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संत पापा ने मानव जीवन के संबंध में नैतिक मानदंडों का सम्मान करने का आग्रह किया

In Church on May 28, 2018 at 3:44 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 28 मई 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के परमाध्यक्षों के कक्ष में काथलिक डॉक्टरों के अंतर्राष्ट्रीय संघों (एफआईएएमसी) के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।

30 मई से 2 जून तक, ज़ाग्रेब (क्रोएशिया) में (एफआईएएमसी) की 25 वीं कांग्रेस संत पापा के प्रेरितिक उदबोधन “लौदा तो सी पर आधारित मानवीय जीवन की पवित्रता और चिकित्सा का पेशा” विषय पर आयोजित की जाएगी।

संत पापा ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए संघ के अध्यक्ष डाक्टर जॉन ली को उनके परिचय भाषण के लिए धन्यवाद दिया। संत पापा ने कहा, “काथलिक डॉक्टर” के रूप में आपकी योग्यता आपको चिकित्सा कार्यों में सुसमाचार सिद्धांतों को लागू करने के लिए एक स्थायी आध्यात्मिक, नैतिक और जैव-चिकित्सा गठन के लिए प्रतिबद्ध करती है, इस मिशनरी गतिविधि के तहत डॉक्टर और रोगियों के बीच संबंध शुरु होने से उनके स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार होता है। आपका काम मानवीय एकता और ख्रीस्तीय गवाही का एक अनोखा रूप है; वास्तव में, आपका काम विश्वास की भावना से समृद्ध है और यह महत्वपूर्ण है कि आपका संगठन स्वयं को और युवा डॉक्टरों को इन चिकित्सा सिद्धांतों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए प्रतिबद्ध करता है।

काथलिक पहचान उन लोगों के साथ आपके सहयोग से समझौता नहीं करती है, जो एक अलग धार्मिक परिपेक्ष्य में मानव गतिविधि की गरिमा और उत्कृष्टता को उनकी गतिविधि के मानदंड के रूप में पहचानते हैं। कलीसिया जीवन के लिए है और उसकी चिंता यह है कि एक ठोस अस्तित्व की वास्तविकता में जीवन के खिलाफ कुछ भी नहीं होना चाहिए।

उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि वे अपने देशों में या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, न सिर्फ विशेषज्ञ सर्कल में बल्कि संवेदनशील नैतिक मुद्दों जैसे कि गर्भावस्था को समाप्त करने, जीवन के अंत और आनुवांशिक दवाओं पर कानूनी विचार-विमर्श में अपना सहयोग दें।

संत पापा ने “डॉक्टरों और सभी स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों के विवेक की स्वतंत्रता की रक्षा” के लिए चिंता दिखाते हुए कहा, “यह अस्वीकार्य है कि बीमार व्यक्ति की इच्छा पूरी करने के लिए आपकी भूमिका कम हो जाएगी या स्वास्थ्य प्रणाली की जरूरतें जिसमें आप काम करते हैं।”

संत पापा ने कहा कि आज यह आवश्यक और जरूरी है कि काथलिक डॉक्टर की कार्रवाई में निजी और सहयोगी गवाह दोनों के स्तर पर “अचूक स्पष्टता का स्वरुप” हो।


(Margaret Sumita Minj)

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पोंटीफिकल मिशन सोसाइटी के प्रतिनिधियों को संत पापा का वीडियो संदेश

In Church on May 28, 2018 at 3:42 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 28 मई 2018 (वीआर, रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 28 मई को पोंटीफिकल मिशन सोसाइटी की आम सभा की शुरुआत में वहाँ उपस्थित प्रतिनिधियों को अपना वीडियो संदेश दिया।

संत पापा ने प्रतिनिधियों को संबोधित कर कहा कि वे अपने संदेश में कलीसिया के महत्वपूर्ण मिशन को प्रस्तुत करना चाहते हैं जो पोंटीफिकल मिशन सोसाइटी के नाम से बहुत कम जानी जाती है।

