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स्वर्ग की रानी प्रार्थना : ख्रीस्तीय पवित्रता का इतिहास पेंतेकोस्त से शुरू होता है

In Church on May 21, 2018 at 2:57 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार 21 मई 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने पेंतेकोस्ट रविवार को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में एकत्र हुए तीर्थयात्रियों के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ करने से पहले, पवित्र आत्मा, “पवित्रता के श्रोत” पर अपने चिंतन को साझा किया।

संत पापा ने कहा, पेंतेकोस्त के दिन मरिया के साथ येसु के चेले और प्रेरित प्रार्थना में संयुक्त थे उस समय ख्रीस्तीय पवित्रता का इतिहास शुरु हुआ क्योंकि पवित्र आत्मा, “पवित्रता का श्रोत” है।

सभी पवित्र होने के लिए बुलाये गये हैं

हाल ही में जारी किए गए प्रेरितिक उदबोधन ‘गौदेते एत एक्सुलताते’(आनंद मनाओ और हर्षित हो) का उद्धरण देते हुए, संत पापा फ्राँसिस ने हमें याद दिलाया कि “पवित्र आत्मा ईश्वर के पवित्र और विश्वासी लोगों के बीच प्रचुर मात्रा में पवित्रता प्रदान करती है।” (अनुच्छेद, 6) बपतिस्मा और दृढ़करण संस्कार के द्वारा, हम सभी ख्रीस्तीय पवित्रता को जीने के लिए बुलाये गये हैं और अपने पवित्र जीवन से हमारे अंदर के दिव्य जीवन की गवाही देते हैं।

भविष्यवक्ताओं के माध्यम से पवित्रता की योजना की घोषणा

संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि इजेकिएल और जोएल दोनों भविष्यवक्ताओं ने परमेश्वर की योजना की भविष्यवाणी की थी कि सभी पवित्र होंगे। “मैं अपनी आत्मा तुम्हारे अंदर डालूंगा…तुम मेरे लोग होगे। योएल ने भविष्यवाणी की : “मैं अपनी आत्मा को सभी लोगों पर डाल दूंगा। आपके बेटे और बेटियां भविष्यवाणी करेंगे”। संत पापा ने कहा कि ये सभी भविष्यवाणियाँ “येसु मसीह में पूरी हुई।” जो “आत्मा के शाश्वत विस्तार करने का मध्यस्थ और गारंटी देने वाले” हैं। (रोमन मिस्सल, स्वर्गारोहन के बाद का प्रस्तावना)।”

पवित्र आत्मा के प्रति खुला रहना

संत पापा ने कहा, जो लोग “पवित्र आत्मा को अपने जीवन में कार्य करने के लिए में खुद को खुला रखते हैं वे पेंतेकोस्त की पवित्रता के काम को जारी रखते हैं। किसी व्यक्ति के जीवन में पवित्रता का मार्ग स्वयं को “ईश्वर के योग्य जीवन जीने में और खुशी की पूर्णता का अनुभव करने” में प्रकट करता है। पवित्र आत्मा में रहने वाले लोगों में “ईश्वर और पड़ोसी के साथ अपने रिश्ते में परिपक्वता” आ जाती है, जो गलातियों के पत्र में वर्णित उपहारों को प्रकट करता है।(5:22-23)।

पवित्रता के लिए इच्छा

संत पापा ने अपने संदेश के अंत में कहा माता मरियम की मध्यस्थता से कलीसिया के लिए एक नया पेंतेकोस्त होगा। “हमें सुसमाचारी जीवन जीने और गवाही देने का आनंद मिले तथा हम ‘ईश्वर की सर्वोच महिमा के लिए संत बनने के लिए उत्सुक लालसा’ के साथ जुड़ सकें।” (गौदेते एत एक्सुलताते, 177)

इतना कहने के बाद संत पापा ने स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया।

