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दृढ़ीकरण संस्कार पर चिंतन

In Church on May 23, 2018 at 3:05 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 23 मई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को दृढ़ीकरण संस्कार पर अपनी धर्मशिक्षा देते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

बपतिस्मा संस्कार पर धर्मशिक्षा के बाद, इन दिनों पेंतेकोस्त महापर्व के उपरांत हमें निमंत्रण दिया जाता है कि हम ख्रीस्तीय साक्ष्यों पर चिंतन करें जिनको पवित्र आत्मा बपतिस्मा में उत्पन्न करते हैं, उनके जीवन को सक्रिय बनाकर, दूसरों की भलाई के लिए उदार बनाते हैं। अपने शिष्यों को येसु ने एक महान मिशन सौंपा था, “तुम पृथ्वी के नमक हो। तुम संसार की ज्योति हो।”(मती. 5,13-16) ये प्रतीक हैं जो हमारे व्यवहार पर चिंतन करने हेतु प्रेरित करते हैं क्योंकि नमक की मात्रा कम अथवा अधिक हो जाने से भोजन का स्वाद सही नहीं रह जाता, उसी तरह ज्योति की कमी अथवा आधिक्य देखने में बाधा डालती है।

कौन हमें सचमुच नमक बना सकता है जो स्वाद दे तथा नष्ट होने से बचा सके और प्रकाश जो दुनिया को ज्योति प्रदान करे? यह केवल ख्रीस्त का आत्मा कर सकता है। यही वह वरदान है जिसको हम दृढ़ीकरण संस्कार में ग्रहण करते हैं। संत पापा ने दृढ़ीकरण संस्कार पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यह दृढ़ीकरण कहलाता है क्योंकि यह बपतिस्मा को पुष्ट करता तथा इसकी कृपा को सुदृढ़ बनाता है, क्रिस्मा की तरह जिसमें हम पवित्र आत्मा को पवित्र तेल के मलन द्वारा प्राप्त करते हैं जो तेल एवं सुगंधि का मिश्रण है और धर्माध्यक्ष द्वारा आशीष प्रदान किया गया है। यह ख्रीस्त का प्रतीक एवं इसमें पवित्र आत्मा का अभिषेक है?

बपतिस्मा में दिव्य जीवन में पुनः जन्म लेना पहला कदम है अतः यह आवश्यक है कि हम ईश्वर के पुत्र-पुत्रियों के समान व्यवहार करें अर्थात् ख्रीस्त में सुदृढ़ हों जो पवित्र कलीसिया में क्रियाशील हैं, हम अपने को दुनिया में उनके मिशन में सहभागी बनायें। इसके लिए पवित्र आत्मा के अभिषेक की आवश्यकता है उनकी शक्ति के बिना, मनुष्य कुछ भी नहीं है। जिस तरह येसु का सारा जीवन पवित्र आत्मा से सराबोर था उसी तरह कलीसिया एवं उसके प्रत्येक सदस्य का जीवन उसी आत्मा द्वारा प्रेरित होना चाहिए।
कुँवारी मरियम के गर्व में पवित्र आत्मा की शक्ति से आने के बाद, येसु यर्दन नदी में पवित्र आत्मा से अभिषेक किये जाने उपरांत अपने मिशन की शुरूआत करते हैं। वे इसकी घोषणा नाजरेथ से सभागृह में स्पष्ट रूप से करते हैं। नबी इसायस की भविष्यवाणी को अपने आप पर लागू करते हुए कहते हैं, “प्रभु का आत्मा मुझ पर छाया रहता है, क्योंकि उसने मेरा अभिषेक किया है। उसने मुझे भेजा है, जिससे मैं दरिद्रों को सुसमाचार सुनाऊँ, बन्दियों को मुक्ति का और अन्धों को दृष्टिदान का सन्देश दूँ, दलितों को स्वतन्त्र करूँ।” (लूक.4,18)

