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इताली धर्माध्यक्षों से संत पापा, धर्मप्रांतों के बीच पुरोहितों को साक्षा करें

In Church on May 22, 2018 at 4:04 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 22 मई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 21 मई को वाटिकन के सिनॉड भवन में इटली के काथलिक धर्माध्यक्षों से मुलाकात कर, उनसे तीन बातों पर चिंता व्यक्त की, बुलाहट की कमी, सुसमाचारी निर्धनता तथा आर्थिक मामलों में पारदर्शिता एवं धर्मप्रांतों के विघटन एवं एकीकरण।

संत पापा ने कहा, “यदि पियेदमोंते में बुलाहट कम है और पुलिया में अधिक तो उसे बांटने पर विचार करें। धर्मप्रांत के संसाधनों की व्यवस्था हमेशा पारदर्शी तरीके से करें। यदि किसी को शाम का भोजन के लिए निमंत्रण देते हैं तो कलीसिया का नहीं, अपना पैसा खर्च करें।”

सोमवार को इताली काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की आमसभा के उद्घाटन पर संत पापा ने उनसे कहा, “आपको छड़ी लगाने के लिए नहीं किन्तु उन चीजों को कहना चाहता हूँ जो मुझे सचमुच चिंतित कर देते हैं।”

संत पापा ने कहा कि इस धरती पर बुलाहट की कमी जो कई शताब्दियों तक ऊपजाऊ रही तथा उदारता पूर्वक मिशनरियों को प्रदान किया, सापेक्षवाद, अनंतिम तथा पैसे की तानाशाही की संस्कृति का विषैला फल है, जो ठोकर एवं निरूत्साहित साक्ष्य के कारण युवाओं को समर्पित जीवन से दूर करता है। उन्होंने बुलाहट की कमी को दूर करने का ठोस उपाय बतलाते हुए कहा कि इटली के धर्मप्रांत आपस में अपने पुरोहितों को साक्षा करें।

धर्मप्रांत के पैसे पर रात्रि भोज के लिए निमंत्रण न दें

संत पापा ने इटली के धर्माध्यक्षों के प्रति अपनी दूसरी चिंता को व्यक्त करते हुए कहा कि यह सुसमाचारी निर्धनता एवं पारदर्शिता है। उन्होंने कहा, “मेरे लिए एक जेस्विट के रूप में गरीबी हमेशा एक माता तथा दीवार के समान है क्योंकि उसने मुझे जन्म दिया है एवं यह मेरी रक्षा करती है। सुसमाचारी निर्धनता के बिना कोई प्रेरितिक उत्साह नहीं है। वे विश्वासी, गरीबी के बारे बातें नहीं कर सकते यदि वे फराऊन की तरह जीते हैं। गरीबी के बारे बात करना तथा ऐश आराम की जिंदगी जीना, विरोधात्मक-साक्ष्य है।” उन्होंने कहा कि कलीसिया की सम्पति को व्यक्तिगत सम्पति की तरह प्रयोग करना बड़ा ठोकर है।

संत पापा ने उन याजकों के प्रति खेद प्रकट किया जो चालाकी करते अथवा ईमानदार नहीं होते। उन्होंने कहा, ” हम सभी के लिए साफ एवं एक नियम होनी चाहिए। मैं आप में से एक के बारे जानता हूँ जो धर्मप्रांत के पैसों से दूसरों को भोजन हेतु कभी निमंत्रण नहीं देते बल्कि अपने ही पॉकेट से खर्च करते हैं। यह एक छोटा उदाहरण है किन्तु महत्वपूर्ण है। मैं इससे सचेत हूँ और उनके प्रति कृतज्ञ भी। संत पाप ने कहा कि इटली के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा निर्धनता एवं पार्दर्शिता के रास्ते पर बहुत कुछ किया जा चुका है किन्तु इसमें और कुछ किये जाने की आवश्यकता है।

धर्मप्रांतों को कम करने एवं उन्हें एक करने की कलाह देते हुए संत पापा ने कहा कि यह आसान नहीं है किन्तु कुछ ऐसे धर्मप्रांत हैं जिनका विलय हो जाना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि वे 23 मई 2013 को इस पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह प्रेरितिक आवश्यकता है जिसपर अध्ययन किया जाना चाहिए।

