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परमपावन रक्त दुनिया की मुक्ति का स्रोत, पोप

In Church on June 30, 2018 at 1:43 pm


वाटिकन सिटी, शनिवार, 30 जून 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 30 जून को ख्रीस्त के परमपावन रक्त के नाम पर स्थापित परिवार के तीन हजार सदस्यों से वाटिकन के पौल षष्ठम सभागार में मुलाकात की।

ख्रीस्त के परमपावन रक्त परिवार में धर्मसमाजी पुरोहित, धर्मबहनें एवं लोकधर्मी संगठन शामिल हैं जिनकी आध्यात्मिकता येसु के पावन रक्त से प्रेरित है।

संत पापा ने उन्हें सम्बोधित कर कहा, ख्रीस्तीय धर्म के आरम्भ से ही, ख्रीस्त के रक्त के प्रेम के रहस्य ने अनेक लोगों को प्रेरित किया है जिनमें उनके संस्थापक भी हैं, जिन्होंने उसे अपने संविधान का आधार माना है क्योंकि उन्होंने विश्वास के प्रकाश में समझा है कि येसु का रक्त ही दुनिया की मुक्ति का स्रोत है। ईश्वर ने रक्त के चिन्ह को चुना क्योंकि कोई दूसरा चिन्ह नहीं है जो दूसरों के लिए जीवन अर्पित करने के सर्वोच्च प्रेम को अधिक स्पष्ट रूप से व्यक्त कर सके। यह उपहार हर यूखरिस्त समारोह में प्रदान किया जाता है ख्रीस्त का बहुमूल्य रक्त जो नया एवं अनन्त व्यवस्थान का रक्त है और सबों के पापों के लिए बहाया गया है। (मती. 26,27)

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्त के बलिदान पर चिंतन हमें दया के कार्य हेतु प्रेरित करता है, अपने जीवन को बचाये बिना ईश्वर तथा भाई बहनों के लिए अर्पित करने हेतु। हमारी मुक्ति के लिए क्रूस पर अर्पित ख्रीस्त के रक्त पर चिंतन हमसे आग्रह करता है कि हम उन लोगों के पास जाएं जो मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा से चंगाई पाने की आशा में है और जो उपभोकतावादी एवं उदासीन समाज द्वारा हाशिये पर जीवन यापन करने हेतु छोड़ दिये गये हैं। संत पापा ने कहा कि इसी पृष्ठभूमि पर उनकी सेवा का महत्व बढ़ जाता है।

उन्होंने उन्हें तीन आयाम बतलाये जिनके द्वारा उनके साक्ष्य को मदद मिल सकती है, सच्चाई का साहस, सबों को ध्यान देना तथा सम्पर्क करने की क्षमता।

संत पापा ने पहले विन्दु पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे एक ऐसे समुदाय का निर्माण करें जो सुसमाचार के मूल्यों तथा सच्चाई के लिए खड़ा होने का साहस करे।

दूसरे आयाम पर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि वे सभी पर ध्यान रखें, खासकर, जो दूर रहते हैं। उन्होंने कहा कि वे अपने मिशन द्वारा प्रत्येक तक पहुँचने के लिए बुलाये गये हैं। उन्हें समझने एवं ऐसी भाषा का प्रयोग करने की जरूरत है जिसके द्वारा सुसमाचार के संदेश को सभी समझ सकें। यह भाषा है प्रेम एवं भलाई की भाषा जिसको वे उनके आनन्द एवं कठिनाईयों में सहभागी होकर प्रकट कर सकते हैं।

तीसरे आयाम में संत पापा ने उन्हें सम्पर्क करने की क्षमता द्वारा साक्ष्य देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रवचन और धर्म-शिक्षा, ईशवचन को गहरा करने के माध्यम हैं, जिसमें पूर्ण सहभागी होकर वे ख्रीस्तीय विश्वास को अधिक आकर्षक बना सकते हैं।

संत पापा ने संदेश के अंत में पुनः याद दिलाया कि वे ख्रीस्तीयों की सच्ची शक्ति सुसमाचार को न भूलें।


(Usha Tirkey)

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ख्रीस्तीय येसु को अच्छी तरह पहचानें

In Church on June 30, 2018 at 1:41 pm


वाटिकन सिटी, शनिवार, 30 जून 2018 (वाटिकन न्यूज)˸ काथलिक कलीसिया के संरक्षक संत पेत्रुस एवं संत पौलुस के महापर्व पर 29 जून को, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में संत पापा फ्राँसिस ने देवदूत प्रार्थना का पाठ किया जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को अपना संदेश दिया।