शुरुआती समय से ही  सुसमाचार के प्रचार और गवाही देने के लिए प्रतिबद्ध स्थानीय कलीसियाओं के बीच पारस्परिक समर्थन, विश्वव्यापी कलीसिया का संकेत रहा है। दरअसल, जी उठे प्रभु येसु द्वारा अनुप्राणित मिशन,  पृथ्वी के अंतिम छोर तक विश्वास और प्रेम को फैलाने के लिए हर किसी को प्रेरित करता है।

उन्नीसवीं शताब्दी में, मसीह की घोषणा ने नए क्षेत्रों में सुसमाचार का समर्थन करने के लिए प्रार्थना और दया के कार्य करने के विशिष्ट उद्देश्य के साथ मिशनरी कार्यों को करने के लिए एक नया आवेग प्राप्त हुआ। इन कार्यों को संत पापा पियुस ग्यारहवें पायस द्वारा परमधर्मपीठ के रूप में पहचाना गया था। वे इस बात को रेखांकित करना चाहते थे कि कलीसिया के मिशन को ठोस रुप में करने वाले सभी लोग संत पेत्रुस के उत्तराधिकारी के दिल के करीब है और यह आज भी है। इसलिए परमधर्मपीठीय मिशन सोसायटी आज भी बहुत महत्वपूर्ण है। लगभग 200 साल पहले यह शुरू हुई थी। और आज राष्ट्रीय निदेशकों के साथ 120 देशों में मौजूद हैं, जो परमधर्मपीठ के सचिवालय से समायोजित की जाती है।

संत पापा ने पोंटीफिकल मिशन सोसाइटी की महत्ता पर गौर करते हुए कहा,“ पोंटीफिकल मिशन सोसाइटी आज बहुत जरुरी है। क्योंकि सबसे पहसे तो हमें सुसमाचार प्रचार में लगे मिशनरी पुरुषों ओर विलाओं के लिए प्रार्थना करनी है। ‘प्रार्थना’ सबसे पहला मिशनरी कार्य है। इसे हर ख्रीस्तीय कर सकता है और करना चाहिए, और यह सबसे प्रभावी है, भले ही इसे मापा नहीं जा सकता।

वास्तव में, सुसमाचार का मुख्य एजेंट पवित्र आत्मा है, और उसके साथ सहयोग करने के लिए हम बुलाये गये हैं। इसके अलावा, ये कार्य संत पापा के नाम पर सहायता के न्यायसंगत वितरण की गारंटी देते हैं, ताकि विश्व की सभी कलीसियाओं को सुसमाचार प्रचार के लिए, संस्कारों के लिए, अपने पुरोहितों, सेमिनारियों, धर्मप्रचारकों के लिए न्यूनतम सहायता मिलती है।

संत पापा ने इस काम में सहयोग देने हेतु सभी लोगों को प्रोत्साहित करते हुए कहा,“मैं इन मिशन सोसाइटी के काम के माध्यम से सुसमाचार की घोषणा करने के हमारे सामान्य कार्य में सहयोग करने और युवा कलीसियाओं का समर्थन करने हेतु सभी को प्रोत्साहित करता हूँ। कलीसिया का हर ख्रीस्तीय दुनिया के उद्धारकर्ता येसु मसीह के सुसमाचार की खुशी से घोषणा करने में अपना योगदान देता है। इस तरह कलीसिया हर किसी के लिए अपने का खोल देती है।

संदेश के अंत में संत पापा ने सभी प्रतिभागियों को उनके उदार कार्यों और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।


(Margaret Sumita Minj)

जहां कहीं भी प्यार है, वहां ईश्वर है, संत पापा फ्राँसिस

In Church on May 28, 2018 at 3:41 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 28 मई 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने जीवन की क्षणभंगुता में मूल्यवान खजाने को पाने का प्रयास करने की प्रेरणा दी।

सोमवार 28 मई के ट्वीट संदेश में उन्होंने लिखा,“जीवन में कौन सी वस्तु है जो स्थायी रहता है? जीवन में किस चीज का मूल्य है? कौन से खजाने गायब नहीं होते? निश्चित रूप से दो : ईश्वर और हमारे पड़ोसी।”