विश्व मिशन रविवार के लिए संदेश

संत पापा ने वहाँ उपस्थित तीर्थयात्रियों के विशिष्ट समूहों का अभिवादन करने से पहले विश्व मिशन रविवार के लिए संदेश के प्रकाशित होने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने पवित्र बालकपन संगठन के काम के लिए अपनी प्रशंसा व्यक्त की, जिसे मिशनरी बालकपन संगठन भी कहा जाता है, जो इस वर्ष अपनी 175 वीं वर्षगांठ मना रहा है। उन्होंने “दुनिया भर में सुसमाचार को फैलाने में अपना योगदान देने के लिए सभी बच्चों को धन्यवाद और इसे जारी रखने हेतु प्रोत्साहित किया।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस का ट्वीट संदेश

In Church on May 21, 2018 at 2:55 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 21 मई 2018 (रेई) : काथलिक कलीसिया प्रभु येसु के जी उठने के पचासवें दिन पेंतेकोस्त का महोत्सव मनाती है। संत पापा फ्राँसिस ने 20 मई पेंतेकोस्त रविवार के दिन पवित्र आत्मा से कलीसिया को पुनः संभालने और नवीनीकृत करने के लिए प्रार्थना की।

संदेश में उन्होंने लिखा,“कलीसिया को बनाये रखने वाले पवित्र आत्मा आप एक बार फिर से हमारे पास आइये, हमारे दिल को नया बनाइये, हमें एकता में रहना सिखाइये और जैसा येसु ने हमें प्यार करना सिखाया है वैसे ही प्रेम करने में हमारी मदद कीजिए।”

पेंतेकोस्त मनाने के बाद कलीसिया सामान्य धर्मविधि पंचाग में प्रवेश करती है। संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 21 मई को ट्वीट प्रेषित कर सभी ख्रीस्तीयों को अपने दैनिक जीवन में ईश्वर की योजना के प्रति अपना योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

संदेश में उन्होंने लिखा,“ईश्वर को उन लोगों की जरुरत है जो उनकी दया और क्षमा को इस दुनिया में लाते हैं।”


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस ने चौदह नए कार्डिनलों के नाम की घोषणा की

In Church on May 21, 2018 at 2:53 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 21 मई 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 20 मई को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में स्वर्ग की रानी प्रार्थना के लिए जमा तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को 29 जून को कार्डिनल मंडल में नये कार्डिनलों को शामिल करेंगे।

संत पापा ने नये कार्डिनलों के नामों की घोषणा में गौर किया कि जिन स्थानों से नए कार्डिनल आते हैं, वे “कलीसिया की सार्वभौमिकता को व्यक्त करते हैं, जो पृथ्वी पर सभी पुरुषों और महिलाओं के लिए ईश्वर के दया और प्रेम की घोषणा को जारी रखता है।”

कलीसिया की सार्वभौमिकता

संत पापा से जो धर्माध्यक्ष लाल टोपी प्राप्त करेंगे वे इराक, पाकिस्तान, पुर्तगाल, पेरू, मडागास्कर, इटली और जापान देश से हैं।

सूची में पोलैंड के महाधर्माध्यक्ष कोनार्ड क्रेजेस्की का नाम है जो रोम में संत पापा के उदार कार्यों के कार्यालय के प्रमुख के रुप में कार्यरत हैं। सूची में तीन इटालियन धर्माध्यक्षों के नाम भी हैं रोम धर्मप्रांत के विकर जेनरल आंजेलो दे दोनातिस,महाधर्माध्यक्ष लुईस लादारिया और मोन्सिन्योर जोवान्नी बेच्चु हैं। संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि उनका नामांकन “दुनिया भर में संत पेत्रुस के उतराधिकारी और स्थानीय कलीसियाओं के बीच अटूट बंधन को प्रकट करता है”।

