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कलीसिया में प्रेरिताई हेतु हमारा नवीकरण

In Church on June 1, 2018 at 3:17 pm

वाटिकन रेडियो, बुधवार, 01 जून 2018 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने परमधर्मापीठीय प्रेरितिक कार्यों हेतु गठित धर्मसंघों के प्रतिभागियों से वाटिकन के क्लेमेंटीना सभागार में मुलाकात करते हुए उन्हें प्रेरितिक कार्य हेतु अपने समर्पण को नवीकृत करने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि हम सन् 2019 के अक्टूबर महीने में होने वाली एक अतिविशिष्ट प्रेरिताई की तैयारी में संलग्न हैं जिसकी घोषणा मैंने विगत साल विश्व प्रेरितिक दिवस के अवसर पर की थी। यह सम्पूर्ण कलीसिया में प्रेरिताई कार्यों के प्रति हमारे समर्पण के नवीनीकरण हेतु एक अवसर प्रदान करता है।

संत पापा ने कहा कि आप प्रेरितिक कार्य के प्रति मेरे मनोभावों से वाकिफ हैं जो भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु केवल वित्तीय सहायता प्रदान करना मात्र नहीं है जैसे कि दूसरे संघ करते हैं। हमारे संस्थापकों ने निश्चित रुप से धर्मसमाजों की स्थापना करते हुए इस बात पर जोर नहीं दिया और न ही संत पापा पियुस 11वें ने, जब उन्होंने संत पेत्रुस के उत्तराधिकारी की सहायता हेतु परमधर्मपीठ समाजों के संस्थान का गठन किया। यही कारण है कि मैं संत पापा बेनेदिक्त 16वें के प्रेरितिक उद्बोधन मैक्सिमुस इलुदः प्रेरितिक कार्य में सुसमाचार का महत्व, के आधार पर कलीसिया में प्रेरितिक कार्य के प्रति हमारे समर्पण को नवीकृत करने का आहृवान करता हूँ।

संत पापा ने कहा कि यह हमें आध्यात्मिक रुप से जुड़े रहते हुए एक-दूसरे की सहायता करने में मददगार सिद्ध होगा। यदि हमारा नवीनीकरण सच्चा, सृजनात्मक और प्रभावकारी है तो यह हमें सुसमाचार की मांग  अनुसार अपने जीवन को व्यवस्थित और संचालित करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ अपने कार्यों को और भी अच्छी तरीके से करने हेतु प्रेरणा पर विचार करना केवल नहीं है। “यह हमें पवित्र और आध्यात्मिक रुप में सृजनात्मक होने का निमंत्रण देता है। यह पुराना को नया बनाना केवन नहीं है बल्कि पवित्र आत्मा द्वारा नवीनता हेतु संचालित होना है जो सभी चीजों को नया बनाता है।” संत पापा ने कहा कि क्रूसित और पुनर्जीवित प्रभु की ओर से आने वाली नवीनता से हम न डरें। हम अपने प्रेरिताई में सहासी और निडर बने रहते हुए कलीसिया में पवित्र आत्मा से संयुक्त रहें।

विशिष्ट प्रेरितिक महीने में अपने को सुसमाचार के अनुसार सुदृढ़ करने का अर्थ क्या हैॽ संत पापा ने कहा मैं सोचता हूँ कि यह हममें विशेष प्रेरितिक कार्य हेतु अपने में परिवर्तन लाना है। हमें अपने को येसु ख्रीस्त के प्रेरितिक कार्यों से प्रेरित होने की जरुरत है जिससे प्रेरिताई की अखंडता, जागरूकता और जिम्मेदारी एक बार फिर जन सामान्य लोगों के जीवन का हिस्सा बन सके। यह हम से सम्पूर्ण जीवन के प्रशिक्षण की मांग करता है जहाँ हम अपने मन दिल और शरीर को येसु ख्रीस्त के प्रेम से सराबोर पाते, जिसके फलस्वरूप हम उन्हें अपने जीवन में घोषित करने हेतु जुनूनी बन जाते हैं।