रविवार 27 मई को कलीसिया ने ‘पवित्रमय त्रित्व’ का महोत्सव मनाया। यह पेंतेकोस्त के बाद के रविवार को मनाया जाता है। इस महोत्सव के अवसर पर संत पापा ने संदेश में लिखा,“पवित्रमय त्रित्व का रहस्य हमें एक दूसरे के साथ, प्यार और साझा करते हुए मिल-जुल कर रहने के लिए आमंत्रित करता है : यह तो निश्चित है कि जहां कहीं भी प्यार है, वहां ईश्वर है।”


(Margaret Sumita Minj)

पवित्र त्रियेक ईश्वर के महापर्व के अवसर पर संत पापा का संदेश

In Church on May 28, 2018 at 3:40 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 28 मई 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 27 मई को, पवित्र त्रियेक ईश्वर के महापर्व के अवसर पर संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा।

अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

आज, पेंतेकोस्त के बाद के रविवार को हम पवित्र तृत्वमय ईश्वर का पर्व मनाते हैं, यह एक ऐसा पर्व है जो हमें येसु ख्रीस्त ईश्वर के रहस्यों पर चिंतन करने तथा उनकी प्रशंसा करने का मौका देता है जो पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के एक जन हैं ताकि हम ईश्वर के प्रेम जिन्होंने हमें अपना जीवन मुफ्त में अर्पित किया और जिसे पूरे दुनिया में फैलाने का आदेश दिया, हम उसे नये विस्मय के साथ मना सकें।

आज के बाईबिल पाठ हमें यह समझने में मदद देते हैं कि ईश्वर अपने अस्तित्व को बहुत अधिक प्रकट करना नहीं चाहते बल्कि वे प्रकट करते हैं कि वे हमारे साथ हैं, हमारे करीब हैं, जो हमसे प्रेम करते, हमारे साथ चलते, हमारे व्यक्तिगत जीवन पर रूचि रखते और हम सभी का ख्याल करते हैं वे छोटों तथा जरूरतमंद लोगों से आरम्भ करते हैं। “ऊपर आकाश में तथा नीचे पृथ्वी पर प्रभु ही ईश्वर है; उसके सिवा कोई और ईश्वर नहीं है।”(विधि. 4,39) इसीलिए हम एक ऐसे ईश्वर पर विश्वास नहीं करते हैं जो दूर और उदासीन है किन्तु इसके ठीक विपरीत जिन्होंने प्रेम से विश्व की सृष्टि की है एवं एक प्रजा बनाया है, जी हाँ, उन्होंने शरीरधारण किया, हमारे लिए मर गये तथा जी उठे एवं पवित्र आत्मा में सब कुछ बदल देते और पूर्णता की ओर ले चलते हैं।

संत पौलुस पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने प्रेमी ईश्वर के इस बदलाव को अनुभव किया जो “पिता” कहलाना, बल्कि “अब्बा” पुकारा जाना चाहते हैं। ईश्वर हमारे पिता है। वे चाहते हैं कि हम अपने को उसी बच्चे की तरह पूर्ण आत्मविश्वास से समर्पित करें जो अपने को उन लोगों के हाथों छोड़ देता है जिन्होंने उसे जीवन दिया है। संत पौलुस पुनः याद करते हैं कि पवित्र आत्मा हमारे अंदर कार्य करता है जिसके कारण हम येसु ख्रीस्त को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में नहीं देखते जिनसे हमारी मुलाकात पहले कभी हुई थी बल्कि हम उनकी करीबी महसूस करते तथा हम ईश्वर द्वारा प्रेम किये गये संतान के आनन्द का अनुभव करते हैं। अंत में, सुसमाचार में पुनर्जीवित ख्रीस्त सदा हमारे साथ रहने की प्रतिज्ञा करते हैं।

