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संत पापा फ्राँसिस ने पोलैंड के प्रधान मंत्री मोराविच्की से मुलाकात की

In Church on June 4, 2018 at 2:42 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार 4 जून 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने आज सुबह की नियुक्तियों में से, पोलैंड गणराज्य के प्रधान मंत्री मतेसुज़ मोराविच्की और उनके साथ आये अतिथियों का स्वागत किया। संत पापा के साथ मुलाकात करने के बाद प्रधान मंत्री मोराविच्की ने वाटिकन राज्य के मुख्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलिन एवं राज्य के विदेश सचिव मोनसिन्योर पॉल रिचर्ड गालाघर से भी मुलाकात की। ।

2018 के अंत में केटोवाइस में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की तैयारी

वेटिकन प्रेस कार्यालय से प्राप्त विज्ञप्ति के अनुसार, सौहार्दपूर्ण वार्ता के दौरान, उन्होंने वाटिकन और पोलैंड के बीच अच्छे द्विपक्षीय संबंधों पर प्रकाश डाला, साथ ही कलीसिया और राज्य के बीच आपसी तालमेल और उपयोगी सहयोग पर चर्चा की। अगामी दिसम्बर 2018 में केटोवाइस में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के साथ-साथ कुछ नैतिक मुद्दों के मद्देनजर, आम हित के कुछ विषयों पर चर्चा की गई, जैसे पारिवारिक नीतियां और प्रकृति की सुरक्षा।

शरणार्थियों के लिए स्वागत

अंत में उनहोंने यूरोपीय और अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति पर ध्यान केंद्रित किया। शरणार्थियों के स्वागत के संदर्भ में विशेष रूप से यूक्रेन और मध्य पूर्व से शरणार्थियों के प्रति पोलिश सरकार की प्रतिबद्धता पर बातें की।


(Margaret Sumita Minj)

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ख्रीस्त के पावन शरीर एवं रक्त महापर्व संत पापा का प्रवचन

In Church on June 4, 2018 at 2:40 pm

रोम, सोमवार, 4 जून 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 3 जून को ख्रीस्त के पावन शरीर एवं रक्त महापर्व पर ऑस्तिया के संत मोनिका गिरजाघर में समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

उन्होंने प्रवचन में सुसमाचार पाठ पर चिंतन करते हुए कहा, “सुसमाचार जिसको हमने सुना, वह पिछली व्यारी का वर्णन करता है जिसमें आश्चर्यजनक रूप से, भोज की अपेक्षा, तैयारी पर अधिक ध्यान दिया गया है। हम “तैयारी” शब्द को बार-बार सुनते हैं। उदाहरण के लिए ”आप क्या चाहते हैं? हम कहाँ जा कर आपके लिए पास्का भोज की तैयारी करें?” (मार.14:12) येसु उन्हें आवश्यक तैयारी हेतु स्पष्ट निर्देश के साथ भेजते हैं और वे सजा-सजाया बड़ा कमरा पाते हैं। (पद.15) शिष्य तैयारी के लिए चले गये किन्तु प्रभु ने खुद अपनी तैयारी की इत्यादि।

पुनरूत्थान के बाद कुछ इसी तरह की घटना घटी जब येसु ने शिष्यों को तीसरी बार दर्शन दिया। जब वे मच्छली मार रहे थे येसु ने तट पर उनका इंतजार किया जहां उन्होंने उनके लिए रोटी और मच्छली पकायी। इतना ही नहीं उन्होंने शिष्यों को उन मछलियों में से कुछ ले आने के लिए कहा जिसको उन्होंने अभी-अभी पकड़ा था और जिसको पकड़ने के लिए उन्होंने स्वयं उन्हें सिखाया था। (यो.21:6.9-10) येसु ने तैयारी कर ली थी और वे अपने शिष्यों से सहयोग की मांग करते हैं।

उसी तरह येसु ने पास्का भोज के पहले अपने शिष्यों से कहा था, “मैं तुम्हारे लिए स्थान तैयार करने जाता हूँ जिससे जहाँ मैं हूँ, वहाँ तुम भी रहो।” (यो.14:2.3)