“विश्व में ईश्वर की कलीसिया स्वरूप, दीक्षित और प्रेषित”

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि यह प्रेरितिक माह सन् 2019 की विषय-वस्तु “विश्व में ईश्वर की कलीसिया स्वरूप, दीक्षित और प्रेषित” है। यह इस बात पर बल देता है कि हम अपने बपतिस्मा के कृपादानों में सुदृढ़ बने और सभी बपतिस्मा प्राप्त लोगों को संबोधित करें। हमारा “भेजा जाना” भेजे जाने वाले और संदेश ग्रहण करने वाले दोनों के जीवन में परिवर्तन लाना है क्योंकि येसु ख्रीस्त में हमारा जीवन स्वयं एक प्रेरिताई है। हम प्रेरिताई हैं क्योंकि ईश्वर ने हमारे जीवन को प्रेम से भर दिया है जो हमें उनके प्रतिरुप बनाता है। हमारी प्रेरिताई इस भांति हमें अपनी पवित्रता में बढ़ने का आहृवान करती है जिससे हम विश्व को और सृष्टि को पवित्र कर सकें। हमारे प्रेरितिक जीवन का आयाम बपतिस्मा इस प्रकार पवित्रता का साक्ष्य बनता है जो जीवन का संचार करते हुए विश्व को सुन्दर बनता है।

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि परमधर्मपीठय प्रेरितिक समाजों के नवीकरण का अर्थ इस भांति हृदय में अपने समर्पण को गम्भीरता और साहसपूर्वक धारण करना है जो कलीसिया, परिवार समुदाय और हममें से प्रत्येक जन की पवित्रता है। उन्होंने कहा कि मैं आप सबों से आग्रह करता हूँ कि आप परमधर्मपीठीय प्रेरितिक समाजों की प्रकृति और उत्तरदायित्वों का नवीनीकरण सच्ची सृजनात्मकता के साथ करें जिससे शिष्यों के रुप में अपने प्रेरितिक बुलाहट को पवित्रता के साथ जी सकें। संसार की मुक्ति हेतु हमें इसे प्रेम करने की जरुरत है और अपने जीवन को येसु ख्रीस्त की सेवा हेतु निछावर करना है। हमारे पास कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसे हम बेच सकें, वरन् यह हमारा जीवन है, ईश्वर का प्रेम, करूणामय और पवित्रता का जीवन जिसे हमें प्रसारित करना है।

अक्टूबर सन् 2019 में अमाजोन धर्मसभा के लिए विशिष्ट प्रेरितिक माह मनाई जायेगी। विभिन्न समुदायों के द्वारा किये गये निवेदन के अनुरूप मैं आप से आग्रह करता हूँ कि आप दक्षिण अमेरिका हेतु प्रार्थना करें जो कि कई मुख्य कलीसियाओं का निवास स्थल है, जो सुसमाचार प्रचार हेतु कई तरह से चुनौतियों का सामना कर रहा है। इस महादेश की परिस्थिति हमें विश्वासियों की सेवा हेतु अपने समर्पण को नवीन बनाने में मदद करे। हम अमाजोन आगामी धर्मसभा हेतु प्रार्थना करें जिससे हम सुसमाचार प्रचार के प्रेरितिक कार्य में सफल हो सकें जहाँ अन्याय की परिस्थिति में ईश्वरीय मुक्ति की जरूरत बहुत अधिक है।


(Dilip Sanjay Ekka)

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खेल ‘एकता और मुलाकात’ का स्थान है, संत पापा फ्राँसिस

In Church on June 1, 2018 at 3:15 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार 1 जून 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने 1जून को लोकधर्मी, परिवार और जीवन के लिए गठित परमधर्मपीठीय परिषद के अध्यक्ष कार्डिनल केविन फार्रेल को विभाग के नये दस्तावेज के प्रकाशन के लिए बधाई दी।

