Vatican Radio HIndi

Archive for May 16th, 2018|Daily archive page

बपतिस्मा संस्कार, ख्रीस्त के वस्त्र धारण करना

In Church on May 16, 2018 at 3:17 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 16  मई 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को बपतिस्मा संस्कार पर अपनी धर्मशिक्षा देते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

आज हम बपतिस्मा पर शुरू की गई अपनी धर्मशिक्षा माला का समापन करेंगे। इस संस्कार के आध्यात्मिक प्रभाव हमारी अपनी आंखों के लिए अदृश्य हैं लेकिन यह उनके हृदयों में कार्यशील होता जो इसके द्वारा नये जीवन को प्राप्त करते हैं। हम इसे प्रत्यक्ष रुप में सफेद वस्त्र और जलती हुई मोमबत्ती के रुप में देख सकते हैं जो इस संस्कार की धर्मविधि के दौरान दीक्षार्थियों को दी जाती है। ये दो निशानियां हमारे लिए बपतिस्मा प्राप्त व्यक्ति के सम्मान और ख्रीस्तीय बुलाहट को दिखलाती है जिसे संत पौलुस कहते हैं, “जितने लोगों ने मसीह का बपतिस्मा ग्रहण किया, उन्होंने मसीह को धारण किया है।” (गला.3,27, रोमि. 13,14)

संत पापा ने कहा कि बपतिस्मा के बाद हम एक नवीन स्वभाव को धारण करते हैं जिसकी सृष्टि ईश्वर के अनुसार होती है जो धार्मिकता और सच्ची पवित्रता में व्यक्त होती है।(ऐफि. 4.24) प्राचीन काल से बपतिस्मा प्राप्त वाले अपने में नये वस्त्र धारण करते थे जो स्वाभाविक रुप में जीवन की नवीनता का प्रतीक होता था। सफेद वस्त्र बपतिस्मा संस्कार में होने वाली बातों को एक चिन्ह के रुप में व्यक्त करता है। यह ईश्वरीय महिमा में हमारे जीवन के रुपानंतर को घोषित करता है। इस वस्त्र को लाने की आज्ञा हमें इसे “अनंत जीवन तक दूषित होने से” बचाये रखने की मांग करती है। वास्तव में प्रकाशाना ग्रंथ इसकी चर्चा करते हुए कहता है,“विजयी इस प्रकार उजले वस्त्र धारण करेगा।”(प्रका.3.5)

अपने में ईश्वरीय वस्त्र धारण करने का अर्थ क्या है। संत पौलुस इसकी चर्चा करते हुए कहते हैं “आप लोग ईश्वर की पवित्र एवं परम प्रिय चुनी हुई प्रजा हैं। इसलिए आप लोगों को अनुकम्पा, सहानुभूति, विनम्रता, कोमलता और सहनशीलता धारण करनी चाहिए। आप एक-दूसरे को सहन करें और यदि किसी को किसी से कोई शिकायत हो, तो एक दूसरे को क्षमा करें। प्रभु ने आप लोगों को क्षमा कर दिया है आप लोग भी ऐसा ही करें। इसके अतिरिक्त, आपस में प्रेम-भाव बनाये रखें। वह सब कुछ एकता में बांध कर पूर्णता तक पहुँचा देता है।” (कलो.3.12-14)

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि पास्का मोमबत्ती की लौ से प्रज्जवलित की गई मोमबत्तियाँ हमें बपतिस्मा के प्रभाव की याद दिलाती हैं, “प्रभु की ज्योति को ग्रहण कीजिए।” ये वचन हमें इस बात की याद दिलाते हैं कि हम ज्योति नहीं है वरन प्रभु येसु ख्रीस्त हमारी ज्योति हैं।(यो.1.9.46) वे मृतकों में से जी उठकर बुराई के अंधकार में विजयी हुए हैं। हम अपने को उनके दिव्य प्रकाश से आलोकित होने दें। पास्का मोमबत्ती जिस भांति हरएक मोमबत्ती को आलोकित करती है उसी भांति पुनर्जीवित प्रभु का प्रेम हर बपतिस्मा प्राप्त व्यक्ति के हृदय को अपनी ज्योति और ताप से भर देता है। प्राचीन काल में बपतिस्मा संस्कार “आलौकिक” कहलाती थी और दीक्षार्थियों को “प्रबुद्ध”   कहा जाता था। येसु स्वयं इसे अपने शब्दों में कहते हैं,“संसार की ज्योति मैं हूँ, जो मेरा अनुसरण करता है वह अंधकार में भटकता नहीं रहेगा। उसे जीवन की ज्योति प्राप्त होगी।” (यो.8.12)