साथ ही फ्रांसिस ने मेक्सिको के एक सेवानिवृत्त महाधर्माध्यक्ष, बोलिविया के एक सेवानिवृत्त धर्माध्यक्ष और क्लारिस्ट धर्मसमाज के एक पुरोहित को कार्डिनल मंडल में शामिल किया। संत पापा ने कहा कि “कलीसिया में अपनी सेवा में अपने बड़े योगदान देने के लिए वे जाने जाते हैं।”

नए कार्डिनल के नाम इस प्रकार हैं:

बाबुल (इराक) के खलदेई काथलिक कलीसिया के प्रमुख, प्राधिधर्माध्यक्ष लुई राफेल साको

विश्वास एवं धर्म सिद्धांत के लिए गठित धर्मसंघ के अध्यक्ष, महाधर्माध्यक्ष लुईस लदारिया

रोम के विकर जेनरल मोन्सिन्योर अंजेलो दे दोनातिस

माल्टा के सैन्य आदेश के लिए राज्य सचिव और विशेष प्रतिनिधिमंडल के विकल्प महाधर्माध्यक्ष जोवान्नी आंजेलो बेच्चु

संत पापा के उदार कार्यों के कार्यालय के प्रमुख महाधर्माध्यक्ष कोनराड क्रेजेस्की

करांची (पाकिस्तान) के महाधर्माध्यक्ष जोसेफ काउट्स

लेइरिया-फातिमा (पुर्तगाल) के धर्माध्यक्ष अंतोनियो डॉस सैंटोस मार्टो

हुआकायो (पेरु) के महाधर्माध्यक्ष पेड्रो बैरेटो

तोमासीना(मडागास्कर) के महाधर्माध्यक्ष देसीरे त्साराहाजाना

अक्विला (इटली) के महाधर्माध्यक्ष जुसेप्पो पेद्रोची

ओसाका (जापान) के  महाधर्माध्यक्ष थॉमस एक्विनास मोनो

जलापा (मेक्सिको) के सेवानिवृत महाधर्माध्यक्ष सरजो ओबेसो रिवेरा

कोरोकोरो (बोलिविया) के सेवानिवृत धर्माध्यक्ष तोरबियो तिकोना पोरको

क्लारेशियन धर्मसमाज के फादर एक्विलिनो बोकोस मेरिनो


(Margaret Sumita Minj)

मध्य पूर्व और वेनेज़ुएला में शांति के लिए संत पापा ने की अपील

In Church on May 21, 2018 at 2:52 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 21 मई 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 20 मई को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में जमा तीर्थयात्रियों और विश्वासियों के साथ स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ करने के उपरांत मध्य पूर्व और वेनेज़ुएला में शांति के लिए प्रार्थना की अपील की।

संत पापा ने कहा, पेंतेकोस्त हमें येरुसालेम के केंद्र में ले जाता है। उन्होंने कहा कि येरुसालेम में शांति के लिए आयोजित पेंतेकोस्त जागरण प्रार्थना में उन्होंने आध्यात्मिक रुप से भाग लिया। संत पापा ने कहा, “आइए, आज भी हम प्रार्थना करना जारी रखें।”  संत पापा ने वहाँ एकत्रित सभी लोगों को प्रार्थना के लिए आमंत्रित किया, कि पवित्र आत्मा, पवित्र भूमि और पूरे मध्य पूर्व में बातचीत और सुलह की इच्छा को जन्म दे सके।”

प्रिय वेनेजुएला

संत पापा फ्रांसिस ने फिर प्रिय वेनेजुएला की ओर अपने विचार प्रकट करते हुए वेनेजुएला के लिए प्रार्थना की कि पवित्र आत्मा वेनेजुएला के सभी लोगों को “शांति और एकता के मार्ग को खोजने का ज्ञान” दे। उन्होंने शनिवार की रात को जेल दंगा के दौरान मरने वाले कैदियों के लिए प्रार्थना की।


(Margaret Sumita Minj)

