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परीक्षा की घड़ी दुनियादारी की ओर न लौटें वह हमारी स्वतंत्रता छीन लेता है

In Church on May 29, 2018 at 3:52 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 29 मई 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने पवित्रता की ओर आगे बढ़ने एवं दुनिया के तौर-तरीकों की ओर नहीं लौटने का आह्वान किया।

29 मई को वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा ने कहा कि परीक्षा की घड़ी हम दुनिया की ओर न लौटें क्योंकि वह हमारी स्वतंत्रता छीन लेता है बल्कि हम पवित्रता के रास्ते पर आगे बढ़ते रहें।

प्रवचन की शुरूआत संत पापा ने संत पेत्रुस के पत्र से लिए गये पाठ से की जिसमें संत पेत्रुस पवित्रता के मार्ग पर चलने का निमंत्रण देते हैं। संत पापा ने कहा, “पवित्रता के लिए बुलाहट जो एक सामान्य बुलावा है यह एक ख्रीस्तीय जीवन जीने का निमंत्रण है और ख्रीस्तीयों की तरह जीने का अर्थ उसी तरह जीना है जिस तरह संतों ने जिया। कई बार हम पवित्रता को एक असाधारण बुलाहट के रूप में देखते हैं।” पवित्रता का अर्थ है उस रास्ते पर चलना जिसे प्रभु हमें बतलाते हैं तथा पेत्रुस के अनुसार अपनी पूर्ण आशा उस कृपा में डाल देना जो हमें येसु ख्रीस्त द्वारा तब प्रदान किया जाएगा जब वे प्रकट हो जायेंगे।

“पवित्रता की ओर बढ़ने” का मतलब है उस कृपा की ओर बढ़ना जो हमें मिलने वाली है, तनाव की घड़ी येसु से मुलाकात की आशा बनाये रखना है। यह उस प्रकाश की ओर चलने के समान है जिसमें बहुत अधिक रोशनी होने के कारण रास्ता दिखाई नहीं पड़ता क्योंकि हमारी आँखें चौंधिया जाती हैं जबकि वास्तव में, प्रकाश के पीछे चलने पर हमें रास्ता साफ साफ देखाई पड़ता है किन्तु हमारे आगे छाया पड़ जाता है।

संत पापा ने कहा कि पवित्रता की ओर बढ़ें जिसके लिए स्वतंत्र होने की आवश्यकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि कई चीजें हैं जो हमें गुलाम बना लेते हैं। यही कारण है कि संत पेत्रुस अह्वान करते हैं कि हम अपनी उन इच्छाओं का अनुसरण न करें जिनको हमने अज्ञानतावश महसूस किया था।

संत पापा ने सलाह दी कि हम दुनियावी तरीके से सोचने एवं न्याय करने से बचें क्योंकि यह हमारी स्वतंत्रता छीन लेता है।

निर्गमन ग्रंथ का हवाला देते हुए संत पापा ने कहा कि कितने इस्राएली लोगों ने मुक्ति की ओर देखने से इन्कार किया। उन्होंने शिकायत की तथा मिस्र में बीताये जीवन की याद की। उसी तरह विपत्ति की घड़ी में लोग पहले की स्थिति मे लौट जाते हैं और अपनी स्वतंत्रता खो देते हैं। यह सच था कि इस्राइलियों ने वहाँ अच्छा भोजन किया था किन्तु दासों की मेज पर।

संत पापा ने कहा कि हम भी विपत्ति की घड़ी में दुनियादारी की ओर वापस लौट जाना चाहते हैं किन्तु उसमें स्वतंत्रता नहीं है जबकि स्वतंत्रता के बिना संतों की राह पर आगे बढ़ना संभव नहीं है। पवित्रता में आगे बढ़ने की शर्त है ज्योति को देखना। प्रभु कहते हैं पवित्र बनो क्योंकि मैं पवित्र हूँ।

संत पापा ने विश्वासियों को प्रोत्साहन दिया कि वे पवित्रता के रास्ते को अच्छी तरह समझ पाने की कृपा के लिए प्रार्थना करें।


(Usha Tirkey)