संत पापा ने कहा कि उनकी उपस्थिति एवं उनकी आत्मा के सामर्थ्य के द्वारा ही हम उनके मिशन को शांतिमय ढंग से पूरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “उनका मिशन क्या है?” संत पापा ने उत्तर देते हुए कहा, “सभी लोगों के बीच उनके सुसमाचार की घोषणा करना और उसका साक्ष्य देना और इस तरह उनके साथ संबंध बढ़ाना एवं उसके द्वारा मिलने वाले आनन्द को महसूस करना। हमारे साथ चलने के द्वारा ईश्वर हमें आनन्द से भर देते हैं इस तरह आनन्द ख्रीस्तीयों की पहली भाषाशैली बन जाती है।

इसलिये, पवित्र तृत्व का महापर्व हमें उस ईश्वर पर चिंतन करने हेतु प्रेरित करता है जो निरंतर रचना करते, मुक्ति देते तथा पवित्र बनाते हैं जो उनका स्वागत करते, हमेशा प्रेम से और हर प्राणी के लिए, वे अपनी सुन्दरता, अच्छाई एवं सच्चाई की एक किरण को प्रतिबिम्बित करते हैं। उन्होंने मानव के साथ हमेशा चलने का निश्चय किया है और एक प्रजा का निर्माण किया है जो सभी राष्ट्रों एवं सभी लोगों के लिए आशीर्वाद बनेगा, इससे कोई भी बहिष्कृत नहीं होगा। संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तीय पृथक नहीं है किन्तु एक ऐसी जनता है जिसको ईश्वर ने चुना है। उन्होंने कहा कि इस संबंध एवं एकता के बिना कोई भी व्यक्ति ख्रीस्तीय नहीं बन सकता। हम एक प्रजा हैं, ईश्वर की प्रजा।

संत पापा ने प्रार्थना की कि धन्य कुँवारी मरियम हमें दुनिया को साक्ष्य देने के मिशन को आनन्द से पूरा करने में सहायता दें जो प्रेम की प्यासी है। जीवन का अर्थ है असीम प्रेम, पिता का, पुत्र का एवं पवित्र आत्मा का ठोस प्रेम।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएं जारी करते हुए कहा, “कल पियाचेंत्सा में लेओनेल्ला स्गोरबाती की धन्य घोषणा हुई जो कोनसोलाता की मिशनरी धर्मबहन थीं, जिन्हें विश्वास के कारण घृणा से मोगादिशो (सोमालिया) में 2006 में मार डाला गया। सुसमाचार एवं गरीबों की सेवा में उनका जीवन अर्पित हो गया, साथ ही साथ, उनकी शहादत अफ्रीका एवं पूरे विश्व के लिए एक आशा की प्रतिज्ञा का प्रतिनिधित्व करता है। संत पापा ने अफ्रीका के लिए प्रार्थना का आह्वान  करते हुए कहा, “हम एक साथ अफ्रीका के लिए प्रार्थना करें ताकि वहाँ शांति हो।” उसके बाद संत पापा ने विश्वासियों के साथ प्रणाम मरियम प्रार्थना अर्पित की। उन्होंने अफ्रीका की माता मरियम से समस्त अफ्रीका के लिए विशेष प्रार्थना की। तदुपरांत, उन्होंने विभिन्न देशों से आये तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों का अभिवादन करते हुए कहा, “मैं आप सभी रोम तथा विभिन्न जगहों से आये हैं, परिवारों, पल्ली दलों  एवं संगठनों का अभिवादन करता हूँ। खासकर, मैं पोर्तो संत एलपिदियो, नेपल्स, मिलान के ब्रुत्सानों, पादुवा, सापादा के गायक दल तथा अलबा के वेत्सा के युवा।” संत पापा ने गायक दल के सभी सदस्यों को उनके मधुर संगीत के लिए बधाई दी। उसके बाद उन्होंने पोलैंड के तीर्थ यात्रियों का अभिवादन किया एवं पीएकारी स्लास्कीए मरियम तीर्थ में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को आशीर्वाद दिया।

संत पापा ने “राहत दिवस” के अवसर पर जेमेली अस्पताल में एकत्रित सभी कर्मचारियों का अभिवादन किया तथा अपील की कि वे रोगियों की आध्यात्मिक आवश्यकताओं को पहचानें एवं कोमलता से उनका साथ दें।