विश्व मिशन रविवार 2018 के लिए संत पापा फ्राँसिस का संदेश

In Church on May 21, 2018 at 2:50 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार 21 मई 2018 (रेई) : 19 मई को जारी किए गए अपने संदेश में, संत पापा फ्राँसिस ने युवाओं को सुसमाचार प्रचार के लिए कलीसिया का साथ देने का आग्रह किया।

शनिवार को वाटिकन ने इस साल के विश्व मिशन रविवार के लिए संत पापा फ्राँसिस का संदेश जारी किया, जिसमें संत पापा ने युवा पुरुषों और महिलाओं को आमंत्रित किया है जो मसीह की खोज करते हुए अपने बुलाहट में दृढ़ रहना चाहते हैं और उनका अनुसरण करना चाहते हैं।

काथलिक कलीसिया द्वारा हर साल अक्टूबर के अंतिम रविवार के पहले आने वाले रविवार को मनाया जाता है, 2018 में विश्व मिशन रविवार 21 अक्टूबर को पड़ता है। 1926 में संत पापा पियुस ग्यारहवें ने इसे स्थापित किया था। इस दिन कलीसिया के मिशनरी कार्यों को याद करते हुए इस मिशन में कार्यरत ख्रीस्तीयों के लिए प्रार्थनायें और मिशन के लिए मदद रकम जमा की जाती है।

इस साल के विश्व मिशन रविवार का विषय है, “युवा लोगों के साथ, आइये, हम सभी के पास सुसमाचार पहुँचायें,” यह विषय वाटिकन में 3 से 28 अक्टूबर तक आयोजित धर्माध्यक्षों के धर्मसभा के विषय से मेल खाता है। आगामी धर्मसभा का विषय है,”युवा लोग, विश्वास और बुलाहटीय आत्म-परख”

संत पापा ने सभी ख्रीस्तीयों को विशेष कर युवाओं को संबोधित कर याद दिलाया कि “हम सब इस दुनिया में अपनी इच्छा से नहीं आये हैं। इस दुनिया में आने के लिए एक विशेष योजना है और उस योजना या मिशन को पूरा करने के लिए हमारा अस्तित्व बना है। हम में से प्रत्येक को कहना है कि “मैं इस धरती पर एक मिशन हूँ और इसी कारण से मैं हम इस दुनिया में हूँ।” संत पापा कहते हैं कि  वास्तव में, “हर पुरुष और महिला एक मिशन है।”

अपने संदेश में, संत पापा ने युवाओं से आग्रह किया कि वे मसीह और उसकी कलीसिया से डरें न, क्योंकि कलीसिया ही वह जगह है जहां हमें अपने जीवन को खुशी से भरने का खजाना मिलता है।”

अपने अनुभव को साझा करते हुए संत पापा ने कहा कि विश्वास के माध्यम से उन्हें अपने सपने को मूर्त रुप से महसूस करने और साकार करने की ताकत मिली। संदेश को जारी रखते हुए संत पापा ने कहा, “जो लोग येसु के साथ हैं, उनके लिए “बुराई और भी अधिक प्यार करने हेतु एक प्रोत्साहन है, “क्योंकि येसु के क्रूस द्वारा हम आत्म-बलिदान के दिव्य तर्क को दुनिया में सुसमाचार की घोषणा के रूप में सीखते हैं। संत पापा युवाओं को आत्म परख के लिए अपने आप से एक प्रश्न करने को कहते हैं। “मेरे स्थान में येसु होता तो वह क्या करता?”

