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ज्वालामुखी विस्फोट के शिकार लोगों के प्रति संत पापा की सहानुभूति

In Church on June 5, 2018 at 3:47 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 5 जून 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने ग्वाटेमाला में 3 जून को हुए ज्वालामुखी विस्फोट के शिकार लोगों के प्रति गहन संवेदना प्रकट की।

ग्वाटेमाला की राजधानी से करीब 40 किलोमीटर दूर फ्यूएगो ज्वालामुखी में 3 जून को विस्फोट हुआ था जिसकी चपेट में आकर 62 लोगों की मौत हुई है।

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन ने ग्वाटेमाला के प्रेरितिक राजदूत मोनसिन्योर निकोलास थेवेनिन को, संत पापा की ओर से एक संदेश प्रेषित कर कहा, “ज्वालामुखी विस्फोट की खबर सुन संत पापा अत्यन्त दुःखी हैं जिसने उस क्षेत्र के कई लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है तथा संसाधनों को क्षतिग्रस्त कर दिया है।” कार्डिनल ने कहा कि संत पापा मृतकों की आत्माओं की अनन्त शांति एवं इस प्राकृतिक आपदा से पीड़ित लोगों के स्वस्थ्यलाभ के लिए प्रार्थना करते हैं।

उन्होंने कहा कि संत पापा वहाँ के सभी लोगों पर एकात्मता, आध्यात्मिक शांति एवं ख्रीस्तीय आशा की कामना करते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

बीबीसी के अनुसार, ज्वालामुखी के फटने पर लाल-गर्म चट्टानों और गैस का मिश्रण, जिसे पायरोक्लास्टिक फ्लो भी कहा जाता है, पहाड़ से निकलकर बहता हुआ आस-पास के इलाकों में फैल गया, जिसे घरों में बैठे कई लोग इसमें जलकर मारे गए। सैंकड़ों लोग घायल भी हुए हैं और कई अब भी लापता हैं।

प्रभावित इलाकों के लोग अपने-अपने घरों को छोड़कर अस्थाई राहत शिविरों में शरण ले रहे हैं।

इससे पहले फरवरी में भी एक विस्फोट हुआ था, जिसमें निकली राख आसमान में 1.7 किलोमीटर ऊपर तक गई थी. लेकिन इस बार हुए ज्वालामुखी विस्फोट में राख बहुत ज़्यादा निकली।


(Usha Tirkey)

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पत्रकार, सच्चाई की सेवा करें, आशा जगायें एवं सुदूर इलाकों की उपेक्षा न करें

In Church on June 5, 2018 at 3:42 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 5 जून 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 4 जून को इटली के अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार “ब्याचो अग्नेस” के प्रतिनिधियों से वाटिकन के क्लेमेंटीन सभागार में मुलाकात की तथा उनसे अपील की कि पत्रकारिता सच्चाई की सेवा और आशा जगाने के लिए होना चाहिए न कि सुदूर इलाकों को अनदेखा करने के लिए।

इटली के सोरेंतो में 22 से 24 जून तक आयोजित होने वाले पुरस्कार समारोह के पूर्व, संत पापा फ्राँसिस ने ब्याजो अग्नेस के प्रतिनिधियों से कहा कि “डिजिटल अभिसरण” एवं “मीडिया परिवर्तन” के युग में उनके कार्यों का बड़ा महत्व है। उन्होंने फाऊँडेशन से अपील की कि वे नई पीढ़ी को शिक्षित करना जारी रखें और उनसे आग्रह किया कि वे अपने इस कार्य के लिए सुदूर इलाकों, सच्चाई एवं आशा को ध्यान में रखें।

सुदूर इलाके

संत पापा ने कहा, “यद्यपि समाचार उत्पादन का तंत्रिका केंद्र विकसित क्षेत्रों में पाया जाता है किन्तु व्यक्ति को उन लोगों की कहानियों को भी नहीं भूलना चाहिए जो सुदूर इलाकों में जीते हैं। कई बार वे पीड़ा एवं दयनीय स्थिति के कारण कहानी बनते, तो कई बार उदारता के कारण जो सभी लोगों को सच्चाई को एक नवीकृत स्थिति में देखने में मदद देते हैं।”

सच्चाई

संत पापा ने कहा कि एक पत्रकार को मात्र अपनी रूचि एवं विचारधारओं के लिए विरोध की मानसिकता में पड़ने से बचने हेतु तैयार करना चाहिए। आज के विश्व में, यह बहुत आवश्यक है कि किसी व्यक्ति, समूह अथवा प्रतिनिधिमंडल को चोट देने की अपेक्षा, उनका सामना करने एवं शांत रहने के लिए, गहराई से खोज की जाए। यह कठिन पेशा है किन्तु यह हमें साहसी एवं नबी बनने में मदद देता है।

आशा

संत पापा ने कहा कि किसी घटना का वर्णन अपने स्वतंत्र एवं प्रबुद्ध जिम्मेदारी से कर के संतुष्ट नहीं हो जाना चाहिए किन्तु पतन और निराशा की स्थितियों की निंदा करते हुए उन्हें उन क्षेत्रों में आशा उत्पन्न करना चाहिए।