संत पापा ने पत्र में अपनी खुशी जाहिर करते हुए लिखा, “मुझे ख्रीस्तीय परिप्रेक्ष्य पर खेल और मानव के “दारे इल मेग्लियो दी से” अर्थात ‘खुद का सर्वश्रेष्ठ देना’ नामक दस्तावेज के प्रकाशन की खबर मिली, जिसे लोकधर्मी, परिवार और जीवन के लिए गठित परमधर्मपीठीय विभाग ने तैयार है। इसके द्वारा खेल की दुनिया में कलीसिया की भूमिका को उजागर किया गया है और खेल मुलाकात, गठन, मिशन और पवित्रता का साधन हो सकता है।”

खेल वह स्थान है जहां सभी स्तरों और सामाजिक स्थितियों के लोग एक आम उद्देश्य तक पहुंचने के लिए एक साथ आते हैं। व्यक्तिवाद की संस्कृति में एवं युवा पीढ़ी और बुजुर्गों के बीच के अंतर को पाटने के लिए खेल को विशेषाधिकार प्राप्त है खेल का आनंद उठाने के लिए लोग जाति, लिंग या धर्म का भेद भाव किये बिना  आपस में मिलते हैं और खुशी को बांटते हैं एक साथ एक लक्ष्य, एक टीम में भाग लेना, जहां सफलता या हार साझा की जाती है; यह हमें केवल अपने आप पर ध्यान केंद्रित करके एक उद्देश्य पर विजय प्राप्त करने के विचार को अस्वीकार करने में मदद करता है। दूसरों की आवश्यकता में न केवल टीम के साथी बल्कि प्रबंधक, कोच, समर्थक, परिवार सभी शामिल हैं; संक्षेप में, वे सभी लोग, प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ, “खुद का सर्वश्रेष्ठ देने” हेतु संभव बनाते हैं। यह सब लोगों को मानव परिवार के समुदाय के अनुभवों के लिए उत्प्रेरक बनाता है। जब एक पिता अपने बेटे के साथ खेलता है, जब बच्चे पार्क या स्कूल में एक साथ खेलते हैं, जब एक एथलीट अपने समर्थकों के साथ जीत का जश्न मनाता है, तो इन सभी वातावरणों में हम एकता और मुलाकात के रूप में खेल के मूल्य को देख सकते हैं। हम एक टीम के रूप में, जीवन के खेल में, महान परिणामों तक पहुंच सकते हैं!”

संत पापा ने खेल की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खेल भी एक रचनात्मक वाहन है। पहले से कहीं अधिक आज हमें युवाओं पर नजर डालनी चाहिए, जिनके व्यक्तिगत विकास की प्रक्रिया शुरू होती है, खेल के माध्यम से व्यक्ति का अभिन्न विकास आसानी से होता है। हम जानते हैं कि नई पीढ़ी खिलाड़ियों को किस नजर से देखती है और उनके द्वारा प्रेरित होती है! इसलिए, हर उम्र और स्तर के सभी एथलीटों की भागीदारी आवश्यक है; क्योंकि जो लोग खेल की दुनिया का हिस्सा हैं वे उदारता, नम्रता, बलिदान, दृढ़ता और उत्साह जैसे गुणों का उदाहरण देते हैं। इसी तरह, उन्हें दल भावना में सम्मान, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और दूसरों के साथ एकजुटता में योगदान देना चाहिए।