येसु पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हैं तथा वे पवित्र आत्मा के स्रोत हैं जिसकी प्रतिज्ञा पिता ने की थी।(यो.15,26; लूक. 24,49; प्रे.च.1,8; 2,33) वास्तव में, पास्का की शाम, पुनर्जीवित ख्रीस्त ने शिष्यों पर फूँक कर कहा, “‘पवित्र आत्मा को ग्रहण करो!” (यो.20,22); और पेंतेकोस्त के दिन पवित्र आत्मा की शक्ति असाधारण रूप से चेलों पर उतरी। (प्रे.च. 2,1-4)
पुनर्जीवित ख्रीस्त की सांस कलिीसिया के फेफड़े को जीवन से भर देती है, जिसके प्रभाव में पवित्र आत्मा से भर कर शिष्यों ने अपना मुँह ईश्वर के महान कार्यों की घोषणा सबों के बीच करने के लिए खोला।
जिस पवित्र आत्मा को येसु ने यर्दन नदी में प्राप्त किया था उसी को कलीसिया पेंतेकोस्त के दिन प्राप्त करती है और उसके द्वारा वह मिशनरी बन जाती है ताकि ईश्वर की महिमा एवं लोगों की पवित्रता के लिए अपना जीवन अर्पित कर सके। हर संस्कार में पवित्र आत्मा क्रियाशील होते हैं किन्तु दृढ़ीकरण संस्कार में विश्वासी उन्हें विशेष रूप से ग्रहण करते हैं।
यदि बपतिस्मा संस्कार में पवित्र आत्मा हमें ख्रीस्त में शामिल कराते हैं दृढ़ीकरण संस्कार में ख्रीस्त हमें अपनी आत्मा से भर देते हैं। पिता की इच्छा अनुसार, हमें उनके साक्ष्य में अपने को समर्पित करने तथा उन्हीं के जीवन एवं मिशन के सिद्धांत में सहभागी होते हुए, पवित्र आत्मा को ग्रहण करने का दृढ़ साक्ष्य, हम विनम्रता पूर्वक दे सकते हैं।

किस तरह मालूम पड़ता है कि हमने पवित्र आत्मा को ग्रहण किया है? संत पापा ने कहा कि यदि हम पवित्र आत्मा के कार्यों को पूरा करते हैं, पवित्र आत्मा द्वारा सिखाये गये वचनों की घोषणा करते हैं तो मालूम होता है कि हमने पवित्र आत्मा को ग्रहण किया है। ख्रीस्तीय साक्ष्य का अर्थ है उन सभी कार्यों को करना जिसको करने हेतु ख्रीस्त का आत्मा हमें प्रेरित करता है और हमें उन्हें करने के लिए शक्ति प्रदान करता है।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासी समुदाय का अभिवादन किया, खासकर, अंग्रेजी भाषियों को जो इंगलैंड, वेल्स, आयरलैंड, भारत, फिलीपींस, रूस, वियेतनाम, कनाडा और अमरीका से आये थे। उन्होंने फेलिसियन धर्मबहनों की महाधर्मसभा के लिए शुभकामनाएँ दी तथा उन्हें प्रार्थना का आश्वासन दिया।
अंत में संत पापा ने सभी विश्वासियों और उनके परिवारों पर पवित्र आत्मा का आह्वान करते हुए उनके साथ हे हमारे पिता प्रार्थना का पाठ किया और सबों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

 


(Usha Tirkey)

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संत पापा ने चीन के काथलिकों के लिए प्रार्थना की अपील की

In Church on May 23, 2018 at 3:03 pm


वाटिकन सिटी, बुधवार 23 मई 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने धन्य कुंवारी मरियम “ख्रीस्तीयों की सहायता” के माध्यम से चीन के काथलिकों के लिए प्रार्थना की अपील की।

संत पापा फ्राँसिस ने संत पेत्रुस महागिरजाधर के प्राँगण में बुधवारीय आमदर्शन समारोह के दौरान हजारों की संख्या में उपस्थित तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को संबोधित कर कहा,“कल, 24 मई को धन्य कुवांरी मरियम “ख्रीस्तीयों की सहायता” का वार्षिक त्योहार है, चीन में शंघाई के पास शीशान तीर्थालय में विशेष रुप से वे सम्मानित की जाती हैं।

यह सालगिरह हमें चीन में रहने वाले सभी काथलिक विश्वासियों के साथ आध्यात्मिक रूप से एकजुट होने के लिए आमंत्रित करता है। उनके लिए हम कुवांरी माता मरियम से प्रार्थना करते हैं, कि वे उदारता और शांति के साथ अपने विश्वास को जी सकें, ताकि वे पेत्रुस के उत्तराधिकारी के साथ पूर्ण सहभागिता में बंधुता, समन्वय और सुलह के ठोस संकेतों को पूरा कर सकें।

