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कलीसिया मरियम की तरह एक नारी और माता है, संत पापा

In Church on May 22, 2018 at 4:02 pm


वाटिकन सिटी, मंगलवार, 22 मई 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ कलीसिया की माता धन्य कुँवारी मरियम का पर्व पहली बार सोमवार को मनाया गया। वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा ने प्रवचन में कहा कि एक माता का पहला गुण है कोमलता।

संत पापा ने कहा, “कलीसिया एक नारी है वह एक माता है।” उन्होंने कहा कि जब उसमें इस ख़सियात की कमी हो जाती है तब कलीसिया सिर्फ एक उदार संगठन अथवा एक फूटबॉल टीम बनकर रह जाती है और यदि कलीसिया एक पुरूष है तो यह बुजूर्ग कुँवारों का दल बन जाती है जो न तो प्रेम कर सकते और न ही फल ला सकते हैं।

संत पापा फ्राँसिस ने इस पर्व को पेंतेकोस्त के तुरन्त बाद वाले सोमवार को मनाने की घोषणा की है ताकि “याजकों, धर्मसमाजियों तथा लोधर्मियों में कलीसिया के मातृत्व के मनोभाव में बढ़ने को प्रोत्साहन दिया जा सके, साथ ही साथ माता मरियम की भक्ति को भी बढ़ावा मिल सके।”

मरियम की ममता

प्रवचन में संत पापा ने कहा कि सुसमाचार में मरियम को हमेशा येसु की माता के रूप में प्रस्तुत किया गया है एक नारी अथवा जोसेफ की विधवा के रूप में नहीं। उनके मातृत्व को देवदूत संदेश से आरम्भ कर पूरे सुसमाचार में प्रकाशित किया गया है। यह एक सदगुण है जो कलीसिया के लिए भी आवश्यक है जिसको कलीसिया के धर्माचार्यों ने तत्काल पहचाना था।

संत पापा ने कहा कि कलीसिया एक नारी है क्योंकि यह कलीसिया एवं दुल्हन दोनों है। वह एक माता है क्योंकि वह जीवन देती है। धर्माचार्य आगे कहते हैं कि कलीसिया ख्रीस्त की दुल्हिन है। यही वह मनोभाव है जो कलीसिया की माता मरियम से आती है। जब यह मनोभाव कलीसिया में नहीं हैं तब वह अपनी पहचान खो देती है और मात्र एक उदार संगठन अथवा फुटबॉल टीम बन जाती है।

बुजूर्ग कुँवारों की कलीसिया नहीं

ईश्वर की इच्छा पर केवल नारी वाली कलीसिया ही “फलप्रद मनोभाव” बनाये रख सकती है जिन्होंने जन्म लेने के लिए एक नारी को चुना ताकि एक नारी का रास्ता बतला सके। महत्वपूर्ण बात है कि कलीसिया एक नारी है उसमें एक दुल्हन और माता होने का मनोभाव है। जब हम इसे भूल जाते हैं तब यह एक पुरूष कलीसिया बन जाती है, बूढ़े कुँवारों की कलीसिया, जो एकाकी में जीते, प्रेम करने के लायक नहीं होते और कोई फल नहीं ला सकते हैं। महिलाओं के बिना कलीसिया आगे नहीं बढ़ सकती क्योंकि यह एक महिला है, और यह मनोभाव माता मरियम से आती है क्योंकि येसु ऐसा ही चाहते हैं।

माता की ममता

संत पापा ने कहा कि पहला सदगुण जो एक महिला की विशेष पहचान है वह है कोमलता, माता मरियम के समान कोमल। जब उन्होंने अपने पहले पुत्र को जन्म दिया उन्होंने उसे कपड़ों में लपेटा तथा चरनी में लिटा दिया। उन्होंने बड़ी कोमलता एवं दीनता से उनकी देखभाल की जो एक माता का महान गुण है।

कलीसिया एक माता है जो कोमलता का रास्ता अपनाती है। वह उस प्रज्ञा की भाषा जानती है जिसमें स्नेह, मौन और करूणामय दृष्टि है। संत पापा ने कहा कि कलीसिया के सदस्यों को मालूम होना चाहिए कि वे एक माता के समान हैं अतः उन्हें भी सौम्यता, कोमलता, मुस्कान एवं स्नेह का रास्ता अपनाना चाहिए।


(Usha Tirkey)

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