संत पापा ने संदेश में येसु के साथ संत पेत्रुस के वार्तालाप पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि येसु एवं उनके शिष्यों के बीच संवाद जो उनकी पहचान पर आधारित थी, आज भी जारी है।

संत पापा ने कहा कि सुसमाचार पाठ में जिक्र यह घटना “हमारे विश्वास की यात्रा के लिए आधारभूत है क्योंकि यह येसु और उसके शिष्यों के बीच एक महत्वपूर्ण वार्ता को प्रस्तुत करता है। पहला सवाल, लोग क्या कहते हैं कि मैं कौन हूँ? (मती. 16:13) इसके द्वारा येसु अपनी वर्तमान स्थिति के बारे लोगों के विचार पूछते हैं। जबकि दूसरे सवाल, “और तुम क्या कहते हो कि मैं कौन हूँ?” (मती. 16:15), इसमें येसु कहना चाहते हैं कि उन से मुलाकात करना एवं उनके सामने अपने आपको खोलना एक अलग बात है।

संत पापा ने कहा कि इस मुलाकात में ये दो प्रश्न अलग-अलग नहीं किन्तु एक-दूसरे के पूरक हैं। कलीसिया आज भी येसु के पहचान की घोषणा करती है, आप मसीह हैं, आप जीवन्त ईश्वर के पुत्र हैं (मती. 16) क्योंकि ख्रीस्त की महिमा को उनके क्रूस से अलग नहीं किया जा सकता।

संत पापा ने कहा कि कलीसिया के आरम्भ से ही येसु को कई तरह से पहचानने का प्रयास किया गया है और उनको पहचानने में संत पेत्रुस का उत्तर एक स्तम्भ की तरह है, जिसको उन्होंने ईश्वर की कृपा द्वारा प्रकट किया था, “आप मसीह हैं, आप जीवन्त ईश्वर के पुत्र हैं।” अतः कृपा हमारे हृदय को यह समझने में मदद करती है कि येसु पिता के समान अनन्त काल से जीवित हैं।

येसु का उत्तर हमें आलोकित करता है, “तुम पेत्रुस अर्थात् चट्टान हो, इस चट्टान पर मैं अपनी कलीसिया बनाऊँगा और अधोलोक के फाटक इसके सामने टिक नहीं पायेंगे।” (मती. 18) संत पापा ने कहा कि यह पहली बार था जब येसु ने कलीसिया शब्द का उच्चारण किया। कलीसिया के प्रति उनका प्रेम “अपनी कलीसिया” कहने के द्वारा प्रकट होता है। येसु का नया व्यवस्थान भौतिक अथवा मूसा की सहिंता पर नहीं किन्तु विश्वास पर आधारित है।

संत पापा ने अपने संदेश का समापन माता मरियम की मध्यस्थता द्वारा कलीसिया के लिए प्रार्थना करते हुए की कि प्रेरितों की रानी माता मरियम की मध्यस्थता द्वारा प्रभु कलीसिया पर अपनी कृपा बरसायें ताकि वह सुसमाचार के प्रति निष्ठावान बनी रह सके, जिसकी सेवा में संत पेत्रुस एवं संत पौलुस ने अपना जीवन समर्पित किया।


(Usha Tirkey)

सन्त पापा फ्राँसिस ने की पलायमकोट्टई धर्मप्रांत के प्रेरितिक प्रशासक की नियुक्त

In Church on June 30, 2018 at 1:39 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 30 जून 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 29 जून को पलायमकोट्टई धर्मप्रांत के लिए मदुरई के महाधर्माध्यक्ष मान्यवर अन्तोनी पप्पुसामी को प्रेरितिक प्रशासक नियुक्त कर दिया है।

भारत के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीबीसीआई) के महासचिव धर्माध्यक्ष थेओदोर मस्करेनहास, ने  शुक्रवार को भारत में घोषणा की कि संत पापा फ्राँसिस ने दक्षिणी भारत के तमिलनाडु राज्य में पलायमकोट्टई धर्मप्रांत का प्रेरितिक प्रशासक नियुक्त किया है। साथ ही संत पापा ने 29 जून को पलायमकोट्टई धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष जुड जेराल्ड पॉलराज के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया था, जो 28 अप्रैल को सेवानिवृत्ति 75 साल की आयु तक पहुंच गए थे। वे सन् 2000 से पलायमकोट्टई धर्मप्रांत का नेतृत्व करते आ रहे हैं।