संत पापा ने कहा,“चीन के प्रिय प्रभु भक्तो, विश्वव्यापी कलीसिया आपके साथ है और आपके लिए प्रार्थना करती है। आप कठिनाईयों के बावजूद ईश्वर की इच्छा और योजना को पूरा करना जारी रखें।”

संत पापा ने प्रार्थना की अपील को यह कहते हुए अंत किया,“ माता मरियम आपकी सहायता करने से कभी पीछे नहीं हटेंगी और ममतामयी प्रेम से आपकी रक्षा करेंगी।”


(Margaret Sumita Minj)

काथलिक महिलाओं ने संत पापा फ्राँसिस को एक खुला पत्र लिखा

In Church on May 23, 2018 at 3:01 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 23 मई 2018 (रेई) : वाटिकन प्रेस कार्यालय द्वारा जारी सूचना अनुसार काथलिक महिलाओं ने संत पापा फ्राँसिस को एक खुला पत्र लिखा है।

‘काथलिक महिला अभिव्यक्ति’ और ‘विश्वास की आवाज़ें’ ऐसे नेटवर्क हैं जो काथलिक कलीसिया में महिलाओं की अधिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व के लिए अभियान चलाती हैं। उन्होंने मार्च में आयोजित प्री-सिनॉड बैठक में दो अधिकारिक प्रतिनिधियों सहित युवाओं पर धर्माध्यक्षीय धर्मसभा से पहले सुनाई गई युवा काथलिक महिलाओं की प्रामाणिक आवाजों पर भी ध्यान केंद्रित करने के लिए आग्रह किया है। उन्होंने संत पापा फ्राँसिस को संयुक्त रूप से महिलाओं और काथलिक धर्माधिकारियों के बीच खुली वार्ता के लिए एक खुला पत्र लिखा है। शुक्रवार, 18 मई तक दुनिया भर में करीब 500 महिलाओं ने पत्र पर हस्ताक्षर किया था।

इस पत्र में लोकधर्मी, परिवार और जीवन के लिए बने विभाग के लिए हाल ही में प्रकाशित संविधान को इंगित किया गया है। पत्र में संविधान के, विशेष रूप से महिलाओं से जुड़े कुछ मुद्दे जैसे प्रजनन, गर्भावस्था और गर्भपात के संबंध में सराहना व्यक्त की गई है साथ ही पत्र में  स्त्री शब्द के लिए “प्रतिभा” के उपयोग पर चिंता व्यक्त की गई है, यह कई महिलाओं के लिए समस्या बन सकती है। इस पत्र में यह भी सुझाव दिया गया है कि संविधान में निर्दिष्ट “विशिष्टता, पारस्परिकता, पूरकता और समान गरिमा” जैसे गुणों को अभी तक विकसित नहीं किया गया है और इस तरह से व्याख्या की गई है कि महिलाओं की वास्तविक जिन्दगी को समायोजित किया गया हो।

‘Catholic Women Speak’, के  hello@catholicwomenspeak.com वेबसाइट पर काथलिक महिलाओं द्वारा हस्ताक्षर के लिए पत्र खुला है।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा ने सिंगापुर, वियतनाम के लिए अपने प्रतिनिधि नियुक्त किया

In Church on May 23, 2018 at 3:00 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 23 मई 2018 (रेई) : पोलैंड के महाधर्माध्यक्ष मरेक जेलवेस्की सिंगापुर के नये प्रेरितिक राजदूत और वियतनाम के लिए वाटिकन के प्रतिनिधि हैं

संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार को पोलिश महाधर्माध्यक्ष मरेक जेलवेस्की को सिंगापुर के लिए नए प्रेरितिक राजदूत और वियतनाम के लिए वाटिकन के अस्थायी प्रतिनिधि के रुप में नियुक्त किया।

जिम्बाब्वे में प्रेरितिक राजदूत के रूप में कार्यरत महाधर्माध्यक्ष जेलवेस्की का निवास स्थान अब सिंगापुर होगा। वे महाधर्माध्यक्ष लियोपोल्ड गिरेली के स्थान पर राजनयिक पद ग्रहण करेंगे जिन्हें संत पापा फ्राँसिस ने 8 महीने पहले सितंबर 2017 में इजरायल और साइप्रस के प्रेरितिक राजदूत तथा येरुसलेम और फिलिस्तीन के लिए वाटिकन के प्रतिनिधि नियुक्त कर स्थानांतरित कर दिया था।