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि यह वास्तव में ख्रीस्तीय बुलाहट है,“जहाँ हम ईश्वर की संतान स्वरुप ज्योति में चलते, अपने विश्वास में बने रहते हैं।” बच्चों के संबंध में, यह माता-पिता और दादा-दादियों का उत्तरदायित्व है जो बच्चों में बपतिस्मा की कृपा को ज्योति स्वरुप प्रज्जवलित करने और उन्हें विश्वास में मजबूत बनाने हेतु बुलाये जाते हैं। “ख्रीस्तीय जीवन की शिक्षा बच्चों का अधिकार है, यह उन्हें ईश्वर की योजना को अपने जीवन में देखने और जानने हेतु मदद करने की मांग करता है, जिससे वे अपने जीवन में विश्वास को व्यक्तिगत रुप से मजबूत कर सकें जिसे उन्होंने बपतिस्मा संस्कार में प्राप्त किया है।”

संत पापा ने कहा कि येसु ख्रीस्त की उपस्थिति को हमारे जीवन में सुरक्षित रखते हुए उसे विकसित करने की जरुरत है। यह वह ज्योति है जो हमारा मार्ग प्रशस्त करती, हमारे जीवन में चुनाव को सुगम बनती, तथा येसु से मिलन हेतु हमारे हृदय में एक उत्साह जागृत करती है। इस भांति हम अपने जीवन को उनके लिए खोलते जो हमारे पास अपने जरुरत के समय में आते हैं और यह तबतक होता है जबतक हमारा मिलन ईश्वर से न हो जाये। उस दिन जैसा कि प्रकाशना ग्रंथ हमें कहता है, “वहाँ फिर कभी रात नहीं होगी। उन्हें दीपक या सूर्य के प्रकाश की जरुरत नहीं होगी, क्योंकि प्रभु-ईश्वर उन्हें आलोकित करेंगे और वे युग-युगों तक राज्य करेंगे।” (प्रका, 22.5)

बपतिस्मा की धर्मविधि “हे पिता हमारे प्रार्थना” के द्वारा समाप्त होती है। वास्तव में बपतिस्मा के द्वारा नव जीवन प्राप्त बच्चे दृढ़करण संस्कार में पवित्र आत्मा की कृपा से परिपूर्ण किये जाते और परमप्रसाद संस्कार ग्रहण करते हैं। इस भांति वे कलीसिया में ईश्वर को “पिता” कहने के अर्थ को समझते हैं।

संत पापा फ्रांसिस ने अपनी धर्मशिक्षा के अंत में कहा कि प्रेरितिक पत्र “गाऊदेते एत एसुलताते” में की गई मैं अपनी अपील को आप सभों के समक्ष दुहराता हूँ, “बपतिस्मा में मिली कृपा आप के पवित्र जीवन में फलहित हो। हम ईश्वर के हाथों में सारी चीजों को खुला रखें और सारी बातों में ईश्वर का चुनाव करें। आप हताशा न हो क्योंकि पवित्र आत्मा की शक्ति हमारे साथ है जो सारी चीजों को संभव बनाती है, हमारे जीवन में पवित्रता की कृपा पवित्र आत्मा का वरदान है।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासी समुदाय का अभिवादन किया।

अपनी धर्मशिक्षा के उपरांत विश्वासियों को अपने संबोधन में संत पापा ने येरुसलेम और मध्य पूर्वी क्षेत्रों में युद्ध और हिंसा को लेकर अपनी चिंता जताई। उन्होंने युद्ध और हिंसा में मारे गये लोगों के प्रति अपनी संवेदना अर्पित की और घायलों को अपनी प्रार्थना का सामीप्य प्रदान किया। संत पापा ने कहा कि युद्ध के कारण हम शांति की स्थिति से दूर चले जाते हैं। किसी भी हिंसा के द्वारा हम शांति की स्थापना नहीं कर सकते हैं। उन्होंने युद्ध से पीड़ित लोगों के लिए माता मरिया से विचवाई करते हुए शांति स्थापना हेतु विश्वासी समुदाय संग दूत संवाद प्रार्थना का प्राठ किया।