महाधर्माध्यक्ष अन्तोनी पप्पुसामी का जन्म 1 अक्टूबर, 1949 को डिंडीगल धर्मप्रांत के मारंबडी में हुआ था। उन्हें 7 जुलाई 1976 को उनका पुरोहिताभिषेक हुआ था, और 4 फरवरी, 1999 को ज़ाबा के धर्माध्यक्ष के रुप में अभिषिक्त किये गये और 10 नवंबर, 2003 को वे डिंडीगल के पहले धर्माध्यक्ष नियुक्त किये गये।

वे डिंडीगल के धर्माध्यक्ष बनने से पहले मदुरई महाधर्मप्रांत के सहायक धर्माध्यक्ष थे। वे तमिलनाडु धर्माध्यक्षीय काउंसिल के तहत याजकों और धर्मसंघों के कमीशन के अध्यक्ष हैं।

25 जुलाई, 2014 को संत पापा फ्रांसिस ने उन्हें मदुरई महाधर्मप्रांत का महाधर्माध्यक्ष नियुक्त किया था।


(Margaret Sumita Minj)

सीरिया के ख्रीस्तीय और मुसलमान के लिए एक-दूसरे के दुःख में भविष्य की आशा

In Church on June 30, 2018 at 1:37 pm


दमिश्क, शनिवार, 30 जून 2018 (एशियान्यूज)˸ ख्रीस्तीयों एवं मुसलमानों द्वारा एक  भोज में भाग लेना, उनके लिए एक अवसर बन गया, जहाँ उन्होंने युद्ध, पीड़ा और विभाजन के अपने अनुभवों को साझा किया तथा पाया कि विभिन्न धर्मों का कोई भी परिवार युद्ध की चपेट से नहीं बच सका।

करीतास सीरिया के प्रमुख पत्रकार सांद्रा अवाद ने एशियान्यूज से बातें करते हुए कहा कि एक साथ भोज में भाग लेना, एक अवसर बन गया जिसमें परिवारों को खोजा और खंडहर से सेतु निर्माण हेतु मेल-मिलाप की एक यात्रा शुरू की जा सके। इस तरह उस शांति को प्राप्त किया जा सके जो हृदय की गहराई से प्राप्त होती है।

40 वर्षीय सांद्रा जो दो बच्चों की माँ हैं, अंतरराष्ट्रीय करीतास द्वारा जारी पहल “साझा यात्रा” के संदर्भ में कहा कि यह देश के लिए एक बड़ी चुनौती है जहाँ आठ सालों से युद्ध जारी है किन्तु इसने “मेल-मिलाप” पर कभी अपनी आशा नहीं छोड़ा जो जानता है कि पूरे देश को किस तरह आलिंगन करना है।

उन्होंने बतलाया कि जब उन्हें कारीतास अंतरराष्ट्रीय से “यात्रा साझा करें” के नये अभियान पर ईमेल प्राप्त हुआ जो स्थानीय समुदायों को शरणार्थियों का स्वागत करने एवं नये समाज में शामिल करने का प्रोत्साहन देता है, वे उसे पाकर असमंजस में पड़ गये, यह सोचकर कि सीरिया में इस अभियान को किस तरह लागू किया जा सकता है? उसके किस भाग को मेजबान समझा जा सकता है? उन्होंने कहा कि सीरिया के अंदर शरणार्थी नहीं हैं। यद्यपि अधिकतर लोग विस्थापित हो चुके हैं तथापि यह एक पीड़ित समाज है जो युद्ध के कारण लम्बे समय से दुःख झेल रहा है और इस दुःख से कोई भी परिवार अछूता नहीं है।

उन्हें लगा कि सीरिया के अंदर यह अभियान उनके लिए सुविधाजनक नहीं थी अतः वे उस अभियान के तहत शऱणार्थियों के साथ साझा भोज के लिए बिलकुल उत्साहित नहीं थे किन्तु करीतास अंतरराष्ट्रीय के निमंत्रण पर उन्होंने इस भोज का आयोजन किया जिसमें सभी धर्मों के लोग निमंत्रित थे। इसे 23 जून को ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के क्रूस गिरजाघर के एक सभागार में आयोजित किया गया। इस भोज में सहभागी होने के लिए काथलिक कलीसिया के कई धर्माध्यक्षों एवं पुरोहितों को भी निमंत्रित किया गया था।