संत पापा ने कहा, “येसु तैयारी करते हैं किन्तु पास्का भोज से पहले उन्होंने एक आह्वान एवं दृष्टांत के साथ अति आवश्यक तैयारी करने एवं हमेशा तैयार रहने की सलाह दी।”

येसु हमारे लिए तैयारी करते एवं हमें भी तैयार रहने को कहते हैं। वे हमारे लिए क्या तैयारी करते हैं? संत पापा ने कहा कि वे हमारे लिए स्थान एवं भोजन तैयार करते हैं। एक ऐसा स्थान जो सुसमाचार में वर्णित सजा-सजाया बड़ा कमरा से अधिक उत्तम है।

यहाँ इस पृथ्वी पर हमारा यह विशाल एवं बड़ा घर है कलीसिया, जहाँ सभी के लिए कमरा है किन्तु उन्होंने स्वर्ग में भी हमारे लिए स्थान प्रबंध किया है जिससे कि हम उनके साथ और एक-दूसरे के साथ अनन्त काल तक रह सकें। वे स्थान के साथ-साथ भोजन भी तैयार करते हैं, जिसमें वे हमें अपने आपको देते हैं, ”ले लो, यह मेरा शरीर है”।(मार.14:22)

संत पापा ने कहा, “ये दो उपहार स्थान एवं भोजन, ऐसी चीजें हैं जो हमारे जीने के लिए आवश्यक हैं। ये हमारी मौलिक आवश्यकताएँ हैं। यूखरिस्त में हमें ये दोनों प्रदान किये जाते हैं।”

इस पृथ्वी पर येसु हमारे लिए भोजन तैयार करते हैं क्योंकि यूखरिस्त कलीसिया की धड़कन है। यह उसे जन्म देती और पुनः जन्म देती है। यह सभी को एक साथ लाती एवं बल प्रदान करती है किन्तु युखरिस्त हमारे लिए ऊपर में भी एक स्थान तैयार करती है अनन्त जीवन का स्थान क्योंकि यह स्वर्ग की रोटी है। यह स्वर्ग से आती है यह अनन्त जीवन का रसास्वादन कराती है। यह एक ऐसी रोटी है जो हमारी बड़ी आशा को पूर्ण करती तथा हमारी सबसे अच्छी कामना को पूरा करती है। यह एक शब्द है जिसमें अनन्त जीवन की प्रतिज्ञा है, कोई साधारण प्रतिज्ञा नहीं किन्तु भविष्य में हमारा इंतजार करने वाला ठोस पूर्वानुमान। यूखरिस्त स्वर्गीय भोज हेतु हमारे लिए एक प्रबंध है, यह स्वयं येसु ख्रीस्त है, अनन्त जीवन एवं अनन्त आनन्द की ओर हमारी यात्रा है।

स्थान एवं पवित्र परमप्रसाद के साथ येसु हमारे लिए एक भोज तैयार करते हैं जो हमें आध्यात्मिक तृप्ति प्रदान करता है। जीवन में हमें लगातार तृप्त किये जाने की आवश्यकता है न केवल भोजन से तृप्त किया जाना किन्तु योजनाओं एवं स्नेह, आशाओं एवं आकाक्षांओं के साथ।

हम प्यार के भूखे हैं किन्तु सबसे सुखद प्रशंसा, सबसे कीमती उपहार तथा सबसे आधुनिक तकनीकी भी उसे तृप्त नहीं कर सकती, ये हमें कभी पूर्ण संतुष्टि प्रदान नहीं कर सकते। यूखरिस्त रोटी के समान एक साधारण भोजन है किन्तु यही एकमात्र भोजन है जो हमें संतुष्ट कर सकती है क्योंकि इससे बड़ा कोई प्रेम नहीं है। हम इसमें सचमुच येसु से मुलाकात करते हैं। हम उनके जीवन में सहभागी होते और उनके प्यार का एहसास करते हैं। हम इसमें महसूस कर सकते हैं कि उनकी मृत्यु और पुनरूत्थान हमारे लिए है और जब हम यूखरिस्त में येसु की आराधना करते हैं हम पवित्र आत्मा को ग्रहण करते तथा शांति और आनन्द का अनुभव करते हैं।