अंत में संत पापा ने युवाओं, बुजुर्गों, बीमारों और नव विवाहितों की याद की और सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के साथ हे हमारे पिता प्रार्थना का पाठ किया और सबों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।


(Dilip Sanjay Ekka)

Advertisements

बौद्धों, हिंदुओं, जैनों और सिखों के प्रतिनिधिमंडल को संत पापा फ्राँसिस का अभिवादन

In Church on May 16, 2018 at 3:11 pm


वाटिकन सिटी, बुधवार 16 मई 20 वाटिकन सिटी, बुधवार 16 मई 2018 (रेई) : 18 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 16 मई को अपने साप्ताहिक बुधवारीय आमदर्शन समारोह के पहले अपने प्रेरितिक निवास संत मार्था में बौद्धों, हिंदुओं, जैनों और सिखों के 27 प्रतिनिधियों से मुलाकात की जो “एक जटिल युग में धर्म और लोगो – संवाद और सहयोग” सम्मेलन में भाग लेने रोम आये हुए हैं।

वाटिकन में उनका स्वागत करते हुए कहा,“ मैं आप सभी का अभिवादन करता हूँ जिन्होंने कल रोम में आयोजित “एक जटिल युग में धर्म और लोगो – संवाद और सहयोग” सम्मेलन में भाग लिया। मैं आपके उन सभी प्रयासों की सराहना करता हूँ जिन्होंने, ख्रीस्तीयों, हिंदूओं, बौद्धों, जैनों और सिखों को एक साथ लाने की इस पहल को संभव बनाया।”

संत पापा ने संवाद और आपसी सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा,“वर्तमान समय में संवाद और सहयोग बहुत आवश्यक है, जैसा कि हम देखते हैं आज छोटे और बड़े पैमाने पर हिंसा के साथ जटिल और अभूतपूर्व कारकों ने तनाव और संघर्ष में वृद्धि की है। जब धार्मिक नेता सक्रिय रूप से उपयोगी बातचीत का उदाहरण देते हुए और जीवन की सेवा, मानव गरिमा और सृजन की देखभाल में प्रभावी ढंग से मिलकर मुलाकात की संस्कृति को बढ़ावा देते हैं तो इसके लिए हमें ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए।”

संत पापा ने उनके प्रति आभार प्रकट की और उन्हें शुभकामनायें देते हुए कहा,“ आपके समुदायों की अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार हमारी दुनिया में भलाई को बढ़ावा देने के लिए और एक साथ आने के द्वारा आपने जो कार्य शुरु किया है उसके लिए मैं आपको सहृदय धन्यवाद देता हूँ और आपके समुदाय पर दिव्य आशीर्वाद की कामना करता हूँ।” इतना कहने का बाद संत पापा ने उन्हें विदा किया ।


(Margaret Sumita Minj)

थाईलैंड के बौद्ध भिक्षुओं को संत पापा का अभिवादन

In Church on May 16, 2018 at 3:09 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 16 मई 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 16 मई को अपने साप्ताहिक बुधवारीय आमदर्शन समारोह के पहले संत पौल छठे सभागृह में थाईलैंड से आये 54 बौद्ध भिक्षुओं से मुलाकात की।

संत पापा ने वाटिकन में उनका सहृदय स्वागत किया और उन्हें अपने पवित्र पुस्तक के अनमोल उपहार के लिए धन्यवाद दिया जिसे वाट फॉ मंदिर के भिक्षुओं ने आज की भाषा में अनुवाद किया है।

संत पापा ने कहा,“यह आपकी उदारता और दोस्ती का एक वास्तविक और प्रत्यक्ष संकेत है जिसे हमने कई छोटे कदमों से हुई यात्रा में कई सालों से साझा किया है। मुझे लगता है कि वाटिकन में विशेष रूप से धन्य संत पापा पौल छठे और आदरणीय सोमदेज फ्रा वानारात्ना के बीच हुई बैठक, जिनका चित्र आपने अंतर धार्मिक वार्ता हेतु बनी परमधर्मपीठीय परिषद भवन के प्रवेश द्वार में है, आपने इन दिनों देखा होगा।”