अंत में, संत पापा ने मिशन और पवित्रता के साधन के रूप में खेल की भूमिका पर जोर देते हुए कहा,“कलीसिया को दुनिया में येसु मसीह का प्रतीक माना जाता है। पल्ली, स्कूल, प्रार्थनालय और संगठनों में किए गए खेलों के माध्यम से अनुकूल या प्रतिकूल अवसर में मसीह के संदेश की घोषणा करनी है (2 तिमथी 4: 2)। खेल से संचरित इस खुशी को साझा करने के लिए महत्वपूर्ण है मानव क्षमता की खोज करना जो हमें सृष्टि और मानव की सुंदरता का खुलासा करने के लिए प्रेरित करता है, जो ईश्वर के प्रतिरुप और समानता में बनाया गया है। खेल उन स्थानों या वातावरण में मसीह के लिए रास्ता खोल सकता है, जहां विभिन्न कारणों से, उसे सीधे घोषित करना संभव नहीं है और लोग, खुशी के गवाह के साथ, एक समुदाय के रूप में खेल का अभ्यास करते हुए सुसमाचार के वाहक बन सकते हैं।

संत पापा ने कहा कि खेल खुद का सर्वश्रेष्ठ देने की पवित्र इच्छा का भी आह्वान करता है। संत पापा ने हाल सें संपन्न युवाओं के लिए धर्माध्यक्षीय धर्मसभा में युवाओं को वहाँ उपस्थित होकर या नेटवर्क के माध्यम से सभी युवाओं से खुद का सर्वश्रेष्ठ देने को कहा था। संत पापा ने कहा कि उन्होंने अपने प्रेरितिक उद्बोधन में भी इस अभिव्यक्ति का उपयोग किया था। वे कहते हैं कि ईश्वर हम में से प्रत्येक को पवित्रता के लिए आमंत्रित करने का एक अनोखा और विशिष्ट तरीका अपनाते हैं : “महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रत्येक विश्वासी व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ उपहार को बाहर निकालने का मार्ग ढूँढ़ें जिसे ईश्वर ने उसके दिल में रखा है।” (गौदेते एत एक्सुलताते 11)

हमें खेल और जीवन के बीच मौजूद घनिष्ठ संबंध को गहरा करने की जरूरत है, जो एक दूसरे को उजागर कर सकता है। एथलीटों का खेल में अनुशासन का प्रयास जीवन के सभी पहलुओं में उन्हें अनुशासित बनाता है। यह हमें उस मार्ग पर रखता है जहाँ हम ईश्वर की कृपा से, जीवन की पूर्णता तक पहुँच सकते हैं जिसे हम पवित्रता कहते हैं। खेल मूल्यों और गुणों का एक बहुत ही समृद्ध स्रोत है जो हमें बेहतर बनने में मदद करता है। प्रशिक्षण के दौरान खेल का अभ्यास करने वाले एथलीट की तरह अगर हम पूरी कोशिश करें तो बिना डरे अपनी कमजोरियों और सीमाओं को खोज कर उनमें सुधार कर सकते हैं। इस तरह, “प्रत्येक ख्रीस्तीय जितनी मात्रा में पवित्रता में बढ़ता है, वह उतनी ही मात्रा में दुनिया के लिए फल उत्पन्न करता है।” (इबिद।, 33)। एक ख्रीस्तीय एथलीट पवित्र जीवन जीकर अपने आस-पास के लोगों के साथ ख्रीस्तीय होने का आनंद घोषित करता है।

संत पापा ने अंत में शुभकानाएँ देते हुए कहा कि यह दस्तावेज कलीसिया के खेल मंत्रालय और अन्य क्षेत्रों में फलदायी बने।


(Margaret Sumita Minj)

शैतान मानव प्रतिष्ठा को नष्ट करता है

In Church on June 1, 2018 at 3:13 pm


वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 1 जून 2018 (रेई)˸ वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि न केवल ख्रीस्तीयों के विरूद्ध किन्तु हर प्रकार के लोगों के विरूद्ध, आज हम संस्कृतिक उपनिवेश, युद्ध, भूख, गुलामी आदि के रूप में भारी अत्याचार देख रहे हैं। प्रभु हमें कृपा दे कि हम उसका सामना कर सकें एवं ईश्वर के प्रतिरूप की रक्षा येसु ख्रीस्त की शक्ति से कर सकें।