संत पापा ने विश्वासियों का आह्वान करते हुए कहा, “आइये, हम इस जीवन के भोजन का चुनाव करें। हम ख्रीस्तयाग को प्राथमिकता दें। हमारे समुदाय में यूखरिस्त की आराधना करें। तीव्र अभिलाषा के साथ ईश्वर के प्रति भूख की कृपा के लिए प्रार्थना करें ताकि हम उस भोजन को ग्रहण कर सकेंगे जिसको उन्होंने हमारे लिए तैयार किया है।

जैसा कि येसु ने अपने शिष्यों के साथ किया था आज वे हमसे कहते हैं कि हम तैयारी करें। शिष्यों के समान हम भी प्रभु से पूछें, प्रभु, आप कहाँ चाहते हैं कि हम तैयारी करें? येसु कोई विशेष, चुना हुआ स्थान नहीं चाहते बल्कि वे उस स्थान को देखते हैं जो प्रेम एवं आशा से वंचित है। उन्हीं असुविधा जनक स्थलों में वे जाना चाहते हैं और उसी तरह वे हमें तैयारी करने का आदेश देते हैं।

संत पापा ने आधुनिक समाज पर गौर करते हुए कहा, “कितने लोग ऐसे हैं जिनके पास प्रतिष्ठित घर अथवा खाने के लिए भोजन नहीं है। हम कई लोगों को जानते हैं जो अकेले हैं, परेशान एवं जरूरतमंद हैं वे परित्यक्त संदूक के समान हैं। हम जो अपने ही कमरे एवं घर में येसु को ग्रहण कर सकते हैं हम उन भाई-बहनों के लिए स्थान एवं भोजन तैयार करें जिन्हें इसकी आवश्यकता है। येसु हमारे लिए रोटी के रूप में तोड़े गये और बदले में हमसे भी मांग करते हैं कि हम अपने आपको दूसरों के लिए अर्पित करें, केवल अपने लिए नहीं जीयें किन्तु औरों के लिए जीयें। इस तरह हम यूखरिस्तीय रूप में जीते हुए उस प्रेम को दुनिया को अर्पित करेंगे जिसको हमने प्रभु के पावन शरीर से प्राप्त किया है। यूखरिस्त तभी जीवन में परिवर्तित होता है जब हम अपने आपको अपने आसपास के लोगों के साथ बांटते हैं।

सुसमाचार हमें बतलाता है कि शिष्यों ने तैयारी की जब वे बाहर निकले तथा शहरों में गये। आज प्रभु हमें भी बुलाते हैं कि हम उनके आगमन की तैयारी करें दूरी रखते हुए नहीं किन्तु हमारे शहरों में प्रवेश करते हुए। उन्हीं शहरों में से एक है ऑस्तिया जिसका अर्थ है प्रवेश द्वार। संत पापा ने कहा कि प्रभु यहाँ आप कितने दरवाजों को खोलना चाहते हैं। कितने दीवारों को गिराये जाने की आवश्यकता है। येसु चाहते हैं कि उदासीनता तथा गुप्त कपटपूर्ण संधि की दीवार को गिराया जाए। शोषण एवं अहंकार के लोहे की जंजीर को तोड़ा जाए तथा न्याय, सभ्यता और वैधता के लिए रास्ता साफ किया जाए। इस शहर का विस्तृत समुद्र तट हमें खुले हृदय की सुन्दरता का बखान करता है तथा जीवन की नई दिशा की ओर बढ़ने हेतु प्रेरित करता है। संत पापा ने कहा कि इसके लिए उन बंधनों को तोड़ने की जरूरत है जो हमें भय एवं निराशा के बंधन से बांधे रखता है। यूखरिस्त हमें निमंत्रण देता है कि हम येसु की लहरों में बहाये जाएँ कि हम आशा के तट पर पड़े न रहें बल्कि गहराई में जाकर मुक्त, साहसी एवं एकजुट बन सकें।

संत पापा ने सुसमाचार पाठ के अंतिम भाग पर प्रकाश डालते हुए वहाँ उपस्थित विश्वासियों से कहा कि शिष्य भजन गाने के बाद बाहर गये। उसी तरह ख्रीस्तयाग के अंत में हम भी बाहर जायेंगे, हम येसु के साथ बाहर जायेंगे, हमारे शहर की गलियों में। येसु हमारे साथ रहना चाहते हैं वे हमारे जीवन का हिस्सा बनना चाहते हैं। हमारे घरों में प्रवेश करना तथा अपनी मुक्तदायी करूणा, आशीर्वाद एवं सांत्वना को प्रदान करना चाहते हैं।

