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परिवार का स्वास्थ्य कलीसिया एवं विश्व के लिए महत्वपूर्ण

In Church on May 25, 2018 at 3:42 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 25 मई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 25 मई को वाटिकन स्थित पौल षष्ठम सभागार में रोम के पुलिस अधिकारियों एवं उनके परिवार वालों के साथ मुलाकात की तथा उन्हें परिवार के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्हें सम्बोधित कर उन्होंने कहा, “परिवार पहला समुदाय है जहाँ व्यक्ति प्रेम करना सिखता एवं सिखाता है। यह एक अनुकूल परिस्थिति होती है जहाँ व्यक्ति विश्वास करना और भलाई करना सीखता है। आज दैनिक जीवन में उठने वाली समस्याओं एवं चुनौतियों को देखने से लगता है कि परिवार का स्वस्थ होना, विश्व एवं कलीसिया के भविष्य के लिए अति आवश्यक है। वास्तव में, जब हम किसी कड़वी सच्चाई का सामना करते हैं, दुःख, बुराई अथवा हिंसा से होकर गुजरते हैं तब यह परिवार ही है जहाँ एक साथ, प्रेम से, उन्हें समझा एवं उनका समाधान निकाला जा सकता है।

हर मानवीय सच्चाई की तरह परिवार भी कई प्रकार की पीड़ाओं से घिरा है। संत पापा ने बाईबिल का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जैसे, इसाहाक एवं याकूब, दाऊद की कठिनाईयाँ, तोबित एवं योब की पीड़ाएँ, साथ ही साथ पवित्र परिवार की कठिन परिस्थितियाँ।

येसु ने उन लोगों के दूःखों को हमेशा दूर किया जो पीड़ित एवं लाचार थे। येसु के इन्हीं उदाहरणों का अनुसरण करते हुए कलीसिया, अपने प्रतिदिन की यात्रा में परिवारों की परेशानियों, तनावों, घरेलू हिंसा, आर्थिक तंगी और काम की व्यस्तता को समझती है। वह प्रतिदिन सुसमाचार पर चिंतन करते हुए पवित्र आत्मा से संचालित होकर परिवारों के करीब रहती है, विशेषकर, जो लोग किसी प्रकार के संकट अथवा दुःख से होकर गुजर रहे हैं तथा उन्हें अंतिम लक्ष्य की ओर इंगित कर आशा दिलाती है कि वहाँ न तो कोई दुःख और परेशानी होगी, बल्कि सब कुछ समाप्त हो जाएगा।

जीवन के रास्ते पर येसु हमें कभी नहीं छोड़ते, वे हमें जानते और दया से हमारा साथ देते हैं, विशेषकर, उन परिवारों को पवित्र करते हैं जो प्रेम से जीते हैं। उनकी उपस्थिति बच्चों के प्रति माता-पिता की कोमलता, स्नेह और आलिंगन से प्रकट होता है। परिवार कोमलता का स्थान है यही कारण है कि ईश्वर अपने को एक पिता के रूप में प्रकट करते हैं। वे अपने को माता के रूप में भी प्रकट करते जो हमारी देखभाल करते तथा हमें खिलाने-पिलाने हेतु हमारे पास आते हैं।

कलीसिया जो एक अच्छी माता है हमें शिक्षा देती है कि हम ईश्वर में दृढ़ बने रहें, जो हमें प्यार करते और हमें तृप्त करते हैं। इस आंतरिक अनुभव के साथ हम सभी विरोधाभासों एवं दुनिया की चुनौतियों का सामना करने हेतु आगे आयें तथा अपने एवं दूसरों की गलतियों को पहचाने। संत पापा ने कहा कि इसी आंतरिक एहसास के द्वारा ही हम हर प्रकार की बुराईयों पर विजय पा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि परिवार में ही विश्वास का हस्तांतरण होता है। हम यहाँ प्रार्थना करना सीखते हैं तथा आशा के लिए अपने को खोलते हैं जिसमें सच्चा आनन्द होता है जो लोगों की कमजोरियों से अवगत होते हुए भी उनके साथ गहरा संबंध स्थापित करने तथा जीवन की यात्रा में एक साथ चलने और एक-दूसरे का साथ देने से उत्पन्न होता है।