महाधर्माध्यक्ष जेलवेस्की का जन्म सन् 1963 में पोलैंड के अगस्तोव में हुआ था। 1989 में उनका पुरोहिताभिषेक हुआ। उन्होंने रोम स्थित परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन विश्वविद्यालय से कलीसिया की कानून सहिंता अनुच्छेद में डॉक्टरेट की पद्वी हासिल की।

1995 में परमधर्मपीठ की राजनयिक सेवा में प्रवेश करने के बाद, उन्होंने मध्य अफ्रीकी गणराज्य, संयुक्त राष्ट्र, ग्रेट ब्रिटेन, जर्मनी, थाईलैंड, सिंगापुर और मलेशिया में परमधर्मपीठ के मिशन में अपना योगदान दिया।

पोप फ्रांसिस ने उन्हें मार्च 2014 में जिम्बाब्वे के लिए प्रेरितिक राजदूत नियुक्त किया। अपनी मूल भाषा के अलावा, वे इतालवी, अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन और स्पानी भी बोलते हैं।

वियतनाम की कलीसिया वाटिकन के नये प्रतिनिधि का स्वागत करती है। वियतनाम के काथलिक  धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष जोसेफ गुयेन ची लिन ने नए परमधर्मपीठीय प्रतिनिधि का स्वागत किया और देश के काथलिकों से उनके नए मिशन के लिए प्रार्थना करने का आग्रह किया।

महाधर्माध्यक्ष लिन ने ऊकान्यूज को बताया, “वियतनाम में जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता प्रतिबंधित है, हम संत पापा और वाटिकन के अधिकारियों के साथ नये संबंध एवं नई स्थितियों के निर्माण के लिए और दुनिया भर की कलीसियाओं के साथ घनिष्ठ संपर्क में रहने के लिए के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं।”

उन्होंने आशा व्यक्त की कि महाधर्माध्यक्ष जेलवेस्की परमधर्मपीठ और वियतनाम के बीच संबंधों को बेहतर बनाएंगे। महाधर्माध्यक्ष लिन ने यह भी कहा कि वे जल्द ही वियतनाम आने के लिए नये प्रतिनिधि को आमंत्रण पत्र लिखेंगे।

वाटिकन-वियतनाम संबंध

हालांकि वियतनाम और वाटिकन में पूर्ण राजनयिक संबंध नहीं हैं, वहीं कम्युनिस्ट दक्षिणपूर्व एशियाई राष्ट्र के समझौते को 2011 में देश में वाटिकन एक अस्थायी प्रतिनिधि के रिश्ते को सामान्य बनाने के लिए एक सतत् प्रक्रिया में सफलता के रूप में देखा गया था।

वाटिकन-सिंगापुर संबंध

वाटिकन और सिंगापुर के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। 24 जून, 1981 को स्थापित राजनयिक संबंध अगले महीने अपनी 37 वीं वर्षगांठ को चिह्नित करेगा।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा से ताइवान का रक्षा करने हेतु महाधर्माध्यक्ष का आग्रह

In Church on May 23, 2018 at 2:58 pm

हॉगकॉग, बुधवार 23 मई 2018 (वीआर,रेई) : चीनी क्षेत्रीय धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीआरबीसी) के अध्यक्ष ने संत पापा फ्राँसिस से चीन-वाटिकन समझौते के हिस्से के रूप में ताइवान को समाप्त न करने की अपील की है।

सीआरबीसी के अध्यक्ष ताइपे के महाधर्माध्यक्ष जॉन हंग शान-चुआन ने संत पापा फ्राँसिस से आग्रह किया कि वे ताइवान को किसी भी परिस्थिति में पीछे न छोड़े।

सीआरबीसी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने 10 साल पहले रोम अपनी आखिरी यात्रा के बाद इस वर्ष वाटिकन में संत पापा से मुलाकात की और अपने धर्मप्रांतों की प्रगति के बारे बताया।

रोम से लौटने के बाद 15 मई को रेडियो फ्री एशिया द्वारा साक्षात्कार में महाधर्माध्यक्ष हंग ने कहा कि उन्होंने बैठक में चीन-वाटिकन राजनयिक संबंधों की स्थापना के बारे में ताइवान की चिंताओं का उल्लेख किया था।