संत पापा ने कहा कि लोगों से कहा कि उन्होंने दुखद परिस्थितियों का सामना किया है किन्तु प्रभु हमारे करीब रहना चाहते हैं, आइये हम अपना हृदय द्वार खुलें। संत पापा ने प्रार्थना की, हे प्रभु आइये और हमसे मुलाकात कीजिए।

हम अपने हृदय में आपका स्वागत करते हैं,

हमारे परिवारों एवं शहर में।

हम आपको धन्यवाद देते हैं क्योंकि आपने हमारे लिए तैयार किया है,

जीवन का भोजन एवं अपने राज्य में एक स्थान।

आपका मार्ग तैयार करने में हमें सक्रिय बना।

लोगों को आपके पास लाने हेतु, जो एक मार्ग हैं,

इस प्रकार हमारी गलियों में भाईचारा, न्याय एवं शांति ला सकें, आमेन।


(Usha Tirkey)

 

‘युखारिस्त स्वार्थी मनोभाव को दूर करता है’,संत पापा फ्राँसिस

In Church on June 4, 2018 at 2:38 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 4 जून 2018 (रेई) : ‘युखारिस्त हमारे स्वार्थी मनोभाव को दूर करता है और हमें पूरी तरह से येसु के साथ जोड़ता है। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने रविवार को ‘कॉर्पस क्रिस्टी के महापर्व’ अर्थात ‘येसु के पवित्र शरीर और लहू का महापर्व’ के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में हजारों की संख्या में एकत्रित तीर्थयात्रियों और विश्वासियों के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ करने के उपरांत कही।

संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि कॉर्पस क्रिस्टी का पर्व “मसीह की ओर आकर्षित होने और उसी में परिवर्तित हो जाने का रहस्य है।”

उन्होंने कहा, “मसीह के शरीर और रक्त से खुद को पोषित करके,” “हम उसमें एक हो जाते हैं और हम उसका प्यार प्राप्त करते हैं। उनका यह प्यार सिर्फ अपने में सीमित रखने के लिए नहीं, बल्कि इसे दूसरों के साथ साझा करने के लिए।”

मसीह में परिवर्तित हो जाना

संत पापा ने कहा कि ईश्वर से प्राप्त प्यार हमें उनकी योजना को दुनिया में प्रकट करने के लिए प्रेरित करता है।

येसु की उपस्थिति, , “हमारे स्वार्थी दृष्टिकोण को आग की तरह जला डालता है” और “येसु हमारे साथ मिलकर हमें अपने भाईयों और बहनों के लिए खुद को रोटी के समान तोड़ने की इच्छा को उजागर करते है।” कॉर्पस क्रिस्टी का त्यौहार “प्यार, धीरज और बलिदान की एक यथार्थ शिक्षा है, जिसे हम क्रूस पर कुर्बान येसु में पाते हैं।”

संत पापा ने कहा,  जो हाशिए पर जीवन यापन करते हैं और जो अकेले हैं उन्हें हम अपने साथ सम्मिलित करें उनका स्वागत करें। “युखारिस्त में जीवित येसु की उपस्थिति एक दरवाजे की तरह है जो मंदिर और सड़क के बीच, विश्वास और इतिहास के बीच, ईश्वर के शहर और मनुष्य के शहर के बीच खुली है।”

पवित्र युखारिस्त की शोभायात्रा

संत पापा फ्राँसिस ने कॉर्पस क्रिस्टी रविवार को विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में परंपरागत रूप से होने वाली कई युखारीस्तीय शोभायात्रा का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, “कॉर्पस क्रिस्टी इस तथ्य का एक स्पष्ट संकेत हैं कि येसु, जो मर गये, जी उठे  और आज भी इस दुनिया के मार्गों पर चलना जारी रखा है और वे हमारे साथ हैं और हमारा मार्ग मार्गदर्शन करते हैं।”