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जून, जुलाई एवं अगस्त महीनों में संत पापा फ्राँसिस के कार्यक्रम

In Church on May 29, 2018 at 3:50 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 29 मई 2018 (रेई)˸ वाटिकन ने जून, जुलाई एवं अगस्त महीनों में संत पापा फ्राँसिस के कार्यक्रमों को प्रकाशित किया है।

जून

प्रकाशित जानकारी के अनुसार संत पापा, 3 जून, रविवार संध्या 6.00 बजे, ऑस्तिया के संत मोनिका गिरजाघर में ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे तथा ख्रीस्त के पवित्र देह एवं रक्त के महापर्व के अवसर पर बोनारिया के माता मरियम गिरजाघर की ओर शोभायात्रा कर यूखरिस्तीय आशीष प्रदान करेंगे।

21 जून, बृहस्पतिवार, जेनेवा में ख्रीस्तीय एकतावर्धक तीर्थयात्रा।

28 जून, बृहस्पतिवार, वाटिकन में शाम 4.00 बजे नये कार्डिनलों का चुनाव।

29 जून, शुक्रवार, प्रेरित संत पेत्रुस एवं पौलुस का पर्व, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में, प्रातः 9.30 बजे समारोही मिस्सा।

संत पेत्रुस महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग अर्पण तथा पालिया की आशीष एवं नये महाधर्माध्यक्षों को पालिया वितरण।

जुलाई

7 जुलाई, शनिवार, बारी में ख्रीस्तीय एकता प्रार्थना सभा में मध्य पूर्व के लिए शांति हेतु प्रार्थना।

अगस्त

25 -26 अगस्त, परिवारों की विश्वसभा के अवसर पर डबलिन की प्रेरितिक यात्रा।


(Usha Tirkey)

ऑस्तिया में आनन्द और मुक्ति की आशा के साथ संत पापा का इंतजार

In Church on May 29, 2018 at 3:48 pm

रोम, मंगलवार, 29 मई 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ 3 जून को संत पापा फ्राँसिस इटली स्थित ऑस्तिया जाकर ख्रीस्त के पवित्रतम शरीर का महापर्व मनायेंगे जिसका इंतजार वहाँ के विश्वास आनन्द और मुक्ति की आशा के साथ कर रहे हैं। यह वही स्थान है जहाँ 50 वर्षों पूर्व संत पापा पौल षष्ठम ने ख्रीस्त के पवित्रतम देह (कोरपुस ख्रीस्ती) का महापर्व मनाया था।

समुद्र के किनारे बसा यह जिला विगत कुछ वर्षों में अपराधिक संगठनों के कार्यों से प्रभावित है किन्तु वहाँ के समाज एवं काथलिकों में आशा है कि वे उससे मुक्त किये जायेगें।

संत पापा का स्वागत करने में संत मोनिका गिरजाघर के विश्वासी सबसे आगे रहेंगे जहाँ संत पापा ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे। उसके बाद वे शोभायात्रा के साथ संत बोनारिया पल्ली की ओर आगे बढ़ेंगे जो नये ऑस्तिया क्षेत्र में पड़ता है।

संत मोनिका के पल्ली पुरोहित मोनसिन्योर जोवन्नी फालबो ने कहा कि संत पापा फ्राँसिस की यह यात्रा ऑस्तिया के प्रति उनके सामीप्य एवं प्रेम का चिन्ह है। उनके अनुसार, यह सबसे बढ़कर ऑस्तिया में हो रहे महान अच्छाई का प्रतीक है खासकर, पल्ली समुदाय का समर्पण जो उन परिवारों से भी मुलाकात करता है जहाँ आपत्ति जनक स्थिति है।

पल्ली पुरोहित ने इस बात को रेखांकित किया कि संत मोनिका समुदाय खास तैयारी कर रही है क्योंकि वहीँ पल्ली प्राँगण में ख्रीस्तयाग अर्पित किया जाएगा जैसा कि संत पापा जोन पौल द्वितीय ने 8 मई 1983 को किया था।