संत पापा ने उन्हें शुभकामनायें देते हुए कहा,“मेरी दिली इच्छा है कि बौद्ध और काथलिक आपसी वार्तालाप द्वारा एक-दूसरे के ज्ञान में आगे बढ़ें और अपने आध्यात्मिक परंपराओं के सम्मान में और दुनिया को न्याय, शांति और मानव गरिमा की रक्षा के मूल्यों की गवाही देते रहें।”

इस बैठक के लिए पुनः आभार प्रकट करते हुए संत पापा ने खुशी और शांति का दिव्य आशीर्वाद देते हुए उन्हें विदा किया और बुधवारीय आमदर्शन समारोह के लिए संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगन की ओर प्रस्थान किये।


(Margaret Sumita Minj)

विश्व ख्रीस्तीय परिषद की 70वीं वर्षगांठ पर संत पापा की जिनेवा यात्रा

In Church on May 16, 2018 at 3:06 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 16 मई 2018 (वीआर,रेई) :  21 जून को विश्व ख्रीस्तीय परिषद की 70वीं वर्षगांठ पर संत पापा फ्राँसिस की एतिहासिक जिनेवा यात्रा होगी।

15 मई को जिनेवा में,  संत पापा फ्राँसिस की विश्व ख्रीस्तीय परिषद (डब्ल्यूसीसी) के मुख्यालय की पहली यात्रा को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किया गया था। 110 देशों में 348 कलीसियाओँ से बना दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण परिषद जो अंग्लिकन, एवंजेलिकन और ऑर्थोडोक्स सहित लगभग 500 मिलियन लोगों का प्रतिनिधित्व करता है।

सीईसी के महासचिव, पादरी ओलाव फिक्से टेविट और लोसानो, जिनेवा एवं फ्रिबुर्ग के धर्माध्यक्ष चार्ल्स मोरेरोड ने पत्रकारों के साथ बैठक का संचालन किया।  ख्रीस्तीय एकता के लिए परमधर्मपीठीय परिषद के अध्यक्ष  कार्डिनल कूर्ट कोच  स्वास्थ्य कारणों से मौजूद नहीं हो सके। उनके स्थान पर परमधर्मपीठीय  परिषद के फादर अंद्रेस कोरोमान्सकी ने संत पापा के कार्यक्रम को प्रस्तुत किया।

“साथ चलना, प्रार्थना करना और सहयोग देना”

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि 21 जून के दिन को तीन चरणों में विभाजित किया जाएगा।

पहला चरणः विश्व ख्रीस्तीय परिषद (डब्ल्यूसीसी) का 70वां वर्षगांठ समारोह मनाया जाएगा। सीईसी के महासचिव ओलाफ फिक्से टेविट ने कहा कि इस महत्वपूर्ण मील का पत्थर मनाने के लिए संत पापा फ्राँसिस की मेजबानी करना एक महान सम्मान की बात है। लूथरन पादरी ने इस यात्रा के आदर्श वाक्य “साथ चलना, प्रार्थना करना और सहयोग देना” को समझाया, जिसे सम्मेलन के वार्तालाप में शामिल किया गया है। महासचिव ओलाफ फिक्से टेविट ने इस बात पर जोर देकर कहा कि यूरोप और दुनिया में शांति के संरक्षण के लिए कलीसियाई एकता महत्वपूर्ण है। हम सब जानते हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान क्या हुआ था।

काथलिक कलीसिया धार्मिक और व्यावहारिक कारणों से सीईसी के अंदर नहीं है परंतु फादर अंद्रेस कोरोमान्सकी ने अपनी ओर से  याद दिलाया कि शिक्षा और एकजुटता के क्षेत्र में काथलिक कलीसिया और विश्व कलीसियाई परिषदों के बीच कई आम परियोजनाएँ हैं।

दूसरा चरणः धर्माध्यक्ष चार्ल्स मोरेरोड ने पत्रकारों को बताया कि संत पापा फ्राँसिस स्विटजरलैंड के ख्रीस्तीय समुदाय से मिलेंगे। उन्होंने स्विटजरलैंड को अंतरराष्ट्रीय देश की संज्ञा दी जहाँ विभिन्न काथलिकों और अन्य कलीसियाओं के बीच अच्छा संबंध है। साथ ही वहाँ के लोग शांति हेतु आपसी वार्तालाप के लिए खुले हुए हैं। पालेक्सपो में मनाए गए पवित्र मिस्सा का भी एक सार्वभौमिक महत्व होगा।