सांद्रा ने कहा, “हमें इस आयोजन को लेकर काफी चिंता थी। सवाल उठ रहे थे कि ऑर्थोडॉक्स कलीसिया में निमंत्रण देने पर काथलिक धर्माध्यक्षों की क्या प्रतिक्रिया होगी? अन्य प्रतिभागी एक-दूसरे से किस तरह का व्यवहार करेंगे? सीरियाई समाज में मुस्लिम, ख्रीस्तीय, अलावाईट एवं द्रूज आदि सभी मिश्रित लोग हैं। हम एक ऐसे देश को लोग हैं जिन्होंने आठ वर्षों से युद्ध का सामना किया है। लोगों के बीच विभाजन एवं दूरी बढ़ चुकी है। पूर्व एवं पश्चिम तथा शहर एवं गाँवों के लोगों में दूरी है। सबके लिए दुःख है तथा सबके हृदय में दर्द एवं घृणा भरा है।

अंततः करीतास द्वारा “यात्रा साझा करें” अभियान का आयोजन सफलता पूर्वक किया गया, जिसे “मेल-मिलाप” की संज्ञा दी गयी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन करीतास सीरिया के लिए सीरिया में टूटे सेतु को जोड़ने एवं हृदय की गहराई में जाकर पूरे देश में शांति स्थापित करने हेतु महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने का पहला कदम है।


(Usha Tirkey)

डीआर कोंगो के धर्माध्यक्षों द्वारा 770,000 बच्चों की सहायता हेतु अपील

In Church on June 30, 2018 at 1:35 pm

कसाई, शनिवार 30 जून 2018 (वाटिकन न्यूज) : लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो के काथालिक धर्माध्यक्षों ने ग्रैंड कसाई क्षेत्र के पांच वर्ष से कम उम्र के 770,000 से ज्यादा बच्चों को बचाने की अपील की जो भुखमरी और गंभीर कुपोषण के शिकार हैं।

केंद्रीय क्षेत्र के काथलिक धर्माध्यक्षों ने मानवतावादी आपदा को रोकने के लिए तत्काल सहायता के लिए अपील की। जहां गुरिल्ला से जुड़ी हिंसा ने लगभग 1.5 मिलियन लोगों को अपने घरों से भागने को मजबूर कर दिया है।

ग्रैंड कसाई क्षेत्र के काथलिक धर्माध्यक्षों का कहना था कि गुरिल्ला से जुड़ी असुरक्षा और हिंसा के कारण परंपरागत रूप से कुपोषण दर आस्मान को छू रही है और सबसे कमजोर लोग ही इसकी उच्चतम कीमत चुका रहे हैं।

वे कहते हैं कि सबसे खराब प्रभावित क्षेत्र कनांगा महाधर्मप्रांत और लुइज़ा, लुएबो धर्मप्रांत तथा म्वेका का एक हिस्सा हैं। इन धर्मप्रांतों में अपने प्रेरितिक दौरे में वहाँ के स्थानीय धर्माध्यक्षों ने व्यक्तिगत रूप से मानवीय आपदा और गंभीर कुपोषण की स्थिति को देखा।

तत्काल अपील

उन्होंने कहा कि कसाई प्रांत की राजधानी कनंगा में, विभिन्न पल्लियों के कुपोषित बच्चों का स्वागत कर रहे हैं। महाधर्माध्यक्ष, मार्सेल माडिला ने तुरंत आवश्यक मदद की मांग की है विशेषकर कठिन अवधि, शुष्क मौसम शुरू होने वाला है”।

उन्होंने कहा, “अगर बच्चों की सहायता नहीं की जाती है, तो हजारों बच्चे के मौत होने का खतरा है”।

कारितास कांगो कानंगा के 8 धर्मप्रांतीय कारितास कार्यालयों के साथ मिलकर इस संकट से उबरने के लिए काम कर रही है, कारितास कार्यालयों का कहना है कि जिसका प्रभाव ईबोला महामारी से भी बदतर होने की उम्मीद है।

