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परमधर्मपीठीय मिशन कार्यों को आध्यात्मिक एवं वित्तीय सहायता प्रदान करने का आह्वान

In Church on May 31, 2018 at 1:40 pm

वाटिकन सिटी, गुरुवार, 31 मई 2018 (रेई,वाटिकन रेडियो): परमधर्मपीठीय मिशनरी कार्यों सम्बन्धी धर्मसमाज द्वारा समस्त विश्व में जारी कार्यों को आध्यात्मिक एवं वित्तीय सहायता देने की सन्त पापा फ्राँसिस ने अपील की है। 28 मई को उक्त धर्मसमाज की आम सभा के उदघाटन के अवसर पर एक विडियो सन्देश में सन्त पापा ने विश्व के काथलिकों का आह्वान किया है कि वे प्रार्थनाओं द्वारा तथा वित्तीय अनुदान एकत्र कर परमधर्मपीठीय मिशनरी कार्यों को समर्थन प्रदान करें।

सोमवार को जारी इस विडियो सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि पवित्रआत्मा सुसमाचार प्रचार के मुख्य अभिकर्त्ता हैं। उन्होंने कहा, “प्रार्थना प्रथम मिशनरी कार्य है जिसका सम्पादन प्रत्येक ख्रीस्तीय को करना चाहिये।

उन्होंने कहा कि “आध्यात्मिक समर्थन मिशन कार्यों की सहायता का सर्वोत्तम प्रभावशाली तरीका है हालांकि इसे मापा नहीं जा सकता। पवित्रआत्मा सुसमाचार उदघोषणा के प्रमुख अभिकर्त्ता हैं और उनके साथ सहयोग हेतु हम सब बुलाये गये हैं।”

इस बात की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए कि परमधर्मपीठीय मिशनरी कार्यों सम्बन्धी धर्मसमाज स्थानीय कलीसियाओं की मदद करता है सन्त पापा ने कहा, “कलीसिया के परमाध्यक्ष के नाम पर इस धर्मसमाज के पुरोहित एवं कार्यकर्त्ता राहत सामग्रियों के वितरण में सहायता प्रदान करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि विश्व की कलीसियाओं के पास सुसमाचार प्रचार, संस्कारों के प्रतिपादन, पुरोहितों, गुरुकुल छात्रों, प्रेरितिक कार्यों तथा धर्मशिक्षा प्रदान करने हेतु न्यूनतम आवश्यक साधन एवं सुविधाएँ उपलब्ध हों।”

सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि स्थानीय कलीसियाओं की सेवा कर काथलिक धर्मानुयायी विश्वव्यापी कलीसिया के कल्याणकारी कार्यों में सहभागी बनते हैं ताकि प्रभु येसु ख्रीस्त का शांति सन्देश पृथ्वी के ओर छोर तक पहुँच सके।

19 वीं शताब्दी में स्थापित परमधर्मपीठीय मिशनरी धर्मसमाज विश्व के 120 राष्ट्रों में सेवारत है।


(Juliet Genevive Christopher)

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31 मई को सन्त पापा फ्राँसिस ने किया ट्वीट

In Church on May 31, 2018 at 1:37 pm


वाटिकन सिटी, गुरुवार, 31 मई 2018 (रेई,वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने 31 मई को प्रभु येसु ख्रीस्त की पवित्र देह महापर्व के उपलक्ष्य में येसु द्वारा शिष्यों के साथ अन्तिम बार भोजन के अवसर पर स्थापित पवित्र यूखारिस्तीय संस्कार पर चिन्तन किया।

गुरुवार 31 मई को अपने ट्वीट सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने लिखा, “पवित्र यूखारिस्त में येसु के शब्दों और कर्मों का सुस्वाद, उनकी मृत्यु और मृतकों में से पुनरुत्थान का सुस्वाद तथा उनकी आत्मा की सुगन्ध समाहित है।”


(Juliet Genevive Christopher)

विश्वव्यापी आप्रवास संकट पर काथलिकों का प्रत्युत्तर

In Church on May 31, 2018 at 1:34 pm


वाशिंगटन, गुरुवार, 31 मई 2018 (सी.एन.आ.):  विश्व में छः करोड़ साठ लाख लोग युद्ध एवं हिंसा के परिणामस्वरूप अपने घरों का पलायन करने के लिये बाध्य हुए हैं।

बुधवार 30 मई को वाशिंगटन स्थित सामरिक और अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन केंद्र ने “ग्लोबल माइग्रेशन संकट का सामना करना” शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी कर इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित कराया कि विकासशील राष्ट्र सर्वाधिक आप्रवासियों, विस्थापितों एवं शरणार्थियों को शरण प्रदान करते हैं।