संत पापा ने कहा कि शाम को वे रोम स्थित ओस्तिया उपनगर में पवित्र युखारीस्त समारोह को अनुष्ठान करेंगे साथ ही कॉर्पस क्रिस्टी शोभा यात्रा का नेतृत्व करेंगे। ओस्तिया में “धन्य पापा पॉल VI ने 50 साल पहले कॉर्पस क्रिस्टी का महोत्सव मनाया था।”


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस ने निकारागुआ में शांति के लिए अपील की

In Church on June 4, 2018 at 2:37 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 4 जून 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने लैटिन अमेरिकी राष्ट्र में हुई हिंसा के लिए अपने दुख को व्यक्त करते हुए निकारागुआ में शांति के लिए अपील की जहाँ प्रदर्शनकारियों पर सरकारी कार्रवाई द्वारा कई लोगों की मौत हो गई।

संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 3 जून को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में विश्व के विभिन्न देशों से आये विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के साथ देवदूत की प्रार्थना का पाठ करने के उपरांत निकारागुआ में हुए हिंसा के लिए अपना “गहरा दुख” व्यक्त किया जिसमें मरने वालों की संख्या 110 हो गई और अनेकों घायल हुए।

निकारागुआ के धर्माध्यक्षों की चिंताओं में खुद को सम्मिलित करते हुए संत पापा ने सभी प्रकार की हिंसाओं का अंत करने की मांग करते हुए तथा पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए प्रार्थना की।

उन्होंने कहा कि कलीसिया हमेशा वार्ता के पक्ष में है लेकिन “स्वतंत्रता और सबसे ऊपर, जीवन के लिए सक्रिय वचनबद्धता की आवश्यकता है।”

राष्ट्रपति डैनियल ओर्टेगा द्वारा अप्रैल में पेंशन और सामाजिक सुरक्षा में कटौती के बाद निकारागुआ में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुआ है। इसे देख उन्होंने जल्दी ही कानून को रद्द कर दिया, लेकिन वे स्वयं विरोध प्रदर्शन का केंद्र बन गये।

गिरजाघर की घेराबंदी

शनिवार को, पुलिस ने मानागुआ राजधानी के करीब 20 किमी दक्षिण में मसाया में एक काथलिक गिरजाघर की घेराबंदी की जहाँ लगभग 30 विपक्षी समर्थकों ने शरण ली थी पुलिस और समर्थक सरकारी मिलिशिया ने उन पर हमला किया। जिससे दो लोगों की मौत गिरजाघऱ में हो गई। उसके बाद स्थानीय कलीसिया के अधिकारियों के हस्तक्षेप पर वहाँ छिपे लोगों को रिहा कर दिया गया।

 


(Margaret Sumita Minj)

रोम स्थित परमधर्मपीठीय लातेरन विश्वविद्यालय के रेक्टर की नियुक्ति

In Church on June 4, 2018 at 2:35 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार 4 जून 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने रोम स्थित परमधर्मपीठीय लातेरन विश्वविद्यालय के सिविल कानून के डॉक्टरेट विभाग के समन्वयक प्रोफेसर विंचेन्सो बुओनोमो को लातेरन विश्वविद्यालय का रेक्टर नियुक्त किया है।

प्रोफेसर बुओनोमो 1 जुलाई 2018 से अपने नये पद में काम करना शुरू कर देंगे।

प्रोफेसर विंसेन्जो बुओनोमो का जन्म 17 अप्रैल, 1961 को गाएता, इटली में हुआ। 1983 में परमधर्मपीठीय लातेरन विश्वविद्यालय में उटरोक ल्यूर  में डॉक्टर की पदवी हासिल की। उनहोंने राजनयिक करियर के लिए तैयारी के डिप्लोमा के साथ अंतर्राष्ट्रीय कानून में विशिष्टता हासिल की।

1984 में उन्होंने परमधर्मपीठीय लातेरन विश्वविद्यालय के सिविल लॉ के संकाय में पढ़ाना शुरू किया। उन्हें 2001 में परमधर्मपीठीय लातेरन विश्वविद्यालय के सिविल लॉ के ही संकाय में साधारण प्रोफेसर नियुक्त किया गया।