अंत में संत पापा ने सभी से प्रार्थना का आग्रह करते हुए शुभ रविवार की मंगल- कामनाएँ अर्पित की।


(Usha Tirkey)

संत पापा फ्राँसिस ने अफ्रीका में शांति हेतु प्रार्थना की अपील की

In Church on May 28, 2018 at 3:38 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 28 मई 2018 (वीआर,रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमालिया में ‘विश्वास के कारण नफरत’ का शिकार बनी मिशनरी बहन की शहादत को याद किया और अफ्रीका में शांति के लिए प्रार्थनाओं की मांग की।

संत पापा फ्राँसिस ने रविवार को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में हजारों की संख्या में उपस्थित तीर्थयात्रियों और विश्वासियों के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। इसके बाद संत पापा ने विश्वासियों से अफ्रीकी महाद्वीप में शांति के लिए प्रार्थना में शामिल होने की अपील की।

शनिवार को उत्तर इटली के पाइएन्ज़ा शहर में धर्मबहन लियोनेला सोरगबाती के धन्य घोषणा की याद कराते हुए कहा कि धन्य धर्मबहन लियोनेला सोरगबाती एक कोन्सोलाता मिशनरी थीं, जिसे 2006 में सोमालिया के मोगादिशु में विश्वास के कारण मार डाला गया था।

उन्होंने कहा,” सुसमाचार और गरीबों की सेवा में समर्पित उनका जीवन और उनकी शहादत अफ्रीका और पूरी दुनिया के लिए आशा का प्रतीक है। आइए हम अफ्रीका में शांति के लिए एक साथ प्रार्थना करें।” और संत पापा ने सभी विश्वासियों के साथ मिलकर प्रणाम मरिया का पाठ किया।

धन्य लियोनेला सोरगबाती

धन्य लियोनेला सोरगबाती का जन्म 1 940 में पियाएन्ज़ा के पास एक छोटे से शहर में हुआ था। उन्होंने 1 963 में कोन्सोलता मिशनरी धर्मसमाज में प्रवेश किया और 1970 में धर्मबहन का व्रत धारण किया। उनकी हत्या 17 सितंबर, 2006 को मोगादिशु में हुई और शनिवार, 26 मई को संत प्रकरण हेतु गठित धर्मसंघ के अध्यक्ष कार्डिनल आंजेलो अमातो ने पियाएन्ज़ा के महागिरजाघर में पवित्र युखारीस्तीय समारोह के दौरान उन्हें धन्य घोषित किया।

धन्य लियोनेला के संत प्रकरण हेतु कार्यरत पोस्टुलेटर धर्मबहन रेनाटा कोंटी ने एसआईआर सूचना सेवा को बताया, “केन्या में अपने तीस वर्षों के दौरान, लियोनेला ने युवाओं को भविष्य देने के लिए कई स्कूलों की स्थापना की। उसने सोमालिया में भी ऐसा करने की कोशिश की पर वहाँ का  बहुत ही जटिल परिस्थितियाँ थी। वे हर किसी की जरूरतों के प्रति संवेदनशील थी, उसके भारी शरीर के कारण हम कहते थे कि उसके पास ‘अतिरिक्त’ दिल था। उनके छात्र उनके प्यार और सेवा से बहुत मोहित थे। प्यार से वे उन्हें माँ कहा करते थे। मोगादिशु में उनकी सेवा के कारण, उनपर धर्मांतरण कराने के गलत आरोप की वजह से उनका जीवन जोखिम में था। आखिरकार उनकी हत्या कर दी गई।”


(Margaret Sumita Minj)

संत प्रकरण हेतु गठित धर्मसंघ के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष बेच्चु

In Church on May 28, 2018 at 3:37 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 28 मई 2018 (वीआर, रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार को महाधर्माध्यक्ष जोवान्नी बेच्चु को संत प्रकरण हेतु गठित धर्मसंघ का अध्यक्ष नियुक्त किया। वे अगस्त के अंत में अपने नये पद को ग्रहण करेंगे।