फादर जोवन्नी ने वाटिकन न्यूज को बतलाया कि वहाँ हर कोई संत पापा के करीब होना चाहेंगा किन्तु संत पापा ने सलाह दी है कि ख्रीस्त के शरीर एवं यूखरिस्त संस्कार पर ध्यान केंद्रित किया जाए।

74 वर्षीय पुरोहित ने 13 जून 1968 में संत पापा पौल षष्ठम की ऐतिहासिक मुलाकात की भी याद की जब वे एक युवा पुरोहित थे। उस अवसर पर संत पापा ने संत मोनिका पल्ली गिरजाघर के मील पत्थर की आशीष की थी।


(Usha Tirkey)

पवित्र यूखरिस्त की महत्ता

In Church on May 29, 2018 at 3:46 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 29 मई 2018 (रेई)˸ हर रविवार को अथवा संभव हो तो प्रत्येक दिन यूखरिस्त में भाग लेना ख्रीस्तीयों का एक मुख्य धार्मिक कार्य है। कलीसिया इस बात पर जोर देती है कि हम अच्छी तैयारी एवं पूर्ण भक्ति के साथ इसमें भाग लें। यह एक महान संस्कार है क्योंकि इसकी स्थापना स्वयं येसु ख्रीस्त ने की है और इसके माध्यम से वे हमें आध्यात्मिक भोजन प्रदान करते हैं।

संत पापा फ्राँसिस ने 29 मई के ट्वीट संदेश में पवित्र यूखरिस्त की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यूखरिस्त हमें शक्ति प्रदान करता है ताकि हम अच्छे कार्यों का फल उत्पन्न कर सकें एवं सच्चा ख्रीस्तीय जीवन जी सकें।”


(Usha Tirkey)

स्टरलाइट प्लांट पर स्थायी सील लगाने का आदेश

In Church on May 29, 2018 at 3:45 pm

तमिलनाडु, मंगलवार, 29 मई 2018 (मैटर्स इंडिया)˸ तमिलनाडु सरकार ने सोमवार को तूतिकोरिन स्थित वेदांता समूह की कंपनी स्टरलाइट को सील करने और उसे “स्थायी रूप से बंद करने” के लिए सरकारी आदेश जारी किया।

पिछले हफ्ते तूतिकोरिन में 13 लोग मारे गए थे जब पुलिस ने स्टरलाइट विरोधी प्रदर्शनकारियों पर गोली चला दी थी, जो “प्रदूषण” संयंत्र को बंद करने के लिए समाहर्ता कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे।

तमिलनाडु सरकार का यह आदेश मंगलवार को शुरू होने वाले विधानसभा सत्र की पूर्व संध्या पर जारी किया गया, जिसे स्टरलाइट के ख़िलाफ़ चलाए गए विरोध प्रदर्शनों के लिए एक अच्छे चिन्ह के रूप में देखा जा रहा है।

तूतिकोरिन के कलेक्टर संदीप नंदुरी ने कहा, “हमने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार इस संयंत्र को सील कर दिया है”। उन्होंने कहा, “प्लांट स्थायी रूप से बंद कर दिया गया है तथा कोई और भ्रम नहीं है। मैं तूतिकोरिन के लोगों से अनुरोध करता हूँ कि वे जिला में सामान्य स्थिति लाने के लिए प्रशासन के साथ सहयोग करें।”

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई.के. पलानीसामी ने एक वक्तव्य में कहा कि तूतिकोरिन की जनता प्लांट का विरोध कर रही थी और वह उसके स्थायी सील की मांग कर रही थी क्योंकि इसने राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल और टीएनपीसीबी द्वारा निर्धारित पर्यावरण से संबंधित शर्तों का उल्लंघन किया था।

उन्होंने कहा कि प्लांट का विरोध करने वाले कई दलों की मांग के आधार पर आज की सभा में, प्लांट को स्थायी रूप से बंद करने की मांग को कड़ाई से लिया गया।

तमिलनाडु के तूतीकोरिन ज़िले में वेदांता ग्रुप की कंपनी स्टरलाइट कॉपर के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन महीनों तक चलता रहा और मंगलवार को जब इस विरोध प्रदर्शन के सौ दिन पूरे हुए तो तमिलनाडु के अलग-अलग इलाकों से आए प्रदर्शनकारियों ने ज़िलाधिकारी के दफ़्तर की ओर मार्च किया।  पुलिस ने हालात पर काबू करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ बढ़ने लगी और पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल शुरू कर दिया, बाद में गोलियां भी चलाई गईं।