राजनीतिक तनाव और खनिज के प्रति दिलचस्पी

डीआरसी में जटिल मानवतावादी आपात दशकों से सरकार तथा विभिन्न विद्रोहियों के बीच संघर्ष और राजनीतिक तनाव से जुड़ा हुआ है।   2016 में राष्ट्रपति कबीला की अवधि समाप्त होने के दो साल बाद भी देश के चुनावी आयोग राष्ट्रपति चुनाव आयोजित करने में नाकाम रहे हैं।

केंद्रीय ग्रांड कसाई क्षेत्र एक विशाल क्षेत्र है जिसे पांच प्रांतों में बांटा गया है, जो हीरे का धनी है, लेकिन प्रतिस्पर्धी खनिज हितों पर क्षेत्रीय और राजनीतिक तनाव से पीड़ित है।


(Margaret Sumita Minj)

चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है ईशप्रेमी

In Church on June 30, 2018 at 1:33 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 30 जून 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने ट्वीट प्रेषित कर सभी विश्वासियों से सृजनहार ईश्वर पर पूरा भरोसा रखते हुए उसके प्रेम को स्वीकार करने तथा सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

29 जून के संदेश में उन्होंने लिखा,“हर तरह की भौतिक या आध्यात्मिक गरीबी, हमारे भाइयों और बहनों के प्रति किसी भी तरह का भेदभाव, ईश्वर और उसके प्यार को ठुकराने से होता है।”

संत पापा ने अपने संदेश को आगे बढ़ाते हुए 30 जून के ट्वीट में लिखा,“जब हम प्रेम करने वाले और हमारी देखभाल करने वाले ईश्वर के साथ दृढ़ता से जुड़े रहते हैं तो  हम जीवन की सभी कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होते हैं।”


(Margaret Sumita Minj)

परम्परा जीवन्त धारा जो हमें हमारे मूल से जोड़ती है, सन्त पापा फ्राँसिस

In Church on June 29, 2018 at 12:00 pm


वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 29 जून 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो):  सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा है कि परम्परा वह जीवन्त धारा है जो हमें हमारे मूल से जोड़ती है।

रोम के संरक्षक सन्त पेत्रुस एवं पौलुस के महापर्व के उपलक्ष्य में शुक्रवार को सन्त पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में ख्रीस्तयाग अर्पित कर सन्त पापा फ्राँसिस ने प्रवचन किया। उन्होंने कहा कि परम्परा का अर्थ केवल जीवन के लिये उपयोगी वस्तुओं अथवा शब्दों का प्रसारण मात्र नहीं है बल्कि परम्परा वह अनवरत बहती जीवन्त धारा है जो हमें हमारे मूल से जोड़ती तथा सुसमाचारी आनन्द से भरकर प्रभु येसु ख्रीस्त से हमारा परिचय कराती है।

सन्त पापा ने कहा कि सम्पूर्ण सुसमाचार हमारे तथा इसराएल के हृदय में समाये इस प्रश्न का उत्तर है कि “क्या आप ही वह हैं जो आने वाले हैं, या हम किसी और की तलाश करें?” (सन्त मत्ती 11: 3)। और फिर येसु का शिष्यों के समक्ष उठाया गया सवालः “लेकिन तुम क्या कहते कि मैं कौन हूँ?” (मत्ती 16:15)।

इसके उत्तर में सन्त पेत्रुस कहते हैं, “आप ख्रीस्त हैं, ईश्वर के अभिषिक्त और पवित्र”। सन्त पापा ने कहा कि ईश्वर की प्रेरणा से पेत्रुस यह सब कह सके इसलिये कि उन्होंने ख़ुद अपनी आँखों से प्रभु येसु ख्रीस्त को गाँव-गाँव में घूमकर लोगों को चंगाई प्रदान करते देखा था। उन्होंने उन्हें रोगियों, ग़ैरविश्वासियों, घायलों, समाज से बहिष्कृत लोगों और पापियों से बातें करते तथा उन्हें आशीष देते देखा था।

सन्त पापा ने कहा कि प्रभु येसु ख्रीस्त ने अपने कार्यों द्वारा जीवन से हताश लोगों से कहा कि वे उनके हैं। इसी तरह हम भी पेत्रुस की तरह अपने जीवन में अभिषिक्त येसु ख्रीस्त की आशीष प्राप्त करें तथा उनकी चंगाई को महसूस करें।

सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा, “हम इस हर्षित स्मृति को नहीं भुला सकते कि प्रभु येसु ख्रीस्त के द्वारा हमारा उद्धार हुआ है, जैसा कि सन्त मत्ती रचित सुसमाचार में लिखा है, “आप ख्रीस्त हैं, जीवन्त ईश्वर के पुत्र।” उन्होंने कहा, “ईश्वर के अभिषिक्त येसु ख्रीस्त ने इस विश्व के लोगों के बीच पिता ईश्वर के प्रेम एवं उनकी दया को प्रकाशित किया और ईश्वर का दयामय प्रेम यह मांग करता है हम भी इस दया को लोगों में प्रसारित करें भले ही इस कार्य को करने में हमें अपने नाम, अपने पद और अपनी स्थिति तथा अपने आरामदायक जीवन का परित्याग ही क्यों न करना पड़े।


(Juliet Genevive Christopher)

सन्त पापा फ्राँसिस ने की पटना महाधर्मप्रान्त के सहयोगी महाधर्माध्यक्ष की नियुक्ति

In Church on June 29, 2018 at 11:58 am


वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 29 जून 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने पटना महाधर्मप्रान्त के लिये अब तक बक्सर के धर्माध्यक्ष रहे मान्यवर सेबास्तियन काल्लुपुरा को सहयोगी महाधर्माध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। वाटिकन प्रेस ने यह सूचना 29 जून को प्रकाशित की।

मान्यवर सेबास्तियन काल्लुपुरा का जन्म केरल में 14 जुलाई सन् 1953 ई. को हुआ था, 14 मई सन् 1984 को आप पटना धर्मप्रान्त के लिये पुरोहित अभिषिक्त किये गये थे। 07 अप्रैल 2009 को सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें द्वारा आप बक्सर धर्मप्रान्त के धर्माध्यक्ष मनोनीत किये गये तथा 21 जून 2009 को बक्सर में आपका धर्माध्यक्षीय अभिषेक सम्पन्न हुआ था।

बेथिया, बक्सर, भागलपुर, मुज़फ्फरपुर एवं पुरनेया धर्मप्रान्त पटना महाधर्मप्रान्त के अधीन आते हैं। 2005 के जनसांख्यकी के अनुसार, महाधर्मप्रान्त की कुल आबादी दो करोड़ 47 लाख नौ हज़ार तीन सौ तैंतीस है जिनमें काथलिकों संख्या मात्र 0.2 प्रतिशत यानि 54,120 है।


(Juliet Genevive Christopher)

कार्डिनल पद पर नियुक्ति के बाद महाधर्माध्यक्ष जोसफ कूट्स ने कहा

In Church on June 29, 2018 at 11:55 am

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 29 जून 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): पाकिस्तान के नवनिर्वाचित कार्डिनल  कराची के महाधर्माध्यक्ष जोसफ कूट्स ने 28 जून को अपनी नियुक्ति के उपरान्त पाकिस्तान में ख्रीस्तीयों की स्थिति पर वाटिकन रेडियो से बातचीत की।

गुरुवार को कार्डिनलमण्डल की सामान्य सार्वजनिक सभा के दौरान सन्त पापा फ्राँसिस ने महाधर्माध्यक्ष जोसफ कूट्स सहित 14 नये कार्डिनलों की नियुक्ति की। वाटिकन न्यूज़ के साथ बातचीत में नवनिर्वाचित कार्डिनल ने बताया कि कार्डिनल पद पर अपनी नियुक्ति से वे आश्चर्यचकित हैं तथा इसके लिये सन्त पापा फ्राँसिस एवं ईश्वर के प्रति हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित करते हैं।

पाकिस्तान में ख्रीस्तीयों की स्थिति पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि काथलिक कलीसिया लोगों के समीप है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान जैसे निर्धन देश में, हमारे लिये लोगों से समीप रहना महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान की कलीसिया एक युवा कलीसिया है और ऐतिहासिक रूप से महाधर्माध्यक्ष, धर्माध्यक्ष तथा सम्पूर्ण याजकवर्ग अपना बहुत सा समय लोगों के बीच में व्यतीत करता है।”

नवनिर्वाचित कार्डिनल कूट्स ने कहा कि वे यह निश्चित्त् रूप से नहीं कह सकते थे कि अपने नये पद के कारण उन्हें लोगों के बीच समय बिताने का पर्याप्त समय मिल पायेगा अथवा नहीं। तथापि, उन्होंने कहा, “पाकिस्तान तथा दक्षिण पूर्वी एशिया की जीवन शैली ही ऐसी है कि लोगों का मिलना-जुलना एक सामान्य बात है और इसीलिये कलीसिया के लोग भी सामान्य जनता से हर सम्भव मौके पर रुबरू होते हैं।”