तीसरा चरणः स्विस सरकार के तीन सदस्यों के साथ संत पापा फ्रांसिस की बैठक होगी। स्विस सरकार के एक प्रवक्ता के मुताबिक, यह स्विस कन्फेडरेशन और परमघर्मपीठ के बीच उत्कृष्ट राजनयिक संबंध दिखाता है। संत पापा का स्वागत संघ के अध्यक्ष, एलन बर्सेट, संघीय काउंसिलर, इग्नाज़ियो कैसिस और राष्ट्रीय परिषद के अध्यक्ष डोमिनिक डी बुमान करेंगे।

यात्रा का कार्यक्रम

21 जून को संत पापा 10.10 बजे जिनेवा पधारेंगे।

10.30 बजे हवाईअड्डे के एक शाला में संत पापा स्विस कन्फेडरेशन के अध्यक्ष से मुलाकात करेंगे।

11.15 विश्व ख्रीस्तीय परिषद (डब्ल्यूसीसी) के मुख्यालय में प्रार्थना होगी।

दोपहर का भोजन इकुमेनिकल इंस्टीट्यूट ऑफ बोस्से में होगा। इसके बाद संत पापा डब्ल्यूसीसी के मुख्यालय वापस लौटेंगे और वहाँ उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे।

फिर 5.30 बजे जिनेवा में पालेक्सपो में पवित्र युखारीस्तीय समारोह का अनुष्ठान करेंगे जिसमें 40,000 से अधिक विश्वासियों के जमा होना की उम्मीद की जाती है।

तीर्थयात्रा के लिए लोगो

ख्रीस्तीय एकता के परमधर्मपीठीय परिषद से फादर अंद्रेस कोरोमान्सकी  के साथ डब्ल्यूसीसी नेता ने तीर्थयात्रा के लिए लोगो प्रस्तुत किया। एक नाव को मस्तूल के सहारे, लहरों पर चलाया जा रहा है यह उन ख्रीस्तीयों की इच्छा का प्रतीक है जो दुनिया में न्याय और शांति की खोज में एक साथ यात्रा कर रहे हैं।


(Margaret Sumita Minj)

कोर ओरान्स : मठवासी महिलाओं के जीवन के लिए निर्देश

In Church on May 16, 2018 at 3:04 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 16 मई 2018 (वीआर,रेई) : मंगलवार 15 मई को वाटिकन में महिलाओं के मठवासी  जीवन के लिए निर्देश के रुप में एक दस्तावेज प्रस्तुत किया गया।

इस दस्तावेज का शीर्षक है “कोर ओरान” (“प्रार्थना करने वाला दिल”) यह संत पापा फ्राँसिस के 2016 अपोस्टोलिक संविधान – “वल्लुम देई क्वेरेरे” (“ईश्वर के चेहरे की तलाश करें”) काथलिक महिलाओं के प्रार्थना एवं मनन-ध्यान समुदायों को लागू करने के निर्देशों को प्रदान करता है।

इसमें, संत पापा प्रार्थनामय जीवन से  लेकर कार्य आदतों तक 12 विविध क्षेत्रों में परिवर्तनों को लागू करने के लिए कहते है।

“कोर ओरान” को वाटिकन प्रेस कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, धर्मसंघी और धर्मसमाजियों के प्रेरिताई के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के सचिव महाधर्माध्यक्ष होसे रोड्रिगेज कार्बालो और उपसचिव फादर सेबेस्टियानो पासीओला के नेतृत्व में प्रस्तुत किया गया था।

आज दुनिया में लगभग 38,000 मठवासी धर्मबहनें हैं और इसी कारण से नए दस्तावेज़ की सामग्री न केवल मठवासियों के लिए और कलीसिया के लिए बल्कि समाज के लिए भी दिलचस्प है। महाधर्माध्यक्ष रोड्रिगेज कैबलो ने बताया कि दस्तावेज़ का उद्देश्य “कानून के प्रावधानों को स्पष्ट करना, इसके निष्पादन के लिए प्रक्रियाओं को विकसित करना और निर्धारित करना है”।