संत पापा ने ब्याजो अग्नेस फाऊँडेशन की योजनाओं की सराहन की जिसका उद्देश्य है, वेब पर “इसे स्वयं करें” जानकारी और वेब पर अस्पष्ट समाचार के प्रसार का विरोध कर सही जानकारियों द्वारा चिकित्सा-वैज्ञानिक विषयों की जांच करना जो जनता का ध्यान विज्ञान की ओर अधिक आकर्षित करता है।


(Usha Tirkey)

कार्डिनल ब्रावो के निधन पर संत पापा का शोक संदेश

In Church on June 5, 2018 at 3:40 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 5 जून 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने कार्डिनल मिग्वेल ओबान्दो ब्रावो के निधन पर गहन शोक व्यक्त करते हुए उनके बहुमूल्य सेवाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

कार्डिनल का निधन रविवार 3 जून को हुआ, वे 92 वर्ष के थे।

निकारागुवा में मनाग्वा के ससम्मान सेवानिवृत कार्डिनल मिग्वेल ओबोन्दो ब्रावो एस. डी. वी. के निधन पर, 4 जून को संत पापा ने मनाग्वा महाधर्मप्रांत को एक तार संदेश प्रेषित कर अपनी हार्दिक संवेदना प्रकट की।

संत पापा ने कार्डिनल ब्रावो के उदार निष्ठा की याद की तथा कहा कि उन्होंने अपना जीवन ईश्वर एवं कलीसिया की सेवा के लिए अर्पित किया। उन्होंने उनके लिए प्रार्थना करते हुए कहा, “मैं उनकी आत्मा की अनन्त शांति हेतु प्रार्थना करता हूँ जिससे प्रभु येसु उन्हें अनन्त महिमा का मुकुट प्रदान करें।”

कार्डिनल ब्रावो के निधन के साथ ही कार्डिनलों की कुल संख्या 212 हो गयी है जिनमें से 115 कार्डिनल, संत पापा के चुनाव में भाग ले सकते हैं जबकि 97 कार्डिनल चुनाव में भाग नहीं ले सकते।

कार्डिनल मिग्वेल ओबान्दो ब्रावो एस. डी. वी. का जन्म 2 फरवरी 1926 को निकारागुवा के जुईगालपा धर्मप्रांत में हुआ था। उनका पुरोहिताभिषेक 10 अगस्त 1958 को हुआ था तथा धर्माध्यक्षीय अभिषेक 31 मार्च 1968 को सम्पन्न हुआ था। वे 16 फरवरी 1970 को मनाग्वा के महाधर्माध्यक्ष नियुक्त किये गये थे। संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने 25 मई 1985 में उन्हें कार्डिनल घोषित किया था।


(Usha Tirkey)

7 जून को जागरण प्रार्थना का आयोजन

In Church on June 5, 2018 at 3:38 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 5 जून 2018 (रेई)˸ इताली काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल बास्सेत्ती ने 7 जून को रोम समयानुसार संध्या 6.15 बजे, रोम के त्रास्तेवेरे स्थित संत मरिया महागिरजाघर में इटली के लिए जागरण प्रार्थना का आह्वान किया है।

कार्डिनल ने 5 जून को एक प्रेस विज्ञाप्ति जारी कर कहा, “विगत कुछ महीनों में 4 चुनावों के बाद इटली में कई सामाजिक एवं नागरिक जिम्मेदारियों को लेकर विभिन्न अवसरों को खोने के कारण, राजनीतिक तनाव और विरोध से अस्थिरता की स्थिति आ गयी है।”

सार्वजनिक भलाई एवं आबादी के कमजोर विभागों की रक्षा के मद्देनजर, एक ख्रीस्तीय के रूप में और साथ ही साथ, देश के नागरिक होने के नाते, विश्व के लिए संस्कृति, मानवीय सहानुभूति, एकात्मता और शांति हेतु प्रतिबद्धता बहुत अधिक मायने रखता है अतः हम आप सभी को निमंत्रण देते हैं कि आप बृहस्पतिवार 7 जून को संध्या 6.15 बजे रोम के त्रस्तेवेरे स्थित संत मरिया महागिरजाघर में, इताली काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल गुवालतियेरो बास्सेत्ती के मार्गदर्शन में “इटली के लिए जागरण प्रार्थना” में भाग लें।


(Usha Tirkey)

अंतर-ख्रीस्तीय विवाह में परमप्रसाद ग्रहण करने के प्रस्ताव को संत पापा की अस्वीकृति

In Church on June 5, 2018 at 3:36 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 5 जून 2018 (सी एन ए)˸ अंतर-ख्रीस्तीय विवाह में कुछ निश्चित परिस्थितियों में दम्पतियों को परमप्रसाद ग्रहण करने के प्रस्ताव पर विचार करने हेतु वाटिकन एवं जर्मन प्रतिनिधियों के मुलाकात एवं उसके लिए अनुमति की मांग को संत पापा फ्राँसिस ने अस्वीकार कर दिया है।