उन्होंने कहा, “जब कभी यह अफवाह सुनने को मिलती है कि वाटिकन और चीन राजनयिक संबंध स्थापित करने जा रहे हैं, तो ताइवान के 23 मिलियन देशवासी बहुत परेशान हो जाते हैं।”

उन्होंने कहा कि ताइवान आर्थिक रुप से गरीब और वंचित देश है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनाथ है, इसलिए इस देश को संत पापा द्वारा ध्यान देने की जरुरत है।

महाधर्माध्यक्ष हंग ने कहा, “मैंने संत पापा को बताया कि मुझे आशा है कि वे [वाटिकन] हमें चीन के हिस्से के रूप में न देखें और न ही हमें उनके साथ नहीं मिलायें। वे राजनयिक संबंध स्थापित कर सकते हैं, लेकिन ताइवान के अधिकारों और हितों का त्याग नहीं किया जाना चाहिए।”

रोम में सात ताइवान धर्माध्यक्षों ने पाँच वर्षीय पारम्परिक मुलाकात के दौरान 14 मई को संत पापा फ्राँसिस से मुलाकात की थी। उन्होंने उन्हें अगले मार्च ताइवान में आयोजित युखारीस्तीय कांग्रेस में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। महाधर्माध्यक्ष हंग ने कहा कि यदि संत पापा कांग्रेस में भाग नहीं ले सकते हैं तो ताइवान की कलीसिया के लिए अपना वीडियो संदेश भेजने की कृपा करें।


(Margaret Sumita Minj)

हिंसक अतिवाद के खिलाफ मिंदानाओ के धार्मिक नेता एकजुट

In Church on May 23, 2018 at 2:57 pm

मनिला, बुधवार 23 मई 2018 (उकान) : मिंदानाओ में धार्मिक नेताओं ने आतंकवादी बंदूकधारियों द्वारा दक्षिणी फिलीपीन शहर मारावी पर 23 मई के हमले की पहली सालगिरह से पहले “हिंसक अतिवाद” के खिलाफ एक एकीकृत मोर्चा घोषित कर दिया है।

पांच महीने के संघर्ष में एक हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और इसके परिणामस्वरूप मुख्य रूप से मुस्लिम शहर और इसके आसपास के शहरों और गांवों के लगभग 400,000 निवासियों को विस्थापित होना पड़ा था।

एक घोषणापत्र में मिंदानाओ के लोगों को “पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता … विश्वास और पारस्परिक देखभाल के संबंध” की घोषणा की गई।

साथ ही इस बात पर गौर किया गया कि मारावी में संघर्ष से पहले, स्थानीय ख्रीस्तीय और मुस्लिम समुदायों के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंध थे।

काथलिक धर्माध्यक्ष, पुरोहित, मुस्लिम विद्वानों और धार्मिक नेताओं द्वारा हस्ताक्षरित घोषणापत्र में लिखा था, “हम सभी हिंसक अतिवाद के खिलाफ हैं।”

यह कहा गया है कि सशस्त्र समूहों में शामिल होने का आकर्षण विशेष रूप से युवा मुसलमानों के बीच महसूस किया गया है, जिनके वादों को पूरा करने में सरकार विफल रही है।

एक बयान में, कागायन डी ओरो के महाधर्माध्यक्ष अंतोनियो लेडसमैन ने आशा व्यक्त की कि मारावी हमले की सालगिरह “ख्रीस्तीय और मुस्लिम दोनों के लिए विकास और शांति की संस्कृति बनाने में एक साथ काम करने के लिए एक स्पष्ट बुलावा है।

महाधर्माध्यक्ष अंतोनियो ने हाल ही में उन मुद्दों पर चर्चा करने के लिए 12 ख्रीस्तीय पुरोहितों और 12 मुस्लिम मौलवियों  की सभा की मेजबानी की जो वे सरकार के साथ चर्चा करना चाहते थे।

धार्मिक नेताओं ने अपने बयान में कहा, “मुस्लिम और ख्रीस्तीय धार्मिक नेताओं को मिंदानाओ और बाकी देश में शांति की संस्कृति को बनाने के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए।”

उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि विस्थापित मारावी निवासियों को अपने शहर के पुनर्निर्माण में भाग लेने की अनुमति दी जाए। धार्मिक नेताओं ने कहा, “पड़ोसी शहरों में अपने रिश्तेदारों के साथ या विस्थापित केंद्रों में पहले से ही उन्हें बहुत पीड़ा हुई है।”