संत पापा ने सभी धर्माध्यक्षों को माता बनने का परामर्श देते हुए, संत इग्नासियुस लोयोला की प्रार्थना के माध्यम से शुभकामनाएं दी, “माता मरियम हमें सहायता दे ताकि कलीसिया एक माता बन सके और हमारी आत्मा भी एक माँ बन सके। तीन महिलाएँ, मरियम, कलीसिया एवं हमारी आत्मा ये तीनों माताएं हैं।


(Usha Tirkey)

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कलीसिया मरियम की तरह एक नारी और माता है, संत पापा

In Church on May 22, 2018 at 4:02 pm


वाटिकन सिटी, मंगलवार, 22 मई 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ कलीसिया की माता धन्य कुँवारी मरियम का पर्व पहली बार सोमवार को मनाया गया। वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा ने प्रवचन में कहा कि एक माता का पहला गुण है कोमलता।

संत पापा ने कहा, “कलीसिया एक नारी है वह एक माता है।” उन्होंने कहा कि जब उसमें इस ख़सियात की कमी हो जाती है तब कलीसिया सिर्फ एक उदार संगठन अथवा एक फूटबॉल टीम बनकर रह जाती है और यदि कलीसिया एक पुरूष है तो यह बुजूर्ग कुँवारों का दल बन जाती है जो न तो प्रेम कर सकते और न ही फल ला सकते हैं।

संत पापा फ्राँसिस ने इस पर्व को पेंतेकोस्त के तुरन्त बाद वाले सोमवार को मनाने की घोषणा की है ताकि “याजकों, धर्मसमाजियों तथा लोधर्मियों में कलीसिया के मातृत्व के मनोभाव में बढ़ने को प्रोत्साहन दिया जा सके, साथ ही साथ माता मरियम की भक्ति को भी बढ़ावा मिल सके।”

मरियम की ममता

प्रवचन में संत पापा ने कहा कि सुसमाचार में मरियम को हमेशा येसु की माता के रूप में प्रस्तुत किया गया है एक नारी अथवा जोसेफ की विधवा के रूप में नहीं। उनके मातृत्व को देवदूत संदेश से आरम्भ कर पूरे सुसमाचार में प्रकाशित किया गया है। यह एक सदगुण है जो कलीसिया के लिए भी आवश्यक है जिसको कलीसिया के धर्माचार्यों ने तत्काल पहचाना था।

संत पापा ने कहा कि कलीसिया एक नारी है क्योंकि यह कलीसिया एवं दुल्हन दोनों है। वह एक माता है क्योंकि वह जीवन देती है। धर्माचार्य आगे कहते हैं कि कलीसिया ख्रीस्त की दुल्हिन है। यही वह मनोभाव है जो कलीसिया की माता मरियम से आती है। जब यह मनोभाव कलीसिया में नहीं हैं तब वह अपनी पहचान खो देती है और मात्र एक उदार संगठन अथवा फुटबॉल टीम बन जाती है।

बुजूर्ग कुँवारों की कलीसिया नहीं

ईश्वर की इच्छा पर केवल नारी वाली कलीसिया ही “फलप्रद मनोभाव” बनाये रख सकती है जिन्होंने जन्म लेने के लिए एक नारी को चुना ताकि एक नारी का रास्ता बतला सके। महत्वपूर्ण बात है कि कलीसिया एक नारी है उसमें एक दुल्हन और माता होने का मनोभाव है। जब हम इसे भूल जाते हैं तब यह एक पुरूष कलीसिया बन जाती है, बूढ़े कुँवारों की कलीसिया, जो एकाकी में जीते, प्रेम करने के लायक नहीं होते और कोई फल नहीं ला सकते हैं। महिलाओं के बिना कलीसिया आगे नहीं बढ़ सकती क्योंकि यह एक महिला है, और यह मनोभाव माता मरियम से आती है क्योंकि येसु ऐसा ही चाहते हैं।

माता की ममता

संत पापा ने कहा कि पहला सदगुण जो एक महिला की विशेष पहचान है वह है कोमलता, माता मरियम के समान कोमल। जब उन्होंने अपने पहले पुत्र को जन्म दिया उन्होंने उसे कपड़ों में लपेटा तथा चरनी में लिटा दिया। उन्होंने बड़ी कोमलता एवं दीनता से उनकी देखभाल की जो एक माता का महान गुण है।

कलीसिया एक माता है जो कोमलता का रास्ता अपनाती है। वह उस प्रज्ञा की भाषा जानती है जिसमें स्नेह, मौन और करूणामय दृष्टि है। संत पापा ने कहा कि कलीसिया के सदस्यों को मालूम होना चाहिए कि वे एक माता के समान हैं अतः उन्हें भी सौम्यता, कोमलता, मुस्कान एवं स्नेह का रास्ता अपनाना चाहिए।