विश्वास को हस्तांतरित करना

संत पापा ने कहा कि बपतिस्मा द्वारा सभी ख्रीस्तीयों को सुसमाचार प्रचार करने का मिशन प्राप्त हुआ है। युवा लोग भी गवाहों की उस महान धारा के हिस्सा हैं, जिसमें बुजुर्ग लोग अपने ज्ञान और अनुभव द्वारा युवाओं के लिए गवाह और प्रोत्साहन बनते हैं। इस तरह, कलीसिया का मिशन पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है।

संक्रामक प्यार

उन्होने कहा कि कलीसिया के मिशन के केंद्र में, प्यार की संक्रामकता है, जहां खुशी और उत्साह जीवन को एक नया अर्थ और पूर्ति की अभिव्यक्ति देता है। संत पापा कहते हैं, विश्वास के प्रसार में, “आकर्षण” प्यार के प्रति खुले दिल की मांग करता है। यह “उपनगरीय बाहरी इलाकों” में भी वार्तालाप, गवाह और घोषणा उत्पन्न करता है।

अंत में संत पापा अपनी संतुष्टि व्यक्त करते हैं कि पल्लियों के संगठनों, आंदोलनों और धर्मसमाजों द्वारा संचालित कई समूहों के माध्यम से स्वयंसेवक के रुप में युवा लोग अपने भाइयों और बहनों की सेवा करने, मानव गरिमा को बढ़ावा देने और साक्ष्य देने का काम करते हैं। इस तरह वे प्यार की खुशी और ख्रीस्तीय होने का आनंद लेते हैं।

मानवीय और सांस्कृतिक विकास के लिए गठित परमधर्मपीठीय मिशन सोसायटी के योगदान की याद करते हुए संत पापा कहते हैं कि व्यक्तिगत जरूरतों में जिनकी मदद की जाती है, वे अपने दैनिक जीवन की परिस्थितियों में सुसमाचार की गवाही देते हैं।


(Margaret Sumita Minj)

पवित्र आत्मा हृदय परिवर्तन करता है, संत पापा

In Church on May 21, 2018 at 2:49 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 21 मई 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर में रविवार 20 मई को, पेंतेकोस्त महापर्व के अवसर पर संत पापा फ्राँसिस ने समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

उन्होंने प्रवचन में कहा, “आज की धर्मविधि के पहले पाठ में, पेंतेकोस्त के दिन पवित्र आत्मा के आगमन की तुलना “आँधी” से की गयी है।” (प्रे.च. 2: 2) यह प्रतीक हमें क्या बतलाता है? यह हमें उस शक्ति की कल्पना करने हेतु प्रेरित करता है जो अपने आप में समाप्त नहीं होती किन्तु इसका प्रभाव बदलता है। आँधी वास्तव में परिवर्तन लाती है, जब मौसम ठंढ़ा है तो यह गर्मी लाती है अथवा जब गर्मी है तो ठंढ़ा, और जब धरती सूखी है तो वर्षा कराती है। पवित्र आत्मा अलग-अलग स्तर पर एक ही काम करता है। वह एक दिव्य शक्ति है जो दुनिया को बदल देती है। आत्मा हमें स्मरण दिलाता है कि वह सक्रिय है, आराम देता तथा शोक से सांत्वना प्रदान करता है अतः हम उनसे प्रार्थना करें कि वह हमारे घावों को चंगा कर दे, हमारी शक्ति को नवीकृत कर दे, हमारे सूखेपन में नमी कर दे और हमारे पापों के दाग को धो दे। आत्मा हमारी परिस्थितियों में प्रवेश करता है तथा उन्हें बदल देता है। वह हृदयों और परिस्थिति में परिवर्तन लाता है।

पवित्र आत्मा हृदयों को बदल देता है। येसु ने अपने शिष्यों से कहा था “पवित्र आत्मा तुम लोगों पर उतरेगा और तुम्हें सामर्थ्य प्रदान करेगा और तुम लोग येरुसालेम, सारी यहूदिया और सामरिया में तथा पृथ्वी के अन्तिम छोर तक मेरे साक्षी होंगे।” (प्रे.च. 1: 8) और ठीक ऐसा ही हुआ। सुसमाचार में हम सुनते हैं कि शिष्य किस तरह बदल गये, उन्होंने येसु का साक्ष्य दिया। अब वे डरपोक नहीं रहे किन्तु साहसी बन गये। जब येसु उनके साथ थे तब वे कायरों की तरह थे किन्तु जब वे चले गये तो वे साहसी बन गये, क्योंकि पवित्र आत्मा ने उनके हृदयों को बदल दिया।