काथलिक राहत सेवा सम्बन्धी कल्याकारी संस्था के अनुसार अफ्रीका में अपने घरों के पलायन हेतु बाध्य हुए 94 प्रतिशत लोग अफ्रीकी देशों में ही शरण पा रहे हैं जिससे मेज़बान देशों पर अत्यधिक भार पड़ रहा है। यह भी कहा गया कि 85 प्रतिशत शरणार्थी कम अथवा मध्यम आय वाले देशों में शरण पा रहे हैं।

काथलिक राहत सेवा की उपाध्यक्षा एमीली वाय ने कहा कि “विस्थापितों की सहायता करते समय यह सुनिश्चित्त करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है कि हम मेज़बान देशों के लोगों की ज़रूरतों को ना भूले।”

उक्त रिपोर्ट के अनुसार 2016 में सर्वाधिक शरणार्थियों ने तुर्की, पाकिस्तान, लेबनान, ईरान और यूगाण्डा में शरण ली। इसके अतिरिक्त, संयुक्त राष्ट्र संघ की शरणार्थी एजेन्सी के अनुसार यूगाण्डा ने 2017 में दक्षिणी सूडान के दस लाख से अधिक शरणार्थियों को शरण प्रदान की।

एमीली वाय ने कहा “यूगांडा में, काथलिक राहत सेवा मेज़बान देश के लोगों तथा साथ ही शरणार्थी समुदायों को आश्रय, स्वच्छ पानी और आजीविका देकर लगभग 100,000 लोगों का समर्थन दे रही है।”

रिपोर्ट में कहा गया कि 2016 में विश्व के छः करोड़ साठ लाख लोग हिंसक संघर्षों, प्राकृतिक प्रकोपों, अथवा मानवाधिकारों के अतिक्रमण के परिणाणस्वरूप अपने घरों का परित्याग करने के लिये बाध्य हुए थे।

रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दर्शाते हुए अमरीकी काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के शरणार्थी एवं आप्रवास सम्बन्धी कार्यालय ने एक विज्ञप्ति प्रकाशित कर अन्तरराष्ट्रीय समुदाय का आह्वान किया है कि इस संकट का दूरगामी समाधान ढूँढ़ा जाये जो केवल आप्रवास एवं विस्थापन के मूल कारणों को सम्बोधित कर किया जा सकता है। कहा गया कि काथलिक धर्मानुयायी सन्त पापा फ्राँसिस का आदर्श ग्रहण कर उन समुदायों को समर्थन दे सकते हैं जो आप्रवासियों एवं शरणार्थियों की सेवा में संलग्न हैं।


(Juliet Genevive Christopher)

कानून के बावजूद अफ़गानी महिलाएँ हिंसा और अन्याय की शिकार

In Church on May 31, 2018 at 1:31 pm


अफ़गानिस्तान, गुरुवार, 31 मई 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): अफ़गानिस्तान में कार्यरत संयुक्त राष्ट्र संघीय सहायता मिशन ने एक रिपोर्ट जारी कर कहा है कि कानून के बावजूद अफ़गानी महिलाएँ हिंसा और अन्याय का शिकार बनती हैं।

मंगलवार को प्रकाशित उक्त रिपोर्ट में कहा गया कि अफ़गानिस्तान में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के उन्मूलन सम्बन्धित कानून 2009 में पारित किया गया था किन्तु इसके बावजूद अफ़गानी महिलाएँ अन्याय का शिकार बनती है।

रिपोर्ट में कहा गया कि परिवार की प्रतिष्ठा के नाम पर अफ़गानी महिलाओं पर अत्याचार किये जाते तथा कभी कभी उनकी हत्या भी कर दी जाती है। अगस्त 2015 तथा दिसम्बर 2017 के दौरान महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के 237 प्रकरण दर्ज किये गये थे तथा 280 महिलाओं को परिवार के भीतर ही मार डाला गया था।

मानवाधिकार सम्बन्धी संयुक्त राष्ट्र संघीय उच्च्युक्त ज़ैद अल हुसैन ने कहा, “मध्यस्थता का उपयोग मार-पीट अथवा हत्या के मामलों में महिलाओं को न्याय नहीं दिला पाता है तथा उनके मूलभूत मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है।

उक्त रिपोर्ट के अनुसार कई महिलाओं ने बताया कि उनपर दबाव डाला जाता है कि वे अपनी शिकायत वापस ले लें और मध्यस्थता के लिये सहमत हो जायें मानों उनके विरुद्ध कोई अपराध नहीं हुआ हो।


(Juliet Genevive Christopher)

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