वर्तमान में महाधर्माध्यक्ष बेच्चु वेटिकन राज्य सचिवालय के सामान्य मामलों के विकल्प और माल्टा के संप्रभु आदेश के लिए जिसे माल्टा के नाइट्स के नाम से जाना जाता है, संत पापा के विशेष प्रतिनिधि हैं। वे इस कार्यभार को 29 जून तक संभालेंगे।

इस बीच, वह 29 जून तक राज्य के सचिवालय के सामान्य मामलों के लिए सबस्टिट्यूट और माल्टा के संप्रभु आदेश के विशेष प्रतिनिधि के रूप में जारी रहेगा,

69 वर्षीय इटालियन महाधर्माध्यक्ष बेच्चु उन 14 नये कार्डिनलों में से एक हैं जिन्हें संत पापा फ्राँसिस 29 जून को कार्डिनल मंडल में शामिल करेंगे। महाधर्माध्यक्ष बेच्चु 79 वर्षीय कार्डिनल आंजेलो आमातो के स्थान पर पद ग्रहण करेंगे। कार्डिनल आमातो 2008 से ही संत प्रकरण हेतु गठित धर्मसंघ के अध्यक्षता कर रहे हैं।

महाधर्माध्यक्ष बेच्चु की जीवनी

महाधर्माध्यक्ष बेच्चु का जन्म 2 जून, 1948 को पट्टाडा इटली में हुआ था। कैनन लॉ में स्नातक करने के बाद उन्हें 27 अगस्त, 1972 को ओज़ियेरी धर्मप्रांत के लिए पुरोहिताभिषेक हुआ।

उन्हें 1984 में परमधर्मपीठ के राजनयिक सेवा में शामिल किया गया और मध्य अफ्रीकी गणराज्य, न्यूजीलैंड, लाइबेरिया, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित दुनिया भर के विभिन्न मिशनों में कई सालों तक काम किया।

15 अक्टूबर, 2001 को, संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने उन्हें अंगोला का प्रेरितिक राजदूत नियुक्त किया और एक महीने बाद उन्हें साओ टोमे और प्रिंसिपी का प्रेरितिक राजदूत नियुक्त किया। उसी वर्ष 1दिसंबर को  पट्टादा धर्मप्रांत के लिए उनका धर्माध्यक्षीय अभिषेक हुआ। 23 जुलाई, 2009 को, संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें ने उन्हें क्यूबा के प्रेरितिक राजदूत बनाकर स्थानांतरित कर दिया।  वहाँ से उन्हें वाटिकन राज्य के सचिवालय के सामान्य मामलों के विकल्प के रूप में सेवा देने के लिए पुनः वाटिकन वापस बुलाया गया।  नव निर्वाचित संत पापा फ्रांसिस ने 2013 में पद में उनकी पुष्टि की।

2 फरवरी, 2017 को, संत पापा फ्राँसिस ने माल्टा के संप्रभु आदेश में संकट को हल करने के लिए माल्टा के नाइट्स में उन्हें विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया।


(Margaret Sumita Minj)

अर्जेंटीना के युवाओं को संत पापा का वीडियो संदेश

In Church on May 28, 2018 at 3:36 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार 28 मई 2018 (वीआर, रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने अर्जेंटीना के राष्ट्रीय युवा सम्मेलन के प्रतिभागियों को प्रतिदिन सुसमाचार पढने और उसपर चिंतन करने हेतु आमंत्रित किया।

अर्जेंटीना के रोजारियो में 25 से 27 मई तक राष्ट्रीय युवा सम्मेलन का आयोजन किया गया था। संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 26 मई को 15 मिनट का वीडियो संदेश दिया। संदेश में संत पापा ने प्रश्न किया कि कितने युवा प्रतिदिन कम से कम दो मिनट सुसमाचार पढ़ते हैं। संत पापा ने युवाओं को अपने पॉकिट में हमेशा सुसमाचार की छोटी किताब रखने को कहा जिसे वे दिन में जहाँ कहीं रहें बस में या घर में, अपने पॉकेट से निकालकर दो मिनट के लिए इसे पढ़ें। यह उनके जीवन को बदल देगा। क्योंकि वचन के माध्यम से वे येसु के साथ मुलाकात करते हैं।