आत्मा भय से बंधे हृदय को मुक्त करता है। वह हर प्रकार की बाधाओं को दूर कर देता है। वह पूरे हृदय से उदार बनने हेतु प्रेरित करता है। वह उन हृदयों को खोल देता है जो बंद हैं। वह आराम की जिंदगी जीने वालों को बाहर जाकर सेवा करने हेतु मजबूर करता है। आत्म संतुष्ट लोगों को नयी दिशा की ओर ले जाता है। कुनकुने लोगों में नई आशा जागाता है। यह हृदयों को बदल देता है। कई लोगों की प्रतिज्ञाएँ बदल जाते हैं, नई शुरूआत होती है और असाधारण रूप से नवीनीकरण होता है किन्तु अनुभव हमें सिखलाता है कि दुनिया की कोई भी वस्तु हमारे हृदय को संतुष्ट नहीं कर सकती। आत्मा हममें परिवर्तन लाता है। यह हमारे जीवन में क्रांति नहीं लाता किन्तु हमारे हृदय को परिवर्तित करता है। यह हमें समस्याओं के भार से मुक्त नहीं करता किन्तु अंदर से स्वतंत्र कर देता है ताकि हम उसका सामना कर सकें। यह हमें एक ही बार में सब कुछ प्रदान नहीं करता किन्तु जीवन की परेशानियों पर अधिक चिंता नहीं करने की शक्ति देता है। पवित्र आत्मा हमारे हृदयों को युवा बनाये रखता है। युवा बने रहने के सभी उपाय जल्दी अथवा देरी से समाप्त हो जाते हैं किन्तु आत्मा हमें उस बूढ़ापा से बचाये रखता है जो अस्वस्थ है तथा हमें अंदर से बूढ़ा कर देता है।

वे किस प्रकार ऐसा करते हैं? वे हमें क्षमा प्रदान करने और हमारे हृदयों को नवीकृत करने के द्वारा जवान बना देता है। यहीं पर महान परिवर्तन होता है हम पापी से धर्मी बन जाते और सब कुछ बदल जाता है। पाप की दासता से हम मुक्त हो जाते हैं। दास से हम प्यारे पुत्र बन जाते तथा मोह-माया से मुक्त होकर आशा से भर जाते हैं। पवित्र आत्मा के कार्य करने के द्वारा, हमारे हृदय में आनन्द का पुनर्जन्म होता तथा शांति प्रस्फूटित होती है।

संत पापा ने कहा कि आज हम सिखें कि जब हममें सच्चे परिवर्तन की आवश्यकता हो तो हमें क्या करना चाहिए। हम में से कौन परिवर्तन नहीं चाहता, खासकर, जब हम जीवन के बोझ से उदास एवं परेशान होते, अपनी ही कमजोरियों से दबे होते, ऐसे समय में, जब आगे बढ़ना मुश्किल हो एवं प्रेम करना असंभव जान पड़े। उन अवसरों पर हमें ईश्वर की शक्ति, पवित्र आत्मा के झटके की आवश्यकता है। प्रेरितों के धर्मसार में हम उन्हें जीवन दाता घोषित करते हैं। यह कितना अच्छा होता कि हम हर दिन उनके झटके को महसूस करते। हर प्रातः जब हम उठें तो प्रार्थना करें, “हे पवित्र आत्मा मेरे हृदय में आ, मेरे दिन को पवित्र कर।”