अत्याचार ख्रीस्तीय जीवन का हिस्सा

प्रवचन में संत पापा ने संत पेत्रुस के पत्र से लिये गये पाठ पर चिंतन करते हुए कहा कि ख्रीस्तीयों पर अत्याचार सदियों से होता रहा है। यह ख्रीस्तीय जीवन का अंग बन गया है। ख्रीस्तीय अत्याचार के शिकार बनते हैं क्योंकि वे पिता के प्रति निष्ठावान रहते हैं।

उन्होंने कहा कि अत्याचार वायु के समान है जिसपर आज ख्रीस्तीय जीता है क्योंकि आज भी अनेक लोग शहीद हो रहे हैं। ख्रीस्त के प्रेम के कारण अनेक लोग अत्याचार सह रहे हैं। कई देशों में ख्रीस्तीयों को धर्म पालन करने का अधिकार नहीं है। क्रूस पहनने के कारण उन्हें जेल जाना अथवा मृत्यु दण्ड का सामना करना पड़ रहा है। लोग पहले से अधिक शहीद हो रहे हैं किन्तु यह समाचार नहीं है अखबारों में इसे प्रकाशित नहीं किया जाता है।

ईश्वर के प्रतीक महिलाओं एवं पुरूषों पर अत्याचार

संत पापा ने गौर किया कि आज अत्याचार हो रहा है क्योंकि हर स्त्री एवं पुरूष ईश्वर के जीवित प्रतीक हैं। ख्रीस्तीयों एवं मानवता दोनों पर हो रहे अत्याचार के पीछे बुराई है। ख्रीस्तीयों में ख्रीस्त की उपस्थिति एवं लोगों में ईश्वर के स्वरूप को शैतान नष्ट करना चाहता है। वह शुरू से ही ऐसा कर रहा है। हम उत्पति ग्रंथ में पढ़ते हैं कि ईश्वर ने स्त्री एवं पुरूष को ईश्वर के प्रतिरूप में गढ़कर जो समांजस्य स्थापित की थी उसने उसे नष्ट करने की कोशिश की और वह उसमें सफल भी हुआ। उसने इसके लिए धोखा और लालच के हथियार का प्रयोग किया।

संत पापा ने भूख का वर्णन अन्याय के रूप में किया जो स्त्रियों एवं पुरूषों को नष्ट करता है क्योंकि उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं है यद्यपि दुनिया में प्रचुर खाद्य पदार्थ उपलब्ध है। उन्होंने मानव शोषण और विभिन्न प्रकार की दासता पर गौर करते हुए याद किया कि उन्होंने “जेल के अंदर मारा गया” नामक एक चलचित्र देखा जिसमें विस्थापितों को बंद कर रखा गया था तथा उन्हें दास बनाने के लिए प्रताड़ित किया गया। संत पापा ने कहा कि मानव अधिकार की घोषणा के 70 वर्षों बाद आज भी यह जारी है। सतं पापा ने संस्कृतिक उपनिवेश पर चिंतन करते हुए कहा कि यह वही है जो शैतान चाहता है, “मानव प्रतिष्ठा को नष्ट करना।” यही कारण है कि शैतान हर तरह के अत्याचार के पीछे है।

संत पापा ने कहा, “युद्ध ईश्वर के प्रतिरूप में गढ़े लोगों को नष्ट करने का एक साधन है, किन्तु यह उन लोगों को भी नष्ट करता है जो युद्ध कराते हैं, जो सत्ता प्राप्त करने के लिए युद्ध की योजनाएँ बनाते हैं। कुछ लोग ऐसे हैं जो हथियारों के उद्योग को बढ़ावा देते हैं ताकि मानवता को नष्ट कर सकें, स्त्री एवं पुरूष के प्रतिरूप को शारीरिक, मानसिक एवं संस्कृतिक रूप से नष्ट कर दें। यदि वे ख्रीस्तीय न भी हों तो भी शैतान उन्हें प्रताड़ित करता है क्योंकि वे ईश्वर के प्रतिरूप हैं। संत पापा ने कहा क आज सभी अत्याचार के शिकार हो रहे हैं क्योंकि सभी अत्याचारों के पिता (शैतान) ईश्वर के प्रतिरूप को सहन नहीं करता है अतः वह उस प्रतिरूप पर आक्रमण कर उसे नष्ट करना चाहता है। संत पापा ने कहा कि इसे समझना कठिन है किन्तु यदि हम इसे समझना चाहें तो इसके लिए बहुत अधिक प्रार्थना करने की आवश्यकता है।