दस्तावेज धर्मबहनों के लिए मठों की स्थापना और संचालन से संबंधित सभी व्यावहारिक, प्रशासनिक, कानूनी और आध्यात्मिक पहलुओं के बारे में सटीक दिशानिर्देश प्रदान करता है।

इनमें मठों की स्वायत्तता, स्थापना और मठों के निर्माण, उनके हस्तांतरण और अंतिम विघटन, मठों पर कलीसियाई सतर्कता की आवश्यकता, कुछ  प्रश्नों में धर्मप्रांतीय धर्माध्यक्ष के साथ संबंध, बाहरी दुनिया से धर्मबहन को अलग करने के नियम और कानून, “संचार के साधन, “संत पापा के संलग्न पत्र” आदि विस्तृत निर्देश शामिल हैं।


(Margaret Sumita Minj)

चिली के धर्माध्यक्षों के लिए प्रार्थना और मनन-ध्यान करने का समय

In Church on May 16, 2018 at 3:01 pm


वाटिकन सिटी, बुधवार 16 मई 2018 (रेई) : मंगलवार 15 मई अपराहन को वाटिकन के संत पौल छठे सभागृह में संत पापा फ्राँसिस ने चिली के याजकों के यौन दुराचार के संदर्भ में चिली के धर्माध्यक्षों की पहली सभा का संचालन किया। इस सभा में चौंतीस धर्माध्यक्ष उपस्थित थे।

वाटिकन प्रेस कार्यालय के एक बयान के अनुसार, संत पापा ने प्रत्येक धर्माध्यक्ष को मनन करने के लिए विषयों के साथ एक पाठ दिया। धर्माध्यक्षों को अगली बैठक तक के समय को इन विषयों पर विशेष रूप से मनन चिंतन और प्रार्थना में समर्पित करना है।”

विदित हो कि संत पापा ने चिली के याजकों द्वारा यौन दुर्व्यहार एवं कलीसिया के नेताओं की विफलता की खोज पड़ताल करने के लिए इस वर्ष के शुरु में मालटा के महाधर्माध्यक्ष चार्ल्स स्किकलुना और फादर जॉर्डि बर्टोमू फार्नोस को चिली भेजा था। उन्होंने याजकों के दुर्व्यवहार पीड़ितों से मुलाकात की और मुद्दों की खोज पड़ताल कर 2300 पेज का रिपोर्ट संत पापा को सौंपा। इस रिपोर्ट के बाद ही संत पापा ने याजक यौन दुर्व्यवहार के संकट को संबोधित करने के लिए चिली के धर्माध्यक्षों को वाटिकन बुलाया।

संत पापा  फ्राँसिस ने “नम्रतापूर्वक” चिली में “कलीसियाई सहभागिता को फिर से स्थापित करने के लिए छोटे- मध्य और दीर्घकालिक उपायों को समझने हेतु धर्माध्यक्षों के सहयोग और सहायता का अनुरोध किया, जिससे कि जितना संभव हो सके घायल कलीसिया की मरम्मत की जा सके और दुर्व्यवहार पीड़ितों को न्याय मिल सके।

प्रेस कार्यालय के अनुसार अगली सभा बुधवार अपराहन को होगी तथा योजनानुसार बृहस्पतिवार को दो सभा होगी।


(Margaret Sumita Minj)

दया के कार्यों के बिना कोई प्रेम नहीं है,संत पापा फ्रांसिस

In Church on May 16, 2018 at 3:00 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 16 मई 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 16 मई को ट्वीट प्रेषित कर विश्व के सभी लोगों को दया के कार्यों को करने की प्रेरणा दी।

संदेश में उन्होंने लिखा,“दया के कार्यों के बिना कोई प्रेम नहीं है। हमारे भाइयों और बहनों को दी गई सेवा, उनके प्रति प्रेम हमारे दिल से उपजती है।”

यही बात हम संत योहन के पहले पत्र में भी पाते हैं जहाँ संत योहन प्रेम के मर्म को समझाते हैं वे लिखते हैं,“किसी के पास दुनिया की धन-दौलत हो और वह अपने भाई को तंगहाल में देखकर उस पर दया न करे, तो ईश्वर का प्रेम उस में कैसे बना रह सकता है? हम वचन से नहीं कर्म से, मुख से नहीं, हृदय से एक दूसरे को प्यार करें।” (1योहन 3,17-18)


(Margaret Sumita Minj)

%d bloggers like this: