत और विनाश पर गहरा दुःख व्यक्त किया।

कहा जाता है कि पिछले हफ्ते बुधवार की रात को राजधानी नैरोबी के उत्तर-पश्चिम में 190 किमी दूर सोलाई में पटेल बांध की दीवारों के टूटने की वजह से 70 मिलियन लीटर पानी बह जाने से एक पूरा गांव चपेट में आ गया। इससे 45 लोगों ने अपनी जिंदगी खो दी है,और सैकड़ों परिवारों को विस्थापित कर दिया गया है।

त्रासदी ने सोलाई के छोटे शहर को घरों, स्कूलों और व्यवसायों को व्यापक नुकसान पहुँचाया। पटेल बांध केन्या कृषि व्यवसाय और आयोडीनयुक्त नमक निर्माता पेरी मनसुखलाल कंसग्रा के स्वामित्व वाले तीन जल जलाशयों में से एक है। सरकारी इंजीनियरों ने शुक्रवार को दो अन्य बांधों को सूखा दिया। उन्होंने कहा कि निवासियों के लिए इसी तरह के खतरे पैदा हो सकते हैं।

धर्माध्यक्ष इस त्रासदी से बहुत दुखी हैं

केन्या काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के न्याय और शांति आयोग के अध्यक्ष नेगोंग धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष जॉन ओबाला ओवा ने मीडिया से कहा,“न्याय और शांति आयोग के माध्यम से केन्या के धर्माध्यक्षों ने बाढ़ से प्रभावित परिवारों की मौत और विनाश पर गहरा दुःख व्यक्त किया।नकुरु-सोलाई बांध त्रासदी सबसे बुरी और चौंकाने वाला था। हम मुरंगा, किलीफ़ी, लामू, नारोक, ताना नदी से प्रभावित लोगों के प्रति हमारी हार्दिक संवेदना प्रकट करते हैं। हम देश भर में घायल और बड़े पैमाने पर विनाश के नुकसान से बहुत दुखी हैं।”


(Margaret Sumita Minj)

स्वर्गारोहण महापर्व पर संत पापा का संदेश

In Church on May 14, 2018 at 2:58 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 14 मई 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 13 मई को, प्रभु के स्वर्गारोहण महापर्व के अवसर पर, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया। स्वर्ग की रानी के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

“आज, इटली में तथा कई अन्य देशों में, प्रभु के स्वर्गारोहण का महापर्व मनाया जाता है। इस पर्व में दो बातें हैं, एक ओर यह हमारी नजर को स्वर्ग की ओर उठाता है जहाँ महिमान्वित येसु ईश्वर की दाहिनी ओर बैठे हैं और दूसरी ओर, यह हमें कलीसिया के मिशन की शुरूआत की याद दिलाता है, क्यों? क्योंकि येसु जो, जी उठे तथा स्वर्ग चढ़े, अपने शिष्यों को सुसमाचार प्रचार हेतु दुनिया में भेजा। इसलिए स्वर्गारोहन हमें प्रेरित करता है कि हम आकाश की ओर देखें और उसके तुरन्त बाद धरती की ओर नजर लगायें, उस कार्य को आगे बढ़ायें जिसे पुनर्जीवित ख्रीस्त ने हमें प्रदान किया है।”

संत पापा ने कहा, “यही करने के लिए, आज का सुसमाचार पाठ हमें निमंत्रण देता है जिसमें शिष्यों को येसु द्वारा मिशन सौंपे जाने के तुरन्त बाद, स्वर्गारोहन की घटना घटी। यह एक सीमा रहित मिशन है शाब्दिक अर्थ में घेरे के बिना जो मानवीय शक्तियों से परे है। येसु कहते हैं, “संसार के कोने-काने में जाकर सारी सृष्टि को सुसमाचार सुनाओ।” (मार. 16:15) यह सचमुच एक साहसिक काम था जिसको येसु ने साधारण एवं बौद्धिक क्षमता से रहित एक छोटे दल के लिए सौंपा था। यह एक विरल समुदाय था, जो दुनिया की ताकतों के लिए अप्रासंगिक था, येसु के प्रेम और करूणा के संदेश को दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचाने के लिए भेजा गया किन्तु ईश्वर की यह योजना, केवल एक शक्ति के सहारे हासिल की जा सकती थी जिसको ईश्वर ने स्वयं प्रेरितों को प्रदान किया। येसु ने आश्वासन दिया कि उनका मिशन पवित्र आत्मा के द्वारा पोषित किया जाएगा, अतः वे कहते हैं, “पवित्र आत्मा तुम लोगों पर उतरेगा और तुम्हें सामर्थ्य प्रदान करेगा और तुम लोग येरुसालेम, सारी यहूदिया और सामरिया में तथा पृथ्वी के अन्तिम छोर तक मेरे साक्षी होंगे।” (प्रे.च. 1: 8) इस तरह यह मिशन सच हुआ और प्रेरित इस कार्य को करने लगे जो बाद में उनके उत्तराधिकारियों द्वारा जारी रहा। मिशन जो येसु द्वारा उनके शिष्यों को सौंपा गया था वह सदियों तक चलता रहा और आज भी जारी है एवं हम सभी के सहयोग की मांग करता है। वास्तव में, हम प्रत्येक जन जिन्होंने बपतिस्मा प्राप्त किया है यह हमें सशक्त करता एवं सुसमाचार प्रचार हेतु हमसे मिशनरी बनने की अपील करता है।