पाकिस्तान की कलीसिया के कार्यों के बारे में कार्डिनल कूट्स ने बताया कि काथलिक कलीसिया अपने अस्पतालों, चिकित्सालयों एवं स्कूलों द्वारा कल्याणकारी कार्यों में अग्रणी है और इसके लिये पाकिस्तान की सरकार द्वारा भी कलीसिया को सराहा जाता है किन्तु कलीसिया के समक्ष चुनौतियाँ भी हैं।

उन्होंने कहा कि हाल के दशक में पाकिस्तान में मुस्लिम चरमपंथियों की गतिविधियाँ सघन हुई हैं तथा कई गिरजाघरों पर आक्रमण हुए हैं। दुर्भाग्यवश, उन्होंने कहा, सरकार द्वारा सुरक्षा के आश्वासन के बावजूद कई गाँवों एवं कस्बों में ख्रीस्तीयों को अपने घरों से पलायन करना पड़ा है।

अपने नवीन पद को पाकिस्तान की कलीसिया की सेवा में अर्पित करने का प्रण करते हुए कार्डिनल कूट्स ने आशा व्यक्त की कि पाकिस्तान की कलीसिया सुसमाचार द्वारा मज़बूत बने तथा लोगों के बीच प्रेम एवं मैत्री का प्रसार करने में सफल बने।


(Juliet Genevive Christopher)

यात्रा प्रतिबंध को बरकरार रखने के फैसले से अमरीका के काथलिक धर्माध्यक्ष निराश

In Church on June 29, 2018 at 11:53 am


वाशिंगटन, शुक्रवार, 29 जून 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): अमरीका के काथलिक धर्माध्यक्षों ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के यात्रा प्रतिबंध को कायम रखने हेतु अमरीकी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर निराशा व्यक्त की है तथा प्रतिज्ञा की है कि वे सभी धर्मों के लोगों के अधिकारों हेतु वकालत जारी रखेंगे।

राष्ट्रपति द्वारा घोषित उक्त यात्रा प्रतिबन्ध ने कई मुसलमान देशों के लोगों पर अमरीका में प्रवेश की पाबन्दी लगा दी है।

अमरीका के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की प्रवसन एवं धार्मिक स्वतंत्रता सम्बन्धी समितियों के धर्माध्यक्षों ने एक संयुक्त वकतव्य जारी कर कहा, ” राष्ट्रपति द्वारा लगाया गया यात्रा प्रतिबंध मुसलमानों को बहिष्कार के लिए लक्षित करता है” और पुष्टि की कि “काथलिक कलीसिया धार्मिक भेदभाव के खिलाफ है।”

मंगलवार 26 जून को,  अमरीका के सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध को बरकरार रखने के पक्ष में पाँच के मुकाबले चार का मतदान किया था जो पांच मुस्लिम बहुल देशों, अर्थात् लीबिया, सीरिया, ईरान, यमन और सोमालिया के नागरिकों के, संयुक्त राज्य अमरीका में, प्रवेश को प्रतिबंधित करता है।

ऑस्टिन के धर्माध्यक्ष जो वास्केज़ तथा लूईसविले के महाधर्माध्यक्ष जोसफ कूर्ट्स द्वारा हस्ताक्षरित वकतव्य में कहा गया, “यात्रा प्रतिबंध मुसलमानों को बहिष्कार के लिए लक्षित करता है, जो धर्म और विश्वास के प्रश्न पर, तटस्थता के हमारे देश के मूल सिद्धांत के खिलाफ है”।

उन्होंने लिखा, “हम निराश हैं, यह अदालत के फैसले में जारी रहा क्योंकि यह इस तथ्य को ध्यान में रखने में असफल रहा कि इससे सरकार द्वारा एक विशिष्ट धार्मिक समूह को स्पष्टतः एवं ग़ैरकानूनी रूप से लक्षित किया गया है।”

उन्होंने प्रण किया कि वे सभी धर्मों के लोगों के अधिकारों के लिये संघर्षरत रहेगें तथा अपनी संस्थाओं के माध्यम से धर्म का भेदभाव किये बिना समस्त आप्रवासी एवं शरणार्थियों की सेवा करते रहेंगे।


(Juliet Genevive Christopher)

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