1983 से वे संयुक्त राष्ट्र के संगठनों खाद्य और कृषि (एफएओ, आईएफएडी पीएएम) के लिए सहयोगी और परमधर्मपीठ का प्रतिनिधित्व करते थे। 2007 में उन्हें कार्यालय का प्रमुख नियुक्त किया गया था।

2014 से वे वाटिकन राज्य के काउंसिलर हैं।


(Margaret Sumita Minj)

जर्मन लूथरन इवांजेलिकल कलीसिया के प्रतिनिधिमंडल को संत पापा का संबोधन

In Church on June 4, 2018 at 2:33 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 4 जून 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन में विश्व लूथरन फेडरेशन की जर्मन राष्ट्रीय कमेटी और जर्मनी के ईवाजेलिकल लूथरन कलीसिया के प्रतिनिधियों के साथ-साथ अन्य मेहमानों का गर्मजोशी से स्वागत किया और धर्माध्यक्ष उलरिक को उनके परिचय भाषण के लिए धन्यवाद दिया।

संत पापा ने कहा कि वे खुशी के साथ लुथरन सुधार की 500 वीं वर्षगांठ पर साझा किए गए क्षणों की याद करते हैं। उन्होंने कहा, “31 अक्टूबर 2016 को हम लुंड में मिले थे ताकि भाई-बहनों के रुप में अतीत के घावों को पाटने के लिए वार्ता का मार्ग अपना सकें। हमने देखा है कि इतिहास के पांच सौ साल – कभी-कभी बहुत दर्दनाक और संघर्षमय थे। हम ईश्वर को धन्यवाद देते हैं कि पिछले पचास वर्षों में, आपसी वार्तालाप के कारण हमारे बीच की दूरी कम हुई है। पवित्र आत्मा की सहायता से, मानव रणनीतियों की बजाय सुसमाचार के तर्क के आधार पर और आधिकारिक लूथरन-काथलिक वार्ता के माध्यम से, दोनों पक्षों के पुराने पूर्वाग्रहों को दूर करना संभव हो हुआ। हम उम्मीद करते हैं कि भविष्य में अलग-अलग मतभेदों को पूरी तरह दूर करने की कोशिश की जारी रहेगी।”

संत पापा ने कहा कि लुथरन सुधार की 500 वीं वर्षगांठ का सामुदायिक तौर पर एक साथ समारोह मनाना इस बात की पुष्टि है कि ख्रीस्तीय सार्वभौमिक एकता आज हमारे लिए एक इच्छा और आवश्यकता बन रही है। इसके लिए हमें प्रार्थना करना चाहिए, ताकि यह मानव परियोजनाएं न हो, परन्तु पवित्र आत्मा हमारा मार्गदर्शन करे। प्रेम की आत्मा हमें दया के मार्गों पर प्रशस्त करे। काथलिक और लूथरन के रूप में हम ख्रीस्तीय सच्चे दिल से “एक दूसरे” से प्यार करने के लिए बुलाये गये हैं। क्योंकि “हमारा जन्म नश्वर जीवन-तत्व से नहीं बल्कि ईश्वर के जीवंत एवं शास्वत वचन से हुआ है।” (1 पेत्रुस 1,22-23) हम जरूरतमंदों और सताए जाने वालों के दुखों को कम करने के लिए भी बुलाये गये हैं। येसु में विश्वास के कारण कष्ट सह रहे भाइयों की पीड़ा भी हमें एक साथ आने और संगठित रुप से एकता का प्रदर्शन करने का आह्वान करती है।

संत पापा ने कहा,“आइए, हम धार्मिक वार्तालाप को आगे बढ़ाते हुए जीवन यात्रा में एक-दूसरे का समर्थन करें। सार्वभौमिक वार्ता को आगे बढाना जारी रखना चाहिए : संदिग्ध मुद्दों के स्पस्टीकरण में केवल उत्साह से नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा से धैर्यपूर्वक आगे बढ़ना चाहिए। ख्रीस्तीय सार्वभौमिक एकता आज किसी को भी सर्वक्षेष्ठ नहीं मानती, लेकिन विश्वास में जितना संभव हो सभी भाइयों और बहनों को शामिल कर, प्रार्थना, प्यार और सुसमाचार की घोषणा करने वाले शिष्यों के समुदाय के रूप में आगे बढ़ें। पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन में सार्वभौमिक वार्ता हमें आगे बढ़ने में मदद करेगी,  प्रभु येसु मसीह को जानने और गहराई से प्यार करने में हमें मदद करेगी। क्योंकि “मसीह में ईश्वरीय तत्व की  परिपूर्णता अवतरित होकर निवास करता है”(कलो. 2: 9) और “ईश्वर ने चाहा कि उन में सब प्रकार की पूर्णता हो… उनके माध्यम से […] सबकुछ का अपने से मेल कराया।” (कलो.1:19-20)।