(Usha Tirkey)

संत पापा ने 12 प्रभु सेवकों की धन्य घोषणा को अनुमोदन दिया

In Church on May 22, 2018 at 4:00 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 22 मई 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ सन्त पापा फ्राँसिस ने मंगलवार, 19 मई को कार्डिनल आन्जेलो आमातो के नेतृत्व में परमधर्मपीठीय सन्त प्रकरण परिषद द्वारा धन्य घोषणा के लिये प्रस्तावित आज्ञप्तियों को अनुमोदन दे दिया।

12 प्रभु सेवकों के नाम इस प्रकार है,

प्रभु सेवक नोर्बर्ट मैकऔलिफ (जॉन) पवित्र हृदय के धर्मबंधुओं के सदस्य। जन्म न्यूयॉर्क में 30 सितम्बर 1886 को तथा मृत्यु 3 जुलाई 1959 को।

प्रभु सेवक अगस्त जोसेफ हलोनड, संत जॉन बोस्को सलेशियन धर्म समाज के सदस्य, काथलिक कलीसिया के कार्डिनल, विस्थापितों के लिए ख्रीस्त की कलीसिया के संस्थापक। जन्म 5 जुलाई 1881 में पोलैंड में तथा मृत्यु 22 अक्टूबर 1948 को।

प्रभु सेवक मिग्वेल अंजेल बुलेस, ओसास की संत रोस के धर्माध्यक्ष, कई धर्मसमाजों के संस्थापक। जन्म कोलम्बिया के अंतियोकिया में 9 सितम्बर 1888 को तथा मृत्यु 29 सितम्बर 1971 को मेडलिन में।

प्रभु सेवक एनरिको मौरी, धर्मप्रांतीय पुरोहित, ख्रीस्त राजा के ऑबलेट्स के संस्थापक। जन्म इटली में 26 अक्टूबर 1883 को तथा मत्यु 10 मई 1967 को।

प्रभु सेवक जॉ बपतिस्ते बेरतीयर, ला सलेते की माता मरियम के मिशनरी धर्मसमाज के सदस्य, पवित्र परिवार के मिशनरी धर्मसमाज के संस्थापक। जन्म फ्राँस में 24 फरवरी 1840 को तथा मृत्यु 16 अकटूबर 1908 को।

प्रभु सेवक विलहेल्म एबेरश्केईलर, येसु समाज के पुरोहित। जन्म 5 दिसम्बर 1837 को जर्मनी में तथा निधन 23 दिसम्बर 1921 को।

प्रभु सेवक पियेत्रो उच्चेल्ली, संत फ्राँसिस जेवियर धर्मसमाज के विदेशी मिशनरी। जन्म इटली में 10 मार्च 1874 को तथा मृत्यु 29 अक्टूबर 1954 को।

प्रभु सेवक पियो डेल्लेपियाने, मिनिमे ऑडर के पुरोहित, जन्म इटली में 4 जनवरी 1904 को तथा मृत्यु 12 दिसम्बर 1976 को।

प्रभु सेविका ख्रीस्त के घावों की फ्राँचेस्का, बादालोना की डिवाईन प्रोविडेंस एकान्तवास की धर्मबहन। कान्त वास की धर्मबहन जन्म इटली में 4 जनवरी 1904 को तथा मृत्यु 12 दिसम्बर 1976 को।

वं हमारी आत्मा जन्म स्पेन में 26 जून 1860 को तथा मृत्यु 4 जून 1899 को।

प्रभु सेविका संत मरियम की लेवनार, संत दोमनिक ऑर्डर की धर्मबहन। जन्म अर्जेंटीना में 14 अगस्त 1841 को तथा मृत्यु 28 दिसम्बर 1900 को।

प्रभु सेविका येसु के पवित्र हृदय की अंजेला मरिया, भलेंसिया की तृत्वमय धर्मबहनें धर्मसमाज की धर्म बहन। जन्म जर्मनी में 26 मार्च 1900 को तथा मृत्यु 23 दिसम्बर 1944 को।


(Usha Tirkey)

चिली के धर्माध्यक्ष ने 12 पुरोहितों को निलंबित किया

In Church on May 22, 2018 at 3:56 pm

रंकाग्वा, मंगलवार, 22 मई 2018 (एशियान्यूज़) ˸ चिली के धर्माध्यक्ष अलेज़ंद्रो गोईक कारमेलिक ने पुरोहितों खिलाफ यौन दुर्व्यवहार के आरोपों के बाद कई पुरोहितों को निलंबित कर दिया है एवं आरोपों पर पहली बार ध्यान नहीं देने के लिए लोगों से माफ़ी मांगी है।