संत पापा ने आज की बदलती परिस्थितियों से अवगत कराते हुए कहा कि हम जिस युग में जी रहे हैं वह परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। हम इसे अपने कामों में लगातार अनुभव कर सकते हैं। ऐसी परिस्थिति में पारिवारिक अनुभव हमें मदद कर सकता है क्योंकि यह हमें मानवीय संतुलन, प्रज्ञा तथा उदाहरण का महत्व प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि एक अच्छा परिवार सामाजिक मूल्य को आगे ले चलता है, समाज का हिस्सा होने का अनुभव देने के लिए शिक्षा देता है, ईमानदार नागरिक बनाता है। एक राष्ट्र तब तक खड़ा नहीं रह सकता जब तक कि उसके परिवार अपने कर्तव्यों को पूरा न करें। नागरिक शिक्षा सबसे पहले परिवार में ही मिलनी चाहिए।

संत पापा ने सभी पुलिस अधिकारियों एवं उनके परिवार वालों के लिए प्रार्थना की कि उनके परिवार खासकर पुलिस स्टेशन रूपी बृहद परिवार को नाजरेथ परिवार एवं संत माईकेल महादूत तथा उनके संरक्षक संत द्वारा मदद मिले।


(Usha Tirkey)

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विवाह ईश्वर का प्रतीक, संत पापा

In Church on May 25, 2018 at 3:40 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 25 मई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने विश्वासियों को निमंत्रण दिया है कि वे विवाह एवं परिवारिक जीवन में चुनौतियों के बावजूद, विवाह की सुन्दरता पर ध्यान दें।

वाटिकन स्थित प्रेरित आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में शुक्रवार को संत पापा ने विवाह की 25वीं और 50वीं सालगिराह मनाने वालों के लिए ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

संत मारकुस रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने फरीसियों के मनोभाव पर प्रकाश डाला जिन्होंने येसु से एक प्रश्न इसलिए किया ताकि उनकी परीक्षा लें।

फरीसियों ने जो प्रश्न उठाया वह विवाह से संबंधित था, वे जानना चाहते थे कि क्या एक पति का अपनी पत्नी को तलाक देना संहिता विरूद्ध है? संत पापा ने कहा कि येसु उनके वैधता के नियम के परे जाते तथा सृष्टि के आरम्भ में जाकर उन्हें विवाह के सच्चे महत्व के बारे समझाते हैं जो सात दिनों की सृष्टि में शायद सबसे बड़ी रचना थी।

संत पापा ने कहा, “सृष्टि के आरम्भ से ही ईश्वर ने नर और नारी बनाया। यही कारण है कि पुरूष अपने माता-पिता को छोड़ेगा और अपनी पत्नी के साथ रहेगा और वे दोनों एक हो जायेंगे। सुसमाचार में येसु के शब्द बहुत कड़े हैं। वे एक शरीर की बात करते हैं जिसको विभाजित नहीं किया जा सकता। वे तलाक की समस्या को दूर करते हैं एवं विवाह की सुन्दरता को प्रस्तुत करते हैं जिन्हें एक होना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि हमें संहिता के उन पंडितों की तरह नहीं करना चाहिए जो हाँ तो हाँ और नहीं तो नहीं तक सीमित थे। कभी-कभी युद्ध से बचने के लिए विच्छेद करना सही लगता है किन्तु यह दुर्भाग्यपूर्ण है ऐसे समय में व्यक्ति को पीछे जाकर साकारात्मक पक्ष पर गौर करना चाहिए।

संत पापा ने कहा कि यह सच है कि कठिनाईयाँ हैं, बच्चों के साथ अथवा दम्पति के बीच समस्याएँ हैं, तनाव अथवा विवाद है किन्तु महत्वपूर्ण है कि शरीर एक है और उन सभी समस्याओं से बाहर निकला जा सकता है। विवाह संस्कार न केवल उनके लिए है किन्तु कलीसिया के लिए भी है। संत पापा ने प्रेम को सभी समस्याओं का समाधान बतलाते हुए कहा कि प्रेम हमें सम्पूर्ण जीवन को एक साथ जीने के काबिल बनाता है। आनन्द और दुःख, बच्चों की समस्याओं और खुद अपनी समस्याओं में भी प्रेम बल प्रदान करता है। इस प्रकार बीमारी और स्वस्थ हर परिस्थिति में वे आगे बढ़ सकते हैं।

पुरूष और स्त्री ईश्वर के स्वरूप में गढ़े गये हैं जिसके कारण विवाह भी ईश्वर का प्रतीक बन जाता है जो विवाह को और सुन्दर बना देता है। संत पापा ने कहा कि विवाह एक मौन उपदेश है, हरेक दिन का उपदेश है।

संत पापा ने खेद प्रकट करते हुए कहा कि यह एक महत्वपूर्ण समाचार है कि दम्पति कई सालों तक एक साथ जीवन व्यतीत करते हैं किन्तु टीवी और समाचार पत्र इसे प्रकाशित नहीं करते, वे केवल ठोकर, तलाक एवं विभाजन की खबरों को ही प्रकाशित करते हैं। वे इन्हीं को समाचार मानते हैं। ईश्वर का प्रतिरूप समाचार नहीं भी है फिर भी यह विवाह की सुन्दरता है अतः यह ख्रीस्तीय समाचार है।

