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विवाह ईश्वर का प्रतीक, संत पापा

In Church on May 25, 2018 at 3:40 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 25 मई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने विश्वासियों को निमंत्रण दिया है कि वे विवाह एवं परिवारिक जीवन में चुनौतियों के बावजूद, विवाह की सुन्दरता पर ध्यान दें।

वाटिकन स्थित प्रेरित आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में शुक्रवार को संत पापा ने विवाह की 25वीं और 50वीं सालगिराह मनाने वालों के लिए ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

संत मारकुस रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने फरीसियों के मनोभाव पर प्रकाश डाला जिन्होंने येसु से एक प्रश्न इसलिए किया ताकि उनकी परीक्षा लें।

फरीसियों ने जो प्रश्न उठाया वह विवाह से संबंधित था, वे जानना चाहते थे कि क्या एक पति का अपनी पत्नी को तलाक देना संहिता विरूद्ध है? संत पापा ने कहा कि येसु उनके वैधता के नियम के परे जाते तथा सृष्टि के आरम्भ में जाकर उन्हें विवाह के सच्चे महत्व के बारे समझाते हैं जो सात दिनों की सृष्टि में शायद सबसे बड़ी रचना थी।

संत पापा ने कहा, “सृष्टि के आरम्भ से ही ईश्वर ने नर और नारी बनाया। यही कारण है कि पुरूष अपने माता-पिता को छोड़ेगा और अपनी पत्नी के साथ रहेगा और वे दोनों एक हो जायेंगे। सुसमाचार में येसु के शब्द बहुत कड़े हैं। वे एक शरीर की बात करते हैं जिसको विभाजित नहीं किया जा सकता। वे तलाक की समस्या को दूर करते हैं एवं विवाह की सुन्दरता को प्रस्तुत करते हैं जिन्हें एक होना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि हमें संहिता के उन पंडितों की तरह नहीं करना चाहिए जो हाँ तो हाँ और नहीं तो नहीं तक सीमित थे। कभी-कभी युद्ध से बचने के लिए विच्छेद करना सही लगता है किन्तु यह दुर्भाग्यपूर्ण है ऐसे समय में व्यक्ति को पीछे जाकर साकारात्मक पक्ष पर गौर करना चाहिए।

संत पापा ने कहा कि यह सच है कि कठिनाईयाँ हैं, बच्चों के साथ अथवा दम्पति के बीच समस्याएँ हैं, तनाव अथवा विवाद है किन्तु महत्वपूर्ण है कि शरीर एक है और उन सभी समस्याओं से बाहर निकला जा सकता है। विवाह संस्कार न केवल उनके लिए है किन्तु कलीसिया के लिए भी है। संत पापा ने प्रेम को सभी समस्याओं का समाधान बतलाते हुए कहा कि प्रेम हमें सम्पूर्ण जीवन को एक साथ जीने के काबिल बनाता है। आनन्द और दुःख, बच्चों की समस्याओं और खुद अपनी समस्याओं में भी प्रेम बल प्रदान करता है। इस प्रकार बीमारी और स्वस्थ हर परिस्थिति में वे आगे बढ़ सकते हैं।

पुरूष और स्त्री ईश्वर के स्वरूप में गढ़े गये हैं जिसके कारण विवाह भी ईश्वर का प्रतीक बन जाता है जो विवाह को और सुन्दर बना देता है। संत पापा ने कहा कि विवाह एक मौन उपदेश है, हरेक दिन का उपदेश है।

संत पापा ने खेद प्रकट करते हुए कहा कि यह एक महत्वपूर्ण समाचार है कि दम्पति कई सालों तक एक साथ जीवन व्यतीत करते हैं किन्तु टीवी और समाचार पत्र इसे प्रकाशित नहीं करते, वे केवल ठोकर, तलाक एवं विभाजन की खबरों को ही प्रकाशित करते हैं। वे इन्हीं को समाचार मानते हैं। ईश्वर का प्रतिरूप समाचार नहीं भी है फिर भी यह विवाह की सुन्दरता है अतः यह ख्रीस्तीय समाचार है।

संत पापा ने परिवारों की समस्याओं पर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि वैवाहिक एवं परिवारिक जीवन आसान नहीं है। दम्पतियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सदगुण है धीरज।

संत पापा ने प्रार्थना की कि प्रभु कलीसिया एवं समाज में विवाह की गहरी और सुन्दर समझ प्रदान करे ताकि हम ईश्वर के उस प्रतीक की सराहना कर सकें एवं उनकी उपस्थिति पर चिंतन कर सकें।


(Usha Tirkey)

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