उन्होंने 19 मई को एक वक्तव्य में कहा, “इस मामले में मेरे कार्य के लिए मैं माफी मांगना चाहता हूँ।”

रंकाग्वा के धर्माध्यक्ष गोईक ने कहा कि उन्होंने सही तरीके से व्यवहार नहीं किया है जब एक महिला एक साल पहले फादर लुईस रूबियो एवं अन्य पुरोहितों का मामला लेकर आयी थी।

गोईक की माफी चिली की एक टीवी पर रूबियो के खिलाफ आरोप लगाये गये एक कार्यक्रम के एक दिन बाद आयी, उसी स्टेशन ने चिली के धर्माध्यक्षों के लिए संत पापा फ्रांसिस के 10-पेज के पत्र को भी लीक कर दिया था, जिसमें याजकीय दुर्व्यवहार को व्यवस्थित ढंग से ढकने के प्रयास के लिए उन्हें दंडित किया गया था और उनसे गहरे बदलाव की मांग की गयी थी।

कार्यक्रम को 18 मई को प्रकाशित किया गया था जिसके ठीक एक दिन पहले धर्माध्यक्ष गोईक संत पापा से 15-17 मई तक हुई सभा में भाग लेने के बाद वापस लौटे थे। कार्यक्रम में एलिजा फेरनान्डेज के साक्ष्य पर प्रकाश डाला गया था जो फादर रूबियो के दुर्व्यवहार, खासकर, नाबालिगों के साथ, को लेकर धर्माध्यक्ष से मिलने गयी थी।

रूबियो “ला फमिलिया” समुदाय के पुरोहित थे जिसके कई सदस्यों पर यौन दुराचार का आरोप है।

रूबियो से पूछे जाने पर कि क्या वह पुरोहित बने रहना चाहते हैं उन्होंने कहा कि यह निर्णय वे अपने अंतःकरण की आवाज सुनने के बाद करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए सबसे दुःखद दिन है। उन्होंने जो किया है उसके लिए उन्हें गहरा अफसोस है, यह भयंकर है किन्तु उससे आगे वे कुछ नहीं कह सकते।

धर्माध्यक्ष गोईक ने कहा, “मैंने जासूस बनने के लिए नहीं किन्तु एक चरवाहा बनने के लिए पढ़ाई की है।” उन्होंने कहा कि उनके पास कोई भी औपचारिक आरोप के साथ नहीं आया था। जब फेरनार्डेज अपनी व्यक्ति मामले से साथ उनके पास आयी थी तब उन्होंने एक आधिकारिक शिकायत की थी किन्तु कोई प्रमाण नहीं दिया था जिससे कि वे जाँच कर सकें।

उन्होंने कहा कि वे टीवी 13 द्वारा प्रसारित रिपोर्ट को महत्व देते हैं क्योंकि उन्होंने उन आयामों को प्रकट किया है जिनसे वे अवगत नहीं थे और जिसने उन्हें बहुत अधिक प्रभावित किया और दुःख दिया है।

धर्माध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने रंकाग्वा के अभियोक्ता को औपचारिक शिकायत पत्र जमा कर दिया है जिसमें रूबियो की पृष्टभूमि है तथा उनके पास जो भी जानकारियाँ हैं वे उसे इसी सप्ताह परमधर्मपीठ भेजेंगे।

टीबी 13 में जिक्र किया गया है कि धर्माध्यक्ष ने कई धर्मप्रांतीय पुरोहितों को भी निलंबित किया है तथा उन्हें तब तक मिशन से रोक रखा है जब तक कि जाँच प्रक्रिया पूरी न हो जाए।


(Usha Tirkey)

काथलिक करितास द्वारा भूकम्प पीड़ितों की मदद

In Church on May 22, 2018 at 3:55 pm


भारत, मंगलवार, 22 मई 2018 (ऊकान)˸ बीना बेन 2000 के दशक के शुरू में भारत में सबसे विनाशकारी भूकंपों से बचने वालों में एक है जो अपने बच्चों को पकड़कर और अपने पारंपरिक मिट्टी के घर के ढाहने के कुछ ही सेकेंड पहले भागकर जान बचाने में सफल रही थी।