उन्होंने “शांति शिक्षा” को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा संस्थानों, विशेष रूप से मदरसा, या इस्लामी स्कूलों में अपनी भूमिका भी निभाई।

धार्मिक नेताओं ने कहा, “मिंदानाओ में सभी हितधारकों को दीर्घकालिक समाधान ढूँढ़ने की जरूरत है।”

अक्टूबर में समाप्त हुई लड़ाई के परिणामस्वरूप 974 आतंकवादियों, 168 सैनिकों और पुलिसकर्मियों और 47 नागरिकों की मौत हुई।

सरकारी सेना बल अभी भी उन विस्फोटक उपकरणों को ढूँढ़ निकालने के लिए अभियान का संचालन कर रही हैं जो आतंकवादियों द्वारा छोड़े गए थे।

अधिकारियों ने लड़ाई से प्रभावित 24 गांवों में से 85 प्रतिशत स्थानों का निरीक्षण पूरा कर दिया है।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा चिली के यौन दुर्व्यवहार पीड़ितों के दूसरे दल के साथ मिलेंगे

In Church on May 23, 2018 at 2:55 pm


वाटिकन सिटी, बुधवार 23 मई 2018 (रेई) : वाटिकन प्रेस कार्यालय ने घोषणा की कि संत पापा फ्राँसिस 1 से 3 जून तक फादर फर्नांडो करदीमा के यौनपीड़ितों के दूसरे दल के साथ मिलेंगे।

वाटिकन प्रेस कार्यालय द्वारा आज जारी किए गए एक सूचना में, चिली में साग्रादो कोराज़ोन डे प्रोविडेंसिया (“एल बोस्क”) पल्ली में फादर करदीमा के यौनदुराचार पीड़ितों तथा उनके सहायकों के साथ जून के आरंभ में संत पापा फ्राँसिस मिलेंगे।

दूसरे दल के सदस्य

समूह में 5 पुरोहित हैं जो “शक्ति, विवेक और यौन शोषण के दुरुपयोग” के पीड़ित थे, साथ ही 2 पुरोहित जिन्होंने “न्यायिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया में पीड़ितों की सहायता की है और यौन दुर्व्यवहार पीड़ितों में से दो जन को इस दल में शामिल किया है।” इस दल को उसी भवन संत मार्था में आतिथ्य प्रदान किया जाएगा जहां संत पापा फ्राँसिस रहते हैं।

संवाददाता ने बताया कि इन लोगों में से अधिकांश ने फरवरी में महाधर्माध्यक्ष चार्ल्स स्किकलुना और फादर जॉर्डि बर्टोमू के साथ चिली में हुई बैठकों में भी हिस्सा लिया था। दूसरों ने उनकी यात्रा के कुछ सप्ताह बाद सहयोग किया।

बैठक के बारे में विशिष्टता

प्रेस कार्यालय ने कहा कि आगामी जून की बैठक एक महीने पहले निर्धारित की गई थी क्योंकि “संत पापा फ्राँसिस दुर्व्यवहार पीड़ित पुरोहितों के साथ अपनी निकटता का प्रदर्शन करना चाहते हैं, उनके दर्द में उनके साथ और उनका बहुमूल्य राय सुनना चाहते हैं ताकि कलीसिया में दुर्व्यवहार के खिलाफ लड़ाई और उसमें सुधार के उपायों की खोज की जा सके।” इस प्रकार बैठक के पहले चरण में संत पापा फ्राँसिस साग्रादो कोराज़ोन डे प्रोविडेंसिया पल्ली से पीड़ितों के साथ रहेंगे।

सभी बैठकें “विश्वास और गोपनीयता के माहौल में” आयोजित की जाएंगी। 2 जून शनिवार की सुबह को, संत पापा अपने निवास संत मार्था में व्यक्तिगत तौर पर मिस्सा करेंगे। दोपहर में, पूरे दल के साथ एक बैठक निर्धारित की गई है जिसके बाद संत पापा व्यक्तिगत रुप से उनसे मुलाकात करेंगे।

संत पापा ने चिली के विश्वासियों से इन पुरोहितों के प्रेरितिक कायों को करने को लिए उनका सहयोग और प्रार्थना की मांग की है।


(Margaret Sumita Minj)

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