(Usha Tirkey)

प्रेम अंधेरी रात में भी एक छोटी लौ को जलाये रखता है, संत पापा फ्राँसिस

In Church on June 1, 2018 at 3:11 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार 1 जून 2018 (रेई) : मानव जीवन को सुखी और सफल बनाने वाले अनेक गुण हैं उनमें प्रेम सर्वोच है। विश्व का भूल ही प्रेम है। प्रेम से ही सब प्रकार की उन्नति, प्रगति और आनन्द की प्राप्ति होती है। जहाँ प्रेम का अभाव होता है वहाँ निराशा और पतन ही दिखलाई पड़ता है। संत पापा फ्राँसिस ने ट्वीट प्रेषित कर प्रेम के एक और गुण पर प्रकाश डाला।

संदेश में उन्होंने लिखा,“प्रेम बुरी परिस्थितियों में भी अच्छी चीजों को पहचान सकता है। प्रेम अंधेरी रात में भी एक छोटी लौ को जलाये रखता है।”


(Margaret Sumita Minj)

प्रेस कार्यालय : चिली दुर्व्यवहार मामले पर बयान

In Church on June 1, 2018 at 3:10 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार 1 जून 2018 (वीआर,रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने चिली के धर्माध्यक्षों को दिये वादे के मुताबिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से लिखित पत्र भेजा है जिसमें उन्होंने सभी विश्वासियों को संबोधित किया है। यह घोषणा गुरुवार को जारी एक बयान में वाटिकन प्रेस कार्यालय के निदेशक ग्रेग बर्क ने की थी।

बयान में ग्रेग बर्क ने कहा कि संत पापा फ्राँसिस 1 से 3 जून तक अपने निवास भवन संत मार्था में चिली के यौन दुर्व्यवहार पीड़ितों के दूसरे समूह की मेजबानी करेंगे। समूह में 5 पुरोहित हैं जो शक्ति, विवेक और यौन शोषण के दुरुपयोग” के पीड़ित थे, साथ ही 2 पुरोहित जिन्होंने “न्यायिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया में पीड़ितों की सहायता की है और यौन दुर्व्यवहार पीड़ितों में से दो लोकधर्मी को भी इस दल में शामिल किया है। इस सप्ताह के अंत में संत पापा फ्राँसिस चिली के यौन दुर्व्यवहार पीड़ितों के साथ व्यक्तिगत रुप में मुलाकात करेंगे।

बयान में यह भी कहा गया कि संत पापा फ्राँसिस महाधर्माध्यक्ष चार्ल्स स्किकलुना और मॉन्सिन्योर जॉर्डी बर्टोमू को पुनः चिली भेजेंगे जिससे कि चिली के फादर फर्नांडो करदीमा और उनके अनुयायियों द्वारा दुर्व्यवहार पीड़ितों तक पहुंचने और मामलों की आगे की जांच को जारी रखा जा सके।

विदित हो कि संत पापा फ्राँसिस ने मालटा के महाधर्माध्यक्ष चार्ल्स स्किकलुना और मोन्सिन्योर जॉर्डी बर्टोमू को याजकों के यौन दुर्व्यवहार की जाँच पड़ताल के लिए चिली भेजा था। उन्होंने अप्रील महीने के अंत में 2,300 पेज रिपोर्ट संत पापा को सौंपा था।


(Margaret Sumita Minj)

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