संत पापा ने परिवारों की समस्याओं पर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि वैवाहिक एवं परिवारिक जीवन आसान नहीं है। दम्पतियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सदगुण है धीरज।

संत पापा ने प्रार्थना की कि प्रभु कलीसिया एवं समाज में विवाह की गहरी और सुन्दर समझ प्रदान करे ताकि हम ईश्वर के उस प्रतीक की सराहना कर सकें एवं उनकी उपस्थिति पर चिंतन कर सकें।


(Usha Tirkey)

धिक्कार उन लोगों को जो मजदूरों का शोषण करते हैं, संत पापा

In Church on May 25, 2018 at 3:39 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 25 मई 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ “धिक्कार तुम्हें यदि तुम कर चुकाने से बचकर लोगों का एवं उनके कामों का शोषण करते हो, उनका पेंशन फंड नहीं भरते तथा छुट्टियों के वेतन काट लेते हो। दूसरों का शोषण करना आत्मामारू पाप है।” उक्त बात संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में बृहस्पतिवार को ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

प्रवचन में संत पापा ने प्रेरित संत याकूब के पत्र से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जहाँ कहा गया है कि श्रमिकों की अवैतनिक मजदूरी पुकारती है तथा यह आवाज प्रभु के कानों तक पहुँचती है।

चीन स्थित शेशान की माता मरियम के पर्व दिवस पर ख्रीस्तयाग में, संत पापा ने चीन के लोगों के लिए विशेष प्रार्थना अर्पित की तथा निमंत्रण दिया कि वे धनी लोगों के लिए प्रार्थना औरहुँचतीहम गुलाम बन जाते हैं। चेतावनी दी क्योंकिगुलाम बन जाते हैं. प्राथअपने सारे हृदय से प्यार करो। धनी ईश्वर की दूसरी आज्ञा के  तपस्या करें क्योंकि धन गुलाम बनाता है। येसु चेतावनी देते हैं कि हम दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकते क्योंकि हम या तो ईश्वर की सेवा कर सकते हैं अथवा धन की।

संत पापा ने कहा कि धर्मग्रंथ धनियों से कठोरता से पेश आता है और यह याद दिलाता है कि येसु ने स्वयं उन्हें धिक्कारा है। धिक्कार तुम्हें जो धनी हो। संत पापा ने कहा कि यदि आज कोई इस तरह उपदेश दे, तो उसे दूसरे ही दिन समाचार पत्रों में छापा जाता कि वह एक पुरोहित साम्यवादी है किन्तु उन्होंने कहा कि निर्धनता सुसमाचार के केंद्र में है। निर्धनता की शिक्षा देना उनके संदेश का केंद्रविन्दु है। “धन्य हैं वे जो गरीब है।” आठ धन्यताओं में यह पहली है। अतः यह उनकी पहचान पत्र है जिसके द्वारा येसु अपने को सभागृह में प्रस्तुत करते हैं। “प्रभु का आत्मा मुझ पर छाया रहता है, क्योंकि उसने मेरा अभिषेक किया है। उसने मुझे भेजा है, जिससे मैं दरिद्रों को सुसमाचार सुनाऊँ, बन्दियों को मुक्ति का और अन्धों को दृष्टिदान का सन्देश दूँ, दलितों को स्वतन्त्र करूँ।”

संत पापा ने निर्धनता पर येसु की कड़ी शिक्षा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धन दौलत एक प्रकार से मूर्ति पूजा के समान है और हमें लालच देता है।

येसु ने स्वयं कहा है कि कोई भी दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि धन व्यक्ति को गुलाम बनाता तथा ईश्वर की पहली आज्ञा का पालन करने नहीं देता है। जो कहता है, अपने प्रभु ईश्वर को अपने सारे हृदय से प्यार करो। धन ईश्वर की दूसरी आज्ञा के विरूद्ध भी जाता है क्योंकि यह लोगों के बीच के आपसी संबंध को तोड़ देता है।

संत पापा ने विश्वासियों से कहा कि धन लोगों को गुलाम बनाता है अतः हमें धनियों के लिए अधिक प्रार्थना एवं त्याग-तपस्या करना चाहिए। धन की गुलामी से मुक्त रहने के लिए हमें उससे दूर रहना एवं प्रभु से प्रार्थना करना है ताकि हम प्रभु के नाम से दूसरों के लिए अच्छा कर सकेंगे।