पवित्र आत्मा न केवल हृदयों को परिवर्तित करता किन्तु वह परिस्थितियों को भी बदल देता है। आँधी की तरह जो चारों तरफ बहता और कल्पना के परे की स्थितियों में भी प्रवेश करता है। हम प्रेरित चरित के उस अंश को पढ़ें जिसके मुख्य पात्र पवित्र आत्मा हैं। हमें इसमें कई घटनाएँ प्रभावित करेंगी। जब शिष्यों को नहीं स्वीकारा गया तो पवित्र आत्मा ने उन्हें गैरयहूदियों के बीच भेजा। उन्होंने नया रास्ता खोल दिया जैसा कि उपयाजक फिलीप के साथ हम पाते हैं। आत्मा फिलीप को येरूसालेम से गाजा जाने वाले मार्ग पर निर्जन प्रदेश ले गया। रास्ते पर फिलीप ने एक इथोपियाई खोजा को उपदेश एवं बपतिस्मा दिया। तब आत्मा उसे आजोतस ले गया उसके बाद कैसरिया, इन नयी परिस्थितों में ईश्वर का समुसाचार सुनाने हेतु उन्हें लगातार नवीनता प्रदान करता रहा। संत पौलुस भी आत्मा द्वारा प्रेरित किये गये जिन्हें अनजान स्थानों में दूर-दूर तक यात्रा कर लोगों को सुसमाचार सुनाना पड़ा। जब पवित्र आत्मा उपस्थित होते हैं तो कुछ न कुछ परिवर्तन अवश्य होता है वह जिधर बहता है, उधर चीजें कभी शांत नहीं रह सकतीं।

हमारे समुदाय के जीवन में जब हम उदासी महसूस करते हैं जब हम शांति चाहते और ईश्वर से नयेपन की कामना करते हैं जो एक बुरा चिन्ह है इसका अर्थ है कि हम आत्मा की आँधी से बचना चाहते हैं। जब हम आत्म सुरक्षा से जीना चाहते हैं, अपने घर के नजदीक रहना चाहते हैं जो स्वार्थी चिन्ह है। पवित्र आत्मा सभी ओर प्रवाहित होता है किन्तु हम अपने को उससे दूर रखना चाहते हैं, इसके बावजूद हमने कई बार उन्हें अनोखा कार्य करते देखा है।

कई बार जीवन के अत्यन्त फीके समय में भी पवित्र आत्मा ने पवित्रता को ऊपर उठाया है क्योंकि वह कलीसिया की आत्मा है जो उसे नवीकृत आशा प्रदान कर, उसे लगातार सजीव बनाता है, उसे आनन्द से भर देता एवं फलप्रद बनाता है। वह उसे खिलने और नया जीवन को विकसित होने देता है। परिवार में जब एक नये शिशु का जन्म  होता है यह समय तालिका में परिवर्तन लाता है। यह उनकी नींद उड़ा देता है किन्तु उन्हें आनन्द प्रदान करता है जो उनके जीवन को नया बना देता और ऊपर उठाता तथा प्रेम में बढ़ाता है। इस प्रकार आत्मा ही कलीसिया के प्रति हमारे बचपन के उत्साह को पुनः लाता है। हमारे पहले प्यार को पुनः जागृत करता है। पवित्र आत्मा कलीसिया को स्मरण दिलाता है कि अपने इतिहास में हर शताब्दी में, वह हमेशा युवा दुल्हन रही है जिससे प्रभु अत्यधिक प्यार करते हैं। संत पापा ने कहा कि हम पवित्र आत्मा का स्वागत करने से कभी न थकें और जो कुछ भी करते हैं उससे पहले पवित्र आत्मा का आह्वान करें।

संत पापा ने प्रार्थना की कि पवित्र आत्मा, ईश्वर की आँधी, हमारे हृदयों में बहे और हमें पिता की कोमलता का एहसास कराये। कलीसिया के ऊपर बहे तथा उसे दुनिया के कोने-कोने तक भेजे ताकि लोग उन्हें सभी ओर लेकर जाये। दुनिया में भेजे ताकि वहाँ शांति एवं आशा की ताजगी प्रवाहित हो।

हे पवित्र आ, हमारे अंदर एवं समस्त पृथ्वी को परिवर्तित कर दे।


(Usha Tirkey)

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