संत पापा फ्रांसिस ने एक युवा व्यक्ति के जीवन में उपस्थिति, समुदाय और मिशन के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

उपस्थिति: ‘येसु हमारे साथ है’

उपस्थिति पर चिंतन करते हुए, उन्होंने कहा कि येसु हमेशा हमारे साथ है। येसु ने खुद को हमारा भाई बना दिया और वे हमें अपने और मिशनरियों के प्यार की सभ्यता के उस सुंदर आदर्श को अपनाते हुए अपने जीवन में परिवर्तन लाने हेतु आमंत्रित करते हैं।

उन्होंने कहा कि यह उन परिस्थितियों में किया जा सकता है जो दैनिक जीवन हमें प्रस्तुत करता है। लेकिन हमें प्रार्थना में, वचन और संस्कारों द्वारा येसु के साथ होना चाहिए उसके साथ रहने के लिए अपना देना चाहिए। उन्होंने कहा,“जब आप उनके साथ रहें तो चुप रहें ताकि आप उसकी आवाज़ सुन सकें।”

समुदाय : ‘ईश्वर के लोगों के रूप में आगे बढ़ें’

दूसरे शब्द ‘समुदाय’ पर चिंतन करते हुए संत पापा फ्राँसिस ने कहा,“इतिहास लोगों से बनता है विचारधारा नहीं। “हम एक समुदाय हैं; हम कलीसिया हैं। ईश्वर के लोग कलीसिया हैं, जिसमें  युवा, बुजुर्ग, दुर्बल, स्वस्थ, और पापी सभी लोग शामिल हैं, जो हम सभी हैं! … हम सभी एक साथ ईश्वर के लोगों के  रूप में आगे बढ़ें।”

संत पापा ने युवाओं पर धर्माध्यक्षों की आगामी धर्मसभा का भी उल्लेख किया और कहा कि कलीसिया “एक विशेष समय” से गुजर रही है। उन्होंने अर्जेंटीना के युवा लोगों को दिल से भाग लेने के लिए आमंत्रित करते हिए कहा, “पापा आपको सुनना चाहते है। संत पापा विश्वास को नवीनीकृत करने और सुसमाचार मिशन को पुनर्जीवित करने के लिए वार्तालाप के नए मार्गों को एक साथ ढूढ़ना चाहते हैं।”                                                                                                                                                                                                       मिशन : ‘कलीसिया के रूप में बाहर निकलें’

संत पापा फ्राँसिस ने विश्ववयापी कलीसिया के मिशन  पर प्रकाश डालते हुए कहा,”हम कलीसिया के मिशन को करने के लिए बुलाए गये हैं : एक मिशनरी कलीसिया अपने आरामदायक जीवनशैली और दृष्टिकोण में बंद नहीं रहती, लेकिन दूसरे से मिलने के लिए बाहर निकलती है।”

संत पापा ने कहा, “इस समय येसु हमें सभी पुरुषों और महिलाओं के पास भेजते हैं और येसु स्वयं हमारे साथ उनसे मिलने आते हैं।”

अपने अतीत के आधार पर भविष्य का निर्माण करें

अंत में, संत पापा फ्राँसिस ने युवा लोगों से कहा कि वे कलीसिया के भविष्य हैं और उनका भविष्य “ठोस और उपजाऊ” होना चाहिए, जिसकी जड़ें मजबूत हों।

उन्होंने कहा, “अपनी जड़ों की ओर लौटें,” इन मजबूत जड़ों में आप अपने जीवन का ढोस आधार बनायें और आगे बढें। अपनी मातृभूमि, अपने परिवार या अपने दादा दादी के इतिहास को कभी इनकार न करें। अपने जड़ों की तलाश करें, अपने अतीत को ढूँढें और वहां से, अपना भविष्य बनाएं।”


(Margaret Sumita Minj)

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