प्रभु का स्वर्गारोहन जो हमारे बीच प्रभु की उपस्थिति के एक नये रूप का उद्घाटन है हमें उनसे मुलाकात करने के लिए आँख एवं हृदय की मांग करता है, उनकी सेवा करने तथा दूसरों के बीच उनका साक्ष्य देने की मांग करता है। यह स्वर्गारोहन के व्यक्ति बनना है अर्थात् हमारे समय के सभी रास्तों पर ख्रीस्त की खोज करना, उनकी मुक्ति के संदेश को दुनिया के कोने-कोने तक ले जाना। इस यात्रा में हम भाई–बहनों में स्वयं येसु से मुलाकात करते हैं, विशेषकर, गरीबों एवं पीड़ितों में। आरम्भ में जिसतरह, पुनर्जीवित ख्रीस्त ने शिष्यों को पवित्र आत्मा की शक्ति के साथ भेजा, उसी तरह वे आज हम सबों को उसी शक्ति के साथ भेजते हैं, ताकि हम आशा के ठोस एवं दृश्यमान चिन्ह प्रकट कर सकें क्योंकि येसु हमें आशा प्रदान करते हैं। वे स्वर्ग गये और उन्होंने हमारे लिए भी स्वर्ग एवं आशा का द्वार खोल दिया है।

धन्य कुँवारी मरियम जो प्रभु की माता हैं जिन्होंने शिष्यों के प्रथम समुदाय के विश्वास को प्रेरित किया, हमारे हृदयों को भी ऊपर उठाने में मदद करे जैसा कि धर्मविधि में कहा जाता है और साथ ही साथ, हमारे पाँवों को धरती पर रखने एवं साहस के साथ जीवन की परिस्थितियों एवं इतिहास में सुसमाचार के बीज को बोने हेतु सहायता प्रदान करे।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

स्वर्ग की रानी प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने विभिन्न सूचनाएँ जारी की। उन्होंने इंडोनेशिया के ख्रीस्तीय समुदाय को अपना आध्यात्मिक सामीप्य प्रदान प्रदान करते हुए उनके लिए प्रार्थना अर्पित की जहाँ गिरजाघरों में आतंकी हमले हुए हैं।

संत पापा ने विश्व संचार दिवस पर सभी पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा, “आज विश्व संचार दिवस है जिसकी विषयवस्तु है,”नकली समाचार और शांति हेतु पत्रकारिता”। मैं सभी मीडिया कर्मियों का अभिवादन करता हूँ, विशेषकर, वे पत्रकार जो समाचार की सच्चाई को खोजने के लिए समर्पित हैं तथा न्याय एवं शांतिपूर्ण समाज को सहयोग देते हैं।”

इसके बाद संत पापा ने रोम तथा विश्व के विभिन्न देशों से आये तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया, खासकर, जर्मनी के संगीतकार एवं लोक समूह, रोम में पाराग्वे के विश्वासी तथा नेपल्स में स्थापित ‘करूणा के धनी’ आंदोलन के संस्थापक जुस्वाल्दो नोसेनगो की मृत्यु के 50 साल बाद यू सी आई ई एम सम्मेलन के प्रतिभागियों का।

संत पापा ने कतानिया, स्कानदिची, संत फेरदीनान्दो दी पुलिया एवं संत मारज़ानो सुल सारनो, जेनोवा के युवाओं, रोम के संत जुस्तिनो पल्ली के बच्चों तथा मिसत्रेत्ता के तोम्मासो अविरसा के विद्यार्थियों का अभिवादन किया।

उन्होंने ‘संघीय एक्सप्रेस यूरोप’ के कर्मचारियों का भी अभिवादन किया एवं उनके लिए कामना की कि उनके बीच जो समस्या है उसका सकारात्मक समाधान मिल सके।

संत पापा ने त्रेनतो में राष्ट्रीय सभा के लिए एकत्रित अलपिनी इताली सैनिकों की याद कर उन्हें उदारता एवं शांति के साक्षी बनने का प्रोत्साहन दिया। उन्होंने विश्व माता दिवस के उपलक्ष्य में सभी माताओं को ताली बजाकर सम्मानित किया और कहा, “आज मैं सभी माताओं का अभिवादन करता हूँ परिवार की देखभाल करने के लिए उन्हें धन्यवाद देता हूँ।” संत पापा ने स्वर्गीय माताओं की भी याद की जो हमें स्वर्ग से निहारते एवं अपनी प्रार्थनाओं द्वारा निरंतर हमारी रक्षा करते हैं। स्वर्ग की माता मरियम जिन्हें 13 मई को फातिमा की माता मरियम के रूप में याद की जाती है संत पापा ने प्रार्थना की कि वे हमें जीवन यात्रा में मदद करती रहें।

अंत में उन्होंने प्रार्थना का आग्रह करते हुए सभी को शुभ रविवार की मंगलकामनाएँ अर्पित की।


(Usha Tirkey)

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