ईश्वर, हमारे साथ रहें, ताकि हम उनके मिशन को साहस के साथ मिलकर आगे बढ़ा सकें। पवित्र आत्मा की कृपा द्वारा विभिन्न आयामों और मतभेदों पर व्यापक विचार विमर्श कर एकजुट हो सकें। ईश्वर का आशीर्वाद हमपर बना रहे।


(Margaret Sumita Minj)

येसु ही हमारी शक्ति और सहारा हैं, संत पापा फ्राँसिस

In Church on June 4, 2018 at 2:31 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार 4 जून 2018 (रेई) : काथलिक कलीसिया ने इटली और अनेक देशों में रविवार 3 जून को ‘कॉर्पस क्रिस्टी के महापर्व’ अर्थात ‘येसु के पवित्र शरीर और लहू का महापर्व’ मनाया। इस अवसर पर संत पापा ने सभी काथलिकों को अपने दैनिक जीवन में रोटी के रुप में येसु की उपस्थिति का अनुभव करने की प्रेरणा दी।

संदेश में उन्होंने लिखा, “कॉर्पस क्रिस्टी के इस महापर्व’ में हम याद करें कि हमारे जीवन यात्रा में, जीवन की रोटी, येसु ख्रीस्त ही हमारी शक्ति और सहारा हैं।”

अपने विचारों को जारी रखते हुए संत पापा ने सोमवार 4 जून के ट्वीट में लिखा, हमारे भीतर जीवित मसीह की उपस्थिति वह प्रकाश है जो विकल्पों में हमारा मार्गदर्शन करती है, तथा वह लौ है जो ईश्वर से मिलने के लिए हमारे दिल को उजागर करती है।”


(Margaret Sumita Minj)

अस्पताल हड़ताल पर : झारखंड में 14 मरीजों की मौत

In Church on June 4, 2018 at 2:29 pm


रांची, सोमवार 4 जून 2018 (मैटर्स इंडिया) : झारखंड के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (आरआईएमएस) में एक नर्स पर हमला करने के बाद विरोध में अस्पताल के नर्सों और जूनियर डॉक्टर और कर्मचारियों ने हड़ताल किया। जिसकी वजह से पिछले 36 घंटों में, कम से कम 14 मरीजों की मौत हो गई।

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने 3 जून को आरआईएमएस की घटना पर हस्तक्षेप किया और मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी और स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रबंसी से नर्सों और जूनियर डॉक्टरों के साथ बातचीत करने के लिए कहा।

परेशानी तब शुरू हुई जब एक नर्स ने रोगी गीता देवी को इंजेक्शन दिया और कुछ देर बाद गीता देवी की मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु के बाद, 1 जून को गीता देवी के परिवार वालों ने वार्ड में झगड़ा किया और नर्स को पीट दिया था।

अगले दिन, अस्पताल के नर्स और जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल शुरु किया और अस्पताल में मरीजों के प्रवेश की इजाजत नहीं दी, जबकि पहले ही भर्ती कराए गए मरीजों को दवा और उपचार नहीं दिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप 14 मरीजों की मौत हो गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर किसी को विरोध करने का अधिकार था लेकिन संस्थान में अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 2 और 3 जून को 2,000 से अधिक ओपीडी मरीज बिना उपचार के वापस लौट गये, जबकि आरआईएमएस में भर्ती कई मरीजों के परिवार के सदस्यों ने उन्हें अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया।

3 जून दोपहर को स्वास्थ्य मंत्री चंद्रबंसी और मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी बातचीत के लिए आरआईएमएस पहुंचे, जिसके बाद हड़ताल को बंद कर दिया गया।


(Margaret Sumita Minj)

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