इस दौरान आम लोगों और पुलिस में झड़प हुई और पुलिस की गोलीबारी में 13 लोग मारे गए। मरने वालों में एक महिला भी थीं।

 


(Usha Tirkey)

आनन्द की हवा ही ख्रीस्तीयों की सांस

In Church on May 29, 2018 at 3:43 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 29 मई 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में सोमवार 28 मई को, संत पापा फ्राँसिस ने ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कहा कि हम अपने पसंद के गुलाम न बनें बल्कि आनन्द एवं सांत्वना के व्यक्ति बनें।

संत पापा ने कहा, “आनन्द ही ख्रीस्तीयों की सांस है, आनन्द जो सच्ची शांति से मिलती है न कि आज की संस्कृति प्रदत्त सुख से जो गलत रास्ते पर ले चलती और मस्ती के कई साधनों की खोज करती है, ताकि जीवन को मधुर बना सके।

संत पापा ने प्रवचन में चुनौतियों एवं परेशानियों के बीच ख्रीस्तीयों के आनन्द की विशेषता को प्रस्तुत किया।

प्रवचन में उन्होंने संत मारकुस रचित सुसमाचार से लिए गये पाठ पर चिंतन किया जहाँ एक धनी व्यक्ति का जिक्र है जो अपने धन का त्याग करने में असमर्थ था और उदास होकर चला गया।

संत पापा ने कहा, “एक सच्चा ख्रीस्तीय उदास नहीं हो सकता। एक आनन्द के व्यक्ति बनने का अर्थ है शांति का व्यक्ति बनना और शांति के व्यक्ति बनने का अर्थ है सांत्वना का व्यक्ति बनना।”

ख्रीस्तीय आनन्द ही एक ख्रीस्तीय की सांस है, एक व्यक्ति जिसके हृदय में आनन्द नहीं है वह ख्रीस्तीय नहीं है। संत पापा ने बतलाया कि आनन्द हमारी अपनी कमाई नहीं है बल्कि पवित्र आत्मा का वरदान है।

संत पापा ने ख्रीस्तीयों के आनन्द का आधार “स्मृति” बतलाया। उन्होंने कहा, “हम वास्तव में, भूल जाते हैं कि प्रभु ने हमारे लिए क्या किया है, उन्होंने हमें नया जीवन दिया है, आशा प्रदान की है एवं अपने पुत्र के द्वारा हमसे मुलाकात की है।” संत पापा ने कहा कि स्मृति एवं आशा दो चीजें हैं जो ख्रीस्तीयों को खुशी के साथ जीने का अवसर देते हैं। संत पापा ने यह भी स्पष्ट किया कि आनन्द का अर्थ हंसते रहना नहीं है, इसका अर्थ मनोरंजन भी नहीं है। बल्कि ख्रीस्तीय आनन्द एक ऐसी शांति है जिसे केवल ईश्वर प्रदान करते हैं। यही ख्रीस्तीय आनन्द है और इस आनन्द को बढ़ावा देना आसान नहीं है।

संत पापा ने खेद प्रकट किया कि आज की संस्कृति ऐसा सुख प्रदान करती है जो कभी भी पूर्ण खुशी नहीं दे सकती चूँकि आनन्द पवित्र आत्मा का वरदान है यह परेशानी एवं कठिनाइयों की घड़ियों में भी हमें शांत बनाये रखता है।

संत पापा ने कहा कि दो प्रकार की बेचैनी है, एक स्वस्थ एवं दूसरा अस्वस्थ जो सबसे बढ़कर अपनी सुरक्षा की खोज करता है। सुसमाचार का युवक इसलिए भयभीत था कि धन का त्याग करने के बाद वह खुश नहीं रह पायेगा।

ख्रीस्तीयों के रूप में आनन्द और सांत्वना ही हमारा सांस होना चाहिए।


(Usha Tirkey)

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