संत पापा ने धन से सावधान रहने की चेतावनी दी क्योंकि धन हमें प्रलोभन देता और उस प्रलोभन में पड़कर हम गुलाम बन जाते हैं।


(Usha Tirkey)

अफ्रीका दिवस पर नेलशन मंडेला के विरासत की याद

In Church on May 25, 2018 at 3:38 pm

अफ्रीका, शुक्रवार, 25 मई 2018 (वाटिकन न्यूज)˸ 25 मई अफ्रीका के लिए एक महत्वपूर्ण दिवस है क्योंकि सन् 1963 को इसी दिन अफ्रीकी एकता संगठन का गठन किया गया था जो बाद में अफ्रीकी संघ के रूप में विकसित हुआ।

अफ्रीकी एकता संगठन का पहला मिशन था अफ्रीकी देशों को आजादी दिलाना तथा उनके प्रभुत्व, मानव अधिकार एवं प्रतिष्ठा का बचाना जो 60 के दशक में दूसरे देशों के गुलाम थे।

अफ्रीकी संघ में 55 अफ्रीकी राष्ट्र हैं जो अपनी संस्कृति एवं परम्परा के अनुसार आज “अफ्रीका दिवस” मनाते हैं। इस वर्ष यह इसलिए खास है क्योंकि यह अफ्रीकी संघ के जनक नेलशन मंडेला का 100वाँ जन्म दिवस है।

अफ्रीका दिवस के अलावा मंडेला की स्मृति में साल भर कई अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है जिसमें नेलशन मंडेला की विरासत को केंद्र में रखा जाएगा जिसका उद्देश्य है नेलशन मंडेला के सोच के अनुसार समाज के निर्माण पर जोर दिया जाना जिसके लिए उन्होंने अथक प्रयास किया था।

वाटिकन न्यूज़ की पत्रकार लिंडा बोरदोनी से बातें करते हुए इटली के लिए दक्षिण अफ्रीका के राजदूत शिरिश सोनी ने रंगभेद के खिलाफ आंदोलन में, काथलिक कलीसिया के समर्थन पर गौर किया तथा कहा कि इसका बुनियादी मूल्य अब भी अफ्रीका के नेताओं एवं पुलिस अधिकारियों को प्रेरित करता है जो न्याय एवं सामाजिक समानता में विश्वास करते हैं।

राजदूत ने कहा कि संत पापा एक ऐसे व्यक्ति हैं जो गरीबों और शोषितों की परेशानियों को समझते हैं। उन्होंने उनके उस संदेश पर बल दिया जिसमें वे समाज के नेताओं को सामाजिक एवं आर्थिक असमानता से लड़ने का आह्वान करते हैं।

राजदूत ने कहा, “हम विश्वास करते हैं कि कलीसिया में हमारे लिए एक महान नेता हैं और कलीसिया के लोग भलाई करना जारी रखें हैं, वे इसे प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न संस्थाओं के साथ समझौता करेंगे।” उन्होंने कहा कि वे नेलशन मंडेला पर भी विश्वास करते हैं जो एक चमकते हुए आदर्श हैं। संत पापा फ्राँसिस एवं नेलशन मंडेला दोनों के संदेशों में क्षमाशीलता एवं मेल-मिलाप की तेज गुँज सुनाई पड़ती है।

नेलशन मंडेला के भाषण की याद करते हुए उन्होंने कहा कि मंडेला ने कई बार बंदूक एवं हथियारों को फेंकने एवं मेल-मिलाप का आह्वान किया था। क्षमाशीलता की उनकी शिक्षा इसलिए भी अत्यन्त प्रभावशाली थी क्योंकि यह उनके वॉट पाने का साधन नहीं था बल्कि वे जानते थे कि यही सही था।

सोनी ने नेलशन मंडेला के साथ काम करने की याद करते हुए कहा कि वे अपने लोगों की सेवा में इतना अधिक समर्पित व्यक्ति थे कि उनके लिए अपनी जान भी जोखिम में डाल सकते थे।

राजदूत ने कहा कि उनके आदर्शों पर चलते हुए हमें भी बेहतर विश्व के निर्माण के लिए कार्य करना चाहिए। समाज निर्माण की हमारी यात्रा और कठिन परिश्रम जारी है। शांति, प्रजातंत्र, विकास, सुरक्षा एवं स्थायित्व के इस भवन में हमें हर दिन एक ईंट रखने की जरूरत है।


(Usha Tirkey)