उनका जीवन बच गया किन्तु विनाशकारी भूकम्प ने उसके परिवार को आवासहीन छोड़ दिया था। यह 17 साल पहले की घटना है। अब दूसरों के समान गुजरात के बारूज में उसके पास भी आश्रय के लिए घर है जिसका निर्माण उन्होंने कलीसिया के उदार संगठन करीतास इंडिया की मदद से किया है।

बारूज में 26 जनवरी 2001 को 7.7 तीव्रता से दो मिनट तक आये भूकम्प में करीब 21,000 लोगों की मौत हो गयी थी एवं 1,67,000 लोग घायल हो गये थे। इसने उस क्षेत्र के करीब 949 गाँवों के लगभग 400,000 घरों को ध्वस्त कर दिया था और उन्हें सरकार एवं विभिन्न उदार संगठनों की मदद के भरोसे छोड़ दिया था।

बीना ने कहा कि उनके गाँव में 400 अन्य लोग हैं जिन्हें कोई जन हानि नहीं हुई है किन्तु उनमें से अधिकतर असहाय हैं। पूरा गाँव ही ध्वस्त हो गया था।

उन्होंने कहा, “हमारे घर मिट्टी के ढेर में तबदील हो चुके थे। हमारे पास सोने के लिए स्थान नहीं थे, खाने के लिए कुछ नहीं थे जिसे हमारे बच्चों को खिला सकें। हम गरीबों से भी गरीब बन गये थे।”

अब मिट्टी के ढेर के स्थान पर कुछ सीमेंट के घर बन चुके हैं तथा मोटर साईकिल एवं कार भी दिखाई देते हैं जो पुनः समृद्धि प्राप्त करने का चिन्ह है।

सभी नये संसाधनों में करीतास इंडिया का प्रतीक लगा हुआ है जो दर्शाता है कि संगठन ने बिना भेदभाव के बड़ी उदारता से उन सभी असहाय लोगों की मदद की जहाँ एक भी ख्रीस्तीय नहीं है।

बेन ने अपने एक शयन कक्ष, खाना कमरा एवं रसोईघर को दिखलाते हुए कहा, “अब हमारे पास एक सुन्दर घर है जहाँ हम आराम से रह सकते हैं।

गाँव की प्रधान देवजी बाई ने कहा कि कलीसिया के सहयोग एवं कठिन परिश्रम की सराहना सभी करते हैं।

55 वर्षीय एक व्यक्ति ने कहा, “भूकम्प ने हमारे जीवन को कुछ समय के लिए बिखेर दिया था किन्तु करीतास की मदद से हमने न केवल पुनः घर बना लिया बल्कि अधिक अच्छा घर बना लिया है।”

उन्होंने कहा कि काथलिक स्वयंसेवक जिसमें पुरोहित एवं धर्मबहनें हैं उन्होंने गाँव का सर्वे किया और उसके बाद 250 घरों के निर्माण हेतु मदद दी गयी। हमें अपने भाग्य पर विश्वास नहीं हो रहा था। शुरू में हम में से कुछ लोग संदेह भी कर रहे थे किन्तु जब हमने पाया कि वे सच्ची उदारता एवं भलाई की भावना से ऐसा कर रहे हैं तब हमने खुशी से उन्हें पूर्ण समर्थन दिया।

जोस्टिन बेन जो एक शिक्षिका हैं उन्होंने बतलाया कि शिविर में कलीसिया द्वारा भेजे गये लोगों ने उन्हें भोजन, टेट, कम्बल, चादर एवं अन्य मौलिक आवश्यकताएँ प्रदान कीं।

फादर जोर्ज जो अब भी उस गाँव का दौरा करते हैं, ऊका समाचार से कहा कि वहाँ कोई भी ख्रीस्तीय नहीं है किन्तु उनमें ख्रीस्तीयों के प्रति बड़ी कृतज्ञता की भावना है। जब उन्हें सलाह की आवश्यकता होती है तो वे अब भी उनसे मिलने आते हैं।


(Usha Tirkey)

हमारे जीवन का मूल्य

In Church on May 22, 2018 at 3:53 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 22 मई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने 22 मई को एक ट्वीट प्रेषित कर सेवा करने हेतु प्रोत्साहन दिया क्योंकि जीवन तभी सार्थक होता है जब यह दूसरों की भलाई के लिए समर्पित हो।

उन्होंने संदेश में लिखा, “एक ख्रीस्तीय का जीवन येसु में समर्पित होना तथा दूसरों के लिए खर्च किया जाना चाहिए।”

 


(Usha Tirkey)

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