25 मई को म्यूनिक के महाधर्माध्यक्ष एवं जर्मन काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल रेनहार्ड मार्क्स को सम्बोधित पत्र में, विश्वास एवं धर्म सिद्धांत के लिए बनी परमधर्मपीठीय परिषद के अध्यक्ष कार्डिनल लुइस लादारिया एस. जे. ने कहा  कि जर्मनी का प्रस्ताव “कई महत्वपूर्ण समस्याओं की श्रृंखला खड़ा करता है।”

पत्र का प्रकाशन 4 जून को वाटिकन पत्रकार सांदरो मजिस्टर द्वारा किया गया था। पत्र की आधिकारिकता की पुष्टि वाटिकन प्रेस कार्यालय द्वारा दी गयी थी जिसे जर्मन प्रतिनिधियों को भी प्रेषित किया गया था जिन्होंने इस विषय पर 3 मई को जर्मन धर्माध्यक्षों एवं वाटिकन अधिकारियों की एक सभा में भाग लिया था।

कार्डिनल लुइस लादारिया ने कहा कि 3 मई की चर्चा के प्रकाश में संत पापा फ्राँसिस से बात-चीत के बाद, संत पापा “इस निष्कर्ष पर आये कि दस्तावेज प्रकाशित होने के लिए पर्याप्त परिपक्व नहीं है” तथा उन्होंने निर्णय के तीन मुख्य कारणों का हवाला दिया।

लादारिया ने जोर दिया है कि अंतर-ख्रीस्तीय विवाहों में प्रोटेस्टेंट दम्पतियों को परमप्रसाद दिया जाना “एक ऐसा मामला है जो कलीसिया के विश्वास को छूता है तथा विश्वव्यापी कलीसिया के लिए प्रासंगिक है।” एक गैरख्रीस्तीय को यूखरिस्त ग्रहण करने की अनुमति देना, चाहे वह कोई निश्चित परिस्थिति ही क्यों न हो, इसका प्रभाव अन्य कलीसियाओं के साथ ख्रीस्तीय एकता संबंधों एवं कलीसियाई समुदायों पर पड़ेगा, जिसे कम करके आंका नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा है कि यूखरिस्त का सवाल कलीसिया के कानून का मामला है तथा कलीसिया के नियम संख्या 844 का हवाला दिया जो काथलिक कलीसिया के संस्कारों को ग्रहण करने से संबंधित है, खासकर, कलीसिया के नियम संख्या 844 जिसमें काथलिक अनुष्ठाता केवल ख्रीस्तीय विश्वासियों के काथलिक सदस्य को ही वैध रूप से संस्कार दे सकता है और काथलिक सदस्य ही वैध रूप से संस्कार ग्रहण कर सकता है। इसके अलावा बाकी सभी को कलीसियाई कानून बाहर कर देता है।

यह विकल्प, उन गैर-काथलिक ख्रीस्तीयों को मेल-मिलाप संस्कार, यूखरिस्त संस्कार एवं रोगियों के संस्कारों में भाग लेने और गैर-काथलिक अनुष्ठाता द्वारा इन संस्कारों को ग्रहण करने की अनुमति देता है जिन कलीसियाओं में इन संस्कारों को मान्यता दी जाती है।

कालीसिया के नियम में कहा गया है कि काथलिक अनुष्ठाता पूर्वी कलीसियओं के उन सदस्यों पर भी वैध रूप से संस्कारों का अनुष्ठान कर सकता है जो रोम के साथ पूर्ण एकता में नहीं हैं किन्तु अपनी सहमति पर ऐसा चाहते हैं और उचित तरीके से तैयार हैं।


(Usha Tirkey)

पर्यावरण के लिए ईश्वर के प्रति आभार

In Church on June 5, 2018 at 3:34 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 5 जून 2018 (रेई)˸ जब हम प्रकृति की हरियाली छटा, सुन्दर फूलों, आकाश में उड़ते पक्षियों, पानी में तैरते मछलियों एवं धरती पर विभिन्न प्रकार के जीव-जन्तुओं और सबसे बढ़कर प्रशन्नचित मनुष्यों को देखते हैं, तब मन प्रसन्न हो उठता है। हम इस पृथ्वी पर अपनी हर आवश्यकताएँ प्राप्त कर सकते हैं किन्तु क्या आपने कभी सोचा है कि ईश्वर ने इसकी सृष्टि क्यों की हैं? उन्होंने इसकी सृष्टि इसलिए की है क्योंकि वे हमें बहुत अधिक प्यार करते हैं और हमारी खुशी के लिए सब कुछ मुप्त में प्रदान करना चाहते थे। यह हम पर निर्भर करता है कि हम उनके प्रति कितने आभारी हैं और उन कीमती उपहारों को किस तरह लेना चाहते हैं।

संत पापा ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर एक ट्वीट प्रेषित कर प्रभु से प्रार्थना की, “प्रभु, हमारी पृथ्वी एवं उन सभी के लिए जिनकी सृष्टि तूने की है हममें प्रशंसा एवं आभार की भावना जागृत कर।”


(Usha Tirkey)

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