कार्डिनल ग्रेसियस ने ख्रीस्तीयों की समस्या पर केंद्रीय गृह मंत्री से बात की

In Church on May 25, 2018 at 3:36 pm

भारत, शुक्रवार, 25 मई 2018 (रेई)˸ भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल ऑस्वल्ड ग्रेसियस ने 24 मई को भारत के केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर, उन्हें भारत के ख्रीस्तीय समुदाय पर बढ़ रही चिंता से अवगत कराया।

एशियान्यूज से मिली जानकारी के अनुसार इस मुलाकात को सौहार्दपूर्ण बतलाया गया है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब देश में 2019 के चुनाव को लेकर तैयारियाँ चल रही हैं। कार्डिनल का केंद्रीय गृहमंत्री के साथ मुलाकात का एक बड़ा कारण है दिल्ली के महाधर्माध्यक्ष अनिल कुटो के पत्र पर विवाद भी है, जिन्होंने वॉट के लिए काथलिकों को प्रार्थना एवं उपवास करने का निमंत्रण दिया था।

8 मई को लिखे प्रेरित पत्र में महाधर्माध्यक्ष ने कहा था कि देश की राजनीतिक स्थिति अशांत है जो हमारे संविधान और हमारे देश के धर्मनिरपेक्ष संरचना में निहित लोकतांत्रिक सिद्धांतों के लिए खतरा खड़ा कर सकता है। इस पत्र एवं महाधर्माध्यक्ष के पद ने भारतीय जनता पार्टियों के सदस्यों में आक्रेश उत्पन्न किया। पार्टी ने महाधर्माध्यक्ष के पत्र को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” परिभाषित किया तथा उनसे अपील की कि वे जाति और समुदाय को उत्तेजित करने से बचें।

राजनाथ सिंह ने कुछ दिनों पहले पत्रकारों को बतलाया था कि देश में असहिष्णुता नहीं है एवं सभी अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं, हालांकि कार्डिनल की चिंता को दो दिनों पूर्व गोवा में एक ईसाई धार्मिक प्रतीक के अपमान द्वारा पुष्टि मिलती प्रतीत होती है।

धार्मिक स्वतंत्रता पर भय की निंदा करने में सरकार की असफलता काथलिकों के लिए चिंता का विषय है।

उधर भारत की काथलिक कलीसिया के सबसे बड़े संगठन, ऑल इंडिया काथलिक यूनियन ने (AICU), दिल्ली के महाधर्माध्यक्ष के प्रयास का समर्थन करते हुए उनके प्रति अपनी एकात्मता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि “उनके साहस और उनकी आध्यात्मिक शक्ति ने उन्हें दलित एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति बढ़ती हिंसा की ओर ध्यान खींचने हेतु प्रेरित किया।” उन्होंने कहा कि सरकार पूजा एवं विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के भय की निंदा करने में अनिच्छा प्रकट करती है जो चिंता का विषय है। कई राज्यों में दलितों को जान से मार डाला जा रहा है। काथलिक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली सरकार ने स्वीकार किया है कि वर्ष 2017 में 822 हिंसक घटनाओं में 111 लोगों को मार डाले जा चुके हैं।

ऑल इंडिया काथलिक यूनियन ने इस बात पर जोर दिया है कि गरीबों की पीड़ा अनदेखी नहीं की जा सकती तथा उन्होंने सभी धर्माध्यक्षों से अपील की है कि वे देश भर के लिए उसी तरह की प्रार्थना का आह्वान करें। उनकी आशा है कि काथलिकों के साथ अन्य सभी धर्मों के नेता भी इस प्रार्थना में भाग लेंगे।


(Usha Tirkey)

जीवन की दो आधारशिलाएँ

In Church on May 25, 2018 at 3:34 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 25 मई 2018 (रेई)˸ हम अपने जीवन में किन चीजों को प्राथमिकता देते हैं। अक्सर हम उन्हीं चीजों को पहला स्थान देते हैं जो हमें आनन्द और सुख प्रदान करते हैं। अत्यधिक व्यस्तता के कारण हम न तो अपने परिवार वालों को अपना समय दे पाते और न ही किसी और को, यहाँ तक कि अपने सृष्टिकर्ता ईश्वर के लिए भी एक क्षण निकालना मुश्किल हो जाता है। आज हमें सोचने की आवश्कता है कि हमारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज क्या है?

संत पापा ने 25 मई को एक ट्वीट प्रेषित कर अपने जीवन पर गौर करने हेतु प्रेरित किया, उन्होंने संदेश में लिखा, “ईश्वर के प्रति प्रेम एवं पड़ोसियों के प्रति प्रेम ही हमारे जीवन की दो आधारशिलाएँ होनी चाहिए।”


(Usha Tirkey)

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